अब्राहम' समझौते पर पाकिस्तान ने ट्रंप की अपील ठुकराई, शहबाज के रक्षामंत्री ने दिखाई आंख

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पाकिस्तान ने अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने और इजरायल को औपचारिक मान्यता देने के अमेरिकी दबाव को पूरी तरह ठुकरा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की मांग की थी। जिसके बाद पाकिस्तान ने अब्राहम समझौते में शामिल होने से इनकार कर दिया। रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा कि इस्लामाबाद किसी भी ऐसे समझौते का समर्थन नहीं करेगा जो देश की मौलिक विचारधाराओं के खिलाफ हो।

ट्रंप की मांग पाक को किसी भी हाल में मंजूर नहीं

दरअसल, सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत मुस्लिम बहुल देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने और इजराइल को औपचारिक रूप से मान्यता देने की मांग की थी। जिसके बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने समा टीवी के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि हम इजरायल के साथ जाने का विकल्प नहीं चुन सकते हैं। यह अपनी मूल विचारधारा से समझौता करने जैसा होगा, जो किसी भी हाल में मंजूर नहीं है।

ख्वाजा आसिफ बोले- एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं

आसिफ ने कहा कि इजरायल को लेकर पाकिस्तान का बीते करीब आठ दशक से एक मजबूत रुख रहा है, जिसे छोड़कर वह 'अब्राहम समझौते' में शामिल नहीं हो सकता। आप उन लोगों (इजरायलियों) के साथ कैसे बैठ सकते हैं, जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता है। बता दें कि पाकिस्तान ने अपने 78 साल के इतिहास में कभी-भी इजरायल को मान्यता नहीं दी है।

डोनाल्ड ट्रंप क्या चाहते हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की और कतर जैसे देशों को ईरान समझौते का हिस्सा बनने के लिए अब्राहम अकॉर्ड्स पर दस्तखत करने को कहा है। ट्रंप ने मुस्लिम देशों के नेताओं से कहा कि ईरान में शांति के लिए उनको अब्राहम एकॉर्ड या अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहिए। उनको इजरायल से रिश्ते कायम करने चाहिए।

क्या है अब्राहम समझौता?

अब्राहम एकॉर्ड या अब्राहम समझौता अमेरिका की मध्यस्थता से 2020 में शुरू किया गया था। यह इजरायल और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को सामान्य बनाने के लिए शुरू किया गया था। यह एक ऐसी दुविधा है जिससे ज्यादातर मुस्लिम देश दूर ही रहना चाहते हैं। कई मुस्लिम देशों की मुसीबत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि ट्रंप ने कहा है कि अगर इस पहल का समर्थन नहीं किया गया तो अमेरिका के साथ संबंधों पर असर पड़ सकता है। अब्राहम समझौते पर सबसे पहले 15 सितंबर, 2020 को इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल-बहरीन के बीच हस्ताक्षर हुए थे। बाद में इस ढांचे का विस्तार करके इसमें मोरक्को और सूडान को भी शामिल किया गया। 2025 में औपचारिक रूप से इस समूह में कज़ाकिस्तान भी शामिल हुआ।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्वाड देश एकजुट, जानें क्या हुआ फैसला

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देश की राजधानी नई दिल्ली में मंगलवार को भारत-ऑस्ट्रेलिया-जापान-अमेरिका क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बैठक की अध्यक्षता की और उनके साथ इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने भाग लिया। क्वाड की बैठक में होर्मुज का मुद्दा छाया रहा। इस संगठन में शामिल देशों के विदेश मंत्रियों ने होर्मुज स्ट्रेट को जल्दी से जल्दी खोलने पर चर्चा की।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ‘टोल’ या अतिरिक्त शुल्क से इनकार

दिल्ली में हुई क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी साझा बयान में हॉर्मूज स्ट्रेट और लाल सागर को लेकर बड़ा संदेश दिया गया है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने साफ कहा है कि वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री मार्ग खुले और निर्बाध रहने चाहिए तथा किसी भी तरह के ‘टोल’ या अतिरिक्त शुल्क को स्वीकार नहीं किया जाएगा। क्वाड देशों ने अपने साझा बयान में मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता जताते हुए क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए जारी कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया। हालांकि बयान में किसी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन इसे ईरान की उस चेतावनी से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें हॉर्मूज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण और संभावित शुल्क की बात सामने आई थी।

