चंदौसी में ‘फेस्टिव फिएस्टा’ एग्जीबिशन का भव्य आयोजन, महिला सशक्तिकरण को मिला नया मंच

संभल, चंदौसी। रोटरी क्लब चंदौसी रॉयल्स द्वारा आज चंदौसी के संजीवनी पैलेस में “फेस्टिव फिएस्टा” नाम से एक भव्य एग्जीबिशन का आयोजन किया गया। इस आकर्षक प्रदर्शनी में शहर एवं आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने भारी उत्साह के साथ भाग लिया और हजारों की संख्या में पहुंचकर खरीदारी का आनंद लिया।

इस एग्जीबिशन में ज्वेलरी, ट्रेंडिंग क्लॉथ्स, पार्टी वियर आइटम, मसाले, ड्राई फ्रूट्स, होम डेकोर, किचन एसेसरीज, लेडीज सूट, आर्टिफिशियल ज्वेलरी सहित अनेक प्रकार के स्टॉल लगाए गए। खास बात यह रही कि इन सभी स्टॉल्स का संचालन महिलाओं द्वारा किया गया, जो अपने घरों से कार्य करती हैं। इस पहल के माध्यम से उन्हें अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और व्यापक पहचान बनाने का सशक्त मंच प्राप्त हुआ।

इस प्रदर्शनी में चंदौसी के अलावा बरेली, हल्द्वानी, रुद्रपुर, मेरठ एवं मुरादाबाद जैसे विभिन्न शहरों से भी प्रतिभागियों ने आकर अपने स्टॉल लगाए, जिससे कार्यक्रम का दायरा और भी विस्तृत हो गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ डिप्टी कलेक्टर श्रीमती वंदना मिश्रा ज़ी , चंदौसी नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती लता वार्ष्णेय ज़ी , रोटरी अंतरराष्ट्रीय मंडल 3100 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रोटेरियन CA नितिन अग्रवाल ज़ी , आगामी गवर्नर काव्य सौरभ रस्तोगी ने फीता काटकर किया। इस अवसर क्लब  सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

क्लब अध्यक्ष रोटेरियन वन्दना अग्रवाल, क्लब सचिव रोटेरियन शिल्पी अग्रवाल, कार्यक्रम अध्यक्ष अपूर्व अग्रवाल एवं नैना अग्रवाल, पब्लिक इमेज चेयर रो. राहुल अग्रवाल, असिस्टेंट गवर्नर निखिल अग्रवाल सहित क्लब के अनेक सदस्यों—रो. सौरभ अग्रवाल, आदित्य वार्ष्णेय, विक्रम वार्ष्णेय , मोहित गुप्ता, निमित वार्ष्णेय, शोभित अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, शशांक अग्रवाल, पराग अग्रवाल, सुनीत, आकांशा भार्गव, तनीषा अग्रवाल, सुप्रिया अग्रवाल, प्रियंका वार्ष्णेय, रितु वार्ष्णेय, ज्योति गुप्ता, महिमा अग्रवाल, प्रियंका चौधरी, नैन्सी अग्रवाल, निष्ठा अग्रवाल, शिखा अग्रवाल, निकिता अग्रवाल, वाणी अग्रवाल की सक्रिय उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया।

रोटरी क्लब चंदौसी रॉयल्स का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सेवा एवं महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। “फेस्टिव फिएस्टा” इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपने हुनर को पहचान दिलाने का अवसर मिला।

क्लब द्वारा भविष्य में भी इसी प्रकार की सामाजिक एवं सशक्तिकरण से जुड़ी पहलें निरंतर आयोजित की जाती रहेंगी।
संभल और बरेली के आईपीएस अधिकारियों की सगाई, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

संभल। जिले के एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई और बरेली की एएसपी अंशिका वर्मा की सगाई गुरुवार को संपन्न हुई। कार्यक्रम में दोनों परिवार, पुलिस-प्रशासन के अधिकारी और आमंत्रित अतिथि शामिल हुए। समारोह संभल के बबराला स्थित यारा फर्टिलाइजर परिसर में आयोजित किया गया और दिनभर की तैयारियों के बाद देर रात तक चला।

