भारतीय ज्ञान परंपरा में आनंद से समग्र कल्याण तक की राह, आनन्दसूत्रम् पर गहन मंथन
आध्यात्मिक साधना के साथ शिक्षा, चिकित्सा और आर्थिक विकेंद्रीकरण पर जोर, विद्वानों ने समकालीन संदर्भों में परखी प्रासंगिकता
प्रयागराज
Sb न्यूज से ब्यूरो चीफ विश्वनाथ प्रताप सिंह
गुरुवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में भारतीय ज्ञान परंपरा के गूढ़ पक्षों और उसकी समकालीन उपयोगिता को लेकर बृहस्पतिवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। मानविकी विद्या शाखा के तत्वावधान में तिलक शास्त्रार्थ सभागार में आयोजित संगोष्ठी में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में आनन्दसूत्रम् का योगदान’ विषय पर विद्वानों ने दार्शनिक, आध्यात्मिक, मनोवैज्ञानिक तथा सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण से विस्तारपूर्वक विचार मंथन किया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि आचार्य दिव्य चेतनानन्द, सचिव, आनन्द मार्ग प्रचारक संघ, कोलकाता ने कहा कि भारतीय उपनिषद परंपरा में आनंद को ब्रह्म से जोड़ा गया है। आनन्दमूर्ति प्रभात रंजन सरकार ने इसी अवधारणा को आनन्दसूत्रम् के माध्यम से विशिष्ट दार्शनिक स्वरूप प्रदान किया। उन्होंने कहा कि किसी सूत्र को केवल उसके शब्दार्थ तक सीमित करके देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके भीतर निहित भाव, दर्शन और व्यापक चिंतन को समझना आवश्यक है। इसी आधार पर प्राचीन भारतीय चिंतन परंपराओं के साथ उसका सार्थक तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है। आचार्य दिव्य चेतनानन्द ने कहा कि आनन्दसूत्रम् की विशेषता केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मनो-बौद्धिक विकास के साथ सामाजिक और आर्थिक चिंतन को भी स्थान दिया गया है। उन्होंने मानव जीवन की न्यूनतम आवश्यकताओं की गारंटी, उपलब्ध संसाधनों के समुचित उपयोग और विकेंद्रीकृत आर्थिक नियोजन जैसी अवधारणाओं को समाज के संतुलित विकास से जोड़ते हुए कहा कि भोजन, वस्त्र और आवास के साथ शिक्षा तथा चिकित्सा को भी मानव जीवन की आवश्यक जरूरतों में शामिल किया गया है। विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रवीण कुमार द्विवेदी, सहायक आचार्य, संस्कृत विभाग, प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भैय्या विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने कहा कि आनन्दसूत्रम् का वेद, उपनिषद, आगम, सांख्य, योग, वेदान्त सहित भारतीय दर्शन की विभिन्न परंपराओं के साथ तुलनात्मक अध्ययन किए जाने की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि आनन्दसूत्रम् के सूत्रों पर संस्कृत और हिंदी में विस्तृत वार्तिक तथा भाष्य तैयार करने की दिशा में गंभीर अकादमिक विमर्श की आवश्यकता है। अध्यक्षता करते हुए मानविकी विद्या शाखा के निदेशक प्रो. सत्यपाल तिवारी ने कहा कि भारतीय चिंतन की निरंतर यात्रा मूल रूप से आनंद की खोज की यात्रा रही है। भारतीय परंपरा में दर्शन और आध्यात्मिक चिंतन को सदैव केंद्रीय महत्व मिला है। वैदिक काल से ही भारतीय मनीषा जीवन के मूल स्वरूप और अंतिम सत्य की खोज में निरंतर प्रवृत्त रही है। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. विनोद कुमार गुप्त ने स्वागत वक्तव्य एवं विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों को वर्तमान संदर्भों में समझने तथा समाज में ज्ञान, समरसता और मानवीय मूल्यों के प्रसार के लिए इस प्रकार के अकादमिक विमर्श की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यक्रम का संचालन शोध छात्र दिग्विजय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ. अतुल कुमार मिश्र ने किया। संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी और अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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*चाय पीते समय दबंगों ने सिर फोड़ा, मेडिकल कॉलेज में भर्ती
प्रतापगढ़। देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान जेडी शिक्षा ग्राम द्वारा संचालित ज्योतिरादित्य इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मेसी कोहंडौर, प्रतापगढ़ में आज पूरे उत्साह के साथ विश्व फार्मासिस्ट दिवस मनाया गया। सबसे पहले शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष दिनेश चंद्र त्रिपाठी ने मां सरस्वती के चित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया और उन्होंने छात्रों को इस अवसर पर पूरे विश्व में फार्मेसी के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि फार्मेसी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो चिकित्सा विज्ञान और रोगी की देखभाल के बीच सीधा संबंध स्थापित करता है। प्रधानाचार्य डॉक्टर एचयस चौरसिया ने आज के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता के बारे में बताया, जिसमे क्विज प्रतियोगिता, फार्मेसी थीम पर रंगोली, पोस्टर प्रेजेंटेशन, प्लांटेशन प्रेजेंटेशन, वर्किंग मॉडल बनाकर छात्रों ने प्रतियोगिता में भाग लिया। प्रतियोगिता में पार्टिसिपेट किए हुए सभी छात्रों को शील्ड देकर सम्मानित किया गया । छात्रों में अनु यादव, जिज्ञासिनी वर्मा, पलक मिश्रा ,प्रीती वर्मा, तनु जायसवाल सतीश तिवारी, शैलजा पांडे आदि छात्रों विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान हासिल किया। इस अवसर पर शिक्षण संस्थान से जुड़े सभी शिक्षक और छात्र उपस्थित रहे।
गोण्डा। जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता,सिविल बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री एवं पूर्व कैसरगंज लोकसभा प्रत्याशी मनोज कुमार मिश्रा के कांग्रेस में शामिल होने के बाद जिले की सियासत में हलचल तेज हो गई है। हाल ही में कांग्रेस का दामन थामने वाले मनोज कुमार मिश्रा ने भाजपा की नीतियों और कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है।मनोज कुमार मिश्रा ने कहा कि वह कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नीतियों और विचारों को लेकर जनता के बीच जाएंगे और पार्टी के पक्ष में प्रचार-प्रसार करेंगे। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में गोण्डा जनपद की सातों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों को मजबूत करने के लिए वह पूरी ताकत से काम करेंगे।उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस का गठबंधन नहीं होता है, तो कांग्रेस अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरकर सभी सातों विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करेगी।मनोज कुमार मिश्रा के इस बयान के बाद गोण्डा की राजनीति में कांग्रेस की सक्रियता और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है और गोण्डा में कांग्रेस की चुनावी रणनीति क्या रहती है।
रामलीला मेले की जमीन विवाद पर समझौता
मुहम्मदाबाद गोहना (मऊ)। कस्बे के जमीन बरामदपुर मोहल्ले में स्थित वृद्धाश्रम का गुरुवार देर शाम मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) विवेक श्रीवास्तव ने निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वृद्धाश्रम के विभिन्न कमरों में पहुंचकर बुजुर्गों के रहने, बैठने, भोजन, पेयजल समेत अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
प्रयागराज
Sb न्यूज़ ब्यूरो रितेश मिश्रा
Sep 25 2026, 19:20
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