होर्मुज में जहाजों की आवाजाही नहीं रूकेगी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, भारत और अमेरिका सहित क्वाड देशों ने वैश्विक व्यापार को बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। क्वाड ने साफ कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे दुनिया के प्रमुख समुद्री रास्तों पर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही किसी भी कीमत पर नहीं रुकने दी जाएगी। अगर किसी ने भी इन जहाजों को रोकने की कोशिश की, तो चारों देश मिलकर उसका कड़ा विरोध करेंगे। क्वाड देशों ने ऊर्जा बाजार को स्थिर और पारदर्शी बनाने की बात कही है। इसके लिए आपूर्ति शृंखला को मजबूत और विविध बनाया जाएगा। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए। यह वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।

अमेरिका ने लॉन्च किया सर्विलांस प्लान

क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह साझेदारी अब सिर्फ चर्चा का मंच नहीं रह गई है, बल्कि ‘फ़ोरम ऑफ एक्शन’ बन चुकी है। उन्होंने भारत को सफल मेज़बानी के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि बैठक में बेहद उपयोगी और सार्थक चर्चा हुई। रुबियो ने कहा कि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया चारों देश मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि क्वाड देशों ने इंडो-पैसिफिक सर्विलांस लॉन्च करने का फैसला किया है। उनका कहना था कि इंडो-पैसिफिक दुनिया का सबसे अहम समुद्री क्षेत्र है, जहां से करीब 60 प्रतिशत वैश्विक समुद्री व्यापार गुजरता है। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है। रुबियो ने कहा कि बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क लॉन्च करने का भी फैसला लिया गया है। माना जा रहा है कि इसका मकसद चीन पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक सप्लाई चेन को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि क्वाड सिर्फ सदस्य देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और अन्य देशों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।

राम रहीम को मिली 30 दिन की पैरोल, 16वीं बार रोहतक जेल से आया बाहर

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डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। हरियाणा सरकार ने गुरमीत राम रहीम को 30 दिन की पैरोल मंजूर की है। इसके बाद मंगलवार सुबह वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर निकला। यह दूसरी बार है जब इस विवादित उपदेशक को राज्य सरकार ने इस साल पैरोल पर रिहा किया है। इससे पहले इस साल जनवरी में राज्य सरकार ने 40 दिन की पैरोल दी थी। वहीं, 16वीं बार है जब गुरमीत राम रहीम पैरोल या फरलो पर जेल से बाहर आया है।

बड़े और कड़े काफिले के साथ सिरसा रवाना

साध्वियों के यौन उत्पीड़न और एक पत्रकार की हत्या से मामले में दोषी गुरुमीत राम रहीम को रोहतक की सुनारिया जेल सुबह 6:30 बजे सिरसा के लिए रवाना किया गया। जेल से बाहर आते ही राम रहीम को पंजाब और हरियाणा पुलिस के भारी सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। सुरक्षा कारणों और स्थानीय कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए, राम रहीम को पुलिस के एक बहुत बड़े और कड़े काफिले के साथ सीधे सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के लिए रवाना किया गया है। सिरसा में ही डेरा चीफ का मुख्य आश्रम है।

जनवरी में भी आया था जेल से बाहर

इसी साल जनवरी में भी वह जेल से बाहर आया था। जानकारी के मुताबिक, इससे पहले 15 सितंबर, 2025 को भी राम रहीम को 40 दिनों की पैरोल मिली थी। इस बार की पैरोल के साथ वह 16वीं बार जेल से बाहर आया है।

2017 से जेल में बंद है

दोषी राम रहीम 25 अगस्त 2017 से जेल में है, जब उसे साध्वियों के यौन उत्पीड़न से संबंधित दो मामलों में 20 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी। साल 2019 की जनवरी में राम रहीम को पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या मामले में दोषी करार देकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अक्टूबर 2021 में, सीबीआई कोर्ट ने डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में भी आजीवन कारावास की सजा दी थी। हालांकि, तीन साल बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में राम रहीम को बरी कर दिया था।

राम रहीम को कब-कब पैरोल या फरलो मिला?

