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क्या बुआ ममता बनर्जी से नाराज हैं भतीजे अभिषेक बनर्जी? बीजेपी ज्वाइन करने की अटकलों पर भी दिया जवाब

#abhishekbanerjeeonrumorsofjoiningbjp

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की अपनी बुआ और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मतभेद की चर्चा है। इस बीच ऐसी अफवाहें थीं कि अभिषेक बनर्जी भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन करने वाले हैं। इस बीच अभिषेक ने बड़ा बयान दिया है। अभिषेक बनर्जी ने अपनी बुआ और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मतभेद की अटकलों को महज अफवाह करार दिया है। उन्होंने ममता के प्रति अपनी वफादारी का दावा किया। उन्होंने कोलकाता में पार्टी सम्मेलन में कहा, मैं टीएमसी का वफादार सिपाही हूं और मेरी नेता ममता बनर्जी हैं।

भाजपा का दिमाग ठिकाने नहीं आया- अभिषेक

अभिषेक ने कहा कि बाजार में फैलाया जा रहा है कि अभिषेक बनर्जी भाजपा में जा रहे हैं। कहा यह भी जा रहा है कि अभिषेक बनर्जी नई पार्टी ला रहे हैं। ये सब बेकार की बातें हैं। मेरा गला काट भी दिया जाए तो भी ममता बनर्जी ज़िंदाबाद की आवाज निकलेगी। भाजपा 18 से 12 पर आ गयी है पर दिमाग ठिकाने नहीं आया, अभी तक बंगाल के लोगों के पैसे नहीं दे रहे हैं।

अभिषेक का बीजेपी पर तंज

अभिषेक ने कहा कि बीजेपी के पास ईडी, सीबीआई, आईटी है, लेकिन बीजेपी के पास टीएमसी जैसा समर्थक नहीं है। हमने वोटर लिस्ट देखी है, हम लोगों को वोटर लिस्ट के बारे में चेतावनी दे रहे हैं। ममता बनर्जी ने कहा है कि हम 197 वोटों से जीतेंगे। मेरा मानना है कि हम 215 सीटों से जीतेंगे। लोगों के पास जाओ, पार्टी सुप्रीमो के आदेश का इंतजार मत करो। सोचो और मानो कि पार्टी तुम्हारी है। ममता चौथी बार सीएम बनेंगी।

अभी मैदान में उतरो, मैं मैदान में रहूंगा। हमें अपनी सीटें बढ़ानी हैं। साजिश मत करो, व्हाट्सएप की राजनीति का कोई फायदा नहीं है। हम विपक्ष को एक चुटकी भी जमीन नहीं देंगे। हम 215 से ज्यादा सीटों से जीतेंगे।

रायपुर की सड़कों पर नशे में गाड़ी चलाते मिले ये 23 लोग, पुलिस ने जब्त की गाड़ी, ड्राइविंग लाइसेंस भी होगा निलंबित

रायपुर-  अटल नगर नवा रायपुर में कल देर रात ड्रंक एंड ड्राइव वाहन चालकों के विरूद्ध पुलिस ने विशेष अभियान चलाया. यातायात पुलिस व थाना तेलीबांधा, मंदिर हसौद और राखी स्टॉफ ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 23 शराबी वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वाहनों को जब्त किया. 

बता दे कि शहर की यातायात व्यवस्था के सुगम संचालन में ड्रंक एंड ड्राइव वाहन चालक सबसे बड़ी बाधा है. नशे की हालत में होने के कारण स्वयं तथा दूसरे वाहन चालक के जान के लिए जोखिम भरा होता है. ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ रायपुर पुलिस लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई करती है।

इसी क्रम 22 फरवरी को पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायपुर डॉ. लाल उमेद सिंह के आदेशानुसार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रायपुर डॉ प्रशांत शुक्ला के मार्गदर्शन में रायपुर पुलिस ने शहर के श्रीराम मंदिर के पास, फुण्डहर चौक एवं एयरपोर्ट टर्निग नवा रायपुर में बेरिकेटिंग कर चेकिंग अभियान चलाया. 23 नशेड़ी वाहन चालकों के विरूद्ध मोटरयान अधिनियम की धारा 185 के तहत कार्रवाई करते हुए प्रकरण निराकरण के लिए कोर्ट भेजा गया. इसके साथ सभी वाहन चालकों के लाइसेंस निलंबन के लिए परिवहन कार्यालय भेजा जाएगा.


ये लोग मिले नशे की हालत में

शनिवार रात अभियान के दौरान मुकेश कुमार (Mukesh Kumar), रंजन मिश्रा (Ranjan Mishra), श्याम अवस्थी (Shyam Awasthi), गौरव राघव (Gaurav Raghav), जगत राम (Jagat Ram), पराग तिवारी (Parag Tiwari), अनीज कुमार (Aneej Kumar), ब्रिशांक कुमार (Brishank Kumar), दीपेश सोनी (Dipesh Soni), धनंजय जायसवाल (Dhananjay Jaiswal), पूनाराम (Poonaram), ललित कुमार (Lalit Kumar), बब्बन मांझी (Babban Manjhi), संजू कुमार (Sanju Kumar), नवीन गेड़ाम (Naveen Gedam), अभिषेक सिंह (Abhishek Singh), अर्जुन बरई (Arjun Barai), देवेंद्र कुमार (Devendra Kumar), आकाश सोनकर (Akash Sonkar), नितेश मंदानी (Nitesh Mandani), अमितेश खत्री (Amitesh Khatri), स्वरित टंडन (Swarit Tandon) और मोती महिलांगे (Moti Mahilange) नशे में वाहन चलाते पकड़े गए.

*occasion of The Cricket Association of Bengal’s 97th Foundation Day*

Khabar kolkata sports Desk: On the occasion of The Cricket Association of Bengal’s 97th Foundation Day, CAB President Snehasish Ganguly hoisted the association colours at the Eden Gardens on Tuesday in presence of CAB Vice President Amalendu Biswas, CAB Hony Secretary Naresh Ojha, former CAB office bearer Bablu Koley, CAB member Robi Mitra, former CAB President and current IPL Governing Council member Abhishek Dalmiya and other CAB officials, members.

