ऊर्जा क्षेत्र में यूपी ने रचा नया इतिहास, 9 वर्षों में बिजली व्यवस्था बनी अधिक मजबूत और आधुनिक
l -  60,858 सर्किट किमी पारेषण लाइन, 765 नए उपकेंद्र और 99.30% बिजली उपलब्धता; 59 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए गएलखनऊ। उत्तर प्रदेश ने पिछले नौ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक बदलाव दर्ज करते हुए विद्युत उत्पादन, पारेषण, वितरण और उपभोक्ता सेवाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। आधुनिक तकनीक, मजबूत विद्युत अवसंरचना और पारदर्शी व्यवस्था के दम पर प्रदेश की बिजली प्रणाली अब पहले से अधिक सुदृढ़ और विश्वसनीय बन गई है।ऊर्जा विभाग के अनुसार, प्रदेश में 60,858 सर्किट किलोमीटर नई पारेषण लाइनें बिछाई गई हैं तथा 765 नए विद्युत उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,05,632 एमवीए है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश में 99.30 प्रतिशत बिजली उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।-  पारेषण क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि
पिछले नौ वर्षों में 765 केवी के 7, 400 केवी के 45, 220 केवी के 173 और 132 केवी के 490 उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा 2 लाख ट्रांसमिशन टावर, 2,100 ट्रांसफॉर्मर लगाए गए तथा पारेषण हानियों में 3.2 प्रतिशत की कमी लाई गई है। विभाग ने 31,486 मेगावाट की पीक बिजली मांग की सफल आपूर्ति भी सुनिश्चित की है।-  हर घर तक पहुंची बिजली
प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) के तहत सभी चिन्हित घरों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। वहीं आरडीएसएस (RDSS) योजना के अंतर्गत 2.51 लाख से अधिक नए घरों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है।निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 60 नए 33/11 केवी उपकेंद्र स्थापित किए गए, 1,109 उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई गई, जबकि वर्ष 2024-25 में 28 नए उपकेंद्रों का निर्माण और 576 उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि का कार्य पूरा किया गया।-  किसानों को मिली ऊर्जा सुरक्षा
कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत वर्ष 2025 तक 2.42 लाख निजी नलकूपों का विद्युतीकरण किया गया। वहीं पीएम-कुसुम योजना के तहत 96,128 से अधिक किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे सिंचाई में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ा है।-  डिजिटल सेवाओं का विस्तार
उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए 59.17 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा ऑनलाइन नए बिजली कनेक्शन, ऑनलाइन बिल भुगतान, शिकायत पंजीकरण और त्वरित समाधान जैसी डिजिटल सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है।-  ग्रीन एनर्जी पर सरकार का फोकस
प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित करने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश को भी बढ़ावा दे रही है।
ऊर्जा विभाग के अनुसार, आधुनिक तकनीक, मजबूत विद्युत अवसंरचना और स्वच्छ ऊर्जा के समन्वय से उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में हुए ये सुधार औद्योगिक विकास, कृषि प्रगति, रोजगार सृजन और आम नागरिकों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव का आधार बन रहे हैं।
आईएसआईएस सहयोगी राकिब अंसारी को पांच साल की जेल
लखनऊ एनआईए कोर्ट का फैसला

लखनऊ। लखनऊ स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) का सहयोग करने के आरोपित राकिब इमाम अंसारी को पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत का यह फैसला उस समय आया, जब सुनवाई के दौरान अंसारी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार कर लिया।

एनआईए के विशेष न्यायाधीश उमाकांत जिंदल ने यह सजा सुनायी है। अभियोजन पक्ष ने बताया कि इस मामले में एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) अलीगढ़ के दारोगा मोहम्मद अकरम ने तीन नवंबर 2023 को गोमतीनगर के एटीएस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद जांच शुरु हुई ताे पता चला कि एक रिपोर्ट मुंबई के काला चौकी थाने में दर्ज हुई थी।

विवेचना के दौरान आरोपित शाहनवाज और रिजवान अली के बारे में सूचना इकट्ठी करते समय जानकारी मिली कि ये दोनों आरोपित आईएसआईएस के सक्रिय सदस्य हैं और दोनों के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संगठन स्टूडेंट ऑफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों से संबंध हैं। जानकारी यह भी मिली कि रिजवान यूनिवर्सिटी का छात्र नहीं था, लेकिन यूनिवर्सिटी के संगठन से जुड़कर आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार और प्रसार कर रहा है। एटीएस ने पाया कि राकिब इमाम अंसारी भी अन्य आरोपितों के संपर्क में था। साथ ही शाहनवाज और रिजवान अली के संपर्क में रहकर प्रतिबंधित आतंकी संगठन की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर था।