अक्टूबर 2020 : 1 दिन की पैरोल

मई 2021 : 1 दिन की पैरोल

फरवरी 2022 : 21 दिन की फरलो

जून 2022 : 30 दिन की पैरोल

अक्टूबर 2022 : 40 दिन की पैरोल

जनवरी 2023 : 40 दिन की पैरोल

जुलाई 2023 : 30 दिन की पैरोल

नवंबर 2023 : 21 दिन की फरलो

जनवरी 2024 : 50 दिन की पैरोल

अगस्त 2024 : 21 दिन की फरलो

अक्टूबर 2024 : 20 दिन की पैरोल

जनवरी 2025 : 30 दिन की पैरोल

अप्रैल 2025 : 21 दिन की फरलो

अगस्त 2025 : 40 दिन की पैरोल

जनवरी 2026 : 40 दिन की पैरोल

मई 2026 : 30 दिन की पैरोल

इसे इतनी भावुकता से न लें..' कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर बोले सीजेआई

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कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। इसमें पार्टी की गतिविधियों की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में आरोप है कि संगठन सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों का गलत इस्तेमाल कर उनका व्यावसायिक फायदा उठा रहा है। PIL में फेक वकीलों की सीबीआई जांच की भी अपील की गई। इस जनहित याचिका पर भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा है कि इस मामले पर इतनी ज्यादा भावुक होने की जरूरत नहीं है।

सोमवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी ने सीजेआई की 'तिलचट्टे' वाली टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश की ओर से स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद न्यापालिका को बदनाम करने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से पेश किया जा रहा है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के मुद्दे को इतना भावनात्मक तरीके से न लें।

उचित समय पर नियमानुसार होगी सुनवाई-सीजेआई

मुख्य न्यायाधीश ने जनहित याचिका की जल्द सुनवाई की मांग पर कहा कि ऐसी कोई गंभीर तात्कालिकता नहीं है और सर्वोच्च न्यायालय उचित समय पर इसकी नियमानुसार सुनवाई करेगा। जनहित याचिका में निर्देश देने की मांग की गई है कि अदालत में होने वाली बातचीत का इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए न किया जाए और फर्जी वकीलों की डिग्रियों के मामले में सीबीआई जांच की जाए। इसी मामले पर एक अन्य जनहित याचिका में मुख्य न्यायाधीश की 'तिलचट्टे' वाली टिप्पणी के बाद उभरे व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी गतिविधियों की सीबीआई जांच की मांग की गई है। 

सीजेआई की टिप्पणी पर लॉन्च हुई सीजेपी

बता दें कि 15 मई, 2026 को सीजेआई सूर्यकांत की अदालत में वकीलों की फर्जी डिग्री के एक मामले की सुनवाई हो रही थी। एक वकील ने सीनियर वकील का दर्जा पाने के लिए अदालत से गुहार लगाई थी। इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने देश के उन कुछ चुनिंदा बेरोजगारों की बात की, जो बिना जिम्मेदारी के बात-बात पर सिस्टम को निशाना बनाते हैं। ऐसे कुछ बेरोजगारों के लिए सीजेआई ने ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल का। सीजेआई की इसी टिप्पणी को अमेरिका के बोस्टन में बैठे पुणे के रहने वाले एक भारतीय अभिजीत दीपके ने हथियार बनाया और अपने इंस्टाग्राम पोर्टल के जरिए व्यंग के इरादे से कॉकरोच जनता पार्टी नाम का मूवमेंट लॉन्च कर दिया। देखते ही देखते इंस्टाग्राम पर यह मूवमेंट फॉलोअर्स के मामले में बहुत ही सफल अभियान साबित हुआ और आज इसके फॉलोअरों की संख्या 23 मिलियन के करीब पहुंच चुकी है।

कौन से ‘सीजेपी’ बनाने वाले अभिजीत दीपके

30 साल के अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल वो अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत 2020 से 2022 तक केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभिजीत आप के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे। एक इंटरव्यू में अभिजीत ने बताया कि उन्होंने निजी जिंदगी और आर्थिक स्थिरता के लिए आप छोड़कर बोस्टन यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया था। एडमिशन मिल गया, तो वे अमेरिका शिफ्ट हो गए। अभिजीत किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर एक्स अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं।

