अखिलेश यादव ने की ममता बनर्जी की तारीफ, कहा- सिर्फ दीदी ही कर सकती हैं बीजेपी का मुकाबला

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समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बंगाल दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने ममता बनर्जी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने ममता बनर्जी की बीजेपी के हमलों का मुकाबला करने का साहस दिखाने के लिए तारीफ की। अखिलेश यादव ने कहा कि केवल ममता बनर्जी ही देश में बीजेपी का सामना कर सकती हैं।

दीदी आने वाले समय में भाजपा को भी हराएंगी-अखिलेश

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। यह मुलाकात कोलकाता में राज्य सचिवालय 'नबन्ना' में हुई। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस देश में सिर्फ दीदी ही भाजपा के हमलों का डटकर मुकाबला कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी ने जांच एजेंसी ईडी (ईडी) को हरा दिया है और वह आने वाले समय में भाजपा को भी हराएंगी।

ममता बनर्जी को पूर्ण समर्थन का वादा

सपा प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की आड़ में एनआरसी लागू करने और लोगों को परेशान करने की कोशिशें हो रही हैं। अखिलेश यादव ने लोकतंत्र को बचाने के ममता बनर्जी के संघर्ष में सपा के पूर्ण समर्थन का वादा किया।

भारत ने ईयू के साथ की अब तक की सबसे बड़ी ट्रेड डील, पीएम मोदी ने कहा- मदर ऑफ ऑल डील्स

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भारत और यूरोपीय यूनियन (यूई) के लिए आज का दिन बेहद खास और ऐतिहासिक है। आज दोनों पक्षों के बीच फ्री ट्रेड डील हुई है। इसे व्यापार जगत की सबसे बड़ी संधियों में से एक माना जा रहा है। इस समझौते की अहमियत बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे "मदर ऑफ ऑल डील्स" (अब तक का सबसे ऐतिहासिक समझौता) करार दिया है। मंगलवार को पीएम मोदी ने समझौता का एलान करते हुए कहा कि यह साझेदारी दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी की मिसाल है। यह समझौता वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन को मजबूत करेगा।"

समझौते के पूरा होने की घोषणा राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में की गई, जिसकी मेजबानी प्रधानमंत्री मोदी ने की, जिसमें वॉन डेर लेयेन और कोस्टा मौजूद थे। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता से दोनों देशों के बीच संबंधों की समग्र दिशा में महत्वपूर्ण विस्तार होने की उम्मीद है क्योंकि यह विविध क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोलेगा।

ये ट्रेड डील साझा समृद्धि का ब्लूप्रिंट-पीएम मोदी

मोदी ने यूरोपीय काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मौजूदगी में इसका ऐलान किया। मोदी ने कोस्टा और वॉन डेर लेयेन के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "आज भारत ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पूरा किया है। 27 जनवरी को भारत ने 27 यूरोपीय देशों के साथ यह एफटीए साइन किया है। इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा, नए इनोवेशन पार्टनरशिप बनेंगी और वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन मजबूत होंगी। यह सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि का एक ब्लूप्रिंट है।"

डील को रणनीतिक समझौतों से भी जोड़ा

प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापार समझौते को व्यापक रणनीतिक समझौतों से भी जोड़ा, जिसमें रक्षा, सुरक्षा और गतिशीलता के लिए व्यापक ढांचा शामिल है। उन्होंने कहा, "रक्षा वह आधार है जो हमारे रिश्ते को नया आकार दे रहा है। आतंकवाद-रोधी, समुद्री और साइबर सुरक्षा सहयोग मजबूत होगा। हमारी रक्षा कंपनियां सह-उत्पादन और सह-विकास के लिए नए अवसर तलाशेंगी।"

उर्सुला वॉन ने कहा- हमने कर दिखाया

यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के बाद कहा, "प्रधानमंत्री मोदी, हमने कर दिखाया। हमने मदर ऑफ ऑल डील्स डिलीवर की है।" यूरोप भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है।

अमेरिका के साथ ट्रेड डील अटकी

दोनों पक्षों के बीच यह डील ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील पर बातचीत अटकी हुई है। माना जा रहा है कि अमेरिका को निर्यात में होने वाले नुकसान की भरपाई यूरोप से की जा सकती है।

UGC के नए नियम पर क्यों मचा है बवाल, क्या है 'इक्विटी कमेटी' और बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?

