केयरएज रेटिंग्स की चेतावनी: इस वित्त वर्ष 6% तक रह सकती है खाद्य महंगाई

-  कमजोर मानसून से बढ़ी चिंता, खुदरा महंगाई 5% रहने का अनुमान; खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ सकता है असर

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में आम आदमी की रसोई पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। रेटिंग एजेंसी केयरएज रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष देश में औसत खाद्य महंगाई (फूड इन्फ्लेशन) करीब 6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि खुदरा महंगाई (सीपीआई) लगभग 5 प्रतिशत पर रह सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस अनुमान के पीछे सबसे बड़ी वजह मानसून की कमजोर शुरुआत है। 1 से 30 जून के बीच देश में सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
केयरएज रेटिंग्स का कहना है कि यदि आने वाले सप्ताहों में बारिश सामान्य नहीं हुई तो खाद्यान्न, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की रसोई के बजट पर पड़ेगा।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मई 2026 में खाद्य तेलों की महंगाई दर पहले ही 9.5 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच चुकी थी। ऐसे में कमजोर मानसून की स्थिति बनी रहने पर खाद्य पदार्थों की कीमतों में और तेजी आने की आशंका जताई गई है।
20 जुलाई से 13 अगस्त तक संसद का मानसून सत्र, कई अहम विधेयकों और राजनीतिक मुद्दों पर होगी चर्चा

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संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा। यह 13 अगस्त तक चलेगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसका ऐलान किया। करीब तीन सप्ताह के इस मानसून सत्र में सरकार कई अहम विधेयकों को पारित कराने का प्रयास करेगी।

किरेन रिजिजू ने दी जानकारी

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा कि भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 20 जुलाई से 13 अगस्त तक संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाने को मंजूरी दे दी है। संसदीय परिपाटी के मुताबिक मानसून सत्र दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ शुरू होगा। दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा भी कराई जाएगी।

इन मुद्दों पर हंगामे के आसार

बीते दिनों मेडिकल की पढ़ाई से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षा- NEET के पेपर लीक, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर का चढ़ावा चोरी विवाद जैसे कई मामले लगातार सुर्खियों में है। ऐसे में संसद सत्र के दौरान हंगामा होने की आशंका है। इन मामलों के अलावा तृणमूल के दो फाड़ होने का मुद्दा भी चर्चा में है। कांग्रेस अंडमान की ग्रेट निकोबार परियोजना पर भी लगातार हमलावर है। ऐसे में हंगामे और नारेबाजी से सत्र की कार्यवाही बाधित हो सकती है।

टेलीग्राम पर सरकार सख्त, पायरेटेड फिल्में हटाने का आदेश, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

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देश में ऑनलाइन पाइरेसी को लेकर केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलिग्राम (Telegram) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को नोटिस जारी कर पायरेटेड फिल्मों और ओटीटी कंटेंट की शेयरिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है।

15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर अपनी एंटी-पाइरेसी व्यवस्था को मजबूत करने और इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में पाइरेटेड फिल्में, ओटीटी कंटेंट और कई कॉपीराइट कंटेंट शेयर किए जा रहे हैं जिससे फिल्म इंडस्ट्री और क्रिएटर इकोनॉमी को भारी नुकसान हो रहा है।

कॉपीराइट का उल्लंघन सामान्य कानूनी विवाद नहीं

सरकार ने टेलीग्राम को याद दिलाया है कि कॉपीराइट का उल्लंघन केवल एक सामान्य कानूनी विवाद नहीं, बल्कि कॉपीराइट अधिनियम, 1957 और सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत आपराधिक अपराध भी हो सकता है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 के तहत एक मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) के रूप में टेलीग्राम की जिम्मेदारी है कि वह उचित सतर्कता बरते और अवैध सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाए।

पाइरेसी रोकना सरकार का है मकसद

सरकार ने टेलीग्राम से उन यूजर्स और नेटवर्क के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने को कहा है जो बार-बार पाइरेटेड कंटेंट साझा करते हैं। इसमें केवल पर्सनल अकाउंट ही नहीं बल्कि चैनल, ग्रुप, बॉट, एडमिन और उनसे जुड़े कई नेटवर्क भी शामिल हैं। सरकार के इस कदम का मसकद ऐसे पूरे नेटवर्क को खत्म करना है जो लगातार फिल्मों और वेब सीरीज की पाइरेटेड कॉपी लोगों तक पहुंचाते हैं।

