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शशि थरूर फिर कांग्रेस की अहम बैठक से रहे गायब, जानें क्‍या बताई वजह

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केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एक बार फिर शशि थरूर की नाराजगी की खबर सामने आई है। चुनावी तैयारियों को लेकर आज होने वाली कांग्रेस की अहम बैठक में थरूर शामिल नहीं हुए। आज राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ दिल्ली में बैठक प्रस्तावित थी। लेकिन इसमें थरूर नहीं पहुंचे।

शशि थरूर के ऑफिस की तरफ से इस बाबत बयान जारी किया गया है, जिसमें स्‍पष्‍ट तौर पर कहा गया है कि शशि थरूर आज यानी 23 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली केरल कांग्रेस की अहम चुनावी तैयारी बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। उनके कार्यालय ने कहा, ‘वे केरल लिटरेचर फेस्टिवल के लिए कालीकट में हैं, जो एशिया का सबसे बड़ा साहित्य महोत्सव है। वह अपनी नवीनतम पुस्तक पर बोल रहे हैं, जो श्री नारायण गुरु पर आधारित है। उन्होंने पार्टी को पहले ही सूचित कर दिया था कि वह बैठक में शामिल नहीं हो सकेंगे।’

क्या है थरूर की नाराजगी की वजह?

शशि थरूर और कांग्रेस पार्टी के बीच के मतभेद की खबरें लंबे समय से आ रही है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी एक बार फिर चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के हालिया कोच्चि दौरे के दौरान उन्हें अपेक्षित सम्मान न मिलने से थरूर नाराज हैं।

राहुल गांधी ने थरूर का नाम भी नहीं लिया

कुछ दिन पहले कोच्चि में कांग्रेस ने महापंचायत कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें राहुल गांधी भी मौजूद थे। कार्यक्रम से पहले यह तय किया गया कि वरिष्ठता को देखते हुए शशि थरूर के भाषण के बाद सिर्फ राहुल गांधी का भाषण होगा। महापंचायत में वक्ताओं का क्रम भी तय था, इसके बावजूद शशि थरूर के भाषण के बाद अन्य वक्ताओं की लाइन लगा दी। राहुल गांधी भी अंत में बोले, मगर उन्होंने मंच पर मौजूद शशि थरूर का नाम भी नहीं लिया। यह राहुल गांधी की चूक थी या संकेत, इस घटनाक्रम ने शशि थरूर की नाराजगी को और बढ़ा दिया।

बैठक से दूर लिटरेचल फेस्टिवल में शामिल

बताया जाता है कि महापंचायत में बैठने के क्रम में भी कांग्रेस सांसद की सीनियॉरिटी को दरकिनार किया गया था। शशि थरूर ने इसे अपमान बताते हुए केरल विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा के लिए पार्टी हाईकमान की बुलाई गई बैठक से दूर रहने फैसला किया है। वह इस दौरान कालीकट में हो रहे केरल लिटरेचल फेस्टिवल में शामिल होंगे।

बता दें कि बीते कुछ महीनों में थरूर के कुछ बयान और सोशल मीडिया पोस्ट पार्टी नेतृत्व को असहज करने वाले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के कुछ कदमों की सराहना करते हुए उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग माना गया। इसकी शुरुआत पहलगाम हमले से हुई, जब थरूर ने इंटेलिजेंस चूक के आरोपों पर मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश जाने वाले संसदीय प्रतिनिधिमंडल में शशि थरूर के चयन पर कांग्रेस ने सवाल उठाए।

थरूर बोले- नेहरू की गलतियां स्वीकारना जरूरी, लेकिन हर समस्या के लिए दोषी ठहराना गलत

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिससे कांग्रेस के अंदर खलबली मच सकती है। थरूर ने कहा है कि वे भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारतीय लोकतंत्र का संस्थापक मानते हैं, लेकिन उनकी तारीफ आलोचना से खाली नहीं है। थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन भारत की सभी समस्याओं के लिए उन्हें दोषी ठहराना ठीक नहीं है।

थरूर ने कहा- मैं नेहरू का गहरा प्रशंसक

कांग्रेस सांसद ने कहा कि मैं भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विचारों और दृष्टिकोण की गहरी प्रशंसा करता हूं मैं उनके विचारों और सोच का बहुत सम्मान करता हूं, हालांकि मैं उनके सभी विश्वासों और नीतियों से 100% सहमत नहीं हो सकता। उन्होंने जो बहुत सी चीजें कीं, वे बहुत सराहनीय हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेहरू ने ही भारत में लोकतंत्र को मजबूती से स्थापित किया था।

मोदी सरकार लोकतंत्र विरोधी नहीं पर नेहरू विरोधी-थरूर

थरूर ने आगे कहा कि मैं यह नहीं कहूंगा कि वे (मोदी सरकार) लोकतंत्र विरोधी हैं, लेकिन वे निश्चित रूप से नेहरू विरोधी हैं। नेहरू को एक सुविधाजनक बलि का बकरा बना दिया गया है।

नेहरू को हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते-थरूर

नेहरू की हर मान्यता और नीति का बिना आलोचना समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना आवश्यक है, लेकिन हर चीज के लिए सिर्फ उन्हें जिम्मेदार ठहरा देना गलत है। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में नेहरू की ओर से लिए गए कुछ फैसले गलत हो सकते हैं, लेकिन हम उन्हें हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं।

1962 में हार के लिए नेहरू के फैसले कुछ हद तक जिम्मेदारर-थरूर

1962 के भारत-चीन युद्ध को याद करते हुए, थरूर ने कहा कि वर्तमान सरकार की नेहरू की आलोचना में कुछ सच्चाई हो सकती है। उन्होंने कहा, 'उदाहरण के लिए, 1962 में चीन के खिलाफ हार के लिए कुछ हद तक नेहरू के फैसलों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।' उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन वे अब जो करते हैं वह यह है कि किसी भी मुद्दे पर नेहरू को हर चीज के लिए दोषी ठहराते हैं।'

पुतिन के डिनर में राहुल–खड़गे को न्योता नहीं, शशि थरूर को बुलाया गया, जानें कांग्रेस ने क्या कहा?

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरा पूरा कर अपने देश वापस लौट गए हैं। दिल्ली दौरे के अंतिन दिन शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में रात्रिभोज का आयोजन किया गया। राष्ट्रपति के डिनर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को निमंत्रण नहीं दिया गया। हालांकि, इस दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर जरूर सत्ताधारी दल के नेताओं के साथ सहज भाव से मिलते जुलते देखे गए।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस डिनर में शशि थरूर अपने चिरपरिचित अंदाज में नजर आए। डिनर में थरूर काले रंग के बंद गले का कोट के साथ गले में मरून कलर का मफलर डाल कर पहुंचे थे। वीडियो में थरूर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बात करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल भी नजर आ रहे हैं। निर्मला सीतारमण से बातचीत के बाद थरूर केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल से हाथ मिलाकर आगे बढ़ जाते हैं।

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

राष्ट्रपति भवन आयोजित रात्रिभोज को लेकर कांग्रेस ने दावा किया है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बुलावा नहीं आया। इस पर कांग्रेस ने सरकार पर फिर निशाना साधा है।

कांग्रेस में उठे सवाल

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार रोजाना प्रोटोकॉल तोड़ती है और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास नहीं रखती। थरूर के न्योता स्वीकार करने पर रमेश ने कहा, अगर हमारे नेता को बुलाया नहीं गया और हमें बुलाया गया, तो हमें अपनी अंतरात्मा से सवाल करना चाहिए। किसे बुलाया है और किसे नहीं, इसमें राजनीति खेली गई है। इसे स्वीकार करना भी सवाल उठाता है।

क्या कांग्रेस से किनारा कर रहे हैं शशि थरूर? दूसरी बार पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक से रहे 'गायब'

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कांग्रेस के सांसद शशि थरूर इन दिनों कांग्रेस से दूरी बनाते दिख रहे हैं। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और तिरुवनंतपुरम से पार्टी सांसद शशि थरूर रविवार को संसद के शीतकालीन सत्र के बारे में स्ट्रेटेजिक ग्रुप की एक अहम मीटिंग में शामिल नहीं हुए। यह मीटिंग सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई। इससे पहले एसआईआर के मुद्दे पर बुलाई गई कांग्रेस की बैठक से भी वह नदारद थे। ऐसे में शशि थरूर को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

