कोहिनूर हीरा भारत को लौटाएं” किंग चार्ल्स के न्यूयॉर्क दौरे पर मेयर जोहरान ममदानी का बड़ा बयान

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न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी अपने बयानों को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। भारतीय मूल के ममदानी ने ब्रिटिश किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला के न्यूयॉर्क दौरे को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब उनसे पूछा गया कि किंग चार्ल्स के न्यूयॉर्क दौरे पर उनका क्या संदेश होगा तो ममदानी ने ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में भारत से ब्रिटेन ले जाए गए बेशकीमती कोहिनूर हीरे पर बात की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि वह किंग चार्ल्स से अपील करेंगे कि वे भारत का कोहिनूर हीरा वापस करें।

यूएस दौरे पर ब्रिटिश किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला

ममदानी का बयान ऐसे समय में आया है जब चार्ल्स अपनी अमेरिका यात्रा पर हैं और 9/11 हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। ब्रिटिश किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला चार दिवसीय के दौरे के तहत न्यूयॉर्क में हैं। इस दौरान उन्होंने 9/11 मेमोरियल और म्यूजियम का दौरा भी किया। इस दौरान किंग चार्ल्स ने 2001 के आतंकी हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी और पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की। मंगलवार को कांग्रेस की संयुक्त बैठक में अपने संबोधन में राजा चार्ल्स ने 11 सितंबर 2001 को हुए हमले का जिक्र किया। इन हमलों में लगभग 3000 लोग मारे गए थे, जिसनें 67 ब्रिटिश नागरिक भी शामिल थे।

ब्रिटेन के शाही ताज में जड़ा है भारत का कोहिनूर हीरा

कोहिनूर, 100 कैरेट से ज्यादा का एक नायाब हीरा है। सदियों पहले भारत से ले जाया गया यह हीरा औपनिवेशिक काल में ब्रिटेन की लूट को लेकर विवादों के केंद्र में रहा है। कोहिनूर वही हीरा है जो ब्रिटेन के शाही ताज में जड़ा है और टावर ऑफ लंदन में रखा गया है। यह 177 साल से ब्रिटेन के पास है। भारत ने ब्रिटेन के सामने कई बार कोहिनूर हीरे पर अपना कानूनी हक होने का दावा किया है

1849 से ब्रिटेन के पास कोहिनूर हीरा

कोहिनूर हीरा 1849 से ब्रिटेन के पास है। द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से सिख साम्राज्य के हारने के बाद अंग्रेजों ने पूरे पंजाब पर कब्जा कर लिया। उस समय सिख साम्राज्य के शासक दलीप सिंह थे, जिनकी उम्र सिर्फ 10 साल थी। युद्ध हारने के बाद अंग्रेजों ने उनसे लाहौर की संधि पर हस्ताक्षर करवाए। इस संधि की शर्तें बहुत सख्त थीं। इसके तहत पंजाब को ब्रिटिश शासन के अधीन कर दिया गया और साथ ही कोहिनूर हीरा भी अंग्रेजों को सौंपना पड़ा। इसके बाद यह हीरा ब्रिटेन पहुंचा और क्वीन विक्टोरिया को दे दिया गया।

बंगाल में वोटिंग के बीच शुभेंदु अधिकारी को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने घेरा, चोर-चोर के लगाए नारे*

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है, जहां हर बूथ अब राजनीतिक अखाड़ा बनता दिख रहा है। इस बीच कोलकाता की हाई-प्रोफाइल भवानीपुर सीट के कालीघाट इलाके में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला।

भवानीपुर में वोटिंग के दौरान भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। मतदान केंद्र पर निरीक्षण करने पहुंचे शुभेंदु अधिकारी के साथ टीएमसी कार्यकर्ता भिड़ गए। इस दौरान शुभेंदु अधिकारी को टीएमसी समर्थकों ने घेर और जय बंगाल के नारे लगाने शुरू कर दिए। जवाब में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने 'जय श्री राम' के नारे लगाए।

शुभेंदु अधिकारी बोले- वहां मौजूद लोग असली मतदाता नहीं

इस घटना के बाद भड़के भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ये लोग वोटर नहीं, बाहरी हैं। इन्होंने मुझ पर हमला करने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने फोन पर किसी से बात करते हुए कहा कि यहां तुरंत सीआरपीएफ भेजी जाए। जब तक फोर्स नहीं आएगी, मैं यहां से नहीं जाऊंगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ये लोग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थक हैं। इस घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है। पुलिस और सुरक्षा बल मौके पर मौजूद हैं और हालात को काबू में रखने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से जारी रह सके।

