स्वच्छ गंगा: योगी सरकार के प्रयासों से आर्द्रभूमि संरक्षण को नई दिशा, गंगा पुनर्जीवन के लिए तेज हुआ वैज्ञानिक प्रबंधन

*आर्द्रभूमि संरक्षण से मजबूत होगी गंगा की सेहत, तीन जिलों में 5.36 करोड़ की परियोजनाओं पर काम*

लखनऊ। योगी सरकार में उत्तर प्रदेश में आर्द्रभूमि संरक्षण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित रखने के बजाय इसे गंगा पुनर्जीवन, जल सुरक्षा और स्थानीय पारिस्थितिकी से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश में गंगा नदी के किनारे स्थित 22 उच्च प्राथमिकता वाली आर्द्रभूमियों को विधिवत अधिसूचित किया जा चुका है। अब इनके वैज्ञानिक और समन्वित प्रबंधन के लिए एकीकृत प्रबंधन योजनाओं (आईएमपी) को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में 8 आर्द्रभूमियों के प्रबंधन प्रस्ताव तैयार हो चुके हैं, जिनकी समीक्षा चल रही है और इन्हें जल्द अनुमोदन के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को भेजा जाएगा।
राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह ने कहा कि आर्द्रभूमियों को कानूनी संरक्षण मिलने से इनके संरक्षण, पुनर्स्थापन और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए संस्थागत आधार मजबूत हुआ है। एकीकृत प्रबंधन योजनाओं में आर्द्रभूमि के प्राकृतिक आवास का पुनर्स्थापन, प्रदूषण नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय लोगों की भागीदारी जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका सीधा संबंध गंगा और उसकी सहायक नदियों के नदी तंत्र को मजबूत करने से है।

*तीन जिलों में 5.36 करोड़ की परियोजनाएं*
वर्तमान में मुजफ्फरनगर, प्रयागराज और बलिया में आर्द्रभूमि विकास की परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इन परियोजनाओं को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से वित्तीय सहायता मिल रही है और तीनों परियोजनाओं की कुल लागत 5.36 करोड़ रुपये है। प्रयागराज में नुमईया दह झील एवं खेड़ुवा ताल, बलिया में दहताल रेवती और मुजफ्फरनगर में कालेवाला झील को लेकर अलग-अलग संरक्षण एवं विकास कार्य किए जा रहे हैं।
प्रयागराज की 591.78 हेक्टेयर क्षेत्र वाली आर्द्रभूमि में आर्द्रभूमि स्वास्थ्य सुधार, प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी से आवास पुनर्स्थापन व जल गुणवत्ता सुधार पर काम हो रहा है। बलिया की 34.70 हेक्टेयर दहताल रेवती में जल संचयन संरचनाओं को मजबूत करने, तटवर्ती पौधरोपण और भूजल पुनर्भरण से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। वहीं मुजफ्फरनगर की 88.36 हेक्टेयर कालेवाला झील में प्रदूषण नियंत्रण, तटवर्ती क्षेत्र संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन उपाय लागू किए जा रहे हैं।

*275 आर्द्रभूमियों का सर्वे पूरा*
प्रदेश में गंगा तटवर्ती 27 जिलों में 10 किलोमीटर की सीमा के भीतर स्थित कुल 275 आर्द्रभूमियों का सूचीकरण, दस्तावेजीकरण और हेल्थ कार्ड तैयार करने का कार्य पूरा हो चुका है। इनके लिए इंटीग्रेटेड वेटलैंड मैनेजमेंट प्लान का निरूपण भी किया गया है। जानकारी के अनुसार 231 आर्द्रभूमियां गंगा के अलग-अलग नदी-खंडों में शामिल हैं, जिसमें बिजनौर से रामगंगा संगम तक 93, रामगंगा संगम से गोमती संगम तक 106 और गोमती संगम से घाघरा संगम तक 32 आर्द्रभूमियां हैं।

*भूजल और नदी तंत्र को मिलेगा लाभ*
आर्द्रभूमियां प्राकृतिक रूप से पानी को रोकने, प्रदूषकों को छानने और भूजल पुनर्भरण में मदद करती हैं। इनके संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन से जल सुरक्षा मजबूत होने के साथ जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी लाभ मिलता है। यही वजह है कि इन क्षेत्रों को गंगा पुनर्जीवन की व्यापक कार्ययोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है।

*आठ नई योजनाओं पर आगे बढ़ेगा काम*
राज्य स्वच्छ गंगा मिशन (उत्तर प्रदेश) के यूनिट हेड नॉलेज एंड प्लानिंग मिथिलेश कुमार (पद) ने बताया कि बदायूं, बुलंदशहर, कानपुर नगर, उन्नाव और मुजफ्फरनगर की आठ आर्द्रभूमियों के आईएमपी प्रस्ताव तैयार हो चुके हैं। इनमें बदायूं की पिपरौल पुख्ता और खैरपुर खैराती, बुलंदशहर की मोहम्मदपुर मुबारकपुर, कानपुर नगर की जैसरमऊ, उन्नाव की कुशराजपुर और मेला रामकुंवर तथा मुजफ्फरनगर की चौरावाला और मिलाखेड़ी शामिल हैं। इन प्रस्तावों की समीक्षा के बाद इन्हें अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इस तरह आर्द्रभूमियों को कानूनी संरक्षण देने, उनका वैज्ञानिक आकलन करने और मौके पर संरक्षण परियोजनाएं चलाने की प्रक्रिया उत्तर प्रदेश में गंगा पुनर्जीवन के साथ जल सुरक्षा, भूजल संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय आजीविका को जोड़ रही है।

