पंजाब के सीएम भगवंत मान पर गंभीर आरोप, कांग्रेस और अकाली दल ने कहा-नशे में सदन चला रहे हैं मुख्यमंत्री

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पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। राघव चड्ढा समेत सात सांसदों की बगावत के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर राज्य में सियासत गर्मा गई है। नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने आरोप लगाया है कि शुक्रवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सीएम भगवंत मान नशे में लग रहे थे।

कांग्रेस का सदन से वॉकआउट

पंजाब के नेता विपक्ष और कांग्रेस के सीनियर नेता प्रताप सिंह बाजवा के आरोपों के बाद कांग्रेस विधायकों ने प्रदर्शन करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। वहीं पार्टी ने सभी विधायकों के डोप परीक्षण और पीजीआईएमईआर द्वारा स्वतंत्र चिकित्सा जांच की भी मांग की।

प्रताप सिंह बाजवा ने की सभी का परीक्षण कराने की मांग

विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी मान की कथित तौर पर नशे में होने के लिए आलोचना की और तत्काल डोप टेस्ट की मांग की। उन्होंने कहा कि हमें विधानसभा में आकर क्या करना चाहिए जहां मुख्यमंत्री नशे की हालत में हैं? जब राज्य का मुखिया पूरी तरह से नशे में है तो सत्र आयोजित करने का क्या उद्देश्य है? हम मांग करते हैं कि सभी का परीक्षण किया जाए। 

 

शिरोमणि अकाली दल ने भी लगाए आरोप

शिरोमणि अकाली दल ने भी इसी तरह के आरोप लगाए, इसे शर्मनाक बताया और मुख्यमंत्री के डोप परीक्षण की मांग की। अकाली दल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया है कि मुख्यमंत्री ‘मजदूर दिवस’ के अवसर पर विधानसभा सत्र में नशे की स्थिति में उपस्थित हुए थे। पार्टी ने इस आचरण को सदन की गरिमा के विरुद्ध बताते हुए उनकी कड़ी आलोचना की है। पार्टी ने अपने पोस्ट में लिखा कि यह बहुत शर्म की बात है कि मुख्यमंत्री पवित्र विधानसभा में इस हालत में पहुंचे।

विधानसभा का यह विशेष सत्र पहले ही ‘ऑपरेशन लोटस’ जैसे संवेदनशील मुद्दे को लेकर बुलाया गया था। आम आदमी पार्टी (AAP) जहां भाजपा पर सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगा रही थी, वहीं इस नए विवाद ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक विस्फोटक बना दिया।

पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, इन शर्तों पर मिली अग्रिम जमानत

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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ी राहत मिल गई है। अब असम पुलिस पवन खेड़ा को अरेस्ट नहीं कर पाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को जालसाजी और मानहानि के मामले में अग्रिम जमानत दे दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर कथित तौर पर झूठे आरोप लगाने से जुड़ा है।

पवन खेड़ा ने की थी अग्रिम जमानत की मांग

असम पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के मामले में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की बेंच ने सुनवाई की। खेड़ा ने इस एफआईआर को चुनौती देते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी, जिसे पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बेंच ने पहले ही फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज सुबह इसे जारी किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर उठाया सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में हाई कोर्ट के निर्णय पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट की टिप्पणियां उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों के सही मूल्यांकन पर आधारित नहीं थीं और वे त्रुटिपूर्ण प्रतीत होती हैं। बेंच ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने आरोपित पर गलत तरीके से सबूत का बोझ डाल दिया, जो कि कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। अदालत के अनुसार, जांच एजेंसियों का काम आरोप साबित करना होता है, न कि आरोपी पर यह जिम्मेदारी डालना कि वह खुद को निर्दोष साबित करे। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट का भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 339 से जुड़ी टिप्पणी करना भी गलत था, क्योंकि एफआईआर में इस धारा का कोई उल्लेख ही नहीं था।

अभिषेक मनु सिंघवी ने पवन खेड़ा की ओर से दी दलीलें

पवन खेड़ा की ओर से गुरुवार को अभिषेक मनु सिंघवी ने जोरदार दलीलें रखी थीं। पवन खेड़ा की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उन्हें गिरफ्तार करने की कोई जरूरत नहीं है। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था, पवन खेड़ा पर जो आरोप है, वह शिकायकर्ता की मानहानि करने का है। आरोप सही हैं या नहीं, यह ट्रायल में तय होगा। लेकिन इस केस में गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है। मानहानि के आरोप में पूछताछ की जा सकती है. गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है।

पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत का विरोध

वहीं असम सरकार की तरफ से अदालत में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि पवन खेड़ा ने झूठे दावे करने के लिए पासपोर्ट समेत कई जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। इसलिए, यह पता लगाने के लिए उनकी हिरासत जरूरी है कि इस काम में उनके कौन-कौन साथी शामिल थे और क्या इसमें कोई विदेशी तत्व भी शामिल हैं।

क्या है मामला?

बता दें कि मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप में यह मामला पवन खेड़ा के खिलाफ तब दर्ज किया गया, जब उन्होंने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियां हैं। इस मामले में पवन खेड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। असम पुलिस 7 अप्रैल को खेड़ा के दिल्ली स्थित घर गई थी, लेकिन वह वहां मौजूद नहीं थे

993 रुपये महंगा हुआ कमर्शियल सिलिंडर, देश के तमाम शहरों कीमतें 3 हजार रुपये के भी पार

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ईरान युद्ध का असर देश में एलपीजी की कीमतों पर भी दिखने लगा है। पहले से ही चल रही सप्‍लाई के संकटों के बीच अब कीमतों का बोझ भी आ गया है।गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 125 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया था जो इसका 4 साल का उच्चतम स्तर है। कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ा है। इसे देखते हुए सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने आज कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भारी बढ़ोतरी कर दी है।

दिल्ली में 3,071.50 रूपये में मिलेगा

मई महीने की शुरुआत के साथ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। इंडियन ऑयल द्वारा जारी नई दरों के मुताबिक, दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 993 रूपये की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस बदलाव के बाद अब दिल्ली में सिलेंडर 2,078.50 रूपये की बजाय 3,071.50 का मिलेगा।

मुंबई और कोलकाता में कितनी बढ़ी कीमत

इसी तरह मुंबई और कोलकाता में भी कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम आज से 3,024 रुपये पहुंच गए हैं। अभी तक यह 2,031 रुपये प्रति सिलेंडर मिल रहा था। चुनावी राज्‍य पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में अब कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 3,202 रुपये पहुंच गया है, जो अभी तक 2,208 रुपये में मिल रहा था। दक्षिणी महानगर चेन्‍नई में एलपीजी का दाम बढ़कर 3,237 रुपये प्रति सिलेंडर हो गया है, जो अभी तक 2,246.50 रुपये था। यहां घरेलू सिलेंडर 928.50 रुपये का है।

नहीं बढ़ें घरेलू गैस सिलेंडर के दाम

राहत की बात यह है कि 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर अभी भी 913 रूपये के पुराने रेट पर ही मिल रहा है। मिडिल क्लास के लिए यह सुकून देने वाली खबर है क्योंकि रसोई के बजट पर फिलहाल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ा है।

रेप से गर्भवती नाबालिग के गर्भपात पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पमी, कहा- नियमों में बदलाव की जरूरत

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गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में 15 साल की रेप पीड़िता के 31 हफ्ते के गर्भ को समाप्त कराने के मामले पर गंभीर बहस हुई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा केंद्र को बच्चों से रेप के मामले में गर्भपात कानून में बदलाव करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में एम्स ने एक क्यूरेटिव याचिका दायर की है। जिसमें उसने अपने ही उस फैसले के खिलाफ अपील की है, जिसमें 15 साल की लड़की को 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने की इजाजत दी गई थी। सुप्रीम ने सुनवाई के बाद कहा, अगर मां को कोई परमानेंट डिसेबिलिटी नहीं है, तो प्रेग्नेंसी खत्म करने की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।

कानून को समय के अनुसार विकसित होना चाहिए- कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कानून को समय के साथ बदलना चाहिए और रेप से जुड़े मामलों में गर्भपात कराने की समय सीमा नहीं होनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जब गर्भावस्था रेप के कारण हो, तो समय सीमा नहीं होनी चाहिए। कानून को समय के अनुसार विकसित होना चाहिए।

