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महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का विमान क्रैश, बारामती में लैंडिंग के वक्त दुर्घटना

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महाराष्ट्र के बारामती में बड़ा विमान हादसा हो गया है। जिसमें उप मुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया। इस हादसे में चार अन्य लोगों की भी जान चली गई।

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार की आज (28 जनवरी) बारामती में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के लिए 5-6 मीटिंग थीं। बताया जा रहा है कि अजित पवार का प्लेन तब क्रैश हुआ जब वह इन मीटिंग के लिए जा रहे थे। निजी विमान एयरपोर्ट पर उतरते समय क्रैश हुआ है।

प्लेन क्रैश के बाद के विजुल्स में देखा जा सकता है कि प्लेन के परखच्चे उड़ गए और चारों तरफ धुआं-धुआं नजर आ रहा है। तस्वीरों में देखकर लग रहा है कि इस विमान में सवार कोई यात्री शायद ही जिंदा बचा हो। हादसे की जगह से भयावह विजुअल्स सामने आए हैं, जिसमें चारों तरफ धुआं-धुआं नजर आ रहा है।

अजित पवार बारामती से विधायक रहे हैं और यहां की जनता हमेशा उन्हें जिताती आई है। बारामती के लोगों को अजित पवार से खासा लगाव रहा है। वे इस बात का इंतजार कर रहे थे कि आज अजित दादा जनता को संबोधित करेंगे और उनसे बातचीत करेंगे, लेकिन बारामती एयरपोर्ट पहुंचने से पहले ही उनका प्लेन क्रैश हो गया और उसमें सवार सभी लोगों की जान चली गई।

*इतिहास का बदला लेना होगा...', ऐसा क्यों बोले अजीत डोभाल

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दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने युवाओं को संबोधित का। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल ने युवाओं से खास अपील की है। उन्होंने युवाओं को इतिहास से सीखने और एक मजबूत भारत के निर्माण का आग्रह किया है।

डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि 'मेरा कार्यक्षेत्र अलग है, मेरा अनुभव अलग है, और युवाओं के साथ उम्र का बहुत बड़ा अंतर है। आपमें से अधिकांश मुझसे 60 वर्ष से अधिक छोटे हैं, इसलिए मैं थोड़ा असमंजस में था कि आऊं या नहीं। मेरा जन्म स्वतंत्र भारत में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता-पूर्व भारत में हुआ था। मेरी जवानी तो कब की बीत चुकी है।'

भारत विकसित होगा, यह निश्चित है-जोभाल

अजीत डोभाल ने कहा, 'आज इतना कुछ बदल गया है कि मुझे सब कुछ पता नहीं है। लेकिन एक बात समान है, चाहे आप इसे महसूस करें या न करें - एक छोटी सी बात जो आपके जीवन की दिशा तय करती है: निर्णय लेने की क्षमता। आप सभी हर दिन छोटे-बड़े फैसले लेते हैं, और जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ेगी, आपको हर कदम पर फैसले लेने होंगे। भारत विकसित होगा, यह निश्चित है।'

युवाओं को इतिहास से प्रेरणा लेने की अपील

यंग लीडर्स डायलॉग में एनएसए ने कहा कि भारत को आजादी बहुत मुश्किल से मिली है। हमारे पूर्वजों ने बहुत कष्ट सहे, अपमान झेला और बहुत कुछ खोया। डोभाल ने युवाओं से कहा कि वे इतिहास से प्रेरणा लें और अपने देश को फिर से मजबूत बनाएं। यह भारत अपने मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों पर आधारित होना चाहिए।

‘बदला' एक शक्तिशाली ताकत- डोभाल

डोभाल ने कहा, 'यह इतिहास हमें चुनौती देता है कि हर युवा के भीतर आग होनी चाहिए। ‘बदला' शब्द आदर्श नहीं है, लेकिन ‘बदला' एक शक्तिशाली ताकत है। हमें अपने इतिहास का ‘बदला' लेना होगा और भारत को उसके अधिकारों, विचारों और विश्वासों के आधार पर फिर महान बनाना होगा।'

हमने किसी के मंदिर नहीं तोड़े- डोभाल

एनएसए ने कहा, हमारी सभ्यता बहुत विकसित थी। हमने किसी के मंदिर नहीं तोड़े। हम कहीं लूटने नहीं गए। हमने किसी दूसरे देश या लोगों पर हमला नहीं किया, जबकि बाकी दुनिया बहुत पिछड़ी हुई थी। लेकिन हम अपनी सुरक्षा और खुद को लेकर आने वाले खतरों को समझने में नाकाम रहे। इतिहास ने हमें सबक सिखाया जब हम इन खतरों के प्रति उदासीन रहे। क्या हमने वह सबक सीखा? क्या हम उस सबक को याद रखेंगे? अगर आने वाली पीढ़ियां उस सबक को भूल गईं, तो यह इस देश के लिए सबसे बड़ा दुर्भाग्य होगा।

*Mohun Bagan crowned champions of Ambar Roy U-13 meet*

Sports 

 

 Khabar kolkata sports Desk: Mohun Bagan AC outclassed Mainland Sambaran Cricket Academy by 43 runs in the summit clash on Monday to emerge champions of Ambar Roy Sub Junior Under-13 One-Day tournament.

The young cricketers received a big confidence boost as India legend Sourav Ganguly made his presence felt at the 22 Yards Sports Ground to motivate and inspire the players from both the teams.  

Batting first, Mohun Bagan posted 211/7 in 45 overs. Subarna Dey (66) and Aritra Pal (40 not out) impressed with the bat. Aranya Sarkar and Souvagya Das bagged 2 wickets each.

In reply, Mainland Sambaran Cricket Academy fell short, scoring 168/8 in 45 overs. Sk Atif Arman scored 44. Ajit Yadav was the pick of the Mohun Bagan bowlers bagging 2 for 18.

 Pic Courtesy by: CAB

मुस्लिम भाइयों को जो आंख दिखाएगा उसे छोड़ेंगे नहीं”, औरंगजेब विवाद के बीच अजित पवार का बड़ा बयान

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महाराष्ट्र में औरंगजेब को लेकर माहौल गर्म है। औरंगजेब को लेकर जारी विवाद के कारण नागपुर में 17 मार्च हिंसा भड़क गई। इस बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने इफ्तार पार्टी का आयोजन किया। इस इफ्तार पार्टी में अजीत पवार ने मुसलमानों को लेकर बड़ा बयान दिया है। अजित पवार ने मुस्लिम समुदाय को सुरक्षा का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है हमने अभी होली मनाई है, गुड़ी पड़वा और ईद आने वाली है, ये सभी त्यौहार हमें एक साथ मिलकर मनाने हैं क्योंकि एकता ही हमारी असली ताकत है।

पार्टी की ओर से मुंबई के इस्लाम जिमखाना में शुक्रवार को दी गई इफ्तार पार्टी के दौरान अजित पवार ने मुसलमानों के साथ एकजुटता दिखाते हुए कहा, मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि आपका भाई अजित पवार आपके साथ है। कहा- जो भी मुस्लिम भाइयों को आंख दिखाएगा, दो समूहों के बीच संघर्ष भड़काकर कानून व्यवस्था को बाधित करेगा और कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करेगा। वह चाहे कोई भी हो, उसे किसी भी हालत में बख्शा या माफ नहीं किया जाएगा।