*22 अधिसूचित आर्द्रभूमियां, 10 जिलों में करीब 409.63 हेक्टेयर*
उच्च प्राथमिकता वाली कुल 22 अधिसूचित आर्द्रभूमियां 10 जिलों में दर्ज हैं। इनमें अलीगढ़ की मुरारखास प्रेतनगर, सिसई और सीकरी आर्द्रभूमियां, कासगंज की बस्तौली-ब्रह्मपुर, सिकंदरपुर खुर्द और रामनछौनी, बदायूं की पिपरौल पुख्ता और खैरपुर खैराती, उन्नाव की मेला रामकुंवर और कुशराजपुर तालाब, प्रयागराज की बड़ा तालाब, उपरिहा तालाब और नुमाईया दाही झील, फर्रुखाबाद की कुठिला झील, खरगपुर खंडौली और रामपुर टफरपुर आर्द्रभूमि, कानपुर नगर की जैसरमऊ, चंदौली की बबरना, बुलंदशहर की मोहम्मदपुर मुबारकपुर, मुजफ्फरनगर की मिलाखेड़ी व चौरावाला तालाब और भदोही की समदा ताल आर्द्रभूमि शामिल हैं। इन 22 अधिसूचित आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 409.63 हेक्टेयर है।
दीपोत्सव से पहले बदलेगा 14 कोसी परिक्रमा मार्ग का स्वरूप
- त्रेता युग की आस्था के पथ पर अयोध्या में विकास की नई तस्वीर
- 1140 करोड़ रुपये से 31 किलोमीटर मार्ग का हो रहा चौड़ीकरण, फोरलेन बनने से श्रद्धालुओं को मिलेगा सुगम आवागमन
- शौचालय, वाटर कियोस्क, टिन शेड, बैठने और प्रकाश की सुविधाओं से संवर रहा परिक्रमा पथ
- पीली रेलिंग, आकर्षक रोशनी और पौधारोपण से आस्था के इस मार्ग को दिया जा रहा नया स्वरूप

अयोध्या। रामनगरी की पहचान सिर्फ उसके मंदिरों और धार्मिक स्थलों से नहीं, बल्कि उन परंपराओं से भी है जिनसे सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी रही है। इन्हीं परंपराओं में शामिल 14 कोसी परिक्रमा अब आधुनिक सुविधाओं और बेहतर आवागमन के साथ नए स्वरूप में दिखाई देने की ओर बढ़ रही है। श्रद्धालुओं के आस्था पथ को सुगम और सुविधाजनक बनाने के लिए परिक्रमा मार्ग का चौड़ीकरण कार्य तेजी से अंतिम चरण में पहुंच रहा है। करीब 1140 करोड़ रुपये की लागत से 31 किलोमीटर लंबे परिक्रमा पथ को फोरलेन बनाया जा रहा है। 14 कोसी परिक्रमा मार्ग की कुल लंबाई लगभग 42 किलोमीटर है, जिसमें कुछ हिस्सा पंचकोसी परिक्रमा मार्ग का भी आता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही इस परियोजना को दीपोत्सव से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।परियोजना पूरी होने के बाद परिक्रमा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सड़क के साथ शौचालय, वाटर कियोस्क, टिन शेड, बैठने की व्यवस्था और प्रकाश जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी। लोक निर्माण विभाग खंड-3 की ओर से कराए जा रहे कार्यों के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ अब मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाने पर जोर है।

*आस्था की सदियों पुरानी परंपरा को मिल रहा आधुनिक स्वरूप*
14 कोसी परिक्रमा अयोध्या की प्राचीन धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मान्यता है कि श्रद्धालु इस परिक्रमा के माध्यम से रामनगरी की धार्मिक सीमा की परिक्रमा करते हैं। वर्ष में विभिन्न अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर इस धार्मिक यात्रा में शामिल होते हैं। ऐसे में परिक्रमा मार्ग का चौड़ीकरण केवल सड़क को बेहतर बनाने की परियोजना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के आवागमन को अधिक सुगम बनाने से जुड़ा प्रयास भी है। राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच इस मार्ग का फोरलेन निर्माण यातायात और परिक्रमा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण है। मार्ग के विभिन्न हिस्सों में सड़क चौड़ीकरण के साथ श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाओं को भी विकसित किया जा रहा है।

*सड़क के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा का भी रखा जा रहा ध्यान*
परिक्रमा मार्ग पर शौचालय, वाटर कियोस्क, टिन शेड, बैठने की व्यवस्था और प्रकाश व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं को रास्ते में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। मार्ग के अलग-अलग हिस्सों में निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।मोदहा के पास फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है। इससे इस हिस्से में आवागमन सुगम हुआ है। अब दीपावली और दीपोत्सव से पहले पूरे 42 किलोमीटर मार्ग को तैयार करने पर जोर है।

*पीली रेलिंग और रोशनी से बदलेगा परिक्रमा पथ का नजारा*
परियोजना के तहत परिक्रमा मार्ग के डिवाइडर पर आकर्षक पीले रंग की रेलिंग लगाई जा रही है। मार्ग के बीच-बीच में पौधारोपण के बाद ट्री गार्ड भी लगाए गए हैं। वहीं पूरे मार्ग को रोशन करने के लिए भगवान श्रीराम की स्मृति से जुड़ी आकर्षक लाइटें लगाई जा रही हैं। अचारी सगरा के पास भी प्रकाश व्यवस्था शुरू हो गई है। ऐसे में दिन के साथ रात में भी परिक्रमा मार्ग का स्वरूप अधिक आकर्षक दिखाई देने लगा है। आस्था से जुड़े इस मार्ग को सुविधाओं और प्रकाश व्यवस्था के जरिए नया रूप देने का काम अब अंतिम चरण में है।