अभियोजन ने 17 गवाह पेश किए। इन गवाहों ने अदालत में बताया कि सभी आराेपित प्रतिबंधित आतंकी संगठन के लिए नए-नए लोगों को जोड़ने, जिहादी गतिविधियों को प्रेरित करने व भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़कर भारत में सरिया कानून स्थापित करने की साजिश रच रहे थे। इसमें दोषी राकिब इमाम अंसारी भी सक्रिय भूमिका निभा रहा था। मुकदमे के विचारण के दौरान दोषी राकिब इमाम अंसारी ने न्यायालय के समक्ष अर्जी देकर अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।
यूपी के 8 ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण पर ₹14.81 करोड़ खर्च होंगे, सरकार ने जारी की धनराशि

-  झांसी, ललितपुर, फिरोजाबाद, शामली और लखनऊ के स्मारकों का होगा वृहद अनुरक्षण, बोले जयवीर सिंह- विरासत का संरक्षण हमारी प्राथमिकता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य संरक्षित 8 स्मारकों के वृहद अनुरक्षण के लिए 14 करोड़ 81 लाख 81 हजार 200 रुपये की धनराशि जारी कर दी है। यह राशि कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल के माध्यम से जैन विद्या शोध संस्थान, लखनऊ के खाते में जमा करा दी गई है। इन निधियों से झांसी, ललितपुर, फिरोजाबाद, शामली और लखनऊ स्थित स्मारकों का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि प्राचीन स्मारक हमारी सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत के जीवंत प्रतीक हैं। उनका संरक्षण न केवल हमारी जिम्मेदारी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

-  इन स्मारकों का होगा जीर्णोद्धार
जारी धनराशि के तहत झांसी की डिमरौनी गढ़ी के लिए 3.46 करोड़ रुपये, ठाकुरपुरा गढ़ी के लिए 4.89 करोड़ रुपये, ललितपुर की मर्दन सिंह की बैठक के लिए 1.42 करोड़ रुपये, लक्षमणगढ़ मंदिर (पिपराई) के लिए 55.40 लाख रुपये तथा रणक्षोण मंदिर (धोजारी) के लिए 28.55 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
इसके अलावा फिरोजाबाद के चंद्रवाड़ किला के संरक्षण के लिए 1.60 करोड़ रुपये, शामली के प्राचीन गुंबद के लिए 1.70 करोड़ रुपये तथा लखनऊ के बड़ा शिवाला के जीर्णोद्धार के लिए 88.88 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई है।

-  पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
जयवीर सिंह ने कहा कि ये स्मारक अपनी विशिष्ट स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व के कारण प्रदेश की अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरे प्रदेश में ऐतिहासिक स्मारकों, किलों, धार्मिक स्थलों और विरासत भवनों के संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उद्देश्य यह है कि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे आमजन और आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित एवं आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
मासूम बच्ची का अपहरण कर बेचने जा रहे पांच आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ। चौक थाना पुलिस ने 18 माह की बच्ची के अपहरण का 48 घंटे के भीतर पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस प्रभारी निरीक्षक नागेश उपाध्याय के अनुसार, आरोपित बच्ची को बेचने की फिराक में थे। गिरोह के दो अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। डीसीपी पश्चिमी जोन के निर्देशन में गठित टीम ने सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस और मुखबिर की सूचना के आधार पर बुधवार सुबह गुलजार नगर क्षेत्र से पांचों आरोपितों को दबोच लिया। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह बच्चों की खरीद-फरोख्त के उद्देश्य से मासूम बच्चों की तलाश करता था।
पुलिस के मुताबिक, 13 जुलाई की रात चौक क्षेत्र स्थित नेशनल मेडिकल कॉलेज के पास सो रहे दंपती के बीच से 18 माह की बच्ची का अपहरण किया गया था। आरोपित बच्ची को बाइक से गुलजार नगर ले गए और उसकी फोटो व वीडियो गिरोह के सरगना को भेजी। बच्ची उम्र में अपेक्षाकृत बड़ी होने के कारण पसंद नहीं आई, जिसके बाद उसे मछली मंडी के पास बने पुल पर छोड़ दिया गया और आरोपी दूसरे बच्चे की तलाश में निकल पड़े।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान ऋषभ कश्यप, रोहित पासी उर्फ जादू, मोहम्मद सुल्तान, मोहम्मद इरशाद शाह और श्याम जी यादव के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से अपहृत बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया है। साथ ही चार मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। पुलिस अधिकारी वरिष्ठ उपनिरीक्षक अखिलेश मिश्र ने बताया कि गिरोह के सरगना शेर सिंह और सहयोगी महेश फरार हैं। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। आरोपितों के आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट से राजा भैया को राहत, घरेलू हिंसा मामले की सुनवाई राउज एवेन्यू कोर्ट में नहीं होगी