पीड़िता और परिवार के फैसले का सम्मान जरूरी-कोर्ट

कोर्ट ने सरकार से कहा कि ऐसे मामलों में पीड़िता और उसके परिवार के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए, न कि उन्हें कानून की सीमाओं में बांधकर मजबूर किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एम्स जैसी संस्थाएं परिवार को गाइड कर सकती हैं, ताकि वे सोच-समझकर फैसला ले सकें।

पीड़िता पर अनचाही प्रेग्नेंसी थोपी नहीं जा सकती-कोर्ट

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि किसी पीड़िता पर अनचाही प्रेग्नेंसी थोपी नहीं जा सकती और इसमें होने वाले इमोशनल और फिजिकल ट्रॉमा को भी हाईलाइट किया अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी पीडिता के मानसिक और शारीरिक दर्द की भरपाई संभव नहीं है। पीड़िता को जिंदगी भर इसका जख्म और ट्रॉमा झेलना पड़ेगा। जरा सोचिए, वह अभी एक बच्ची है। इस समय उसे पढ़ना चाहिए, लेकिन हम उसे मां बनाना चाहते हैं।

क्या बंगाल से ममता दीदी की विदाई तय, 4 मई को आ रही नई सरकार?

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कुल 294 सीटों पर दो चरणों में वोट डाले गए। पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को और दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान हुआ। मतगणना 4 मई को होगी। इस बीच दूसरे चरण की वोटिंग खत्म होते ही एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आ गए हैं। एग्जिट पोल की मानें तो बंगाल से दीदी की विदाई तय हो गई है।

बंगाल की जनता चाहती है बदलाव?

बंगाल के रण में इस बार ममता बनर्जी का जादू चलता नहीं दिख रहा है। प्रमुख एग्जिट पोल्स ने साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता ने परिवर्तन का मन बना लिया है। 2021 में जिस भाजपा को दीदी ने पटखनी दी थी, वही भाजपा 2026 में सुनामी बनकर लौटती दिख रही है।

टीएमसी वाली राजनीति का युग अब अंत की ओर है?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने के लिए जो दांव चल रही थीं, वे उलटे पड़ गए हैं। इन आंकड़ों ने न केवल टीएमसी के कैंप में सन्नाटा पसरा दिया है, बल्कि राजनीतिक पंडितों को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या बंगाल में दशकों पुरानी वामपंथी और फिर टीएमसी वाली राजनीति का युग अब अंत की ओर है?

क्या कह रहे एग्जिट पोल के आंकड़े

जेवीसी के एग्जिट पोल के अनुसार, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है। टीएमसी को 131 से 152 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि भाजपा को 138 से 159 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस के खाते में 0 से 2 सीटें जाने का अनुमान है, जबकि वाम दलों और अन्य के खाते में कोई सीट जाती नहीं दिख रही है। वहीं, जनमत पोल्स के एग्जिट पोल में टीएमसी को 195 से 205 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि भाजपा को 80 से 90 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस को 1 से 3 सीटें मिलने की संभावना है। वाम दलों को 0 से 1 सीट और अन्य के खाते में 3 से 5 सीटें जा सकती हैं। वहीं पीपुल्स इनसाइट के एग्जिट पोल के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। टीएमसी को 138 से 150 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि भाजपा को 144 से 154 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस के खाते में 0 से 1 सीट और वाम दलों को भी 0 से 1 सीट मिलने की संभावना जताई गई है।

सर्वे नतीजों में बदलते तो...

अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो टीएमसी के लिए सत्ता में वापसी मुश्किल हो सकती है। अगर ये सर्वे नतीजों में बदलते हैं, तो भाजपा के लिए यह अब तक की सबसे बड़ी ऐतिहासिक जीत होगी।

कोहिनूर हीरा भारत को लौटाएं” किंग चार्ल्स के न्यूयॉर्क दौरे पर मेयर जोहरान ममदानी का बड़ा बयान

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न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी अपने बयानों को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। भारतीय मूल के ममदानी ने ब्रिटिश किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला के न्यूयॉर्क दौरे को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब उनसे पूछा गया कि किंग चार्ल्स के न्यूयॉर्क दौरे पर उनका क्या संदेश होगा तो ममदानी ने ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में भारत से ब्रिटेन ले जाए गए बेशकीमती कोहिनूर हीरे पर बात की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि वह किंग चार्ल्स से अपील करेंगे कि वे भारत का कोहिनूर हीरा वापस करें।