इस आईपीएस जोड़ी की शादी से जुड़े अगले कार्यक्रम राजस्थान में होंगे। 27 मार्च को बाड़मेर में हल्दी और संगीत की रस्में, 29 मार्च को विवाह और 30 मार्च को जोधपुर में रिसेप्शन आयोजित किया जाएगा। रिसेप्शन में कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की संभावना है।

सगाई के बाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कृष्ण कुमार विश्नोई काले चश्मे में डांस करते नजर आ रहे हैं। इससे पहले शादी का निमंत्रण पत्र भी चर्चा का विषय बना। आयोजन की भव्यता और पुलिस-प्रशासनिक क्षेत्र की मौजूदगी ने इसे खास बना दिया है।
Sambhal गरिमा के साथ बुढ़ापा” का संदेश: सम्भल में बुजुर्गों की देखभाल पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन
सम्भल में बुजुर्गों के सम्मानजनक जीवन और उनकी बेहतर देखभाल को लेकर एक अहम दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें “गरिमा और देखभाल के लिए शिक्षा” विषय पर गहन चर्चा हुई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को बढ़ावा देना रहा।

मुख्य अतिथि तान्या सेन गुप्ता, रिसर्च ऑफिसर, राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान ने कहा कि बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन देना हमारे अपने हाथ में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, तभी समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है। उनका मानना है कि शुरुआत परिवार से होनी चाहिए, जिससे यह संदेश पूरे समाज में फैल सके। उन्होंने यह भी बताया कि सम्मेलन के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें प्रस्तुत शोध पत्रों और निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी। यह पहल देशभर में लगातार चलाई जा रही है क्योंकि तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी और घटती सक्रिय जनसंख्या के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
वहीं, नेहा ठाकुर ने कहा कि आज के समय में कई बुजुर्गों को अकेला छोड़ दिया जाता है या वृद्धाश्रम भेज दिया जाता है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को स्कूल स्तर से ही बुजुर्गों के सम्मान और देखभाल की शिक्षा दी जानी चाहिए, ताकि पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी को कम किया जा सके। सम्मेलन में सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारी, शिक्षाविद और शोधार्थी शामिल हुए, जिन्होंने बुजुर्गों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बुजुर्गों को “एजिंग इन प्लेस” यानी अपने ही घर में, अपने परिवार के बीच सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए। इस आयोजन ने एक स्पष्ट संदेश दिया कि बुजुर्गों की सेवा और सम्मान केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का कर्तव्य है। अगर समाज का हर वर्ग अपनी भूमिका निभाए, तो वरिष्ठ नागरिकों का जीवन अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल बन सकता है।
फितरा किसे नहीं दिया जा सकता : मौलाना फैज़ान अशरफ


सम्भल , सदक़ा फ़ितर हर उस आज़ाद मुसलमान पर ज़रूरी है जो साहिहे निसाब  हो,मतलब उसके पास अपने कर्ज़ और बुनियादी ज़रूरतों (घर, कपड़े, रोज़मर्रा की ज़रूरतें, गाड़ियाँ, वगैरह) के अलावा इतना पैसा या सामान हो कि उसकी कीमत साढ़े बावन तोला चाँदी (लगभग ज़कात का निसाब) या उससे ज़्यादा हो। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि यह पैसा कमर्शियल है या नॉन-कमर्शियल, और इस पर एक साल बीत चुका है या नहीं।

यह समझदार बालिग होने की शर्त नहीं है - यहाँ तक कि नाबालिग, पागल लोग, या बच्चे जो साहिबे निसाब हैं, उन पर भी यह ज़रूरी है (उनके वालिदैन को उनके पैसे से पेमेंट करना चाहिए)।

मर्द, औरत, जवान, बूढ़े, आज़ाद, और गुलाम (इब्न उमर की हदीस में साफ़-साफ़ कहा गया है)।