*परिक्रमा के दौरान मिलेगी बैठने, रोशनी और स्वच्छता की सुविधा*
परियोजना के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ लोक निर्माण विभाग खंड-3 के अधिकारी निर्माण कार्यों को दीपोत्सव से पहले पूरा कराने में जुटे हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सत्य पाल सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बैठने की व्यवस्था, पर्याप्त प्रकाश और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।उन्होंने बताया कि उद्देश्य यह है कि श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के अपनी परिक्रमा पूरी कर सकें। इसके लिए सड़क चौड़ीकरण के साथ मार्ग पर आवश्यक सुविधाओं को भी विकसित किया जा रहा है।

*धार्मिक परंपरा के साथ पर्यटन को भी मिलेगी नई रफ्तार*
रामनगरी में धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच 14 कोसी परिक्रमा मार्ग का फोरलेन होना आवागमन की सुविधा के लिहाज से महत्वपूर्ण बदलाव होगा। दीपोत्सव के दौरान जब अयोध्या में देश-दुनिया से श्रद्धालु पहुंचेंगे, तब आधुनिक सुविधाओं से सजा यह मार्ग रामनगरी की प्राचीन धार्मिक परंपरा और बदलते विकास का संगम नजर आएगा।बेहतर सड़क, प्रकाश, बैठने, स्वच्छता और अन्य सुविधाओं से श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुगम होने की उम्मीद है। साथ ही परिक्रमा मार्ग का नया स्वरूप अयोध्या के धार्मिक पर्यटन को भी विस्तार देने में सहायक हो सकता है।
एसकेडी एकेडमी के बच्चों को पाक्सो कानून की दी जानकारी
- जागरूकता शिविर में गुड टच-बैड टच, बाल अधिकार और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जानकारी

लखनऊ, 1 अक्टूबर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के तत्वावधान में एसकेडी एकेडमी, गोमतीनगर में विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में छात्र-छात्राओं को पाक्सो (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम)-2012 के प्रावधानों, बाल अधिकारों और बच्चों की सुरक्षा से संबंधित कानूनी व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई।
शिविर का आयोजन जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देशन में सचिव कुंवर मित्रेश सिंह कुशवाहा की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम में स्कूल के प्रधानाचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, वात्सल्य संस्था की डॉ. नीलम सिंह और पराविधिक स्वयंसेवक मौजूद रहे।
सचिव कुंवर मित्रेश सिंह कुशवाहा ने बच्चों को सरल भाषा में ‘गुड टच और बैड टच’ के बीच अंतर समझाया। उन्होंने कहा कि किसी भी अप्रिय या असहज स्थिति में बच्चों को डरने या चुप रहने के बजाय अपने माता-पिता, शिक्षक अथवा संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए। बच्चों को यह भी बताया गया कि वे अपनी शिकायत किस प्रकार दर्ज करा सकते हैं और उन्हें कानून के तहत किस तरह की सुरक्षा एवं सहायता मिल सकती है।
उन्होंने पाक्सो कानून के प्रमुख प्रावधानों, बच्चों के अधिकारों, महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़ी कानूनी व्यवस्थाओं तथा कानून के उल्लंघन पर होने वाले दंडात्मक प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को कानून की बुनियादी जानकारी होना बेहद जरूरी है। जागरूकता के अभाव में कई बार बच्चे शोषण का शिकार होने के बावजूद डर या संकोच के कारण अपनी बात साझा नहीं कर पाते। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिविर में बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि जरूरत पड़ने पर इस हेल्पलाइन के माध्यम से सहायता प्राप्त की जा सकती है।
सचिव ने स्कूल के प्रधानाचार्य और शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर लगातार जागरूकता बढ़ाएं और किसी भी संदिग्ध या अप्रिय स्थिति में बच्चों की बात को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना परिवार, विद्यालय और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वरिष्ठजनों के अनुभव और आशीर्वाद से समृद्ध होगा समाज: असीम अरुण
- अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर तीन शतायु नागरिकों को ‘शतायु सम्मान’, चार वरिष्ठजनों को ‘सीनियर अचीवर्स सम्मान’

लखनऊ, 1 अक्टूबर। वरिष्ठजनों के अनुभव, संस्कार और योगदान को सम्मान देने के लिए अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर समाज कल्याण विभाग, हेल्पेज इंडिया और वरिष्ठ नागरिक महासमिति के संयुक्त तत्वावधान में विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया। गोमतीनगर स्थित भागीदारी भवन में आयोजित कार्यक्रम में समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने 100 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके तीन वरिष्ठजनों को ‘शतायु सम्मान’ से सम्मानित किया।
सम्मानित होने वालों में श्रीमती लल्ली देवी, श्रीमती रानी कपूर और सेवानिवृत्त न्यायाधीश कमलेश्वर नाथ शामिल रहे। इसके अलावा समाज में रचनात्मक योगदान दे रहे विनोद कुमार शुक्ल, ललित सिंह पोखरिया, प्रसिद्ध इतिहासकार एवं लेखक डॉ. रवि भट्ट और डॉ. किशन वीर सिंह शाक्य को ‘सीनियर अचीवर्स सम्मान’ प्रदान किया गया।
- वरिष्ठ नागरिक समाज की अमूल्य धरोहर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री असीम अरुण ने कहा कि वरिष्ठजनों के अनुभव और आशीर्वाद से समाज समृद्ध होता है। वे अनुभव, संस्कार और जीवन मूल्यों की अमूल्य धरोहर हैं। उनका सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक जिम्मेदारी होनी चाहिए और इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। बुजुर्गों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से केयर इकोनॉमी को रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
असीम अरुण ने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम और राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना संचालित हैं। प्रदेश के सभी 75 जनपदों में उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में भरण-पोषण अधिकरण गठित किए गए हैं।
- युवाओं ने लिया वरिष्ठजनों के सम्मान का संकल्प
समारोह के दौरान समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित वृद्धाश्रमों की सुविधाओं पर आधारित डॉक्युमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। CMS-RDSO शाखा के बच्चों ने ‘अपने मां-बाप का तू दिल न दुखा’ गीत पर सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। इस अवसर पर युवाओं ने वरिष्ठजनों के सम्मान और उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार का संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम में निदेशक समाज कल्याण संजीव सिंह, हेल्पेज इंडिया के स्टेट हेड अनूप पंत, अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, संयुक्त निदेशक आरपी सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी अनामिका सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वरिष्ठ नागरिक महासमिति के अध्यक्ष श्याम पाल सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
गांधी जयंती पर विशेष ग्राम सभाओं में होगा वीबी-जी राम जी योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार

- ग्राम सभा में ग्रामीणों को योजना के प्रावधानों की दी जाएगी जानकारी, विकसित ग्राम पंचायत प्लान से तय होंगी गांव की प्राथमिकताएं

लखनऊ, 1 अक्टूबर। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इन ग्राम सभाओं में वीबी-जी राम जी योजना के प्रमुख प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए हैं।
उप मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से आह्वान किया है कि “आइए, हम सब मिलकर अपनी ग्राम पंचायत को विकसित, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें। सब लोग मिलकर एक विकसित पंचायत और विकसित भारत का संकल्प लें।”
उप मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में ग्राम्य विकास विभाग की ओर से विशेष ग्राम सभाओं के आयोजन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार 2 अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभाओं में वीबी-जी राम जी योजना के प्रमुख प्रावधानों के साथ विकसित ग्राम पंचायत प्लान (वीजीपीपी) पर भी विशेष चर्चा की जाएगी। इस संबंध में आयुक्त ग्राम्य विकास विभाग, उत्तर प्रदेश प्रमोद कुमार उपाध्याय ने सभी मुख्य विकास अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
- 125 दिनों के रोजगार की गारंटी
ग्राम सभा की बैठकों में पंचायत सचिव ग्रामीणों को वीबी-जी राम जी अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देंगे। योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों के रोजगार की गारंटी का प्रावधान किया गया है। काम की मांग किए जाने के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता दिए जाने का भी प्रावधान है। योजना के तहत गांव की वास्तविक आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के आधार पर 375 प्रकार के अनुमेय कार्यों में से कार्यों का चयन किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य रोजगार उपलब्ध कराने के साथ गांवों में टिकाऊ और उपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है, जिससे ग्रामीण आजीविका और स्थानीय विकास को मजबूती मिल सके।
मजदूरी का भुगतान सामान्यतः एक सप्ताह के भीतर और अधिकतम 15 दिनों में किए जाने का प्रावधान है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर संबंधित प्रावधानों के अनुसार श्रमिक विलंब क्षतिपूर्ति के हकदार होंगे।
- ग्राम सभा तय करेगी गांव की विकास प्राथमिकताएं
विकसित ग्राम पंचायत प्लान (वीजीपीपी) के माध्यम से गांव के विकास के लिए आवश्यक कार्यों और उनकी प्राथमिकताओं का निर्धारण किया जाएगा। ग्राम सभा में ग्रामीण सामूहिक रूप से यह तय करेंगे कि गांव में किन कार्यों की आवश्यकता है, कौन से कार्य प्राथमिकता पर किए जाएं और उनका निर्माण किस स्थान पर किया जाए।
योजना के प्रभावी एवं पारदर्शी क्रियान्वयन में ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सोशल ऑडिट की व्यवस्था भी की गई है, जिसमें ग्राम सभा की अहम भूमिका रहेगी। विभाग के अनुसार ग्राम पंचायत केवल योजनाओं के क्रियान्वयन का स्थान नहीं, बल्कि स्थानीय विकास का केंद्र है। रोजगार, आजीविका, जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत ढांचे और टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण के माध्यम से गांवों के समग्र विकास को गति देने पर जोर दिया जा रहा है।
- प्रचार-प्रसार के लिए नोडल अधिकारी नामित
2 अक्टूबर को आयोजित होने वाले रिफॉर्म उत्सव (प्रचार-प्रसार कार्यक्रम) के सफल आयोजन के लिए राज्य, जनपद और विकासखंड स्तर पर नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। राज्य स्तर पर डीएन पाण्डेय, संयुक्त आयुक्त (वीबी-जी राम जी), जनपद स्तर पर उपायुक्त श्रम रोजगार तथा विकासखंड स्तर पर खंड विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। ज्ञातव्य है कि वीबी-जी राम जी योजना का क्रियान्वयन पूरे देश में 1 जुलाई 2026 से शुरू हो चुका है।
गांव-गांव डिजिटल सेवाओं के विस्तार को समयबद्ध पूरा करें अधिकारी: ओम प्रकाश राजभर
- ग्राम पंचायतों में आधार सेवा केंद्र, स्मार्ट मोबाइल फोन, डिजिटल ग्राम योजना और डिजिटल लाइब्रेरी फेज-2 की प्रगति की समीक्षा

