कालीन उद्योग के लिए नई समस्या बन सकती है यूएस ट्रेड एक्ट की धारा 301

*16 देशों का डाटा जुटा रहा है अमेरिका, भविष्य में कारोबार करने में कालीन निर्यातकों को होगी परेशानी*

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। अमेरिका विभिन्न देशों पर व्यापारिक समझौतों की आड़ में उच्च टैरिफ दर थोपने के लिए नए-नए कारण ढूंढ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप सेक्शन 301 (अमेरिकी व्यापार एवं प्रतिनिधित्व) के अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए भारत समेत 16 देशों में व्यापारिक जांच के आदेश दिए हैं। इस आदेश के बाद से केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय कालीन उद्योग सहित अन्य मजदूर बहुलता वाले उद्योगों से डाटा मांगा है। यह डाटा अमरीका को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद टैरिफ की नई दरें लागू हो सकती है। भारतीय कालीन निर्यातकों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लोगों को अभी भी याद है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अचानक भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 5 प्रतिशत से बढ़ाकर पहले 25 प्रतिशत और फिर रूस से तेल खरीदने से नाराज होकर टैरिफ की दर 50 प्रतिशत तक कर दिया था। कई महीने बाद टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत तो किया लेकिन अब ट्रंप ने अमरीका के ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन-301 की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। ऑल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के मानद सचिव पीयूष बरनवाल ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के साथ वर्चुअल बैठक में शामिल होने के बाद बताया कि ट्रंप प्रशासन के इस कदम के बाद वाणिज्य मंत्रालय विभिन्न उद्योगों से डाटा कलेक्शन करने में जुट गया है। डाटा अमरीकी प्रशासन को सौंपे जाने के बाद 28 अप्रैल तक धारा 301 समिति के समक्ष सुनवाई शुरू होगी। यदि सेक्शन 301 समिति चाहेगी तो टैरिफ की दर बढ़ा सकती है। इतना ही नहीं ऐसे समय जब इरान-इस्राइल युद्ध चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्थिति दयनीय हो चुकी है। ऐसे में अधिनियम 301 भारतीय कालीन उद्योग के लिए नई मुसीबत खड़ी कर सकती है।
क्या है यूएस व्यापार अधिनियम की धारा 301
एकमा के मानद सचिव पीयूष बरनवाल ने बताया कि अमेरिका के व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 में उन्हें विदेशी व्यापार प्रथाओं की जांच करने और उनके कार्रवाई करने का अधिकार देती है। इस अधिनियम के तहत अमेरिका ने भारत सहित 16 देशों से डाटा की मांग की है। इस अधिनियम के तहत अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि मजदूरों के अनुरूप वातावरण में काम कर रहे हैं या नहीं। बंधुआ मजदूरी तो नहीं कराई जा रही है। मजदूरों की क्षमता से अधिक काम तो नहीं लिया जा रहा है। जांच में कपड़ा, इस्पात, एल्युमीनियम, ऑटोमोबाइल, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, मशीनरी व सोलर उद्योग शामिल हैं।
भदोही में ‘ड्रीमलैंड मेला’ बना आकर्षण का केंद्र, पहली बार भव्य स्तर पर आयोजन
नितेश श्रीवास्तव

