अखिलेश के आरोप निराधार, साढ़े नौ साल में खेल कोटे से 1000 से अधिक नौकरियां: गिरीश यादव

खेल मंत्री का पलटवार- चार बार सत्ता में रही सपा, अखिलेश बताएं कि खिलाड़ियों के लिए क्या किया?

पदक विजेताओं को सरकारी नौकरी की गारंटी पहली बार योगी सरकार ने दी, पुरस्कार राशि 2.5 गुना तक बढ़ाई

इकाना पीपीपी मॉडल पर बना, हम सिगरा-वाराणसी-गोरखपुर तक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बना रहे हैं

हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज, ब्लॉक पर ग्रामीण मिनी स्टेडियम; संभल में पहली बार जिला स्टेडियम

एकलव्य क्रीड़ा कोष से 400 से अधिक खिलाड़ियों को कोचिंग और पौष्टिक आहार, नई खेल नीति-2023 लागू

सात पदक विजेताओं को बिना पीएससी परीक्षा सीधे डीएसपी बनाया; अखिलेश अपनी सरकार का लेखा-जोखा दें

लखनऊ, 27 सितंबर। उत्तर प्रदेश में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों पर पलटवार किया है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि उनके शासनकाल में खेल बेहतर व्यवस्था में थे और मौजूदा सरकार में खेल पिछड़ गए हैं और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन नहीं मिल रहा। इस पर गिरीश यादव ने कहा कि अखिलेश यादव का आरोप बिल्कुल निराधार है। उन्हें जानकारी होनी चाहिए कि पिछली सरकार में ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स और विश्व चैंपियनशिप के लिए जो पुरस्कार राशि दी जाती थी, मौजूदा सरकार ने उसे दो गुना से ढाई गुना बढ़ा दिया। सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों के साथ कोचों को भी सम्मानित किया जाता है और उन्हें भी पुरस्कार राशि दी जाती है।

- पदक पर सरकारी नौकरी की गारंटी पहली बार

मंत्री ने कहा कि पहली बार उत्तर प्रदेश सरकार ने गारंटी दी है कि एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ, विश्व चैंपियनशिप जैसे चार वर्ष के अंतराल वाले आयोजनों के साथ ओलंपिक और पैरालंपिक में पदक जीतकर आने वाले खिलाड़ी को सरकारी नौकरी दी जाएगी। अब तक लगभग 16-17 लोगों को नौकरी दी जा चुकी है और 5-6 और लोगों को नौकरी दी जा रही है।

उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल किया कि उनके शासन में पदक जीतकर आए खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी गई हो तो उसकी सूची जारी करें। खेल कोटे के तहत उनकी पांच वर्ष की सरकार में कितनी नौकरियां दी गईं, यह भी बताएं।

- खेल कोटे से 1000 से अधिक नौकरियां, सात को सीधे डीएसपी

गिरीश यादव ने कहा कि साढ़े नौ वर्षों में सरकार ने खेल कोटे के अंतर्गत एक हजार से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं। खेल कोटे से सात खिलाड़ियों को लोक सेवा आयोग की परीक्षा से बाहर निकालकर सीधी भर्ती से डिप्टी एसपी बनाया गया। इनमें ललित उपाध्याय, अर्जुन देशवाल, अखिल श्योराण, दीप्ति शर्मा और पारुल चौधरी शामिल हैं। इन्हें पदक जीतकर आने के कारण सीधा डीएसपी बनाया गया।

इसी क्रम में जिला युवा कल्याण अधिकारी, माल कर अधिकारी, यात्रीकर अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी के पदों पर भी नियुक्तियां की गई हैं। मंत्री ने अखिलेश यादव से पूछा कि उनकी पांच वर्ष की सरकार में किसी ऐसे खिलाड़ी को डीएसपी बनाया गया या नहीं।

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव इकाना स्टेडियम की बात करते हैं, जो पीपीपी मॉडल पर बना। मौजूदा सरकार ने वाराणसी के सिगरा में अत्याधुनिक स्टेडियम बनाकर समर्पित कर दिया है। वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनकर तैयार हो गया है। गोरखपुर स्टेडियम का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कर दिया है, लागत 400 करोड़ रुपये है। कानपुर स्टेडियम को सुविधाएं बढ़ाने के लिए इस बजट में 350 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

- हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज, ब्लॉक पर मिनी स्टेडियम

हर कमिश्नरी स्तर पर स्पोर्ट्स कॉलेज बनाए जा रहे हैं। 18 कमिश्नरियों में से आगरा, बरेली, झांसी और अयोध्या में जमीन मिल गई है। इसी वित्तीय वर्ष में चार कमिश्नरी स्तर के स्पोर्ट्स कॉलेज बनाने की योजना लाई गई है। मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव पहले यह सोचें कि उन्होंने कितने बनाए, उन्होंने क्या किया।

विकास खंड स्तर पर ग्रामीण खेल मिनी स्टेडियम के प्रस्ताव आ रहे हैं और सरकार वहां पैसा दे रही है। जिला स्तर की सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं। जहां एस्ट्रोटर्फ चाहिए वहां एस्ट्रोटर्फ, सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक चाहिए तो ट्रैक, तरणताल चाहिए तो तरणताल और बास्केटबॉल कोर्ट चाहिए तो कोर्ट दिए जा रहे हैं। तहसील स्तर पर भी काम शुरू किया गया है।

- संभल में पहली बार जिला स्टेडियम, हापुड़-शामली-चंदौली में भी निर्माण

मंत्री ने कहा कि चार ऐसे स्थान अखिलेश यादव के घर के पास हैं। संभल में जिला स्तर का स्टेडियम नहीं था। सरकार 18 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से वहां स्टेडियम बना रही है। हापुड़, शामली और चंदौली में भी स्टेडियम बनाए जा रहे हैं।

- खेल नीति-2023 और एकलव्य क्रीड़ा कोष

गिरीश यादव ने बताया कि पहली बार नई खेल नीति-2023 बनाई गई। एकलव्य क्रीड़ा कोष के माध्यम से कमजोर और असहाय खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग तथा पौष्टिक आहार के लिए धन दिया जा रहा है। 400 से अधिक खिलाड़ियों को व्यक्तिगत रूप से कोचिंग और पौष्टिक आहार के लिए सरकार ने धन उपलब्ध कराया है।