थरूर के बयानों से लग रहे कयास

कांग्रेस की जरूरी मीटिंग्स से शशि थरूर का लगातार गायब रहना पार्टी में चर्चा का विषय बन गया है। ऐसा तब हो रहा है, जब पिछले कुछ महीनों में शशि थरूर कभी अपने पार्टी की ही बुराई करते दिख रहे हैं, तो कभी पीएम मोदी की तारीफ। उनके इन्हीं बदले तेवर की वजह से राजनीतिक गलियारों में उनकी कांग्रेस से दूरी के कयास लगाए जाने लगे हैं।

एसआईआर के मुद्दे पर हुई बैठक में रहे नदारद

हाल ही में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर बुलाई कांग्रेस की बैठक से भी थरूर नदारद रहे थे, जिसके लिए उनकी तरफ से खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया गया था। लेकिन उस वक्त वह सवालों के घेरे में आ गए थे क्योंकि एक दिन पहले ही वह पीएम मोदी के कार्यक्रम में वह शामिल हुए थे।

शशि थरूर ने की पीएम मोदी के व्याख्यान की तारीफ

पीएम की तारीफ करते ‘एक्स’ पर उनके कई पोस्ट भी आए थे। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बीते 18 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत की आर्थिक दिशा को रेखांकित करने और देश की विरासत को गौरवशाली बनाने पर जोर देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की थी। थरूर ने एक्स पोस्ट में लिखा था, “प्रधानमंत्री मोदी ने ‘विकास के लिए भारत की रचनात्मक अधीरता’ की बात की और एक औपनिवेशिक काल के बाद की मानसिकता से मुक्ति पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब सिर्फ ‘उभरता हुआ बाजार’ नहीं, बल्कि दुनिया के लिए ‘उभरता हुआ मॉडल’ है। उन्होंने देश की आर्थिक मजबूती पर भी ध्यान दिलाया। पीएम मोदी ने कहा कि उन पर हमेशा ‘चुनाव मोड’ में रहने का आरोप लगता है, लेकिन असल में वह लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए ‘भावनात्मक मोड’ में रहते हैं।

कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने उठाए थे सवाल

पीएम मोदी के बारे में उनके कमेंट्स के बाद, पार्टी के दूसरे नेताओं ने उनकी आलोचना की थी। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि शशि थरूर की प्रॉब्लम यह है कि मुझे नहीं लगता कि उन्हें देश के बारे में अधिक पता है... अगर आपके हिसाब से कोई कांग्रेस की पॉलिसी के खिलाफ जाकर देश का भला कर रहा है, तो आपको उन पॉलिसी को फॉलो करना चाहिए... आप कांग्रेस में क्यों हैं? क्या सिर्फ़ इसलिए कि आप एमपी हैं?

वंशवाद' पर ऐसा क्या बोल गए थरूर, कांग्रेस में मचा घमासान, बीजेपी को मिला मौका

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वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने राजनीतिक में वंशवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, राजनीतिक परिदृश्य में वंशवादी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। नेहरू-गांधी परिवार ने यह सिद्ध किया कि राजनीतिक नेतृत्व जन्मसिद्ध अधिकार हो सकता है। थरूर ने कहा कि अब वक्त आ गया कि भारत वंशवाद की जगह योग्यतावाद अपनाए। थरूर के इस बयान पर सियासी बवाल बढ़ गया है।

प्रमोद तिवारी ने थरूर को आड़े हाथों लिया

वंशवाद पर बयान देकर शशि थरूर ने कांग्रेस के भीतर सियासी पारा बढ़ा दिया है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने थरूर को आड़े हाथों लिया है। प्रमोद तिवारी ने शशि थरूर द्वारा गांधी परिवार पर लगाए गए आरोपों पर कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू इस देश के सबसे सक्षम प्रधानमंत्री थे। इंदिरा गांधी ने अपना जीवन बलिदान करके खुद को साबित किया। राजीव गांधी ने भी बलिदान देकर देश सेवा की। ऐसे में अगर कोई गांधी परिवार के वंशवाद की बात करता है तो फिर देश में किस अन्य परिवार ने ऐसा बलिदान, समर्पण और क्षमता दिखाई है। क्या वो भाजपा है?

रशीद अल्वी भी थरूर की राय से असहमत

कांग्रेस नेता रशीद अल्वी ने भी थरूर की राय से असहमति जताई। उन्होंने कहा, लोकतंत्र में फैसला जनता करती है। आप यह नहीं कह सकते कि किसी को सिर्फ इसलिए चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं कि उसके पिता सांसद थे। यह हर क्षेत्र में होता है, राजनीति कोई अपवाद नहीं।

बीजेपी ने कसा तंज

वहीं, थरूर के इस बयान से भाजपा को बैठे बिठाए एक मुद्दा मिल गया है और राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने थरूर के बयान को लेकर कांग्रेस पर तंज कसा है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद जयहिंद ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि शशि थरूर ने भारत के नेपो किड राहुल गांधी और छोटे नेपो किड तेजस्वी यादव पर सीधा हमला बोला है। शहजाद ने लिखा कि डॉ. थरूर खतरों के खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने नेपो किड या वंशवाद के नवाब पर सीधा हमला बोला है। जब मैंने नेपो नामदार राहुल गांधी के खिलाफ 2017 में बोला तो आप जानते हैं कि मेरे साथ क्या हुआ। सर आपके लिए प्रार्थना कर रहा हूं। फर्स्ट फैमिली बदला जरूर लेती है।

धर्मेंद्र प्रधान ने किया थरूर का समर्थन

वहीं, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने थरूर के लेख के बाद कांग्रेस और राजद पर तंज कसते हुए कहा, थरूर ने यह लेख अपने अनुभव के आधार पर लिखा है। मैं शशि थरूर के बयान का स्वागत करता हूं। उनकी टिप्पणी से कांग्रेस और राजद को निश्चित रूप से ठेस पहुंचेगी क्योंकि उनकी राजनीति एक परिवार तक सीमित है। वे अपने परिवार से बाहर सोच ही नहीं सकते।

थरूर ने क्या लिखा कि मच गया घमासान

दरअसल, शशि थरूर ने हाल ही में एक लेख में लिखा था कि वंशवाद सिर्फ कांग्रेस में नहीं, बल्कि लगभग हर राजनीतिक दल में मौजूद है। उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक शक्ति वंश के आधार पर तय होती है, न कि योग्यता, प्रतिबद्धता या जनसंपर्क से, तो शासन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। थरूर ने यह भी लिखा कि नेहरू-गांधी परिवार जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का प्रभाव भारत की आज़ादी और लोकतंत्र के इतिहास से जुड़ा हुआ है। लेकिन इसी ने यह विचार भी मजबूत किया कि नेतृत्व किसी का जन्मसिद्ध अधिकार हो सकता है, और यह सोच आज सभी पार्टियों और राज्यों तक फैल गई है।'

राहुल गांधी के समर्थन में आए शशि थरूर, ‘वोट चोरी’ के दावे पर दिया साथ

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से चुनाव में ‘वोट चोरी’ करने का आरोप लगाए जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राहुल गांदी ने गुरूवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पीपीटी पेश कर कर्नाटक में लोकसभा सीट, महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और साथ ही एक ही वोटर के कई कई बूथों और राज्यों में नाम होने का आरोप लगाया। जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई नेताओं ने राहुल गांधी की तीखी आलोचना की है। हालांकि, काफी समय से अपनी ही पार्टी के खिलाफ बोल रहे केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी राहुल गांधी का समर्थन किया है।

पिछले कुछ महीनों से पार्टी आलाकमान से इतर नजरिया रखने वाले शशि थरूर ने गुरुवार को कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए इन आरोपों की जांच होनी चाहिए। राहुल गांधी ने चुनाव में धांधली के 'ठोस सबूत' पेश किए और भारतीय चुनाव आयोग पर बीजेपी के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया। थरूर ने चुनाव आयोग से कार्रवाई करने और स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया।

चुनाव आयोग से की खास गुजारिश

शशि थरूर ने कांग्रेस पार्टी के पोस्ट को अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया है। इसमें राहुल गांधी लोकसभा और कई राज्यों में विधानसभा के दौरान वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के बारे में बता रहे हैं। शशि थरूर ने इस पोस्ट को शेयर करते हुए कहा, ‘ये गंभीर प्रश्न हैं जिनका सभी दलों और सभी मतदाताओं के हित में गंभीरता से समाधान किया जाना चाहिए। हमारा लोकतंत्र इतना मूल्यवान है कि इसकी विश्वसनीयता को अक्षमता, लापरवाही या उससे भी बदतर, जानबूझकर छेड़छाड़ से नष्ट नहीं होने दिया जा सकता। चुनाव आयोग को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और चुनाव आयोग के प्रवक्ता को देश को सूचित करते रहना चाहिए।’

