राँची में जरूरतमंद बच्चों को मिलेगा सरकारी सहारा: उप विकास आयुक्त ने दिए हर ब्लॉक से कम से कम 10 बच्चों को चिन्हित करने के निर्देश

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राँची, 24 जनवरी 2026: उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री के दिशा-निर्देशानुसार आज राँची जिले के उन बच्चों के उत्थान के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है, जिन्हें विशेष देखभाल और आर्थिक सहायता की आवश्यकता है। उप विकास आयुक्त (DDC) श्री सौरभ कुमार भुवनिया की अध्यक्षता में आयोजित एक ऑनलाइन बैठक में 'प्रायोजन (Sponsorship) योजना' की समीक्षा की गई।

किन बच्चों को मिलेगा योजना का लाभ?

इस योजना का लक्ष्य 18 वर्ष से कम आयु के उन बालक-बालिकाओं के जीवन स्तर को सुधारना है, जिनके परिवार की वार्षिक आय 75,000 रुपये से कम है। इसके दायरे में विशेष रूप से निम्नलिखित श्रेणियों के बच्चे आएंगे:

जिनके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी हो या जिन्होंने बच्चों का परित्याग कर दिया हो।

जो बच्चे रिश्तेदारों की देख-रेख में रह रहे हों।

जिनके माता-पिता गंभीर बीमारी (HIV, कुष्ठ रोग) या 100% दिव्यांगता से जूझ रहे हों।

जिनके माता-पिता जेल में हों।

जो बाल विवाह, बाल श्रम या तस्करी जैसे दुर्व्यवहार से प्रभावित हुए हों।

31 जनवरी तक मांगी गई सूची

डीडीसी ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) और अंचल अधिकारियों (CO) को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से कम से कम 10 योग्य बच्चों की पहचान करें। चिन्हित बच्चों की विस्तृत सूची 31 जनवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से जिला प्रशासन को उपलब्ध करानी होगी।

आर्थिक सहायता से संवरेगा भविष्य

बैठक में बताया गया कि इस योजना के तहत चयनित बच्चों के परिवार को पोषण, शिक्षा, चिकित्सा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए अनुपूरक आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह कदम बाल संरक्षण की दिशा में झारखंड सरकार की एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण पहल है।

बैठक में सहायक निदेशक (सामाजिक सुरक्षा) और जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

प्रमुख जानकारी एक नज़र में (Table)

विवरण जानकारी

योजना का नाम प्रायोजन (Sponsorship) योजना

पात्रता आयु 18 वर्ष से कम

आय सीमा वार्षिक आय ₹75,000 से कम

लक्ष्य प्रति प्रखंड न्यूनतम 10 बच्चे

डेडलाइन 31 जनवरी 2026

झारखंड में बनेगा 'Centre of Excellence': लंदन के इम्पीरियल कॉलेज के साथ माइनिंग और स्वच्छ ऊर्जा पर मुख्यमंत्री की बड़ी पहल

लंदन / रांची, 24 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने शनिवार को लंदन स्थित विश्व प्रसिद्ध रॉयल स्कूल ऑफ माइंस (इम्पीरियल कॉलेज लंदन) का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य झारखंड को केवल खनन (Extraction) तक सीमित न रखकर, उसे अनुसंधान, विकास और उच्च मूल्य संवर्धन (Value Addition) के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

प्रयोगशालाओं का अवलोकन और विशेषज्ञों से संवाद

मुख्यमंत्री ने संस्थान की आधुनिक प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया और क्रिटिकल मिनरल्स, परमाणु अनुसंधान व स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में कार्यरत अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से सीधा संवाद किया। प्रोफेसर स्टीफन नीथलिंग और प्रोफेसर मुकेश कुमार (कैम्ब्रिज विवि) सहित अन्य शोधकर्ताओं ने खनिज प्रसंस्करण (Mineral Processing) और उन्नत सेंसिंग तकनीकों के औद्योगिक उपयोग की जानकारी दी।

"अनुसंधान ही भविष्य का आधार" - मुख्यमंत्री

दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के विजन को स्पष्ट करते हुए कहा:

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"झारखंड अनुसंधान और विकास (R&D) पर आधारित एक ऐसा औद्योगिक तंत्र विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है, जो न्यायसंगत और भविष्य-उन्मुख हो। हम अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करेंगे।"

