संभव 6.0 लांच, पाँच विभाग मिलकर करेंगे काम

- महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने किया शुभारंभ

- इस बार जीवन के पहले 1,000 दिनों पर रहेगा विशेष फोकस

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने बच्चों और महिलाओं में कुपोषण के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए गुरुवार को ‘संभव अभियान 6.0’ की शुरुआत की। महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने स्थानीय होटल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में इस अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति व अंतरविभागीय समन्वय के कारण ही प्रदेश ने बीते आठ साल में तकरीबन 15 प्रतिशत कुपोषित बच्चों का उपचार कर उनको सेहतमंद बना दिया है। इस अवसर पर बीते साल ‘संभव अभियान 5.0’ सबसे अच्छा काम करने वाले पांच जिलों कानपुर नगर, फर्रुखाबाद, श्रावस्ती, चंदौली व वाराणसी के जिला कार्यक्रम अधिकारी और मुख्य चिकत्साधिकारी के साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले एक सीडीपीओ, एक आंगनवाड़ी कार्यकत्री और एक सहायिका को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। 

इस अवसर पर मंत्री ने सम्भव पैकेज और सोशल मीडिया पैकेज का विमोचन किया, जिसमें सम्भव अभियान के जिला-स्तरीय क्रियान्वयन से संबंधित योजना उपकरण तथा नवजात शिशुओं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण से संबंधित तकनीकी हैंडआउट/सोशल मीडिया सामग्री शामिल हैं। मंत्री ने गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, शिशुओं और बच्चों को नए टेक होम राशन (ज्भ्त्) पैकेट भी वितरित किए तथा इस अवसर पर नवीन पोषाहार से बनाये गए विभिन्न रेसिपी के स्टाल का अवलोकन भी किया गया। उन्होंने रणवीर ब्रार जैसे प्रसिद्ध शेफ को प्रदर्शित करने वाली वीडियो श्रृंखला का भी विमोचन किया।

आईसीडीएस निदेशक सुश्री हर्षिता माथुर ने “प्रयास से प्रभाव तक” विषय पर एक सत्र प्रस्तुत किया, जिसमें वर्ष 2021 से 2025 तक संभव अभियान की यात्रा तथा संभव 6.0 के प्रमुख स्तंभों पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में संभव अभियान के अंतर्गत प्रतिमाह औसतन 1.7 करोड़ बच्चों की स्क्रीनिंग की गई, 14 लाख से अधिक बच्चों का उपचार किया गया तथा गंभीर तीव्र कुपोषण से ग्रस्त 81 प्रतिशत बच्चे स्वस्थ होने में सफल रहे। इस वर्ष यह अभियान जुलाई से सितंबर तक प्रदेश के सभी 75 जिलों में संचालित किया जाएगा। 

कैबिनेट मंत्री श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने आईसीडीएस और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इन प्रयासों से गर्भवती महिलाओं, शिशुओं और छोटे बच्चों में कुपोषण की रोकथाम की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। संभव अभियान अब अपने छठे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस वर्ष की थीम “गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक पोषण सुरक्षा” रखी गई है, जो जीवन के पहले 1,000 दिनों-गर्भावस्था के 270 दिन और जन्म के बाद 730 दिन पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है। यही वह महत्वपूर्ण अवधि है, जिसमें बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 80 प्रतिशत विकास होता है और इस समय कुपोषण से होने वाला नुकसान आगे चलकर पूरी तरह सुधारा नहीं जा सकता।

यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी 75 जिलों से जिला कार्यक्रम अधिकारी, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और पोषण क्षेत्र में कार्यरत विकास साझेदारों ने भाग लिया। अपर मुख्य सचिव (महिला एवं बाल विकास) लीना जौहरी ने कहा कि अब चुनौती केवल सेवाओं की उपलब्धता नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और लोगों की पोषण संबंधी आदतों में सुधार की है। बड़ी संख्या में महिलाएं गर्भावस्था के समय कुपोषित या कम वजन की होती हैं, जिसके कारण बच्चों का जन्म कम वजन के साथ होता है और उनमें कुपोषण का खतरा बढ़ जाता है। संभव 6.0 इसी अंतर को दूर करने का अहम प्रयास है।

उन्होंने कहा कि सम्भव 6.0 के अंतर्गत इस वर्ष गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण देखभाल, कम वजन के नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल, ‘छह माह, सात बार’ रणनीति के तहत शिशुओं के लिए नियमित गृह भ्रमण, तथा गंभीर कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान और उपचार पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही, समुदाय आधारित प्रबंधन प्रणाली को और सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि कुपोषित बच्चों को समय रहते उपचार और उचित देखभाल उपलब्ध हो सके।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ पिंकी जोवेल ने एनएफएचएस के ताजा आंकड़ों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि मातृ मत्यु दर बढ़ना इस ओर इंगित करता है कि इसको कम करने के लिए आईसीडीएस व स्वास्थ्य विभाग का समन्वय जरूरी है। दोनों विभाग बेहतर समन्वय स्थापित करेंगे तो तीन साल बाद अगले एनएफएचएस सर्वे में मातृ मृत्यु दर के आंकड़े भी कम दिखेंगे।