काफी समय से पार्टी लाइन से हटकर दे रहे थे बयान

शशि थरूर का ये बयान काफी अहम माना जा रहा है। दरअसल, शशि थरूर पिछले कुछ महीनों से कई बार पार्टी लाइन से हटकर बयान दे चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की थी और इमरजेंसी के दौर की आलोचना भी की थी। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी थरूर सरकार के साथ खड़े नजर आए। जिसके बाद मॉनसूव सत्र के दौरान कांग्रेस की ओर से पार्टी के वक्ताओं में थरूर का नाम शामिल नहीं किया गया था। जिसको लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थी।

ट्रंप के टैरिफ पर “लाल-पीले” हो रहे राहुल, थरूर और मनीष तिवारी ने अलापा अगल राग

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भारत के साथ ट्रेड डील फाइनल नहीं होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इसके बाद ट्रंप ने रूस और भारत की इकोनॉमी को डेड यानी मृत बताया। फिर क्या था भारत में ट्रंप के टैरिफ पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। ट्रंप के टैरिफ वाले एलान के बाद देश में सियासत गरमा गई है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ट्रंप के हां में हां मिलाया है और कहा कि मुझे खुशी है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ये फैक्ट कहा है।

शशि थरूर और मनीष तिवारी सरकार के समर्थन में

ट्रंप के टैरिफ वाले एलान के बाद कांग्रेस के कई नेताओं ने सरकार से तमाम सवाल किए। इस बीच कांग्रेस के ही नेता शशि थरूर और मनीष तिवारी ने मोदी सरकार को जोरदार समर्थन दिया है। शशि थरूर ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह से अनुचित है, तो हमें कहीं और जाना होगा। वहीं, मनीष तिवारी ने कहा कि यह सब भारत की स्‍ट्रेटज‍िक ऑटोनॉमी का सबूत है, जो नेहरू की गुटन‍िरपेक्षता से शुरू हुई और अब पीएम मोदी की आत्‍मन‍िर्भर भारत वाली सोच का ह‍िस्‍सा है।

थरूर ने क्या कहा?

संसद परिसर में समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यह एक चुनौतीपूर्ण वार्ता है। हम कई देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं। अमेरिका अकेला ऐसा देश नहीं है जिसके साथ बातचीत चल रही है। यूरोपीय संघ के साथ हमारी बातचीत चल रही है, हमने ब्रिटेन के साथ एक समझौता कर लिया है, और हम अन्य देशों के साथ भी बातचीत कर रहे हैं। अगर हम अमेरिका में प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते, तो हमें अमेरिका के बाहर अपने बाजारों में विविधता लानी पड़ सकती है।

अगर अच्छा सौदा संभव नहीं है, तो पीछे हटना पड़ता है-थरूर

थरूर ने आगे कहा कि हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। अगर अमेरिका अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह से अनुचित है, तो हमें कहीं और जाना होगा। यही भारत की ताकत है; हम चीन की तरह पूरी तरह से निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्था नहीं हैं। हमारे पास एक अच्छा और मजबूत घरेलू बाजार है। हमें अपने वार्ताकारों को सर्वोत्तम संभव सौदा खोजने के लिए पूरा समर्थन देना चाहिए। अगर कोई अच्छा सौदा संभव नहीं है, तो हमें पीछे हटना पड़ सकता है।

मनीष त‍िवारी ने क्या कहा?

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष त‍िवारी ने इस मामले में एक्‍स पर लंबा चौड़ा पोस्‍ट ल‍िखा। मनीष त‍िवारी ने लिखा, डोनाल्ड ट्रंप ने शायद 1947 से चली आ रही भारत की स्‍ट्रैटज‍िक ऑटोनॉमी को अब तक की सबसे बड़ी श्रद्धांजलि दी है। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने गुटनिरपेक्षता की नीति लागू की, जिसे आज मल्टी-अलाइनमेंट कहा जाता है। फ‍िर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उसे आत्‍मन‍िर्भरता के साथ आगे बढ़ाया और आज भारत आत्‍मनिर्भर कहा जा रहा है। ये वे रणनीतिक सिलसिले हैं जो भारत को दुनिया से अपनी शर्तों पर और अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय हित में जुड़ने की फ्लैक्‍स‍िबिल‍िटी देते हैं। मनीष त‍िवारी ने लिखा, क्या डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ की धमकी उस स्‍ट्रैटज‍िक ऑटोनॉमी को कोई फर्क पहुंचाएगी, जिसे हमने दशकों से और अलग-अलग सरकारों के तहत बनाया है? बिल्कुल नहीं. क्या यह भारत-अमेरिका के व्यापक संबंधों के ताने-बाने को नुकसान पहुंचा सकता है? जवाब है शायद!

कांग्रेस के अन्य नेताओं से अलग राग

बता दें कि शशि थरूर और मनीष त‍िवारी पहली बार सरकार के समर्थन में बातें नहीं कर रहे हैं। इससे पहले भी मोदी सरकार की नीत‍ियों की तारीफ करने को लेकर दोनों नेता कई बार कांग्रेस के न‍िशाने पर भी रहे हैं।

ऑपरेशन सिंदूर पर बहस से पहले थरूर का “मौनव्रत”, कांग्रेस वक्ताओं की लिस्ट में क्यों नहीं मिली जगह?

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संसद के मॉनसून सत्र में सोमवार यानी आज पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर बहस हो रही है। दोपहर 12 बजे से इस चर्चा का नेतृत्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करने वाले थे, लेकिन जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी दलों ने शोरगुल और नारेबाजी करते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की, जिसके बाद सदन की कार्यवाही 1 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। कांग्रेस की तरफ से चर्चा में शामिल होने वाले वक्ताओं की लिस्ट जारी कर दी गई है। खास बात है कि इस बार कांग्रेस सांसद शशि थरूर का नाम नहीं है।

लोकसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर'पर चर्चा के दौरान कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी, गौरव गोगोई , प्रियंका गांधी, दीपेंद्र हुड्डा, परिणीति शिंदे, शफी परमबिल, मणिकम टैगोर और राजा बराड़ पक्ष रखेंगे। कांग्रेस के शशि थरूर इस चर्चा में पार्टी की ओर से हिस्सा नहीं लेंगे। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि उन्होंने स्वेच्छा से चर्चा में भाग लेने से मना कर दिया।

थरूर के मौनव्रत के सियासी मायने

इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर संसद भवन पहुंचे। संसद परिसर पहुंच शशि थरूर से पत्रकारों ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा। इस पर शशि थरूर ने कहा कि मौनव्रत...मौनव्रत। इसके बाद शशि थरूर हंसते हुए निकल गए। 20 सेंकड के इस वीडियो में शशि थरूर ने जिस तरह से इस चर्चा से किनारा किया है उसके बड़े मायने निकाले जा रहे हैं।

मौनव्रत की वजह

माना जा रहा है कि चर्चा पर थरूर के इनकार की वजह है कि वह इस मामले को लेकर सरकार पर हमला नहीं करना चाहते हैं। मालूम हो कि थरूर पहले ऑपरेशन सिंदूर को सरकार की तारीफ कर चुके हैं। वहीं, थरूर ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश गए प्रतिनिधि मंडल का भी हिस्सा थे। ऐसे में यदि थरूर इस चर्चा में कांग्रेस की तरफ से बोलते हैं तो यह उनके लिए अपनी ही बात से पीछे हटने वाली स्थिति हो जाती। ऐसे में माना जा रहा है कि थरूर ने इस तरह की स्थिति से बचने के लिए खुद के चर्चा से अलग कर लिया है।

थरूर ने की थी ऑपरेशन सिंदूर की सराहना

बता दें कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारतीय सेना की ओर से चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे। शशि थरूर ने इस ऑपरेशन की सराहना करते हुए इसे सटीक और सुनियोजित बताया था। उन्होंने इसके लिए मोदी सरकार की जमकर तारीफ की थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में यह भी कहा कि यह बहुत अच्छी तरह से किया गया। भारत ने वैध लक्ष्यों को निशाना बनाया। उनकी यह टिप्पणी कांग्रेस की आधिकारिक रुख से अलग थी, क्योंकि पार्टी ने खुफिया विफलताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने के दावों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई थी।