अजित पवार ने बताया रमजान का महत्व

पवार ने ये भी कहा- रमजान सिर्फ एक धर्म तक सीमित नहीं है। यह हमें एकता और भाईचारे का संदेश देता है। भारत विविधता में एकता का प्रतीक है। छत्रपति शिवाजी महाराज, बाबा साहब अंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले और शाहू जी महाराज ने जातियों को एकसाथ लाकर समाज के उत्थान का मार्ग दिखाया। हमें इस विरासत को आगे बढ़ाना है।

नागपुर हिंसा में अब तक 105 गिरफ्तार

अजित पवार का ये बयान उस वक्त आया है जब महाराष्ट्र में औरंगजेब को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। हिंदू संगठनों ने मुगल शासक औरंगजेब की कब्र को गिराने की मांग कर रहे हैं। इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब नागपुर, जो आरएसएस का मुख्यालय है, वहां चिटनिस पार्क, महल क्षेत्र में दो समूहों के बीच झड़प हो गई। यह हिंसा कुछ धार्मिक चीज़ों को जलाने की कथित घटना के बाद हुई। इस मामले में शुक्रवार को 14 लोगों को अरेस्ट भी किया गया है। अब तक इस मामले में पकड़े गए लोगों की कुल संख्या 105 हो गई है। हिंसा मामले में 10 किशोर भी हिरासत में लिए गए हैं। 3 नई एफआईआर भी दर्ज की गई हैं।

अजीत डोभाल और तुलसी गबार्ड के बीच हुई अहम बैठक, कनाडाई और ब्रिटेन के एनएसए से भी हुई बात

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अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड भारत आई हैं। तुलसी गबार्ड ने भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ अहम बैठक की। इसके अवाला उन्होंने अजीत डोभाल की अध्यक्षता में होने वाली एक महत्वपूर्ण सुरक्षा और खुफिया समिट में हिस्सा लिया। यह सम्मेलन आतंकवाद का मुकाबला करने और खुफिया जानकारी साझा करने में सहयोग बढ़ाने के लिए है।गबार्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद भारत आने वाली पहली उच्च-स्तरीय अधिकारी हैं। बता दें कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी अगले महीने भारत आ सकते हैं।

तुलसी गबार्ड तीन दिवसीय दौरे पर भारत आई हैं। तुलसी गैबर्ड रविवार को दिल्ली पहुंचीं।अजीत डोभाल ने अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड के साथ रविवार को द्विपक्षीय वार्ता की और दुनिया भर के शीर्ष खुफिया अधिकारियों के एक सम्मेलन की अध्यक्षता की। सम्मेलन में आतंकवाद और उभरती प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न खतरों सहित विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की गई। ऐसा माना जा रहा है कि डोभाल और गबार्ड ने वार्ता के दौरान मुख्य रूप से खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र को मजबूत बनाने और भारत-अमेरिका की वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के साथ सुरक्षा क्षेत्र में मिलकर काम करने के तरीकों पर चर्चा की।

वैश्विक खुफिया सम्मेलन, बंद कमरे में चर्चा

इससे पहले डोभाल ने शीर्ष वैश्विक खुफिया अधिकारियों के सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस में आतंकवाद और उभरती तकनीक से उत्पन्न खतरों सहित विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। सम्मेलन में कनाडाई खुफिया प्रमुख डैनियल रोजर्स और ब्रिटेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जोनाथन पॉवेल भी शामिल थे। बंद कमरे में हुई इस वार्ता पर कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है। माना जा रहा है कि खुफिया और सुरक्षा विभागों के शीर्ष अधिकारियों ने आतंकवाद और उभरती प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने व आपसी सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया है।

तुलसी गबार्ड का दौरा क्यों अहम?

तुलसी की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता, हमास-इजरायल युद्ध और पाकिस्तान में बलूच लड़ाकों के विद्रोह और आंतकी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप सरकार बनने के बाद उनकी टीम के किसी शीर्ष अधिकारी की यह भारत की पहली उच्चस्तरीय यात्रा है। इसके बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस दौरे पर आ सकते हैं।तुलसी भारत के अलावा जापान, होनोलुलू, थाईलैंड और कुछ समय के लिए फ्रांस भी जाएंगी।डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में शामिल होने के बाद गबार्ड की यह दूसरी विदेश यात्रा है। इससे पहले वो जर्मनी गई थीं, जहां उन्होंने म्यूनिक सेक्युरिटी कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था।

रायसीना डायलॉग में लेंगी हिस्सा

गबार्ड मंगलवार को रायसीना डायलॉग में भी हिस्सा लेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुलसी गबार्ड को रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए न्योता दिया था। 18 मार्च को वो इसमें शिरकत करेंगी। इस सम्मेलन में गबार्ड भारत और अन्य देशों के अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगी। बता दें, रायसीना डायलॉग ऐसा मंच है, जहां जियोपॉलिटिक्स, जियोइकोनॉमिक्स से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की जाती है।

पीएम मोदी से भी मुलाकात संभल

गबार्ड के अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी से भी मुलाकात करने की संभावना है।पीएम मोदी पिछले महीने अपनी वाशिंगटन यात्रा के दौरान गैबर्ड से मिले थे। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई थी।गैबर्ड की यह यात्रा दोनों देशों के बीच सुरक्षा और खुफिया सहयोग को और गहरा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

धर्म से जुड़े विवादों का कैसे होगा निपटारा? एनएसए अजीत डोभाल ने बताया

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रविवार 2 फरवरी को दिल्ली में आयोजित हो रहे पुस्तक मेले में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने तुर्की-अमेरिकी विद्वान अहमद टी कुरु की पुस्तक 'इस्लाम, ऑथरिटेरियनिस्म एंड अंडर डेवलपमेंट' को लॉन्च किया। इस दौरान अजीत डोभाल ने मेले में धार्मिक पहचान से जुड़े विवादों पर बातचीत की। एनएसए ने कहा कि धार्मिक पहचान से जुड़े विवादों से बचने के लिए विचारों का स्वतंत्र प्रवाह महत्वपूर्ण है। संघर्ष समाधान पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों और समाजों द्वारा ‘‘आत्मनिरीक्षण'' हमेशा महत्वपूर्ण रहा है।

अजीत डोभाल ने कहा देश और धर्म के बीच संबंधों की घटना इस्लाम के लिए नई बात नहीं है. कुरु की किताब में जैसे बताया गया है कि इस्लाम के इतिहास में अलग-अलग कई स्टेज आए, जिसमें देश और धर्म के बीच रिश्ते कई दफा बदले, घटे और बढ़े क्योंकि अब्बासिद राजवंश के शासन में देश और धर्मगुरु की भूमिका पर स्पष्टता थी। पादरी वर्ग की भूमिका क्या है और राज्य की भूमिका क्या है, इसकी समझ बिल्कुल साफ थी। हिंदू धर्म में भी यह बात रही है और मुझे नहीं लगता कि आने वाले समय में शायद इसमें कोई भिन्नता हो।