आईसीडीएस की निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि इस वर्ष अभियान में पंचायती राज, योजना विभाग और सूचना विभाग को भी औपचारिक रूप से जोड़ा गया है, जिससे समन्वित प्रयासों को और गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि जहाँ पंचायती राज विभाग गांव स्तर पर जनभागीदारी को मजबूत करेगा, वहीं योजना विभाग कार्यक्रम की समीक्षा और आंकड़ों के सत्यापन की जिम्मेदारी निभाएगा और सूचना विभाग व्यापक जनजागरूकता तथा व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देगा।

पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित सिंह ने अपनी प्रस्तुतिकरण में पंचायत सखी को संभव अभियान से जोड़ कर इस कार्यक्रम को सफल बनाने पर ज़ोर दिया। कार्यक्रम में महिला व बाल विकास विभाग की सचिव मनीषा त्रिघाटिया, महानिदेशक परिवार कल्याण डॉ एचडी अग्रवाल, एचएचएम के महाप्रबंधक डॉ मिलिंद वर्धन ने भी अपने प्रजेंटेशन दिए।  

यूनिसेफ की ओर से पोषण विशेषज्ञ रबी नारायण ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पोषण केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अवसर, समानता, मानव संसाधन के विकास और बच्चों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को स्वस्थ और पोषित जीवन प्रदान करना उत्तर प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त निदेशक (आईसीडीएस) श्रीमती अनुपमा शांडिल्य द्वारा किया गया तथा संभव अभियान की सहायक नोडल अधिकारी श्रीमती पारुल शुक्ला, संयुक्त परियोजना समन्वयक, पोषण अभियान द्वारा कार्यक्रम के संचालन में सहयोग किया गया। संभव अभियान के राज्य नोडल अधिकारी आईसीडीएस विभाग के उप निदेशक सेराज अहमद द्वारा कार्यक्रम के समापन पर सभी विशिष्ट अतिथियों, गणमान्य व्यक्तियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।

विभूतियों के सम्मान संग बिखरे संस्कृतियों के रंग
-  भगवान गौतम बुद्ध पर नृत्य नाटिका ने मोहा मन