टीएमसी ने किया पटलवार

वहीं, टीएमसी नेता काजोरी बनर्जी ने बीजेपी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, 'हम लोग शांतिपूर्वक वोट देने आए थे, लेकिन शुभेंदु अधिकारी ने यहां आकर माहौल खराब करने की कोशिश की है। उन पर किसी ने हमला नहीं किया, वे केवल वोटिंग को प्रभावित करने के लिए गलत आरोप लगा रहे हैं।'

142 सीटों पर हो रहा मतदान

बता दें कि दूसरे चरण में 294 में से 142 सीटों पर मतदान हो रहा है, जिसे टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल और कोलकाता में उसकी राजनीतिक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में बुधवार को दोपहर 1 बजे तक 61.11 परसेंट वोटिंग हुई है। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, हुगली 64.57 परसेंट वोटिंग के साथ सबसे ऊपर रहा, उसके बाद हावड़ा 60.68 परसेंट वोटिंग के साथ दूसरे नंबर पर रहा।

क्या CM ममता के जीतने पर इस्तीफा देने की हिम्मत है? डेरेक ओ'ब्रायन का पीएम मोदी को चुनौती

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पश्चिम बंगाल दूसरे फेज में 142 सीटों पर मतदान हो रहा है। इसी बीच ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बड़ी चुनौती दी है। डेरेक ओ’ब्रायन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि अगर 4 मई को ममता बनर्जी और टीएमसी पश्चिम बंगाल में जीत दर्ज करती है, तो प्रधानमंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

पूछा- क्या इस्तीफा देने की हिम्मत है

डेरेक ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा- नरेंद्र, आपने कहा था कि आप बंगाल की सभी 294 सीटों के उम्मीदवार हैं। बड़ी-बड़ी बातें छोड़िए और यह चुनौती स्वीकार कीजिए। उन्होंने आगे कहा कि 4 मई को जब ममता बनर्जी और टीएमसी बंगाल जीत जाए, तो प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दीजिए। क्या हिम्मत है?

क्या बंगाल में बदलेगी सरकार?

बता दें कि बुधवार 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल की 142 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। इन सीटों में ज्यादातर इलाके टीएमसी के मजबूत गढ़ माने जाते हैं। बीजेपी ने बंगाल चुनाव में पूरी ताकत झोंक रखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मार्च से अब तक राज्य में 19 चुनावी रैलियां की हैं। पहले चरण में 23 अप्रैल को रिकॉर्ड 91.78 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जो चुनावी उत्साह का संकेत है। बीजेपी इस चुनाव को राज्य में सत्ता परिवर्तन के बड़े मौके के रूप में देख रही है।

पश्चिम बंगाल में अंतिम चरण में डाले जा रहे वोट, 142 सीटों पर मतदान जारी

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पश्चिम बंगाल में आज विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए मतदान हो रहा है। इस चरण में राज्य की 294 में से 142 सीटों पर वोटिंग जारी है। राज्य में पिछली बार की तरह इस बार भी सीधा मुकाबला सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग में सुबह से ही पोलिंग बूथ पर वोटरों की लंबी कतारें दिख रही हैं। इस बीच आम लोगों के साथ कई बड़े चेहरे भी पोलिंग बूथ तक पहुंच रहे हैं। इस बीच टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा भी सुबह-सुबह वोट डालने पहुंचीं। वहीं, अभिनेता और बीजेपी नेता मिथुन चक्रवर्ती बेलगाछिया के सुवोखान कम्युनिटी हॉल में कतार में खड़े होकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

बंगाल चुनाव को लेकर पीएम मोदी ने की अपील

आज पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा चरण है। आज मतदान करने वाले सभी लोगों से मेरा आग्रह है कि वे रिकॉर्ड संख्या में मतदान करें और हमारे लोकतंत्र को और अधिक जीवंत तथा सहभागी बनाएं। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि पश्चिम बंगाल की महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में बाहर निकलें और अपने मताधिकार का प्रयोग करें।