यूएस दौरे पर ब्रिटिश किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला

ममदानी का बयान ऐसे समय में आया है जब चार्ल्स अपनी अमेरिका यात्रा पर हैं और 9/11 हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। ब्रिटिश किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला चार दिवसीय के दौरे के तहत न्यूयॉर्क में हैं। इस दौरान उन्होंने 9/11 मेमोरियल और म्यूजियम का दौरा भी किया। इस दौरान किंग चार्ल्स ने 2001 के आतंकी हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी और पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की। मंगलवार को कांग्रेस की संयुक्त बैठक में अपने संबोधन में राजा चार्ल्स ने 11 सितंबर 2001 को हुए हमले का जिक्र किया। इन हमलों में लगभग 3000 लोग मारे गए थे, जिसनें 67 ब्रिटिश नागरिक भी शामिल थे।

ब्रिटेन के शाही ताज में जड़ा है भारत का कोहिनूर हीरा

कोहिनूर, 100 कैरेट से ज्यादा का एक नायाब हीरा है। सदियों पहले भारत से ले जाया गया यह हीरा औपनिवेशिक काल में ब्रिटेन की लूट को लेकर विवादों के केंद्र में रहा है। कोहिनूर वही हीरा है जो ब्रिटेन के शाही ताज में जड़ा है और टावर ऑफ लंदन में रखा गया है। यह 177 साल से ब्रिटेन के पास है। भारत ने ब्रिटेन के सामने कई बार कोहिनूर हीरे पर अपना कानूनी हक होने का दावा किया है

1849 से ब्रिटेन के पास कोहिनूर हीरा

कोहिनूर हीरा 1849 से ब्रिटेन के पास है। द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से सिख साम्राज्य के हारने के बाद अंग्रेजों ने पूरे पंजाब पर कब्जा कर लिया। उस समय सिख साम्राज्य के शासक दलीप सिंह थे, जिनकी उम्र सिर्फ 10 साल थी। युद्ध हारने के बाद अंग्रेजों ने उनसे लाहौर की संधि पर हस्ताक्षर करवाए। इस संधि की शर्तें बहुत सख्त थीं। इसके तहत पंजाब को ब्रिटिश शासन के अधीन कर दिया गया और साथ ही कोहिनूर हीरा भी अंग्रेजों को सौंपना पड़ा। इसके बाद यह हीरा ब्रिटेन पहुंचा और क्वीन विक्टोरिया को दे दिया गया।

बंगाल में वोटिंग के बीच शुभेंदु अधिकारी को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने घेरा, चोर-चोर के लगाए नारे*

#bhabanipursuvenduadhikarigheraotmc_protest

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है, जहां हर बूथ अब राजनीतिक अखाड़ा बनता दिख रहा है। इस बीच कोलकाता की हाई-प्रोफाइल भवानीपुर सीट के कालीघाट इलाके में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला।

भवानीपुर में वोटिंग के दौरान भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। मतदान केंद्र पर निरीक्षण करने पहुंचे शुभेंदु अधिकारी के साथ टीएमसी कार्यकर्ता भिड़ गए। इस दौरान शुभेंदु अधिकारी को टीएमसी समर्थकों ने घेर और जय बंगाल के नारे लगाने शुरू कर दिए। जवाब में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने 'जय श्री राम' के नारे लगाए।

शुभेंदु अधिकारी बोले- वहां मौजूद लोग असली मतदाता नहीं

इस घटना के बाद भड़के भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ये लोग वोटर नहीं, बाहरी हैं। इन्होंने मुझ पर हमला करने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने फोन पर किसी से बात करते हुए कहा कि यहां तुरंत सीआरपीएफ भेजी जाए। जब तक फोर्स नहीं आएगी, मैं यहां से नहीं जाऊंगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ये लोग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थक हैं। इस घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है। पुलिस और सुरक्षा बल मौके पर मौजूद हैं और हालात को काबू में रखने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से जारी रह सके।

टीएमसी ने किया पटलवार

वहीं, टीएमसी नेता काजोरी बनर्जी ने बीजेपी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, 'हम लोग शांतिपूर्वक वोट देने आए थे, लेकिन शुभेंदु अधिकारी ने यहां आकर माहौल खराब करने की कोशिश की है। उन पर किसी ने हमला नहीं किया, वे केवल वोटिंग को प्रभावित करने के लिए गलत आरोप लगा रहे हैं।'