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यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने 2026 में नए नियम बनाए हैं। Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 नियम यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हैं। यूजीसी के जारी नए गाइडलाइन के खिलाफ देशभर के छात्रों और शिक्षाविदों के एक बड़े तबके में भारी रोष दिख रहा है।

UGC का नया 'इक्विटी' नियम

यूजीसी के नए नियमों के मुताबिक हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी। ये कमेटी एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतें सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी। कमेटी में एससी-एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का होना जरूरी है। कमेटी का काम कैंपस में बराबरी का माहौल बनाना और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए योजनाएं लागू करना है।

सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व का कोई प्रावधान नहीं

इसके पहले ड्राफ्ट में जातिगत भेदभाव से सुरक्षा के दायरे में केवल एससी और एसटी को रखा गया था। लेकिन अब इसमें ओबीसी को भी शामिल कर लिया गया है। जिसका विरोध हो रहा है। विवाद इस बात को लेकर है कि इस कमेटी में एससी, एसटी, ओबीसी, महिला और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधियों का होना अनिवार्य है, लेकिन सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व का कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं है। 

नए नियम के दुरुपयोग की आशंका

विरोध करने वालों का कहना है कि यह परिभाषा एकतरफा है, इसमें सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव या झूठी शिकायतों का कोई जिक्र नहीं है।सामान्य वर्ग को आशंका है कि जिस तरह से एससी-एसटी एक्ट के गलत इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट तक टिप्पणी कर चुका है, वैसे ही UGC की गाइडलाइंस का भी दुरुपयोग हो सकता है। आलोचकों का मानना है कि समता समितियां है, शायद ही निष्पक्ष रह पाएं। उन्हें जो शक्तियां दी जा रही हैं, उनका सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ इस्तेमाल हो सकता है। गलत शिकायत पर सजा का प्रावधान भी नहीं है।

क्यों लाने पड़े ये नियम?

दरअसल, रोहित वेमुला केस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए नियम-कानून बनाने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों की सुनवाई के दौरान UGC को 8 हफ्तों में नए सख्त नियम बनाने को कहा था। हैदराबाद यूनिवर्सिटी के रोहित वेमुला और मुंबई मेडिकल कॉलेज की पायल तड़वी ने कथित जातिगत उत्पीड़न के बाद सुसाइड कर लिया था। इन मामलों में उनकी माताओं ने PIL दाखिल की थी। कोर्ट ने UGC से कहा था कि 2012 के पुराने नियमों को अपडेट करें और भेदभाव रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाएं।

क्या कहते हैं जाति आधारित भेदभाव के आंकड़े?

यूजीसी ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें जातिगत भेदभाव के आंकड़े दिए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतें 2017-18 में 173 थीं, जो 2023-24 में बढ़कर 378 हो गईं यानी 5 साल में इसमें 118.4% की बढ़ोतरी हुई. ये आंकड़े UGC के अपने डेटा से हैं, जो पार्लियामेंट कमिटी और सुप्रीम कोर्ट को दिए गए। शिकायतों में 90% से ज्यादा का निपटारा हुआ, लेकिन पेंडिंग केस भी बढ़े.2019-20 में 18 से 2023-24 में 108 केस सामने आए।

भारत-EU के बीच होगा 'मदर ऑफ ऑल डील्स', पीएम मोदी और उर्सुला वॉन की अहम मुलाकात आज

