मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद की बैठक, 24 जिलों में चलेगी मोबाइल साइंस बस

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में आज झारखंड मंत्रालय में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत झारखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद की सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शोध एवं नवाचार को सुदृढ़ बनाने तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों में नवाचार आधारित वातावरण विकसित करने को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक के दौरान राज्य के समग्र विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया गया। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड में प्रतिभा, संसाधन एवं संभावनाओं की कोई कमी नहीं है; आवश्यकता केवल इन क्षमताओं को सही दिशा, उपयुक्त मंच एवं संस्थागत सहयोग प्रदान करने की है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों एवं तकनीकी संस्थानों को नवाचार से जोड़ते हुए भविष्य उन्मुख शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में परिषद के माध्यम से राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रसार, अनुसंधान को प्रोत्साहन, नवाचार संस्कृति के विस्तार तथा शैक्षणिक संस्थानों, शोध संस्थाओं एवं अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। यह भी उल्लेख किया गया कि विज्ञान एवं तकनीक आधारित पहल राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करेंगी तथा झारखंड को ज्ञान-आधारित विकास की दिशा में अग्रसर करेंगी।

उक्त बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परिषद की गतिविधियों को परिणामोन्मुख बनाया जाए तथा राज्य के उच्च एवं तकनीकी संस्थानों में शोध, स्टार्टअप, इनोवेशन एवं प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञान एवं नवाचार को समाज एवं शासन की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना समय की मांग है। मुख्यमंत्री ने मोबाइल साइंस एग्जिबिशन बस के संचालन पर भी विचार-विमर्श करते हुए निर्देश दिया कि इसका परिचालन राज्य के सभी 24 जिलों में सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग, विशेषकर विद्यार्थी, इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए इस प्रकार की पहल अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी। झारखंड में विज्ञान जागरूकता के लिए मोबाइल विज्ञान प्रदर्शनी जैसी गतिविधियाँ पहले भी उपयोगी साबित हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनीक के साथ-साथ मैकेनिकल नवाचारों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि कृषि कार्य अधिक सुलभ, आधुनिक और उत्पादक बन सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि साइंस सिटी केवल बच्चों के आकर्षण का केंद्र न रहे, बल्कि हर आयु वर्ग के लोग वहां पहुंचें, उसे देखें और उससे प्रेरित हों।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों में निर्माणाधीन साइंस केंद्र एवं तारामंडलों की प्रगति की जानकारी ली तथा निर्देश दिया कि इन संस्थानों को गुणवत्तापूर्ण, आकर्षक और जनोपयोगी स्वरूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के बच्चों को देश के विभिन्न शहरों में स्थित साइंस सिटी एवं तारामंडलों का भ्रमण कराने के लिए विशेष पहल की जाए, ताकि उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा और नवाचार के प्रति रुचि विकसित हो। उन्होंने कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, शोध एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में हर संभव सहयोग के लिए तैयार है।

उक्त बैठक में मंत्री श्री सुदिव्य कुमार सोनू, विधायक श्री विकास मुंडा, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, विकास आयुक्त श्री अजय कुमार सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री के. श्रीनिवास, वित्त विभाग के सचिव श्री प्रशांत कुमार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर सचिव श्री राज कुमार गुप्ता, उच्च शिक्षा निदेशक श्री सुधीर बारा, तकनीकी शिक्षा निदेशक श्री सुनील कुमार, निदेशक, एनएमएल जमशेदपुर डॉ. संदीप घोष चौधरी, हेड, स्टेट साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रोग्राम (भारत सरकार) डॉ. निशा मेंदिरत्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।_

भाजपा द्वारा पानी-बिजली के ज्वलंत मुद्दे पर 6-12 मई तक जिलावार प्रदर्शन का ऐलान

बीते 17 अप्रैल को बिजली के मुद्दे पर राज्यव्यापी आंदोलन करने के बाद झारखंड भाजपा ने एक बार फिर पानी की घोर किल्लत एवं बिजली कटौती को लेकर जोरदार आंदोलन करने का ऐलान कर दिया है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने 6 से लेकर 12 मई तक यानि 6 दिनों तक भाजपा द्वारा इस गंभीर मुद्दे पर विभिन्न जिलों में जोरदार प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