142 सीटों पर हो रहा मतदान

बता दें कि दूसरे चरण में 294 में से 142 सीटों पर मतदान हो रहा है, जिसे टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल और कोलकाता में उसकी राजनीतिक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में बुधवार को दोपहर 1 बजे तक 61.11 परसेंट वोटिंग हुई है। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, हुगली 64.57 परसेंट वोटिंग के साथ सबसे ऊपर रहा, उसके बाद हावड़ा 60.68 परसेंट वोटिंग के साथ दूसरे नंबर पर रहा।

क्या CM ममता के जीतने पर इस्तीफा देने की हिम्मत है? डेरेक ओ'ब्रायन का पीएम मोदी को चुनौती

#tmcmpchallengespmasksdoyouhavethecourageto_resign

पश्चिम बंगाल दूसरे फेज में 142 सीटों पर मतदान हो रहा है। इसी बीच ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बड़ी चुनौती दी है। डेरेक ओ’ब्रायन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि अगर 4 मई को ममता बनर्जी और टीएमसी पश्चिम बंगाल में जीत दर्ज करती है, तो प्रधानमंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

पूछा- क्या इस्तीफा देने की हिम्मत है

डेरेक ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा- नरेंद्र, आपने कहा था कि आप बंगाल की सभी 294 सीटों के उम्मीदवार हैं। बड़ी-बड़ी बातें छोड़िए और यह चुनौती स्वीकार कीजिए। उन्होंने आगे कहा कि 4 मई को जब ममता बनर्जी और टीएमसी बंगाल जीत जाए, तो प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दीजिए। क्या हिम्मत है?

क्या बंगाल में बदलेगी सरकार?

बता दें कि बुधवार 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल की 142 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। इन सीटों में ज्यादातर इलाके टीएमसी के मजबूत गढ़ माने जाते हैं। बीजेपी ने बंगाल चुनाव में पूरी ताकत झोंक रखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मार्च से अब तक राज्य में 19 चुनावी रैलियां की हैं। पहले चरण में 23 अप्रैल को रिकॉर्ड 91.78 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जो चुनावी उत्साह का संकेत है। बीजेपी इस चुनाव को राज्य में सत्ता परिवर्तन के बड़े मौके के रूप में देख रही है।

पश्चिम बंगाल में अंतिम चरण में डाले जा रहे वोट, 142 सीटों पर मतदान जारी

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पश्चिम बंगाल में आज विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए मतदान हो रहा है। इस चरण में राज्य की 294 में से 142 सीटों पर वोटिंग जारी है। राज्य में पिछली बार की तरह इस बार भी सीधा मुकाबला सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग में सुबह से ही पोलिंग बूथ पर वोटरों की लंबी कतारें दिख रही हैं। इस बीच आम लोगों के साथ कई बड़े चेहरे भी पोलिंग बूथ तक पहुंच रहे हैं। इस बीच टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा भी सुबह-सुबह वोट डालने पहुंचीं। वहीं, अभिनेता और बीजेपी नेता मिथुन चक्रवर्ती बेलगाछिया के सुवोखान कम्युनिटी हॉल में कतार में खड़े होकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

बंगाल चुनाव को लेकर पीएम मोदी ने की अपील

आज पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा चरण है। आज मतदान करने वाले सभी लोगों से मेरा आग्रह है कि वे रिकॉर्ड संख्या में मतदान करें और हमारे लोकतंत्र को और अधिक जीवंत तथा सहभागी बनाएं। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि पश्चिम बंगाल की महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में बाहर निकलें और अपने मताधिकार का प्रयोग करें।

किस जिले की कितनी सीटों पर वोटिंग

• उत्तर 24 परगना: 33 सीटें

• दक्षिण 24 परगना : 31

• हुगली : 18

• नदिया: 17

• हावड़ा : 16

• पूर्व बर्धमान: 16

• कोलकाता: 11

दूसरे चरण इन वीआईपी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी, स्वपन दासगुप्ता, रासबिहारी, चंद्रिमा भट्टाचार्य, दीप्शिता धर, मीनाक्षी मुखर्जी, अधीर रंजन चौधरी, फिरहाद हकीम, अर्जुन सिंह, तापस रॉय, अरूप विश्वास, शूभंकर सरकार, कलतान दासगुप्ता समेत कई और चर्चित चेहरों के भाग्य का फैसला ईवीएम में कैद होगा।