अब थरूर ने आपातकाल पर उठाया सवाल, बोले- जबरन कराई गईं नसबंदियां, असहमति को बेरहमी से दबाया

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पिछले कुछ समय से कांग्रेस सांसद शशि थरूर अपनी ही पार्टी पर हमलावर हैं। अब थरूर ने 1975 में लगी इमरजेंसी पर सवाल उठाए हैं। थरूर ने इमरजेंसी पर एक आर्टिकल लिखा है और इसमें आपातकाल की जमकर आलोचना की है। उन्होंने आपातकाल को लेकर कांग्रेस को घेरा है। थरूर ने कहा कि आपातकाल के नाम पर आजादी छीनी गई।उन्होंने आपातकाल में इंदिरा गांधी और संजय गांधी के कामों को लेकर सवाल उठाए।

मलयालम भाषा के अखबार 'दीपिका' में गुरुवार को प्रकाशित अपने लेख में शशि थरूर ने आपातकाल को सिर्फ भारतीय इतिहास के 'काले अध्याय' के रूप में याद नहीं करके, इससे सबक लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि अनुशासन और व्यवस्था के लिए उठाए गए कदम कई बार ऐसी क्रूरता में बदल जाते हैं, जिन्हें किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने अपनी सांस रोक ली-थरूर

अपने लेख में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 25 जून 1975 और 21 मार्च 1977 के बीच प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल के काले युग को याद किया। थरूर ने कहा, 25 जून, 1975 को भारत एक नई रियालिटी के साथ जागा। हवाएं सामान्य सरकारी घोषणाओं से नहीं, बल्कि एक भयावह आदेश से गूंज रही थीं। इमरजेंसी की घोषणा कर दी गई थी। 21 महीनों तक, मौलिक अधिकारों को सस्पेंड कर दिया गया, प्रेस पर लगाम लगा दी गई और राजनीतिक असहमति को बेरहमी से दबा दिया गया। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने अपनी सांस रोक ली। 50 साल बाद भी, वो काल भारतीयों की याद में “आपातकाल” के रूप में जिंदा है।

संजय गांधी ने जबरन नसबंदी अभियान चलाया-थरूर

आर्टिकल में आगे कहा गया, अनुशासन और व्यवस्था के लिए किए गए प्रयास क्रूरता में बदल दिए गए। जिन्हें उचित नहीं ठहराया जा सकता। थरूर ने कहा कि इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने जबरन नसबंदी अभियान चलाया। यह आपातकाल का गलत उदाहरण बना। ग्रामीण इलाकों में मनमाने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हिंसा और जबरदस्ती की गई। नई दिल्ली जैसे शहरों में झुग्गियों को बेरहमी से ध्वस्त कर दिया गया और उन्हें साफ कर दिया गया। हजारों लोग बेघर हो गए। उनके कल्याण पर ध्यान नहीं दिया गया।

इंदिरा गांधी को लेकर क्या बोले थरूर

थरूर ने आगे लिखा, पीएम इंदिरा गांधी को लगा था कि सिर्फ आपातकाल की स्थिति ही आंतरिक अव्यवस्था और बाहरी खतरों से निपट सकती है। अराजक देश में अनुशासन ला सकती है। जब इमरजेंसी का ऐलान हुआ, तब मैं भारत में था, हालांकि मैं जल्द ही ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए अमेरिका चला गया और बाकी की सारी चीजें वहीं दूर से देखी। जब इमरजेंसी लगी तो मैं काफी बैचेन हो गया था। भारत के वो लोग जो ज़ोरदार बहस और स्वतंत्र अभिव्यक्ति के आदी थे, एक भयावह सन्नाटे में बदल गया था। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जोर देकर कहा कि ये कठोर कदम जरूरी थे।

न्यायपालिका भारी दबाव में झुक गई-थरूर

थरूर ने कहा, न्यायपालिका इस कदम का समर्थन करने के लिए भारी दबाव में झुक गई, यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण और नागरिकों के स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के निलंबन को भी बरकरार रखा। पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा। व्यापक संवैधानिक उल्लंघनों ने मानवाधिकारों के हनन की एक भयावह तस्वीर को जन्म दिया। शशि थरूर ने आगे कहा, उस समय जिन लोगों ने शासन के खिलाफ आवाज उठाने का साहस किया उन सभी को हिरासत में लिया गया। उनको यातनाएं झेलनी पड़ी।

लोकतंत्र को हल्के में नहीं लेने की सलाह

थरूर ने अपने आर्टिकल में लोकतंत्र को हल्के में नहीं लेने की बात पर जोर दिया। उन्होंने इसे एक 'बहुमूल्य विरासत' बताया, जिसे लगातार संरक्षित करना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता को केंद्रित करने, असहमति को दबाने और संविधान को दरकिनार करने का असंतोष कई रूपों में फिर सामने आ सकता है।

थरूर ने कहा कि अक्सर ऐसे कार्यों को देशहित या स्थिरता के नाम पर उचित ठहराया जाता है। इस अर्थ में, इमरजेंसी एक चेतावनी के रूप में खड़ी है। उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि लोकतंत्र के संरक्षकों को हमेशा सतर्क रहना होगा, ताकि ऐसी स्थितियां दोबारा पैदा न हों। थरूर का यह लेख इमरजेंसी के 50 साल पूरे होने से पहले आया है।

ऑपरेशन सिंदूर' क्यों रखा गया मिशन का नाम? अमेरिका में शशि थरूर ने दिया ये जवाब

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कांग्रेस नेता शशि थरूर अमेरिका में हैं। थरूर भारत की तरफ से दुनियाभर में भेजे गए डेलीगेशन का हिस्सा हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में सर्वदलीय भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल का मकसद आतंकवाद पर भारत का रुख दुनिया के सामने रखना है। कांग्रेस नेता ने यूएस स्थित नेशनल प्रेस क्लब में एक बातचीत के दौरान बताया कि आखिर भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन को 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम क्यों दिया। थरूर ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' का नाम बहुत सोच-समझकर रखा गया है। उन्होंने सिंदूर के महत्व को बताते हुए कहा कि यह रंग खून से अलग नहीं है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम क्यों चुना?

बुधवार को अमेरिका में नेशनल प्रेस क्लब में एक संवाद सत्र के दौरान यह पूछे जाने पर कि भारत ने आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम क्यों चुना। कांग्रेस सांसद ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर, वास्तव में, मुझे लगा कि यह एक शानदार नाम है। सिंदूर, अगर कुछ अमेरिकी इसके बारे में नहीं जानते हैं, तो यह सिंदूर हिंदू परंपरा में विवाहित महिलाओं अपनी मांग में लगाती है। यह व्यापक रूप से प्रचलित है। कुछ गैर-हिंदू भी इसे करते हैं। सिंदूर विवाह समारोह के समय लगाया जाता है और उसके बाद हर दिन विवाहित महिलाएं इसे लगाती हैं। इसलिए, हम इन क्रूर आतंकवादियों के बारे में बहुत सचेत थे, जिन्होंने पति को उनकी पत्नियों और बच्चों के सामने गोली मार दी। आतंकियों ने महिलाओं को छोड़ दिया और जब एक पत्नी चिल्लाई, ‘मुझे भी मार दो’, तो उसे कहा गया, नहीं, ‘तुम वापस जाओ और उन्हें बताओ कि हमने क्या किया है।’ इसी कारण से महिलाएं इस जघन्य, वीभत्स कृत्य से बच गईं।

सिंदूर का रंग खून के रंग से बहुत अलग नहीं-थरूर

थरूर ने आगे कहा कि उस सिंदूर को वास्तव में 26 भारतीय महिलाओं के माथे से मिटा दिया गया था, मैं हिंदू महिलाएं कहने वाला था, लेकिन उनमें से एक वास्तव में ईसाई थी, लेकिन बाकी सभी के माथे का सिंदूर इन आतंकवादी घटना में मिटा दिया गया। इसलिए हम सबसे पहले सिंदूर मिटाने की उस घटना का बदला लेना चाहते थे। लेकिन, दूसरी बात, यह कोई संयोग नहीं है कि सिंदूर का रंग लाल है, जो खून के रंग से बहुत अलग नहीं है, और कई मायनों में एक हिंदी मुहावरा है कि ‘खून का बदला खून’; यहां यह ‘सिंदूर का बदला खून’ होगा, यानी सिंदूर के साथ जो कुछ भी किया गया है, उसके जवाब में खून।

शशि थरूर फिर कांग्रेस की अहम बैठक से रहे गायब, जानें क्‍या बताई वजह

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केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एक बार फिर शशि थरूर की नाराजगी की खबर सामने आई है। चुनावी तैयारियों को लेकर आज होने वाली कांग्रेस की अहम बैठक में थरूर शामिल नहीं हुए। आज राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ दिल्ली में बैठक प्रस्तावित थी। लेकिन इसमें थरूर नहीं पहुंचे।

शशि थरूर के ऑफिस की तरफ से इस बाबत बयान जारी किया गया है, जिसमें स्‍पष्‍ट तौर पर कहा गया है कि शशि थरूर आज यानी 23 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली केरल कांग्रेस की अहम चुनावी तैयारी बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। उनके कार्यालय ने कहा, ‘वे केरल लिटरेचर फेस्टिवल के लिए कालीकट में हैं, जो एशिया का सबसे बड़ा साहित्य महोत्सव है। वह अपनी नवीनतम पुस्तक पर बोल रहे हैं, जो श्री नारायण गुरु पर आधारित है। उन्होंने पार्टी को पहले ही सूचित कर दिया था कि वह बैठक में शामिल नहीं हो सकेंगे।’

क्या है थरूर की नाराजगी की वजह?