किस जिले की कितनी सीटों पर वोटिंग

• उत्तर 24 परगना: 33 सीटें

• दक्षिण 24 परगना : 31

• हुगली : 18

• नदिया: 17

• हावड़ा : 16

• पूर्व बर्धमान: 16

• कोलकाता: 11

दूसरे चरण इन वीआईपी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी, स्वपन दासगुप्ता, रासबिहारी, चंद्रिमा भट्टाचार्य, दीप्शिता धर, मीनाक्षी मुखर्जी, अधीर रंजन चौधरी, फिरहाद हकीम, अर्जुन सिंह, तापस रॉय, अरूप विश्वास, शूभंकर सरकार, कलतान दासगुप्ता समेत कई और चर्चित चेहरों के भाग्य का फैसला ईवीएम में कैद होगा।

पहले चरण में 152 सीटों पर 93.19 फीसदी वोटिंग

बंगाल चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड 93.19 प्रतिशत वोटिंग दर्ज किया गया, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे ऊंचा वोट प्रतिशत है. निर्वाचन आयोग के अनुसार, 23 अप्रैल को 16 जिलों की 152 सीटों पर हुए मतदान में 3.61 करोड़ मतदाताओं में से करीब 3.36 करोड़ लोगों ने वोट डाले। इनमें लगभग 1.65 करोड़ महिलाएं और 1.71 करोड़ पुरुष शामिल रहे। जिलों की बात करें तो कूच बिहार में सबसे अधिक 96.2 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि दक्षिण दिनाजपुर (95.44%) और मालदा (94.79%) भी शीर्ष पर रहे। इसके अलावा जलपाईगुड़ी, बीरभूम और उत्तर दिनाजपुर समेत कई जिलों में 90 प्रतिशत से अधिक वोटिंग दर्ज की गई। वहीं, सबसे कम मतदान कलिम्पोंग में 83.04 प्रतिशत और दार्जिलिंग में 88.98 प्रतिशत रहा। इससे पहले राज्य में सबसे ज्यादा 84.72 प्रतिशत मतदान 2011 के विधानसभा चुनाव में दर्ज किया गया था।

‘शशि थरूर ने स्वीकार किया कांग्रेस महिला विरोधी’, रिजिजू का बड़ा दावा

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महिला आरक्षण को लेकर हाल के दिनों में संसद से लेकर सड़कों तक सियासी घमासान देखने को मिला। सरकार ने महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश किया था, लेकिन विपक्ष के तीखे विरोध के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका। इस पूरे मुद्दे पर अब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक बार फिर कांग्रेस पर हमला बोला है। रिजिजू ने दावा किया था कि संसद सत्र के बाद थरूर ने दावा किया था कि कांग्रेस महिला विरोधी है।

थरूर व्यक्तिगत रूप से महिला विरोधी नहीं-रिजिजू

किरेन रिजिजू ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि संसद सत्र के बाद उनकी और थरूर की मुलाकात हुई थी। रिजिजू ने कहा कि फोटो सेशन के दौरान शशि थरूर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कांग्रेस भले ही एंटी-वूमन हो सकती है, लेकिन कोई उन्हें व्यक्तिगत रूप से महिला विरोधी नहीं मान सकता। रिजिजू ने आगे कहा कि उन्होंने भी इस बात से सहमति जताई कि थरूर की छवि महिला विरोधी नहीं है, लेकिन उनकी पार्टी पर सवाल उठते हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।

रिजिजू के दावे पर शशि थरूर ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के इस दावे पर शशि थरूर ने अपना रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा, मैंने ऐसी कोई बात नहीं कही है और न ही ऐसा कोई संकेत दिया है। थरूर ने कहा, कि फोटो में 7 लोग है, जो असलियत बता सकते हैं। शशि थरूर ने कहा, सोनिया गांधी के नेतृत्व में एक सशक्त महिला राष्ट्रपति के रूप में हमने महिलाओं के अधिकारों और आरक्षण के लिए आवाज उठाई है। महिला आरक्षण विधेयक की पहल की, इसे हमारे कार्यकाल में राज्यसभा में पारित कराया और 2023 में भारत सरकार द्वारा लोकसभा में लाए जाने पर इसका समर्थन किया।

थरूर के सोशल मीडिया पोस्ट से जोड़ा जा रहा विवाद

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में 18 अप्रैल को शशि थरूर द्वारा साझा की गई एक तस्वीर भी है। इस तस्वीर में उन्होंने किरेन रिजिजू के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा था कि जब रिजिजू ने विपक्ष को महिला विरोधी बताया, तब उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी उन्हें ऐसा नहीं कह सकता। इस पोस्ट में थरूर ने हल्के-फुल्के अंदाज में रिजिजू को चार्मिंग भी बताया था।