लखनऊ, 1 अक्टूबर। ग्राम पंचायतों में डिजिटल सुविधाओं का विस्तार कर ग्रामीण नागरिकों को स्थानीय स्तर पर तकनीक आधारित सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पंचायती राज विभाग तेजी से कार्य कर रहा है। इसी क्रम में पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर की अध्यक्षता में गुरुवार को विधान भवन स्थित कक्ष संख्या-62 में महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में ग्राम पंचायतों से जुड़ी विभिन्न डिजिटल योजनाओं की प्रगति और आगामी कार्ययोजना की समीक्षा की गई।
मंत्री ने प्रदेश की ग्राम पंचायतों में आधार सेवा केंद्र स्थापित किए जाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण नागरिकों को डिजिटल और नागरिक सेवाओं के लिए अनावश्यक रूप से दूर न जाना पड़े, इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में ग्राम पंचायत सचिवों को स्मार्ट मोबाइल फोन उपलब्ध कराने, डिजिटल ग्राम योजना तथा संचालित डिजिटल लाइब्रेरी योजना के फेज-2 से संबंधित कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
श्री राजभर ने अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रियाएं शीघ्र पूरी करने तथा संबंधित अभिलेख एवं विवरण उपलब्ध कराकर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक ग्रामीण विकास और नागरिक सुविधाओं का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। ग्राम पंचायतों में डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता बढ़ने से विभागीय कार्यों में सुगमता आएगी और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर विभिन्न सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। मंत्री ने सभी संबंधित संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए योजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर जोर दिया।
पंचायती राज विभाग की ओर से ग्राम पंचायतों को तकनीक से जोड़ने के साथ ग्रामीण नागरिकों के लिए डिजिटल सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डिजिटल लाइब्रेरी समेत विभिन्न पंचायत आधारित योजनाओं को विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी प्रमुख योजनाओं के रूप में प्रदर्शित किया गया है। विभाग का लक्ष्य ग्राम पंचायतों में डिजिटल संसाधनों का विस्तार कर ग्रामीण क्षेत्रों में सुगम, पारदर्शी और तकनीक आधारित सेवाओं की उपलब्धता को मजबूत करना है।
बैठक में प्रमुख सचिव पंचायती राज रविंद्र, निदेशक पंचायती राज अमित कुमार सिंह, एमडी यूपीसीएल जसजीत कौर, एमडी यूपीडेस्को आकांक्षा राणा समेत अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
यूपी पुलिस के बेड़े में शामिल हुए 87 नए इंटरसेप्टर वाहन

*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना*
*प्रदेश में अब 35 चार-पहिया और 137 दो-पहिया इंटरसेप्टर वाहन, यातायात नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई*

लखनऊ। सड़क हादसों में कमी लाने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के बेड़े में गुरुवार को 87 नए इंटरसेप्टर वाहन शामिल हो गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही प्रदेश में इंटरसेप्टर वाहनों की संख्या बढ़कर 172 हो गई है। इनमें 35 चार-पहिया और 137 दो-पहिया वाहन हैं।
नए इंटरसेप्टर वाहनों से तेज रफ्तार, नशे में वाहन चलाने, काली फिल्म, प्रेशर हॉर्न और रैश ड्राइविंग जैसे यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई में मदद मिलेगी। इनमें स्पीड लेजर गन, ब्रेथ एनालाइजर, टिंट मीटर और डेसिबल मीटर जैसे उपकरण हैं। जरूरत पड़ने पर इन वाहनों का इस्तेमाल ट्रैफिक रिस्पॉन्स व्हीकल के रूप में भी किया जा सकेगा।
*700 दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों पर नजर*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीजीपी राजीव कृष्ण के नेतृत्व में शुरू की गई जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD) योजना सभी 75 जिलों के 700 सर्वाधिक दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है। इसके तहत 801 विशेष टीमों में करीब 3,500 पुलिसकर्मियों को लगाया गया है। ये टीमें क्रिटिकल कॉरिडोर और ब्लैक स्पॉट पर नियमित पेट्रोलिंग, निगरानी और यातायात नियमों का पालन करा रही हैं।
पिछले आठ माह में प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में करीब सात प्रतिशत और मृतकों की संख्या में करीब आठ प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस अवधि में करीब 1,107 लोगों की जान बचाई गई।
*109 मार्गों पर रियल टाइम निगरानी*
शहरों में जाम की समस्या से निपटने के लिए RTC योजना के तहत 20 प्रमुख जिलों के 109 मार्गों की UP GATI प्लेटफॉर्म से रियल टाइम निगरानी की जा रही है। रूट मार्शल और संबंधित विभाग जाम के कारणों की पहचान कर मौके पर कार्रवाई करते हैं। मार्च 2026 में इन मार्गों पर 16,723 कंजेशन पॉइंट दर्ज किए गए थे, जो अगस्त तक घटकर 8,569 रह गए। इस तरह करीब 49 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
*कैमरों से निगरानी, नियम तोड़ने पर ई-चालान*
यातायात व्यवस्था की निगरानी के लिए ITMS और Safe City कैमरा नेटवर्क की भी मदद ली जा रही है। ANPR के साथ रेड लाइट और गति सीमा के उल्लंघन की पहचान करने वाले कैमरों तथा कमांड सेंटर की लाइव फीड से यातायात पर नजर रखी जाती है। जरूरत पड़ने पर जाम और भीड़ वाले इलाकों में ड्रोन से भी निगरानी की जाती है। कैमरों और फील्ड टीमों से मिली जानकारी के आधार पर नियम तोड़ने वालों के ई-चालान के साथ मौके पर भी कार्रवाई की जा रही है।
2017 से पहले माफिया के सामने नाक रगड़ती थी सरकार: मुख्यमंत्री योगी
- *लोकभवन में 87 इंटरसेप्टर वाहनों का फ्लैग ऑफ, वीर पुलिसकर्मियों का सम्मान और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन*
- *बोले मुख्यमंत्री- बंद कमरे में टिप्पणी आसान, सुरक्षा हटा दें तो बड़े से बड़े व्यक्ति को भी भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगती*
*मुख्यमंत्री ने कहा- पुलिस रिफॉर्म लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश, सात पुलिस कमिश्नरेट कर रहे काम*
*यूपी पुलिस को पहली बार कीर्ति चक्र, वीरगति को प्राप्त इंस्पेक्टर सुनील कुमार के परिवार का सम्मान*
- *16 पुलिसकर्मियों को राष्ट्रपति वीरता पदक, 10 को मुख्यमंत्री वीरता पदक*

