रेडी टू फायर’ मोड में भारत, पहली बार 12 परमाणु हथियार किए तैनात, रिपोर्ट में खुलासा

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दुनिया में हथियारों पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने भारत में परमाणु हथियार को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। SIPRI ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार ऑपरेशनल यानी तैयार स्थिति में तैनात किए हैं।

दशकों से चली आ रही नीति में बड़ा बदलाव

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह पहली बार है कि भारत के इन हथियारों को ऑपरेशनली डिप्लॉयड के तौर पर वर्गीकृत रखा गया है। यह दशकों से चली आ रही उस नीति से एक बड़ा बदलाव है, जिसके तहत परमाणु हथियारों और उन्हें पहुंचाने वाले सिस्टम को अलग-अलग जगहों पर रखा जाता था। भूमिगत मिसाइल भंडारगृहों और नई परमाणु पनडुब्बियों में दागने के लिए तैयार इन परमाणु हथियारों की तैनाती भारत की तैयारी का संकेत देती है।

परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर क्या है भारत की नीति?

भारत की परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल न करने की नीति है। ऐतिहासिक रूप से भारत ने 'डी-मेटेड न्यूक्लियर पॉलिसी' अपनाई थी। इसका मतलब था कि शांति के समय परमाणु हथियारों को मिसाइल या विमान से अलग रखा जाता था और सिर्फ गंभीर संकट के समय ही मिसाइल या विमान में असेंबल किया जाता था। SIPRI की रिपोर्ट भारत की इस नीति में बदलाव की ओर इशारा करती है। इसलिए पहली बार परमाणु हथियारों की तैनाती शायद भारत के परमाणु शक्ति बनने के बाद से सबसे बड़ा बदलाव है।

भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड

SIPRI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले साल भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, साथ ही बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) पर कुछ वॉरहेड तैनात किए गए हैं और डेटरेंस पेट्रोलिंग (रोकथाम के लिए गश्त) की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी 2026 तक भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड हैं। इनमें से 12 परमाणु वॉरहेड मिसाइलों, पनडुब्बियों या लड़ाकू विमानों जैसे डिलीवरी सिस्टम के साथ जोड़े गए हैं या ऑपरेशनल फोर्स वाले ठिकानों पर तैनात किए गए हैं।

2024 से INS अरिघात और अरिदमन ऑपरेशनल

रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2024 से भारत ने परमाणु मिसाइल ले जाने वाली दो पनडुब्बियों INS अरिघात और INS अरिदमन को ऑपरेशनल कर दिया है। दोनों पनडुब्बियां परमाणु मिसाइल ले जाने में सक्षम हैं और उन्हें डेटरेंस पेट्रोल यानी सुरक्षा और जवाबी क्षमता बनाए रखने वाली गश्त के लिए मंजूरी मिल चुकी है। परमाणु मिसाइलों से लैस ऐसी पनडुब्बियों को लंबी दूरी की गश्त पर भेजा जाता है, जो कई महीनों तक समुद्र में रह सकती हैं। इस दौरान वे सैन्य नेतृत्व के साथ समय-समय पर संपर्क बनाए रखती हैं।

मिडिल ईस्ट में फिर बिगड़े हालात, ईरान ने इजराइल पर दागीं मिसाइलें

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पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अप्रैल में लागू हुए युद्धविराम के बाद पहली बार ईरान ने सीधे इजराइल पर मिसाइलों की बौछार कर दी। इजरायल पर देर रात से ईरान और यमन की तरफ से हमले किए गए। यमन के बाद ईरान ने एक बार फिर इजरायल की तरफ बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं। इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने इसकी जानकारी दी है।

यमन की ओर से इस्राइल पर दागी गई मिसाइल

इजराइल की सेना ने दावा किया है कि यमन की दिशा से उसकी सीमा की ओर एक मिसाइल दागी गई है। सेना के अनुसार मिसाइल का पता लगते ही रक्षा प्रणाली को तुरंत सक्रिय कर दिया गया और खतरे को रोकने के लिए इंटरसेप्टर सिस्टम काम में लगाए गए। इजराइली सेना ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। फिलहाल किसी बड़े नुकसान या हताहत की जानकारी सामने नहीं आई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इस हमले ने क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

बेरूत में इजरायली हमले के बाद ईरान का पलटवार

ये ताजा संघर्ष तब शुरू हुआ जब लेबनान की राजधानी बेरूत में इजरायल ने हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए थे और उसके बाद ईरान ने पलटवार करते हुए इजरायल में बैलिस्टिक मिसाइल हमले कर दिए। ईरान के हमले के बाद इजरायल ने भी ईरान में कम से कम तीन जगहों पर हमले किए हैं। अप्रैल में लागू हुए युद्धविराम के बाद पहली बार ईरान ने सीधे इजराइल पर मिसाइलों की बौछार कर दी। इसके बाद इजरायल ने भी जवाबी हमला कर दिया है।