-  शीर्ष अदालत ने क्षेत्राधिकार पर उठी आपत्ति स्वीकार की, मामले की सुनवाई उचित अदालत में कराने का रास्ता साफ

नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कुंडा से सात बार विधायक कुंवर रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया' को घरेलू हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट से अहम राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी पत्नी द्वारा दायर घरेलू हिंसा याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले की सुनवाई दिल्ली की राउज एवेन्यू डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में नहीं की जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले का निस्तारण करते हुए स्पष्ट किया कि सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों के लिए नामित विशेष अदालत का दायरा मुख्य रूप से आपराधिक मामलों तक सीमित है। घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत की जाने वाली कार्यवाही की प्रकृति और क्षेत्राधिकार के संबंध में उठाए गए प्रश्नों पर अदालत ने राजा भैया की ओर से दी गई दलीलों पर विचार किया।
राजा भैया की ओर से अदालत में कहा गया कि सांसदों और विधायकों के लिए गठित विशेष अदालतों का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों से जुड़े आपराधिक मामलों का त्वरित निस्तारण करना है, जबकि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत की जाने वाली कार्यवाही मुख्य रूप से दीवानी प्रकृति की होती है।
साथ ही, घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 27 का हवाला देते हुए यह भी तर्क दिया गया कि मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार साकेत कोर्ट के पास है, न कि राउज एवेन्यू कोर्ट के पास। सुप्रीम कोर्ट ने इस आपत्ति को स्वीकार करते हुए कहा कि राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले की सुनवाई आगे नहीं चलेगी।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष (Merits) पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अदालत का आदेश केवल यह स्पष्ट करता है कि मामले की सुनवाई उचित क्षेत्राधिकार वाली अदालत में होगी।
जौहर विश्वविद्यालय पर चलेगा बुलडोजर !

-  जौहर विवि के 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण का आदेश, बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण पर आरडीए की बड़ी कार्रवाई

-  रामपुर डीएम बोले- नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा 27(1) के तहत हुई कार्रवाई

लखनऊ/रामपुर। उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण के खिलाफ जारी कार्रवाई के बीच रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित भवनों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। विस्तृत सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद प्राधिकरण ने 38 भवनों को अवैध निर्माण मानते हुए उनके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत की गई है।

-  विश्वविद्यालय प्रशासन को सुनवाई का दिया गया अवसर
रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि अवैध निर्माण की जांच क्षेत्रीय अवर अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 8 जुलाई को लिखित जवाब दाखिल किया, जबकि 15 जुलाई को व्यक्तिगत सुनवाई हुई, जिसमें दोनों पक्षों के अधिकारी और अधिवक्ता उपस्थित रहे।

-  विश्वविद्यालय ने क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि ग्राम सिंगनखेड़ा को 27 सितंबर 2024 से पहले रामपुर विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया था, इसलिए उस समय आरडीए से नक्शा स्वीकृत कराने की आवश्यकता नहीं थी। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि अधिकांश निर्माण पहले किए गए थे, इसलिए वर्तमान नियमों के आधार पर उन्हें अवैध नहीं माना जा सकता।

-  प्राधिकरण ने दलीलें कीं खारिज
रामपुर विकास प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि चाहे क्षेत्र बाद में विकास प्राधिकरण के अधीन आया हो, लेकिन निर्माण के समय संबंधित सक्षम प्राधिकारी से नक्शा स्वीकृत कराना अनिवार्य था।
जांच के दौरान मिले अभिलेखों के अनुसार मेडिकल कॉलेज भवन और अकादमिक ब्लॉक के नक्शे ही विधिवत स्वीकृत पाए गए, जबकि शेष 38 भवनों के लिए कोई वैध स्वीकृति उपलब्ध नहीं मिली।