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों की कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के हर जिले में दुर्दांत माफिया का बोलबाला था। समानांतर सरकारें चलती थीं। माफिया के सामने नाक रगड़ी जाती थी, घुटने टेके जाते थे और पुलिस मजबूर थी। राजनीतिक नेतृत्व की रीढ़ ही टेढ़ी हो तो वह कानून-व्यवस्था को सीधा कैसे कर सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को लोकभवन सभागार में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाई, वीर पुलिसकर्मियों को पदक प्रदान किए और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 के बाद सरकार ने पुलिस सुधारों को आगे बढ़ाया। प्रकाश सिंह ने जिस पुलिस रिफॉर्म की वकालत की थी, उसे उत्तर प्रदेश ने देश में सबसे पहले लागू किया। प्रदेश में अब सात पुलिस कमिश्नरेट काम कर रहे हैं।
- सुरक्षा हटे तो भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बंद कमरे में बैठकर किसी के प्रति कोई भी टिप्पणी करना आसान है, लेकिन वहां भी चिंतन तभी संभव है, जब बाहर सुरक्षा हो। कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो और उसे अपने पद का कितना भी गुरूर हो, सुरक्षा हटा दी जाए तो अराजकता के माहौल में उसे भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगेगी।
- दंगों और कर्फ्यू से जूझता था प्रदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले पुलिस की अवस्थापना सुविधाओं की स्थिति खराब थी। पुलिसकर्मियों को टूटे भवनों में रहना पड़ता था। पूरे साल में केवल छह हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता थी और पीएसी की वाहिनियां समाप्त कर दी गई थीं। कोसीकलां, मेरठ, अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर समेत कई स्थानों पर दंगे हुए और लंबे समय तक कर्फ्यू लगा।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पहचान के संकट से जूझ रहा था। 2017 के बाद प्रदेश को पॉलिसी पैरालिसिस से बाहर निकालकर पुलिस सुधारों की दिशा में काम शुरू हुआ।
- 14 लाख से अधिक कैमरों से निगरानी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली की मांग लंबे समय से लंबित थी। आज प्रदेश में सात पुलिस कमिश्नरेट काम कर रहे हैं। सुरक्षित शहर की दिशा में 14 लाख से अधिक कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे घटनाओं के खुलासे के साथ उनकी रोकथाम में भी मदद कर रहे हैं। जिलों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाए गए हैं। अपराध और अपराधियों के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को यूपी पुलिस आगे बढ़ा रही है। - हर साल 23 से 24 हजार लोगों की जान ले रहे सड़क हादसे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क हादसों को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि कोविड के करीब ढाई से तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश में लगभग 24 हजार लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि सड़क दुर्घटनाओं में हर वर्ष 23 से 24 हजार लोगों की जान चली जाती है। तकनीक का इस्तेमाल कर सड़क हादसों में होने वाली मौतों को नियंत्रित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया समेत 87 इंटरसेप्टर वाहनों को रवाना किया। इन्हें दुर्घटना-बाहुल्य जिलों में भेजा जाएगा। डीजीपी राजीव कृष्ण के मुताबिक जनवरी से अगस्त 2026 के बीच पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले सड़क दुर्घटनाओं में 7.89 प्रतिशत, मृतकों की संख्या में 9.08 प्रतिशत और घायलों में 8.19 प्रतिशत की कमी आई है।
- यूपी पुलिस को पहली बार कीर्ति चक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीरगति को प्राप्त एसटीएफ इंस्पेक्टर सुनील कुमार की वीरता को नमन करते हुए कहा कि यूपी पुलिस को पहली बार कीर्ति चक्र मिला है। 22 जनवरी 2025 को चार दुर्दांत अपराधियों के साथ मुठभेड़ में उन्होंने अदम्य साहस दिखाया था। गोली लगने के बाद उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी पत्नी मुनेश देवी को सम्मानित किया। समारोह में 16 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को राष्ट्रपति वीरता पदक तथा 10 को मुख्यमंत्री वीरता पदक प्रदान किए गए।
- ‘संघर्ष’ में 35 वर्षों की पुलिस सेवा का अनुभव
पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इसमें उनके 35 वर्षों की पुलिस सेवा के अनुभव समाहित हैं। यह पुस्तक पुलिसकर्मियों और युवाओं को चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देगी।
- प्रकाश सिंह बोले- माफिया पर बढ़ाया था पुलिस का दबाव
पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने कहा कि सेवानिवृत्ति के वर्षों बाद उन्होंने अपने अनुभवों को लिपिबद्ध करने का निर्णय लिया। नागालैंड, असम, पंजाब और उत्तर प्रदेश में मिली चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में उनके कार्यकाल के दौरान माफिया पर पुलिस का दबाव बढ़ाया गया था। स्वामी धर्मबंधु ने प्रकाश सिंह को कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी का प्रतीक बताया। प्रभात प्रकाशन के पवन अग्रवाल ने कहा कि पुस्तक में उनके जीवन और सेवाकाल का संघर्ष पढ़ने को मिलेगा।
- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में समाज कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण, पूर्व डीजीपी एवं पद्मश्री प्रकाश सिंह, डीजीपी राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, स्वामी धर्मबंधु, प्रभात प्रकाशन के पवन अग्रवाल, प्रकाश सिंह के परिजन, उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ एवं पूर्व अधिकारी और पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।
दिव्यांगजन पेंशन में फिर बढ़ोतरी करेगी सरकार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