- पंचायत से संसद तक प्रतिभा तलाश

प्रतिभा खोज के लिए संसद खेलकूद प्रतियोगिता, विधायक खेलकूद प्रतियोगिता के साथ जिला, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजन कर खिलाड़ियों को तलाशा जा रहा है। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जब खिलाड़ियों की बात करते हैं तो खिलाड़ियों का चेहरा खिल उठता है। खिलाड़ी खुद कहते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर मिल रहा है, खेलने के अधिक अवसर मिल रहे हैं, इसलिए खेल की दिशा में लोग आगे बढ़ रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव की पार्टी चार बार सत्ता में रही। वे लेखा-जोखा प्रस्तुत करें कि खिलाड़ियों के लिए क्या किया। केवल एक इकाना स्टेडियम बना, वह भी पीपीपी मॉडल पर। मौजूदा सरकार ग्रामीण स्तर से लेकर विकासखंड, जिला और तहसील तक स्टेडियम बना रही है और सुविधाओं का ध्यान रख रही है।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव तथ्यहीन और निरर्थक बातें करते हैं तथा युवाओं को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। उनके पास ठोस सबूत नहीं होते। युवा और खिलाड़ी उनके बहकावे में नहीं आने वाले। साढ़े नौ वर्षों में खेल के क्षेत्र में ऐतिहासिक काम हुआ है। इसकी किसी भी प्रकार से तुलना नहीं की जा सकती। उत्तर प्रदेश का युवा, खिलाड़ी और खेल जगत से जुड़े लोग जानते हैं कि सरकार कैसे काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बजट खर्च में तेजी लाने के दिए निर्देश, अगले दो माह में 60 प्रतिशत व्यय का लक्ष्य

₹9.99 लाख करोड़ के बजट में ₹5.15 लाख करोड़ की स्वीकृतियां जारी

वित्त मंत्री विभागीय मंत्रियों के साथ करें बजट की बिंदुवार समीक्षा, अड़चनों का तत्काल समाधान कराने के निर्देश

पात्र किसानों को केसीसी से जोड़ने के लिए गांवों की मैपिंग और ‘रूरल क्रेडिट कॉन्क्लेव’ आयोजित करने पर जोर

केंद्र से मिलने वाली धनराशि के लिए विभागीय मंत्री संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से करें समन्वय

एमएसएमई विभाग जीआई उत्पादों की ब्रांडिंग और व्यापक प्रचार-प्रसार कराए

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में बजट प्राविधानों के सापेक्ष वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने और व्यय की गति तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष की पहली छमाही समाप्त हो रही है, ऐसे में जिन विभागों में बजट खर्च की गति अपेक्षित नहीं है, वहां तत्काल सुधार किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अगले दो माह में हर हाल में 70 प्रतिशत वित्तीय स्वीकृतियां जारी हों और कुल आवंटित बजट के सापेक्ष कम से कम 60 प्रतिशत व्यय सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री रविवार शाम को एक महत्वपूर्ण बैठक में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की उपस्थिति में चालू वित्तीय वर्ष के बजट प्राविधानों, वित्तीय स्वीकृतियों और वास्तविक व्यय की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में प्रदेश के सर्वाधिक बजट वाले 30 प्रमुख विभागों के कार्यों और वित्तीय प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट का उद्देश्य केवल धनराशि आवंटित करना नहीं, उसका समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करते हुए उसका लाभ जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने वित्त मंत्री को निर्देश दिए कि विभागीय मंत्रियों के साथ बैठक कर बजट खर्च की नियमित और बिंदुवार समीक्षा करें। जिन विभागों में नीतिगत, प्रक्रियात्मक या तकनीकी कारणों से स्वीकृतियों अथवा व्यय में अड़चन आ रही है, उसका तत्काल समाधान कराया जाए। वित्त विभाग भी इसकी नियमित निगरानी करे और प्रगति की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराए।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैंकों के क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में सुधार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र किसान को किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए गांववार और किसानवार मैपिंग कराई जाए, ताकि पात्र किसानों को चिन्हित कर उन्हें बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ा जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की उपलब्धता बढ़ाने और बैंकिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘रूरल क्रेडिट कॉन्क्लेव’ जैसे आयोजनों की रूपरेखा तैयार करने के भी निर्देश दिए। स्थानीय उत्पादों और शिल्प को बाजार उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने एमएसएमई विभाग को प्रदेश के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की ब्रांडिंग और व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों की पहचान को देश और दुनिया के बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रभावी रणनीति के साथ काम किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जनहित की योजनाओं और विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता तथा समयबद्धता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कार्यों में अनावश्यक देरी या गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

केंद्र सहायतित योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन योजनाओं में भारत सरकार से धनराशि प्राप्त होनी है, उनमें विभागीय स्तर पर प्रभावी समन्वय किया जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्रिगण संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से सीधे संवाद कर लंबित धनराशि और स्वीकृतियों से जुड़े विषयों का समाधान कराएं, ताकि केंद्रीय सहायता से संचालित योजनाओं की गति प्रभावित न हो। समीक्षा में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश का कुल बजट ₹9,99,056.48 करोड़ है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में ₹1,58,474.15 करोड़ अधिक है। इसमें विकास योजनाओं के लिए ₹5,01,957.09 करोड़ का प्राविधान किया गया है। अब तक शासन स्तर से ₹5,15,918.44 करोड़, यानी 51.6 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। इनमें योजनाओं से संबंधित ₹2.13 लाख करोड़ से अधिक की स्वीकृतियां शामिल हैं। इसके सापेक्ष प्रदेश में अब तक ₹2,83,870.11 करोड़ का वास्तविक व्यय दर्ज किया गया है।