विवादों से बचने के लिए विचारों का स्वतंत्र प्रवाह बहुत जरूरी-डोभाल

डोभाल ने कहा कि संघर्ष किसी भी विचारधारा या किसी भी देश के अस्तित्व में अंतर्निहित होते हैं। विचार और विचारधारा में प्रतिस्पर्धी होना बहुत जरूरी है। अगर यह प्रतिस्पर्धी नहीं है, तो फिर यह नहीं है या फिर सर्वमान्य है। हम संघर्षों का हल कैसे करते हैं, ये महत्वपूर्ण है। समाज की मानसिकता क्या है, इसको भी समझना बहुत जरूरी है। विवादों से बचने के लिए विचारों का स्वतंत्र प्रवाह बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहला संघर्ष खुद से खुद के बीच है। आपकी मान्यताओं, विचारों, आवश्यकताओं, आकांक्षाओं के बीच संघर्ष है। यहां तक कि दूसरे इंसानों, भगवान और समाज के साथ भी संघर्ष है। आपके खुद एक से अधिक विचार हो सकते हैं और कभी-कभी आप खुद इसे सोचते भी होंगे।

प्रिंटिंग प्रेस के विरोध का किया जिक्र

हिंदू धर्म का जिक्र करते हुए एनएसए ने कहा कि हिंदू धर्म में लड़ाई-झगडों को शास्त्रार्थ और मेडिटेशन के जरिए सुलझाया जाता था। वहीं जो पीढ़ियां लीक से हटकर नहीं सोच पाईं वे स्थिर हो गईं। एनएसए अजीत डोभाल ने प्रिंटिंग प्रेस का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रिंटिंग प्रेस को अपनाने के लिए इमाम वर्ग की ओर से काफी विरोध हुआ था। उन्होंने सोचा था कि इसके आने से इस्लाम के वास्तविक अर्थ की सही ढंग से या उनकी मान्यता के हिसाब से व्याख्या नहीं हो पाएगी।

आत्मनिरीक्षण को बताया महत्वपूर्ण

एनएसए डोभाल ने कहा कि राज्यों और समाजों द्वारा आत्मनिरीक्षण बहुत महत्वपूर्ण है। धर्म या राज्य के प्रति निष्ठा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। हमें अपने दिमाग को कैद नहीं होने देना चाहिए। अगर आप आत्मनिरीक्षण नहीं करते हैं तो आप समय और दिशा खो देते हैं। अगर बहुत देर से किया तो आप पिछड़ जाते हैं। किसी भी विचार या विचारधारा को प्रतिस्पर्धी होना चाहिए, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि हम समाज की ऐसी परस्पर विरोधी मानसिकताओं का समाधान कैसे करते हैं।

*India's T20 team announced, Shami will wear India's jersey after 431 days, return home to Eden*

Sports

Khabar kolkata sports Desk: India will play the first T20 against England on January 22. That game will be at Eden Gardens in Kolkata. Shami can be seen in the first eleven there. Shami returned to domestic cricket after recovering from injury. He played Ranji, Syed Mushtaq Ali T20 and Vijay Hazare Trophy for Bengal. This time he returned to India's T20 team.

Shamir has no more problems with fitness. One of the best fast bowlers in the country is ready to take the field in international cricket. Due to fitness issues, Shami was eventually unable to travel to Australia to play the Border-Gaoskar Trophy. Despite recovering from an ankle injury and playing for Bengal in various domestic competitions including the Ranji Trophy, he had fitness issues. He was not in a condition to take the pressure of playing a five-day match. Apart from that, he got a slight knee injury while playing for Bengal. So finally the Indian Cricket Board (BCCI) decided not to send Shami to Australia. The board bosses and the national selectors wanted Shami fresh in time for the upcoming Champions Trophy without rushing. Ajit Agarkar was relieved that Shami had been cleared by the NCA before the team was announced for the tournament. So he has been included in England series team.

क्या साथ आएंगे शरद पवार-अजित पवार, क्यों जागीं उम्मीदें?

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महाराष्ट्र की सियासत में चाचा भतीजे की जोड़ी खूब चर्चा में रहती है। एक बार फिर पवार फैमिली को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। महाराष्ट्र की राजनीति में वैसे भी असंभावनाओं से भरी रही है। इस बीच शरद पवार और अजित पवार में सुलह की भी संभावना जताई जा रही है। अब सवाल है कि क्या शरद पवार और अजित पवार क्या साथ आएंगे?

अजित पवार की मां की क्या है आशा

दरअसल, एनसीपी चीफ और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की मां आशताबाई की इच्छा तो कुछ ऐसी ही है. अजित पवार की मां आशताबाई ने अपने बेटे अजित और अपने देवर शरद पवार के फिर से एक होने की इच्छा जताई है। उन्होंने नए साल के मौके पर बुधवार को विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद पंढरपुर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैंने कामना की है कि पवार परिवार के भीतर मतभेद जल्द से जल्द खत्म हो जाएं। मुझे उम्मीद है कि पांडुरंग मेरी प्रार्थना जरूर सुनेंगे।’

अजित पवार की मां की की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब 2023 में एनसीपी और परिवार में विभाजन के बाद चाचा और भतीजे के बीच सुलह की अटकलें लगातार लगाई जा रही हैं।

प्रफुल्ल पटेल ने क्या कहा

इसके साथ ही एनसीपी अजित गुट के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने एनसीपी एसपी प्रमुख शरद पवार को अपना देवता बताया है। उनके इस कथन ने महाराष्ट्र की सियासी हलचल तेज कर दी है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक एनसीपी अजित गुट के दिग्गज नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा, "शरद पवार हमारे देवता हैं। हम उनका बहुत सम्मान करते हैं। अगर पवार परिवार एक साथ आता है, तो हमें बेहद खुशी होगी। मैं खुद को पवार परिवार का सदस्य मानता हूं।"

कई लोग चाहते हैं एक साथ आएं चाचा- भतीजे

प्रफुल्ल पटेल के अलावा एनसीपी विधायक नरहरि झिरवाल ने भी यही बात दोहराते हुए कहा, "शरद पवार साहब को छोड़कर जाना अजीब लगा। कई लोग ऐसा ही महसूस करते हैं। अब मैं उनके पास जाऊंगा और उनसे (अजीत पवार से) एक साथ आने का आग्रह करूंगा। शरद पवार समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के लिए लगातार काम कर रहे हैं।"

क्यों अहम है दोनों का साथ आना?

महाराष्ट्र की सियासत में पवार फैमिली का दबदबा रहा है। हालांकि, जब से एनसीपी में टूट हुई है, तब से शरद पवार की चमक फिकी ही पड़ी है। अजित पवार और शरद पवार के बीच सुलह की अपील महाराष्ट्र की सियासत में पवार फैमिली के प्रभाव को दर्शाती है। एक ओर जहां शरद इंडिया गठबंधन में एक बड़े नेता बने हुए हैं, वहीं अजित पवार के भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ गठबंधन ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को बदल कर रख दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या शरद पवार और अजित पवार साथ आते हैं या नहीं।

एनएसए अजीत डोभाल का चीन दौरा, जानें 5 साल बाद हो रही ये बैठक कितनी अहम?