भदोही। जिले में पहली बार आयोजित किया गया ड्रीमलैंड मेला इन दिनों लोगों के बीच आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है। रंग-बिरंगी रोशनी, आधुनिक झूले, थीम आधारित सजावट और मनोरंजन के विविध साधनों ने इस मेले को खास बना दिया है। हर उम्र के लोग यहां पहुंचकर आनंद ले रहे हैं और इसे भदोही के लिए एक नया अनुभव माना जा रहा है।
मेले को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में प्रयागराज ड्रीम लैंड अम्यूज़मेंट के अधिकारियों ने विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान मेले के प्रमुख आयोजकों में कृष्ण दास (लेखा प्रबंधक), तरुण शुक्ला और अशरफ अली उर्फ विक्की मौजूद रहे। आयोजकों ने बताया कि भदोही में इस तरह का भव्य और आधुनिक मेला पहली बार आयोजित किया गया है, जिसके लिए लंबे समय से तैयारी की जा रही थी।
कृष्णा दास ने बताया कि मेले को आकर्षक और यादगार बनाने के लिए विशेष रूप से सजावट पर ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि यहां आने वाले लोगों को एक अलग ही अनुभव देने की कोशिश की गई है, ताकि परिवार के साथ लोग यहां पूरा समय बिताकर मनोरंजन कर सकें।
मेले की सबसे बड़ी खासियत इसके आधुनिक और रोमांचक झूले हैं। इसमें शिमला थीम, जलपरी (मरमेड), सुनामी झूला और गगनचुंबी टावर झूले प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं। खास बात यह है कि ऐसे कई झूले और थीम पहली बार भदोही में देखने को मिल रहे हैं, जिससे लोगों में खास उत्साह देखा जा रहा है।
बच्चों के लिए भी मेले में विशेष इंतजाम किए गए हैं। छोटे-छोटे झूले, हेलीकॉप्टर राइड, वाटर बोट जैसी मनोरंजक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे बच्चे भी भरपूर आनंद उठा सकें। वहीं, युवाओं और बड़े लोगों के लिए एडवेंचर और हाई-राइड झूले खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
मेले में केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि शॉपिंग का भी खास इंतजाम किया गया है। एक बड़े बाजार के रूप में यहां विभिन्न प्रकार की दुकानें लगाई गई हैं, जहां लोग अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं। इसके साथ ही खाने-पीने के शौकीनों के लिए चटपटे व्यंजनों की भरपूर व्यवस्था की गई है, जिससे मेले का आनंद और भी बढ़ जाता है।
सुरक्षा को लेकर आयोजकों ने विशेष सतर्कता बरती है। पूरे मेले में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, फायर सेफ्टी के सभी आवश्यक उपकरण मौजूद हैं और सुरक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में गार्ड तैनात किए गए हैं। आयोजकों का कहना है कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, ताकि कोई भी व्यक्ति बिना किसी चिंता के मेले का आनंद ले सके।
मेले में प्रवेश शुल्क मात्र ₹40 निर्धारित किया गया है, जबकि दिव्यांगजनों के लिए विशेष छूट की व्यवस्था की गई है। अंदर विभिन्न झूलों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित हैं।
लोकेशन की दृष्टि से भी मेला बेहद सुगम स्थान पर आयोजित किया गया है। इसके दो मुख्य प्रवेश द्वार बनाए गए हैं—एक ज्ञानपुर रोड पर रीजेंसी होटल के पास, जहां से मेला आसानी से दिखाई देता है, जबकि दूसरा औराई रोड पर फ्लाईओवर व एस्सार पेट्रोल पंप के सामने स्थित है। दोनों ओर से लोगों के आने-जाने की समुचित व्यवस्था की गई है।
वाहनों की पार्किंग के लिए भी पर्याप्त स्थान रखा गया है। साइकिल और अन्य वाहनों के लिए अलग-अलग स्टैंड बनाए गए हैं, जिससे मेले में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आयोजकों ने बताया कि मेला काफी बड़े स्तर पर लगाया गया है, जिसके कारण इसकी तैयारी में समय लगा, लेकिन अब यह पूरी तरह तैयार है और लोगों के स्वागत के लिए खुल चुका है।
अंत में आयोजकों ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने परिवार और बच्चों के साथ इस भव्य मेले में अवश्य आएं और मनोरंजन, शॉपिंग व स्वाद के इस अनूठे संगम का आनंद लें। भदोही में पहली बार आयोजित यह ड्रीमलैंड मेला निश्चित ही शहर के लोगों के लिए यादगार साबित हो रहा है।
डीएम ने पाली में गेहूं फसल की क्रॉप कटिंग की: उत्पादन का वैज्ञानिक आकलन कर उत्पादकता परखी


रिपोर्टर - नितेश श्रीवास्तव


भदोही। जनपद भदोही में रबी फसलों के वास्तविक उत्पादन का आकलन करने के लिए क्रॉप कटिंग प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने ज्ञानपुर तहसील के ग्राम पाली में गेहूं की फसल की क्रॉप कटिंग कराई।
जिलाधिकारी ने किसान श्रीमती पान देवी और शीतला प्रसाद के खेतों में 43.3 वर्ग मीटर निर्धारित क्षेत्रफल में गेहूं की कटाई कराई। थ्रेसिंग के बाद क्रमशः 18.02 किलोग्राम और 14.71 किलोग्राम गेहूं प्राप्त हुआ। इसके आधार पर औसत उत्पादन लगभग 38 कुंतल प्रति हेक्टेयर आंका गया।
यह क्रॉप कटिंग प्रयोग भारत सरकार द्वारा विकसित सी.सी.ई. (CCE) एग्री ऐप के माध्यम से ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया गया। इसका उद्देश्य आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित करना था।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने उपस्थित किसानों से संवाद किया। उन्होंने कृषि और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी और किसानों को इनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पाली-सुरियावां मार्ग पर नई सड़क की साइड पटरी के कार्य का भी संज्ञान लिया। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए कि साइड पटरी का कार्य शीघ्र पूरा किया जाए और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।
इस दौरान उपजिलाधिकारी ज्ञानपुर भान सिंह, तहसीलदार अजय सिंह, जिला कृषि अधिकारी सुश्री इरम कुमारी, अपर सांख्यिकी अधिकारी रवि प्रकाश, फसल बीमा प्रतिनिधि धर्मेन्द्र कुमार, राजस्व निरीक्षक अनिल कुमार तिवारी, लेखपाल श्री चंद्रभान सिंह और ग्राम प्रधान सहित अन्य किसान उपस्थित रहे।
17 जातियों को अनुसूचित में शामिल करने की मांग
*भाजपा सांसद डॉ विनोद कुमार बिंद ने लोकसभा में रखी मांग, तीन प्रदेशों में ये जातियां ओबीसी में है शामिल*