शशि थरूर और कांग्रेस पार्टी के बीच के मतभेद की खबरें लंबे समय से आ रही है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी एक बार फिर चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के हालिया कोच्चि दौरे के दौरान उन्हें अपेक्षित सम्मान न मिलने से थरूर नाराज हैं।

राहुल गांधी ने थरूर का नाम भी नहीं लिया

कुछ दिन पहले कोच्चि में कांग्रेस ने महापंचायत कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें राहुल गांधी भी मौजूद थे। कार्यक्रम से पहले यह तय किया गया कि वरिष्ठता को देखते हुए शशि थरूर के भाषण के बाद सिर्फ राहुल गांधी का भाषण होगा। महापंचायत में वक्ताओं का क्रम भी तय था, इसके बावजूद शशि थरूर के भाषण के बाद अन्य वक्ताओं की लाइन लगा दी। राहुल गांधी भी अंत में बोले, मगर उन्होंने मंच पर मौजूद शशि थरूर का नाम भी नहीं लिया। यह राहुल गांधी की चूक थी या संकेत, इस घटनाक्रम ने शशि थरूर की नाराजगी को और बढ़ा दिया।

बैठक से दूर लिटरेचल फेस्टिवल में शामिल

बताया जाता है कि महापंचायत में बैठने के क्रम में भी कांग्रेस सांसद की सीनियॉरिटी को दरकिनार किया गया था। शशि थरूर ने इसे अपमान बताते हुए केरल विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा के लिए पार्टी हाईकमान की बुलाई गई बैठक से दूर रहने फैसला किया है। वह इस दौरान कालीकट में हो रहे केरल लिटरेचल फेस्टिवल में शामिल होंगे।

बता दें कि बीते कुछ महीनों में थरूर के कुछ बयान और सोशल मीडिया पोस्ट पार्टी नेतृत्व को असहज करने वाले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के कुछ कदमों की सराहना करते हुए उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग माना गया। इसकी शुरुआत पहलगाम हमले से हुई, जब थरूर ने इंटेलिजेंस चूक के आरोपों पर मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश जाने वाले संसदीय प्रतिनिधिमंडल में शशि थरूर के चयन पर कांग्रेस ने सवाल उठाए।

थरूर बोले- नेहरू की गलतियां स्वीकारना जरूरी, लेकिन हर समस्या के लिए दोषी ठहराना गलत

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिससे कांग्रेस के अंदर खलबली मच सकती है। थरूर ने कहा है कि वे भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारतीय लोकतंत्र का संस्थापक मानते हैं, लेकिन उनकी तारीफ आलोचना से खाली नहीं है। थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन भारत की सभी समस्याओं के लिए उन्हें दोषी ठहराना ठीक नहीं है।

थरूर ने कहा- मैं नेहरू का गहरा प्रशंसक

कांग्रेस सांसद ने कहा कि मैं भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विचारों और दृष्टिकोण की गहरी प्रशंसा करता हूं मैं उनके विचारों और सोच का बहुत सम्मान करता हूं, हालांकि मैं उनके सभी विश्वासों और नीतियों से 100% सहमत नहीं हो सकता। उन्होंने जो बहुत सी चीजें कीं, वे बहुत सराहनीय हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेहरू ने ही भारत में लोकतंत्र को मजबूती से स्थापित किया था।

मोदी सरकार लोकतंत्र विरोधी नहीं पर नेहरू विरोधी-थरूर

थरूर ने आगे कहा कि मैं यह नहीं कहूंगा कि वे (मोदी सरकार) लोकतंत्र विरोधी हैं, लेकिन वे निश्चित रूप से नेहरू विरोधी हैं। नेहरू को एक सुविधाजनक बलि का बकरा बना दिया गया है।

नेहरू को हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते-थरूर

नेहरू की हर मान्यता और नीति का बिना आलोचना समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना आवश्यक है, लेकिन हर चीज के लिए सिर्फ उन्हें जिम्मेदार ठहरा देना गलत है। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में नेहरू की ओर से लिए गए कुछ फैसले गलत हो सकते हैं, लेकिन हम उन्हें हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं।

1962 में हार के लिए नेहरू के फैसले कुछ हद तक जिम्मेदारर-थरूर

1962 के भारत-चीन युद्ध को याद करते हुए, थरूर ने कहा कि वर्तमान सरकार की नेहरू की आलोचना में कुछ सच्चाई हो सकती है। उन्होंने कहा, 'उदाहरण के लिए, 1962 में चीन के खिलाफ हार के लिए कुछ हद तक नेहरू के फैसलों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।' उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन वे अब जो करते हैं वह यह है कि किसी भी मुद्दे पर नेहरू को हर चीज के लिए दोषी ठहराते हैं।'

पुतिन के डिनर में राहुल–खड़गे को न्योता नहीं, शशि थरूर को बुलाया गया, जानें कांग्रेस ने क्या कहा?

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरा पूरा कर अपने देश वापस लौट गए हैं। दिल्ली दौरे के अंतिन दिन शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में रात्रिभोज का आयोजन किया गया। राष्ट्रपति के डिनर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को निमंत्रण नहीं दिया गया। हालांकि, इस दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर जरूर सत्ताधारी दल के नेताओं के साथ सहज भाव से मिलते जुलते देखे गए।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस डिनर में शशि थरूर अपने चिरपरिचित अंदाज में नजर आए। डिनर में थरूर काले रंग के बंद गले का कोट के साथ गले में मरून कलर का मफलर डाल कर पहुंचे थे। वीडियो में थरूर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बात करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल भी नजर आ रहे हैं। निर्मला सीतारमण से बातचीत के बाद थरूर केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल से हाथ मिलाकर आगे बढ़ जाते हैं।

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

राष्ट्रपति भवन आयोजित रात्रिभोज को लेकर कांग्रेस ने दावा किया है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बुलावा नहीं आया। इस पर कांग्रेस ने सरकार पर फिर निशाना साधा है।

कांग्रेस में उठे सवाल

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार रोजाना प्रोटोकॉल तोड़ती है और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास नहीं रखती। थरूर के न्योता स्वीकार करने पर रमेश ने कहा, अगर हमारे नेता को बुलाया नहीं गया और हमें बुलाया गया, तो हमें अपनी अंतरात्मा से सवाल करना चाहिए। किसे बुलाया है और किसे नहीं, इसमें राजनीति खेली गई है। इसे स्वीकार करना भी सवाल उठाता है।

क्या कांग्रेस से किनारा कर रहे हैं शशि थरूर? दूसरी बार पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक से रहे 'गायब'

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कांग्रेस के सांसद शशि थरूर इन दिनों कांग्रेस से दूरी बनाते दिख रहे हैं। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और तिरुवनंतपुरम से पार्टी सांसद शशि थरूर रविवार को संसद के शीतकालीन सत्र के बारे में स्ट्रेटेजिक ग्रुप की एक अहम मीटिंग में शामिल नहीं हुए। यह मीटिंग सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई। इससे पहले एसआईआर के मुद्दे पर बुलाई गई कांग्रेस की बैठक से भी वह नदारद थे। ऐसे में शशि थरूर को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