-  दास्तानगोई संग कान्हा से द्वारिकाधीश नाटक का मंचन

लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, (संस्कृति विभाग), बदलाव: एक कदम शिक्षा की ओर और कला कारवां के संयुक्त तत्वावधान में नारी शक्ति वंदन अभियान के तहत गुरुवार को वीरांगना सम्मेलन एवं लक्ष्मणपुरी फेस्टिवल-2026 का आयोजन किया गया। गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के प्रेक्षागृह में रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर आयोजित इस सांस्कृतिक महोत्सव में लखनऊ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला, साहित्य, लोक परंपराओं और सामाजिक सरोकारों की छाप दिखी।
कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी और अभिनेता डा. अनिल रस्तोगी, वरिष्ठ पत्रकार श्याम कुमार, उद्यमी यावर अली शाह और रोटरी क्लब के असिस्टेंट गवर्नर प्रवीण कुमार मित्तल को लक्ष्मणपुरी गौरव सम्मान दिया गया। पद्मश्री विद्या विंदु सिंह, शिक्षाविद रोमा बच्चानी, शिक्षिका डॉ. अनीता मिश्रा और अभिनेत्री मनीषा मेहरा को रानी लक्ष्मीबाई प्रेरणा सम्मान प्रदान किया गया। इन सभी को अतिथि भारतेंदु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रति शंकर त्रिपाठी, राज्य ललित कला अकादमी के डा. सुनील कुमार विश्वकर्मा, उप्र संगीत नाटक अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह, ललित कला अकादमी के सचिव देवेन्द्र त्रिपाठी, भंते शील रतन, संस्थान के सदस्य तरुणेश मिश्र व निदेशक डा. राकेश सिंह, ललित कला अकादमी के निदेशक अमित अग्निहोत्री ने सम्मान चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंट किए।
इसके बाद ’’बुद्धम शरणम् गच्छामि’’ नृत्य नाटिका मंचित की गई। इसमें गौतम बुद्ध के जीवन और उनके ज्ञान की यात्रा को भावपूर्ण नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कहानी की शुरुआत कपिलवस्तु के राजकुमार सिद्धार्थ के वैभवपूर्ण जीवन से हुई। फिर जीवन के दुखदृदर्द, रोग, वृद्धावस्था और मृत्यु को देखकर उनके मन में उत्पन्न हुए वैराग्य से सत्य की खोज और बोधगया में गहन ध्यान के बाद उन्हें ज्ञान की प्राप्ति से बुद्ध बनने तक की यात्रा को दिखाया गया। इस नृत्य नाटिका के माध्यम से मानवता को मध्यम मार्ग, अहिंसा और करुणा का संदेश दिया गया। प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना और कथक गुरु डा. उपासना दीक्षित के निर्देशन में नृत्य नाटिका को प्रस्तुत किया गया। संगीत संयोजन एवं गायन पंडित आनंद दीक्षित व कृष्ण कुमार मौर्या का रहा। संवाद स्वर पंडित आनन्द दीक्षित, अखंड प्रताप, मानसी गिरी व आकांक्षा श्रीवास्तव का रहा। मंच पर चारू पाण्डेय, आकांक्षा श्रीवास्तव, मानसी गिरी, अनन्या तिवारी, आरोही पाठक, अनन्या अग्रवाल, नेहा श्रीवास्तव, सोनल मिश्रा, अनन्या वर्मा व शिक्षा अग्रवाल ने नृत्य किया।
धनुष-सा तना, वचन-सा अटल, लक्ष्मण का हर एक संकल्प रू लक्ष्मण जी... यानी वह नाम जो साहस, जागरुकता और अटूट समर्पण की मिसाल है। रामायण के इस अद्वितीय पात्र ने अपने जीवन को केवल एक उद्देश्य में ढाल दिया- श्रीराम की सेवा और धर्म की रक्षा। चौदह वर्षों का वनवास, बिना विश्राम के पहरा और हर संकट में अडिग खड़े रहना। उनका जीवन एक मौन तपस्या था। उनका क्रोध भी धर्म के लिए था और उनका प्रेम भी त्याग से भरा। इस भाव को दास्तानगो अरशाना अजमत और प्रतीक भारद्वाज ने लक्ष्मणजी पर केंद्रित दास्तानगोई लक्ष्मणगाथा में प्रस्तुत किया। अरशाना ने उर्मिला की मौन शक्ति और उनके त्याग को संजीदगी से इन भावों में प्रस्तुत किया-
" धनुष-सा तना, वचन-सा अटल, लक्ष्मण का हर एक संकल्प,
छाया बन संग रहे सदा, त्याग बना उनका विकल्प।
उर्मिला की नीरव तपस्या, हर पीड़ा में दीप जली,
दोनों के इस प्रेम-व्रत में, मर्यादा की राह चली।"
अब बारी थी कान्हा से द्वारिकाधीश नाट्य प्रस्तुति की। करीब 50 कलाकारों की इस शानदार प्रस्तुति ने हर दर्शक के मन पर छाप छोड़ी। अमित दीक्षित राम जी के निर्देशन में मंचित यह नाटक भगवान श्रीकृष्ण की उस अद्भुत जीवन-यात्रा को स्वर देती है, जहाँ बाल-लीला से राजधर्म तक का विस्तार होता है। गोकुल की गलियों में नटखट कान्हा, माखन-चोरी और यशोदा के वात्सल्य से मन मोह लेते हैं। उनकी बांसुरी में बसता प्रेम, पूरे वृंदावन को एक सूत्र में बांध देता है। कालिया नाग मर्दन और गोवर्धन धारण से उनका दैवी, रक्षक रूप प्रकट होता है। रास-लीला में राधा-कृष्ण का प्रेम आत्मा के शाश्वत मिलन का प्रतीक बनता है। परंतु इस वैभव के बीच राधा का विरह प्रेम की अमरता का संदेश देता है। किंतु इसी मधुरता के बीच कर्तव्य की पुकार उन्हें विरह के मार्ग पर अग्रसर करती है। मथुरा गमन के साथ ही जीवन का नया अध्याय प्रारंभ होता है। कंस वध के माध्यम से अधर्म पर धर्म की विजय का उद्घोष होता है।  कृष्ण अब केवल कान्हा नहीं, युगधर्म के वाहक बनकर उभरते हैं। समय के साथ वह एक कुशल कूटनीतिज्ञ और दूरदर्शी शासक बनते हैं। द्वारका की स्थापना उनके नेतृत्व और नीति का प्रतीक बनती है। “द्वारकाधीश” के रूप में वे कर्तव्य, धर्म और शासन का आदर्श प्रस्तुत करते हैं।
डिजिटल संचार के क्षेत्र में सूचना विभाग की प्रभावी पहल
* विभाग के आधिकारिक यूट्यूब चैनल ’’सूचना प्रवाह’’ का हुआ शुभारंभ