सिर्फ 500 रुपए का नोट लेकर संसद जाता हूं...', नोटों की गड्डी मिलने पर अभिषेक मनु सिंघवी की सफाई

#abhishekmanusinghviclarificationonfindingbundleofnotesinparliament

राज्यसभा में कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी की सीट के नीचे कथित तौर पर नोटों की गड्डियां मिलने के मामले में आज जमकर हंगामा हुआ। सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन को बताया कि सुरक्षा अधिकारियों ने कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी की सीट पर नकदी की गड्डी पाई है। राज्यसभा में नोटों की गड्डी मिलने के मामले ने तूल पकड़ता दिख रहा है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए जांच की मांग की। उधर, अभिषेक मनु सिंघवी ने भी इस मामले में सफाई दी। उन्होंने कहा, ये नोटों की गड्डी मेरी नहीं है। मैं संसद में सिर्फ 500 रुपये लेकर पहुंचता हूं।

क्या बोले सिंघवी?

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वे यह सुनकर वो "हैरान" हैं। उन्होंने कहा, मैं जब भी राज्यसभा जाता हूं तो 500 रुपये का एक नोट साथ लेकर जाता हूं। अगर सुरक्षा एजेंसियों में कोई कमी है तो उसे भी पूरी तरह उजागर किया जाना चाहिए। मैंने इसके बारे में कभी नहीं सुना। मैं कल दोपहर 12.57 बजे सदन के अंदर पहुंचा। सदन से दोपहर 1 बजे उठा। दोपहर 1 से 1:30 बजे तक मैं अयोध्या प्रसाद के साथ कैंटीन में बैठा और लंच किया। दोपहर 1:30 बजे मैं संसद से चला गया। इसलिए कल सदन में मेरा कुल ठहराव 3 मिनट का था और कैंटीन में मेरा ठहराव 30 मिनट का था, 3 मिनट में ये कैसे हुआ।

तेलंगाना से राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अगर इस तरह से सांसदों की सीट पर कुछ भी रखा जाने लगा, तो शायद उनकी सीट को लॉक रखना जरूरी हो जाएगा। इस बात की जरूरत पड़ जाएगी कि सांसद के बैठने की जगह को कांच के एनक्लोजर से बंद कर दिया जाए और उस एनक्लोजर की चाबी सांसद के पास ही रहने दी जाए।

सभापति जगदीप धनखड़ ने क्या कहा

इससे पहले सभापति जगदीप धनखड़ ने आज सदन में बताया कि कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी की सीट के पास राज्यसभा कक्ष में 500 रुपये के नोटों की गड्डी पाई गई। सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन को सूचित किया कि 5 दिसंबर, 2024 को सदन के स्थगित होने के बाद, कक्ष की नियमित तोड़फोड़ विरोधी जांच के दौरान, सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी की सीट पर नोटों की एक गड्डी पाई गई थी। उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है।

मल्लिकार्जुन खरगे ने जताई आपत्ति

राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ ने जैसे ही नोट मिलने की बात कही, विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा,'जब तक मामले की जांच चल रही है और सब कुछ स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक आपको (सभापति) उनका (अभिषेक मनु सिंघवी) नाम नहीं बोलना था।

दोनों पक्षों को निंदा करनी चाहिए-नड्डा

इस मसले पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि मैं चाहता हूं कि जांच होनी चाहिए और डिटेल आनी चाहिए। यह सदन की गरिमा पर कुठाराघात है। मुझे विश्वास है कि सही जांच होगी।मुझे उम्मीद थी कि हमारे विपक्ष के नेता भी विस्तृत जांच की मांग करेंगे। विपक्ष को हमेशा सद्बुद्धि रखनी चाहिए।स्वस्थ मन और स्वस्थ भावना के साथ विवरण सामने आना चाहिए। दोनों पक्षों को इसकी निंदा करनी चाहिए।

राज्यसभा में कांग्रेस सांसद की सीट से मिलीं नोटों की गड्डियां; जांच की मांग पर सदन पर जमकर हंगामा

#rajya_sabha_abhishek_manu_singhvi_seat_note_cash_recovered

राज्यसभा में कांग्रेस सांसद की सीट के नीचे नोटों की गड्डी मिलने का दावा किया गया है। इसको लेकर सदन में जोरदार हंगामा हो रहा है। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कांग्रेस सासंद अभिषेक मनु सिंघवी की सीट के नीचे से नोटों की गद्दी मिलने का दावा किया। उन्होंने कहा कि कल सिक्योंरिटी चेक के दौरान सिंघवी की सीट के नीचे से नोट की गड्डी मिली। धनखड़ ने कहा कि सीट नंबर 222 से नोटों की गड्डी बरामद हुई। नोट मिलने का मामला बेहद गंभीर है।

सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन को सूचित किया कि 5 दिसंबर, 2024 को सदन के स्थगित होने के बाद, कक्ष की नियमित तोड़फोड़ विरोधी जांच के दौरान, सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी की सीट पर नोटों की एक गड्डी पाई गई थी। उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है। इस घोषणा से सदन में हंगामा शुरू हो गया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच विपक्षी सदस्यों के आचरण को लेकर बहस हुई।

इस मसले पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि किसी पर तीव्रता दिखाओ और किसी मुद्दे पर मिट्टी डालो। मैं सोच रहा था एलओपी बड़े सीनियर नेता हैं और वह कहेंगे कि मामले की जांच होनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं कहा उन्होंने। मैं चाहता हूं कि जांच होनी चाहिए और डिटेल आनी चाहिए।

इससे पहले सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सभापति को इस मामले की जांच करनी चाहिए।मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती है, हमें किसी भी सदस्य का नाम नहीं लेना चाहिए। इस पर सभापति ने कहा कि वे इस भावना की सराहना करते हैं। लेकिन सदन में बहस के दौरान लगभग हर दिन इसका उल्लंघन होता है।

छत्तीसगढ़ कैडर के IAS अभिषेक शर्मा का इंटर-स्टेट डेपुटेशन एक साल के लिए बढ़ाया, आदेश जारी …

नई दिल्ली-   केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ कैडर के 2018 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक शर्मा (IAS Abhishek Sharma) का इंटर-स्टेट डेपुटेशन एक साल के लिए बढ़ा दिया है. इस निर्णय के तहत अभिषेक शर्मा का डेपुटेशन अब 8 जुलाई 2025 तक होगा.

जारी आदेश के मुताबिक, भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर) नियम, 1954 के नियम 6(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार ने अभिषेक शर्मा की एजीएमयूटी कैडर (केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर) में प्रतिनियुक्ति को 08 जुलाई 2024 से एक वर्ष की अवधि के लिए बढ़ाने की मंजूरी दे दी है.