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भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के सदियों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों में आज होने वाला भारत-ईयू शिखर सम्मेलन एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। दोनों पक्षों के बीच आज मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) को अंतिम रूप देंगे। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन आज 11:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हैदराबाद हाउस में मुलाकात करेंगी। इसके बाद दोपहर 1:15 बजे भारत और यूरोपीय संघ की ओर से संयुक्त प्रेस बयान जारी किया जाएगा।

इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” का नाम दिया गया है। इस समझौते से भारत के टेक्सटाइल्स, लेदर एंड फुटवियर, जेम्स एंड जूलरी, केमिकल्स और समुद्री उत्पादों जैसी चीजों पर यूरोपियन यूनियन में लगने वाले इंपोर्ट ड्यूटी में राहत मिलेगी।

भारत के सर्विस सेक्टर के लिए होगी बड़ी जीत

भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारतीय निर्यातकों की बल्‍ले-बल्‍ले हो जाएगी। फिलहाल टेक्सटाइल, चमड़ा, रत्न-आभूषण, और प्रोसेस्ड फूड जैसे उद्योगों को यूरोपीय बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। भारत-ईयू FTA के लागू होने से इन क्षेत्रों पर लगने वाले टैरिफ में बड़ी कटौती होगी, जिससे भारतीय सामान यूरोपीय बाजारों में सस्ते और अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। इसके अलावा, भारत अपने आईटी पेशेवरों और कुशल कामगारों के लिए यूरोप में आसान आवाजाही और फार्मास्युटिकल्स के लिए सरल नियामकीय मंजूरी की मांग कर रहा है। यदि इन पर सहमति बनती है तो यह भारत के सर्विस सेक्टर के लिए एक बड़ी जीत होगी।

2007 में शुरू हुई थी वार्ता

भारत व ईयू के बीच कारोबारी समझौते को लेकर वार्ता वर्ष 2007 में शुरू हुई थी लेकिन कई मुद्दों पर भारी मतभेद को देखते हुए वर्ष 2013 में इसे स्थगित कर दिया गया था। जून 2022 में इन्हें फिर से शुरू किया गया और सिर्फ साढ़े तीन वर्षों में वार्ता तकरीबन पूरी हो चुकी है। अब इस समझौते से व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन में गहरा बदलाव आने की संभावना है।

लंदन में गूँजा गणतंत्र का जयघोष: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पार्लियामेंट स्क्वायर में बापू को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

लंदन / रांची, 26 जनवरी 2026: 77वें गणतंत्र दिवस के गौरवशाली अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने लंदन स्थित पार्लियामेंट स्क्वायर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। सात समंदर पार बापू को श्रद्धांजलि देकर मुख्यमंत्री ने सत्य और अहिंसा के उन वैश्विक आदर्शों को याद किया, जो आज भी झारखंड और भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों का आधार हैं।

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"बापू के आदर्श ही लोकतंत्र के स्तंभ" - मुख्यमंत्री

प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री ने बापू के शाश्वत संदेशों को रेखांकित करते हुए कहा:

"बापू के सत्य, अहिंसा और ईमानदारी के आदर्श आज भी हमें उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व करने और समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की सेवा करने की प्रेरणा देते हैं। उनके विचार लोकतंत्र के मजबूत स्तंभों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए हमारा मार्गदर्शन करते हैं।"

प्रवासी भारतीयों और छात्रों का जुटाव

इस गरिमामय कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के साथ झारखंड से यूनाइटेड किंगडम में अध्ययन करने आए स्कॉलर्स और भारतीय डायस्पोरा के सदस्य भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने लंदन में रह रहे झारखंडी समुदाय और छात्रों से संवाद किया, जिससे सात समुद्र पार भी गणतंत्र का उत्सव पूरी तरह आत्मीय और स्मरणीय बन गया।