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भारत और चीन के रिश्ते पर जमी बर्फ अब पिघलती दिख रही है। दोनों देशों के बीच एलएसी पर सीमा विवाद के कारण बीते कुछ सालों में तनाव काफी बढ़ गया था। हालांकि, कई दौर की बातचीत के बाद हालात पटरी पर आते दिख रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल बीजिंग पहुंचे हैं। लगभग पांच वर्षों के अंतराल के बाद उनकी चीन की आधिकारिक यात्रा है। इससे पहले एसआर संवाद दिसंबर 2019 में नई दिल्ली में हुआ था।

अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बुधवार को कई मुद्दों पर चर्चा की। अजीत डोभाल अपने चीनी समकक्ष और विदेश मंत्री वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की 23वें दौर की वार्ता की। इस दौरान पूर्वी लद्दाख से सैनिकों की वापसी और गश्त को लेकर दोनों देशों के बीच 21 अक्टूबर को हुए समझौते के बाद द्विपक्षीय संबंधों को बहाल करने के लिए कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इस वार्ता का उद्देश्य पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के कारण चार साल से अधिक समय तक प्रभावित रहे द्विपक्षीय संबंधों को बहाल करना है। साथ ही दोनों देशों के बीच आई खटास को दूर करना है।

चीनी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

अजीत डोभाल और वांग यी की विशेष बैठक से पहले चीनी विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। एक सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि चीन द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर करने और मतभेदों को दूर करने के लिए भारत संग काम करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि चीन और भारत के नेताओं के बीच महत्वपूर्ण आम समझ को लागू करने, एक-दूसरे के मूल हितों और प्रमुख चिंताओं का सम्मान करने, बातचीत और संचार के माध्यम से आपसी विश्वास को मजबूत करने, ईमानदारी और सद्भाव के साथ मतभेदों को ठीक से सुलझाने और द्विपक्षीय संबंधों को जल्द से जल्द स्थिर और स्वस्थ विकास की पटरी पर लाने के लिए भारत के साथ काम करने के लिए तैयार है।

कम होते तनाव के बीच दौरा कितना अहम

एनएसए का दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब दोनों देशों ने डेमचोक और देपसांग क्षेत्रों से अपनी सेना को पीछे हटाने के समझौते पर सहमति बनाई है। खबरों के मुताबिक दोनों ओर से को-ऑर्डिनेट पेट्रोलिंग भी शुरू हो गई है। इस विवाद को सुलझाने के लिए कॉर्प्स कमांडरों की 21 राउंड की बैठक हो चुकी है, इसके अलावा डिप्लोमेटिक लेवल पर भी कई दौर की बातचीत हुई है।

मई 2020 में शुरू हुआ था सैन्य गतिरोध

दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैन्य गतिरोध मई 2020 में शुरू हुआ था। उसी साल जून में गलवां घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच घातक झड़प हुई थी, जिससे दोनों पड़ोसियों के बीच संबंधों में गंभीर तनाव आ गया था। सैनिकों की वापसी के समझौते को 21 अक्तूबर को अंतिम रूप दिया गया था। समझौते पर हस्ताक्षर होने के दो दिन बाद पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस के कजान शहर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर बातचीत की थी। बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि वार्ता सहित कई वार्ता तंत्रों को बहाल करने पर सहमति व्यक्त की थी।

సీఎం పోస్టుపై ఫార్ములా అజిత్ పవార్ ఏమన్నారంటే

సీఎం రేసులో బీజేపీ నేత, ఉప ముఖ్యమంత్రి దేవేంద్ర ఫడ్నవిస్ ముందంజలో ఉన్నారు. బీజేపీ పోటీ చేసిన 149 స్థానాల్లో 132 స్థానాలను ఆ పార్టీ గెలుచుకోవడంతో ఫడ్నవిస్‌కు మూడోసారి సీఎం పగ్గాలు అప్పగిస్తారనే వాదన బలంగా ఉంది. మరోవైపు సీఎం రేసులో ఏక్‌నాథ్ షిండే ఉన్నారని ఆ పార్టీ నేత సంజయ్ షిర్‌సత్ తెలిపారు.

మహాయుతి కూటమి 236 సీట్లతో అసెంబ్లీ ఎన్నికల్లో భారీ విజయం సాధించడంతో ముఖ్యమంత్రి ఎవరనే దానిపై ఉత్కంఠ కొనసాగుతోంది. సీఎం సీటుకు సంబంధించి ఏదైనా ఫార్ములాపై చర్చ జరుగుతోందా అనే విషయంపై మహారాష్ట్ర ఉప ముఖ్యమంత్రి అజిత్ పవార్ (Ajit Pawar) సోమవారంనాడు స్పందించారు. అలాంటి ఫార్ములా ఏదీ చర్చకు రాలేదని ఆయన చెప్పారు. మహాయుతి ప్రభుత్వానికి పట్టం కడుతూ ప్రజలు చాలా గట్టి తీర్పునిచ్చారని, అసెంబ్లీ విపక్ష నేత పదవికి అవసరమైన సంఖ్యాబలం కూడా మహా వికాస్ అఘాడికి రాలేదని చెప్పారు.

ఏ ఫార్ములాపై చర్చ జరగడం లేదు. మేము ముగ్గురూ (కూటమి) కలిసి సీఎం పదవిపై చర్చిస్తాం. అసెంబ్లీలో ఎన్‌సీపీ నేతగా నన్ను ఎన్నుకున్నారు. శివసేన తరఫున ఏక్‌నాథ్ షిండే ఎన్నికయ్యారు. బీజేపీ కూడా ఇదే చేసింది. మేము కలిసి చర్చించుకుని సుస్థిర ప్రభుత్వాన్ని ఏర్పాటు చేస్తాం అని అజిత్ పవార్ తెలిపారు.

సీఎం రేసులో బీజేపీ నేత, ఉప ముఖ్యమంత్రి దేవేంద్ర ఫడ్నవిస్ ముందంజలో ఉన్నారు. బీజేపీ పోటీ చేసిన 149 స్థానాల్లో 132 స్థానాలను ఆ పార్టీ గెలుచుకోవడంతో ఫడ్నవిస్‌కు మూడోసారి సీఎం పగ్గాలు అప్పగిస్తారనే వాదన బలంగా ఉంది. మరోవైపు సీఎం రేసులో ఏక్‌నాథ్ షిండే ఉన్నారని ఆ పార్టీ నేత సంజయ్ షిర్‌సత్ తెలిపారు. సీఎం ఎవరనేది అంతిమంగా ఢిల్లీలో నిర్ణయిస్తారని, చర్చలు జరుగుతున్నందున ఫలితం ఏమిటనేది వేచిచూడాల్సి ఉంటుందన్నారు. త్వరలోనే మున్సిపల్ ఎన్నికలు కూడా జరగాల్సి ఉన్నందున దానిని కూడా సీఎం ఎంపిక విషయంలో పరిగణనలోకి తీసుకోవాల్సి ఉంటుందన్నారు. మంగళవారానికి ఒక స్పష్టత వస్తుందని ఆశిస్తున్నట్టు చెప్పారు.

సీఎం పీఠంపై తలెత్తిన ప్రతిష్ఠంభనను తొలగించేందుకు ఢిల్లీలో సోమవారం మహాయుతి అగ్రనేతలతో సమావేశం ఏర్పాటైంది. హోం మంత్రి అమిత్‌షా, బీజేపీ అధ్యక్షుడు జేపీ నడ్డా సైతం హాజరవుతున్నారు. సమావేశానంతరం కీలక నిర్ణయాన్ని ప్రకటించే అవకాశం ఉంది.