देखिये आदेश की कॉपी-

अभिषेक सिंघवी ने कहा- खत्म कर देना चाहिए राज्यपाल का पद, जानें क्यों की ऐसी मांग?*
#abhishek_manu_singhvi_said_governor_post_should_be_abolished *
कांग्रेस नेता और कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने राज्यपाल के पद को लेकर बड़ा बयान दिया है। राज्यपालों और विपक्षी नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के बीच बढ़ते संघर्षों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंहवी ने कहा कि या तो राज्यपाल का पद खत्म कर देना चाहिए या फिर सबकी सहमति से ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति करनी चाहिए जो तुच्छ राजनीति में शामिल न हो। इस दौरान कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर राज्यपालों की भूमिका को दयनीय बनाने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि संसद के दोनों सदनों में अध्यक्ष की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुधार किए जाएं। अभिषेक सिंघवी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को एक साक्षात्कार दिया। पीटीआई को दिए इंटरव्यू में सिंघवी ने संसद में आसन और विपक्ष के बीच टकराव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘यह बहुत दुखद है.. इस कार्यकाल के पूरा होने तक मैं राज्यसभा में 20 साल की अवधि पूरी कर लूंगा। मैं संसदीय भावना को महत्व देता हूं। मैं वास्तव में इसमें विश्वास करता हूं। मेरा मानना है कि सेंट्रल हॉल मात्र एक जगह नहीं है, यह एक ‘अवधारणा’ (कॉन्सेप्ट) है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं दलगत भावना से अलग विशाल हृदय वाली उदारता में विश्वास करता हूं।‘ *सांसदों के निलंबन पर ये कहा* पिछली एनडीए सरकार के दौरान संसद के शीतकालीन सत्र में बड़े पैमाने पर सांसदों के निलंबन के संदर्भ में उन्होंने कहा, 'आप यह कहकर लोकतंत्र को नकार नहीं सकते कि असहमति के कारण मैं 142 लोगों को निलंबित कर दूंगा। विपक्ष को अपनी बात रखनी होगी और अंततः सरकार का अपना रास्ता होगा। लेकिन मुझे अपनी बात कहने की जरूरत है और आपको अपनी बात कहने की, उस प्रक्रिया को अपने आप चलने दीजिए। सिर्फ दिखावे के लिए संसद (आर्टिफिशियल पार्लियामेंट) नहीं हो सकती।' उन्होंने कहा कि अब यह राज्यों में भी हो रहा है और किसी एमएलसी को सिर्फ इस वजह से सदन से निष्कासित कर दिया जाता है कि उसने सरकार की आलोचना की। *स्पीकर के चुनाव पर खड़े किए सवाल* आगे उन्होंने बिना किसी राज्य का नाम लिए कहा कि अब तो राज्यों में भी यही हो रहा है। वहां किसी एमएलसी को मात्र इस कारण सदन से बाहर कर दिया जाता है कि उसने सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र का सार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विचार की स्वतंत्रता है। इस दौरान उन्होंने इंग्लैंड की संसदीय व्यवस्था का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह पहले भारतीय संसदीय व्यवस्था में था, लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। आज हमारे यहां ऐसा है कि सत्ता धारी दल पहले से तय कर लेते हैं कि अगली संसद में फलाना व्यक्ति स्पीकर होगा, ऐसे में चुनाव से पहले उनकी सीट से कोई दूसरा चुनाव नहीं लड़ेगा और वह व्यक्ति निर्विरोध निर्वाचित हो जाएगा। *राज्यपालों की भूमिका बहुत दयनीय- अभिषेक मनु सिंघवी* सिंघवी ने राज्यपालों की भूमिका को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्र पर हमला करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने राज्यपालों की भूमिका बहुत दयनीय कर दी है। इस सरकार ने हर संस्था को नीचा दिखाया है। उन्होंने कहा कि आज राज्यपाल शासन को अवरुद्ध करते हैं। आज उनके स्तर पर विधेयकों को मंजूरी देने में विलंब होता है। तमिलनाडु में 10 विधेयकों को रोककर रखा गया था। तब जैसे ही मैंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया तो उससे एक दिन पहले ही दो तीन विधेयकों को मंजूरी दे दी गई और बाकी को राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया।
अभिषेक सिंघवी ने कहा- खत्म कर देना चाहिए राज्यपाल का पद, जानें क्यों की ऐसी मांग?*
#abhishek_manu_singhvi_said_governor_post_should_be_abolished *
कांग्रेस नेता और कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने राज्यपाल के पद को लेकर बड़ा बयान दिया है। राज्यपालों और विपक्षी नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के बीच बढ़ते संघर्षों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंहवी ने कहा कि या तो राज्यपाल का पद खत्म कर देना चाहिए या फिर सबकी सहमति से ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति करनी चाहिए जो तुच्छ राजनीति में शामिल न हो। इस दौरान कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर राज्यपालों की भूमिका को दयनीय बनाने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि संसद के दोनों सदनों में अध्यक्ष की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुधार किए जाएं। अभिषेक सिंघवी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को एक साक्षात्कार दिया। पीटीआई को दिए इंटरव्यू में सिंघवी ने संसद में आसन और विपक्ष के बीच टकराव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘यह बहुत दुखद है.. इस कार्यकाल के पूरा होने तक मैं राज्यसभा में 20 साल की अवधि पूरी कर लूंगा। मैं संसदीय भावना को महत्व देता हूं। मैं वास्तव में इसमें विश्वास करता हूं। मेरा मानना है कि सेंट्रल हॉल मात्र एक जगह नहीं है, यह एक ‘अवधारणा’ (कॉन्सेप्ट) है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं दलगत भावना से अलग विशाल हृदय वाली उदारता में विश्वास करता हूं।‘ *सांसदों के निलंबन पर ये कहा* पिछली एनडीए सरकार के दौरान संसद के शीतकालीन सत्र में बड़े पैमाने पर सांसदों के निलंबन के संदर्भ में उन्होंने कहा, 'आप यह कहकर लोकतंत्र को नकार नहीं सकते कि असहमति के कारण मैं 142 लोगों को निलंबित कर दूंगा। विपक्ष को अपनी बात रखनी होगी और अंततः सरकार का अपना रास्ता होगा। लेकिन मुझे अपनी बात कहने की जरूरत है और आपको अपनी बात कहने की, उस प्रक्रिया को अपने आप चलने दीजिए। सिर्फ दिखावे के लिए संसद (आर्टिफिशियल पार्लियामेंट) नहीं हो सकती।' उन्होंने कहा कि अब यह राज्यों में भी हो रहा है और किसी एमएलसी को सिर्फ इस वजह से सदन से निष्कासित कर दिया जाता है कि उसने सरकार की आलोचना की। *स्पीकर के चुनाव पर खड़े किए सवाल* आगे उन्होंने बिना किसी राज्य का नाम लिए कहा कि अब तो राज्यों में भी यही हो रहा है। वहां किसी एमएलसी को मात्र इस कारण सदन से बाहर कर दिया जाता है कि उसने सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र का सार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विचार की स्वतंत्रता है। इस दौरान उन्होंने इंग्लैंड की संसदीय व्यवस्था का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह पहले भारतीय संसदीय व्यवस्था में था, लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। आज हमारे यहां ऐसा है कि सत्ता धारी दल पहले से तय कर लेते हैं कि अगली संसद में फलाना व्यक्ति स्पीकर होगा, ऐसे में चुनाव से पहले उनकी सीट से कोई दूसरा चुनाव नहीं लड़ेगा और वह व्यक्ति निर्विरोध निर्वाचित हो जाएगा। *राज्यपालों की भूमिका बहुत दयनीय- अभिषेक मनु सिंघवी* सिंघवी ने राज्यपालों की भूमिका को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्र पर हमला करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने राज्यपालों की भूमिका बहुत दयनीय कर दी है। इस सरकार ने हर संस्था को नीचा दिखाया है। उन्होंने कहा कि आज राज्यपाल शासन को अवरुद्ध करते हैं। आज उनके स्तर पर विधेयकों को मंजूरी देने में विलंब होता है। तमिलनाडु में 10 विधेयकों को रोककर रखा गया था। तब जैसे ही मैंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया तो उससे एक दिन पहले ही दो तीन विधेयकों को मंजूरी दे दी गई और बाकी को राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया।
তথ্য-প্রমান কখনো মিথ্যে বলেনা! ১০০ দিনের কাজের তহবিল প্রসঙ্গে বিজেপির মিথ্যাচার সরকারি নথি-সহ ফাঁস করল সর্বভারতীয় তৃণমূল কংগ্রেস!