सरकार ईंधन के दाम किस्तों में बढ़ा रही है…’, पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों पर राहुल गाधी का सरकार पर हमला

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पेट्रोल-डीजल के दामों में पिछले 10 दिनों में चौथी बार बढ़ोतरी हुई है। बढ़ती महंगाई पर विपक्ष केंद्र सरकार पर जमकर हमलावर है। नेता प्रतीपक्ष राहुल गांधी ने किस्तों में ईंधन के दाम बढ़ाकर सरकार पर आम लोगों की जेब पर डाका डालने का आरोप लगाया है।

चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने के आरोप

कांग्रेस सांसद ने सोमवार को चौथी बार पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ईंधन के दाम किस्तों में बढ़ा रही है, ताकि आम लोगों की जेब पर लगातार बोझ पड़ता रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से आर्थिक संकट की चेतावनी दी जा रही थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावों में व्यस्त थे और चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल के दाम 8 रुपये तक बढ़ा दिए गए।

प्रियंका चतुर्वेदी का सरकार पर तंज

वहीं, शिवसेना (यूबीटी) नेता व पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने अंदाज में सरकार पर तंज कसा। प्रियंका चतुर्वेदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'मुंबई में पेट्रोल की कीमत शगुन के 11 नंबर पर पहुंच गई है। उन्होंने दावा किया कि अगले 24 घंटों में महानगरों में डीजल की कीमत 100 रुपये तक पहुंच सकती है।'

पेट्रोल की कीमत 102 रूपये के पार

बता दें कि वैश्विक संकट के बीच देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में सोमवार को एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोल की कीमतों में 2.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले 10 दिनों में यह चौथी बार है जब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। कीमतों में बढ़ोतरी से पहले दिल्ली में पेट्रोल 99.51 रुपए प्रति लीटर और डीजल 92.49 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था। लेकिन अब, राजधानी में पेट्रोल 102.12 रुपए प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है।

महंगाई का एक और झटका, पेट्रोल-डीजल की कीमत में उछाल, 10 दिन में चौथी बार बढ़े दाम

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पेट्रोल और डीजल ने आम आदमी को फिर झटका दिया है। सरकार ने आज एक बार फिर तेल के दाम बढ़ा दिए हैं। पेट्रोल ₹2.61 बढ़े तो डीजल 2.71 रुपये महंगा हो गया है। पिछले दस दिनों में ईंधन की कीमतों में चौथी बार इजाफा किया गया है।

पेट्रोल के दाम जहां 102 रुपये के पार पहुंचा

10 दिन पहले 15 मई को पेट्रोल का रेट 94.77 रुपये के करीब था और डीजल भी लगभग 87.67 पैसे पर था। लेकिन हाल ही में एक बार फिर पेट्रोल में ₹2.61 और डीजल में ₹2.71 रुपये की बढ़ोत्तरी के साथ बीते 10 दिनों में पेट्रोल के दाम जहां 102 रुपये के पार पहुंच चुका हैं, वहीं डीजल भी अब ₹95+ हो गया है।

किन शहरों में कितना महंगा हुआ पेट्रोल?

नई दरों के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यहां 2.61 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया, जहां 2.87 रुपये की बढ़ोतरी हुई। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि चेन्नई में यह 107.77 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई।

डीजल के दाम में कितना इजाफा?

डीजल की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिल्ली में डीजल अब 95.20 रुपये प्रति लीटर बिकेगा, जहां 2.71 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। कोलकाता में डीजल की कीमत 99.82 रुपये प्रति लीटर हो गई है। मुंबई में डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। डीजल महंगा होने का असर ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई पर ज्यादा पड़ता है। यही वजह है कि बाजार में सामानों की कीमतें बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?

इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।

2024 से स्थिर थे दाम

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्च 2024 से स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सरकार ने कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर जनता को राहत दी थी। हालांकि, तकनीकी रूप से भारत में ईंधन की कीमतें विनियमित हैं और कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क्रूड की 15 दिनों की औसत कीमत के आधार पर हर दिन रेट बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इन्हें लंबे समय तक नहीं बदला गया। सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं । पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है ।

एस जयशंकर ने उठाया यूएस वीजा का मुद्दा, रुबियो ने कहा- नियम भारत को निशाना बनाकर नहीं बनाए गए

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दिल्ली के हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच बैठक हुई। एस. जयशंकर ने रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने यूएस वीजा का मुद्दा उठाया और होने वाली परेशानियों से अवगत कराया। जिस पर मार्को रुबियो ने कहा कि ये नियम भारत को निशाना बनाकर नहीं बनाए गए हैं।

एस जयशंकर ने कहा कि हमारे संबंधों का आधार जन-संबंध हैं। मैंने विदेश मंत्री रुबियो को वैध यात्रियों को वीजा जारी करने में आने वाली चुनौतियों से अवगत कराया। हालांकि, हम अवैध और अनियमित आवागमन से निपटने के लिए सहयोग कर रहे हैं, लेकिन हमारी अपेक्षा है कि इससे वैध आवागमन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। आखिरकार यह हमारे व्यापार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान सहयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारत को सबसे खास रणनीतिक साझेदार बताया

द्विपक्षीय बातचीत के दौरान जयशंकर ने जैसे ही वीजा का मुद्दा उठाया, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि 'यह पाबंदियां या कड़े नियम भारत को टारगेट करके नहीं बनाए गए हैं। यह एक ऐसी प्रणाली है जिसे वैश्विक स्तर पर लागू किया जा रहा है। लेकिन हम संक्रमण काल से गुजर रहे हैं और किसी भी संक्रमण काल की तरह, इस राह में कुछ बाधाएं तो आएंगी ही। इसके साथ ही रुबियो ने भारत को अमेरिका का सबसे खास और रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लगा दिया।

भारत-अमेरिका संबंधों को बहाल करने की जरूरत नहीं- रुबियो

रुबियो ने कई क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की संभावना भी जताई है। रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और यही साझा लोकतांत्रिक आधार दोनों देशों के मजबूत सहयोग की नींव है। उनके मुताबिक दोनों देशों के कई साझा हित हैं, जिन पर मिलकर काम करना स्वाभाविक और आवश्यक है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका संबंधों को बहाल करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह साझेदारी पहले से ही बेहद मजबूत और ठोस है। उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य इस रिश्ते को और आगे ले जाने तथा नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का है.

व्यापार समझौते पर हुई बातचीत

इस बैठक में सिर्फ वीजा ही नहीं, बल्कि कई और बड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत और अमेरिका के बीच जल्द से जल्द बड़े व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर बातचीत आगे बढ़ी। विदेश मंत्री जयशंकर ने बैठक के बाद कहा कि 'हमने पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्वी एशिया की स्थिति पर चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच हालिया सहयोग का स्वागत किया गया।

25 मई से 3 जून तक झुलसाएगी गर्मी, जानिए क्या है नौतपा

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देश के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी का असर देखने को मिल रहा है। आसमान आग उगल रहा है। पूरे उत्तर भारत से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक लोग तेज धूप और गर्म हवाओं से परेशान हैं। इसी बीच अब नौतपा की चर्चा भी तेज हो गई है। हर साल मई और जून के बीच आने वाले नौतपा को सबसे ज्यादा गर्म दिनों का दौर माना जाता है। इस बार 25 मई से 3 जून तक नौतपा की रहेगा।

क्या है नौतपा?

सनातन परंपरा और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव वृषभ राशि में भ्रमण करते हुए रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो उस अवधि के शुरुआती 9 दिनों को 'नौतपा' कहा जाता है। रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है, जो शीतलता और जल का प्रतीक माना जाता है। जब प्रचंड अग्नि का स्रोत 'सूर्य' इस नक्षत्र में आता है, तो वह इसकी सारी शीतलता को सोख लेता है। परिणामस्वरूप, पृथ्वी पर तापमान अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाता है।