इस्फहान-तेहरान में जोरदार धमाकों की आवाज

जवाबी हमले के बाद इस्फहान, तेहरान में जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी है। इजराइल के मुताबिक ईरान ने सोमवार को उसके कई इलाकों की तरफ मिसाइलें दागीं। हाइफा और नाजरेथ को निशाना बनाए जाने की खबर है। इजराइली सेना ने कहा कि उसके रक्षा तंत्र ने खतरे को रोकने के लिए कार्रवाई की और मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। इजराइली रक्षा बल (IDF) ने बताया कि देश के कई हिस्सों में सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों में जाने के निर्देश दिए गए। शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना नहीं है।

फिर गूंजी सायरनों की आवाज

इजराइल में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मध्य इजराइल के कई इलाकों में सायरन बजाए गए। चैनल 12 की रिपोर्ट में कहा गया कि गुश दान, यरूशलम और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक संभावित हमले के खतरे को देखते हुए इस्राइल ने अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियां और रक्षा प्रणाली पूरी तरह अलर्ट पर हैं। फिलहाल किसी नुकसान या हताहत की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

ट्रंप तनाव रोकने में रहे नाकाम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों पक्षों को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन नाकाम रहे। नेतन्याहू को उन्होंने फोन किया था, लेकिन उनकी बात नहीं मानी। ट्रंप ने एक्सियोस से कहा, ‘मैं अभी बीबी को फोन कर रहा हूं और कह रहा हूं कि जवाबी हमला मत करो। दोनों अपना हमला कर चुके हैं। हमें एक और हमले की जरूरत नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘ईरानी हमलों में किसी को नुकसान नहीं पहुंचा। उम्मीद है कि इजराइल पलटवार नहीं करेगा। अगर बीबी फिर हमला करते हैं तो यह सिलसिला अगले 47 साल या 3000 साल तक चलता रहेगा।’

दिल्ली में विपक्षी दलों का महाजुटान, INDIA गठबंधन की बैठक आज, मीटिंग से पहले CPM ने दिखाए तेवर

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को घेरने के लिए 2 साल बाद विपक्षी दल एक बार फिर साथ आ रहे हैं। I.N.D.I.A ब्लॉक की आज दोपहर 12 बजे दिल्ली में अहम बैठक होने जा रही है। कांग्रेस का दावा है कि इसमें 23 विपक्षी दल शामिल होंगे। हालांकि, बैठक से पहले सीपीआईएम ने कांग्रेस को खूब खरी-खोटी सुनाई है।

भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट विपक्ष

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि 23 दल भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने एक्स पोस्ट में 'इंडिया' को 'इंडिया जनबंधन' लिखा। उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल नहीं होने वाले दल भी मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करते हैं और संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मताधिकार से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष के साथ खड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि I.N.D.I.A. अपनी विविधता के बावजूद एकजुट है।

कौन-कौन से दलों के बैठक में होंगे शामिल

कांग्रेस ने 23 राजनीतिक दलों विपक्षी गठबंधन की बैठक में शामिल होने की पुष्टि कर दी है। इनमें तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), झारखंड मुक्ति मोर्चा, नेशनल कॉन्फ्रेंस, माकपा, पीडीपी, राजद, भाकपा, टीवीके जैसे प्रमुख दल शामिल हैं। इसके अलावा कुछ अन्य छोटे दलों जैसे- भाकपा-माले, आरएसपी, वीसीके, एमडीएमके, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, असम जातीय परिषद समेत कई और दलों ने इस बैठक में शामिल होने के संकेत दिए हैं।

DMK-आप बैठक में नहीं होंगे शामिल

डीएमके ने साफ कर दिया है कि वह इस विशेष बैठक में शामिल नहीं होगी। यह विपक्षी रणनीति के लिए झटका माना जा रहा है। विपक्ष की चिंता का कारण संसद का गणित भी है। इससे पहले परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर लोकसभा में सरकार के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि विपक्ष के 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया था। दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण बीजेपी सरकार यह विधेयक पारित नहीं करा सकी थी। अब यदि सरकार मॉनसून सत्र में फिर से इस मुद्दे को लेकर आती है तो विपक्ष के लिए पिछली बार जैसी एकजुटता बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।