प्रेस वार्ता के दौरान श्री साहू ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पानी बिजली संकट से त्राहिमाम कर रही झारखंड की जनता के बीच व्याप्त भारी आक्रोश को आंदोलन के माध्यम से स्वर देने का निर्णय लिया है। इसी निमित्त भारतीय जनता पार्टी द्वारा 6 मई से लेकर 12 मई तक यानि 6 दिनों तक जिलावार जन प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है। आंदोलन की तैयार रूपरेखा के अनुसार 6 मई को गढ़वा, पलामू एवं लातेहार, 7 मई को चाईबासा, जमशेदपुर एवं सरायकेला-खरसावां, 8 मई को हजारीबाग, चतरा, कोडरमा एवं रामगढ़, 9 मई को दुमका, पाकुड़, साहिबगंज, गोड्डा, देवघर एवं जामताड़ा, 11 मई को गिरिडीह, धनबाद एवं बोकारो और 12 मई को रांची, लोहरदगा, सिमडेगा, गुमला एवं खूंटी में भारतीय जनता पार्टी का एक एक कार्यकर्ता सिर पर घड़ा, डेकची सहित पानी ढोने वाले अन्य बर्तन को लेकर प्रदर्शन करेंगे। हमारी पार्टी आँखें मूंदकर नहीं बैठ सकती है। हमारे एक एक कार्यकर्ता इस जनविरोधी सरकार को कुंभकर्णी निद्रा से जगाने का काम करेंगे।

श्री साहू ने कहा कि पूरा झारखंड पेयजल की घोर किल्लत से त्राहिमाम कर रहा है। प्रदेश भर में लगभग 80000 चापानल खराब पड़े हैं। 72 घंटे में खराब पड़े चापानल को बनाने का सरकारी दावा फिसड्डी साबित हुआ है। सरकार द्वारा जारी टोल फ्री नंबर भी किसी काम का नहीं है। राज्य भर में लोग बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। जनता की यह पीड़ा राज्य सरकार को महसूस नहीं होती है। काफी दुख का विषय है कि सरकार की रुचि जनसमस्याओं को दूर करने की बजाय पूरी कैबिनेट के साथ दूसरे प्रदेशों में चुनावी दौरा कर पिकनिक मनाने में अधिक है। लगता है, सीएम का फोकस पॉइंट झारखंड की बजाय पड़ोसी राज्य हो गया है। हेमंत सरकार को भले ही आम लोगों की यह पीड़ा महसूस नहीं होती परन्तु भाजपा का एक एक कार्यकर्ता आम लोगों की इस पीड़ा को महसूस कर रहा है।

श्री साहू ने कहा कि देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर घर को स्वच्छ जल मिले, इसके लिए नल जल योजना के रूप में महत्वाकांक्षी योजना चलाई, इसमें सफलता भी मिली। लेकिन दुखद बात यह है कि 12764 करोड़ रुपए झारखंड में खर्च होने के बावजूद यहां पर यह योजना धरातल पर प्रभावी नहीं दिख रही है। अधिकांश जगहों पर जलापूर्ति कागजों तक ही सीमित है, नल सूखे पड़े हैं। उन्होंने कहा कि वे केवल सुनी सुनाई बातों को नहीं कह रहे हैं बल्कि इस योजना का भुक्तभोगी वे खुद हैं और उदाहरण के तौर पर उनका गांव है, जहां नल तो लगा है, पाइप भी बिछाया गया है लेकिन पानी का एक बूंद आज तक नहीं मिल पाया है। हेमंत सरकार ने इस योजना में भ्रष्टाचार करने का काम किया है। आज भी राज्य में 45% परिवार इस योजना से वंचित हैं। इस योजना की झारखंड में स्थिति यह है कि यह योजना राष्ट्रीय औसत से लगभग 25% पीछे है। देशभर में नीचे से यह दूसरे स्थान पर है।

श्री साहू ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2019 से 2025 के बीच झारखंड को 12982 करोड रुपए आवंटित किए। जिसमें से 6010 करोड़ यानी 46.30% ही राज्य सरकार खर्च कर पाई। 7000 से अधिक की राशि पड़ी हुई है। राज्य सरकार दोषारोपण करती है कि केंद्र सरकार भेदभाव करती है, गैर बीजेपी शासित प्रदेश को मदद नहीं करती। इससे प्रमाणित होता है कि यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीतिक है। दरअसल केंद्र के पैसे को झारखंड सरकार खर्च ही नहीं कर पाती। आज अगर नल जल योजना को सही से जमीन पर उतारा जाता तो लोगों को पानी की इतनी भयावह स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। माताएं बहने कई किलोमीटर से माथे पर बर्तन लेकर चुआ तालाब से पानी लाने को विवश हैं। राज्य सरकार केवल बड़ी-बड़ी बातें करती है, प्रलोभन देना, ठगना ही इस सरकार का एकमात्र काम रह गया है।