झारखंड में Centre of Excellence की तैयारी

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह रहा कि मुख्यमंत्री और प्रतिनिधिमंडल ने इम्पीरियल कॉलेज के साथ मिलकर झारखंड में 'क्रिटिकल मिनरल्स और माइनिंग साइंसेज़' के क्षेत्र में एक Centre of Excellence स्थापित करने की संभावनाओं पर चर्चा की। इसके माध्यम से:

तकनीकी विकास: वैश्विक मानकों के अनुरूप खनन और प्रसंस्करण।

कौशल निर्माण: झारखंड के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण।

संस्थागत क्षमता: राज्य के खनन संस्थानों को वैश्विक संस्थानों के साथ जोड़ना।

मूल्य सृजन (Value Creation) पर जोर

विशेषज्ञों ने प्रदर्शित किया कि कैसे मॉडलिंग और इमेजिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए प्रारंभिक शोध को औद्योगिक स्तर पर लाभदायक बनाया जा सकता है। यह झारखंड के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य अब कच्चे खनिजों के बजाय परिष्कृत उत्पादों और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना चाहता है।

आकर्षक हेडलाइंस (विकल्प):

विकल्प 1: झारखंड बनेगा माइनिंग का 'ग्लोबल रिसर्च हब': लंदन के इम्पीरियल कॉलेज के साथ साझेदारी की तैयारी।

विकल्प 2: हेमंत सोरेन का बड़ा कदम: झारखंड में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए लंदन के विशेषज्ञों से मिलाया हाथ।

विकल्प 3: खनिजों की पहचान से लेकर प्रसंस्करण तक; अब विश्वस्तरीय तकनीक अपनाएगा झारखंड।

शिक्षा से समृद्धि की ओर: गढ़वा में "Garhwa Learns, Garhwa Leads" का शंखनाद, उपायुक्त ने दिया सकारात्मकता का मंत्र

गढ़वा: जिले की शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार और छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए आज टाउन हॉल में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान "Garhwa Learns, Garhwa Leads" कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपायुक्त श्री दिनेश यादव ने की, जिसमें जिले भर के शिक्षा पदाधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी शामिल हुए।

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शिक्षक ही हैं बच्चों के भविष्य के शिल्पकार: उपायुक्त

समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त दिनेश यादव ने कहा कि शिक्षा मानव मूल्यों के विकास का सर्वोत्तम साधन है। उन्होंने शिक्षकों से नकारात्मकता को त्यागने और नई सकारात्मक ऊर्जा के साथ कार्य करने की अपील की।

"यह कार्यक्रम 'District Education Innovation Challenge' के मानकों पर जिले के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया गया है। जब शिक्षक सकारात्मक सोच के साथ बच्चों के भविष्य निर्माण में जुटेंगे, तभी जिले का वास्तविक विकास होगा।"

क्या है इस कार्ययोजना के मुख्य स्तंभ?

जिला शिक्षा पदाधिकारी कैसर रजा ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत 'मानक संचालन प्रक्रिया' (SOP) तैयार की गई है, जिसमें 9 मुख्य गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:

मिशन रेड अलर्ट: बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन और छीजन (Dropout) रोकना।

गढ़वा स्पीक्स: छात्रों में मंच पर बोलने का आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करना।

स्मार्ट क्लास फॉर ए स्मार्टर माइंड: तकनीक आधारित आधुनिक शिक्षा।

इग्नाइट इनोवेशन: विज्ञान और नवाचार के प्रति रुचि जगाना।

ग्रीन स्कूल क्लीन स्कूल: पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता। इसके अलावा परख, पीएम पोषण, डेस्टिनेशन और 'फ्रॉम एजुकेशन टू प्रोस्पेरिटी' जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं।

बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूल होंगे सम्मानित

इस योजना के तहत जिला स्तर पर एक कार्यदल का गठन किया गया है जो नियमित रूप से विद्यालयों का मूल्यांकन करेगा। प्रत्येक प्रभाग (Primary to Higher Secondary) में टॉप करने वाले विद्यालयों को जिला स्तर पर सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जाएगा।