*सेवा संकल्प अभियान के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में 509 दिव्यांगजनों को वितरित किए 664 सहायक उपकरण*
*प्रदेश के सभी 18 मंडलों में स्थापित होंगे जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, दिए गए निर्देश*
*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा योजक हो तो कोई अयोग्य कैसे रह सकता: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ*
*प्रतिभा को दया नहीं, अवसर चाहिए, सही साधन और प्रशिक्षण मिले तो क्षमता छू सकती है ऊंचाई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ*
*हर विधानसभा क्षेत्र में लगेंगे शिविर, छूटे दिव्यांगजनों को पेंशन और अन्य योजनाओं से जोड़ने का लक्ष्य*
*नरेंद्र कश्यप बोले- सपा सरकार में दिव्यांगजन विभाग का बजट 665 करोड़ था, अब 2,200 करोड़ रुपये*

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को दिव्यांगजनों की पेंशन में एक बार फिर बढ़ोतरी का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि पहले 300 रुपये पेंशन मिलती थी। सरकार ने इसे पहले 500 और फिर एक हजार रुपये किया। अब कुछ दिनों में इसमें फिर बढ़ोतरी करने जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में चल रहे सेवा संकल्प अभियान के तहत गोरखपुर क्लब में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और HURL गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां 509 दिव्यांगजनों को 664 सहायक उपकरण वितरित किए।
*अंतिम व्यक्ति तक योजना पहुंचना सुशासन*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज की प्रगति की पहचान केवल इमारतों से नहीं होती। असली कसौटी यह है कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक कितनी सहजता से पहुंच रहा है। बिना भेदभाव अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सुशासन का पहला सूत्र है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में जाति, मत, मजहब, क्षेत्र और भाषा का भेद किए बिना योजनाओं का लाभ हर तबके तक पहुंचा है।
उन्होंने ‘अयोग्यो पुरुषो नास्ति’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, जरूरत उसे अवसर से जोड़ने वाले की होती है। जब देश के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा योजक हो तो कोई अयोग्य कैसे रह सकता है।
*प्रतिभा को दया नहीं, अवसर चाहिए*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शारीरिक चुनौती प्रतिभा की राह में बाधा नहीं बन सकती। प्रतिभा को दया नहीं, अवसर चाहिए। सही साधन और प्रशिक्षण मिले तो प्रतिभा अपनी क्षमता की ऊंचाई तक पहुंच सकती है। उन्होंने ऋषि अष्टावक्र, सूरदास, रवींद्र जैन और अरुणिमा सिन्हा के साथ पैरालंपिक खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि पदक केवल मजबूत भुजाओं से नहीं, मजबूत हौसलों से जीते जाते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में ‘विकलांग’ के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग कर समाज का दृष्टिकोण बदलने का प्रयास किया। डबल इंजन सरकार दिव्यांगजनों के अधिकार और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। ब्रेल व ऑडियो सूचना, टैक्टाइल पाथ, सुलभ डिजिटल सेवाएं, सांकेतिक भाषा, कैप्शन और विजुअल अलर्ट जैसी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। *हर विधानसभा क्षेत्र में लगेंगे शिविर*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2026-27 में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में शिविर लगाकर पेंशन से छूटे दिव्यांगजनों को योजनाओं से जोड़ने का लक्ष्य है। प्रदेश में 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों की डिजिटल पहचान मजबूत कर उन्हें कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन सशक्तीकरण की शुरुआत बचपन से होनी चाहिए। शुरुआती जांच, थेरेपी, अभिभावकों को मार्गदर्शन, विशेष शिक्षा और तकनीकी सहायता पर सरकार का जोर है। तीन से सात वर्ष के श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित और बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए बचपन डे केयर सेंटरों का विस्तार किया जा रहा है।
*दिव्यांगजनों के लिए दो विश्वविद्यालय*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा को सशक्तीकरण का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां दिव्यांगजनों के लिए दो विश्वविद्यालय संचालित हैं। लखनऊ में डॉ. शकुंतला मिश्रा दिव्यांगजन सशक्तीकरण विश्वविद्यालय और चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने दिव्यांगजनों को सीएम युवा, पीएम स्वनिधि, ओडीओपी, पीएम विश्वकर्मा, पीएम मुद्रा और स्टैंडअप जैसी योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया। कॉक्लियर इंप्लांट पर छह लाख रुपये तक के खर्च के साथ स्पीच थेरेपी में भी सरकार सहयोग करती है।
*18 मंडलों में दिव्यांग पुनर्वास केंद्र*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक और बालिका इंटर कॉलेज, संकेत राजकीय मूकबधिर विद्यालय, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोविकास केंद्र और राजकीय कौशल विकास केंद्र का उल्लेख किया। नॉर्मल कैंपस में आश्रय एवं प्रशिक्षण केंद्र, छात्रावास और बचपन डे केयर सेंटर भी संचालित हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। गोरखपुर में सीतापुर आई हॉस्पिटल परिसर में यह केंद्र शुरू हो चुका है।
*ट्राईसाइकिल से स्मार्टफोन तक बांटे*
वितरित सहायक उपकरणों में 127 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, 25 ई-ट्राईसाइकिल, 70 ट्राईसाइकिल, स्मार्ट केन, ब्रेल किट, 90 हियरिंग एड और पांच स्मार्टफोन शामिल रहे। दिव्यांग विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकें भी दी गईं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरभजन सिंह और दीपू मिश्रा को स्मार्टफोन, खुशी को ब्रेल लिपि में गीता और नीरज यादव को ब्रेल रामचरितमानस दी। अंजनी और रामणी को स्मार्ट केन तथा आदित्य गुप्ता और मायरा को सांकेतिक भाषा की शिक्षण सामग्री प्रदान की।
*सपा सरकार में 665 करोड़ था बजट: नरेंद्र कश्यप*
राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेंद्र कश्यप ने कहा कि सपा सरकार में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग का बजट 665 करोड़ रुपये था, जो अब 2,200 करोड़ रुपये हो गया है। प्रदेश में 25 डे केयर सेंटर संचालित हैं और 28 नए केंद्र खोले जाएंगे।
*कार्यक्रम में ये रहे मौजूद*
कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, कैबिनेट मंत्री संजय निषाद, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेंद्र कश्यप, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्र पाल सिंह, श्रीराम चौहान, प्रदीप शुक्ला, राजेश त्रिपाठी और विमलेश पासवान समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।
बांसकार समाज के सामाजिक सम्मान और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए सरकार प्रतिबद्ध : केशव प्रसाद मौर्य
- उप मुख्यमंत्री बोले - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वंचित और उपेक्षित वर्गों को सम्मान व अधिकार दिलाने का कार्य किया‌
                       