বাংলার সঙ্গে বঞ্চনা প্রসঙ্গে অভিষেক বন্দ্যোপাধ্যায় এনডিএ সরকারের তুলোধনা করার পরদিনই সর্বভারতীয় তৃণমূল কংগ্রেস বুধবার সকালে সরকারি নথি প্রকাশ করে প্রমাণ করল, ১০০ দিনের কাজের অধীনে রাজ্যকে কোনও টাকা দেওয়া হয়নি। এই ঘটনার মাধ্যমেই মঙ্গলবার কেন্দ্রীয় অর্থমন্ত্রী নির্মলা সীতারমণ যে মিথ্যাচার করেছিলেন, তাও ফাঁস হয়ে গেল। কেন্দ্রীয় অর্থমন্ত্রী বলেছিলেন, বিরোধী রাজনৈতিক দলগুলি দ্বারা শাসিত রাজ্যগুলির সঙ্গে কেন্দ্র কোনও বঞ্চনা করেনি

এক্স হ্যান্ডেলে তৃণমূল কংগ্রেসের তরফে এই প্রসঙ্গে একটি পোস্ট করা হয়। তাতে লেখা হয় : “The cover has been blown wide open! Yesterday, FM put up a brave face denying any 'vanchana' of Opposition-ruled states. But official documents from say otherwise: Bengal received ZERO funds under MGNREGA. Will the Bangla-Birodhi Jomidars dare to accept Shri challenge and #ReleaseWhitePaper before they run out of their BORROWED TIME?”

১৪ মার্চ, তৃণমূল কংগ্রেসের সর্বভারতীয় সাধারণ সম্পাদক বিজেপি নেতৃত্বকে সরাসরি চ্যালেঞ্জ করেন। তাঁর দাবি ছিল, একুশের বিধানসভা নির্বাচনে বিজেপি হেরে যাওয়ার পর, ১০০ দিনের কাজ ও আবাস যোজনার আওতায় বাংলায় কত টাকা পাঠিয়েছে কেন্দ্রীয় সরকার, তার শ্বেতপত্র প্রকাশ করা হোক। তারপর থেকে ১৩৯ দিন এবং ৩,৩৩৫ ঘণ্টারও বেশি সময় কেটে গিয়েছে। কিন্তু, বিজেপি এখনও এই বিষয়ে কোনও পদক্ষেপ করেনি। পরিবর্তে, তারা সংসদে দাঁড়িয়েই মিথ্যাচার করছে এবং বাংলার বিরুদ্ধে আর্থিক প্রতিরোধ চালিয়ে যাচ্ছে

তৃণমূল কংগ্রেসের সর্বভারতীয় সাধারণ সম্পাদক তথা সাংসদ মঙ্গলবারই কেন্দ্রীয় অর্থমন্ত্রীর দাবি মিথ্যা বলে সাফ জানিয়ে দেন। সংসদের বাইরে সাংবাদিকদের প্রশ্নের উত্তরে অভিষেক বন্দ্যোপাধ্যায় পুনরায় দাবি তোলেন, ২০২১ সালের বিধানসভা নির্বাচনে লজ্জার পরাজয়ের পর বিজেপি নেতৃত্বাধীন কেন্দ্রীয় সরকার বাংলাকে কত টাকা দিয়েছে, শ্বেতপত্র প্রকাশ করে তা সর্বসমক্ষে আনা হোক। তিনি বলেন, ‘‘ওঁরা শ্বেতপত্র প্রকাশ করতে পারছেন না। কারণ, ওঁদের কাছে সেই সংক্রান্ত কোনও তথ্যই নেই। বাংলার মানুষকে বঞ্চিত করে বিজেপি আসলে রাজনৈতিক বৈষম্যের নীতি অবলম্বন করেছে’’

পরে সন্ধ্যায় এক্স হ্যান্ডেলে তিনি লেখেন : "During her budget reply, which lasted over 100 minutes, the Hon’ble Finance Minister made hundreds of FALSE CLAIMS but failed to mention Bengal’s deprivation even once. The Union Govt claimed in Parliament that no state is being "denied any money." But even 138 Days & 3319+ hours later, leadership has failed to provide a WHITE PAPER on MGNREGA & AWAS YOJANA since their 2021 defeat in WB. The stress of being on BORROWED TIME is becoming more evident with every such cover-up!”
झारखंड में अगले 5 दिनों का मौसम फोरकास्ट
Ranchi: Weather Forecast & Updates for Jharkhand for the next five days by Abhishek Anand, Sc. C & Head, Meteorological Centre, Ranchi
क्या बुआ ममता बनर्जी से नाराज हैं भतीजे अभिषेक बनर्जी? बीजेपी ज्वाइन करने की अटकलों पर भी दिया जवाब