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का विमान क्रैश, बारामती में लैंडिंग के वक्त दुर्घटना

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महाराष्ट्र के बारामती में बड़ा विमान हादसा हो गया है। जिसमें उप मुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया। इस हादसे में चार अन्य लोगों की भी जान चली गई।

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार की आज (28 जनवरी) बारामती में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के लिए 5-6 मीटिंग थीं। बताया जा रहा है कि अजित पवार का प्लेन तब क्रैश हुआ जब वह इन मीटिंग के लिए जा रहे थे। निजी विमान एयरपोर्ट पर उतरते समय क्रैश हुआ है।

प्लेन क्रैश के बाद के विजुल्स में देखा जा सकता है कि प्लेन के परखच्चे उड़ गए और चारों तरफ धुआं-धुआं नजर आ रहा है। तस्वीरों में देखकर लग रहा है कि इस विमान में सवार कोई यात्री शायद ही जिंदा बचा हो। हादसे की जगह से भयावह विजुअल्स सामने आए हैं, जिसमें चारों तरफ धुआं-धुआं नजर आ रहा है।

अजित पवार बारामती से विधायक रहे हैं और यहां की जनता हमेशा उन्हें जिताती आई है। बारामती के लोगों को अजित पवार से खासा लगाव रहा है। वे इस बात का इंतजार कर रहे थे कि आज अजित दादा जनता को संबोधित करेंगे और उनसे बातचीत करेंगे, लेकिन बारामती एयरपोर्ट पहुंचने से पहले ही उनका प्लेन क्रैश हो गया और उसमें सवार सभी लोगों की जान चली गई।

*इतिहास का बदला लेना होगा...', ऐसा क्यों बोले अजीत डोभाल

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दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने युवाओं को संबोधित का। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल ने युवाओं से खास अपील की है। उन्होंने युवाओं को इतिहास से सीखने और एक मजबूत भारत के निर्माण का आग्रह किया है।

डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि 'मेरा कार्यक्षेत्र अलग है, मेरा अनुभव अलग है, और युवाओं के साथ उम्र का बहुत बड़ा अंतर है। आपमें से अधिकांश मुझसे 60 वर्ष से अधिक छोटे हैं, इसलिए मैं थोड़ा असमंजस में था कि आऊं या नहीं। मेरा जन्म स्वतंत्र भारत में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता-पूर्व भारत में हुआ था। मेरी जवानी तो कब की बीत चुकी है।'

भारत विकसित होगा, यह निश्चित है-जोभाल

अजीत डोभाल ने कहा, 'आज इतना कुछ बदल गया है कि मुझे सब कुछ पता नहीं है। लेकिन एक बात समान है, चाहे आप इसे महसूस करें या न करें - एक छोटी सी बात जो आपके जीवन की दिशा तय करती है: निर्णय लेने की क्षमता। आप सभी हर दिन छोटे-बड़े फैसले लेते हैं, और जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ेगी, आपको हर कदम पर फैसले लेने होंगे। भारत विकसित होगा, यह निश्चित है।'

युवाओं को इतिहास से प्रेरणा लेने की अपील

यंग लीडर्स डायलॉग में एनएसए ने कहा कि भारत को आजादी बहुत मुश्किल से मिली है। हमारे पूर्वजों ने बहुत कष्ट सहे, अपमान झेला और बहुत कुछ खोया। डोभाल ने युवाओं से कहा कि वे इतिहास से प्रेरणा लें और अपने देश को फिर से मजबूत बनाएं। यह भारत अपने मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों पर आधारित होना चाहिए।

‘बदला' एक शक्तिशाली ताकत- डोभाल

डोभाल ने कहा, 'यह इतिहास हमें चुनौती देता है कि हर युवा के भीतर आग होनी चाहिए। ‘बदला' शब्द आदर्श नहीं है, लेकिन ‘बदला' एक शक्तिशाली ताकत है। हमें अपने इतिहास का ‘बदला' लेना होगा और भारत को उसके अधिकारों, विचारों और विश्वासों के आधार पर फिर महान बनाना होगा।'

हमने किसी के मंदिर नहीं तोड़े- डोभाल

एनएसए ने कहा, हमारी सभ्यता बहुत विकसित थी। हमने किसी के मंदिर नहीं तोड़े। हम कहीं लूटने नहीं गए। हमने किसी दूसरे देश या लोगों पर हमला नहीं किया, जबकि बाकी दुनिया बहुत पिछड़ी हुई थी। लेकिन हम अपनी सुरक्षा और खुद को लेकर आने वाले खतरों को समझने में नाकाम रहे। इतिहास ने हमें सबक सिखाया जब हम इन खतरों के प्रति उदासीन रहे। क्या हमने वह सबक सीखा? क्या हम उस सबक को याद रखेंगे? अगर आने वाली पीढ़ियां उस सबक को भूल गईं, तो यह इस देश के लिए सबसे बड़ा दुर्भाग्य होगा।

*Mohun Bagan crowned champions of Ambar Roy U-13 meet*

Sports 

 

 Khabar kolkata sports Desk: Mohun Bagan AC outclassed Mainland Sambaran Cricket Academy by 43 runs in the summit clash on Monday to emerge champions of Ambar Roy Sub Junior Under-13 One-Day tournament.

The young cricketers received a big confidence boost as India legend Sourav Ganguly made his presence felt at the 22 Yards Sports Ground to motivate and inspire the players from both the teams.  

Batting first, Mohun Bagan posted 211/7 in 45 overs. Subarna Dey (66) and Aritra Pal (40 not out) impressed with the bat. Aranya Sarkar and Souvagya Das bagged 2 wickets each.

In reply, Mainland Sambaran Cricket Academy fell short, scoring 168/8 in 45 overs. Sk Atif Arman scored 44. Ajit Yadav was the pick of the Mohun Bagan bowlers bagging 2 for 18.

 Pic Courtesy by: CAB

मुस्लिम भाइयों को जो आंख दिखाएगा उसे छोड़ेंगे नहीं”, औरंगजेब विवाद के बीच अजित पवार का बड़ा बयान

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महाराष्ट्र में औरंगजेब को लेकर माहौल गर्म है। औरंगजेब को लेकर जारी विवाद के कारण नागपुर में 17 मार्च हिंसा भड़क गई। इस बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने इफ्तार पार्टी का आयोजन किया। इस इफ्तार पार्टी में अजीत पवार ने मुसलमानों को लेकर बड़ा बयान दिया है। अजित पवार ने मुस्लिम समुदाय को सुरक्षा का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है हमने अभी होली मनाई है, गुड़ी पड़वा और ईद आने वाली है, ये सभी त्यौहार हमें एक साथ मिलकर मनाने हैं क्योंकि एकता ही हमारी असली ताकत है।

पार्टी की ओर से मुंबई के इस्लाम जिमखाना में शुक्रवार को दी गई इफ्तार पार्टी के दौरान अजित पवार ने मुसलमानों के साथ एकजुटता दिखाते हुए कहा, मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि आपका भाई अजित पवार आपके साथ है। कहा- जो भी मुस्लिम भाइयों को आंख दिखाएगा, दो समूहों के बीच संघर्ष भड़काकर कानून व्यवस्था को बाधित करेगा और कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करेगा। वह चाहे कोई भी हो, उसे किसी भी हालत में बख्शा या माफ नहीं किया जाएगा।