श्री साहू ने कहा कि पानी की किल्लत और बिजली कटौती के विरोध में भाजपा का यह आंदोलन राज्य सरकार की नींद हराम कर देगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पानी बिजली के मुद्दे पर सरकार गंभीरता दिखाएं। लोगों को पानी की कमी नहीं हो। खराब पड़े चापानलों की तत्काल मरम्मत कराई जाए। अब तो केंद्र ने भी पंचायत को पैसा दे दिया है, उसका इन कार्यों में सदुपयोग हो। प्रदेश अध्यक्ष ने चुटकी लेते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सरकार कितनी गंभीर होगी, सरकार ही जाने। लेकिन इतना तय है कि जमीनी हकीकत से कोसों दूर सरकार की तरफ से अखबारों में खंडन जरूर किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य सरकार को सुझाव दिया कि सरकार अपनी ऊर्जा इन सब चीजों की बजाय जनता की समस्याओं के समाधान की दिशा में लगावे तो ज्यादा बेहतर होगा।

इस दौरान प्रेस वार्ता में प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्व सांसद आभा महतो, भानु प्रताप शाही, प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाऊरी एवं प्रदेश मीडिया सह प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह भी मौजूद थे।

आदिवासी अस्मिता बचाने दुमका कूच करेगी सीपीआईएम, मई में विशाल प्रदर्शन


आदिवासी अस्मिता और जल-जंगल-ज़मीन पर षड्यंत्र एवं प्रहार बर्दाश्त नहीं: सीपीआईएम ने फूंका आंदोलन का बिगुल

मई में दुमका आयुक्त कार्यालय पर होगा आदिवासियों का विशाल महाजुटाान

दुमका: संताल परगना के जनजातीय क्षेत्रों में कॉरपोरेट-राज्य गठजोड़ द्वारा किए जा रहे सुनियोजित भूमि अधिग्रहण और संवैधानिक अधिकारों के दमन के खिलाफ सीपीआईएम (भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी) ने आर-पार के संघर्ष का ऐलान कर दिया है। कल ही में पार्टी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित गाँवों का दौरा किया, जिसमें राज्य सचिव कॉम प्रकाश विप्लव, राज्य सचिव मंडल सदस्य सुरजीत सिन्हा, राज्य कमेटी सदस्य सुभाष हेम्ब्रम, अमल आज़ाद और जिला सचिव देवी सिंह पहाड़िया शामिल थे।

इस दौरान द्वारा उजागर हुए मुख्य तथ्य:

संवैधानिक ढाँचे का उल्लंघन: टीम ने पाया कि जिला प्रशासन और एमडीओ (MDO) स्थानीय दलाल तत्वों के साथ मिलकर वनाधिकार अधिनियम (FRA), पेसा (PESA) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act) का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन कर रहे हैं। बिना ग्राम सभा की अनुमति के किए जा रहे सर्वेक्षण और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाएँ पूरी तरह असंवैधानिक और अवैध हैं।

प्रशासनिक अवरोध और पट्टा दावे: क्षेत्र में वनाधिकार के दर्जनों आवेदन वर्षों से लंबित हैं। सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद, लंबित दावों (विशेषकर PVTG समूहों के) का निपटारा किए बिना जबरन विस्थापन की तैयारी की जा रही है, जो कानूनी रूप से अनुचित है।

राम सभाओं की अनदेखी: प्रशासन ने पेसा (PESA) के तहत ग्राम सभाओं की सर्वोच्चता को दरकिनार कर दिया है। ग्रामीणों में व्याप्त अज्ञानता का लाभ उठाकर डराने-धमकाने और दबाव की राजनीति की जा रही है।

गाँवों का सामूहिक संकल्प और आगामी रणनीति:

1. ग्राम सभा का गठन: प्रभावित गाँवों के ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर स्थानीय प्रधानो को 10 दिनों के भीतर औपचारिक ग्राम सभा बुलाने का अल्टीमेटम दिया है, ताकि 'वन अधिकार समिति' का गठन और नए दावों का पंजीकरण हो सके।

2. दस्तावेजी प्रमाण: ग्राम सभा की कार्यवाही और प्रस्तावों को राज्यपाल, भारत के राष्ट्रपति और उच्च न्यायालय को साक्ष्य के रूप में भेजा जाएगा।

3. संगठनात्मक लामबंदी: एक विशेष उपसमिति का गठन किया गया है जो ग्राम सभाओं के सशक्तिकरण और कानूनी लड़ाई की निगरानी करेगी।

4. विशाल प्रदर्शन: इस लूट और दमन के विरोध में मई 2026 के तीसरे सप्ताह में दुमका आयुक्त कार्यालय के समक्ष बड़ी संख्या में ग्रामीणों की प्रत्यक्ष भागीदारी के साथ विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। इसकी अंतिम रूपरेखा 10 मई को होने वाली जिला कमेटी की बैठक में तय होगी।

नेतृत्व का वक्तव्य:

पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि "आदिवासियों को उनकी पैतृक ज़मीन से बेदखल करने की किसी भी साजिश का मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। यह केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि आदिवासियों के अस्तित्व की रक्षा का जन-आंदोलन है। जब तक अंतिम व्यक्ति का वनाधिकार दावा सुरक्षित नहीं होता, एमडीओ का एक भी पहिया आगे बढ़ने नहीं दिया जाएगा।"