विभागवार समीक्षा में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग का बजट व्यय के मामले में प्रदर्शन बेहतर रहा। विभाग द्वारा बजट के सापेक्ष 54 प्रतिशत व्यय किया जा चुका है। ऊर्जा विभाग में ₹73,348.56 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹41,541.93 करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की गई हैं, जो 50 प्रतिशत से अधिक है। बेसिक शिक्षा विभाग में ₹82,245.68 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹65,982.04 करोड़, यानी 80.2 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी की गई हैं और ₹31,718.92 करोड़ का व्यय हुआ है। गृह विभाग के लिए ₹43,891.37 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹40,502.28 करोड़, यानी 92.2 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी हो चुकी हैं और ₹14,712.68 करोड़ का व्यय हुआ है। लोक निर्माण विभाग में ₹45,270.69 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹27,375.91 करोड़, यानी 60.5 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी की गई हैं और ₹14,178.60 करोड़ का व्यय हुआ है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में ₹39,906.52 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹25,557.48 करोड़, यानी 64 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हुई हैं और ₹10,286.50 करोड़ का व्यय हुआ है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बजट का आकलन वास्तविक आवश्यकता और व्यावहारिक उपयोगिता के आधार पर किया जाए, ताकि धनराशि अनावश्यक रूप से प्राविधानित न रहे और उसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे फील्ड में जाकर विकास कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा करें और जहां कार्यों की गति धीमी है, वहां तत्काल सुधार कराएं। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में विभाग अपने निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूरा करें। विकास और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी, लेकिन उपलब्ध बजट का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

"सपा राज में सिर्फ सैफई को चमकाया, जनता को दिए सिर्फ डर और दंगे": ओम प्रकाश राजभर

"जब मुजफ्फरनगर दंगे में जल रहा था, तब सैफई में हीरोइनों का डांस देख रहे थे अखिलेश": राजभर का तीखा हमला

"गुंडागर्दी और नौकरियों की नीलामी": अखिलेश यादव के कार्यकाल पर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश का प्रहार

कहा - वोटर लिस्ट की सफाई होते ही खुली अखिलेश मॉडल की पोल, बेबुनियाद आरोपों से सच नहीं छिपेगा"

लखनऊ, 27 सितंबर। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 'सैफई मॉडल' के विकास के उदाहरण पर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जब अखिलेश की सरकार थी तब 24 घंटे बिजली केवल सैफई में मिलती थी। सैफई महोत्सव होता था और सैफई महोत्सव में मुंबई से हीरो-हीरोइन आकर डांस करते थे। आसपास के गांवों में दुष्टता का आतंक हो जाता था और लोग भय ग्रस्त होकर घरों में कैद रहते थे।

अखिलेश राज में सिर्फ सैफई का हुआ विकास

राजभर ने कहा कि अखिलेश ने केवल सैफई का ही विकास किया। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा पैसे ले जा कर वहां लगा दिया। सैफई में मेडिकल कॉलेज बनवाने से लेकर वहां की सड़कें तक चौड़ी करवा दी। दूसरी जगहों की उपेक्षा हुई।

SIR पर अखिलेश के आरोप गलत

राजभर ने कहा कि अखिलेश SIR पर जो आरोप लगा रहे हैं, वो सरासर गलत हैं। मैं जिस विधान सभा से विधायक हूं वहां 16 हजार वोटर मृतक थे, उनको निकाला गया। इसके अलावा 23 हजार स्थानांतरित मतदाता थे, जिन्हें चुनाव आयोग ने एक जगह करने के लिए स्वीकृत किया। SIR कोई नया नहीं है. यह 1952 से लेकर 2003 के बीच में कई बार हुआ है।

अखिलेश की सरकार में गुंडागर्दी चरम पर थी

राजभर ने कहा कि अखिलेश के राज में गुंडागर्दी, लूट, हत्या, बलात्कार और छिनैती चरम पर थे। मुजफ्फरनगर जब दंगों में जल रहा था तो यह मुख्यमंत्री होते हुए डांस देख रहे थे। सरकारी नौकरियां पैसे पर देते थे। राजभर ने कहा अखिलेश को कोई वोट नहीं देगा। अखिलेश वोट पाने के लिए आरोप लगा रहे हैं। उन्हें तो अपनी गलतियों के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।

15 अक्टूबर से मिठाई की ‘यूज बाई डेट’ दिखाना होगा अनिवार्य

- खुली मिठाई की गुणवत्ता और ताजगी को लेकर यूपी में खाद्य सुरक्षा विभाग का बड़ा उपभोक्ता हितैषी कदम

- मिठाई विक्रेताओं को बिक्री स्थल पर प्रदर्शित करनी होगी उपयोग की अंतिम तिथि

- खुली मिठाई पर भी अब उपभोक्ता को मिलेगी अंतिम उपयोग तिथि की जानकारी

- मिठाई कारोबार में बढ़ेगी पारदर्शिता, ग्राहक को मिलेगी जरूरी जानकारी

लखनऊः 27 सितम्बर। उत्तर प्रदेश में मिठाई खरीदने वाले उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और हितों को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। अब राज्य में 15 अक्टूबर 2026 से विक्रय के लिए प्रदर्शित एवं भंडारित मिठाइयों पर ‘यूज बाई डेट’ यानी उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था विशेष रूप से खुली मिठाइयों को लेकर महत्वपूर्ण है, जिनके संबंध में अब तक उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित करने का कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं था।

विभाग के अनुसार, विगत कुछ समय में मिठाई निर्माण एवं विक्रय प्रतिष्ठानों में की गई प्रवर्तन और निरीक्षण कार्यवाहियों के दौरान यह तथ्य संज्ञान में आया कि अनेक स्थानों पर उपभोक्ताओं को मिठाई के निर्माण की तारीख और उसके अवसान की तारीख के संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती है। ऐसे में उपभोक्ता मिठाई खरीदते समय उसकी ताजगी और उपयोग की अवधि के बारे में सही निर्णय नहीं ले पाता।

- 01 से 30 दिन तक हो सकती है मिठाई की उपयोग अवधि

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त डॉ रोशन जैकब द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मिठाई की उपयोग अवधि उसकी प्रकृति और प्रकार के आधार पर अलग-अलग होती है। अलग-अलग मिठाइयों की उपयोग अवधि एक दिन से लेकर 30 दिन तक हो सकती है। समय बीतने के साथ मिठाई की गुणवत्ता, स्वाद और ताजगी प्रभावित होती है। ऐसे में उपभोक्ता को मिठाई खरीदते समय उसकी उपयोग की अंतिम तिथि की जानकारी होना स्वास्थ्य हित में आवश्यक है।

विभाग का मानना है कि मिठाई की यूज बाई डेट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होने से उपभोक्ता को यह जानकारी मिल सकेगी कि संबंधित खाद्य पदार्थ का सेवन किस अवधि तक किया जाना उचित है। इससे खाद्य पदार्थ की ताजगी और गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ता अधिक जागरूक निर्णय ले सकेगा।