अजित पवार ने बताया रमजान का महत्व

पवार ने ये भी कहा- रमजान सिर्फ एक धर्म तक सीमित नहीं है। यह हमें एकता और भाईचारे का संदेश देता है। भारत विविधता में एकता का प्रतीक है। छत्रपति शिवाजी महाराज, बाबा साहब अंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले और शाहू जी महाराज ने जातियों को एकसाथ लाकर समाज के उत्थान का मार्ग दिखाया। हमें इस विरासत को आगे बढ़ाना है।

नागपुर हिंसा में अब तक 105 गिरफ्तार

अजित पवार का ये बयान उस वक्त आया है जब महाराष्ट्र में औरंगजेब को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। हिंदू संगठनों ने मुगल शासक औरंगजेब की कब्र को गिराने की मांग कर रहे हैं। इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब नागपुर, जो आरएसएस का मुख्यालय है, वहां चिटनिस पार्क, महल क्षेत्र में दो समूहों के बीच झड़प हो गई। यह हिंसा कुछ धार्मिक चीज़ों को जलाने की कथित घटना के बाद हुई। इस मामले में शुक्रवार को 14 लोगों को अरेस्ट भी किया गया है। अब तक इस मामले में पकड़े गए लोगों की कुल संख्या 105 हो गई है। हिंसा मामले में 10 किशोर भी हिरासत में लिए गए हैं। 3 नई एफआईआर भी दर्ज की गई हैं।

अजीत डोभाल और तुलसी गबार्ड के बीच हुई अहम बैठक, कनाडाई और ब्रिटेन के एनएसए से भी हुई बात

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अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड भारत आई हैं। तुलसी गबार्ड ने भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ अहम बैठक की। इसके अवाला उन्होंने अजीत डोभाल की अध्यक्षता में होने वाली एक महत्वपूर्ण सुरक्षा और खुफिया समिट में हिस्सा लिया। यह सम्मेलन आतंकवाद का मुकाबला करने और खुफिया जानकारी साझा करने में सहयोग बढ़ाने के लिए है।गबार्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद भारत आने वाली पहली उच्च-स्तरीय अधिकारी हैं। बता दें कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी अगले महीने भारत आ सकते हैं।

तुलसी गबार्ड तीन दिवसीय दौरे पर भारत आई हैं। तुलसी गैबर्ड रविवार को दिल्ली पहुंचीं।अजीत डोभाल ने अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड के साथ रविवार को द्विपक्षीय वार्ता की और दुनिया भर के शीर्ष खुफिया अधिकारियों के एक सम्मेलन की अध्यक्षता की। सम्मेलन में आतंकवाद और उभरती प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न खतरों सहित विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की गई। ऐसा माना जा रहा है कि डोभाल और गबार्ड ने वार्ता के दौरान मुख्य रूप से खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र को मजबूत बनाने और भारत-अमेरिका की वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के साथ सुरक्षा क्षेत्र में मिलकर काम करने के तरीकों पर चर्चा की।

वैश्विक खुफिया सम्मेलन, बंद कमरे में चर्चा

इससे पहले डोभाल ने शीर्ष वैश्विक खुफिया अधिकारियों के सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस में आतंकवाद और उभरती तकनीक से उत्पन्न खतरों सहित विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। सम्मेलन में कनाडाई खुफिया प्रमुख डैनियल रोजर्स और ब्रिटेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जोनाथन पॉवेल भी शामिल थे। बंद कमरे में हुई इस वार्ता पर कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है। माना जा रहा है कि खुफिया और सुरक्षा विभागों के शीर्ष अधिकारियों ने आतंकवाद और उभरती प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने व आपसी सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया है।

तुलसी गबार्ड का दौरा क्यों अहम?

तुलसी की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता, हमास-इजरायल युद्ध और पाकिस्तान में बलूच लड़ाकों के विद्रोह और आंतकी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप सरकार बनने के बाद उनकी टीम के किसी शीर्ष अधिकारी की यह भारत की पहली उच्चस्तरीय यात्रा है। इसके बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस दौरे पर आ सकते हैं।तुलसी भारत के अलावा जापान, होनोलुलू, थाईलैंड और कुछ समय के लिए फ्रांस भी जाएंगी।डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में शामिल होने के बाद गबार्ड की यह दूसरी विदेश यात्रा है। इससे पहले वो जर्मनी गई थीं, जहां उन्होंने म्यूनिक सेक्युरिटी कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था।

रायसीना डायलॉग में लेंगी हिस्सा

गबार्ड मंगलवार को रायसीना डायलॉग में भी हिस्सा लेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुलसी गबार्ड को रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए न्योता दिया था। 18 मार्च को वो इसमें शिरकत करेंगी। इस सम्मेलन में गबार्ड भारत और अन्य देशों के अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगी। बता दें, रायसीना डायलॉग ऐसा मंच है, जहां जियोपॉलिटिक्स, जियोइकोनॉमिक्स से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की जाती है।

पीएम मोदी से भी मुलाकात संभल

गबार्ड के अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी से भी मुलाकात करने की संभावना है।पीएम मोदी पिछले महीने अपनी वाशिंगटन यात्रा के दौरान गैबर्ड से मिले थे। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई थी।गैबर्ड की यह यात्रा दोनों देशों के बीच सुरक्षा और खुफिया सहयोग को और गहरा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

धर्म से जुड़े विवादों का कैसे होगा निपटारा? एनएसए अजीत डोभाल ने बताया

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रविवार 2 फरवरी को दिल्ली में आयोजित हो रहे पुस्तक मेले में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने तुर्की-अमेरिकी विद्वान अहमद टी कुरु की पुस्तक 'इस्लाम, ऑथरिटेरियनिस्म एंड अंडर डेवलपमेंट' को लॉन्च किया। इस दौरान अजीत डोभाल ने मेले में धार्मिक पहचान से जुड़े विवादों पर बातचीत की। एनएसए ने कहा कि धार्मिक पहचान से जुड़े विवादों से बचने के लिए विचारों का स्वतंत्र प्रवाह महत्वपूर्ण है। संघर्ष समाधान पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों और समाजों द्वारा ‘‘आत्मनिरीक्षण'' हमेशा महत्वपूर्ण रहा है।

अजीत डोभाल ने कहा देश और धर्म के बीच संबंधों की घटना इस्लाम के लिए नई बात नहीं है. कुरु की किताब में जैसे बताया गया है कि इस्लाम के इतिहास में अलग-अलग कई स्टेज आए, जिसमें देश और धर्म के बीच रिश्ते कई दफा बदले, घटे और बढ़े क्योंकि अब्बासिद राजवंश के शासन में देश और धर्मगुरु की भूमिका पर स्पष्टता थी। पादरी वर्ग की भूमिका क्या है और राज्य की भूमिका क्या है, इसकी समझ बिल्कुल साफ थी। हिंदू धर्म में भी यह बात रही है और मुझे नहीं लगता कि आने वाले समय में शायद इसमें कोई भिन्नता हो।