घर का मुखिया (मर्द) आम तौर पर अपनी तरफ़ से, अपनी बीवी की तरफ़ से, और नाबालिग बच्चों की तरफ़ से अदा करता है। अगर बड़े बच्चे अमीर हैं, तो उनका फितरा उन पर या उनकी इजाज़त से दिया जा सकता है।
एक अमीर औरत के लिए अपनी ज़कात अल-फितर देना ज़रूरी है। यह उसके शोहर या वालिद के लिए ज़रूरी नहीं है, लेकिन अगर वह इसे दे तो यह जायज़ है।
अगर किसी के पास निसाब नहीं है, तो उस पर फितरा ज़रूरी नहीं है।
फितरा कब देना चाहिए?
फितरा का समय: ईद-उल-फितर के दिन सुबह होते ही (सुबह होने का समय) यह ज़रूरी हो जाता है।
ईद की नमाज़ से पहले इसे देना सुन्नत और मुस्तहब है। अगर इसे ईद की नमाज़ से पहले अदा किया जाए तो यह कुबूल ज़कात है और अगर इसे बाद में अदा किया जाए तो इसे आम ज़कात माना जाता है ( हज़रत इब्न अब्बास  की हदीस)।
अगर इसे रमज़ान में ईद से पहले अदा किया जाए तो यह जाइज़ और बेहतर है (गरीबों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए)। कुछ उलामा के मुताबिक यह रमज़ान से पहले भी जाइज़ है, लेकिन इसे रमज़ान के दौरान अदा करना बेहतर है।
अगर इसे अदा नहीं किया जाता है, तो यह जिन्दगी भर अनिवार्य रहेगा, इसे माफ़ नहीं किया जाएगा (यह कज़ा नहीं, बल्कि अदा है)।
फ़ित्रा किसे देना चाहिए?
सदक़ा-फ़ित्र का मकसद ज़कात जैसा ही है, यानी कुरान पाक की आयत का मकसद (सूरह अत-तौबा: 60):
इसे गरीब और ज़रूरतमंद मुसलमानों को देना बेहतर और सही है।

जिनके पास ज़कात की रकम (ज़रूरत से ज़्यादा) नहीं है ज़िंदगी की ज़रूरतों के लिए) और बनू हाशिम (सैय्यद, अब्बासिद, वगैरह) से नहीं हैं।

कुछ जानकारों के मुताबिक यह गरीब गैर-मुस्लिमों के लिए भी जायज़ है (क्योंकि यह खाने के रूप में होता है)।

इसे नहीं दिया जा सकता:
मस्जिदों, मदरसों, अस्पतालों, सड़कों, या दूसरे कंस्ट्रक्शन के कामों में।

अपने वालिदैन, बच्चों, या उन लोगों को जिनका गुज़ारा करना आप पर ज़रूरी है (जैसे आपकी बीवी, नाबालिग बच्चे)।

इसका मकसद रोज़ा रखने वाले को बेकार और गंदी बातों से दूर करना और गरीबों के साथ ईद की खुशी बांटना है।
आज की कीमत के हिसाब से सदका फित्र 65/₹ फी आदमी है
मात्रा: यह चार चीज़ों से तय होती है — गेहूं/आटा: आधा सा’ (लगभग 1.9 से 2 किलोग्राम), जौ/खजूर/किशमिश: एक सा’ (लगभग 3.8 किलोग्राम)। आजकल, ज़्यादातर लोग इन चीज़ों की कीमत (लोकल मार्केट प्राइस के हिसाब से) के बराबर कैश देते हैं।
कि कीमत को दूसरी चीज़ों (जैसे चावल) में भी देखा जाना चाहिए।
ये कानून हैं हनफ़ी फ़तवों के आधार पर। क्योंकि निसाब की कीमत अलग-अलग होती है।
अल्लाह हम सबको ज़कात व सदका फ़ित्र सही तरीके से देने और उसे कबूल करने की ताकत दे। आमीन।
Sambhal शांति और सौहार्द के साथ संपन्न हुई जुमा अलविदा की नमाज़, जनपद में कड़े सुरक्षा इंतजाम
माह-ए-रमज़ान के आख़िरी शुक्रवार को अदा की जाने वाली जुमा अलविदा की नमाज़ जनपद सम्भल में पूरी तरह शांति, सौहार्द और आपसी समन्वय के साथ संपन्न हुई। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिसके चलते सभी स्थानों पर नमाज़ सकुशल अदा की गई।

जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने जानकारी देते हुए बताया कि ईद से पहले आने वाला शुक्रवार अलविदा की नमाज़ के रूप में मनाया जाता है। जनपद के कुल 735 मस्जिदों और ईदगाहों में यह नमाज़ शांतिपूर्ण माहौल में अदा की गई। नमाज़ के दौरान मस्जिदों के वॉलंटियर्स ने भी प्रशासन का सहयोग किया, जिससे व्यवस्था बनाए रखने में काफी मदद मिली। उन्होंने बताया कि शहर सम्भल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए थे। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 19 मजिस्ट्रेट तैनात किए गए थे। इसके अलावा प्रत्येक संवेदनशील स्थल पर एसडीएम, सीओ, एडिशनल एसपी और एडीएम सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे और पूरी व्यवस्था की निगरानी करते रहे। जिलाधिकारी ने बताया कि उन्होंने स्वयं और पुलिस अधीक्षक ने शहर में लगातार गश्त कर हालात का जायजा लिया। इसके साथ ही जनपद के प्रत्येक थाना क्षेत्र में भी एक-एक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई थी, जिनकी संख्या कुल 18 रही। प्रशासन द्वारा पहले से ही शांति समिति की बैठकें आयोजित कर विभिन्न समुदायों और धर्मगुरुओं से संवाद स्थापित किया गया था, जिससे आपसी समन्वय और बेहतर बना। उन्होंने कहा कि जनपद में धारा 163 लागू है और सभी लोग प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए शांति और भाईचारे का परिचय दे रहे हैं। प्रशासन और जनता के आपसी सहयोग के चलते जुमा अलविदा की नमाज़ पूरे जिले में सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।
अलविदा माहे रमजान: नेकी, रहमत और भाईचारे का पैगाम देने का समय

संभल। रहमतों और बरकतों का पवित्र महीना रमजान अब अपने आख़िरी पड़ाव पर है और मुस्लिम समाज में “अलविदा माहे रमजान” को लेकर भावुक माहौल देखा जा रहा है। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार रमजान का महीना इबादत, नेकी और इंसानियत का पैगाम देने वाला पवित्र महीना माना जाता है।

धार्मिक जानकारों के अनुसार रमजान के दौरान रोज़ा रखने से इंसान आत्मिक शुद्धि के साथ-साथ संयम और अनुशासन का पालन करना सीखता है। इस महीने में की गई इबादत और अच्छे कामों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए मुस्लिम समुदाय इस पूरे महीने को इबादत और नेक कार्यों में बिताता है।

रमजान के समापन से पहले आने वाले जुमा-अलविदा को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में लोग मस्जिदों में नमाज अदा करते हैं और देश-दुनिया में अमन, शांति और भाईचारे की दुआ करते हैं।

समाजसेवी मोहम्मद शफी आलम ने मुस्लिम समाज से अपील की है कि जुमा-अलविदा की नमाज पूरी तरह शांतिपूर्ण और आपसी भाईचारे के साथ अदा करें। उन्होंने लोगों से कहा कि सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए अपनी-अपनी मस्जिदों में नमाज अदा करें और नमाज के बाद सीधे अपने घर लौट जाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम इंसानियत, प्रेम और एकता का संदेश देता है। इसलिए सभी लोगों को नफरत से दूर रहकर प्यार और भाईचारे का संदेश फैलाना चाहिए, ताकि समाज में शांति और सौहार्द बना रहे।
मौला अली अलैहिस्सलाम इब्ने अबू तालिब के शहादत के मौके पर इमामबारगाह पर नज़र का एहतेमाम किया


Sambhal मण्डी किशन दास सराय मे हर साल की तरह इस साल भी परंपरागत मौला अली अलैहिस्सलाम इब्ने अबू तालिब के शहादत के मौके पर इमामबारगाह पर नज़र का एहतेमाम किया गया 21 रमज़ान को इमाम अली इब्ने अबू तालिब अलैहिस्सलाम की शहादत की याद में ग़म और अकीदत का माहौल देखने को मिला। अकीदतमंदों ने नम आंखों से मौला अली की शहादत को याद किया। पूरे गांव में ग़म की फिजा छाई रही
मुलाना तनवीर हुसैन अशरफी ने  बताया कि कैसे इस्लाम के इस अज़ीम रहबर ने इंसाफ और इंसानियत के लिए अपनी पूरी जिंदगी कुर्बान कर दी।
इस मौके पर अकीदतमंदो ने मौला अली की शहादत को याद करते हुए मुल्क में अमन-चैन, इंसाफ और भाईचारे की दुआ की।
इस अवसर पर ताहिफ अली ,शमशीर अली, मुआरिफ अली, असद अली, , ग्राम प्रधान सरताज हुसैन, अरशद हुसैन मो. ज़ुबैर,तनवीर हुसैन. रशीद हुसैन. नेता शहजाद शाहिक अली, राहिल अली, मुकीम अली, भूर्रा अली, मो. आलम, शाहबाज़ अली,खालिक अली, सलमान नबी, अब्दुल माजिद, मुराद अली, ज़िया उल हक़ आदि लोग मौजूद रहे
Sambhal ओवरलोड और डग्गामार वाहनों पर प्रशासन का शिकंजा, 15 वाहनों के काटे चालान