सीपीएम ने कांग्रेस को पुराने आरोपों की याद दिलाई

बैठक से पहले सीपीएम ने कांग्रेस को उसके पुराने आरोपों की याद दिलाई है। सीपीएम महासचिव एमए बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर कहा कि उनकी पार्टी इस बैठक में शामिल होगी और राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास उसका प्रतिनिधित्व करेंगे। हालांकि, उन्होंने केरल चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं द्वारा सीपीएम और बीजेपी के बीच कथित समझौते के आरोपों पर आपत्ति जताई। बेबी ने कहा कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव प्रचार में पिनाराई विजयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच समझौते की बात कही थी।

विपक्षी एकता के लिए बेहद अहम है बैठक

INDIA गठबंधन की सोमवार को नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। लगभग दो वर्षों के बाद हो रही इस बैठक को विपक्षी एकता के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और कई राज्यों में चुनावी झटकों के बाद गठबंधन के सामने अपनी एकजुटता और रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करने की चुनौती है।

बंगाल में होगा महाराष्ट्र जैसा ‘खेला’! उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसा ना हो जाए ममता बनर्जी का हाल

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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार और सत्ता हाथ से जाने के बाद ममता बनर्जी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। पार्टी के अंदर काफी उथल-पुथल मची हुई है। कुछ नेता खुले तौर पर बगावत पर उतर आए हैं। हालात ऐसे बनते नजर आ रहे हैं, जैसे तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट जाएगी।

बागी नेताओं की सीक्रेट मीटिंग

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष, बागी नेताओं की सक्रियता और कुछ विधायकों की सीक्रेट बैठकों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने हाल के दिनों में कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में टीएमसी के भविष्य, संगठनात्मक बदलाव और कथित तौर पर एक नए राजनीतिक विकल्प पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।

50 से ज़्यादा विधायकों की बैठक

टीएमसी 80 विधायकों में से 50 से ज़्यादा विधायकों ने होटल गेटवे में बागी और पार्टी से निकाले गए नेताओं ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मुलाकात की। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों वे विधायक हैं जिन पर ममता बनर्जी ने कार्रवाई की है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है।

टीएमसी की मीटिंग में पहुंचे सिर्फ 20 विधायक

वहीं, दूसरी तरफ रविवार को ममता बनर्जी की ओर से बुलाई गई बैठक में करीब 60 विधायक नदारद रहे। रविवार को, पीशी-भाईपो की बुलाई गई एक बैठक में केवल 20 विधायक ही शामिल हुए। विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। कई नेता BJP के साथ बातचीत कर रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी को लेकर नाराजगी

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद से TMC के अंदर नाराजगी और फूट दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि नेताओं का गुस्सा पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर है। चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठक में कम से कम तीन चुने हुए विधायकों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व का विरोध किया। उन्होंने चुनाव में मिली करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की पसंद को जबरदस्ती थोपे जाने को जिम्मेदार ठहराया।

खुलकर उठे विरोध के स्वर

कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है। सिंडिकेट और 'कट-मनी' (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है। वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है।

ऋतब्रत और संदीपन ने ममता के खिलाफ खोला मोर्चा

दावा किया जा रहा है कि ऋतब्रत और संदीपन के नेतृत्व में एक नई तृणमूल बन सकती है। पार्टी से निकाले जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि वह टीएमसी में कथित भ्रष्टाचार के बारे में सरकार को पत्र लिखेंगे। ऋतब्रत ने कहा कि उनके पास कई ऐसी जानकारियां हैं जिन्हें वह सार्वजनिक कर सकते हैं।

फिर महंगा हुआ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर, 53.50 रूपये तक बढ़े दाम

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एलपीजी सिलेंडर की कीमत में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 53.50 रुपये की बढ़ोतरी की है। बढ़ी हुई कीमतें आज से लागू हो गई हैं।

महानगरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत

दिल्ली में इसकी कीमत अब 42 रुपये बढ़कर 3,113.50 रुपये हो गई है। कोलकाता में यह 53.50 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 3,255.50 रुपये का हो गया है। मुंबई में कमर्शियल सिलेंडर अब 3,024 रुपये से बढ़कीर 3,067.50 रुपये का हो गया है जबकि चेन्नई में इसकी कीमत 3,237 रुपये से बढ़कर 3,283 रुपये हो गई है।

5 किलो वाले छोटू सिलेंडर के रेट भी बढ़े

5 किलो वाले छोटू सिलेंडर की कीमत में भी 11 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इसी कीमत अब दिल्ली में 821.50 रुपये हो गई है। हालांकि घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के एलपीजी सिलेंडर की कीमत में एक बार फिर कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस तरह देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को राहत दी गई है।