#abhishekbanerjeeonrumorsofjoiningbjp

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की अपनी बुआ और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मतभेद की चर्चा है। इस बीच ऐसी अफवाहें थीं कि अभिषेक बनर्जी भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन करने वाले हैं। इस बीच अभिषेक ने बड़ा बयान दिया है। अभिषेक बनर्जी ने अपनी बुआ और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मतभेद की अटकलों को महज अफवाह करार दिया है। उन्होंने ममता के प्रति अपनी वफादारी का दावा किया। उन्होंने कोलकाता में पार्टी सम्मेलन में कहा, मैं टीएमसी का वफादार सिपाही हूं और मेरी नेता ममता बनर्जी हैं।

भाजपा का दिमाग ठिकाने नहीं आया- अभिषेक

अभिषेक ने कहा कि बाजार में फैलाया जा रहा है कि अभिषेक बनर्जी भाजपा में जा रहे हैं। कहा यह भी जा रहा है कि अभिषेक बनर्जी नई पार्टी ला रहे हैं। ये सब बेकार की बातें हैं। मेरा गला काट भी दिया जाए तो भी ममता बनर्जी ज़िंदाबाद की आवाज निकलेगी। भाजपा 18 से 12 पर आ गयी है पर दिमाग ठिकाने नहीं आया, अभी तक बंगाल के लोगों के पैसे नहीं दे रहे हैं।

अभिषेक का बीजेपी पर तंज

अभिषेक ने कहा कि बीजेपी के पास ईडी, सीबीआई, आईटी है, लेकिन बीजेपी के पास टीएमसी जैसा समर्थक नहीं है। हमने वोटर लिस्ट देखी है, हम लोगों को वोटर लिस्ट के बारे में चेतावनी दे रहे हैं। ममता बनर्जी ने कहा है कि हम 197 वोटों से जीतेंगे। मेरा मानना है कि हम 215 सीटों से जीतेंगे। लोगों के पास जाओ, पार्टी सुप्रीमो के आदेश का इंतजार मत करो। सोचो और मानो कि पार्टी तुम्हारी है। ममता चौथी बार सीएम बनेंगी।

अभी मैदान में उतरो, मैं मैदान में रहूंगा। हमें अपनी सीटें बढ़ानी हैं। साजिश मत करो, व्हाट्सएप की राजनीति का कोई फायदा नहीं है। हम विपक्ष को एक चुटकी भी जमीन नहीं देंगे। हम 215 से ज्यादा सीटों से जीतेंगे।

रायपुर की सड़कों पर नशे में गाड़ी चलाते मिले ये 23 लोग, पुलिस ने जब्त की गाड़ी, ड्राइविंग लाइसेंस भी होगा निलंबित

रायपुर-  अटल नगर नवा रायपुर में कल देर रात ड्रंक एंड ड्राइव वाहन चालकों के विरूद्ध पुलिस ने विशेष अभियान चलाया. यातायात पुलिस व थाना तेलीबांधा, मंदिर हसौद और राखी स्टॉफ ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 23 शराबी वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वाहनों को जब्त किया. 

बता दे कि शहर की यातायात व्यवस्था के सुगम संचालन में ड्रंक एंड ड्राइव वाहन चालक सबसे बड़ी बाधा है. नशे की हालत में होने के कारण स्वयं तथा दूसरे वाहन चालक के जान के लिए जोखिम भरा होता है. ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ रायपुर पुलिस लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई करती है।

इसी क्रम 22 फरवरी को पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायपुर डॉ. लाल उमेद सिंह के आदेशानुसार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रायपुर डॉ प्रशांत शुक्ला के मार्गदर्शन में रायपुर पुलिस ने शहर के श्रीराम मंदिर के पास, फुण्डहर चौक एवं एयरपोर्ट टर्निग नवा रायपुर में बेरिकेटिंग कर चेकिंग अभियान चलाया. 23 नशेड़ी वाहन चालकों के विरूद्ध मोटरयान अधिनियम की धारा 185 के तहत कार्रवाई करते हुए प्रकरण निराकरण के लिए कोर्ट भेजा गया. इसके साथ सभी वाहन चालकों के लाइसेंस निलंबन के लिए परिवहन कार्यालय भेजा जाएगा.


ये लोग मिले नशे की हालत में

शनिवार रात अभियान के दौरान मुकेश कुमार (Mukesh Kumar), रंजन मिश्रा (Ranjan Mishra), श्याम अवस्थी (Shyam Awasthi), गौरव राघव (Gaurav Raghav), जगत राम (Jagat Ram), पराग तिवारी (Parag Tiwari), अनीज कुमार (Aneej Kumar), ब्रिशांक कुमार (Brishank Kumar), दीपेश सोनी (Dipesh Soni), धनंजय जायसवाल (Dhananjay Jaiswal), पूनाराम (Poonaram), ललित कुमार (Lalit Kumar), बब्बन मांझी (Babban Manjhi), संजू कुमार (Sanju Kumar), नवीन गेड़ाम (Naveen Gedam), अभिषेक सिंह (Abhishek Singh), अर्जुन बरई (Arjun Barai), देवेंद्र कुमार (Devendra Kumar), आकाश सोनकर (Akash Sonkar), नितेश मंदानी (Nitesh Mandani), अमितेश खत्री (Amitesh Khatri), स्वरित टंडन (Swarit Tandon) और मोती महिलांगे (Moti Mahilange) नशे में वाहन चलाते पकड़े गए.

*occasion of The Cricket Association of Bengal’s 97th Foundation Day*

Khabar kolkata sports Desk: On the occasion of The Cricket Association of Bengal’s 97th Foundation Day, CAB President Snehasish Ganguly hoisted the association colours at the Eden Gardens on Tuesday in presence of CAB Vice President Amalendu Biswas, CAB Hony Secretary Naresh Ojha, former CAB office bearer Bablu Koley, CAB member Robi Mitra, former CAB President and current IPL Governing Council member Abhishek Dalmiya and other CAB officials, members.

