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Aug 05 2019, 14:32

पढ़ें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का वो आदेश जिसने कश्मीर से हटाई धारा 370  

जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठा दिया है. जम्मू-कश्मीर अब एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया है. साथ ही घाटी को धारा 370 के जरिए जो विशेषाधिकार मिले हुए थे, वह भी खत्म हो गए हैं. इसके अलावा केंद्र सरकार ने लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर दिया है, यानी लद्दाख अब एक अलग राज्य होगा.

गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के द्वारा दी गई मंजूरी को पेश किया. उन्होंने सदन में संकल्प पत्र को पढ़ा, जिसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया. राष्ट्रपति का वो आदेश किया है, आप यहां पढ़ सकते हैं.

आपको बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर को लेकर दो संकल्प और दो बिल पेश किए. जिसके बाद सदन में हंगामा हुआ और विपक्ष ने बवाल कर दिया.

इसके अलावा मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन विधेयक को पेश किया है. इसके तहत जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग कर दिया गया है. लद्दाख को बिना विधानसभा केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है.

अमित शाह की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि लद्दाख के लोगों की लंबे समय से मांग रही है कि लद्दाख को केंद्र शासित राज्य का दर्ज दिया जाए, ताकि यहां रहने वाले लोग अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकें.

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Aug 05 2019, 14:30

इतिहास बना-भूगोल बदला: देश में 1 राज्य घटा, 9 हुए केंद्र शासित प्रदेश 

नरेंद्र मोदी सरकार के सोमवार पांच अगस्त को आए ऐतिहासिक फैसले ने देश के राज्यों की संख्या घटा दी. इसी के साथ केंद्रशासित राज्यों की संख्या बढ़कर सात से नौ हो गई. अगर किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो जरूरी है कि आप इस नई जानकारी को जरूर अपडेट कर लें. पढ़ें क्या था पूरा फैसला.

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में पांच अगस्त को एक विधेयक पेश किया. इस विधेयक के अनुसार जम्मू कश्मीर राज्य का विभाजन दो केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में करने का प्रस्ताव किया गया है. गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक संकल्प पेश किया जिसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 370 के सभी खंड जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होंगे.

अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू एवं कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक 2019 पेश किया. गृह मंत्री अमित शाह ने लद्दाख के लिये केंद्र शासित प्रदेश के गठन की घोषणा की. यहां चंडीगढ़ की तरह से विधानसभा नहीं होगी. शाह ने राज्यसभा में घोषणा की कि कश्मीर और जम्मू डिवीजन विधान के साथ एक अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा जहां दिल्ली और पुडुचेरी की तरह विधानसभा होगी. इस तरह से देश में केंद्र शासित राज्यों की संख्या 7 से बढ़कर 9 हो गई है.

पहल ये थे केंद्र शासित प्रदेश

1. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली

2. अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह

3. चण्डीगढ़

4. दादरा और नगर हवेली

5. दमन और दीव

6. लक्षद्वीप

7. पुदुच्चेरी

जुड़ा जम्मू कश्मीर और ये नया नाम

सरकार की घोषणा के बाद केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में जम्मू कश्मीर और लद्दाख का नाम जुड़ गया है. अब ये दोनों राज्य सरकार के अधीन होंगे. बता दें कि लंबे समय से लोग इंतजार कर रहे थे कि सरकार जम्मू कश्मीर के बारे में क्या बड़ा फैसला लेने जा रही है. सरकार ने अभी राज्यसभा में संकल्प पेश करते हुए कश्मीर को केंद्र शासित राज्य घोषित करने के साथ ही 370 पर भी फैसला दिया है.

ये हैं केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकार

केन्द्र शासित प्रदेश देश के संघीय प्रशासनिक ढांचे की एक उप-राष्ट्रीय प्रशासनिक इकाई होती है. भारत के दूसरे राज्य जो केंद्र शासित नहीं हैं उनमें राज्यों की अपनी चुनी हुई सरकारें बनती हैं.