- पैक्ड मिठाई पर पहले से अनिवार्य, अब खुली मिठाई पर भी व्यवस्था

वर्तमान व्यवस्था के तहत पैक्ड मिठाइयों पर अवसान तिथि अथवा ‘यूज बाई डेट’ अंकित किया जाना अनिवार्य है। हालांकि, खुली मिठाइयों के संबंध में इस प्रकार की जानकारी प्रदर्शित करने का कोई स्पष्ट अनिवार्य प्रावधान नहीं था। विभाग द्वारा जारी निर्देश इसी अंतर को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।अब मिठाई के निर्माण एवं विक्रय प्रतिष्ठानों को बिक्री के लिए प्रदर्शित और भंडारित मिठाइयों के संबंध में यूज बाई डेट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी। इससे ग्राहक को मिठाई खरीदने से पहले उसकी उपयोग अवधि की जानकारी मिल सकेगी।

- उपभोक्ता हित और जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और मानव जीवन एवं स्वास्थ्य के उचित स्तर के संरक्षण का प्रावधान किया गया है। अधिनियम की धारा 18(1)(ए) में खाद्य सुरक्षा मानकों एवं खाद्य व्यापार में निष्पक्ष व्यवहार के संदर्भ में मानव जीवन एवं स्वास्थ्य की सुरक्षा तथा उपभोक्ता हितों के संरक्षण की दिशा में प्रयास किए जाने की व्यवस्था है। इसी प्रकार अधिनियम की धारा 30(2)(डी) के तहत खाद्य सुरक्षा मानकों और अन्य निर्धारित प्रावधानों के प्रभावी एवं समान क्रियान्वयन के साथ पारदर्शिता, विश्वसनीयता और वस्तुनिष्ठता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है।इन विधिक व्यवस्थाओं के आधार पर उत्तर प्रदेश में मिठाई की उपयोग अवधि को लेकर नई व्यवस्था लागू की जा रही है।

- मिठाई खरीदते समय उपभोक्ता को मिलेगी स्पष्ट जानकारी

नई व्यवस्था लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को मिठाई खरीदते समय उसके उपयोग की अंतिम तिथि के संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होगी। इससे ग्राहक अपनी आवश्यकता के अनुसार मिठाई की खरीद कर सकेगा और अधिक अवधि तक रखी गई मिठाई के सेवन से जुड़े संभावित जोखिमों को कम किया जा सकेगा। खाद्य सुरक्षा विभाग की यह व्यवस्था मिठाई कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ उपभोक्ता को उसके द्वारा खरीदे जा रहे खाद्य पदार्थ के संबंध में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में है।

बॉक्स

- दूध प्रसंस्करण में एथिलीन ग्लाइकोल के इस्तेमाल पर रोक

उत्तर प्रदेश में दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों की प्रसंस्करण इकाइयों में एथिलीन ग्लाइकोल और डाई एथिलीन ग्लाइकोल के प्रयोग पर रोक लगा दी गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने उपभोक्ता हित एवं व्यापक जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह आदेश जारी किया है। विभाग की प्रवर्तन एवं निरीक्षण कार्यवाहियों के दौरान सामने आया कि कुछ दुग्ध प्रसंस्करण प्रतिष्ठानों में पाश्च्युरीकरण, प्रशीतन आदि प्रक्रियाओं में एथिलीन ग्लाइकोल अथवा डाई एथिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल कूलेंट के रूप में किया जा रहा है। विभाग के अनुसार, ये रसायन खाद्य पदार्थ में मिल जाने की स्थिति में स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। प्रसंस्करण उपकरणों में लीकेज होने पर इनके दूध में मिल जाने की आशंका को देखते हुए इनके इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। विभाग ने कहा है कि इनके स्थान पर प्रोपिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसका उपयोग कई दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों द्वारा पहले से किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी 1,375 नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारियों को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सौंपेंगे नियुक्ति पत्र

लखनऊ में 28 सितंबर को गूंजेगा ग्रामीण विकास का संकल्प

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास, सुशासन और पंचायत व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार कल एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। पंचायती राज विभाग द्वारा नवचयनित 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को सोमवार, 28 सितंबर को औपचारिक रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। इस गरिमामयी समारोह के मुख्य अतिथि प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी होंगे, जो अपने कर-कमलों से इस कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर जी की भी विशिष्ट उपस्थिति रहेगी।

कार्यक्रम का आयोजन सोमवार सुबह 10:30 बजे से लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर हॉल (विभूति खंड) में किया जाएगा। विभागीय कार्यक्रम रूपरेखा के अनुसार, इसमें कुल 1,375 नवचयनित ग्राम पंचायत अधिकारी शामिल होंगे। मा. मुख्यमंत्री जी द्वारा मंच पर 11 नवचयनित ग्राम पंचायत अधिकारियों को सांकेतिक रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।

कार्यक्रम के दौरान मा. पंचायती राज मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर जी समारोह को संबोधित करेंगे। इसके साथ ही नवचयनित ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा अपनी चयन प्रक्रिया व नियुक्ति से संबंधित अनुभव साझा किए जाएंगे। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास पर आधारित एक विशेष लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया जाएगा।

नवचयनित ग्राम पंचायत अधिकारियों की इस नियुक्ति से ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक कार्यों के संचालन, विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा ग्रामीण नागरिकों को पंचायत स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलेगी। ग्राम पंचायत अधिकारी पंचायत प्रशासन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जिनकी भूमिका ग्रामीण विकास एवं पंचायत व्यवस्था को अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाने में अहम है।

समारोह के दौरान नवचयनित ग्राम पंचायत अधिकारियों के लिए आयोजित होने वाले एक दिवसीय उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम (Orientation & Training Program) के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। पंचायती राज विभाग का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों को अधिक सक्षम, पारदर्शी एवं जनसुविधा केंद्रित बनाते हुए प्रदेश में ग्रामीण विकास की प्रक्रिया को गति प्रदान करना है।

जीतने पर आयोग की पीठ थपथपाते हैं, हारने पर लगाते हैं आरोप', संजय निषाद का अखिलेश पर हमला

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कहा- 2022 की हार के बाद भी संवैधानिक संस्था पर उठाया था सवाल, जनता से मांगें माफी

बिना साक्ष्य चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर भ्रम फैलाने का काम कर रहा विपक्ष

कैबिनेट मंत्री ने पूछा- सुप्रीम कोर्ट के आदेश से चल रही प्रक्रिया पर क्यों उठ रहे सवाल?