*  सरकार की योजनाओं की जानकारी सहजता पहुंचेगी आमजन तक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा डिजिटल संचार को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए विभाग के आधिकारिक यूट्यूब चौनल “सूचना प्रवाह” का शुभारंभ आज लोक भवन, लखनऊ में किया गया।
चैनल का शुभारंभ सूचना निदेशक विशाल सिंह एवं अपर सूचना निदेशक अरविंद कुमार मिश्र द्वारा किया गया। इस अवसर पर निर्माता फिल्म अभय कुमार श्रीवास्तव, फिल्म निर्माण प्रबंधक संदीप पांडेय सहित सूचना विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
’सूचना प्रवाह’ उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का आधिकारिक डिजिटल मंच है, जिसके माध्यम से प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास परियोजनाओं, महत्वपूर्ण निर्णयों, उपलब्धियों, जनहितकारी कार्यक्रमों तथा शासन की विभिन्न पहलों से संबंधित प्रमाणिक, तथ्यपरक एवं त्वरित जानकारी आमजन तक पहुँचाई जाएगी। इसके साथ ही विभाग द्वारा निर्मित वृत्तचित्र, विशेष रिपोर्ट, प्रेरणादायी वीडियो, सरकारी अभियानों तथा महत्वपूर्ण आयोजनों का भी नियमित प्रसारण इस मंच पर किया जाएगा।
इस अवसर पर सूचना निदेशक विशाल सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल मीडिया जनसंचार का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। ऐसे में “सूचना प्रवाह” यूट्यूब चैनल सरकार और जनता के बीच संवाद का एक सशक्त सेतु सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि इस मंच के माध्यम से नागरिकों को सरकार की योजनाओं, नीतियों एवं विकास कार्यों की विश्वसनीय और प्रमाणिक जानकारी सरल, सहज एवं आकर्षक स्वरूप में उपलब्ध कराई जाएगी।
अपर निदेशक अरविंद कुमार मिश्र ने कहा कि विभाग समय के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए जनसंचार के नए आयाम स्थापित कर रहा है। “सूचना प्रवाह” के माध्यम से प्रदेश की विकास यात्रा, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों तथा शासन की उपलब्धियों को अधिक व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँचाया जाएगा, जिससे नागरिकों को सरकारी योजनाओं की सही एवं समयबद्ध जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
यह यूट्यूब चैनल प्रदेश सरकार की उपलब्धियों और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों के प्रसार का एक प्रभावी मंच बनेगा तथा आमजन और शासन के बीच संवाद को और अधिक मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
“12 साल विश्वास के, विकास के, जन-कल्याण के” अभियान के तहत लखनऊ में बाल श्रम उन्मूलन कार्यशाला आयोजित
लखनऊ। केन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे “12 साल विश्वास के, विकास के, जन-कल्याण के” अभियान के अन्तर्गत 05 जून से 21 जून 2026 तक प्रदेश में समेकित जन-कल्याण एवं जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में आज बाल मजदूरी को समाप्त करने के उद्देश्य से समुदाय व हितधारकों की सहभागिता हेतु लखनऊ में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
होटल बेबीयन इन, इन्दिरा नगर, लखनऊ में आयोजित कार्यशाला में स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों तथा बाल श्रमिकों के अभिभावकों को बाल श्रम के दुष्प्रभावों एवं बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य व सुरक्षा के अधिकारों के बारे में जागरूक किया गया। वक्ताओं ने बाल मजदूरी की रोकथाम के लिए समुदाय की सक्रिय भूमिका पर बल दिया।
अभियान के तहत जनपद में हरदोईया गोसाईगंज, लखनऊ में श्रम प्रवर्तन अधिकारी श्रीमती शक्ति राय द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिवारजनों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण कैम्प का आयोजन किया गया। शिविर में रक्तचाप, शुगर, एनीमिया आदि की जांच कर परामर्श दिया गया।
चारबाग क्षेत्र के निर्माण स्थल पर श्रम प्रवर्तन अधिकारी राम कुमार एवं इम्तेयाज अहमद अंसारी द्वारा उ०प्र० भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया गया। पात्र श्रमिकों को बोर्ड की योजनाओं–चिकित्सा सहायता, शिक्षा सहायता, विवाह सहायता आदि के लाभों से अवगत कराते हुए अधिकाधिक पंजीकरण कराए जाने हेतु कैम्प लगाया गया।
बिलिंकिट स्टोर, आलमबाग में श्रम प्रवर्तन अधिकारी सन्तोष कुमार एवं श्रीमती पल्लवी सिंह द्वारा असंगठित क्षेत्र एवं गिग/प्लेटफार्म वर्कर्स के पंजीकरण हेतु विशेष शिविर लगाया गया। शिविर में ई-श्रम पोर्टल, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYM) तथा लघु व्यापारी मानधन योजना (NPS-Trader) के अन्तर्गत पंजीकरण कराते हुए श्रमिकों को वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभ समझाए गए।
अपर श्रमायुक्त, लखनऊ क्षेत्र, श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव ने बताया कि “12 साल विश्वास के, विकास के, जन-कल्याण के” अभियान का मुख्य उद्देश्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम पंक्ति तक पहुंचाना है। बाल श्रम मुक्त समाज व असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना हमारी प्राथमिकता है।
अब हर वीकेंड आसान होगी धार्मिक यात्रा, योगी सरकार का श्रद्धालुओं को बड़ा तोहफा