थरूर के बयानों से लग रहे कयास

कांग्रेस की जरूरी मीटिंग्स से शशि थरूर का लगातार गायब रहना पार्टी में चर्चा का विषय बन गया है। ऐसा तब हो रहा है, जब पिछले कुछ महीनों में शशि थरूर कभी अपने पार्टी की ही बुराई करते दिख रहे हैं, तो कभी पीएम मोदी की तारीफ। उनके इन्हीं बदले तेवर की वजह से राजनीतिक गलियारों में उनकी कांग्रेस से दूरी के कयास लगाए जाने लगे हैं।

एसआईआर के मुद्दे पर हुई बैठक में रहे नदारद

हाल ही में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर बुलाई कांग्रेस की बैठक से भी थरूर नदारद रहे थे, जिसके लिए उनकी तरफ से खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया गया था। लेकिन उस वक्त वह सवालों के घेरे में आ गए थे क्योंकि एक दिन पहले ही वह पीएम मोदी के कार्यक्रम में वह शामिल हुए थे।

शशि थरूर ने की पीएम मोदी के व्याख्यान की तारीफ

पीएम की तारीफ करते ‘एक्स’ पर उनके कई पोस्ट भी आए थे। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बीते 18 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत की आर्थिक दिशा को रेखांकित करने और देश की विरासत को गौरवशाली बनाने पर जोर देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की थी। थरूर ने एक्स पोस्ट में लिखा था, “प्रधानमंत्री मोदी ने ‘विकास के लिए भारत की रचनात्मक अधीरता’ की बात की और एक औपनिवेशिक काल के बाद की मानसिकता से मुक्ति पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब सिर्फ ‘उभरता हुआ बाजार’ नहीं, बल्कि दुनिया के लिए ‘उभरता हुआ मॉडल’ है। उन्होंने देश की आर्थिक मजबूती पर भी ध्यान दिलाया। पीएम मोदी ने कहा कि उन पर हमेशा ‘चुनाव मोड’ में रहने का आरोप लगता है, लेकिन असल में वह लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए ‘भावनात्मक मोड’ में रहते हैं।

कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने उठाए थे सवाल

पीएम मोदी के बारे में उनके कमेंट्स के बाद, पार्टी के दूसरे नेताओं ने उनकी आलोचना की थी। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि शशि थरूर की प्रॉब्लम यह है कि मुझे नहीं लगता कि उन्हें देश के बारे में अधिक पता है... अगर आपके हिसाब से कोई कांग्रेस की पॉलिसी के खिलाफ जाकर देश का भला कर रहा है, तो आपको उन पॉलिसी को फॉलो करना चाहिए... आप कांग्रेस में क्यों हैं? क्या सिर्फ़ इसलिए कि आप एमपी हैं?

वंशवाद' पर ऐसा क्या बोल गए थरूर, कांग्रेस में मचा घमासान, बीजेपी को मिला मौका

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वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने राजनीतिक में वंशवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, राजनीतिक परिदृश्य में वंशवादी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। नेहरू-गांधी परिवार ने यह सिद्ध किया कि राजनीतिक नेतृत्व जन्मसिद्ध अधिकार हो सकता है। थरूर ने कहा कि अब वक्त आ गया कि भारत वंशवाद की जगह योग्यतावाद अपनाए। थरूर के इस बयान पर सियासी बवाल बढ़ गया है।

प्रमोद तिवारी ने थरूर को आड़े हाथों लिया

वंशवाद पर बयान देकर शशि थरूर ने कांग्रेस के भीतर सियासी पारा बढ़ा दिया है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने थरूर को आड़े हाथों लिया है। प्रमोद तिवारी ने शशि थरूर द्वारा गांधी परिवार पर लगाए गए आरोपों पर कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू इस देश के सबसे सक्षम प्रधानमंत्री थे। इंदिरा गांधी ने अपना जीवन बलिदान करके खुद को साबित किया। राजीव गांधी ने भी बलिदान देकर देश सेवा की। ऐसे में अगर कोई गांधी परिवार के वंशवाद की बात करता है तो फिर देश में किस अन्य परिवार ने ऐसा बलिदान, समर्पण और क्षमता दिखाई है। क्या वो भाजपा है?

रशीद अल्वी भी थरूर की राय से असहमत

कांग्रेस नेता रशीद अल्वी ने भी थरूर की राय से असहमति जताई। उन्होंने कहा, लोकतंत्र में फैसला जनता करती है। आप यह नहीं कह सकते कि किसी को सिर्फ इसलिए चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं कि उसके पिता सांसद थे। यह हर क्षेत्र में होता है, राजनीति कोई अपवाद नहीं।

बीजेपी ने कसा तंज

वहीं, थरूर के इस बयान से भाजपा को बैठे बिठाए एक मुद्दा मिल गया है और राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने थरूर के बयान को लेकर कांग्रेस पर तंज कसा है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद जयहिंद ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि शशि थरूर ने भारत के नेपो किड राहुल गांधी और छोटे नेपो किड तेजस्वी यादव पर सीधा हमला बोला है। शहजाद ने लिखा कि डॉ. थरूर खतरों के खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने नेपो किड या वंशवाद के नवाब पर सीधा हमला बोला है। जब मैंने नेपो नामदार राहुल गांधी के खिलाफ 2017 में बोला तो आप जानते हैं कि मेरे साथ क्या हुआ। सर आपके लिए प्रार्थना कर रहा हूं। फर्स्ट फैमिली बदला जरूर लेती है।

धर्मेंद्र प्रधान ने किया थरूर का समर्थन

वहीं, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने थरूर के लेख के बाद कांग्रेस और राजद पर तंज कसते हुए कहा, थरूर ने यह लेख अपने अनुभव के आधार पर लिखा है। मैं शशि थरूर के बयान का स्वागत करता हूं। उनकी टिप्पणी से कांग्रेस और राजद को निश्चित रूप से ठेस पहुंचेगी क्योंकि उनकी राजनीति एक परिवार तक सीमित है। वे अपने परिवार से बाहर सोच ही नहीं सकते।

थरूर ने क्या लिखा कि मच गया घमासान

दरअसल, शशि थरूर ने हाल ही में एक लेख में लिखा था कि वंशवाद सिर्फ कांग्रेस में नहीं, बल्कि लगभग हर राजनीतिक दल में मौजूद है। उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक शक्ति वंश के आधार पर तय होती है, न कि योग्यता, प्रतिबद्धता या जनसंपर्क से, तो शासन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। थरूर ने यह भी लिखा कि नेहरू-गांधी परिवार जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का प्रभाव भारत की आज़ादी और लोकतंत्र के इतिहास से जुड़ा हुआ है। लेकिन इसी ने यह विचार भी मजबूत किया कि नेतृत्व किसी का जन्मसिद्ध अधिकार हो सकता है, और यह सोच आज सभी पार्टियों और राज्यों तक फैल गई है।'

राहुल गांधी के समर्थन में आए शशि थरूर, ‘वोट चोरी’ के दावे पर दिया साथ

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से चुनाव में ‘वोट चोरी’ करने का आरोप लगाए जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राहुल गांदी ने गुरूवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पीपीटी पेश कर कर्नाटक में लोकसभा सीट, महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और साथ ही एक ही वोटर के कई कई बूथों और राज्यों में नाम होने का आरोप लगाया। जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई नेताओं ने राहुल गांधी की तीखी आलोचना की है। हालांकि, काफी समय से अपनी ही पार्टी के खिलाफ बोल रहे केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी राहुल गांधी का समर्थन किया है।

पिछले कुछ महीनों से पार्टी आलाकमान से इतर नजरिया रखने वाले शशि थरूर ने गुरुवार को कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए इन आरोपों की जांच होनी चाहिए। राहुल गांधी ने चुनाव में धांधली के 'ठोस सबूत' पेश किए और भारतीय चुनाव आयोग पर बीजेपी के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया। थरूर ने चुनाव आयोग से कार्रवाई करने और स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया।

चुनाव आयोग से की खास गुजारिश

शशि थरूर ने कांग्रेस पार्टी के पोस्ट को अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया है। इसमें राहुल गांधी लोकसभा और कई राज्यों में विधानसभा के दौरान वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के बारे में बता रहे हैं। शशि थरूर ने इस पोस्ट को शेयर करते हुए कहा, ‘ये गंभीर प्रश्न हैं जिनका सभी दलों और सभी मतदाताओं के हित में गंभीरता से समाधान किया जाना चाहिए। हमारा लोकतंत्र इतना मूल्यवान है कि इसकी विश्वसनीयता को अक्षमता, लापरवाही या उससे भी बदतर, जानबूझकर छेड़छाड़ से नष्ट नहीं होने दिया जा सकता। चुनाव आयोग को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और चुनाव आयोग के प्रवक्ता को देश को सूचित करते रहना चाहिए।’