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक संपन्न, ₹820 करोड़ की सड़क परियोजनाओं सहित 15 प्रस्तावों पर मुहर

W.P.(S) No.-4299/2024 सुदर्शन महतो एवं अन्य बनाम झारखण्ड राज्य एवं अन्य में दिनांक-05.08.2024 को पारित न्यायादेश एवं Contempt Case (Civil) No. 192/2025, सुदर्शन महतो एवं अन्य बनाम झारखण्ड राज्य एवं अन्य में दिनांक-12.12.2025 को पारित न्यायनिर्णय के आलोक में जिन वादियों की नियमित सेवा 10 वर्ष से कम है के नियमित सेवा के रूप में की गयी सेवा में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत अवधि को जोड़कर पेंशनादि की स्वीकृति दी गई।

झारखण्ड राज्य राजमार्ग प्राधिकार के माध्यम से "Construction of Elevated road/Flyover at Argora Chowk from Harmu (Near KAV's Restaurant) to Dibdih Bridge (Near Sailor's Knot Restaurant) with legs toward Kathal More (Chaputoli) and Towards Ashok Nagar (Near Road No. 3) including service road (कुल लंबाई-3.804 कि०मी०) (भू-अर्जन, युटिलिटी शिफ्टिंग एवं R&R सहित)" हेतु रू० 469,62,12,300/- (चार सौ उनहत्तर करोड़ बासठ लाख बारह हजार तीन सौ) मात्र की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।

झारखण्ड राज्य राजमार्ग प्राधिकार के माध्यम से "करमटोली से साईंस सिटी फ्लाईओवर (सर्विस पथ सहित) (कुल लम्बाई-3.216 कि०मी०) निर्माण कार्य (भू-अर्जन, R&R, युटिलिटी शिफ्टींग, वनरोपन एवं बागवानी सहित)" हेतु रू० 351,14,44,800 /- (तीन सौ इक्यावन करोड़ चौदह लाख चौवालीस हजार आठ सौ) मात्र की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।

राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण (State School Standard Authority) के गठन की स्वीकृति दी गई।

मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना एवं मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत पथ एवं पुल निर्माण की स्वीकृति दी गई।

दिनांक-13.07.2024 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में W.P. (S) No.- 1298/2023 अनिल कुमार सिंह एवं अन्य बनाम झारखण्ड सरकार एवं अन्य में पारित AWARD के आलोक में जिन वादियों की नियमित सेवा 10 वर्ष से कम है, के नियमित सेवा के रूप में की गई सेवा में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत अवधि को जोड़कर पेंशनादि की स्वीकृति दी गई।

W.P.(S) No.- 4501/2024 प्रभाकर सारंगी एवं अन्य बनाम झारखण्ड सरकार एवं अन्य में दिनांक-24.10.2024 को पारित न्यायादेश एवं Contempt Case (Civil) No. 347/2025, प्रभाकर सारंगी एवं अन्य बनाम झारखण्ड सरकार एवं अन्य में दिनांक-12.12.2025 को पारित न्यायनिर्णय के आलोक में वादी श्री प्रभाकर सारंगी, सेवानिवृत कोषरक्षक-सह-चौकीदार, लघु सिंचाई प्रमंडल, गुमला एवं 24 अन्य के नियमित सेवा के रूप में की गई सेवा में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत अवधि को जोड़कर पेंशनादि की स्वीकृति दी गई।

राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, पलामू के अंतर्गत GEC Palamu Innovation and Incubation Centre Foundation की स्थापना करने, उक्त Foundation अन्तर्गत 04 Centre of Excellences (CoEs) का संचालन करने तथा उक्त हेतु कुल पाँच (05) वर्षों में कुल रूपये 22,97,31,238/-(बाईस करोड़ सत्तानवे लाख इकतीस हजार दो सौ अड़तीस रुपये) मात्र के अनुमानित व्यय की स्वीकृति दी गई।

L.P.A. No.-346/2017 The State of Jharkhand Vs Ram Bali Das & Ors. एवं L.P.A. No.-509/2017 The State of Jharkhand Vs Maini Devi में माननीय झारखण्ड उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक-12.01.2023 को पारित Common न्यायादेश के अनुपालन एवं विद्वान महाधिवक्ता से प्राप्त मंतव्य के आलोक में श्री रामबली दास, श्री उपेन्द्र शर्मा एवं श्रीमती मैनी देवी झारखण्ड सरकार के अधीनस्थ अनियमित रूप से नियुक्त एवं कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की सेवा नियमितीकरण की स्वीकृति दी गई।