सिर्फ 500 रुपए का नोट लेकर संसद जाता हूं...', नोटों की गड्डी मिलने पर अभिषेक मनु सिंघवी की सफाई

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राज्यसभा में कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी की सीट के नीचे कथित तौर पर नोटों की गड्डियां मिलने के मामले में आज जमकर हंगामा हुआ। सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन को बताया कि सुरक्षा अधिकारियों ने कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी की सीट पर नकदी की गड्डी पाई है। राज्यसभा में नोटों की गड्डी मिलने के मामले ने तूल पकड़ता दिख रहा है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए जांच की मांग की। उधर, अभिषेक मनु सिंघवी ने भी इस मामले में सफाई दी। उन्होंने कहा, ये नोटों की गड्डी मेरी नहीं है। मैं संसद में सिर्फ 500 रुपये लेकर पहुंचता हूं।

क्या बोले सिंघवी?

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वे यह सुनकर वो "हैरान" हैं। उन्होंने कहा, मैं जब भी राज्यसभा जाता हूं तो 500 रुपये का एक नोट साथ लेकर जाता हूं। अगर सुरक्षा एजेंसियों में कोई कमी है तो उसे भी पूरी तरह उजागर किया जाना चाहिए। मैंने इसके बारे में कभी नहीं सुना। मैं कल दोपहर 12.57 बजे सदन के अंदर पहुंचा। सदन से दोपहर 1 बजे उठा। दोपहर 1 से 1:30 बजे तक मैं अयोध्या प्रसाद के साथ कैंटीन में बैठा और लंच किया। दोपहर 1:30 बजे मैं संसद से चला गया। इसलिए कल सदन में मेरा कुल ठहराव 3 मिनट का था और कैंटीन में मेरा ठहराव 30 मिनट का था, 3 मिनट में ये कैसे हुआ।

तेलंगाना से राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अगर इस तरह से सांसदों की सीट पर कुछ भी रखा जाने लगा, तो शायद उनकी सीट को लॉक रखना जरूरी हो जाएगा। इस बात की जरूरत पड़ जाएगी कि सांसद के बैठने की जगह को कांच के एनक्लोजर से बंद कर दिया जाए और उस एनक्लोजर की चाबी सांसद के पास ही रहने दी जाए।

सभापति जगदीप धनखड़ ने क्या कहा

इससे पहले सभापति जगदीप धनखड़ ने आज सदन में बताया कि कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी की सीट के पास राज्यसभा कक्ष में 500 रुपये के नोटों की गड्डी पाई गई। सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन को सूचित किया कि 5 दिसंबर, 2024 को सदन के स्थगित होने के बाद, कक्ष की नियमित तोड़फोड़ विरोधी जांच के दौरान, सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी की सीट पर नोटों की एक गड्डी पाई गई थी। उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है।

मल्लिकार्जुन खरगे ने जताई आपत्ति

राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ ने जैसे ही नोट मिलने की बात कही, विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा,'जब तक मामले की जांच चल रही है और सब कुछ स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक आपको (सभापति) उनका (अभिषेक मनु सिंघवी) नाम नहीं बोलना था।

दोनों पक्षों को निंदा करनी चाहिए-नड्डा

इस मसले पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि मैं चाहता हूं कि जांच होनी चाहिए और डिटेल आनी चाहिए। यह सदन की गरिमा पर कुठाराघात है। मुझे विश्वास है कि सही जांच होगी।मुझे उम्मीद थी कि हमारे विपक्ष के नेता भी विस्तृत जांच की मांग करेंगे। विपक्ष को हमेशा सद्बुद्धि रखनी चाहिए।स्वस्थ मन और स्वस्थ भावना के साथ विवरण सामने आना चाहिए। दोनों पक्षों को इसकी निंदा करनी चाहिए।

राज्यसभा में कांग्रेस सांसद की सीट से मिलीं नोटों की गड्डियां; जांच की मांग पर सदन पर जमकर हंगामा

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राज्यसभा में कांग्रेस सांसद की सीट के नीचे नोटों की गड्डी मिलने का दावा किया गया है। इसको लेकर सदन में जोरदार हंगामा हो रहा है। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कांग्रेस सासंद अभिषेक मनु सिंघवी की सीट के नीचे से नोटों की गद्दी मिलने का दावा किया। उन्होंने कहा कि कल सिक्योंरिटी चेक के दौरान सिंघवी की सीट के नीचे से नोट की गड्डी मिली। धनखड़ ने कहा कि सीट नंबर 222 से नोटों की गड्डी बरामद हुई। नोट मिलने का मामला बेहद गंभीर है।

सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन को सूचित किया कि 5 दिसंबर, 2024 को सदन के स्थगित होने के बाद, कक्ष की नियमित तोड़फोड़ विरोधी जांच के दौरान, सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी की सीट पर नोटों की एक गड्डी पाई गई थी। उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है। इस घोषणा से सदन में हंगामा शुरू हो गया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच विपक्षी सदस्यों के आचरण को लेकर बहस हुई।

इस मसले पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि किसी पर तीव्रता दिखाओ और किसी मुद्दे पर मिट्टी डालो। मैं सोच रहा था एलओपी बड़े सीनियर नेता हैं और वह कहेंगे कि मामले की जांच होनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं कहा उन्होंने। मैं चाहता हूं कि जांच होनी चाहिए और डिटेल आनी चाहिए।

इससे पहले सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सभापति को इस मामले की जांच करनी चाहिए।मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती है, हमें किसी भी सदस्य का नाम नहीं लेना चाहिए। इस पर सभापति ने कहा कि वे इस भावना की सराहना करते हैं। लेकिन सदन में बहस के दौरान लगभग हर दिन इसका उल्लंघन होता है।

छत्तीसगढ़ कैडर के IAS अभिषेक शर्मा का इंटर-स्टेट डेपुटेशन एक साल के लिए बढ़ाया, आदेश जारी …

नई दिल्ली-   केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ कैडर के 2018 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक शर्मा (IAS Abhishek Sharma) का इंटर-स्टेट डेपुटेशन एक साल के लिए बढ़ा दिया है. इस निर्णय के तहत अभिषेक शर्मा का डेपुटेशन अब 8 जुलाई 2025 तक होगा.

जारी आदेश के मुताबिक, भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर) नियम, 1954 के नियम 6(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार ने अभिषेक शर्मा की एजीएमयूटी कैडर (केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर) में प्रतिनियुक्ति को 08 जुलाई 2024 से एक वर्ष की अवधि के लिए बढ़ाने की मंजूरी दे दी है.