सांस्कृतिक और कूटनीतिक संदेश

लंदन के केंद्र में स्थित पार्लियामेंट स्क्वायर पर मुख्यमंत्री की यह उपस्थिति भारत की संवैधानिक शक्ति और वैश्विक उपस्थिति को दर्शाती है। यह दौरा न केवल शैक्षणिक और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक विरासत को साझा करने का भी एक सशक्त माध्यम बना है।

77वें गणतंत्र दिवस पर पीएम मोदी ने पहनी मरून पगड़ी, जानिए क्या है संदेश

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गणतंत्र दिवस के मौके पर रंगीन पगड़ी पहनने का अपना ट्रेडिशन इस साल भी जारी रखा। इस बार भी प्रधानमंत्री मोदी की खास पगड़ी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पीएम मोदी का ये पहनावा सांस्कृतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और विरासत को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रीय समर स्मारक पर जाकर देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी की वेशभूषा की बात करें तो उन्होंने गहरे नीले रंग का कुर्ता पहना। उन्होंने इस पर आसमानी रंग की जैकेट पहनी। सफेद चूड़ीदार पायजामे के साथ पारंपरिक काले जूतों ने पीएम मोदी के लुक को पूरा किया।

पगड़ी पर सुनहरे रंग की कढ़ाई

प्रधानमंत्री ने आज के खास मौके पर मरून रंग की पगड़ी पहनी। इस पगड़ी पर सुनहरे रंग की कढ़ाई की गई है। पगड़ी के पिछले हिस्से में हरे रंग पर सुनहरे रंग की शानदार कढ़ाई देखने को मिली। साफे के आखिरी हिस्से में हरे रंग के नीचे पीले रंग का मिश्रण देखने को मिला।

पहली भी पीएम की पगड़ी ने खींचा है लोगों का ध्यान

इससे पहले के गणतंत्र दिवस समारोहों में भी प्रधानमंत्री मोदी की पगड़ी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती रही है। बता दें कि 76वें गणतंत्र दिवस समारोह में पीएम मोदी ने चमकीले लाल और पीले रंग का बंधेज साफा पहना था, जो राजस्थानी और गुजराती संस्कृति से जुड़ा एक पारंपरिक टाई-डाई कपड़ा है, जिसे उन्होंने सफेद कुर्ते-पायजामे और भूरे रंग की बंदगला जैकेट के साथ पहना था।

हर बार चर्चा में रहती है पीएम मोदी की पगड़ी

हर साल पीएम मोदी का गणतंत्र दिवस का पहनावा चर्चा का विषय बन जाता है। उनकी पगड़ी हमेशा ही लोगों का सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है। बीते कुछ वर्षों में पीएम मोदी ने राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड और अन्य राज्यों की पगड़ियां और टोपियां पहनी हैं। इन सभी का अपना सांस्कृतिक महत्व रहा है।

प्रधानमंत्री ने गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर राष्ट्रीय समर स्मारक पहुंचने के पर मरून रंग की पगड़ी पहनी। इस पगड़ी पर सुनहरे रंग की कढ़ाई की गई है। पगड़ी के पिछले हिस्से में हरे रंग पर सुनहरे रंग की शानदार कढ़ाई देखने को मिली। साफे के आखिरी हिस्से में हरे रंग के नीचे पीले रंग का मिश्रण देखने को मिला।

भारत-चीन अच्छे पड़ोसी और साझेदार” शी जिनपिंग ने गणतंत्र दिवस पर भारत को दी बधाई

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भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर दुनिया के देश बधाई दे रहे हैं। इस मौके पर अमेरिका और चीन ने भारत को बधाई देकर खास संदेश दिया है।अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को शुभकामनाएँ देते हुए अमेरिका-भारत संबंधों की सराहना की। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत को ‘अच्छा पड़ोसी, दोस्त और साझेदार’ बताया।