झारखण्ड राज्य एवं अन्य बनाम प्रदीप कुमार में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 14.11.2025 को पारित न्यायादेश के अनुपालन में श्री प्रदीप कुमार, सेवानिवृत भा०व०से० पदाधिकारी (झा०-82) को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF) के वेतनमान (पे मैट्रिक्स लेवल-17) में पेंशन एवं परिणामी लाभों के निर्धारण की स्वीकृति दी गई।

झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली-2026 की घटनोत्तर स्वीकृति दी गई।

झारखंड राज्य के गढ़वा जिला अंतर्गत "श्री बंशीधर नगर" अनुमंडल के नाम में आंशिक संशोधन करते हुए "श्री बंशीधर नगर उंटारी" के रूप में प्रतिस्थापित किए जाने की स्वीकृति दी गई।

राज्य में AI Innovation एवं Adoption को गति प्रदान करने के लिए Google LLC के साथ MoU करने की स्वीकृति दी गई।

विभागीय अधिसूचना सं०-3842/रा०, दिनांक-24.11.2023 में प्रथम संशोधन की स्वीकृति दी गई।

झारखण्ड राज्य के अनुसूचित जनजाति के अधिकतम 20, अनुसूचित जाति के अधिकतम 10, पिछड़ा वर्ग के अधिकतम 14 एवं अल्पसंख्यक के अधिकतम 06 कुल अधिकतम 50 (पचास) प्रतिभावान छात्र/छात्राओं को चयनित कर प्रत्येक वर्ष विदेश में स्थित चयनित अग्रणी विश्वविद्यालयों/संस्थानों के चयनित कोर्स (Course) में उच्च स्तरीय शिक्षा यथा 01 (एक) वर्षीय मास्टर्स (Masters) हेतु छात्रवृति सहायता प्रदान करने की स्वीकृति दी गई।*

हेमन्त कैबिनेट का बड़ा फैसला: आपदा में अनुग्रह राशि बढ़ी, प्रक्रिया होगी सरल

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में आज झारखंड मंत्रालय में झारखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में कई मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय किस प्रकार हैं : -

अदर डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोग्राम (ODMP) योजना अंतर्गत जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार के अधीन कार्यरत क्षमता संवर्धन पदाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी की सेवा अवधि विस्तार को संपुष्टि प्रदान की गई एवं वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु सेवा अवधि का विस्तार किए जाने की स्वीकृति दी गई।

विभिन्न प्रकार के चिन्हित विशिष्ट स्थानीय आपदा में मृत व्यक्तियों के आश्रितों को प्रदान किए जाने वाले अनुग्रह अनुदान की प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु सहमति दी गई, इस निमित्त मृतक के आश्रितों को उनके गृह जिला के उपायुक्त द्वारा घटना का सत्यापन प्राप्त कर अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी।

अनुग्रह अनुदान की राशि के दोहरे भुगतान को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सत्यापन कार्य अनिवार्य किए जाने पर सहमति दी गई, साथ ही यह निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार अथवा भारत सरकार की योजनाओं के अंतर्गत बीमित व्यक्ति या तो आपदा प्रबंधन अंतर्गत अनुग्रह अनुदान की राशि अथवा भारत सरकार/राज्य सरकार द्वारा आच्छादित बीमा की राशि में से एक प्राप्त कर सकेंगे।

सड़क दुर्घटना के अनुग्रह राशि बढ़ाने के संबंध में निर्णय : - विशिष्ट स्थानीय आपदा अंतर्गत चिन्हित अन्य आपदा अंतर्गत मृत व्यक्ति के आश्रितों के समरूप सड़क दुर्घटना में मृतक व्यक्ति के आश्रित को भी 4 लाख रुपए दिए जाने का निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि पूर्व में यह राशि मात्र एक लाख रुपए थी।

युवा आपदा मित्र स्कीम जो दुमका गोड्डा, पाकुड़ एवं साहिबगंज जिले में कार्यान्वित किया जा रहा है। इस स्कीम से जुड़े स्वयंसेवकों का डेटाबेस तैयार करने और उसे इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (ERSS) से सम्बध करने का निर्णय लिया गया जिससे की आवश्यकता के समय आसानी से युवा आपदा मित्रों की सेवा ली जा सकेगी। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने SOP बनाने एवं कार्य लेने के दौरान उन्हें कुछ भत्ता प्रदान करने का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया।

राज्य में पानी में डूबने से होने वाली मृत्यु की संख्या को ध्यान में रखकर संप्रति-48, गोताखोरों को चिन्हित कर प्रशिक्षण दिलाने के प्रस्ताव पर घटनोत्तर स्वीकृति दी गई। बैठक में मुख्यमंत्री ने गोताखोरों की संख्या को बढ़ाने पर बल देते हुए पुलिस जवान/गृहरक्षकों को सम्मिलित किए जाने के साथ-साथ महिलाओं को भी शामिल किए जाने को लेकर कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया।