-  दो भवनों की अनुमति, बाकी बिना स्वीकृति
डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने स्वयं दो भवनों के लिए जिला पंचायत से अनुमति ली थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि स्वीकृति की आवश्यकता से वह अवगत था। इसके बावजूद अन्य भवनों का निर्माण बिना अनुमोदन के किया गया, जिसे प्राधिकरण ने नियमों का उल्लंघन माना।
आदेश में यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा 59 के तहत ऐसे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जा सकती है, भले ही संबंधित क्षेत्र बाद में विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल हुआ हो।
प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय की ओर से मास्टर प्लान, जोनल प्लान और विभिन्न कानूनी प्रावधानों के आधार पर दी गई दलीलों का परीक्षण करते हुए उन्हें अस्वीकार कर दिया और स्पष्ट किया कि किसी भी निर्माण की वैधता का आधार निर्माण के समय सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त स्वीकृति ही होती है।
आयुष्मान योजना में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई, बिजनौर के 16 सूचीबद्ध अस्पतालों पर गिरी गाज
-  6 अस्पतालों को निलंबन नोटिस के साथ भुगतान पर रोक, 10 को कारण बताओ नोटिस; फर्जी भर्ती और मानकों की अनदेखी पर सख्ती

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (साचीज) ने बिजनौर में बड़ा कार्रवाई अभियान चलाया। औचक निरीक्षण में अनियमितताएं मिलने पर 20 में से 16 सूचीबद्ध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इनमें 6 अस्पतालों को निलंबन नोटिस जारी कर उनका भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया, जबकि 10 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

-  तीन सदस्यीय टीम ने किया औचक निरीक्षण
साचीज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अर्चना वर्मा ने बताया कि तीन सदस्यीय विशेष टीम ने बिना पूर्व सूचना के बिजनौर के 20 सूचीबद्ध अस्पतालों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान मरीजों को दी जा रही चिकित्सा सेवाओं, उपचार प्रक्रिया, दस्तावेजों, रिकॉर्ड, क्लेम प्रक्रिया और अन्य व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया गया।

-  गंभीर अनियमितताएं आईं सामने
निरीक्षण में कई अस्पताल स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस (STG) और गुणवत्ता मानकों का पालन करते नहीं पाए गए। जांच में एक ही परिवार के मरीजों को बार-बार भर्ती दिखाने, बिना चिकित्सीय आवश्यकता के आईसीयू में भर्ती करने तथा क्लेम प्रक्रिया में अन्य गड़बड़ियां सामने आईं।
इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए 6 अस्पतालों का भुगतान रोकते हुए उन्हें निलंबन नोटिस जारी किया गया है। वहीं 10 अन्य अस्पतालों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। अधिकारियों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद संबंधित अस्पतालों पर नियमों के तहत 10 गुना तक जुर्माना भी लगाया जाएगा।

-  ऑडिट एजेंसी और जिला समन्वयक भी कार्रवाई के दायरे में
साचीज ने मामले में संबंधित ऑडिट एजेंसी को भी नोटिस जारी किया है। साथ ही जिला कार्यक्रम समन्वयक को भी कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।

-  अनियमितता पर होगी सख्त कार्रवाई
सीईओ अर्चना वर्मा ने स्पष्ट किया कि आयुष्मान भारत योजना से जुड़े सभी सूचीबद्ध अस्पतालों के लिए गुणवत्ता मानकों और शासन के दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन अनिवार्य है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या लाभार्थियों के हितों से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में सूचीबद्ध अस्पतालों की नियमित निगरानी और औचक निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे। जहां भी अनियमितता मिलेगी, वहां तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि योजना के पात्र लाभार्थियों को समय पर पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
2017 से पहले सरकार ही सबसे बड़ा अपशगुन थी', युवा कौशल दिवस पर विपक्ष पर बरसे सीएम योगी

-  9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियों और सवा तीन करोड़ रोजगार का दावा, बोले- युवाओं के दम पर बनेगा वन ट्रिलियन डॉलर का उत्तर प्रदेश

लखनऊ। विश्व युवा कौशल दिवस-2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि "2017 से पहले तत्कालीन सरकार ही उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा अपशगुन थी।" उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में सरकारी नौकरियों पर एक परिवार का कब्जा था, भर्ती प्रक्रियाएं भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद से प्रभावित थीं तथा बिना पैसे कोई काम नहीं होता था।

गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन एवं आईटीआई से प्रशिक्षित युवाओं के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश सरकार ने 9 लाख से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां दी हैं, जबकि सवा तीन करोड़ से अधिक युवाओं और कारीगरों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे युवा राज्य है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि युवाओं को कौशल, आधुनिक तकनीक और रोजगार से जोड़कर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यूनेस्को द्वारा निर्धारित इस वर्ष की थीम "साझा भविष्य के लिए कौशल" प्रदेश सरकार की सोच से मेल खाती है।
सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी से जुड़ी थी। प्रदेश के युवाओं को बाहर जाकर अपनी योग्यता साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियां योग्यता नहीं, बल्कि सिफारिश और धनबल के आधार पर मिलती थीं।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि पहली बार देश में अलग कौशल विकास मंत्रालय बनाया गया, जिससे युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश के आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, 3डी प्रिंटिंग और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि लखनऊ में स्थापित ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना के लिए कोरोना काल में भी कार्य नहीं रुका। परियोजना के माध्यम से आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग संस्थानों से जुड़े 500 युवाओं को रोजगार मिला है, जिनमें प्रदेश के अनेक जिलों के युवा शामिल हैं।
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जो उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बन चुकी हैं। उन्होंने मुरादाबाद का पीतल उद्योग, फिरोजाबाद का ग्लास उद्योग, मेरठ का खेल उद्योग, भदोही का कालीन, लखनऊ की चिकनकारी, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और बनारसी साड़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक पहचान दिलाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई युवा जापान या अन्य देशों में रोजगार करना चाहता है तो उसे संबंधित देश की भाषा का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही प्रदेश के प्रत्येक जिले में सरदार वल्लभभाई पटेल इंडस्ट्रियल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन विकसित किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक प्रशिक्षित युवती का उल्लेख करते हुए कहा कि वह हर महीने 27 हजार रुपये कमाकर अपनी मां का इलाज करा रही है। उन्होंने कहा कि "ईमानदारी से कमाए गए 27 हजार रुपये कई लाख रुपये से अधिक मूल्यवान हैं।" मुख्यमंत्री ने युवती की मां के इलाज में हरसंभव सरकारी सहायता देने का भी आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में कौशल विकास एवं व्यावसायिक शिक्षा मंत्री कपिल देव अग्रवाल, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री योगी ने 11 युवा प्रतिभाओं को किया सम्मानित, बोले- कौशल विकास से आत्मनिर्भर बन रहा उत्तर प्रदेश

-  सम्मान पाकर भावुक हुए युवा, किसी ने कैंसर पीड़ित मां का इलाज संभाला तो किसी ने खड़ा किया लाखों का स्टार्टअप और स्वरोजगार

लखनऊ। विश्व युवा कौशल दिवस-2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन एवं आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त 11 युवाओं को सम्मानित किया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह में सम्मानित युवाओं ने अपनी सफलता की प्रेरक कहानियां साझा करते हुए कहा कि योगी सरकार की कौशल विकास योजनाओं ने उन्हें रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया।

-  संघर्ष से सफलता तक पहुंचीं राजरानी
बरेली की राजरानी ने अपनी भावुक कहानी साझा करते हुए बताया कि पिता के निधन और मां के कैंसर से पीड़ित होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। कौशल विकास मिशन से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्हें हरियाणा में नौकरी मिली और आज वह 27 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पाकर अपनी मां का इलाज कराने के साथ पूरे परिवार की जिम्मेदारी निभा रही हैं। उन्होंने युवतियों से सरकारी कौशल योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।

-  आईटीआई से मिली सफलता, एक लाख की नौकरी
उन्नाव के कृष्ण कुमार साहू ने बताया कि आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्हें एनसीएल (कोल इंडिया की इकाई) में लगभग एक लाख रुपये प्रतिमाह वेतन वाली नौकरी मिली। उन्होंने कहा कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में आईटीआई केंद्र खुलने से युवाओं को दूर-दराज नहीं जाना पड़ता।

-  फैशन डिजाइनिंग से बनीं सफल उद्यमी
चंदौली की भावना दुबे ने आईटीआई से फैशन डिजाइनिंग का प्रशिक्षण लेकर अपना स्वरोजगार शुरू किया। आज उनकी मासिक आय 70 हजार रुपये से अधिक है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया।