-  यूपीएसटीडीसी ने पांच धार्मिक टूर पैकेज किए नियमित, मात्र 1000 रुपये में अयोध्या, नैमिषारण्य, चित्रकूट और विंध्याचल धाम के दर्शन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेशवासियों और श्रद्धालुओं को बड़ा उपहार देते हुए धार्मिक पर्यटन को और अधिक सुलभ बना दिया है। उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के तहत पांच प्रमुख वीकेंड धार्मिक टूर पैकेजों को नियमित रूप से संचालित करने का निर्णय लिया है।
अब श्रद्धालु प्रत्येक शुक्रवार, शनिवार और रविवार को अपनी सुविधा के अनुसार धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकेंगे। ‘सुगम दर्शन’ योजना के अंतर्गत लखनऊ से अयोध्या और नैमिषारण्य, जबकि प्रयागराज से अयोध्या, चित्रकूट तथा विंध्याचल धाम के लिए नियमित टूर सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।
यूपीएसटीडीसी के अनुसार इन सेवाओं का लाभ इसी सप्ताहांत से मिलना शुरू हो जाएगा। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बुकिंग प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। श्रद्धालु ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अपनी सीट आरक्षित करा सकेंगे।
यात्रा के लिए आरामदायक अर्बेनिया ट्रैवलर वाहनों की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक पैकेज का किराया मात्र 1000 रुपये प्रति व्यक्ति निर्धारित किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रियायतें दी जाएंगी, जबकि समूह बुकिंग पर अतिरिक्त छूट का लाभ भी मिलेगा।
यूपीएसटीडीसी का मानना है कि इस पहल से धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी और प्रदेश के प्रमुख आस्था स्थलों तक आम लोगों की पहुंच और आसान होगी। इच्छुक श्रद्धालु यूपीएसटीडीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर बुकिंग करा सकते हैं।
वाराणसी में बनेगा संत रविदास संग्रहालय, केंद्र से 24.63 करोड़ रुपये मंजूर

-  बिरजू महाराज कथक संस्थान लखनऊ के विकास हेतु 40.96 करोड़ की परियोजना को भी मिली स्वीकृति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने वाराणसी में संत रविदास संग्रहालय की स्थापना के लिए 24.63 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है। इसके तहत प्रथम चरण में 5.50 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। परियोजना को फरवरी 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह परियोजना भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की म्यूजियम ग्रांट योजना के अंतर्गत संचालित की जा रही है। संग्रहालय के निर्माण से संत रविदास के जीवन, दर्शन और सामाजिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि राजधानी लखनऊ स्थित बिरजू महाराज कथक संस्थान के आधुनिकीकरण एवं विकास के लिए भी 40.96 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा 8.87 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है।
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए संस्थान के विकास कार्यों हेतु 12 करोड़ रुपये की मांग केंद्र सरकार से की थी। परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से संबंधित सभी सांस्कृतिक परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जा रही है तथा समयबद्ध ढंग से कार्य पूर्ण कराने के लिए आवश्यक वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