देखिये आदेश की कॉपी-

अभिषेक सिंघवी ने कहा- खत्म कर देना चाहिए राज्यपाल का पद, जानें क्यों की ऐसी मांग?*
#abhishek_manu_singhvi_said_governor_post_should_be_abolished *
कांग्रेस नेता और कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने राज्यपाल के पद को लेकर बड़ा बयान दिया है। राज्यपालों और विपक्षी नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के बीच बढ़ते संघर्षों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंहवी ने कहा कि या तो राज्यपाल का पद खत्म कर देना चाहिए या फिर सबकी सहमति से ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति करनी चाहिए जो तुच्छ राजनीति में शामिल न हो। इस दौरान कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर राज्यपालों की भूमिका को दयनीय बनाने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि संसद के दोनों सदनों में अध्यक्ष की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुधार किए जाएं। अभिषेक सिंघवी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को एक साक्षात्कार दिया। पीटीआई को दिए इंटरव्यू में सिंघवी ने संसद में आसन और विपक्ष के बीच टकराव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘यह बहुत दुखद है.. इस कार्यकाल के पूरा होने तक मैं राज्यसभा में 20 साल की अवधि पूरी कर लूंगा। मैं संसदीय भावना को महत्व देता हूं। मैं वास्तव में इसमें विश्वास करता हूं। मेरा मानना है कि सेंट्रल हॉल मात्र एक जगह नहीं है, यह एक ‘अवधारणा’ (कॉन्सेप्ट) है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं दलगत भावना से अलग विशाल हृदय वाली उदारता में विश्वास करता हूं।‘ *सांसदों के निलंबन पर ये कहा* पिछली एनडीए सरकार के दौरान संसद के शीतकालीन सत्र में बड़े पैमाने पर सांसदों के निलंबन के संदर्भ में उन्होंने कहा, 'आप यह कहकर लोकतंत्र को नकार नहीं सकते कि असहमति के कारण मैं 142 लोगों को निलंबित कर दूंगा। विपक्ष को अपनी बात रखनी होगी और अंततः सरकार का अपना रास्ता होगा। लेकिन मुझे अपनी बात कहने की जरूरत है और आपको अपनी बात कहने की, उस प्रक्रिया को अपने आप चलने दीजिए। सिर्फ दिखावे के लिए संसद (आर्टिफिशियल पार्लियामेंट) नहीं हो सकती।' उन्होंने कहा कि अब यह राज्यों में भी हो रहा है और किसी एमएलसी को सिर्फ इस वजह से सदन से निष्कासित कर दिया जाता है कि उसने सरकार की आलोचना की। *स्पीकर के चुनाव पर खड़े किए सवाल* आगे उन्होंने बिना किसी राज्य का नाम लिए कहा कि अब तो राज्यों में भी यही हो रहा है। वहां किसी एमएलसी को मात्र इस कारण सदन से बाहर कर दिया जाता है कि उसने सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र का सार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विचार की स्वतंत्रता है। इस दौरान उन्होंने इंग्लैंड की संसदीय व्यवस्था का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह पहले भारतीय संसदीय व्यवस्था में था, लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। आज हमारे यहां ऐसा है कि सत्ता धारी दल पहले से तय कर लेते हैं कि अगली संसद में फलाना व्यक्ति स्पीकर होगा, ऐसे में चुनाव से पहले उनकी सीट से कोई दूसरा चुनाव नहीं लड़ेगा और वह व्यक्ति निर्विरोध निर्वाचित हो जाएगा। *राज्यपालों की भूमिका बहुत दयनीय- अभिषेक मनु सिंघवी* सिंघवी ने राज्यपालों की भूमिका को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्र पर हमला करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने राज्यपालों की भूमिका बहुत दयनीय कर दी है। इस सरकार ने हर संस्था को नीचा दिखाया है। उन्होंने कहा कि आज राज्यपाल शासन को अवरुद्ध करते हैं। आज उनके स्तर पर विधेयकों को मंजूरी देने में विलंब होता है। तमिलनाडु में 10 विधेयकों को रोककर रखा गया था। तब जैसे ही मैंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया तो उससे एक दिन पहले ही दो तीन विधेयकों को मंजूरी दे दी गई और बाकी को राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया।
अभिषेक सिंघवी ने कहा- खत्म कर देना चाहिए राज्यपाल का पद, जानें क्यों की ऐसी मांग?*
#abhishek_manu_singhvi_said_governor_post_should_be_abolished *
कांग्रेस नेता और कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने राज्यपाल के पद को लेकर बड़ा बयान दिया है। राज्यपालों और विपक्षी नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के बीच बढ़ते संघर्षों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंहवी ने कहा कि या तो राज्यपाल का पद खत्म कर देना चाहिए या फिर सबकी सहमति से ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति करनी चाहिए जो तुच्छ राजनीति में शामिल न हो। इस दौरान कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर राज्यपालों की भूमिका को दयनीय बनाने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि संसद के दोनों सदनों में अध्यक्ष की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुधार किए जाएं। अभिषेक सिंघवी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को एक साक्षात्कार दिया। पीटीआई को दिए इंटरव्यू में सिंघवी ने संसद में आसन और विपक्ष के बीच टकराव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘यह बहुत दुखद है.. इस कार्यकाल के पूरा होने तक मैं राज्यसभा में 20 साल की अवधि पूरी कर लूंगा। मैं संसदीय भावना को महत्व देता हूं। मैं वास्तव में इसमें विश्वास करता हूं। मेरा मानना है कि सेंट्रल हॉल मात्र एक जगह नहीं है, यह एक ‘अवधारणा’ (कॉन्सेप्ट) है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं दलगत भावना से अलग विशाल हृदय वाली उदारता में विश्वास करता हूं।‘ *सांसदों के निलंबन पर ये कहा* पिछली एनडीए सरकार के दौरान संसद के शीतकालीन सत्र में बड़े पैमाने पर सांसदों के निलंबन के संदर्भ में उन्होंने कहा, 'आप यह कहकर लोकतंत्र को नकार नहीं सकते कि असहमति के कारण मैं 142 लोगों को निलंबित कर दूंगा। विपक्ष को अपनी बात रखनी होगी और अंततः सरकार का अपना रास्ता होगा। लेकिन मुझे अपनी बात कहने की जरूरत है और आपको अपनी बात कहने की, उस प्रक्रिया को अपने आप चलने दीजिए। सिर्फ दिखावे के लिए संसद (आर्टिफिशियल पार्लियामेंट) नहीं हो सकती।' उन्होंने कहा कि अब यह राज्यों में भी हो रहा है और किसी एमएलसी को सिर्फ इस वजह से सदन से निष्कासित कर दिया जाता है कि उसने सरकार की आलोचना की। *स्पीकर के चुनाव पर खड़े किए सवाल* आगे उन्होंने बिना किसी राज्य का नाम लिए कहा कि अब तो राज्यों में भी यही हो रहा है। वहां किसी एमएलसी को मात्र इस कारण सदन से बाहर कर दिया जाता है कि उसने सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र का सार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विचार की स्वतंत्रता है। इस दौरान उन्होंने इंग्लैंड की संसदीय व्यवस्था का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह पहले भारतीय संसदीय व्यवस्था में था, लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। आज हमारे यहां ऐसा है कि सत्ता धारी दल पहले से तय कर लेते हैं कि अगली संसद में फलाना व्यक्ति स्पीकर होगा, ऐसे में चुनाव से पहले उनकी सीट से कोई दूसरा चुनाव नहीं लड़ेगा और वह व्यक्ति निर्विरोध निर्वाचित हो जाएगा। *राज्यपालों की भूमिका बहुत दयनीय- अभिषेक मनु सिंघवी* सिंघवी ने राज्यपालों की भूमिका को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्र पर हमला करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने राज्यपालों की भूमिका बहुत दयनीय कर दी है। इस सरकार ने हर संस्था को नीचा दिखाया है। उन्होंने कहा कि आज राज्यपाल शासन को अवरुद्ध करते हैं। आज उनके स्तर पर विधेयकों को मंजूरी देने में विलंब होता है। तमिलनाडु में 10 विधेयकों को रोककर रखा गया था। तब जैसे ही मैंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया तो उससे एक दिन पहले ही दो तीन विधेयकों को मंजूरी दे दी गई और बाकी को राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया।
তথ্য-প্রমান কখনো মিথ্যে বলেনা! ১০০ দিনের কাজের তহবিল প্রসঙ্গে বিজেপির মিথ্যাচার সরকারি নথি-সহ ফাঁস করল সর্বভারতীয় তৃণমূল কংগ্রেস!