चीन ने कहा- दोनों देशों के रिश्ते सुधारे

चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत और चीन ‘अच्छे पड़ोसी, अच्छे दोस्त और अच्छे साझेदार’ हैं। उन्होंने कहा कि बीते एक साल में दोनों देशों के रिश्तों में सुधार आया है और यह पूरी दुनिया में शांति और समृद्धि के लिए जरूरी है।

ड्रैगन और हाथी साथ-साथ-जिनपिंग

शी जिनपिंग ने कहा कि चीन की हमेशा से यही सोच रही है कि भारत और चीन का अच्छे पड़ोसी, दोस्त और साझेदार बनकर साथ चलना ही दोनों देशों के हित में है। उन्होंने आसान शब्दों में समझाते हुए कहा कि भारत और चीन का रिश्ता ऐसा होना चाहिए जैसे ड्रैगन और हाथी साथ-साथ नाच रहे हों यानी दोनों मिलकर आगे बढ़ें।

आगे भी आपसी बातचीत बढ़ाने की उम्मीद

चीन के राष्ट्रपति ने यह भी उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दोनों देश आपसी बातचीत बढ़ाएंगे, एक-दूसरे से ज्यादा जुड़ेंगे और मिलकर काम करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर दोनों देश एक-दूसरे की चिंताओं को समझकर उनका समाधान करें, तो भारत-चीन रिश्ते और ज्यादा मजबूत, संतुलित और स्थिर बन सकते हैं।

अमेरिका ने क्या कहा?

वहीं, अमेरिका की ओर से विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अमेरिका-भारत संबंध दोनों देशों और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए ठोस नतीजे दे रहे हैं। रुबियो ने कहा, ‘अमेरिका के लोगों की ओर से मैं भारत के लोगों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई देता हूं। अमेरिका और भारत का रिश्ता ऐतिहासिक है। रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और नई तकनीक में हमारा सहयोग, और क्वाड के जरिए हमारी साझेदारी, दोनों देशों और पूरे क्षेत्र के लिए मजबूत आधार बन रही है।’ उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका आने वाले साल में भारत के साथ मिलकर साझा लक्ष्यों पर काम करने को उत्सुक है।

इमैनुअल मैक्रों ने भी दी भारत को बधाई

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने भी भारत को बधाई दी और 2024 के गणतंत्र दिवस को याद किया, जब वे मुख्य अतिथि के रूप में भारत आए थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता को शुभकामनाएँ देते हुए भविष्य में सहयोग जारी रखने की बात कही।

राष्ट्रपति मुर्मू ने फहराया तिरंगा, कर्तव्‍य पथ पर ऑपरेशन सिंदूर की झलक

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भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। देश की राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया गया। राष्ट्रपति मुर्मू ने तिरंगा फहराया। इस दौरान गणतंत्र दिवस समारोह की मुख्य अतिथि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर और सैंटोस कोस्टा भी मौजूद रहे।

शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक्र चक्र

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया है। शुभांशु भारत के सबसे सम्मानित शांति काल का वीरता पुरस्कार पाने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं।

सेना के हेलिकॉप्टरों ने बनाई शानदार फॉर्मेशन

दिल्ली में कर्तव्य पथ पर 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार Mi-17 1V हेलीकॉप्टरों द्वारा ध्वज फॉर्मेशन में फूलों की पंखुड़ियां बरसाई गई। हेलीकॉप्टरों के इस फॉर्मेशन का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत किया।

सेना ने किया भीष्म टैंक का प्रदर्शन

गणतंत्र दिवस परेड में भारत ने टी-90 टैंक का प्रदर्शन किया। इसे भारतीय सेना ने 'भीष्म' नाम दिया है। रूस में निर्मित तीसरी पीढ़ी का मुख्य युद्धक टैंक है। यह टैंक 2001 से भारतीय सेना का हिस्सा है और इसे राजस्थान, पंजाब में पाकिस्तान सीमा और लेह में चीन सीमा पर तैनात किया गया है। 2005 में इनकी बड़ी खेप भारत आई। शुरुआत में यह पूरी तरह रूसी तकनीक से बना था, लेकिन अब इसके कई पुर्जे भारत में ही बनाए जाते हैं। तमिलनाडु के अवाडी में इन टैंकों को तैयार किया जाता है।