रिपोर्टर - नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भदोही के भाजपा सांसद डॉ. विनोद कुमार बिंद ने लोकसभा में 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में सम्मिलित करने की मांग की। कहा कि कई प्रदेशों यह 17 अति पिछड़ी जाति अनुसूचित जाति में हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में इन जातियों को ओबीसी में रखा गया है। उन्होंने बिंद, केवट, मल्लाह, विश्वकर्मा, प्रजापति, राजभर समेत 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग की।
सांसद डॉ. विनोद बिंद ने कहा कि निषाद, केवट, मल्लाह, कश्यप धीमर, प्रजापति, राजभर, विश्वकर्मा सहित 17 अति पिछड़ी जातियां हैं। जिनको अनुसूचित जाति में शामिल करना आवश्यक है, क्योंकि यह मुद्दा इन जातियों के सम्मान, अधिकार और उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है। कहा कि जब एक ही समाज एक ही जीवन शैली है तो अधिकार अलग-अलग क्यों है। यह सभी जातियां कई प्रदेशों में अनुसूचित जातियों में है, यहां तक की दिल्ली में भी अनुसूचित जातियों में इनको शामिल किया गया है, लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में ओबीसी में रखा गया है। मांग करते हुए कहा कि जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक विशेष आरक्षण और योजनाओं का प्रावधान इन जातियों के लोगों के लिए किया जाए। सांसद डॉ. विनोद कुमार बिंद ने कहा कि यह महत्वपूर्ण विषय था। जिसको लोकसभा में प्रमुखता से उठाया गया है, क्योंकि यह 17 जातियों के सम्मान अधिकार और उनके भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
कीमत घटे या बढ़े क्या मतलब, जब वाणिज्यिक सिलिंडर मिल ही नहीं रहे

रिपोर्टर - नितेश श्रीवास्तव


भदोही। ईरान-इस्राइल युद्ध के बीच देश में उपजे ईंधन संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच सरकार ने एक महीने के अंदर वाणिज्यिक सिलिंडरों की कीमत 310 रुपये तक बढ़ा दी है। वहीं, घरेलू सिलिंडर की कीमतों में भी 60 रुपये की वृद्धि हुई है। भदोही के रेस्त्रां संचालकों का कहना है कि कीमत घटे या बढ़े क्या मतलब है। जब वाणिज्यिक सिलिंडर की आपूर्ति ही नहीं हो रही है। पिछले दिनों गैस एजेंसियों के गोदामों के बाहर लंबी कतार देखकर सरकार ने वाणिज्यिक सिलिंडरों की आपूर्ति पर रोक लगा दी थी। भदोही में ढाबा चलाने वाले रामू सोनकर का कहना है कि सरकार एक ओर कह रही है कि ईंधन की किल्लत नहीं है। फिर वाणिज्यिक सिलिंडर मिल क्यों नहीं रहा है।
बोर्ड परीक्षा : मूल्यांकन पूरा, अब परिणाम का इंतजार