বাংলার সঙ্গে বঞ্চনা প্রসঙ্গে অভিষেক বন্দ্যোপাধ্যায় এনডিএ সরকারের তুলোধনা করার পরদিনই সর্বভারতীয় তৃণমূল কংগ্রেস বুধবার সকালে সরকারি নথি প্রকাশ করে প্রমাণ করল, ১০০ দিনের কাজের অধীনে রাজ্যকে কোনও টাকা দেওয়া হয়নি। এই ঘটনার মাধ্যমেই মঙ্গলবার কেন্দ্রীয় অর্থমন্ত্রী নির্মলা সীতারমণ যে মিথ্যাচার করেছিলেন, তাও ফাঁস হয়ে গেল। কেন্দ্রীয় অর্থমন্ত্রী বলেছিলেন, বিরোধী রাজনৈতিক দলগুলি দ্বারা শাসিত রাজ্যগুলির সঙ্গে কেন্দ্র কোনও বঞ্চনা করেনি

এক্স হ্যান্ডেলে তৃণমূল কংগ্রেসের তরফে এই প্রসঙ্গে একটি পোস্ট করা হয়। তাতে লেখা হয় : “The cover has been blown wide open! Yesterday, FM put up a brave face denying any 'vanchana' of Opposition-ruled states. But official documents from say otherwise: Bengal received ZERO funds under MGNREGA. Will the Bangla-Birodhi Jomidars dare to accept Shri challenge and #ReleaseWhitePaper before they run out of their BORROWED TIME?”

১৪ মার্চ, তৃণমূল কংগ্রেসের সর্বভারতীয় সাধারণ সম্পাদক বিজেপি নেতৃত্বকে সরাসরি চ্যালেঞ্জ করেন। তাঁর দাবি ছিল, একুশের বিধানসভা নির্বাচনে বিজেপি হেরে যাওয়ার পর, ১০০ দিনের কাজ ও আবাস যোজনার আওতায় বাংলায় কত টাকা পাঠিয়েছে কেন্দ্রীয় সরকার, তার শ্বেতপত্র প্রকাশ করা হোক। তারপর থেকে ১৩৯ দিন এবং ৩,৩৩৫ ঘণ্টারও বেশি সময় কেটে গিয়েছে। কিন্তু, বিজেপি এখনও এই বিষয়ে কোনও পদক্ষেপ করেনি। পরিবর্তে, তারা সংসদে দাঁড়িয়েই মিথ্যাচার করছে এবং বাংলার বিরুদ্ধে আর্থিক প্রতিরোধ চালিয়ে যাচ্ছে

তৃণমূল কংগ্রেসের সর্বভারতীয় সাধারণ সম্পাদক তথা সাংসদ মঙ্গলবারই কেন্দ্রীয় অর্থমন্ত্রীর দাবি মিথ্যা বলে সাফ জানিয়ে দেন। সংসদের বাইরে সাংবাদিকদের প্রশ্নের উত্তরে অভিষেক বন্দ্যোপাধ্যায় পুনরায় দাবি তোলেন, ২০২১ সালের বিধানসভা নির্বাচনে লজ্জার পরাজয়ের পর বিজেপি নেতৃত্বাধীন কেন্দ্রীয় সরকার বাংলাকে কত টাকা দিয়েছে, শ্বেতপত্র প্রকাশ করে তা সর্বসমক্ষে আনা হোক। তিনি বলেন, ‘‘ওঁরা শ্বেতপত্র প্রকাশ করতে পারছেন না। কারণ, ওঁদের কাছে সেই সংক্রান্ত কোনও তথ্যই নেই। বাংলার মানুষকে বঞ্চিত করে বিজেপি আসলে রাজনৈতিক বৈষম্যের নীতি অবলম্বন করেছে’’

পরে সন্ধ্যায় এক্স হ্যান্ডেলে তিনি লেখেন : "During her budget reply, which lasted over 100 minutes, the Hon’ble Finance Minister made hundreds of FALSE CLAIMS but failed to mention Bengal’s deprivation even once. The Union Govt claimed in Parliament that no state is being "denied any money." But even 138 Days & 3319+ hours later, leadership has failed to provide a WHITE PAPER on MGNREGA & AWAS YOJANA since their 2021 defeat in WB. The stress of being on BORROWED TIME is becoming more evident with every such cover-up!”
झारखंड में अगले 5 दिनों का मौसम फोरकास्ट
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