सम्भल।सम्भल में यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए ओवरलोड वाहनों, डग्गामार गाड़ियों और सड़कों के किनारे अवैध रूप से खड़े वाहनों के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया। इस अभियान का नेतृत्व सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार और एआरटीओ अमिताभ चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से किया। कार्रवाई के दौरान कई स्थानों पर चेकिंग अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ चालान की कार्रवाई की गई।

एआरटीओ अमिताभ चतुर्वेदी ने बताया कि शहर के प्रमुख चौराहों और सड़कों पर अवैध तरीके से खड़े वाहनों के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अभियान चलाकर उन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई जो नो-पार्किंग क्षेत्र में खड़े थे या चौराहों के आसपास ट्रक और अन्य वाहन खड़े कर यातायात बाधित कर रहे थे। इस दौरान करीब 15 वाहनों के चालान काटे गए हैं और आगे भी यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। डग्गामार वाहनों के संबंध में उन्होंने बताया कि ऐसे वाहनों के खिलाफ भी लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में छह गाड़ियों को बंद कराया गया था। जो प्राइवेट टैक्सियां अवैध रूप से संचालित हो रही हैं, उन्हें बंद कराकर नियमानुसार टैक्सी के रूप में परिवर्तित कराने की प्रक्रिया कराई जा रही है। इसके अलावा ओवरलोड वाहनों पर भी प्रशासन की नजर है।

एआरटीओ ने कहा कि ओवरलोडिंग के खिलाफ मौके पर ही कार्रवाई की गई है और आगे भी ऐसे वाहनों पर सख्ती जारी रहेगी। प्रशासन के इस अभियान से वाहन चालकों में हड़कंप मचा रहा और कई चालकों को यातायात नियमों का पालन करने की चेतावनी भी दी गई।
जायंट्स ग्रुप चंदौसी वेस्ट द्वारा महिलाओं को किया गया सम्मानित