महंगा होगा होटल-रेस्तरां में खाना

गैस की बढ़ी हुई लागत लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। व्यावसायिक गैस सिलेंडरों के दाम बढ़ने से सीधे तौर पर होटल, ढाबों, रेस्तरां, शादियों व पार्टियों में कैटरिंग सेवाएं देने वाले ऑपरेटरों और अन्य खाद्य कारोबार से जुड़े उद्यमियों का बजट प्रभावित होगा। बढ़ी हुई लागत को ये आगे ग्राहक पर डाल सकते हैं, जिससे होटल-रेस्‍तरां में भोजन महंगा हो सकता।

अभिषेक के बाद कल्याण बनर्जी पर हमला, पब्लिक ने ‘चोर-चोर’ कहकर पीटा

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तृणमूल कांग्रेस महासचिव और पूर्व सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के बाद पार्टी के एक और नेता पर जोरदार हमला हुआ है। हुगली के चंदीतला पुलिस स्टेशन के पास टीएमसी सांसद कल्यान बनर्जी को पब्लिक ने पीटा है। सांसद कल्याण बनर्जी चंडीतला पुलिस स्टेशन में ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। आरोप है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और कथित तौर पर मारपीट की।

कल्याण बनर्जी के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट

जानकारी के अनुसार टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के साथ मारपीट की घटना उस समय हुई जब वह चंडीतला थाने में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। रास्ते में कुछ प्रदर्शनकारियों ने कल्याण बनर्जी का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काले झंडे दिखाए और उनके खिलाफ नारेबाजी की। आरोप है कि इसी दौरान स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई और सांसद के साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट की गई।

कल्याण बनर्जी ने बीजेपी पर लगाया हमले का आरोप

इस दौरान सुरक्षाबलों को स्थिति को संभालने का प्रयास करते हुए भी देखा गया। वहीं, टीएमसी समर्थकों ने कल्याण बनर्जी को संभाला और उन्हें भीड़ से दूर ले जाने का प्रयास किया। कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं अकेला आ रहा था। मेरे साथ कोई नहीं था। बीजेपी सदस्यों ने गाली-गलौज की और मेरे सिर पर बॉल से मारा। मेरे सिर से खून बह रहा है। उन्होंने कहा कि अब लोग तय करेंगे कि क्या सही है या गलत। सांसदों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

टीएमसी बोली- 24 घंटों में 2 नेताओं पर हमला अराजकता

टीएमसी ने कल्याण बनर्जी की तस्वीर शेयर करते हुए एक्स पर लिखा- लोकतंत्र पर हमला हो रहा है, पूरी तरह से अराजकता है। इन गुंडों को पुलिस स्टेशन के बाहर इकट्ठा होने की इजाजत कैसे दी गई? पुलिस की मौजूदगी में पत्थरबाजी कैसे हो सकती है? चुनाव नतीजे घोषित हुए 26 दिन बीत चुके हैं, फिर भी चुनाव के बाद होने वाली हिंसा लगातार जारी है।

एक दिन पहले अभिषेक बनर्जी पर हुआ था हमला

पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर शनिवार को दक्षिण सोनारपुर में हमला हुआ था, जहां वे चुनाव बाद हिंसा के पीड़ित कार्यकर्ताओं से मिलने गए थे। भीड़ ने अभिषेक पर हमला किया और अंडे भी फेंके। हाथापाई के दौरान अभिषेक की शर्ट भी फाड़ दी। भीड़ के हमले से बचने के लिए अभिषेक बनर्जी हेलमेट पहनकर निकले। इस मामले में अब तक 5 लोगों को अरेस्ट कर लिया गया है।

अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद एक्शन में शुभेन्दु सरकार, 5 आरोपी गिरफ्तार

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तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ कथित दुर्व्यवहार और हमले के मामले में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। अभिषेक बनर्जी शनिवार को दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में चुनाव बाद हुई हिंसा के पीड़ित परिवारों से मिलने गए थे। इसी दौरान कथित तौर पर एक भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया और राज्य की राजनीति गरमा गई।

पुलिस ने पांच लोगों को किया गिरफ्तार

अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद बंगाल पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस ने कहा कि वीडियो में दिख रहे व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया है। जिनमें से दो लोगों की पहचान तपन मैती और आकाश के रूप में हुई है। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है और पकड़े गए पांचों लोगों से पूछताछ की जा रही है।

ममता ने हमले के लिए भाजपा को ठहराया जिम्मेदार

टीएमसी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हमले के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी को चिकित्सा सुविधा मिलने से रोकने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा, सत्ता में बैठे लोग अस्पतालों और संबंधित अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं ताकि अभिषेक बनर्जी को भर्ती न किया जाए, क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनका इलाज हो। उन्होंने पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।