*20 से 25 अप्रैल तक परिणाम जारी होने की संभावना 55 हजार विद्यार्थी हुए थे शामिल*


रिपोर्टर - नितेश श्रीवास्तव

भदोही। विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की कॉपियों का मूल्यांकन  पूरा हो गया। शिक्षा विभाग उत्तर पुस्तिकाओं को सहेजकर परिषद को भेजने की तैयारी में जुट गया है। अब सभी की नजरें परिणाम पर टिकी हैं। अंतिम दिन इंटरमीडिएट की शेष 200 काॉपियां डेढ़ घंटे में जांची गईं। फरवरी में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा संपन्न होने के बाद विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज को मूल्यांकन केंद्र बनाया गया। 18 मार्च से बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन शुरू हुआ। परिषद की ओर से इस केंद्र पर हाईस्कूल की एक लाख 37 हजार व इंटरमीडिएट की 67 हजार उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराने का लक्ष्य रखा गया था। 750 परीक्षकों ने 15 दिनों तक मेहनत करके कॉपियां जांच की। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का मूल्यांकन पूरा हो गया। उप नियंत्रक मूल्यांकन प्रधानाचार्य आलोक तिवारी ने बताया कि हाईस्कूल की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा हो चुका है। अंतिम दिन इंटरमीडिएट की 200 कॉपियां जांची गईं। परिषद से पत्र आने पर ही कापियों को भेजा जाएगा। इस बार जिले में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में 55 हजार छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। मूल्यांकन खत्म होने के बाद अब विद्यार्थियों की नजर परिणाम पर टिकी है। 2025 की तरह 20 अप्रैल के बाद परिणाम आने की संभावना जताई जा रही है।
निर्यातकों को एजीएम तक देनी होगी बढ़ी सदस्यता शुल्क

*एजीएम में करेंगे सदस्यता शुल्क पर पुनर्विचार,तब तक बढ़ा शुल्क ही लगेगा: चेयरमैन*


रिपोर्टर - नितेश श्रीवास्तव

भदोही। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) की बढ़ी सदस्यता शुल्क फिलहाल कम होने के आसार नहीं हैं। बीते दिनों सीईपीसी बोर्ड की बैठक में शुल्क कम करने पर सहमति तो बन गई थी, लेकिन यह तभी संभव होगा, जब वार्षिक साधारण सभा (एजीएम) में यह पारित हो जाए। अभी एजीएम होने में काफी समय है। सीईपीसी ने जनवरी 2025 के एजीएम में सदस्यता शुल्क में करीब 300 फीसदी की बढ़ोत्तरी कर दी थी। जिसे जून 2025 से लागू किया जा चुका है। पहले सदस्यता शुल्क के चार अलग-अलग कैटेगरी निर्धारित थे।इसमें सलाना 50 लाख तक का कारोबार करने वाले निर्यातकों के लिए दो हजार, 50 लाख से एक करोड़ तक तीन हजार, एक करोड़ से 10 करोड़ तक के कारोबारियों को पांच हजार तथा 10 करोड़ से अधिक सलाना व्यवसाय करने वाले निर्यातकों को 10 हजार रुपये शुल्क देना होता था।बीते साल जून से दरों में लगभग 300 प्रतिशत बढ़ोत्तरी करते हुए सभी निर्यातकों के एक स्लैब बनाकर शुल्क छह हजार रुपये कर दिया गया।
बीते दिनों आम निर्यातकों की ओर से शुल्क बढ़ोत्तरी पर सवाल उठाए जाने पर सीईपीसी प्रशासनिक सदस्य संजय गुप्ता ने बोर्ड की बैठक में दरों की समीक्षा किए जाने की मांग की थी।
इसमें दरों पर पुनर्विचार करने पर सहमती तो बन गई थी और कहा गया था कि इसे आगामी एजीएम में रखा जाएगा, लेकिन एजीएम में अभी महीनों का समय है और जब तक एजीएम की बैठक नहीं होती तब तक दरों पर पुनर्विचार संभव नहीं है।

छोटे उद्यमियों के हितों को ध्यान रखते हुए आगामी एजीएम में बढ़ी सदस्यता शुल्क पर पुनर्विचार किया जाएगा, लेकिन जब तक एजीएम नहीं हो जाता,तब तक न‌ई शुल्क संरचना यथावत लागू रहेगी।

मुकेश कुमार गोम्बर, चेयरमैन सीईपीसी
*पूर्व विधायक उदयभान सिंह सहित 8 लोग गैंगस्टर एक्ट में आरोप मुक्त*