संभल । जायंट्स ग्रुप चंदौसी वेस्ट द्वारा  अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर स्टेशन रोड स्थित भार्गव भवन में  मातृशक्ति सम्मान समारोह का आयोजन  किया गया।कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि क्षेत्रीय रेलवे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की प्रिंसिपल डॉ0 अंजू सिंह, डॉक्टर प्रेम कांता,एडवोकेट रंजना शर्मा एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी चन्द्रभूषण ने सयुंक्त रूप से  दीप प्रज्वलन किया । कार्यक्रम को प्रारंभ करते हुए अध्यक्ष संगीता भार्गव ने सभी अतिथियों का अभिनंदन शाल पहनाकर किया और कहा  कि जब नारी सशक्त होगी, तभी समाज सशक्त होगा ।  उन्होंने कहा कि संपूर्ण विश्व में प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। डॉक्टर वंदना सक्सेना ने अपने संबोधन में इस दिवस का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा करना, उन्हें समान अवसर प्रदान करना तथा समाज में उनके सम्मान और गरिमा को बढ़ावा देना बताया ।
मुख्य अतिथि रेनू सिंह ने    महिला सशक्तिकरण, समान अधिकार, आत्मनिर्भरता तथा समाज में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका विषय पर  चर्चा करते हुए महिलाओं के सम्मान और उनके महत्व को रेखांकित किया । एडवोकेट डॉक्टर रंजना शर्मा ने बताया कि आधुनिकता के इस दौर में महिलाओं का स्वालंबन चमक रहा है ।  देश की सीमा सुरक्षा से लेकर विभिन्न  क्षेत्रों में महिलाएं अग्रणी रहकर अपनी भूमिका बखूबी निभा रहीं हैं  ।
कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए डॉ0 श्याम गोआनी एवं डॉ0 मोनिका ने कहा कि महिला दिवस मनाने के माध्यम से महिलाओं को समाज में अपनी विशिष्ट भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ।
प्रशासनिक निदेशिका नीरा एरन ने सभी अतिथियों का धन्यवाद देते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया । इस अवसर पर रितु गोयल, डॉ0  मोनिका बहल, सरिता अग्रवाल,  नीरू वाष्र्णेय,प्रतिभा जिंदल, अनुभा वार्ष्णेय, अंशु नागर, योजना गुप्ता, पदमा भार्गव, डॉ0 तनवी अग्रवाल, जया दीक्षित,नीलम राय, नेहा बंसल,मनीषा गुप्ता,संगीता गुप्ता, कविता बच्चन, डॉ0 विदुषी, कमलेश अग्रवाल, विनीता गुप्ता ने विशेष योगदान प्रदान कर महिला दिवस को सफल बनाया ।
संभल में मस्जिद और दरगाह अवैध घोषित, कोर्ट ने इमाम पर लगाया 7 करोड़ का जुर्माना
संभल। उत्तर प्रदेश के जनपद संभल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का एक बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय तहसीलदार काेर्ट ने जिले के पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव में सरकारी जमीन पर
बन शाही मस्जिद, मकान और दरगाह काे अवैध बताते हुए हटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही काेर्ट ने शाही जामा मस्जिद के शाही इमाम आफताब हुसैन और उनके भाई मेहताब हुसैन पर सात कराेड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव में गाटा संख्या 452 की 0.1340 हेक्टेयर (करीब दो बीघा) ग्राम समाज की भूमि पर अवैध रूप से मकान, मस्जिद और दरगाह बनाने का आरोप है। इस जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 6 करोड़ 94 लाख 19 हजार रुपए बताया गया है। साेमवार काे संभल के तहसीलदार कोर्ट ने इस भूमि को सरकारी घोषित करते हुए अवैध कब्जा कर बनाए गए मकान, मस्जिद और दरगाह हटाने का आदेश जारी किया है। वहीं कोर्ट ने शाही इमाम पर 7 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है। मामला पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव का है।

इस मामले में क्षेत्रीय लेखपाल राहुल धारीवाल ने 24 जून 2025 को अपनी आख्या पेश की थी। जिसके बाद ग्राम सभा बनाम आफताब हुसैन के नाम से केस कर नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के बाद शाही इमाम आफताब हुसैन पक्ष इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा था, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने अपील के लिए समय देते हुए आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए। 30 जून को ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

18 जुलाई को आफताब हुसैन और उनके भाई की ओर से केस खारिज करने की अपील दाखिल की गयी जबकि 7 मार्च 2026 को मामले में अंतिम बहस हुई। प्रतिवादी पक्ष ने दावा किया कि उन्हें 15 जून 1972 को भी बेदखली का नोटिस मिला था। जिसे बाद में प्रशासन ने वापस ले लिया था। उनका कहना है कि वर्तमान रिपोर्ट गलत है और निर्माण करीब 20 साल पुराना है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह निर्माण वक्फ संख्या 3037 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज है।

इस प्रकरण में तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि यह जमीन चकबंदी के दौरान पेड़ लगाने के लिए आरक्षित की गई थी। वर्ष 1972 में इसे ग्राम समाज की जमीन घोषित किया गया था। सरकार के कागज में 1359 फसली वर्ष से यह भूमि कभी भी किसी व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं रही। उन्होंने बताया कि करीब छह महीने पहले लेखपाल ने ग्राम सभा की जमीन की रिपोर्ट पेश की गई थी। जिस पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया गया है। उन्हाेंने बताया कि आरोपितों पर सर्किल रेट के आधार पर करीब 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि शाही इमाम आफताब हुसैन ने स्वयं जमीन खाली नहीं करते हैं तो प्रशासन नियमानुसार कब्जा हटाएगा और जुर्माने की राशि की भी वसूली करेगा।