-  सांस्कृतिक धरोहरों को मिलेगा नया आयाम
संत रविदास संग्रहालय और बिरजू महाराज कथक संस्थान की विकास परियोजनाएं प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इन परियोजनाओं से पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ कला, संस्कृति और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में भी नए अवसर सृजित होंगे।
योगी आदित्यनाथ से मिले मुकेश कुमार मासूम, मुख्यमंत्री ने किया उनकी पुस्तक की पांडुलिपि का अवलोकन
लखनऊ। लेखक, गीतकार एवं समाजसेवी मुकेश कुमार मासूम ने आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में प्रदेश के लोकप्रिय, दूरदर्शी एवं यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आत्मीय मुलाकात की। इस विशेष अवसर पर उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सम्मानित सदस्य एवं पूर्व मंत्री डॉ. लाल जी निर्मल तथा प्रख्यात समाजसेवी अमरनाथ प्रजापति भी उपस्थित रहे।
इस गरिमामयी भेंट के दौरान लेखक, गीतकार एवं समाजसेवी मुकेश कुमार मासूम ने अपनी लिखित पुस्तक की पांडुलिपि "योगी आदित्यनाथ : राजनीति और अध्यात्म के आकाश पर चमकता सितारा" मुख्यमंत्री को सादर भेंट की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने अत्यंत आत्मीयता एवं स्नेह के साथ पुस्तक की पांडुलिपि का अवलोकन किया तथा प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे शीघ्र प्रकाशित कराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने बहुमूल्य समय में से पर्याप्त समय प्रदान कर न केवल पुस्तक के विषय में चर्चा की, बल्कि कुशल-क्षेम भी जानी। उनका यह स्नेहपूर्ण व्यवहार सदैव स्मरणीय रहेगा। योगी आदित्यनाथ  केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, राष्ट्रसेवा, जनकल्याण और मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण ऐसे नेतृत्वकर्ता हैं, जिन्होंने अपने कर्म, संकल्प और समर्पण से करोड़ों लोगों के हृदय में विशिष्ट स्थान बनाया है। उनकी सरलता, विनम्रता, कार्यकुशलता और जनसामान्य के प्रति आत्मीयता उन्हें एक असाधारण जननेता के रूप में स्थापित करती है।
इस प्रेरणादायी एवं ऐतिहासिक मुलाकात के लिए मैं हृदय की गहराइयों से मुख्यमंत्री  के निजी सचिव पंत साहब का विशेष आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करता हूँ, जिनके सहयोग एवं मार्गदर्शन से यह अवसर संभव हो सका। साथ ही विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व मंत्री आदरणीय डॉ. लाल जी निर्मल जी का भी मैं विशेष रूप से कृतज्ञ हूँ, जिनके स्नेह, सहयोग एवं मार्गदर्शन ने सदैव मेरा उत्साहवर्धन किया है।
मोहर्रम पर सख्त निर्देश: शक्ति प्रदर्शन नहीं, मातम का अवसर; नीट अभ्यर्थियों को बस किराये में 50% छूट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी मोहर्रम को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मोहर्रम मातम और श्रद्धा का पर्व है, शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं। इसलिए जुलूसों में किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन, नई परंपराओं की शुरुआत, उग्र गतिविधियों तथा कानफोड़ू डीजे और ढोल-ताशों के अनियंत्रित उपयोग को किसी भी स्थिति में अनुमति नहीं दी जाएगी।

मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की कानून-व्यवस्था, आगामी त्योहारों, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

शांति समितियों से संवाद बढ़ाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि मोहर्रम के आयोजन से पहले शांति समिति की बैठकें आयोजित की जाएं और धर्मगुरुओं, ताजिया समितियों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लगातार संवाद बनाए रखा जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाह, भड़काऊ गतिविधि या विवाद की आशंका को पहले ही समाप्त करने के लिए प्रशासन सक्रिय भूमिका निभाए।उन्होंने कहा कि सभी जिलों में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए तथा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन और नई परंपरा पर रोक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि मोहर्रम के जुलूसों में किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार सभी धर्मों और समुदायों की आस्था का सम्मान करती है, लेकिन किसी भी जिले में नई परंपरा शुरू करने की अनुमति नहीं होगी। पूर्व से चली आ रही परंपराओं और निर्धारित मार्गों के अनुसार ही आयोजन किए जाएं।

डीजे और ध्वनि प्रदूषण पर रहेगा नियंत्रण

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मोहर्रम के दौरान कानफोड़ू डीजे, अत्यधिक ध्वनि वाले साउंड सिस्टम और ढोल-ताशों के अनियंत्रित उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए। ध्वनि प्रदूषण से संबंधित सभी मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के नाम पर नियमों की अनदेखी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी।

ताजियों की ऊंचाई को लेकर विशेष सतर्कता

मुख्यमंत्री ने सुरक्षा कारणों से ताजियों की ऊंचाई को लेकर भी विशेष निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि ताजियों की ऊंचाई निर्धारित मानकों के अनुरूप रखी जाए तथा 10 से 12 फीट से अधिक ऊंची ताजियों को अनुमति न दी जाए।उन्होंने कहा कि कई बार ऊंची ताजियां विद्युत लाइनों और अन्य अवरोधों के कारण दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। इसलिए संबंधित विभाग पहले से समन्वय स्थापित कर सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें।

शरारती तत्वों और अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर

मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान अफवाह, भ्रामक सूचना या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट प्रसारित करने वालों के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए।उन्होंने कहा कि प्रदेश में शांति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नीट परीक्षा में शामिल होंगे साढ़े तीन लाख से अधिक अभ्यर्थी

बैठक में मुख्यमंत्री ने 21 जून को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारियों की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 59 जनपदों में आयोजित होने वाली इस परीक्षा में लगभग साढ़े तीन लाख अभ्यर्थी शामिल होंगे।उन्होंने कहा कि परीक्षा का निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी जिलों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र सक्रिय रखा जाए।

नीट अभ्यर्थियों को रोडवेज बसों में 50 प्रतिशत किराया छूट

परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि नीट परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) की बसों में प्रवेश पत्र दिखाने पर किराये में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।सरकार के इस फैसले से आर्थिक रूप से कमजोर और दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी।

जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए ठहरने की व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि दूसरे जनपदों में परीक्षा देने पहुंचने वाले ऐसे अभ्यर्थियों की पहचान की जाए जिनके पास ठहरने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे विद्यार्थियों के लिए स्थानीय स्तर पर अस्थायी आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

परीक्षा की शुचिता बनाए रखने पर जोर

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी, प्रवेश व्यवस्था और अन्य सभी प्रबंध पूरी पारदर्शिता के साथ किए जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र, परीक्षा प्रक्रिया या परीक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाए ताकि विद्यार्थियों का विश्वास बना रहे।

कानून-व्यवस्था और परीक्षा दोनों पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य मोहर्रम, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और नीट जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसहयोग, संवेदनशीलता और सतर्कता के साथ कार्य करते हुए प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में नए खुलासों से बढ़ी जांच की रफ्तार

-  कथित सोना बरामदगी, संदिग्ध यात्राएं और करोड़ों की संपत्तियां जांच के घेरे में; एसआईटी ने अयोध्या पहुंचकर शुरू की गहन पड़ताल

अयोध्या। राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कथित महाघोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सोमवार को अयोध्या पहुंचकर जांच का मोर्चा संभाल लिया। एसआईटी ने अपने पहले ही दिन करीब छह घंटे तक मंदिर परिसर और उससे जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर पड़ताल की तथा ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की।
जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक गिरफ्तार किए गए पांच प्रमुख संदिग्धों से लगभग दो करोड़ रुपये नकद, एक लग्जरी वाहन और तीन आईफोन बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी बीच दो नए पहलुओं ने जांच को और अधिक संवेदनशील बना दिया है—पहला कथित "सोना बरामदगी" और दूसरा संदिग्ध यात्रा नेटवर्क।
जांच के केंद्र में आए प्रमुख नामों में ट्रस्ट से जुड़े बताए जा रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार उनके पैतृक आवास पर हाल ही में की गई छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में सोना बरामद किया गया। हालांकि बरामद सोने की मात्रा और मूल्य को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन जांच एजेंसियां इसकी वास्तविक कीमत और स्रोत का पता लगाने में जुटी हैं।
सूत्रों का दावा है कि कभी साधारण जीवन जीने वाले टिन्नू यादव के नाम या उनसे जुड़े लोगों के माध्यम से अयोध्या और लखनऊ समेत विभिन्न स्थानों पर करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्तियों का नेटवर्क खड़ा किया गया। जांच एजेंसियां इन संपत्तियों के दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही हैं।
बताया जा रहा है कि 13 जून को स्वर्गद्वार क्षेत्र स्थित उनके पैतृक घर पर सुरक्षा और जांच से जुड़े अधिकारियों की संयुक्त टीम ने छापा मारा था। इसके अलावा अयोध्या अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट स्थित एक छात्रावास परिसर को भी जांच एजेंसियों ने अपने रडार पर लिया है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में वहां भी विस्तृत फोरेंसिक जांच कराई जा सकती है।
इसी क्रम में सोमेश आनंद नामक व्यक्ति की गतिविधियां भी जांच एजेंसियों के संज्ञान में आई हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में उसने देश के विभिन्न राज्यों, विशेषकर दक्षिण भारत की कई यात्राएं कीं। सुरक्षा एजेंसियां उसके यात्रा रिकॉर्ड, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही हैं।
सूत्रों का दावा है कि सोमेश आनंद अक्सर भारी सामान के साथ ट्रेन से यात्रा करता था और वापसी में हवाई मार्ग का उपयोग करता था। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन उसकी गतिविधियों को संदिग्ध मानते हुए गहन पड़ताल जारी है।
जांच की आंच अब केडी तिवारी तक भी पहुंच गई है, जिनके पास मंदिर में प्राप्त होने वाले आभूषणों की कस्टडी और अभिलेखीकरण से जुड़ी जिम्मेदारियां होने की बात कही जा रही है। उनके आवास पर भी हाल में जांच टीम द्वारा छानबीन की गई। सूत्रों के अनुसार हाल में खरीदी गई लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की एक भूमि भी जांच के दायरे में है।
हालांकि केडी तिवारी ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उनकी जिम्मेदारी केवल आभूषणों को तौलकर रसीद जारी करने और उन्हें आगे संबंधित अधिकारियों को सौंपने तक सीमित थी। उन्होंने कहा कि इसके बाद की प्रक्रिया से उनका कोई संबंध नहीं था।
इस बीच जांच के दौरान मंदिर परिसर से जुड़ा एक पुराना मामला भी फिर चर्चा में आ गया है। सूत्रों के अनुसार लगभग दो वर्ष पूर्व सावन झूला मेले के दौरान उपयोग किए जाने वाले चार स्वर्ण मुकुट कुछ समय के लिए गायब पाए गए थे। बाद में ये मुकुट मंदिर परिसर के भीतर ही बरामद किए गए थे। हालांकि उस समय इस मामले को सार्वजनिक स्तर पर अधिक तूल नहीं दिया गया था, लेकिन वर्तमान जांच में इस प्रकरण से जुड़े दस्तावेज और परिस्थितियां भी खंगाली जा रही हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि दानपात्रों में जमा होने वाले आभूषणों और कीमती धातुओं के अभिलेखीकरण में कोई खामी रही है, तो उसी का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई हो सकती हैं। इसी बिंदु को वर्तमान जांच का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
एसआईटी अब वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल ट्रेल, बैंक खातों, संपत्तियों और कथित संदिग्ध नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। आने वाले दिनों में कई और लोगों से पूछताछ तथा नए खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल पूरे मामले पर प्रदेशभर की निगाहें टिकी हैं और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और दोषियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
उप्र राजकीय निर्माण निगम को आवंटित 08 जनपदों की 33 परियोजनाओं पर निर्माण कार्य प्रारम्भ
-  आस्था के साथ विकास राज्य सरकार की प्राथमिकता : जयवीर सिंह