बैठक में राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ० इरफान अंसारी, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह, सचिव श्री प्रशांत कुमार, सचिव श्रीमती विप्रा भाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।*

CM हेमन्त सोरेन ने राष्ट्रीय विजेता छात्रों को दी बधाई

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मुंबई में आयोजित नेशनल वर्ड पावर चैंपियनशिप 2025-26 में झारखण्ड के स्टूडेंट्स (कक्षा 2 से 5) के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा यह अत्यंत गर्व का विषय है कि झारखण्ड के नन्हें स्टूडेंट्स ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर राज्य को गौरवान्वित किया है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से निकलकर मुंबई में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना और वहां अपनी योग्यता साबित करना राज्य में शिक्षा की मजबूत नींव को दर्शाता है। मैं इस उपलब्धि के लिए सभी सफल छात्र-छात्राओं को अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

साथ ही मैं उन समर्पित शिक्षकों और अभिभावकों की भी सराहना करता हूं, जिनके मार्गदर्शन और सहयोग से यह सफलता संभव हुई है। झारखण्ड सरकार बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने और हमारे बच्चों को वैश्विक स्तर के अवसर प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुझे विश्वास है कि ये बच्चे भविष्य में और भी ऊंचाइयों को छुएंगे और पूरे राज्य के लिए प्रेरणा बनेंगे।

बच्चों ने अंग्रेजी दक्षता का लोहा मनवाया

झारखण्ड के बच्चों ने राज्य स्तरीय फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (FLN) चैंपियनशिप जीतने के बाद 22 अप्रैल 2026 को मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया और अपनी अंग्रेजी दक्षता का लोहा मनवाया।

झारखण्ड शिक्षा परियोजना परिषद और राज्य के इंग्लिश लिटरेसी पार्टनर LeapForWord के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्राथमिक स्तर कक्षा 2 से 5 के बच्चों में बुनियादी शिक्षा को सुदृढ़ करना है।

सरकारी स्कूलों की बदलती तस्वीर

राज्य के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय रैंकिंग हासिल कर यह सिद्ध कर दिया है कि यदि उन्हें सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलें, तो वे किसी भी वैश्विक चुनौती का सामना कर सकते हैं। सरकार के निरंतर प्रयासों से राज्य के दूरस्थ जिलों के बच्चों को भी अब राष्ट्रीय स्तर का मंच मिल रहा है, जो उनके समग्र विकास और आत्मविश्वास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने एयर एम्बुलेंस हादसे के मृतकों के परिजनों से की मुलाकात, सरकारी मदद का दिया भरोसा

हेमन्त सोरेन से आज झारखंड मंत्रालय में एयर एम्बुलेंस क्रैश में मृत व्यक्तियों के आश्रितों ने मुलाकात की। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री को आश्रित परिजनों ने राज्य सरकार की ओर से सरकारी नौकरी एवं मुआवजा दिए जाने से संबंधित एक ज्ञापन सौंपा। मौके पर माननीय मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों की बातों को

आत्मतीयता के साथ सुना तथा परिजनों के प्रति सहानुभूति जताई। माननीय मुख्यमंत्री ने उन्हें राज्य सरकार की ओर से यथोचित मदद दिए जाने का भरोसा दिया। मौके पर राज्य सरकार के माननीय मंत्रीगण एवं एयर एंबुलेंस हादसा में मृत स्व० संजय कुमार के बड़े भाई श्री विजय कुमार, मृतक स्व० ध्रुव कुमार के पिता श्री दिनेश प्रसाद सहित अन्य परिजन उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि विगत 23 फरवरी 2026 को बर्न इंजरी के मरीज संजय कुमार को बेहतर इलाज के लिए एयर एंबुलेंस के जरिए रांची से दिल्ली ले जाया जा रहा था, इसी क्रम में चतरा पहुंचते ही एयर एंबुलेंस क्रैश हो गया था,

इस हादसे में मरीज संजय कुमार उनकी पत्नी अर्चना देवी, भांजा-ध्रुव कुमार, डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता, पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा, पायलट विवेक विकास भगत और को- पायलट स्वराजदीप सिंह का निधन हो गया था।

झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: धनबाद के 20 पुलिसकर्मियों का तबादला रद्द!


झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद जिले के 20 पुलिसकर्मियों के तबादला आदेश को रद्द कर दिया है. जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को यह समझना होगा कि तबादला एक नियमित प्रक्रिया और प्रशासनिक जरूरत हो सकता है, लेकिन इसका उपयोग किसी कर्मचारी को दंड देने के लिए ‘शॉर्टकट’ के रूप में नहीं किया जा सकता. अदालत ने पुलिस विभाग को आदेश दिया है कि इन सभी कर्मियों का योगदान उनके मूल स्थान (धनबाद) में तुरंत स्वीकार किया जाए.