25 मई से 3 जून तक आसमान से बरसेगी आग

ज्योतिष गणना के अनुसार इस बार यह खगोलीय घटना 25 मई से शुरू होकर 3 जून तक चलेगा। खगोलीय विज्ञान की दृष्टि से, मई के अंत में सूर्य उत्तरी गोलार्ध में कर्क रेखा के बिल्कुल समीप होता है। इस स्थिति में सूर्य की किरणें भारत के विशाल भूभाग पर बिल्कुल लंबवत पड़ती हैं। इस समय तक मानसूनी हवाएं भारत के मुख्य भूभाग तक नहीं पहुँचती हैं, जिससे वातावरण में नमी कम और शुष्कता अधिक होती है। यही कारण है कि हवाएं 'लू' का रूप ले लेती हैं।

50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है पारा

मौसम विशेषज्ञों और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस साल का नौतपा पिछले रिकॉर्ड तोड़ सकता है। उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत तक, आसमान से आग बरसने वाली है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. एस.एन. सुनील पांडेय के अनुसार, इस बार नौतपा के दौरान पारा 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

नौतपा की गर्मी को क्यों माना जाता है जरूरी?

ग्रामीण भारत में नौतपा का खेती से गहरा संबंध माना जाता है। किसानों का मानना है कि नौतपा जितना ज्यादा तपता है। मानसून उतना ही बेहतर होता है। गांवों में एक कहावत भी कही जाती है- "नौतपा में जितनी तपन, उतनी बरखा सुखद।" जानकारों के अनुसार, तेज गर्मी की वजह से जमीन गर्मी होती है, जिससे समुद्र में उठने वाली नमी मानसूनी बादलों को तेजी से खींचती है। यही कारण है कि कई लोग नौतपा की गर्मी को अच्छी बारिश का संकेत मानते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी नौतपा की गर्मी खेतों के लिए फायदेमंद मानी जाती है। भीषण गर्मी के दौरान खेतों में मौजूद कई कीट-पतंगे, बैक्टीरिया और जहरीले जीव खत्म हो जाते हैं, जिससे फसलों को नुकसान कम होता है।

व्हाइट हाउस के बाहर फिर चलीं गोलियां, सीक्रेट सर्विस ने संदिग्ध को किया ढेर, राष्ट्रपति ट्रंप अंदर थे मौजूद

#whitehousefiringtwopeopleshotinencounterwithsecretservice

एक बार फिर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा में बड़ी चूक हुई है। शनिवार शाम को व्हाइट हाउस के चेकप्वाइंट पर एक शख्स ने फायरिंग शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि घटना के समय डोनाल्ड ट्रंप भी व्हाइट हाउस के अंदर मौजूद थे। वहीं फायरिंग की घटना के बाद व्हाइट हाउस के सुरक्षाकर्मियों ने आरोपी को गोली मार दी, जिससे वह घायल हो गया। इसके बाद उसे अस्पताल लेकर जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। इस घटना में एक राहगीर को भी गोली लगी है।

फायरिंग करने वाले आरोपी की मौत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस परिसर के नजदीक 17th स्ट्रीट और पेनसिल्वेनिया एवेन्यू NW इलाके में करीब 30 राउंड गोलियां चलने की आवाज सुनी गई। यह इलाका आइजनहावर कार्यकारी कार्यालय भवन के पास स्थित है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक संदिग्ध बंदूकधारी ने व्हाइट हाउस के बाहर बने सुरक्षा बूथ पर फायरिंग शुरू कर दी, जहां सीक्रेट सर्विस के अधिकारी तैनात थे। जवाबी कार्रवाई में सीक्रेट सर्विस के जवानों ने भी गोली चलाई, जिसमें संदिग्ध हमलावर घायल हो गया। इस गोलीबारी में एक राहगीर भी घायल हुआ। हमलावर को अस्पताल लेकर जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

गोलीबारी के समय व्हाइट हाउस में मौजूद थे ट्रंप

घटना के समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस के अंदर मौजूद थे। घटना के समय सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके की निगरानी बढ़ा दी थी। इस गोलीबारी के बाद पूरे इलाके में भारी सुरक्षा तैनात कर दी गई। व्हाइट हाउस के नॉर्थ लॉन को तुरंत खाली कराया गया और कुछ समय के लिए लॉकडाउन लागू किया गया।

एक महीने पहले व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में हुई थी गोलीबारी