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     @India  वहीं केन्द्र शासित प्रदेशों में सीधे-सीधे भारत सरकार का शासन होता है. यहां भारत का राष्ट्रपति अपने सरकारी प्रशासक या उप राज्यपाल नामित करता है. दिल्ली को इस मामले में विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है. 
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Aug 05 2019, 14:00

अनुच्छेद 370 हटने का असर / कश्मीर में अब कोई भी सत्ता में आए, दिल्ली की तरह उपराज्यपाल ही सीएम से ज्यादा ताकतवर होगा  


केंद्र सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का संकल्प पेश किया। इसी के साथ अधिसूचनाजारी कर अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर औरलद्दाख अब दोनों ही केंद्र शासित प्रदेश होंगे। जम्मू-कश्मीर दिल्ली की तरह ही केंद्र शासित प्रदेश होगा। यानी यहां चुनी हुई राज्य सरकार होगी लेकिन इसके साथ ही केंद्र की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल भी होगा। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार और उप राज्यपाल के बीच संवैधानिक शक्तियों के इस्तेमाल को लेकर टकराव होता रहा है।

राष्ट्रपति उपराज्यपाल की नियुक्ति करेंगे

केंद्र सरकार उपराज्यपाल के नाम की सिफारिश राष्ट्रपति से करती है। आमतौर पर राष्ट्रपति केंद्र द्वारा अनुमोदित नाम पर मुहर लगाते हैं। यानी अब मोदी सरकार जिस व्यक्ति का नाम उपराज्यपाल के लिए सुझाएगी, उसे राष्ट्रपति स्वीकार कर लेंगे। अभी सत्यपाल मलिक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल हैं।

सुरक्षा व्यवस्था केंद्र के अधीन रहेगी

दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच मुख्य विवाद ब्यूरोक्रेसी और पुलिस को लेकर रहा है। संवैधानिक व्यवस्था के तहत दिल्ली की सुरक्षा का जिम्मा भारत सरकार के गृह विभाग का है। यानी सीधे तौर पर दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन आती है। जम्मू-कश्मीर में भी अब यही होगा।

ब्यूरोक्रेसी पर भी केंद्र का नियंत्रण

राज्य में आईएएस और आईपीएस अफसरों की तैनाती का अधिकार केंद्र सरकार यानी उपराज्यपाल के पास होगा। दिल्ली में अफसरों की तैनाती को लेकर केंद्र और केजरीवाल सरकार का टकराव रहा है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इसी साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो में ग्रेड एक और ग्रेड दो के अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले का अधिकार केंद्र के पास रहेगा। सामान्य तौर पर देखें तो जम्मू-कश्मीर की राज्य सरकार के पास सामान्य प्रशासनिक सेवाओं के अलावा ज्यादा कुछ नहीं रहेगा। उपराज्यपाल केंद्र के निर्देश के अनुसार सुरक्षा से संबंधित फैसले करेगा। इस मामले पर राज्य सरकार का नहीं, बल्कि उपराज्यपाल का फैसला मान्य होगा।

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Aug 05 2019, 13:11

जानिए किया है अनुच्‍छेद 370,  इस कानून से जम्‍मू-कश्‍मीर को मिलते हैं क्या खास अधिकार ? 

जम्‍मू कश्‍मीर को धारा 370 के द्वारा कुछ विशेषाधिकार दिये गये है । अनुच्‍छेद 370 को संविधान के 21 वें अध्याय में अस्थायी, विशेष संक्रमणकालीन और अतिरिक्त विधायी प्रक्रिया के रूप में शामिल किया गया था। 

ऐसा इसलिए ताकी राज्य के अपने संविधान निर्माण तक प्रतीक्षा न करना पड़े और  आवश्यक वैधानिक प्रावधानों को लागू किया जा सके। इसके अनुसार, भारतीय संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है । लेकिन किसी अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य की सरकार से अनुमोदन कराना होगा।

क्या है आर्टिकल 370 


जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा ने 27 मई, 1949 को कुछ बदलाव सहित आर्टिकल 306 ए (अब आर्टिकल 370) को स्वीकार कर लिया। भारतीय संविधान को 26 नवंबर, 1949 को अंगीकृत किया गया था। लेकिन इससे करीब एक महीना पहले 17 अक्टूबर, 1949 को आर्टिकल 306 A भारतीय संविधान का हिस्सा बन गया। 'इंस्ट्रूमेंट्स ऑफ ऐक्सेशन ऑफ जम्मू ऐंड कश्मीर टु इंडिया' की शर्तों के मुताबिक, आर्टिकल 370 में यह उल्लेख किया गया कि ---  देश की संसद को जम्मू-कश्मीर के लिए रक्षा, विदेश मामले और संचार के सिवा अन्य किसी विषय में कानून बनाने का अधिकार नहीं होगा। साथ ही, जम्मू-कश्मीर को अपना अलग संविधान बनाने की अनुमति दे दी गई। 