भूख हड़ताल के सातवें दिन सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी, 5 किलो से अधिक वजन घटा
-  जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी, शाम को UPSC अभ्यर्थियों के साथ होगा खुला संवाद

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। भूख हड़ताल के सातवें दिन जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार उनका वजन 5 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है। डॉक्टरों ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर सामान्य स्तर से नीचे पहुंच गए हैं। मेडिकल टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखे हुए है और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।
आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने कहा कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक भूख हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि आंदोलन को समर्थन देने के लिए बड़ी संख्या में लोग लगातार धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं।
आंदोलन के तहत शनिवार शाम 7 बजे UPSC अभ्यर्थियों के साथ एक खुला संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान अभिजीत दीपके छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनेंगे। आयोजकों के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत से ही बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं और परीक्षा प्रक्रिया, आर्थिक दबाव, मानसिक तनाव तथा अन्य चुनौतियों से जुड़े अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।
आयोजकों का कहना है कि इस संवाद का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं और सुझावों को नीति-निर्माताओं तक पहुंचाना है। इसके लिए ओल्ड राजेंद्र नगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अभ्यर्थियों के विचारों को संकलित कर व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।
धरना स्थल पर देश के विभिन्न राज्यों से छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों का पहुंचना लगातार जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं की समस्याओं और अपेक्षाओं को आवाज देने का प्रयास है। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा। आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ भी संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
दिल्ली सरकार ने समाप्त की सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था

-  ईंधन संकट में सुधार के बाद आदेश वापस, अब सभी कर्मचारी नियमित समय पर कार्यालय आएंगे

दिल्ली ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए सप्ताह में दो दिन लागू की गई वर्क फ्रॉम होम (WFH) व्यवस्था समाप्त कर दी है। ईंधन आपूर्ति की स्थिति सामान्य होने के बाद सरकार ने यह विशेष व्यवस्था वापस लेते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को पहले की तरह नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
नए आदेश के अनुसार अब सभी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक कार्यालयों और सचिवालय में नियमित रूप से कार्य करेंगे।
गौरतलब है कि मई में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण संभावित वैश्विक ईंधन संकट की आशंका के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ऊर्जा और ईंधन की बचत के उद्देश्य से सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू किया था। इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों के कार्य समय में भी बदलाव किया गया था।
सरकार ने उस दौरान सरकारी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए अधिकारियों के पेट्रोल भत्ते में 20 प्रतिशत तक कटौती की थी। 200 लीटर की मासिक सीमा को घटाकर 160 लीटर तथा 250 लीटर की सीमा को 200 लीटर कर दिया गया था। साथ ही प्रत्येक सोमवार को 'मेट्रो मंडे' के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया था, जिसके तहत मंत्रियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
इसके अलावा, 17 मई को दिल्ली सरकार ने निजी कंपनियों और संस्थानों से भी सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने, कार्यालयों के समय में बदलाव करने तथा कर्मचारियों को कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की सलाह दी थी, ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके।
अब ईंधन संकट में सुधार और आपूर्ति सामान्य होने के बाद सरकार ने यह अस्थायी व्यवस्था समाप्त कर दी है। इसके साथ ही सभी सरकारी कार्यालयों में पूर्ववत नियमित कार्य व्यवस्था बहाल कर दी गई है।
दिल्ली विश्वविद्यालय: ईसीए कोटा के शारीरिक परीक्षण 15 जुलाई से संभावित, मूल प्रमाणपत्र और CUET स्कोरकार्ड लाना होगा अनिवार्य

-  परीक्षण केंद्र और समय जल्द होंगे घोषित, नियमों के उल्लंघन पर रद्द होगी उम्मीदवारी


नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सह-पाठ्यक्रम गतिविधि (ECA) कोटे के तहत प्रवेश प्रक्रिया के लिए शारीरिक परीक्षण संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार, शारीरिक परीक्षण 15 जुलाई 2026 से शुरू होने की संभावना है। परीक्षण की अंतिम तिथि, समय और केंद्र की जानकारी जल्द ही विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि सभी अभ्यर्थियों को परीक्षण के दौरान पंजीकरण के समय अपलोड किए गए ईसीए प्रमाणपत्रों की मूल प्रतियां तथा CUET (UG) स्कोरकार्ड साथ लाना अनिवार्य होगा। आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षण में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
निर्देशों के अनुसार, अभ्यर्थियों को अपनी प्रस्तुति के लिए आवश्यक सभी सामग्री स्वयं लानी होगी। इसमें संगीत वाद्ययंत्र, नृत्य की पोशाक, प्रस्तुति सामग्री, लेखन सामग्री, योगा मैट तथा अन्य आवश्यक उपकरण शामिल हैं। किसी भी अभ्यर्थी को दूसरे प्रतिभागी से सामान साझा करने या उधार लेने की अनुमति नहीं होगी।
नृत्य और संगीत श्रेणी के अभ्यर्थियों को तीन से पांच मिनट की प्रस्तुति देनी होगी, जबकि रंगमंच श्रेणी के अभ्यर्थियों को लगभग चार मिनट का एकल अभिनय प्रस्तुत करना होगा। रचनात्मक लेखन, वाद-विवाद और ललित कला के अभ्यर्थियों को विषय मौके पर दिया जाएगा। योग श्रेणी के प्रतिभागियों को चार मिनट के भीतर कम से कम चार योगासन प्रदर्शित करने होंगे।
विश्वविद्यालय ने शारीरिक परीक्षण के दौरान फोटोग्राफी, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा किसी भी अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित साधनों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित अभ्यर्थी की उम्मीदवारी तत्काल रद्द की जा सकती है।
बाहर से आने वाले अभ्यर्थियों को यात्रा भत्ता नहीं दिया जाएगा। उन्हें आवास, भोजन और अन्य व्यवस्थाएं स्वयं करनी होंगी। विश्वविद्यालय ने अभ्यर्थियों को पानी, आवश्यक दवाइयां और अन्य जरूरी सामान साथ रखने की सलाह भी दी है।
विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन समिति का निर्णय अंतिम होगा। बीमारी, चोट या अन्य व्यक्तिगत कारणों के आधार पर दोबारा शारीरिक परीक्षण का अवसर नहीं दिया जाएगा। यदि किसी अभ्यर्थी के दो परीक्षण एक ही समय पर निर्धारित होते हैं, तो वह विश्वविद्यालय के प्रवेश प्रकोष्ठ से आधिकारिक ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकता है।
विश्वविद्यालय ने सभी अभ्यर्थियों से निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने, सभी आवश्यक दस्तावेज साथ रखने तथा प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित नवीनतम जानकारी के लिए नियमित रूप से विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखने की अपील की है।
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज गोपनीय रहेंगे

-  केंद्रीय सूचना आयोग ने गृह मंत्रालय के फैसले को सही ठहराया

-  आयोग बोला- दस्तावेज सार्वजनिक करने से सुरक्षा पर पड़ सकता है असर; ट्रस्ट RTI के दायरे में नहीं

नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक न करने के केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्णय को सही ठहराया है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि इन दस्तावेजों का खुलासा संबंधित व्यक्तियों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इन्हें गोपनीय श्रेणी में रखना उचित है।
यह मामला नीरज शर्मा द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत दायर आवेदन से जुड़ा है। आवेदन में उन्होंने 5 फरवरी 2020 को केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की योजना तथा उससे संबंधित सरकारी आदेशों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। गृह मंत्रालय से संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय ने आयोग को बताया कि ट्रस्ट के गठन से संबंधित सभी दस्तावेज उनकी संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए गोपनीय श्रेणी में रखे गए हैं। मंत्रालय ने तर्क दिया कि इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से संबंधित व्यक्तियों के जीवन और सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसी आधार पर RTI अधिनियम की धारा 8(1)(g) के तहत सूचना देने से इनकार किया गया।
तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल सामरिया ने गृह मंत्रालय की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि लोक सूचना अधिकारी द्वारा दिया गया उत्तर विधिसम्मत है और इस मामले में आयोग के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही अपील का निस्तारण कर दिया गया।