यह घटना ऐसे समय हुई है जब पिछले महीने व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में गोलीबारी हुई थी। उस मामले में आरोपी शॉटगन लेकर सिक्योरिटी चेकपॉइंट तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था और उस पर ट्रंप की हत्या की कोशिश का केस चल रहा है। हाल ही में डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया की अमेरिकी अटॉर्नी जीनिन पिरो ने उस कथित हमले से जुड़ा वीडियो जारी किया था। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में संदिग्ध कोल टॉमस एलन को अमेरिकी सीक्रेट सर्विस अधिकारी पर गोली चलाते हुए देखा गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह हमला पहले से योजना बनाकर किया गया था। वीडियो में आरोपी को घटना से एक दिन पहले होटल इलाके की रेकी करते हुए भी दिखाया गया। अमेरिकी अटॉर्नी टोंड ब्लैंच ने बताया कि आरोपी कोल टॉमस एलन पर तीन संघीय आरोप लगाए गए हैं और एफबीआई के साथ मिलकर मामले की जांच जारी है।

व्हाइट हाउस के बाहर फिर चलीं गोलियां, सीक्रेट सर्विस ने संदिग्ध को किया ढेर, राष्ट्रपति ट्रंप अंदर थे मौजूद

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एक बार फिर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा में बड़ी चूक हुई है। शनिवार शाम को व्हाइट हाउस के चेकप्वाइंट पर एक शख्स ने फायरिंग शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि घटना के समय डोनाल्ड ट्रंप भी व्हाइट हाउस के अंदर मौजूद थे। वहीं फायरिंग की घटना के बाद व्हाइट हाउस के सुरक्षाकर्मियों ने आरोपी को गोली मार दी, जिससे वह घायल हो गया। इसके बाद उसे अस्पताल लेकर जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। इस घटना में एक राहगीर को भी गोली लगी है।

फायरिंग करने वाले आरोपी की मौत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस परिसर के नजदीक 17th स्ट्रीट और पेनसिल्वेनिया एवेन्यू NW इलाके में करीब 30 राउंड गोलियां चलने की आवाज सुनी गई। यह इलाका आइजनहावर कार्यकारी कार्यालय भवन के पास स्थित है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक संदिग्ध बंदूकधारी ने व्हाइट हाउस के बाहर बने सुरक्षा बूथ पर फायरिंग शुरू कर दी, जहां सीक्रेट सर्विस के अधिकारी तैनात थे। जवाबी कार्रवाई में सीक्रेट सर्विस के जवानों ने भी गोली चलाई, जिसमें संदिग्ध हमलावर घायल हो गया। इस गोलीबारी में एक राहगीर भी घायल हुआ। हमलावर को अस्पताल लेकर जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

गोलीबारी के समय व्हाइट हाउस में मौजूद थे ट्रंप

घटना के समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस के अंदर मौजूद थे। घटना के समय सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके की निगरानी बढ़ा दी थी। इस गोलीबारी के बाद पूरे इलाके में भारी सुरक्षा तैनात कर दी गई। व्हाइट हाउस के नॉर्थ लॉन को तुरंत खाली कराया गया और कुछ समय के लिए लॉकडाउन लागू किया गया।

एक महीने पहले व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में हुई थी गोलीबारी

यह घटना ऐसे समय हुई है जब पिछले महीने व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में गोलीबारी हुई थी। उस मामले में आरोपी शॉटगन लेकर सिक्योरिटी चेकपॉइंट तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था और उस पर ट्रंप की हत्या की कोशिश का केस चल रहा है। हाल ही में डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया की अमेरिकी अटॉर्नी जीनिन पिरो ने उस कथित हमले से जुड़ा वीडियो जारी किया था। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में संदिग्ध कोल टॉमस एलन को अमेरिकी सीक्रेट सर्विस अधिकारी पर गोली चलाते हुए देखा गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह हमला पहले से योजना बनाकर किया गया था। वीडियो में आरोपी को घटना से एक दिन पहले होटल इलाके की रेकी करते हुए भी दिखाया गया। अमेरिकी अटॉर्नी टोंड ब्लैंच ने बताया कि आरोपी कोल टॉमस एलन पर तीन संघीय आरोप लगाए गए हैं और एफबीआई के साथ मिलकर मामले की जांच जारी है।