दी नसीहत- संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना सीखें अखिलेश

कसा तंज : कहा, विपक्ष के नेता भी आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल तो आरोप कैसे लगाया

लखनऊ, 27 सितम्बर। SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर सपा, कांग्रेस, राजद समेत विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर निषाद पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने करारा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग भारत देश की संवैधानिक संस्था है और बिना किसी साक्ष्य के उसके खिलाफ आरोप लगाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने पर यही लोग आयोग की पीठ थपथपाते हैं, लेकिन जनता जब इन्हें नकार देती है और हार का ठीकरा उसी संवैधानिक संस्था पर फोड़ देते हैं।

अखिलेश यादव के 2022 के चुनाव परिणाम और चुनाव प्रक्रिया पर उनके सवालों से जुड़े प्रश्न पर निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने कहा कि चुनाव हारने के बाद भी यदि कोई संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाता है तो उसे अपने आरोपों के प्रमाण देने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी पर आरोप लगाना आसान है, लेकिन उसे साबित करना भी जरूरी होता है। उनके मुताबिक बिना प्रमाण के संवैधानिक संस्था पर आरोप लगाने और भ्रम फैलाने के लिए संबंधित लोगों को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

संजय निषाद ने कहा कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है और देश में यह दर्जनों बार हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि पहले चुनाव आयोग की नियुक्ति और चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर अलग-अलग व्यवस्थाएं रही हैं, जबकि वर्तमान व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप चल रही है।

मंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था में विपक्ष के नेता की भी भूमिका है। ऐसे में यदि विपक्ष के नेता चुनाव आयोग की नियुक्ति की प्रक्रिया में शामिल रहे हैं तो अब उसी व्यवस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि SIR को लेकर विपक्षी दलों को जनता के बीच भ्रम फैलाने के बजाय प्रक्रिया के संवैधानिक पक्ष को समझना चाहिए। संजय निषाद के मुताबिक न्यायालय संबंधित प्रक्रिया का परीक्षण कर चुका है और हाईकोर्ट ने भी इसे संवैधानिक प्रक्रिया माना है। ऐसे में न्यायिक परीक्षण के बाद भी बिना ठोस साक्ष्य आरोप लगाना उचित नहीं है।

संजय निषाद ने कहा कि जीत और हार के आधार पर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अलग-अलग रवैया नहीं होना चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों से SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के प्रमाण सार्वजनिक करने और जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने से बचने की अपील की। साथ ही उन्होंने बिना साक्ष्य आरोप लगाने वालों से देश की जनता से माफी मांगने की बात कही।

SIR पर विपक्ष के सवालों पर मंत्री असीम अरुण का पलटवार, बोले- आयोग की प्रक्रिया को गलत तरीके से पेश किया गया

- आयोग में मतभेद नहीं, सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया थी: असीम अरुण

- SIR पर अखिलेश यादव पर असीम अरुण का सख्त बयान, बोले-खोखले मुद्दे पर राजनीति कर रही समाजवादी पार्टी

- एक खबर को गलत तरीके से पेश कर राहुल गांधी-अखिलेश यादव ने जनता के बीच भ्रम पैदा किया: SIR पर असीम अरुण

लखनऊ, 27 सितंबर। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री असीम अरुण ने SIR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के जवाब में कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया को गलत तरीके से प्रस्तुत कर भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि आयोग में अलग-अलग मत होने से जुड़ी एक खबर को आधार बनाकर विवाद खड़ा किया गया, जबकि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में स्थिति स्पष्ट कर दी है। इसके बावजूद विपक्षी दल जबरदस्ती झूठ परोस रहे हैं।

असीम अरुण ने कहा कि किसी भी सरकारी प्रक्रिया में फाइल पर अलग-अलग तरह के मत और पक्ष-विपक्ष में विचार आना सामान्य बात है। वह स्वयं मंत्री हैं और इससे पहले पुलिस अधिकारी रह चुके हैं, इसलिए प्रशासनिक प्रक्रिया से परिचित हैं। उनके मुताबिक विचार-विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लिया जाता है। इसी तरह चुनाव आयोग के भीतर भी अलग-अलग विषयों पर विचार-विमर्श होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने स्पष्ट किया है कि उनके बीच अलग-अलग मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ, लेकिन अंत में लिए गए सभी निर्णय सर्वसम्मति से हुए। ऐसे में अब विवाद की कोई स्थिति नहीं है। असीम अरुण ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के पास योगी सरकार के कामकाज के खिलाफ ठोस मुद्दे नहीं हैं, इसलिए एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया को मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है।

आलोचना तथ्यों और तर्क पर आधारित होनी चाहिए

विपक्ष द्वारा संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना को लेकर मंत्री असीम अरुण ने कहा कि आलोचना तथ्यों और तर्क पर आधारित होनी चाहिए। खोखली आलोचना से न केवल नागरिकों का समय बर्बाद होता है, बल्कि यह संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश भी है। मंत्री ने कहा कि यदि किसी को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर आपत्ति है तो विशेषज्ञों की मदद से उसका तथ्यात्मक परीक्षण कर आलोचना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव आगामी 2027 चुनाव भी हारने वाले है इसीलिए अनाप-शनाप आरोप लगातार लगा रहे हैं।

रामकाज में कालनेमि बनकर घुसेंगे बाबरी के भक्त, पहचानें उनकी साजिश: योगी आदित्यनाथ

- अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी महोत्सव का लखनऊ में शुभारंभ, मुख्यमंत्री योगी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया उद्घाटन

- मुख्यमंत्री योगी बोले- बिखरे हिंदू समाज को एक मंच पर लाकर श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को अशोक सिंघल ने दी निर्णायक दिशा

- कहा- जो लोग राम मंदिर का विरोध करते थे, वही अब खुद को रामभक्त बताने का कर रहे प्रयास

- कांग्रेस, सपा और वामपंथियों पर श्रीराम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला रोकने के लिए बाधाएं खड़ी करने का लगाया आरोप

- बोले मुख्यमंत्री- अशोक सिंघल ने जो कहा उसे करके दिखाया, रामकाज को बनाया जीवन का ध्येय