काफी समय से पार्टी लाइन से हटकर दे रहे थे बयान

शशि थरूर का ये बयान काफी अहम माना जा रहा है। दरअसल, शशि थरूर पिछले कुछ महीनों से कई बार पार्टी लाइन से हटकर बयान दे चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की थी और इमरजेंसी के दौर की आलोचना भी की थी। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी थरूर सरकार के साथ खड़े नजर आए। जिसके बाद मॉनसूव सत्र के दौरान कांग्रेस की ओर से पार्टी के वक्ताओं में थरूर का नाम शामिल नहीं किया गया था। जिसको लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थी।

ट्रंप के टैरिफ पर “लाल-पीले” हो रहे राहुल, थरूर और मनीष तिवारी ने अलापा अगल राग

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भारत के साथ ट्रेड डील फाइनल नहीं होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इसके बाद ट्रंप ने रूस और भारत की इकोनॉमी को डेड यानी मृत बताया। फिर क्या था भारत में ट्रंप के टैरिफ पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। ट्रंप के टैरिफ वाले एलान के बाद देश में सियासत गरमा गई है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ट्रंप के हां में हां मिलाया है और कहा कि मुझे खुशी है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ये फैक्ट कहा है।

शशि थरूर और मनीष तिवारी सरकार के समर्थन में

ट्रंप के टैरिफ वाले एलान के बाद कांग्रेस के कई नेताओं ने सरकार से तमाम सवाल किए। इस बीच कांग्रेस के ही नेता शशि थरूर और मनीष तिवारी ने मोदी सरकार को जोरदार समर्थन दिया है। शशि थरूर ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह से अनुचित है, तो हमें कहीं और जाना होगा। वहीं, मनीष तिवारी ने कहा कि यह सब भारत की स्‍ट्रेटज‍िक ऑटोनॉमी का सबूत है, जो नेहरू की गुटन‍िरपेक्षता से शुरू हुई और अब पीएम मोदी की आत्‍मन‍िर्भर भारत वाली सोच का ह‍िस्‍सा है।

थरूर ने क्या कहा?

संसद परिसर में समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यह एक चुनौतीपूर्ण वार्ता है। हम कई देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं। अमेरिका अकेला ऐसा देश नहीं है जिसके साथ बातचीत चल रही है। यूरोपीय संघ के साथ हमारी बातचीत चल रही है, हमने ब्रिटेन के साथ एक समझौता कर लिया है, और हम अन्य देशों के साथ भी बातचीत कर रहे हैं। अगर हम अमेरिका में प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते, तो हमें अमेरिका के बाहर अपने बाजारों में विविधता लानी पड़ सकती है।

अगर अच्छा सौदा संभव नहीं है, तो पीछे हटना पड़ता है-थरूर

थरूर ने आगे कहा कि हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। अगर अमेरिका अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह से अनुचित है, तो हमें कहीं और जाना होगा। यही भारत की ताकत है; हम चीन की तरह पूरी तरह से निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्था नहीं हैं। हमारे पास एक अच्छा और मजबूत घरेलू बाजार है। हमें अपने वार्ताकारों को सर्वोत्तम संभव सौदा खोजने के लिए पूरा समर्थन देना चाहिए। अगर कोई अच्छा सौदा संभव नहीं है, तो हमें पीछे हटना पड़ सकता है।

मनीष त‍िवारी ने क्या कहा?

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष त‍िवारी ने इस मामले में एक्‍स पर लंबा चौड़ा पोस्‍ट ल‍िखा। मनीष त‍िवारी ने लिखा, डोनाल्ड ट्रंप ने शायद 1947 से चली आ रही भारत की स्‍ट्रैटज‍िक ऑटोनॉमी को अब तक की सबसे बड़ी श्रद्धांजलि दी है। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने गुटनिरपेक्षता की नीति लागू की, जिसे आज मल्टी-अलाइनमेंट कहा जाता है। फ‍िर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उसे आत्‍मन‍िर्भरता के साथ आगे बढ़ाया और आज भारत आत्‍मनिर्भर कहा जा रहा है। ये वे रणनीतिक सिलसिले हैं जो भारत को दुनिया से अपनी शर्तों पर और अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय हित में जुड़ने की फ्लैक्‍स‍िबिल‍िटी देते हैं। मनीष त‍िवारी ने लिखा, क्या डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ की धमकी उस स्‍ट्रैटज‍िक ऑटोनॉमी को कोई फर्क पहुंचाएगी, जिसे हमने दशकों से और अलग-अलग सरकारों के तहत बनाया है? बिल्कुल नहीं. क्या यह भारत-अमेरिका के व्यापक संबंधों के ताने-बाने को नुकसान पहुंचा सकता है? जवाब है शायद!

कांग्रेस के अन्य नेताओं से अलग राग

बता दें कि शशि थरूर और मनीष त‍िवारी पहली बार सरकार के समर्थन में बातें नहीं कर रहे हैं। इससे पहले भी मोदी सरकार की नीत‍ियों की तारीफ करने को लेकर दोनों नेता कई बार कांग्रेस के न‍िशाने पर भी रहे हैं।

ऑपरेशन सिंदूर पर बहस से पहले थरूर का “मौनव्रत”, कांग्रेस वक्ताओं की लिस्ट में क्यों नहीं मिली जगह?

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संसद के मॉनसून सत्र में सोमवार यानी आज पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर बहस हो रही है। दोपहर 12 बजे से इस चर्चा का नेतृत्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करने वाले थे, लेकिन जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी दलों ने शोरगुल और नारेबाजी करते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की, जिसके बाद सदन की कार्यवाही 1 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। कांग्रेस की तरफ से चर्चा में शामिल होने वाले वक्ताओं की लिस्ट जारी कर दी गई है। खास बात है कि इस बार कांग्रेस सांसद शशि थरूर का नाम नहीं है।

लोकसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर'पर चर्चा के दौरान कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी, गौरव गोगोई , प्रियंका गांधी, दीपेंद्र हुड्डा, परिणीति शिंदे, शफी परमबिल, मणिकम टैगोर और राजा बराड़ पक्ष रखेंगे। कांग्रेस के शशि थरूर इस चर्चा में पार्टी की ओर से हिस्सा नहीं लेंगे। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि उन्होंने स्वेच्छा से चर्चा में भाग लेने से मना कर दिया।

थरूर के मौनव्रत के सियासी मायने

इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर संसद भवन पहुंचे। संसद परिसर पहुंच शशि थरूर से पत्रकारों ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा। इस पर शशि थरूर ने कहा कि मौनव्रत...मौनव्रत। इसके बाद शशि थरूर हंसते हुए निकल गए। 20 सेंकड के इस वीडियो में शशि थरूर ने जिस तरह से इस चर्चा से किनारा किया है उसके बड़े मायने निकाले जा रहे हैं।

मौनव्रत की वजह

माना जा रहा है कि चर्चा पर थरूर के इनकार की वजह है कि वह इस मामले को लेकर सरकार पर हमला नहीं करना चाहते हैं। मालूम हो कि थरूर पहले ऑपरेशन सिंदूर को सरकार की तारीफ कर चुके हैं। वहीं, थरूर ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश गए प्रतिनिधि मंडल का भी हिस्सा थे। ऐसे में यदि थरूर इस चर्चा में कांग्रेस की तरफ से बोलते हैं तो यह उनके लिए अपनी ही बात से पीछे हटने वाली स्थिति हो जाती। ऐसे में माना जा रहा है कि थरूर ने इस तरह की स्थिति से बचने के लिए खुद के चर्चा से अलग कर लिया है।

थरूर ने की थी ऑपरेशन सिंदूर की सराहना

बता दें कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारतीय सेना की ओर से चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे। शशि थरूर ने इस ऑपरेशन की सराहना करते हुए इसे सटीक और सुनियोजित बताया था। उन्होंने इसके लिए मोदी सरकार की जमकर तारीफ की थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में यह भी कहा कि यह बहुत अच्छी तरह से किया गया। भारत ने वैध लक्ष्यों को निशाना बनाया। उनकी यह टिप्पणी कांग्रेस की आधिकारिक रुख से अलग थी, क्योंकि पार्टी ने खुफिया विफलताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने के दावों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई थी।