सोमेश तिवारी बनाम भारत संघ मामले का दिया हवाला

अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध ‘सोमेश तिवारी बनाम भारत संघ’ मामले के कानूनी सिद्धांतों का उल्लेख किया. जस्टिस दीपक रोशन ने कहा कि यदि किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ लापरवाही के आरोप हैं, तो विभाग को उचित विभागीय जांच (Departmental Inquiry) और अनुशासनिक प्रक्रिया अपनानी चाहिए. जांच के बिना सीधे ट्रांसफर का आदेश देना और उसे ‘प्रशासनिक आवश्यकता’ का नाम देना कानूनी रूप से गलत और दुर्भावनापूर्ण है.

RTI ने खोली विभाग की पोल

सुनवाई के दौरान सूरज कुमार, अनुज कुमार सिंह, बलजीत कुमार और कौशल कुमार दुबे समेत 20 याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए बताया गया कि उन्हें 24 फरवरी को तबादला किया गया था और 11 मार्च को वर्तमान पद से मुक्त (Relieve) करने का आदेश दिया गया. विभाग ने इसे ‘प्रशासनिक जरूरत’ बताया था, लेकिन जब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी गई, तो सच्चाई कुछ और निकली. आरटीआई के दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ कि धनबाद एसएसपी ने इन पुलिसकर्मियों पर लापरवाही के आरोपों के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी. बिना किसी औपचारिक जांच या स्पष्टीकरण के किया गया यह तबादला पूरी तरह से दंडात्मक (Punitive) का था.

अधिकारियों को कड़ा संदेश

हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग दंड देने के लिए न करें. अदालत ने तबादला और पद से मुक्त करने के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ताओं को राहत दी है. इस फैसले के बाद अब पुलिस महकमे के भीतर हलचल तेज है, क्योंकि यह आदेश भविष्य में उन अधिकारियों के लिए नजीर बनेगा जो बिना प्रक्रिया पूरी किए कर्मियों को इधर-उधर भेज देते हैं.

20 दिनों से सरकार,समिति, सीआईडी और एसआईटी जांच के बीच ट्रेज़री महाघोटाले को दफनाने की साजिश- प्रतुल शाह देव*

खजाने से गायब ₹10,000 करोड़ का कनेक्शन क्या ट्रेजरी घोटाले से है,वित्त मंत्री स्पष्ट करे

सीआईडी ने खुद जांच ना कर पुलिस के आईजी के नेतृत्व में एसआईटी क्यों बनाया?

एसआईटी के लिए कोई समय सीमा का निर्धारण नहीं करना भी संदेहास्पद

रांची। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड में सामने आ रहे ट्रेजरी घोटाले को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर को स्पष्ट करना चाहिए कि खजाने से गायब ₹10,000 करोड़ आखिर कहां गए और क्या यह राशि ट्रेजरी घोटाले से जुड़ी हुई है।प्रतुल शाहदेव ने कहा कि पूरी राज्य सरकार इस गंभीर घोटाले पर पर्दा डालने में लगी हुई है। मीडिया द्वारा लगातार मामले उजागर किए जाने के बावजूद सरकार ने अपनी तरफ से कोई ठोस पहल नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ “समिति पर समिति” और "एसआईटी पर एसआईटी” बनाकर असली घोटालेबाजों को बचाने का काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि पहले वित्त विभाग के उप सचिव ज्योति झा के नेतृत्व में बनी प्रारंभिक कमेटी ने बोकारो जाकर कई गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा किया था, लेकिन सरकार ने उस रिपोर्ट को दबाने का प्रयास किया।हाल के खुलासे ने स्पष्ट किया कि बोकारो में एसपी के नाम पर 16 करोड रुपए निकाल लिए गए। इसके बाद 17 अप्रैल को उत्पाद सचिव के नेतृत्व में दूसरी कमेटी बनाकर मामले को लटकाना चाहा ताकि सच्चाई सामने न आ सके। वित्त विभाग की पुरानी समिति का पूरे तरीके से इसी एसआईटी में विलय कर दिया गया ताकि वो अलग रिपोर्ट ना दे पाए।