पहले चरण में 152 सीटों पर 93.19 फीसदी वोटिंग

बंगाल चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड 93.19 प्रतिशत वोटिंग दर्ज किया गया, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे ऊंचा वोट प्रतिशत है. निर्वाचन आयोग के अनुसार, 23 अप्रैल को 16 जिलों की 152 सीटों पर हुए मतदान में 3.61 करोड़ मतदाताओं में से करीब 3.36 करोड़ लोगों ने वोट डाले। इनमें लगभग 1.65 करोड़ महिलाएं और 1.71 करोड़ पुरुष शामिल रहे। जिलों की बात करें तो कूच बिहार में सबसे अधिक 96.2 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि दक्षिण दिनाजपुर (95.44%) और मालदा (94.79%) भी शीर्ष पर रहे। इसके अलावा जलपाईगुड़ी, बीरभूम और उत्तर दिनाजपुर समेत कई जिलों में 90 प्रतिशत से अधिक वोटिंग दर्ज की गई। वहीं, सबसे कम मतदान कलिम्पोंग में 83.04 प्रतिशत और दार्जिलिंग में 88.98 प्रतिशत रहा। इससे पहले राज्य में सबसे ज्यादा 84.72 प्रतिशत मतदान 2011 के विधानसभा चुनाव में दर्ज किया गया था।

‘शशि थरूर ने स्वीकार किया कांग्रेस महिला विरोधी’, रिजिजू का बड़ा दावा

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महिला आरक्षण को लेकर हाल के दिनों में संसद से लेकर सड़कों तक सियासी घमासान देखने को मिला। सरकार ने महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश किया था, लेकिन विपक्ष के तीखे विरोध के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका। इस पूरे मुद्दे पर अब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक बार फिर कांग्रेस पर हमला बोला है। रिजिजू ने दावा किया था कि संसद सत्र के बाद थरूर ने दावा किया था कि कांग्रेस महिला विरोधी है।

थरूर व्यक्तिगत रूप से महिला विरोधी नहीं-रिजिजू

किरेन रिजिजू ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि संसद सत्र के बाद उनकी और थरूर की मुलाकात हुई थी। रिजिजू ने कहा कि फोटो सेशन के दौरान शशि थरूर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कांग्रेस भले ही एंटी-वूमन हो सकती है, लेकिन कोई उन्हें व्यक्तिगत रूप से महिला विरोधी नहीं मान सकता। रिजिजू ने आगे कहा कि उन्होंने भी इस बात से सहमति जताई कि थरूर की छवि महिला विरोधी नहीं है, लेकिन उनकी पार्टी पर सवाल उठते हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।

रिजिजू के दावे पर शशि थरूर ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के इस दावे पर शशि थरूर ने अपना रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा, मैंने ऐसी कोई बात नहीं कही है और न ही ऐसा कोई संकेत दिया है। थरूर ने कहा, कि फोटो में 7 लोग है, जो असलियत बता सकते हैं। शशि थरूर ने कहा, सोनिया गांधी के नेतृत्व में एक सशक्त महिला राष्ट्रपति के रूप में हमने महिलाओं के अधिकारों और आरक्षण के लिए आवाज उठाई है। महिला आरक्षण विधेयक की पहल की, इसे हमारे कार्यकाल में राज्यसभा में पारित कराया और 2023 में भारत सरकार द्वारा लोकसभा में लाए जाने पर इसका समर्थन किया।

थरूर के सोशल मीडिया पोस्ट से जोड़ा जा रहा विवाद

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में 18 अप्रैल को शशि थरूर द्वारा साझा की गई एक तस्वीर भी है। इस तस्वीर में उन्होंने किरेन रिजिजू के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा था कि जब रिजिजू ने विपक्ष को महिला विरोधी बताया, तब उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी उन्हें ऐसा नहीं कह सकता। इस पोस्ट में थरूर ने हल्के-फुल्के अंदाज में रिजिजू को चार्मिंग भी बताया था।