अब थरूर ने आपातकाल पर उठाया सवाल, बोले- जबरन कराई गईं नसबंदियां, असहमति को बेरहमी से दबाया

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पिछले कुछ समय से कांग्रेस सांसद शशि थरूर अपनी ही पार्टी पर हमलावर हैं। अब थरूर ने 1975 में लगी इमरजेंसी पर सवाल उठाए हैं। थरूर ने इमरजेंसी पर एक आर्टिकल लिखा है और इसमें आपातकाल की जमकर आलोचना की है। उन्होंने आपातकाल को लेकर कांग्रेस को घेरा है। थरूर ने कहा कि आपातकाल के नाम पर आजादी छीनी गई।उन्होंने आपातकाल में इंदिरा गांधी और संजय गांधी के कामों को लेकर सवाल उठाए।

मलयालम भाषा के अखबार 'दीपिका' में गुरुवार को प्रकाशित अपने लेख में शशि थरूर ने आपातकाल को सिर्फ भारतीय इतिहास के 'काले अध्याय' के रूप में याद नहीं करके, इससे सबक लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि अनुशासन और व्यवस्था के लिए उठाए गए कदम कई बार ऐसी क्रूरता में बदल जाते हैं, जिन्हें किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने अपनी सांस रोक ली-थरूर

अपने लेख में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 25 जून 1975 और 21 मार्च 1977 के बीच प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल के काले युग को याद किया। थरूर ने कहा, 25 जून, 1975 को भारत एक नई रियालिटी के साथ जागा। हवाएं सामान्य सरकारी घोषणाओं से नहीं, बल्कि एक भयावह आदेश से गूंज रही थीं। इमरजेंसी की घोषणा कर दी गई थी। 21 महीनों तक, मौलिक अधिकारों को सस्पेंड कर दिया गया, प्रेस पर लगाम लगा दी गई और राजनीतिक असहमति को बेरहमी से दबा दिया गया। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने अपनी सांस रोक ली। 50 साल बाद भी, वो काल भारतीयों की याद में “आपातकाल” के रूप में जिंदा है।

संजय गांधी ने जबरन नसबंदी अभियान चलाया-थरूर

आर्टिकल में आगे कहा गया, अनुशासन और व्यवस्था के लिए किए गए प्रयास क्रूरता में बदल दिए गए। जिन्हें उचित नहीं ठहराया जा सकता। थरूर ने कहा कि इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने जबरन नसबंदी अभियान चलाया। यह आपातकाल का गलत उदाहरण बना। ग्रामीण इलाकों में मनमाने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हिंसा और जबरदस्ती की गई। नई दिल्ली जैसे शहरों में झुग्गियों को बेरहमी से ध्वस्त कर दिया गया और उन्हें साफ कर दिया गया। हजारों लोग बेघर हो गए। उनके कल्याण पर ध्यान नहीं दिया गया।

इंदिरा गांधी को लेकर क्या बोले थरूर

थरूर ने आगे लिखा, पीएम इंदिरा गांधी को लगा था कि सिर्फ आपातकाल की स्थिति ही आंतरिक अव्यवस्था और बाहरी खतरों से निपट सकती है। अराजक देश में अनुशासन ला सकती है। जब इमरजेंसी का ऐलान हुआ, तब मैं भारत में था, हालांकि मैं जल्द ही ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए अमेरिका चला गया और बाकी की सारी चीजें वहीं दूर से देखी। जब इमरजेंसी लगी तो मैं काफी बैचेन हो गया था। भारत के वो लोग जो ज़ोरदार बहस और स्वतंत्र अभिव्यक्ति के आदी थे, एक भयावह सन्नाटे में बदल गया था। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जोर देकर कहा कि ये कठोर कदम जरूरी थे।

न्यायपालिका भारी दबाव में झुक गई-थरूर

थरूर ने कहा, न्यायपालिका इस कदम का समर्थन करने के लिए भारी दबाव में झुक गई, यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण और नागरिकों के स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के निलंबन को भी बरकरार रखा। पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा। व्यापक संवैधानिक उल्लंघनों ने मानवाधिकारों के हनन की एक भयावह तस्वीर को जन्म दिया। शशि थरूर ने आगे कहा, उस समय जिन लोगों ने शासन के खिलाफ आवाज उठाने का साहस किया उन सभी को हिरासत में लिया गया। उनको यातनाएं झेलनी पड़ी।

लोकतंत्र को हल्के में नहीं लेने की सलाह

थरूर ने अपने आर्टिकल में लोकतंत्र को हल्के में नहीं लेने की बात पर जोर दिया। उन्होंने इसे एक 'बहुमूल्य विरासत' बताया, जिसे लगातार संरक्षित करना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता को केंद्रित करने, असहमति को दबाने और संविधान को दरकिनार करने का असंतोष कई रूपों में फिर सामने आ सकता है।

थरूर ने कहा कि अक्सर ऐसे कार्यों को देशहित या स्थिरता के नाम पर उचित ठहराया जाता है। इस अर्थ में, इमरजेंसी एक चेतावनी के रूप में खड़ी है। उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि लोकतंत्र के संरक्षकों को हमेशा सतर्क रहना होगा, ताकि ऐसी स्थितियां दोबारा पैदा न हों। थरूर का यह लेख इमरजेंसी के 50 साल पूरे होने से पहले आया है।

ऑपरेशन सिंदूर' क्यों रखा गया मिशन का नाम? अमेरिका में शशि थरूर ने दिया ये जवाब

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कांग्रेस नेता शशि थरूर अमेरिका में हैं। थरूर भारत की तरफ से दुनियाभर में भेजे गए डेलीगेशन का हिस्सा हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में सर्वदलीय भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल का मकसद आतंकवाद पर भारत का रुख दुनिया के सामने रखना है। कांग्रेस नेता ने यूएस स्थित नेशनल प्रेस क्लब में एक बातचीत के दौरान बताया कि आखिर भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन को 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम क्यों दिया। थरूर ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' का नाम बहुत सोच-समझकर रखा गया है। उन्होंने सिंदूर के महत्व को बताते हुए कहा कि यह रंग खून से अलग नहीं है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम क्यों चुना?

बुधवार को अमेरिका में नेशनल प्रेस क्लब में एक संवाद सत्र के दौरान यह पूछे जाने पर कि भारत ने आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम क्यों चुना। कांग्रेस सांसद ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर, वास्तव में, मुझे लगा कि यह एक शानदार नाम है। सिंदूर, अगर कुछ अमेरिकी इसके बारे में नहीं जानते हैं, तो यह सिंदूर हिंदू परंपरा में विवाहित महिलाओं अपनी मांग में लगाती है। यह व्यापक रूप से प्रचलित है। कुछ गैर-हिंदू भी इसे करते हैं। सिंदूर विवाह समारोह के समय लगाया जाता है और उसके बाद हर दिन विवाहित महिलाएं इसे लगाती हैं। इसलिए, हम इन क्रूर आतंकवादियों के बारे में बहुत सचेत थे, जिन्होंने पति को उनकी पत्नियों और बच्चों के सामने गोली मार दी। आतंकियों ने महिलाओं को छोड़ दिया और जब एक पत्नी चिल्लाई, ‘मुझे भी मार दो’, तो उसे कहा गया, नहीं, ‘तुम वापस जाओ और उन्हें बताओ कि हमने क्या किया है।’ इसी कारण से महिलाएं इस जघन्य, वीभत्स कृत्य से बच गईं।

सिंदूर का रंग खून के रंग से बहुत अलग नहीं-थरूर

थरूर ने आगे कहा कि उस सिंदूर को वास्तव में 26 भारतीय महिलाओं के माथे से मिटा दिया गया था, मैं हिंदू महिलाएं कहने वाला था, लेकिन उनमें से एक वास्तव में ईसाई थी, लेकिन बाकी सभी के माथे का सिंदूर इन आतंकवादी घटना में मिटा दिया गया। इसलिए हम सबसे पहले सिंदूर मिटाने की उस घटना का बदला लेना चाहते थे। लेकिन, दूसरी बात, यह कोई संयोग नहीं है कि सिंदूर का रंग लाल है, जो खून के रंग से बहुत अलग नहीं है, और कई मायनों में एक हिंदी मुहावरा है कि ‘खून का बदला खून’; यहां यह ‘सिंदूर का बदला खून’ होगा, यानी सिंदूर के साथ जो कुछ भी किया गया है, उसके जवाब में खून।