- गोरक्षा को बताया आचरण का विषय, बोले- 7,700 से अधिक गोशालाओं में 16 लाख से अधिक गोवंश का हो रहा संरक्षण

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राम मंदिर आंदोलन के विरोधियों पर निशाना साधते हुए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को सतर्क किया। उन्होंने कहा कि रामकाज में कालनेमि भी घुसेंगे। बाबरी के भक्त कालनेमि बनकर आंदोलन को अपमानित और बदनाम करने की कोशिश करेंगे। इन्हें पहचानकर इनकी साजिशों को सफल नहीं होने देना है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जो लोग कभी राम मंदिर का विरोध करते थे और रामभक्तों पर गोलियां चलाते थे, आज वही खुद को रामभक्त बताने का प्रयास कर रहे हैं। यह विश्व हिन्दू परिषद की वैचारिक विजय है।

मुख्यमंत्री योगी लखनऊ में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता और विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्रद्धेय अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी महोत्सव के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। समारोह में अशोक सिंघल के जीवन, संघर्ष और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई।

- बिखरे हिंदू समाज को एक मंच पर लाए अशोक सिंघल

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 1528 में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर तोड़े जाने के बाद करीब 500 वर्षों तक हिंदू समाज ने उसकी मुक्ति के लिए संघर्ष किया। संतों, नागाओं, सिख वीरों, युवाओं और महिलाओं ने बलिदान दिए। समाज में सामर्थ्य था, लेकिन ताकत बिखरी थी। इसे एक मंच पर लाने का काम अशोक सिंघल ने किया।

उन्होंने कहा कि 1982 में विश्व हिन्दू परिषद का दायित्व मिलने और 1983 में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के गठन के बाद रामकाज अशोक सिंघल के जीवन का ध्येय बन गया। देश हो या विदेश, वनवासी क्षेत्र हो या दलित बस्ती, उनके मुख पर राम का नाम रहता था। राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां बिश्राम को उन्होंने अपने जीवन में उतारा।

- राम मंदिर के साथ समाज को भी जोड़ा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अशोक सिंघल ने राम मंदिर आंदोलन के साथ समाज को एकजुट करने का भी अभियान चलाया। वनवासी और मलिन बस्तियों में एकल विद्यालयों की श्रृंखला खड़ी करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पूर्वोत्तर के बच्चों की शिक्षा के लिए गोरखनाथ मंदिर स्थित विश्व हिन्दू परिषद कार्यालय के एक कमरे से भी व्यवस्था शुरू कराई गई।

उन्होंने 1990 के अयोध्या आंदोलन को याद करते हुए कहा कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार रामभक्तों पर गोलियां चला रही थी, तब अशोक सिंघल सत्ता के सामने नहीं झुके। दो नवंबर 1990 को रामभक्तों पर लाठीचार्ज और गोलीबारी के बीच भी उनकी सिंह गर्जना सुनाई दी। आज उनके सपनों का साकार स्वरूप अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के रूप में दिखाई दे रहा है।

- कांग्रेस-सपा और वामपंथियों को घेरा

मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि श्रीराम जन्मभूमि का मामला न्यायालय में पहुंचा तो एक ओर अशोक सिंघल की अधिवक्ताओं, पुरातत्ववेत्ताओं और विषय विशेषज्ञों की टीम प्रमाण जुटा रही थी, दूसरी ओर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामपंथी राम मंदिर के पक्ष में फैसला न आने देने के लिए बाधाएं पैदा कर रहे थे। उन्होंने कांग्रेस पर भगवान राम और कृष्ण के अस्तित्व को लेकर न्यायालय में सवाल खड़े करने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में आमंत्रण मिलने के बावजूद ये लोग नहीं गए, क्योंकि उन्हें वोट बैंक दिखाई दे रहा था। अशोक सिंघल ने 1980 के दशक में जो ज्योति प्रज्वलित की थी, वह केवल राम जन्मभूमि तक सीमित नहीं थी, बल्कि भारत के मानबिंदुओं की पुनर्प्राण प्रतिष्ठा और गुलामी के चिह्नों को समाप्त करने का अभियान था।

- जो कहा, उसे करके दिखाया

मुख्यमंत्री योगी ने अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ और अशोक सिंघल के बीच श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर होने वाली बैठकों को याद किया। उन्होंने कहा कि मंदिर की रचना, आंदोलन की रणनीति और भावी अयोध्या की परिकल्पना पर दोनों चर्चा करते थे। अशोक सिंघल को इसलिए स्मरण किया जाता है, क्योंकि उन्होंने जो कहा उसे करके दिखाया। वाणी तभी मंत्र बनती है, जब कथन और आचरण में अंतर न हो।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कभी उपेक्षित रही अयोध्या में आज राम पथ, धर्म पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ हैं। राम की पैड़ी में सरयू का अविरल और निर्मल जल है। महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बना है और अयोध्या सोलर सिटी बन चुकी है।

- गोरक्षा भाषण नहीं, आचरण का विषय

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोरक्षा केवल भाषण या सड़क पर आंदोलन का विषय नहीं, बल्कि आचरण का विषय है। वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद अवैध बूचड़खाने बंद कराए गए और सख्त कानून बनाया गया। प्रदेश में 7,700 से अधिक गोशालाओं में 16 लाख से अधिक गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। प्रत्येक गोवंश के लिए हर महीने 1,500 रुपये उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से स्वयं गोपालन से जुड़ने का आह्वान किया।

- राम मंदिर आंदोलन ने बदला नैरेटिव: परांडे

विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि अशोक सिंघल ने भव्य राम मंदिर निर्माण की हिंदू समाज की सदियों पुरानी आकांक्षा को पूरा करने के लिए जीवन लगा दिया। राम जन्मभूमि आंदोलन ने हिंदू समाज में अपनी पहचान के प्रति गौरव बढ़ाया। उन्होंने सामाजिक समरसता और वेद शिक्षा के लिए अशोक सिंघल के कार्यों को भी याद किया।