लखनऊ। पर्यटन विभाग द्वारा 31 मार्च, 2026 तक स्वीकृत परियोजनाओं पर शासनादेश जारी करते हुए अवस्थापना विकास की परियोजनाओं पर कार्रवाई शुरू करा दी गई है। कार्यदायी संस्थाओं को निर्देशित किया गया है कि सभी कार्य निर्धारित तिथि तक गुणवत्ता के साथ पूरा करायें। राज्य सरकार की प्राथमिकता आस्था के साथ विकास और पर्यटन सेक्टर में निवेश आकर्षित कर टेम्पल इकॉनॉमी को विस्तार देना है। इसी दृष्टिकोण से लगभग सभी जनपदों में ऐतिहासिक धार्मिक एवं पुरातात्विक महत्व के आस्था स्थलों को नये सिरे से सौन्दर्यीकरण करा कर श्रद्धालुओं को अवस्थापना सुविधा सुलभ कराने का कार्य किया जा रहा है।
यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2026 तक स्वीकृत परियोजनाओं के लिए आवश्यक धनराशि जारी कर दी गई है। साथ ही कार्यदायी संस्थाआंे द्वारा निर्माण की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को 08 जनपदों की 33 परियोजनाएं जिनकी अनुमानित लागत 7917.93 लाख रुपये आवंटित किया गया है। इन परियोजनाओं में लखनऊ-सीतापुर 01-01, मिर्जापुर 07, भदोही 04, सोनभद्र 02, हमीरपुर 02, महोबा 03 तथा बांदा व चित्रकूट की 06-06 परियोजनाएं शामिल हैं।
जयवीर सिंह ने बताया कि लखनऊ स्थित मोहनलाल गंज में हुलासखेड़ा का पर्यटन विकास के लिए 1199.7 लाख रुपये, सीतापुर के नैमिषारण्य धाम में बेदारण्यम की स्थापना कार्य के लिए 149.35 लाख रुपये, मिर्जापुर की 07 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 104.53 लाख रुपये, 79.64 लाख रुपये, 194.67 लाख रुपये, 197.99 लाख रुपये, 83.69 लाख रुपये, 88.87 लाख रुपये तथा 215.92 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार भदोही जनपद की 04 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 103.57 लाख रुपये, 147.29 लाख रुपये, 145.97 लाख रुपये, 99.97 लाख रुपये, 125.58 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार सोनभद्र जनपद की 02 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 125.59 लाख रुपये तथा 116.24 लाख रुपये की धनराशि अनुमोदित की गई है।
श्री सिंह ने आगे बताया कि महोबा जनपद के विभिन्न मन्दिरों के लिए क्रमशः 108.87 लाख रुपये, 45.58 लाख रुपये तथा 71.77 लाख रुपये तीन परियोजनाओं के लिए स्वीकृत किये गये। इसी प्रकार हमीरपुर की 02 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 70 लाख तथा 69.81 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। जनपद बांदा की 06 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 53.82 लाख, 138.89 लाख एवं 114.27 लाख, 130.2 लाख, 338 लाख तथा 283.57 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई। इसी प्रकार जनपद चित्रकूट की 06 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 181.79 लाख, 229.24 लाख, 525.77 लाख, 171.94 लाख, 166.24 लाख तथा 905.08 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।
उन्होंने बताया कि लगभग सभी परियोजनाओं पर कार्य प्रारम्भ कराने के लिए निविदा की कार्यवाही प्रगति पर है। इसके अलावा कार्य तकनीकी स्वीकृति जारी कराने हेतु विस्तृत आगणन आदि का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पर्यटन सेक्टर की लोकप्रियता एवं निवेश की असीमित संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार आस्था के साथ विकास के अंतर्गत सभी स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं सुलभ करा रही है।