विवादों से बचने के लिए विचारों का स्वतंत्र प्रवाह बहुत जरूरी-डोभाल

डोभाल ने कहा कि संघर्ष किसी भी विचारधारा या किसी भी देश के अस्तित्व में अंतर्निहित होते हैं। विचार और विचारधारा में प्रतिस्पर्धी होना बहुत जरूरी है। अगर यह प्रतिस्पर्धी नहीं है, तो फिर यह नहीं है या फिर सर्वमान्य है। हम संघर्षों का हल कैसे करते हैं, ये महत्वपूर्ण है। समाज की मानसिकता क्या है, इसको भी समझना बहुत जरूरी है। विवादों से बचने के लिए विचारों का स्वतंत्र प्रवाह बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहला संघर्ष खुद से खुद के बीच है। आपकी मान्यताओं, विचारों, आवश्यकताओं, आकांक्षाओं के बीच संघर्ष है। यहां तक कि दूसरे इंसानों, भगवान और समाज के साथ भी संघर्ष है। आपके खुद एक से अधिक विचार हो सकते हैं और कभी-कभी आप खुद इसे सोचते भी होंगे।

प्रिंटिंग प्रेस के विरोध का किया जिक्र

हिंदू धर्म का जिक्र करते हुए एनएसए ने कहा कि हिंदू धर्म में लड़ाई-झगडों को शास्त्रार्थ और मेडिटेशन के जरिए सुलझाया जाता था। वहीं जो पीढ़ियां लीक से हटकर नहीं सोच पाईं वे स्थिर हो गईं। एनएसए अजीत डोभाल ने प्रिंटिंग प्रेस का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रिंटिंग प्रेस को अपनाने के लिए इमाम वर्ग की ओर से काफी विरोध हुआ था। उन्होंने सोचा था कि इसके आने से इस्लाम के वास्तविक अर्थ की सही ढंग से या उनकी मान्यता के हिसाब से व्याख्या नहीं हो पाएगी।

आत्मनिरीक्षण को बताया महत्वपूर्ण

एनएसए डोभाल ने कहा कि राज्यों और समाजों द्वारा आत्मनिरीक्षण बहुत महत्वपूर्ण है। धर्म या राज्य के प्रति निष्ठा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। हमें अपने दिमाग को कैद नहीं होने देना चाहिए। अगर आप आत्मनिरीक्षण नहीं करते हैं तो आप समय और दिशा खो देते हैं। अगर बहुत देर से किया तो आप पिछड़ जाते हैं। किसी भी विचार या विचारधारा को प्रतिस्पर्धी होना चाहिए, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि हम समाज की ऐसी परस्पर विरोधी मानसिकताओं का समाधान कैसे करते हैं।

*India's T20 team announced, Shami will wear India's jersey after 431 days, return home to Eden*

Sports

Khabar kolkata sports Desk: India will play the first T20 against England on January 22. That game will be at Eden Gardens in Kolkata. Shami can be seen in the first eleven there. Shami returned to domestic cricket after recovering from injury. He played Ranji, Syed Mushtaq Ali T20 and Vijay Hazare Trophy for Bengal. This time he returned to India's T20 team.

Shamir has no more problems with fitness. One of the best fast bowlers in the country is ready to take the field in international cricket. Due to fitness issues, Shami was eventually unable to travel to Australia to play the Border-Gaoskar Trophy. Despite recovering from an ankle injury and playing for Bengal in various domestic competitions including the Ranji Trophy, he had fitness issues. He was not in a condition to take the pressure of playing a five-day match. Apart from that, he got a slight knee injury while playing for Bengal. So finally the Indian Cricket Board (BCCI) decided not to send Shami to Australia. The board bosses and the national selectors wanted Shami fresh in time for the upcoming Champions Trophy without rushing. Ajit Agarkar was relieved that Shami had been cleared by the NCA before the team was announced for the tournament. So he has been included in England series team.

क्या साथ आएंगे शरद पवार-अजित पवार, क्यों जागीं उम्मीदें?

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महाराष्ट्र की सियासत में चाचा भतीजे की जोड़ी खूब चर्चा में रहती है। एक बार फिर पवार फैमिली को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। महाराष्ट्र की राजनीति में वैसे भी असंभावनाओं से भरी रही है। इस बीच शरद पवार और अजित पवार में सुलह की भी संभावना जताई जा रही है। अब सवाल है कि क्या शरद पवार और अजित पवार क्या साथ आएंगे?

अजित पवार की मां की क्या है आशा

दरअसल, एनसीपी चीफ और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की मां आशताबाई की इच्छा तो कुछ ऐसी ही है. अजित पवार की मां आशताबाई ने अपने बेटे अजित और अपने देवर शरद पवार के फिर से एक होने की इच्छा जताई है। उन्होंने नए साल के मौके पर बुधवार को विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद पंढरपुर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैंने कामना की है कि पवार परिवार के भीतर मतभेद जल्द से जल्द खत्म हो जाएं। मुझे उम्मीद है कि पांडुरंग मेरी प्रार्थना जरूर सुनेंगे।’

अजित पवार की मां की की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब 2023 में एनसीपी और परिवार में विभाजन के बाद चाचा और भतीजे के बीच सुलह की अटकलें लगातार लगाई जा रही हैं।

प्रफुल्ल पटेल ने क्या कहा

इसके साथ ही एनसीपी अजित गुट के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने एनसीपी एसपी प्रमुख शरद पवार को अपना देवता बताया है। उनके इस कथन ने महाराष्ट्र की सियासी हलचल तेज कर दी है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक एनसीपी अजित गुट के दिग्गज नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा, "शरद पवार हमारे देवता हैं। हम उनका बहुत सम्मान करते हैं। अगर पवार परिवार एक साथ आता है, तो हमें बेहद खुशी होगी। मैं खुद को पवार परिवार का सदस्य मानता हूं।"

कई लोग चाहते हैं एक साथ आएं चाचा- भतीजे

प्रफुल्ल पटेल के अलावा एनसीपी विधायक नरहरि झिरवाल ने भी यही बात दोहराते हुए कहा, "शरद पवार साहब को छोड़कर जाना अजीब लगा। कई लोग ऐसा ही महसूस करते हैं। अब मैं उनके पास जाऊंगा और उनसे (अजीत पवार से) एक साथ आने का आग्रह करूंगा। शरद पवार समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के लिए लगातार काम कर रहे हैं।"

क्यों अहम है दोनों का साथ आना?

महाराष्ट्र की सियासत में पवार फैमिली का दबदबा रहा है। हालांकि, जब से एनसीपी में टूट हुई है, तब से शरद पवार की चमक फिकी ही पड़ी है। अजित पवार और शरद पवार के बीच सुलह की अपील महाराष्ट्र की सियासत में पवार फैमिली के प्रभाव को दर्शाती है। एक ओर जहां शरद इंडिया गठबंधन में एक बड़े नेता बने हुए हैं, वहीं अजित पवार के भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ गठबंधन ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को बदल कर रख दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या शरद पवार और अजित पवार साथ आते हैं या नहीं।

एनएसए अजीत डोभाल का चीन दौरा, जानें 5 साल बाद हो रही ये बैठक कितनी अहम?