जम्‍मू कश्‍मीर को मिले हैं खास अधिकार

अनुच्‍छेद 370 के विशेष प्रावधानों के कारण भारत सरकार के बनाए कानून जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होते हैं। इतना ही नहीं, जम्मू-कश्मीर का अपना अलग झंडा भी है। वहां सरकारी दफ्तरों में भारत के झंडे के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर का झंडा भी लगा रहता है। जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को दोहरी नागरिकता भी मिलती है। वह भारत का नागरिक होने के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर का भी नागरिक होता है। कुल मिलाकर कहें तो आर्टिल 370 के कारण मामला एक देश में दो रिपब्लिक जैसा हो गया है। 


भारत के कानून की ये बातें नहीं होती लागू

1  अनुच्‍छेद 370 कई बातों में जम्‍मू कश्‍मीर को भारतीय कानून से बाहर करता है।

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    2  जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती। जिसके तहत राष्ट्रपति के पास राज्य सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है। 
    
    
    3   भारतीय संविधान की धारा 360 जिसके अन्तर्गत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती। 
    
    
    4   जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है, जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। 
    
    
    5   भारतीय संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य की सरकार से अनुमोदन कराना होगा। 
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Aug 05 2019, 12:21

जम्मू कश्मीर के मुद्दा पर राज्यसभा में हंगामा,अब इस पर वोटिंग हो सकती है,अमित शाह ने कहा जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश हो सकता है,लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा* 


 नई दिल्ली ।राज्यसभा में हंगामे के बीच गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर  से अनुच्छेद 370 हटाने की सिफारिश की है। इसके बाद राज्यसभा  में जमकर हंगामा शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 के कई खंड लागू नहीं होंगे। सिर्फ खंड एक बचा रहेगा। अमित शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर अलग केंद्र शासित प्रदेश बनेगा और लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा। अब इस मुद्दे पर राज्यसभा में वोटिंग हो सकती है।

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Aug 05 2019, 12:02

बिग ब्रेकिंग: मोदी सरकार ने 370 में जम्मू-कश्मीर को मिले विशेषाधिकार खत्म किए, राष्ट्रपति की मंजूरी*

जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग किया गया

जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 35 A हटाया गया

अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने का संकल्प पेश कर दिया है. जिसे राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है. 

अमित शाह के संकल्प पेश करने के बाद राज्यसभा में जोरदार हंगामा हो रहा है. हंगामे के बीच कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद अपनी बात रख रहे हैं.

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Aug 05 2019, 11:56

राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा - अनुच्छेद 370 के सभी खंड जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होंगे,कश्मीर को लेकर केंद्र सरकार का ऐतिहासिक फैसला  

 प्रधानमंत्री आवास पर हुई बैठक के  बाद राज्यसभा में सुबह 11 बजे गृह मंत्री अमित शाह ने कहा  कि कश्मीर में 370 धारा के  सभी अनुच्छेद  लागू नही होंगे ।शाह दोपहर को लोकसभा में भी बयान देंगे।

    आज प्रधानमंत्री के आवास पर बि बैठक में सबसे पहले पहुंचने वालों में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद थे। 

वहीं, कश्मीर के ताजा हालातों पर पीडीपी के सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। इसके अलावा राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने  भी कश्मीर के मुद्दे पर कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को अब नजरबंद किया जा रहा है।यह गलत है ,कश्मीर में उमर अब्दुल्ला,महबूबा मुफ्ती को नज़रबंद कर दिया गया है। उनके पक्ष में शशि थरूर ने भी बयान दिया है।

    इसके अतिरिक्त केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर आरक्षण (द्वितीय संशोधन) बिल 2019 पेश करेंगे। इसके जरिए जम्मू-कश्मीर में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।

 इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है। पिछले दिनों भारी हंगामे के बीच लोकसभा में जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) बिल पास हो गया। इसके साथ ही राज्य में राष्ट्रपति शासन का समय 6 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। पहले राष्ट्रपति शासन का समय 3 जुलाई को समाप्त होने वाला था। 17वीं लोकसभा का पहला सत्र 17 जून को शुरू हुआ और इसका समापन 26 जुलाई को निर्धारित था। लेकिन संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने 23 जुलाई को संसद के मौजूदा सत्र को 10 दिन बढ़ाने का ऐलान किया। अब यह 9 अगस्त को समाप्त होगा।