-  ट्रस्ट RTI के दायरे में नहीं
एक अन्य आदेश में केंद्रीय सूचना आयोग ने स्पष्ट किया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत 'सार्वजनिक प्राधिकरण' नहीं है। गृह मंत्रालय ने आयोग को बताया कि ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है, जिस पर न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार का स्वामित्व, नियंत्रण अथवा वित्तीय सहायता है। सरकार की भूमिका केवल उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ट्रस्ट के गठन तक सीमित रही।
ट्रस्ट की ओर से भी आयोग को बताया गया कि उसका गठन किसी सरकारी अधिसूचना के माध्यम से नहीं हुआ है और उसे सरकार से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं होती। इसलिए वह सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण की श्रेणी में नहीं आता।
आयोग ने अपने अंतिम निर्णय में कहा कि ट्रस्ट का गठन उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में ट्रस्ट विलेख के माध्यम से किया गया था। उपलब्ध तथ्यों से यह सिद्ध नहीं होता कि ट्रस्ट सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में है या उसे सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त होती है। इसी आधार पर आयोग ने माना कि ट्रस्ट को सार्वजनिक प्राधिकरण का दर्जा नहीं दिया जा सकता और वह सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे में नहीं आता।
केंद्र सरकार ने 23 पाकिस्तानी आतंकियों को घोषित किया आतंकवादी,
-   गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून की सूची में किए शामिल

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए 23 पाकिस्तान आधारित आतंकियों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत आतंकवादी घोषित किया है। गृह मंत्रालय ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर इन सभी के नाम कानून की चौथी अनुसूची में शामिल किए।
गृह मंत्रालय के अनुसार सूची में शामिल सभी आतंकी पाकिस्तान या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सक्रिय हैं और उनका संबंध जैश-ए-मोहम्मद तथा लश्कर-ए-तैयबा जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से है। इन पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमलों और अन्य आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।

सरकार के इस फैसले के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी को इन आतंकियों की वित्तीय गतिविधियों पर रोक लगाने, उनकी संपत्तियां जब्त करने और हथियारों की आपूर्ति तथा अन्य सहयोगी नेटवर्क पर कार्रवाई करने का अधिकार मिलेगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून में संशोधन के बाद केंद्र सरकार को किसी व्यक्ति को भी सीधे आतंकवादी घोषित करने का अधिकार मिला था। इससे पहले केवल संगठनों को ही आतंकवादी संगठन घोषित किया जा सकता था।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी नई सूची के साथ अब इस कानून के तहत घोषित आतंकवादियों की कुल संख्या 80 हो गई है।
नई सूची में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई प्रमुख आतंकियों के नाम शामिल हैं। इनमें कुछ ऐसे आतंकी भी हैं जिनके संबंध अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों से भी बताए गए हैं। सरकार का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।
भारत ने पाकिस्तान में छिपे 23 दुश्मनों को घोषित किया आतंकी, सूची में शामिल हैं ये प्रमुख नाम

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आतंकवाद के खिलाफ भारत सरकार ने एक बड़ा एक्शन लिया है। गृह मंत्रालय ने पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 23 दहशतगर्तों को आतंकवादी घोषित किया है। गृह मंत्रालय ने एक गजट नोटिफिकेशन के जरिए इन 23 नामों की लिस्ट जारी की है।

जैश और लश्कर के 23 दहशतगर्द आतंकवादी घोषित

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने एक गजट अधिसूचना जारी करते हुए पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े 23 दहशतगर्तों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित किया है। इन सभी 23 नामों को UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किया गया है और वर्तमान में ये सभी पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में रह रहे हैं।

सूची में शामिल हैं ये प्रमुख आतंकी

सूची में मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान और हाफिज अब्दुल शकूर जैसे नाम शामिल हैं, जो 2016 और 2022 में सुरक्षा बलों पर हुए हमले से जुड़े बताए हैं। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अब्दुल रऊफ और हाफिज खालिद वलीद को हाफिज सईद के करीबी सहयोगी के रूप में बताया गया है। चौंकाने वाला नाम मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ जाकिर का है। उसका स्थायी पता बेंगलुरु का है, जबकि वह रावलपिंडी में रह रहा है।

भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप

गृह मंत्रालय के अनुसार सूची में शामिल सभी 23 लोग जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा, द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF), अल-कायदा और ISIS से जुड़े नेटवर्क के जरिए भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। इन पर आतंकियों को ट्रेनिंग देने, लॉन्चिंग पैड चलाने, फंडिंग जुटाने, हथियार उपलब्ध कराने, ड्रोन के जरिए हथियार भेजने और जम्मू-कश्मीर सहित भारत के विभिन्न हिस्सों में आतंकी साजिशों को अंजाम देने का आरोप है। सरकार का कहना है कि इन गतिविधियों के पर्याप्त इनपुट और जांच के आधार पर इन्हें UAPA के तहत व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किया गया है।

ई-रिक्शा बैटरी को हैक करने वाले एप पर एक्शन, 'बीएटी बीएमएस' को गूगल प्ले और एप्पल एप से हटाया

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केंद्र सरकार ने ई-रिक्शा चालकों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने ई-रिक्शा की बैटरी को दूर से कंट्रोल करने वाले एप को प्लेस्टोर से हटा दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (आईटी मंत्रालय) ने मोबाइल एप के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। इनका कथित तौर पर दुरुपयोग कर चलते हुए ई-रिक्शा की बैटरी बंद करने में किया जा रहा था।

इन एप्स को हटाया गया

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने ई-रिक्शा और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी को गलत तरीके से बंद करने में इस्तेमाल हो रहे एप्स को हटाने के लिए गूगल एंड्रॉयड और एप्पल आईओएस को नोटिस जारी किया है। इनमें BAT-BMS, SMART BMS और LOSSIGY जैसे एप शामिल हैं।

सरकार ने क्यों लिया एप्स को हटाने का फैसला?

सरकार के अनुसार, ये एप मूल रूप से बैटरी की जांच और सर्विसिंग के लिए बनाए गए थे, लेकिन कुछ लोग इनका दुरुपयोग कर रहे थे। ऐसे मामलों में ई-रिक्शा की बैटरी से बिना अनुमति कनेक्ट होकर वाहन की पावर सप्लाई बंद की जा सकती थी। इसी को देखते हुए केंद्र ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित एप्स को हटाने का फैसला लिया है।

कैसे करता है काम?

ई-रिक्शा में लगी लिथियम-आयन बैटरी की निगरानी और सुरक्षा के लिए बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) लगाया जाता है। यह सिस्टम ब्लूटूथ के माध्यम से मोबाइल फोन से जुड़ जाता है, जिससे चालक बैटरी का चार्ज स्तर, वोल्टेज, तापमान, करंट और अन्य तकनीकी जानकारी देख सकते हैं। हालांकि, कम कीमत वाले अधिकांश ई-रिक्शा में इस्तेमाल होने वाले चीनी बीएमएस में ब्लूटूथ कनेक्शन के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर कुछ लोग अपने मोबाइल में 'बीएटी बीएमएस' ऐप डाउनलोड कर लेते हैं।

इतनी दूरी से भी ई-रिक्शा हो सकता है कंट्रोल

ऐप डाउनलोड करने वाला व्यक्ति किसी ई-रिक्शा के लगभग 10 से 15 मीटर के दायरे में पहुंचता है, तो यह ऐप बिना चालक की अनुमति के बीएमएस से कनेक्ट हो सकता है। इसके बाद ऐप के जरिए बैटरी के डिस्चार्ज स्विच को बंद कर दिया जाता है, जिससे मोटर तक बिजली की आपूर्ति रुक जाती है और ई-रिक्शा चलना बंद हो जाता है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था वीडियो

बता दें कि इन चाइनीज एप के जरिए सड़क पर चलते ई-रिक्शा को अचानक रोकने का मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स पर वायरल वीडियो में देखा गया था कि लोग ब्लूटूथ के जरिए कम्पैटिबल ई-रिक्शा बैटरियों से जुड़कर उन्हें दूर से बंद कर रहे हैं। इन वीडियो के बाद चालकों, डीलरों और ईवी उपयोगकर्ताओं के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। जिसके बाद सरकार ने ये फैसला लिया है।