महाराष्ट्र में पहलगाम जैसा मामला! कलमा न पढ़ने पर चाकू से किया हमला

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महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मीरा रोड इलाके से सोमवार तड़के सामने आए चाकू कांड के मामले ने अब एक नया और बड़ा मोड़ ले लिया है। आरोप है कि हमलावर ने पहले गार्ड का नाम और उसके धर्म के बारे में पूछा और फिर उसे चाकू घोंप दिया।

हमलावर ने बनाया कलमा पढ़ने का दबाव

सोमवार तड़के मीरा रोड के नया नगर क्षेत्र में एक इमारत में तैनात दो सुरक्षा गार्डों पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला किया गया। दावा किया जा रहा है कि हमलावर ने पहले दोनों सुरक्षाकर्मियों से पहलगाम आतंकी हमले की तरह उनका धर्म पूछा और कलमा पढ़ने का दबाव बनाया। इनकार करते ही उसने बेरहमी से ताबड़तोड़ वार किए, जिससे दोनों गार्ड बुरी तरह घायल हो गए।

कलमा नहीं पढ़ने पर चाकू से गोदा

राजकुमार मिश्रा और सुब्रतो रमेश सेन एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में ड्यूटी पर तैनात थे। सुबह करीब 4 बजे नया नगर थाना क्षेत्र में वॉकहार्ट अस्पताल के पीछे स्थित अस्मिता ग्रैंड मेंशन की साइट पर 31 वर्षीय आरोपी जैब जुबैर अंसारी पहुंचा। आरोप है कि हमलावर जैब अंसारी ने पहले दोनों गार्डों पर धार्मिक दबाव डालते हुए उनसे कलमा पढ़ने के लिए कहा। जब दोनों गार्डों ने ऐसा करने से मना कर दिया, तो उन पर चाकू से हमला कर दिया गया। घटना के बाद घायल गार्डों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां समय पर इलाज मिलने की वजह से उनकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है।

मात्र डेढ़ घंटे में आरोपी गिरफ्तार

इधर, घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आरोपी की पहचान कर ली। पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान 31 साल के जैब जुबैर अंसारी के तौर पर की है और मात्र डेढ़ घंटे में उसे गिरफ्तार कर लिया।

मुंबई ATS कर रही नोट की जांच

पुलिस को आरोपी के पास से कुछ ऐसी सामग्री मिली है, जिसके आधार पर एटीएस ने जांच अपने हाथ में ली है। आरोपी जुबैर अंसारी के पास से जो नोट मिले हैं उनमें ‘LONE WOLVES WILL POUNCE ON YOU, You mushrikeen will see real jihad in bilad Hind from now!’ इसके अलावा कुछ और बातें भी लिखी गई थीं, जैसे ‘People, family, wives, parents will leave you. May Allah guide them. Gaza will only be free by’ मुंबई ATS फिलहाल इस नोट की जांच कर रही है।

जस्टिस स्वर्णकांता का अब मनीष सिसोदिया ने किया बहिष्कार, केजरीवाल की तरह लिखी चिठ्ठी

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दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के बाद मनीष सिसोदिया ने भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तरह ‘सत्याग्रह’ का रास्ता चुना है। अरविंद केजरीवाल के बाद अब आप के नेता मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखा है। मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की अदालत में खुद या वकील के पेश नहीं होने का एलान कर दिया है।

अदालत में पेश नहीं होंगे सिसोदिया

आबकारी नीति घोटाला मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई से अरविंद केजरीवाल के बाद अब मनीष सिसोदिया ने भी खुद को अलग कर लिया है।मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिखकर कहा है कि अब वह उनकी अदालत में पेश नहीं होंगे।

सत्याग्रह के अलावा अब कोई रास्ता नहीं-सिसोदिया

सिसोदिया ने अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि मुझे न्याय की कोई उम्मीद नहीं है और मेरी तरफ से कोई भी वकील आपके सामने पेश नहीं होगा। सत्याग्रह के अलावा अब कोई रास्ता नहीं बचा है। केजरीवाल के बाद अब सिसोदिया के इस बयान ने सियासी और कानूनी हलकों में हलचल तेज कर दी है।

केजरीवाल ने भी लिखा था पत्र

इससे पहले आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि वे जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के सामने न तो खुद पेश होंगे और न ही किसी वकील के जरिए। केजरीवाल ने लेटर में लिखा था कि जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट गई है। इसलिए, मैंने गांधीजी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलने का फैसला किया है। मैंने यह फैसला अपनी अंतरात्मा की आवाज पर लिया है। मैं जस्टिस स्वर्ण कांता के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अपना अधिकार सुरक्षित रखता हूं।

क्या है मामला?

दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील दायर की है, जिसमें आबकारी घोटाले में केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इस अपील याचिका पर न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा सुनवाई कर रही हैं। केजरीवाल ने 13 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर न्यायमूर्ति शर्मा से खुद को मामले से अलग करने की मांग की थी। 20 अप्रैल को अदालत ने उनकी इस अर्जी को खारिज कर दिया और टिप्पणी की कि किसी राजनेता को न्यायपालिका पर अविश्वास फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस फैसले के बाद केजरीवाल ने पत्र लिखकर कहा कि अब उन्हें विश्वास नहीं रहा कि न्यायमूर्ति शर्मा निष्पक्ष तरीके से सुनवाई कर पाएंगी।

चुनावी सरगर्मियों के बीच पीएम मोदी का दिखा नया अंदाज़, गंगटोक में युवाओं के साथ फुटबॉल खेलते दिखे

#gangtokpmmodijoinedagroupofyoungstersforagameoffootball

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के दौरे पर सिक्किम में हैं। पीएम मोदी सोमवार शाम ही सिक्किम की राजधानी गंगटोक पहुंचे थे। आज मंगलवार को पीएम मोदी सिक्किम के 50वें स्थापना दिवस के समापन समारोह में शामिल होंगे। इससे पहले उन्होंने सुबह-सुबह राजधानी गंगटोक में युवाओं के साथ फुटबॉल खेला।

“नन्हे दोस्तों” के साथ फुटबॉल खेलते पीएम मोदी

युवाओं के साथ फुटबॉल खेलने की पीएम मोदी ने कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं। पीएम मोदी ने एक पोस्ट में लिखा, 'गंगटोक की एक प्यारी सुबह, सिक्किम में अपने नन्हे दोस्तों के साथ फुटबॉल खेलने का मजा ही कुछ और है! उन्होंने कहा, स्पष्ट है कि इन युवाओं के साथ फुटबॉल का सत्र बेहद ऊर्जावान रहा!'

रोड शो की तस्वीरें भी साझा की

इससे पहले सोमवार शाम को सिक्किम की राजधानी गंगटोक पहुंचे पीएम मोदी ने एक रोड शो भी किया था। पीएम मोदी ने हेलीपैड से लोकभवन तक रोड शो किया था। प्रधानमंत्री मोदी की एक झलक पाने के लिए सड़कों पर भारी भीड़ उमड़ी थी। पीएम मोदी को देखने के लिए रोड शो के दौरान लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला। लोगों के आशीर्वाद और स्नेह के लिए पीएम मोदी ने उनका आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने इस रोड शो की फोटोज़ और वीडियोज़ सोशल मीडिया पर शेयर किए।

4 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का करेंगे अनावरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दौरे के दूसरे दिन आज मंगलवार को राज्य के 50वें स्थापना दिवस समारोह के समापन समारोह में भाग लेंगे और 4,000 करोड़ रुपए से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का अनावरण करेंगे। प्रधानमंत्री मंगलवार को गंगटोक स्थित ऑर्किडेरियम का दौरा करेंगे, जिसे राज्य की समृद्ध पारिस्थितिक और पुष्प विरासत को प्रदर्शित करने के लिए विश्व स्तरीय ऑर्किड अनुभव केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। इसके बाद, सुबह लगभग 10 बजे, पीएम मोदी पालजोर स्टेडियम में स्वर्ण जयंती समारोह के समापन समारोह में शामिल होंगे, जहां वे बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, बिजली, शहरी विकास, पर्यावरण, पर्यटन और कृषि जैसे क्षेत्रों में फैली परियोजनाओं का उद्घाटन, शुभारंभ और आधारशिला रखेंगे। वे सभा को संबोधित भी करेंगे।

आप के 7 सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी, राज्यसभा चेयरमैन ने दी अनुमति, बीजेपी हुई मजबूत