लखनऊ। लखनऊ स्थित विश्वेश्वरैया सभागार में बुधवार को आयोजित बांसकार समाज (धरकार, बांसफोड, बसोर) के महासम्मेलन को मुख्य अतिथि के रूप संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि बांसकार समाज सहित समाज के सभी वर्गों के सम्मान, स्वाभिमान और सर्वांगीण विकास के लिए केंद्र और प्रदेश की डबल इंजन सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का मूल भाव सबका साथ, सबका विकास है और समाज के किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव किए बिना उसकी समस्याओं का समाधान करना सरकार की प्राथमिकता है।
उप मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आमंत्रित किए जाने पर आयोजकों और बांसकार समाज के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि समाज अपने अधिकारों, सम्मान और विकास के प्रति जागरूक है। उन्होंने महासम्मेलन की सफलता के लिए आयोजकों और उपस्थित जनसमुदाय को बधाई दी। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े आयोजन की सफलता में समाज की सहभागिता महत्वपूर्ण होती है और आज सभागार के अंदर तथा बाहर बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति आयोजकों का मनोबल बढ़ाने वाली है।
श्री मौर्य ने कहा कि वह ग्रामीण परिवेश से आते हैं और बचपन से ही समाज के सभी वर्गों के बीच रहने तथा उनकी समस्याओं को समझने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने हमेशा जाति और वर्ग के भेदभाव से ऊपर उठकर सभी के बीच जाने, उनकी समस्याओं को समझने तथा उनका यथासंभव समयबद्ध समाधान कराने की भावना को देखा और अपनाया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐसी शासन व्यवस्था आगे बढ़ रही है, जिसमें समाज के उन वर्गों को भी सम्मान और अवसर मिल रहा है, जिन्हें लंबे समय तक अपेक्षित स्थान नहीं मिला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं गरीब परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे हैं और समाज के गरीब, वंचित एवं श्रमजीवी वर्गों की पीड़ा को समझते हैं।
उप मुख्यमंत्री ने प्रयागराज कुंभ-2019 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री  मोदी ने कुंभ में सफाई कर्मचारियों के चरण पखारकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। भारत सरकार के आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार प्रधानमंत्री ने कुंभ में पांच सफाई कर्मचारियों के पैर धोकर उनका सम्मान किया था। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्तिगत सम्मान का अवसर नहीं था, बल्कि समाज को यह संदेश देने वाला प्रसंग था कि कोई भी व्यक्ति अछूत नहीं है और हर श्रम तथा हर कार्य का अपना सम्मान है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत अभियान को जनआंदोलन का रूप दिया गया। स्वच्छता केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री द्वारा स्वयं श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश देने से देशभर में जनभागीदारी की भावना मजबूत हुई है। श्री मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में सेवा और स्वच्छता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं अभाव और संघर्ष का जीवन देखा है। कच्चे घर में रहना, छप्पर और पन्नी के सहारे जीवन बिताना तथा बरसात के दिनों में टपकती छत के नीचे परिवार के संघर्ष को उन्होंने करीब से महसूस किया है। उन्होंने कहा कि गरीब परिवार से आने वाला व्यक्ति ही उन कठिनाइयों को गहराई से समझ सकता है और यही अनुभव गरीब, वंचित तथा जरूरतमंद लोगों के जीवन में बदलाव लाने के संकल्प को और मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार का प्रयास है कि समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिले। बांस शिल्प से जुड़े परिवारों की पारंपरिक कला और हुनर को नई तकनीक, बाजार और रोजगार के अवसरों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
श्री मौर्य ने बांसकार समाज से अपनी पारंपरिक कला और हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार और समाज के सामूहिक प्रयासों से परंपरागत कौशल को आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम बनाया जा सकता है।
उप मुख्यमंत्री ने महासम्मेलन में उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की एकजुटता और सकारात्मक सहभागिता ही विकास की गति को और तेज करती है। उन्होंने बांसकार समाज के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर मा. उप मुख्यमंत्री ब्रजेश  पाठक , विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल , राज्य सफाई कर्मचारी आयोग, असम के अध्यक्ष बैजनाथ बांसफोड़ , पूर्व विधायक व बांस शिल्प कला बोर्ड, मध्य प्रदेश के अध्यक्ष घनश्याम पिरोनिया  एवं अन्य प्रतिष्ठितजन की गरिमामयी उपस्थिति रही।