- हेल्थकेयर स्टार्टअप से युवाओं को दे रहे रोजगार
लखनऊ के ज्ञान प्रकाश वर्मा ने बताया कि उन्होंने आईटीआई से प्रेरणा लेकर एआई आधारित हेल्थकेयर स्टार्टअप शुरू किया। महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े समाधान विकसित करने वाली उनकी कंपनी कई युवाओं को रोजगार भी उपलब्ध करा रही है।

- पांच लाख मासिक आय वाली उद्यमी बनीं शुभ्रा
फर्रुखाबाद की शुभ्रा मिश्रा ने आईटीआई से प्रशिक्षण लेने के बाद अपना व्यवसाय शुरू किया। आज उनकी मासिक आय करीब पांच लाख रुपये है और उनके संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों को 70 हजार रुपये तक मासिक वेतन मिल रहा है।

-  सरकारी योजनाओं ने बदली जिंदगी
अयोध्या की शीतल कुमारी ने बताया कि कौशल प्रशिक्षण के बाद उन्हें मेदांता अस्पताल में नौकरी मिली, जहां वह 23 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पा रही हैं। वहीं गौतमबुद्ध नगर की संगीता वर्मा ने बताया कि उन्होंने आईटीआई प्रशिक्षण के बाद अपना व्यवसाय शुरू किया और अब आत्मनिर्भर हैं। लखनऊ की वर्तिका गुप्ता ने कॉस्मेटोलॉजी ट्रेड में ऑल इंडिया रैंक हासिल कर अपनी पहचान बनाई।
हमीरपुर की नेहा ने कहा कि सामान्य परिवार से होने के बावजूद आज वह 22,800 रुपये प्रतिमाह कमा रही हैं और परिवार की आर्थिक मदद कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से सम्मान प्राप्त करना उनके जीवन का सबसे यादगार पल है।

-  11 युवाओं को मिला सम्मान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोह में शीतल कुमारी, नेहा, फरदीन खान, मोहम्मद बिलाल, राजरानी, वर्तिका गुप्ता, अर्जुन पाल, संगीता वर्मा, शिवांग वर्मा, राजीव विश्वकर्मा और विनीता सहित कुल 11 प्रशिक्षित युवाओं को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कौशल विकास ही युवाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
निर्माण श्रमिकों के लिए लॉन्च हुआ 'बीओसीडब्ल्यू डिजिटल लेबर चौक' ऐप

-  ओला-उबर की तर्ज पर श्रमिक और नियोक्ता एक मंच पर आएंगे, ऑनलाइन पंजीकरण और सीधा संपर्क होगा संभव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड ने निर्माण श्रमिकों को रोजगार के अवसरों और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए "BOCW Digital Labour Chowk Mobile App" विकसित किया है। यह ऐप निर्माण श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच एक प्रभावी डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा, जिससे रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी।

अपर श्रम आयुक्त, लखनऊ क्षेत्र कल्पना श्रीवास्तव ने बताया कि ऐप के माध्यम से निर्माण श्रमिक अपना ऑनलाइन पंजीकरण कर अपनी कार्य उपलब्धता दर्ज करा सकेंगे। इसके साथ ही वे उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर पात्रता के अनुसार ऑनलाइन आवेदन भी कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि बिल्डर, ठेकेदार, निर्माण एजेंसियां और अन्य नियोक्ता भी इस ऐप पर पंजीकरण कर अपनी आवश्यकता के अनुरूप पंजीकृत श्रमिकों की खोज कर उनसे सीधे संपर्क स्थापित कर सकेंगे। इससे श्रमिकों को रोजगार मिलने की प्रक्रिया तेज और आसान होगी।

अपर श्रम आयुक्त ने कहा कि यह ऐप ओला और उबर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की तर्ज पर काम करेगा, जहां श्रमिक और नियोक्ता एक ही मंच पर उपलब्ध रहेंगे। इससे श्रम बाजार को डिजिटल स्वरूप मिलेगा और रोजगार के अवसरों का दायरा भी बढ़ेगा।

उन्होंने लखनऊ मंडल के सभी निर्माण श्रमिकों, बिल्डरों, ठेकेदारों, निर्माण एजेंसियों, श्रमिक संगठनों और आम नागरिकों से "BOCW Digital Labour Chowk Mobile App" का अधिकाधिक उपयोग करने की अपील की। साथ ही उन्होंने निर्माण एजेंसियों एवं नियोक्ताओं से स्वयं तथा अपने यहां कार्यरत श्रमिकों का ऐप पर पंजीकरण कराने और इस डिजिटल पहल को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग देने का आग्रह किया।