ब्रह्मोस मिसाइल टुकड़ी ने कर्तव्य पथ पर किया मार्च

दिव्यास्त्र और अग्निबाण टुकड़ी ने परेड की। साथ ही रॉकेट टुकड़ी सूर्यास्त्र और ब्रह्मोस मिसाइल की टुकड़ी ने भी कर्तव्य पथ पर परेड की और हर भारतीय के सीने को गर्व से भर दिया। आकाश मिसाइल और ड्रोन शक्ति ईगल प्रहार ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना के पशु दस्ते ने मार्च किया, जिसका नेतृत्व कैप्टन हर्षिता यादव ने किया।

अरुणाचल स्काउट और राजपूत रेजीमेंट का मार्च

ऊंचे और पहाड़ी इलाकों पर युद्ध में विशेषज्ञा रखने वाले अरुणाचल स्काउट ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। इसके बाद सेना की राजपूत रेजीमेंट ने मार्च किया। यह सेना की सबसे पुरानी रेजीमेंट में से एक है। इसके बाद असम रेजीमेंट के जवानों ने मार्च किया। सेना की जम्मू कश्मीर लाइट इंफेंट्री के दस्ते ने मार्च किया। साथ ही कंबाइंड मिलिट्री बैंड ने मार्च किया, जिसका नेतृत्व सूबेदार एए खान ने किया। सिख लाइट इंफेंट्री के मार्चिंग दस्ते ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। इंडियन नेवी बैंड ने सामंजस्य और भव्यता को दिखाते हुए जय भारती की धुन बजाई।

*18 सालों तक 26 जनवरी को मनाया गया गणतंत्र दिवस, जानिए इस दिन का ऐतिहासिक महात्व

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आज पूरा देश बड़े ही धूमधान से 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। हम भारतीय 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाते है। इसी दिन हमें हमारा संविधान मिला था। देश की आजादी के करीब ढाई साल के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजादी से पहले 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता था।

18 वर्ष तक 26 जनवरी को मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

दरअसल आजादी से पहले 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता था। करीब 18 वर्ष तक 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज दिवस (स्वतंत्रता दिवस) मनाया जाता रहा। दिसंबर 1929 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लाहौर में अधिवेशन हुआ था। इस अधिवेशन की अध्यक्षता देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु ने की थी। अधिवेशन में पंडित नेहरु ने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव रखा था। प्रस्ताव में कहा गया था कि यदि अंग्रेजी हुकूमत 26 जनवरी 1930 तक भारत को उसका प्रभुत्व (डोमिनियन का पद) नहीं देती है तो भारत खुद को स्वतंत्र घोषित कर देगा। इसलिए कांग्रेस ने 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज दिवस (स्वतंत्रता दिवस) घोषित किया।

1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया

26 जनवरी 1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। इसी दिन जवाहर लाल नेहरु ने तिरंगा फहराया था। फिर देश को आजादी मिलने के बाद 15 अगस्त 1947 को अधिकारिक रूप से स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया। 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव लागू होने की तिथि को महत्व देने के लिए ही 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया था। इसके बाद 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस घोषित किया गया।

26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है गणतंत्रता दिवस ?