प्रतुल शाहदेव ने यह भी आरोप लगाया कि बोकारो के एसपी को अचानक हटाया जाना और सीआईडी जांच में देरी करना इस बात का संकेत है कि सरकार मामले को भटकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह तक सीआईडी ने जांच शुरू नहीं की और जब मामला मीडिया में उछला तब कार्रवाई का दिखावा किया गया।उन्होंने कहा कि हद तो तब हो गई जब सीआईडी द्वारा झारखंड पुलिस के आईजी (मानवाधिकार ) की अध्यक्षता में एसआईटी बना दिया गया।इससे जांच सीआईडी से निकल कर झारखंड पुलिस के अधिकारी के अधीन चली गई है। यहां बड़ा प्रश्न यह है की सीआईडी ने खुद से जांच क्यों नहीं की?प्रतुल ने कहा कि जब पुलिस के एक आईजी किसी टास्क फोर्स का नेतृत्व करेंगे तो उनके अधीन टास्क फोर्स के सीआईडी के कनिष्ठ अधिकारी कितने स्वतंत्र रह पाएंगे,ये बड़ा प्रश्न है। संदेह इस से भी पुख्ता होता है की एसआईटी के किए जांच की कोई समय सीमा नहीं दी गई है। यानी सरकार पूरे मामले को ठंडा बस्ती में डालना चाहती है। प्रतुल ने कहा कि अब समय आ गया है कि सिपाही, होमगार्ड के जवान और लेखापाल के अलावा बड़े मछलियों पर भी सरकार हाथ डाले।

प्रतुल शाहदेव ने स्पष्ट कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच केवल केंद्रीय एजेंसियां ही कर सकती हैं। उन्होंने मांग की कि इस पूरे ट्रेजरी घोटाले की जांच तत्काल सीबीआई और ईडी को सौंपी जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। प्रेस वार्ता में प्रदेश सह मीडिया प्रभारी श्री अशोक बड़ाइक भी उपस्थित थे।

राँची में जनगणना 2027 की तैयारी शुरू: 16 मई से घर-घर होगी मकानों की गिनती

राँची जिला अंतर्गत भारत जनगणना 2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना की तैयारी में उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार आज दिनांक 27.04.2026 से चार्ज स्तर पर प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है।

सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को व्यावहारिक उदाहरणों, CMMS वेब पोर्टल तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना से संबंधित समस्त प्रक्रियाओं का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा रहा है

यह प्रशिक्षण दिनांक 09.05.2026 तक चलेगा।राँची जिले के कुल 19 चार्जों में आयोजित इस प्रशिक्षण में चार्ज स्तर के फील्ड ट्रेनरों द्वारा सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को व्यावहारिक उदाहरणों, CMMS वेब पोर्टल तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना से संबंधित समस्त प्रक्रियाओं का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में स्व-जनगणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया, जनगणना 2027 के विभिन्न चरणों, कार्यप्रणाली, डिजिटल उपकरणों के उपयोग तथा CMMS वेब पोर्टल पर डेटा प्रबंधन के महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है।प्रशिक्षण कार्यक्रम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राँची जिले के सभी प्रखंडों के चार्ज/नोडल पदाधिकारी अपने-अपने चार्ज में उपस्थित रहकर निगरानी कर रहे हैं।

मुख्य तिथियाँ:प्रशिक्षण अवधि: 27 अप्रैल 2026 से 09 मई 2026 तक

स्व-जनगणना (Self Enumeration) विकल्प: 01 मई 2026 से 15 मई 2026 तक

मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना: 16 मई 2026 से 14 जून 2026 तक

सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों से अपेक्षा है कि वे प्रशिक्षण को गंभीरता से लें और मैदान में उतरकर उच्च गुणवत्ता वाला कार्य सुनिश्चित करें

जिला प्रशासन का प्रयास है कि जनगणना 2027 का यह प्रथम चरण पूर्णतः डिजिटल, पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। प्रशिक्षित प्रगणक एवं पर्यवेक्षक क्षेत्र में जाकर प्रत्येक मकान का सूचीकरण करेंगे तथा आवासीय विवरण एकत्रित करेंगे। उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि जनगणना एक राष्ट्रीय महत्व का कार्य है। राँची जिला इसे पूरी निष्ठा और प्रोफेशनलिज्म के साथ संपन्न करेगा। सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों से अपेक्षा है कि वे प्रशिक्षण को गंभीरता से लें और मैदान में उतरकर उच्च गुणवत्ता वाला कार्य सुनिश्चित करें।

जनगणना संबंधी किसी भी जानकारी, सहायता या स्व-जनगणना पोर्टल के उपयोग के लिए नागरिक CMMS वेब पोर्टल एवं संबंधित मोबाइल ऐप का उपयोग कर सकते हैं

जनगणना संबंधी किसी भी जानकारी, सहायता या स्व-जनगणना पोर्टल के उपयोग के लिए नागरिक CMMS वेब पोर्टल एवं संबंधित मोबाइल ऐप का उपयोग कर सकते हैं। जिला जनगणना कार्यालय, राँची द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

जिला स्तर के वरीय पदाधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण की गुणता पर विशेष ध्यान रखी जा रही है। साथ ही इसका निरीक्षण भी किया जा रहा है।