रिपोर्टर - नितेश श्रीवास्तव

भदोही। अपर न्यायाधीश प्रथम पुष्पा सिंह की अदालत ने पूर्व बसपा विधायक उदयभान सिंह उर्फ डॉक्टर सिंह सहित आठ लोगों को गैंगस्टर एक्ट के मामले में आरोप मुक्त कर दिया। साल 2007 में तत्कालीन विधायक विजय मिश्रा के काफिले पर हमला करने के आरोप में पुलिस ने पूर्व विधायक सहित 8 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की थी। उसी मामले में बाद में गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई थी।मुख्य मुकदमे में सभी आरोपियों को कोर्ट ने साल 2015 में ही आरोप मुक्त कर दिया था। उसी को आधार बनाकर कोर्ट ने गैंगस्टर मुकदमे में भी सभी को आरोप मुक्त कर दिया। गोपीगंज कोतवाली के पड़ाव चौराहे के पास 26 मई 2007 को तत्कालीन विधायक विजय मिश्रा अपने समर्थकों के साथ चुनाव प्रचार कर रहे थे। इस बीच उनके काफिले पर अवैध असलहों के साथ कई लोगों ने हमला बोल दिया था।बताया जाता है कि उस समय तत्कालीन विधायक विजय मिश्रा सहित अन्य ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई थी। मामले में औराई विधानसभा के पूर्व बसपा विधायक उदयभान सिंह उर्फ डॉक्टर सिंह समेत आठ लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई। आरोप लगाया कि उदयभान सिंह के उकसाने पर उनके समर्थकों ने ऐसा किया है। मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद विवेचना की और कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।

इसी आधार पर पुलिस ने पूर्व विधायक सहित आठों लोगों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की थी। कोर्ट ने मूल मुकदमे में 24 जुलाई 2025 को पूर्व विधायक उदयभान सिंह समेत सभी को आरोप मुक्त कर दिया था।

उसी को आधार बनाकर अपर न्यायाधीश प्रथम पुष्पा सिंह की अदालत ने पूर्व विधायक उदयभान सिंह उर्फ डॉक्टर सिंह, संदीप उर्फ पिंटू, नरेंद्र उर्फ कक्कू, योगेंद्र शुक्ला उर्फ सानू, राजेंद्र बहादुर सिंह, शिवम भूषण उपाध्याय, रिंकू उर्फ अरविंद सिंह व प्रमोद शुक्ला को गैंगस्टर के मुकदमे में दोष मुक्त कर दिया।

*परिषदीय स्कूलों में बच्चों का बढ़ाया जाए दाखिला*

रिपोर्ट -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। प्राथमिक विद्यालय चितईपुर में बुधवार को संचारी रोग नियंत्रण व स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ डीएम शैलेश कुमार व बीएसए शिवम पांडेय ने संयुक्त रूप से की। जागरूकता वाहन को झंडी दिखाकर रवाना किया गया।इस दौरान डीएम ने कहा कि संचारी रोग से बचाव के लिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। वहीं, परिषदीय स्कूलों में बच्चों का दाखिला कराया गया। सरकारी स्कूल के शिक्षक बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें नौनिहालों का दाखिला परिषदीय विद्यालयों में कराने के प्रति प्रेरित करें। बीएसए ने कहा कि परिषदीय स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक अनुभवी और प्रशिक्षित होते हैं।ऐसे में बच्चों का दाखिला स्कूलों में बढ़ाया जाए। सरकारी विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा संग सुविधा मुहैया कराया जाए। बच्चों में शिक्षक बेहतर शिक्षा का अलख जगाएं। कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब चालीस हजार बच्चों का दाखिला कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। समस्त बीईओ को निर्देशित किया जा चुका है कि संबंधित विद्यालयों में निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष बच्चों का दाखिला कराएं।

*ठप हो गया कालीन निर्यात 5,000 करोड़ का नुकसान*

खाड़ी युद्ध का कालीन उद्योग पर दीर्घकालिक प्रभाव, समुद्री मार्ग बंद

रिपोर्टर - नितेश श्रीवास्तव

भदोही। कालीन उद्योग पिछले क‌ई वर्षों से लगातार संकट घिरा है। अमेरिकी टैरिफ के चलते जहां 60 प्रतिशत कालीन कारोबार प्रभावित हुआ वहीं खाड़ी युद्ध ने महासंकट उत्पन्न कर दिया है। एक माह में कालीन उद्योग का पांच हजार रुपए करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है। तीन हजार करोड़ रुपए के माल जहां डंप हो ग‌ए है तो दो हजार करोड़ का आर्डर लटक गया है। इसके अलावा अप्रैल में होने वाला अंतराष्ट्रीय कालीन मेला भी खाड़ी युद्ध की भेंट चढ़ चुका है। युद्ध समाप्त होने के बाद भी वैश्विक स्थिरता आने में समय लगेगा यही कारण है कि कालीन उद्योग से जुड़े लाखों, बुनकर, मजदूरों के सामने भी रोजगार संकट आ गया है। फरवरी में शुरू युद्ध शुरू हुआ था। देखा गया तो एक माह होने का है। होर्मुज जलडमरु मध्य से आवागमन ठप हो गया है तो कंटेनर का अभाव, माल भाड़े में वृद्धि के चलते निर्यातक माल होल्ड करने के लिए विवश हैं।