बता दें कि 15 अगस्त 1947 को भारत के आजाद होने के बाद संविधान सभा का गठन किया गया। फिर बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने तकरीबन दो साल, 11 महीने और 18 दिन में दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान तैयार किया। सन 1948 के शुरूआत में ही डॉ अंबेडकर ने संविधान सभा में पहली बार संविधान की रूपरेखा प्रस्तुत की थी। लेकिन इनमें कुछ संशोधनों के बाद नवंबर 1949 में इसे स्वीकार कर लिया गया और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू कर दिया गया। इसके बाद हर साल 26 जनवरी को हम गणतंत्र का जश्न मनाते हैं।

बता दें कि संविधान के लागू होने के बाद इसके निर्माताओं को ये विचार आया कि इस दिन को ऐसे अवसर पर मनाया जाना चाहिए जिसका संबंद्ध राष्ट्रीय गौरव से हो। इसके बाद ये फैसला लिया गया कि गणतंत्रता दिवस ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ यानी 26 जनवरी को ही मनाया जाएगा।

'मैं पार्टी लाइन से कभी अलग नहीं हुआ', ऑपरेशन सिंदूर पर थरूर का बड़ा बयान

#neverviolatedpartylineunapologeticoveroperation_sindhoor

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तिरुवनंतपुरम के सांसद और कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर ने पार्टी के साथ चल रही तनातनी के बीच बड़ा बयान दिया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि उन्होंने संसद में कभी भी पार्टी के रुख का उल्लंघन नहीं किया है। कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि सिद्धांतों के मामले में उनका एकमात्र मतभेद ऑपरेशन सिंदूर को लेकर था।

थरूर केरल लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक सत्र के दौरान सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने सख्त रुख अपनाया था और वह इस अब भी बिना किसी पछतावे के इस रुख पर कायम हैं।

थरूर बोले- अपने रुख पर कोई पछतावा नहीं

शशि थरूर ने कहा कि उन्होंने संसद में कभी भी पार्टी लाइन का उल्लंघन नहीं किया है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनका रुख हमेशा देशहित को प्राथमिकता देने वाला रहा है। थरूर ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक रूप से उन्होंने केवल ‘ऑपरेशन सिंधूर’ के मुद्दे पर सैद्धांतिक असहमति जताई थी और उस रुख को लेकर उन्‍हें कोई पछतावा नहीं है।

ऑब्जर्वर और राइटर के तौर पर घटना का जिक्र

अपनी बात समझाते हुए थरूर ने कहा कि एक ऑब्जर्वर और राइटर के तौर पर उन्होंने पहलगाम घटना के बाद एक अखबार में कॉलम लिखा था, जिसमें कहा था कि इसे बिना सजा दिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए और इसका करारा जवाब दिया जाना चाहिए।

भारत सरकार ने वही किया जो उन्होंने सुझाव दिया-थरूर

कांग्रेस सांसद ने कहा कि जब भारत विकास करने पर फोकस कर रहा है तो उसे पाकिस्तान के साथ लंबे समय तक चलने वाले झगड़े में नहीं घसीटा जाना चाहिए और कोई भी कार्रवाई सिर्फ आतंकवादी कैंपों को टारगेट करने तक ही सीमित होनी चाहिए। थरूर ने कहा कि उन्हें यह देखकर हैरानी हुई कि भारत सरकार ने ठीक वही किया जो उन्होंने सुझाव दिया था।

पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेद की अटकलें

थरूर का ये बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में पार्टी नेतृत्व के साथ उनके कथित मतभेदों को लेकर अटकलें तेज हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कोच्चि में हाल ही में हुए एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मंच पर मौजूद नेताओं के नाम लेने के क्रम में थरूर का नाम न लिए जाने से वे आहत हुए थे। इसके अलावा राज्य स्तर पर कुछ नेताओं द्वारा उन्हें लगातार हाशिए पर रखने की कोशिशों की बातें भी सामने आई हैं।

कलह और तेज हो सकती है

कांग्रेस सांसद ने ऑपरेशन सिंदूर पर ऐसी बात कही है, जिससे पार्टी लीडरशिप खासकर राहुल गांधी के लिए इसे पचा पाना मुश्किल होगा। ऑपरेशन सिंदूर पर शशि थरूर के रुख से पार्टी में कलह की धार और तेज हो सकती है। बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राहुल गांधी काफी क्रिटिकल रहे हैं।