कृष्ण और सुदामा की बालसखा की कथा सुना कर भक्त भाव विभोर हुए, कथा के अंतिम दिन भक्तों की रही भीड़
फर्रुखाबाद ।क्षेत्र के गांव रुनीचुरसाई में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अन्तिम दिवस पर कथाव्यास पं सुरेश चन्द्र द्विवेदी व सुनोराम दुबे असेह कन्नौज ने अपने मुखारविंद से भक्तों को अमृतमयी कथा का रसपान कराते हुए सुनाया कि भगवान कन्हैया ने रुक्मिणी, जामवंती, सत्यभामा सहित सोलह हजार एक सौ आठ विवाह का वर्णन किया, प्रसंग सुनकर भक्त भावविभोर हुए, अपने गुरुकुल के बालसखा सुदामा चरित्र का मार्मिक चित्रण वर्णन किया, कृष्ण सुदामा की निस्वार्थ मित्रता का वर्णन करते हुए कहा पत्नी सुशीला के बहुत आग्रह पर भेंट स्वरूप चावल ले गए , द्वारिकाधीशने अपने गरीब मित्र को राजसिंहासन बैठाया और सुदामा की दीन दशा पर करुणा करिके करुणानिधि बहुत रोऐ तत्पश्चात अपने गरीब मित्र को चावल की एक मुठ्ठी के बदले सुदामा की कुटिया को राजमहल में बदल दिया, आगे उन्होंने कहा कि चार वेद छः शास्त्र में बात लिखी है दोय,दुख दीन्हे दुख होत है सुख दीन्हे सुख होय और अन्त में सभी श्रद्धालुओं से खचाखच भरे पंडाल में जीवन के कल्याण हेतु कहा , संसार के जीवों पर हर दम ही दया करना, जब कोई न हो अपना सियाराम जपा करना, कथा परीक्षित विमलेश कुमार पत्नी ममता कुमारी रहे, संगीतमय कथा में ढोलक पर राजेश पैड पर पुजारी, हेमचंद्र दुबे, साधू , केशव और व्यवस्था में अरविन्द राजपूत, वीरभान सिंह, गिरन्द सिंह, माखनलाल, सूरजपसाद, हरजीत,अमित कुमार ,भगवान दास,मनोज कुमार, रामनरेश, अवधेश सिंह, राजनरायन, हरीराम , दीपक ,आशाराम , प्रभूदयाल , शोभित सहित भारी संख्या में श्रद्धालु रहे ।
2 hours and 42 min ago
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