- अशोक सिंघल का संघर्ष वंदनीय: श्रीकृष्ण शाह विद्यार्थी

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जगतगुरु श्रीकृष्ण शाह विद्यार्थी महाराज ने श्रीराम मंदिर के लिए अशोक सिंघल के संघर्ष को वंदनीय बताया। उन्होंने धर्म की मर्यादाओं और सिद्धांतों को अक्षुण्ण रखते हुए समाज को एकजुट करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, भंते शील रतन, निर्मल सिंह, महंत अवधेश दास, महंत धर्मेंद्र दास, महंत दिव्या गिरी, विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल, क्षेत्रीय संगठन मंत्री गजेंद्र, प्रांत प्रचारक कौशल और भारती गांधी समेत विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल व विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कांग्रेस-सपा जीतें तो पुरुषार्थ, हारें तो चुनाव आयोग दोषी: मुख्यमंत्री योगी
*अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में सीएम योगी ने कांग्रेस, सपा, राजद समेत विपक्षी दलों पर साधा निशाना*
*संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को कमजोर करने की हो रही कोशिश: मुख्यमंत्री योगी*
*बोले मुख्यमंत्री- पहले भी कई बार हो चुकी है एसआईआर, चुनाव आयोग ने छूटे मतदाताओं और फॉर्म-6 को लेकर स्थिति कर दी है स्पष्ट*
*आपातकाल, राफेल, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर कांग्रेस को घेरा, ईवीएम को ब्लैक बॉक्स बताने पर भी उठाए सवाल*
*मुख्यमंत्री ने कहा- लोकतंत्र में हिंसा, तोड़फोड़ और दुष्प्रचार की कोई जगह नहीं, कांग्रेस और सहयोगी दल देशवासियों से मांगें माफी*

लखनऊ। एसआईआर को लेकर विपक्ष की आपत्तियों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला बोला। अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस-सपा समेत विपक्षी दल चुनाव जीतते हैं तो इसे अपना पुरुषार्थ बताते हैं, लेकिन हारने पर चुनाव आयोग और ईवीएम को दोष देने लगते हैं। उन्होंने एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवालों को संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश बताते हुए विपक्ष को आत्मावलोकन की नसीहत दी।
मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस, सपा, राजद और अन्य विपक्षी दलों को निशाने पर रखते हुए कहा कि एसआईआर को लेकर भ्रम पैदा कर हाय-तौबा मचाई जा रही है। चुनाव आयोग की ओर से पूरी स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करने की यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को कमजोर करती है।

*पहले भी कई बार हो चुकी है एसआईआर*
एसआईआर को पहली बार की जा रही कवायद बताने पर मुख्यमंत्री योगी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में भी एसआईआर की कार्रवाई हो चुकी है। इनमें ज्यादातर समय केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार थी। इसके बावजूद इस बार कांग्रेस, सपा, राजद और अन्य विपक्षी दलों की ओर से एसआईआर को लेकर भ्रम फैलाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश में सबसे अधिक समय तक शासन करने वाली कांग्रेस आज चुनाव आयोग को ही कटघरे में खड़ा कर रही है। कांग्रेस, सपा और राजद चुनाव जीत जाएं तो इसे अपना पुरुषार्थ बताते हैं, लेकिन अपनी नीतियों, भ्रष्टाचार, आर्थिक कदाचार और अराजकता के कारण जनता उन्हें खारिज कर दे तो चुनाव आयोग और ईवीएम को जिम्मेदार ठहराते हैं। उन्होंने विपक्षी दलों को इस पर चिंतन और आत्मावलोकन करने की नसीहत दी।

*न्यायपालिका से कैग तक का किया जिक्र*
मुख्यमंत्री योगी ने चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों को विपक्ष की पुरानी कार्यप्रणाली से जोड़ा। राहुल गांधी के कैंब्रिज में दिए बयान का उल्लेख करते हुए उन्होंने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2019 में राफेल के मुद्दे पर कैग के ऑब्जर्वेशन पर भी सवाल उठाए गए। जिस ईवीएम से कांग्रेस की केंद्र और राज्यों में सरकारें बनीं, उसी को ब्लैक बॉक्स बताकर देश की चुनाव प्रणाली को कठघरे में खड़ा किया गया। मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल खड़े करने से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है और दुनिया में भारत की छवि पर भी असर पड़ता है।

*आपातकाल, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर पर घेरा*
कांग्रेस पर हमला तेज करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने 25 जून 1975 के आपातकाल की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों पर कितना विश्वास रहा है, इसे देश जानता है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकारों पर विपक्षी दलों की चुनी हुई सरकारों को अनैतिक और अवैध तरीके से गिराने का भी आरोप लगाया। बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने विपक्ष पर भारतीय जवानों के शौर्य और पराक्रम को कटघरे में खड़ा करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया कि जवानों के पराक्रम पर सवाल उठाना कहां की देशभक्ति है।

*चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट की, फिर सवाल क्यों*
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्त मीडिया के सामने आकर चुनाव आयोग की पूरी कार्यप्रणाली और एसआईआर को लेकर स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। छूटे हुए मतदाताओं और फॉर्म-6 को लेकर भी स्थिति साफ की गई है। इसके बाद भी चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी के मुताबिक एसआईआर में जिन मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, उन्हें फॉर्म भरने का पूरा अवसर दिया गया है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी फॉर्म-6 को लेकर चुनाव आयोग की कार्रवाई को उचित ठहराया है। इसके बाद कोई सवाल नहीं बचता, फिर भी कांग्रेस, सपा और अन्य विपक्षी दल बाल की खाल उधेड़ने में लगे हैं।

*हिंसा और तोड़फोड़ की लोकतंत्र में जगह नहीं*
विरोध के तौर-तरीकों पर भी मुख्यमंत्री योगी ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा, तोड़फोड़ और दुष्प्रचार के लिए कोई जगह नहीं है। प्रदर्शन और तोड़फोड़ के जरिए चुनाव आयोग से जुड़े मुख्यालयों और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना गैर जिम्मेदाराना है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत ने पहले दिन से हर वयस्क मतदाता को जाति, क्षेत्र, भाषा और लिंग के भेदभाव के बिना मतदान की स्वतंत्रता दी है। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की व्यवस्था भी मौजूद है। ऐसी पारदर्शी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करना लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने जैसा है।

*कांग्रेस और सहयोगी दल माफी मांगें*
मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों से अपनी गैर जिम्मेदाराना गतिविधियों को नियंत्रित करने को कहा। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने, दुनिया में भारत की बदनामी कराने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर दुष्प्रचार करने के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को देश की संवैधानिक संस्थाओं और देशवासियों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष के इस आचरण की निंदा भी की।
एक लाख विद्यार्थियों को सीएम योगी ने दी स्टडी टेबल, बच्चों ने निराले अंदाज में जताया आभार
*देवीपाटन मंडल के चार जिलों के बच्चों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी आभार भरी चिट्ठियां*