हमले के विरोध में टीएमसी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे

उधर, अभिषेक बनर्जी के कथित हमले के विरोध में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। हुगली जिले के चुंचुड़ा में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व तृणमूल विधायक असित मजूमदार ने पिपुलपाती मोड़ पर सड़क जाम कर धरना दिया। प्रदर्शन के कारण कुछ देर के लिए ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। असित मजूमदार ने कहा कि अत्याचार का सामना कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं के समर्थन में जाने पर अभिषेक बनर्जी को कथित रूप से अपमानित किया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि उनके ऊपर अंडे और जूते फेंके गए, जिसके विरोध में तृणमूल कांग्रेस सड़क पर उतरी है।

लंबित फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी हाईकोर्ट को 3 महीने में निर्णय सुनाने का निर्देश

* अनुच्छेद 142 की विशेष शक्तियों का इस्तेमाल; कहा— समय पर न्याय, न्यायपालिका की विश्वसनीयता के लिए जरूरी


नई दिल्ली। लंबित न्यायिक फैसलों में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए देश के सभी हाईकोर्ट को लंबित मामलों में अधिकतम तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि न्यायिक फैसलों में अनावश्यक देरी न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी फैसले के मुख्य हिस्से (ऑपरेटिव पार्ट) को सुनाए जाने की तारीख ही उस निर्णय की आधिकारिक तारीख मानी जाएगी।

शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट देश की प्रमुख न्यायिक संस्थाएं हैं, जहां हजारों लोग न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में समयबद्ध तरीके से निर्णय देना न्यायपालिका की पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के भरोसे के लिए अत्यंत आवश्यक है।

* क्या है अनुच्छेद 142 ?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को विशेष अधिकार प्रदान करता है, जिसके तहत वह किसी भी मामले में “पूर्ण न्याय” (Complete Justice) सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश जारी कर सकता है, भले ही उसके लिए सामान्य कानून में स्पष्ट प्रावधान न हो। इस शक्ति का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्ष और प्रभावी न्याय सुनिश्चित करना है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने और लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कर्नाटक में सियासी हलचल तेज, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे की चर्चा
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपना इस्तीफा राजभवन भेज दिया है। बताया जा रहा है कि राज्यपाल के बेंगलुरु लौटने के बाद आगे की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व में नई व्यवस्था को लेकर गतिविधियां तेज हो सकती हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तक सरकार या राजभवन की ओर से कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। प्रदेश की राजनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं और अगले कुछ घंटों में तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।
आलाकमान ने जो कहा वो किया’, पद छोड़ने के बाद बोले सिद्धारमैया

#siddaramaiahresignsafterpartyhighcommandorder

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपने पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। इस दौरान बेंगलुरु में मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्हें पूरा भरोसा है कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल इसे जल्द ही स्वीकार कर लेंगे।

हाईकमान ने इस्तीफा देने को कहा मैंने दे दिया- सिद्धारमैया

सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि अभी मैं राज्यपाल भवन गया था। मैंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राज्यपाल अभी शहर में नहीं है। हमें बताया कि वो बेंगलुरु में नहीं है, इसलिए मेरा इस्तीफे को उनके सचिव को हैंडओवर कर दिया गया है। मैं कई बार ये बात बोल चुका हूं जब भी मुझे हाईकमान इस्तीफा देने के लिए कहेंगे तो मैं उनकी बात मानूंगा। कल हाईकमान ने मुझे इस्तीफा देने के लिए कहा था। इसलिए मैंने आज इस्तीफा दे दिया है।

हमारे पास 135 विधायक- सिद्धारमैया

उन्होंने आगे कहा कि राज्यपाल जब बेंगलुरु लौटेंगे तो मेरा इस्तीफा को मंजूर करेंगे। हमारी पार्टी के 135 विधायक हैं। इसके साथ दो अन्य विधायक ने हमें समर्थन दिया है। ऐसे में हमारी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत है। हमारे सभी विधायक एकजुट हैं। मुझे कर्नाटक के 7 करोड़ लोगों की सेवा करने का दो बार मौका मिला है।

ब्रेकफास्ट मीटिंग में किया इस्तीफा का ऐलान

इससे पहले सिद्धारमैया ने अपनी कैबिनेट के सभी मंत्रियों को ब्रेकफास्ट मीटिंग पर बुलाया थी। इस दौरान उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों को धन्यवाद दिया। तीन साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया। सीएम सिद्धारमैया ने इसी मीटिंग में इस्तीफा देने का ऐलान किया था।