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Aug 05 2019, 10:56

पी एम आवास में चल रही केंद्रीय कैबिनेट की बैठक खत्म,बैठक के एजेंडे को रखा गया है टॉप सीक्रेट,फैसला लोकसभा और राज्यसभा में रखेगी सरकार     

संभावना है कश्मीर को लेकर सरकार ने लिया है कोई बड़ा फैसला आज जम्मू कश्मीर को लेकर होगी राज्यसभा में चर्चा


पीएम मोद के आवास पर आज कश्मीर में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई । . ये बैठक सुबह 9.30 बजे से शुरू हुई थी जो समाप्त हो गई .
बैठक के एजेंडे को पूरी तरह से टॉप सीक्रेट रखा गया है और इसे सरकार राज्यसभा में 11 बजे और लोकसभा में 12 बजे  रखेगी. बताया जा रहा है कि कैबिनेट बैठक में कश्मीर को लेकर कोई बड़ा फैसला आज लिये जाने  की संभावना है  ।इसी लिए राज्यसभा में आज सिर्फ जम्मू कश्मीर पर ही चर्चा होगी ,अन्य चर्चा को स्थागित कर दिया गया है ।

     इधर कश्मीर के  संदर्भ में अब तक सरकार और सेना आतंकवाद की कमर तोड़ने की मन बना ली है ।
    भाजपा को व्यापक जनाधार भी इसी आधार पर मिला है ।इस बीच सरकार ने अमरनाथ यात्रा और किश्तबाड़ की यात्रा पर तत्काल रोक लगाने और आज घाटी में इंटरनेट और अन्य सेवाओं को ठप्प करने के पीछे भी चर्चा  है कि होने वाले फैसले की सारी सूचना तत्काल लीक नही हो ।

आज होने वाली कैबिनेट बैठक से पहले रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, गृह सचिव राजीव गौबा, खुफिया ब्यूरो (आईबी) के प्रमुख अरविंद कुमार, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख सामंत कुमार गोयल और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया.

इधर कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से हलचल बढ़ी है और लगातार हालात बदल रहे हैं उसके बीच आने बाली राजनीतिक हालात और अपनी स्थिति को लेकर वहां के नेता भी लगातार बैठक कर रहे हैं. रविवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के आवास पर एक सर्वदलीय बैठक हुई. बैठक में पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी शामिल हुईं थी।

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Aug 05 2019, 09:55

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आवास पर सीसीएस की बैठक चल रही  

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में चल रहे हालात के बीच दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आवास पर सीसीएस की बैठक चल रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। बैठक ख़त्म होने के बाद कुछ बड़ा फ़ैसला आने के संकेत मिल रहे हैं। बता दे कि जम्मू कश्मीर में धारा 144 लगाने के बाद महबूबा मुफ्ती समेत दो नेताओं को नजरबंद कर दिया गया हैं, हालांकि लद्दाख मे हालात अभी सामान्य है। वही अभिनेता अनुपम खेर ने कहा है कि कश्मीर समाधान शुरू हो गया है

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Aug 05 2019, 08:58

घाटी के कई इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद, कश्मीरी में धारा 144 लागू, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती नजरबंद  

कश्मीर: कश्मीर में हलचल तेज हो गयी गई है. राज्य की पूर्व सीएम और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और एनसी नेता उमर अब्दुल्ला को श्रीनगर में नजरबंद किया गया है.इसके अलावा सज्जाद लोन को भी नजबंद करने की जानकारी की मिल रही है. श्रीनगर में धारा 144 लगा दी गई है. वहीं मोबाइल इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई है. श्रीनगर में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने आपात बैठक बुलाई. बैठक में जम्मू और कश्मीर के डीजीपी भी मौजूद रहे. इस बीच जम्मू में भी हलचल तेज हो गई है. रैपिड एक्शन फोर्स समेत 30 हजार अतिरिक्त जवान को तैनात किया गया है.जम्मू में धारा 144 लगा दी गई है.  सूत्रों के मुताबिक जम्मू कश्मीर में कर्फ्यू लगाया गया है.  नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला के घर पर सर्वदलीय बैठक हुई. मीटिंग के बाद फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार ऐसा कोई कदम न उठाए, जिससे घाटी के हालात और खराब हों.