*किसी ने फूलों से सजाया पत्र तो किसी ने बनाया मुख्यमंत्री का चित्र*

*स्वाती, सबा, नुजहत समेत बच्चों ने हाथ से सजाए आभार पत्र*

*मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया- ग्रामीण परिवेश के एक लाख मेधावी बच्चों को प्रदान की गई हैं स्टडी टेबल*

लखनऊ, 27 सितंबर। किसी ने फूलों से चिट्ठी सजाई, किसी ने अपनी नई स्टडी टेबल का चित्र बनाया तो किसी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के साथ ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश उकेरा। देवीपाटन मंडल में एक लाख बच्चों को मिली स्टडी टेबल अब उनके घर में पढ़ाई का अपना छोटा सा कोना बन रही है। इस पहल से खुश बच्चों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने हाथों से पत्र लिखकर धन्यवाद दिया है। इन मासूम चिट्ठियों में सरकारी योजना के आंकड़ों से इतर बच्चों की वह खुशी दिखाई देती है, जो घर में पढ़ाई के लिए अपनी स्टडी टेबल मिलने से उनके जीवन में आई है। *स्वाती ने लिखा- स्टडी टेबल पाकर काफी प्रसन्न हूं*
स्टडी टेबल पाने वाली स्वाती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे अपने पत्र में खुशी जाहिर की है। उसने लिखा कि उसे स्टडी टेबल और पढ़ने की सामग्री दी गई है, जिसके लिए वह दिल से धन्यवाद करती है। स्वाती ने बताया कि वह प्रतिदिन स्टडी टेबल पर पढ़ाई करती है और मिली सामग्री का उपयोग करती है। उसने अपने पत्र को फूलों से सजाने के साथ नीचे स्टडी टेबल, किताब और पेंसिल का चित्र भी बनाया है।

*सबा की खुशी- अब मेरी पीठ भी दर्द नहीं करती*
कक्षा छह की छात्रा सबा की चिट्ठी स्टडी टेबल से उसकी रोजमर्रा की पढ़ाई में आए बदलाव को बयां करती है। मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए सबा ने लिखा कि पहले उसे घर पर पढ़ाई करने में बहुत असुविधा होती थी। अब स्टडी टेबल मिलने से उसे पढ़ने में सहूलियत हुई है। अपनी मासूम भाषा में उसने लिखा कि अब उसकी पीठ भी दर्द नहीं करती। पत्र के साथ सबा ने स्टडी टेबल का चित्र भी बनाया और ‘सब पढ़ें-सब बढ़ें’ का संदेश लिखा।

*नुजहत फातिमा ने लिखा- अब पहले से अधिक एकाग्र होकर पढ़ रही हूं*
कक्षा सात की नुजहत फातिमा ने मुख्यमंत्री के नाम नीले चार्ट पेपर पर ‘आभार पत्र’ तैयार किया। नुजहत ने लिखा कि स्टडी टेबल मिलने से उसे पढ़ाई का अच्छा वातावरण मिला है। इससे पढ़ाई में उसकी रुचि बढ़ी है और वह पहले की तुलना में अधिक एकाग्र होकर पढ़ पा रही है। उसने यह भी लिखा कि गृहकार्य पूरा करने और पढ़े हुए पाठ को दोहराने में वह स्टडी टेबल का इस्तेमाल कर रही है। पत्र में रंगीन पेंसिलों के साथ पढ़ती हुई छात्रा का चित्र बनाकर उसने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। *बच्चों ने कागज पर उतारी खुशी, CM योगी के बनाए चित्र*
बच्चों के आभार पत्र केवल शब्दों तक सीमित नहीं हैं। कई छात्र-छात्राओं ने पूरी रचनात्मकता के साथ पोस्टर तैयार किए हैं। एक बच्चे ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा चित्र बनाया और दोनों ओर ‘बेटी बचाओ’ और ‘बेटी पढ़ाओ’ लिखा। नीचे स्टडी टेबल प्राप्त करती छात्रा का चित्र बनाया गया है। एक अन्य पोस्टर में स्कूल के गेट पर छात्रा को टेबल सौंपते दिखाते हुए लिखा गया ‘बेटी पढ़ेगी, आगे बढ़ेगी, उत्तर प्रदेश का नाम बढ़ाएगी।’ एक बच्चे ने बड़े अक्षरों में ‘Thank You’ लिखकर मुख्यमंत्री, छात्रा और स्टडी टेबल को एक साथ चित्रित किया।

*एक लाख मेधावी बच्चों के घर पहुंची पढ़ाई की मेज*
मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि देवीपाटन मंडल के चार जिलों में ‘शिक्षा की उड़ान’ स्टडी टेबल वितरण अभियान के तहत एक लाख टेबल बांटने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे शत-प्रतिशत पूरा किया गया है। अभियान का उद्देश्य घर पर अनुशासित पढ़ाई की संस्कृति विकसित करने के साथ सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करना है। मेधावी विद्यार्थियों को स्टडी टेबल उपलब्ध कराकर कक्षा के बाहर भी निरंतर और एकाग्र अध्ययन के लिए जगह उपलब्ध कराने की पहल की गई है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण परिवेश के बच्चों को स्टडी टेबल दी गई है, जो अब उनका पर्सनल स्टडी स्पेस बन चुका है। *बहराइच में सबसे ज्यादा 34,260 टेबल का वितरण*
मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के अनुसार अभियान में सबसे अधिक बहराइच में 34,260 टेबल दी गईं। इसके बाद गोंडा में 27,650, बलरामपुर में 26,984 और श्रावस्ती में 11,106 स्टडी टेबल का वितरण किया गया। इस तरह मंडल ने एक लाख टेबल का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया।

*मेधावी छात्रों के साथ कस्तूरबा की सभी छात्राओं को लाभ*
उन्होंने बताया कि ‘शिक्षा की उड़ान’ अभियान में सरकारी विद्यालयों के सर्वोच्च प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्टडी टेबल देने की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की सभी छात्राओं को लाभार्थियों में शामिल किया गया है। इसे सतत अभियान के रूप में तैयार किया गया है, ताकि भविष्य में भी टॉपर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जा सके।