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आम आदमी पार्टी में हुई बगावत के बाद राज्यसभा में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। आप से अलग हुए सभी 7 सांसदों को अब औपचारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा मान लिया गया है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद उच्च सदन में आप को बड़ा झटका लगा है।

राज्यसभा सचिवालय ने दी विलय को मंजूरी

शुक्रवार को राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों का बीजेपी में विलय करने का ऐलान किया था। राघव चड्ढा ने इसे 'आप' के दो-तिहाई से ज्यादा सांसदों का भाजपा में विलय बताया। साथ ही राज्यसभा को लेटर लिख विलय की अनुमति मांगी थी। ऐसे में सोमवार को राज्यसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर इस विलय को मंजूरी दे दी है।

राज्यसभा में BJP की ताकत बढ़कर 113 पहुंची

वहीं, इस बदलाव से बीजेपी को सीधा फायदा हुआ है और उसकी संख्या राज्यसभा में बढ़कर 113 पहुंच गई है। इसके साथ ही एनडीए का आंकड़ा 148 पहुंच गया। वहीं, इस फैसले के बाद आप की ताकत राज्यसभा में सिमटकर बेहद कम हो गई है। अब आप पार्टी के पास महज तीन सांसद ही बचे हैं। इनमें एक सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल पंजाब से हैं, जबकि दो सदस्य संजय सिंह और नारायण दास गुप्ता दिल्ली से आते हैं।

इन सांसदों का बीजेपी में विलय

जिन सात सांसदों का बीजेपी में विलय हुआ है, उनमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। अब राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन सभी को बीजेपी सांसदों की सूची में दिखाया जा रहा है।

आप ने की थी सदस्यता खत्म करने की मांग

दरअसल, पार्टी से बागी हुए तीन सांसदों के खिलाफ राज्य सभा के चेयरमैन को अर्जी भी दी थी। पार्टी ने इन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की भी मांग की। पार्टी ने दलील दी थी जब इन तीन सांसदों ने AAP छोड़ने का ऐलान किया था, उस समय 4 अन्य सांसद मौजूद नहीं थे। ऐसे में ये अल्पमत में है और इनका पार्टी छोड़ना दल-बदल कानून के तहत आता है।

आप के बागी सांसदों पर दल-बदल कानून नहीं होगा लागू

बता दें कि दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के बावजूद आप के सांसदों पर दल-बदल कानून लागू नहीं होगा, क्योंकि इसमें यह प्रावधान है कि यदि किसी विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य अलग या किसी अन्य पार्टी में विलय कर लेते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।

अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता का किया बहिष्कार, चिठ्ठी लिखकर बोले- न्याय मिलने की उम्मीद टूटी

#arvind_kejriwal_wrote_a_letter_to_justice_swarna_kanta

आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को एक पत्र लिखा है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को लिखे पत्र में केजरीवाल ने कहा है कि वे उनके सामने न तो खुद पेश होंगे और न ही किसी वकील के जरिए। केजरीवाल ने लेटर में लिखा कि जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट गई है।

गांधी जी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलने का फैसला

अरविंद केजरीवाल ने अपने पत्र में लिखा, 'मेरी जस्टिस स्वर्णकांता जी से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है। इसलिए मैंने गांधी जी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलने का फैसला लिया है। मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए फैसला किया है। जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले की अपील में सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रखूंगा।'

केजरीवाल हाईकोर्ट में अब नहीं होंगे पेश

इससे पहले 20 अप्रैल को, दिल्ली हाई कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को केस से हटाने की अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य लोगों की याचिका को खारिज कर दिया था। जिसके बाद कोर्ट में पेशी से पहले अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को ये लेटर लिखा है। अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखकर कहा कि वह आबकारी मामले में व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से उनकी अदालत में पेश नहीं होंगे।

क्या है मामला?

यह पूरा मामला दिल्ली शराब नीति मामले से जुड़ा है। केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग की थी। उन्होंने जज पर पक्षपात का आशंका जताते हुए कई आधार दिए थे, जिनमें जज के बच्चों का सरकारी वकीलों के साथ जुड़ाव भी शामिल था। हालांकि, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने हाल ही में इस याचिका को साफ शब्दों में खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि उनका शपथ संविधान से है, दबाव में नहीं झुकेंगी। जज ने केजरीवाल की याचिका को ‘बिना सबूतों के आरोप’ करार दिया और कहा कि ऐसे आवेदन न्यायिक प्रक्रिया पर हमला हैं।