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भारत और चीन के रिश्ते पर जमी बर्फ अब पिघलती दिख रही है। दोनों देशों के बीच एलएसी पर सीमा विवाद के कारण बीते कुछ सालों में तनाव काफी बढ़ गया था। हालांकि, कई दौर की बातचीत के बाद हालात पटरी पर आते दिख रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल बीजिंग पहुंचे हैं। लगभग पांच वर्षों के अंतराल के बाद उनकी चीन की आधिकारिक यात्रा है। इससे पहले एसआर संवाद दिसंबर 2019 में नई दिल्ली में हुआ था।

अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बुधवार को कई मुद्दों पर चर्चा की। अजीत डोभाल अपने चीनी समकक्ष और विदेश मंत्री वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की 23वें दौर की वार्ता की। इस दौरान पूर्वी लद्दाख से सैनिकों की वापसी और गश्त को लेकर दोनों देशों के बीच 21 अक्टूबर को हुए समझौते के बाद द्विपक्षीय संबंधों को बहाल करने के लिए कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इस वार्ता का उद्देश्य पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के कारण चार साल से अधिक समय तक प्रभावित रहे द्विपक्षीय संबंधों को बहाल करना है। साथ ही दोनों देशों के बीच आई खटास को दूर करना है।

चीनी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

अजीत डोभाल और वांग यी की विशेष बैठक से पहले चीनी विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। एक सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि चीन द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर करने और मतभेदों को दूर करने के लिए भारत संग काम करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि चीन और भारत के नेताओं के बीच महत्वपूर्ण आम समझ को लागू करने, एक-दूसरे के मूल हितों और प्रमुख चिंताओं का सम्मान करने, बातचीत और संचार के माध्यम से आपसी विश्वास को मजबूत करने, ईमानदारी और सद्भाव के साथ मतभेदों को ठीक से सुलझाने और द्विपक्षीय संबंधों को जल्द से जल्द स्थिर और स्वस्थ विकास की पटरी पर लाने के लिए भारत के साथ काम करने के लिए तैयार है।

कम होते तनाव के बीच दौरा कितना अहम

एनएसए का दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब दोनों देशों ने डेमचोक और देपसांग क्षेत्रों से अपनी सेना को पीछे हटाने के समझौते पर सहमति बनाई है। खबरों के मुताबिक दोनों ओर से को-ऑर्डिनेट पेट्रोलिंग भी शुरू हो गई है। इस विवाद को सुलझाने के लिए कॉर्प्स कमांडरों की 21 राउंड की बैठक हो चुकी है, इसके अलावा डिप्लोमेटिक लेवल पर भी कई दौर की बातचीत हुई है।

मई 2020 में शुरू हुआ था सैन्य गतिरोध

दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैन्य गतिरोध मई 2020 में शुरू हुआ था। उसी साल जून में गलवां घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच घातक झड़प हुई थी, जिससे दोनों पड़ोसियों के बीच संबंधों में गंभीर तनाव आ गया था। सैनिकों की वापसी के समझौते को 21 अक्तूबर को अंतिम रूप दिया गया था। समझौते पर हस्ताक्षर होने के दो दिन बाद पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस के कजान शहर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर बातचीत की थी। बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि वार्ता सहित कई वार्ता तंत्रों को बहाल करने पर सहमति व्यक्त की थी।

సీఎం పోస్టుపై ఫార్ములా అజిత్ పవార్ ఏమన్నారంటే

సీఎం రేసులో బీజేపీ నేత, ఉప ముఖ్యమంత్రి దేవేంద్ర ఫడ్నవిస్ ముందంజలో ఉన్నారు. బీజేపీ పోటీ చేసిన 149 స్థానాల్లో 132 స్థానాలను ఆ పార్టీ గెలుచుకోవడంతో ఫడ్నవిస్‌కు మూడోసారి సీఎం పగ్గాలు అప్పగిస్తారనే వాదన బలంగా ఉంది. మరోవైపు సీఎం రేసులో ఏక్‌నాథ్ షిండే ఉన్నారని ఆ పార్టీ నేత సంజయ్ షిర్‌సత్ తెలిపారు.

మహాయుతి కూటమి 236 సీట్లతో అసెంబ్లీ ఎన్నికల్లో భారీ విజయం సాధించడంతో ముఖ్యమంత్రి ఎవరనే దానిపై ఉత్కంఠ కొనసాగుతోంది. సీఎం సీటుకు సంబంధించి ఏదైనా ఫార్ములాపై చర్చ జరుగుతోందా అనే విషయంపై మహారాష్ట్ర ఉప ముఖ్యమంత్రి అజిత్ పవార్ (Ajit Pawar) సోమవారంనాడు స్పందించారు. అలాంటి ఫార్ములా ఏదీ చర్చకు రాలేదని ఆయన చెప్పారు. మహాయుతి ప్రభుత్వానికి పట్టం కడుతూ ప్రజలు చాలా గట్టి తీర్పునిచ్చారని, అసెంబ్లీ విపక్ష నేత పదవికి అవసరమైన సంఖ్యాబలం కూడా మహా వికాస్ అఘాడికి రాలేదని చెప్పారు.

ఏ ఫార్ములాపై చర్చ జరగడం లేదు. మేము ముగ్గురూ (కూటమి) కలిసి సీఎం పదవిపై చర్చిస్తాం. అసెంబ్లీలో ఎన్‌సీపీ నేతగా నన్ను ఎన్నుకున్నారు. శివసేన తరఫున ఏక్‌నాథ్ షిండే ఎన్నికయ్యారు. బీజేపీ కూడా ఇదే చేసింది. మేము కలిసి చర్చించుకుని సుస్థిర ప్రభుత్వాన్ని ఏర్పాటు చేస్తాం అని అజిత్ పవార్ తెలిపారు.

సీఎం రేసులో బీజేపీ నేత, ఉప ముఖ్యమంత్రి దేవేంద్ర ఫడ్నవిస్ ముందంజలో ఉన్నారు. బీజేపీ పోటీ చేసిన 149 స్థానాల్లో 132 స్థానాలను ఆ పార్టీ గెలుచుకోవడంతో ఫడ్నవిస్‌కు మూడోసారి సీఎం పగ్గాలు అప్పగిస్తారనే వాదన బలంగా ఉంది. మరోవైపు సీఎం రేసులో ఏక్‌నాథ్ షిండే ఉన్నారని ఆ పార్టీ నేత సంజయ్ షిర్‌సత్ తెలిపారు. సీఎం ఎవరనేది అంతిమంగా ఢిల్లీలో నిర్ణయిస్తారని, చర్చలు జరుగుతున్నందున ఫలితం ఏమిటనేది వేచిచూడాల్సి ఉంటుందన్నారు. త్వరలోనే మున్సిపల్ ఎన్నికలు కూడా జరగాల్సి ఉన్నందున దానిని కూడా సీఎం ఎంపిక విషయంలో పరిగణనలోకి తీసుకోవాల్సి ఉంటుందన్నారు. మంగళవారానికి ఒక స్పష్టత వస్తుందని ఆశిస్తున్నట్టు చెప్పారు.

సీఎం పీఠంపై తలెత్తిన ప్రతిష్ఠంభనను తొలగించేందుకు ఢిల్లీలో సోమవారం మహాయుతి అగ్రనేతలతో సమావేశం ఏర్పాటైంది. హోం మంత్రి అమిత్‌షా, బీజేపీ అధ్యక్షుడు జేపీ నడ్డా సైతం హాజరవుతున్నారు. సమావేశానంతరం కీలక నిర్ణయాన్ని ప్రకటించే అవకాశం ఉంది.