महत्वपूर्ण उपस्थितियाँ

कार्यक्रम में अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार, जिला परिषद उपाध्यक्ष सत्यनारायण यादव, जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज, डालसा सचिव एनआर लकड़ा सहित सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, प्रधानाचार्य और बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। अधिकारियों ने सीआरपी, बीआरपी और बीपीएम को उनके नए दायित्वों से अवगत कराते हुए इस मिशन को सफल बनाने की अपील की।

झारखंड में निवेश की नई उड़ान: इस्पात और स्वच्छ ऊर्जा पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नवीन जिंदल समूह के बीच बड़ी चर्चा

लंदन / रांची, 24 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के यूनाइटेड किंगडम (UK) प्रवास के दौरान झारखंड के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। लंदन में मुख्यमंत्री और नवीन जिंदल समूह के प्रतिनिधियों के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें राज्य में स्टील, क्लीन एनर्जी और कौशल विकास के क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाओं पर सहमति बनी।

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रांची से लंदन तक निवेश का रोडमैप

यह मुलाकात 2 जनवरी 2026 को रांची में मुख्यमंत्री और श्री नवीन जिंदल के बीच हुई प्रारंभिक बातचीत का अगला चरण है। इस बैठक का उद्देश्य उन चर्चाओं को धरातल पर उतारना और रणनीतिक साझेदारी को अंतिम रूप देना है।

प्रमुख निवेश और सहयोग के क्षेत्र:

बैठक में तीन मुख्य स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया गया:

स्टील और बिजली: नवीन जिंदल समूह ने झारखंड में इस्पात उत्पादन और बिजली के बुनियादी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए बड़े निवेश की इच्छा जताई है।

स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy): भारत के 'कम कार्बन अर्थव्यवस्था' के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, राज्य में हरित ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा हुई।

उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास: समूह ने मुख्यमंत्री की 'मरांग गोमके छात्रवृत्ति योजना' की सराहना की। इसके तहत झारखंड के छात्रों के लिए विशेष छात्रवृत्ति, प्रशिक्षण कार्यक्रम और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए संस्थानों की क्षमता बढ़ाने पर सहमति बनी।

युवाओं को मिलेंगे वैश्विक अवसर

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ राज्य के युवाओं का कौशल विकास उनकी प्राथमिकता है। नवीन जिंदल समूह के सहयोग से झारखंड के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण और औद्योगिक अनुभव मिल सकेगा।

आकर्षक हेडलाइंस (विकल्प):

विकल्प 1: लंदन में झारखंड के लिए बड़ी डील: नवीन जिंदल समूह करेगा स्टील और क्लीन एनर्जी में निवेश।

विकल्प 2: 'मरांग गोमके छात्रवृत्ति' के मुरीद हुए जिंदल समूह; झारखंड के छात्रों के लिए खुलेंगे वैश्विक शिक्षा के द्वार।

विकल्प 3: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का विजन: झारखंड में उद्योगों के साथ कौशल विकास की नई इबारत लिखेगा जिंदल समूह।

लंदन में गूँजी 'झारखण्ड' की अस्मिता: 'झारखण्ड @25' कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने साझा किया विकास का वैश्विक रोडमैप

लंदन / रांची, 24 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में लंदन में आयोजित ‘झारखण्ड कार्यक्रम ने एक नया इतिहास रच दिया है। यह संभवतः भारत का पहला ऐसा अवसर है जब किसी राज्य सरकार ने सात समंदर पार अपने छात्रों, प्रवासियों और उद्यमियों के लिए इतने भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया हो।

मरांग गोमके स्कॉलर्स की दिखी सक्रिय भागीदारी

लंदन के इस विशेष कार्यक्रम में झारखंड की मरांग गोमके ओवरसीज स्कॉलरशिप और चेवनिंग छात्रवृत्ति के तहत यूके की टॉप यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे छात्र, शोधकर्ता, विभिन्न विश्वविद्यालयों के फैकल्टी और सफल उद्यमियों सहित लगभग 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। अपनी मिट्टी से दूर विदेशी धरती पर झारखंडी युवाओं के इस हुजूम ने राज्य की बौद्धिक प्रगति का प्रदर्शन किया।

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"जड़ों से जुड़कर, भविष्य की ओर अग्रसर" – मुख्यमंत्री

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्य के संघर्ष और भविष्य के विजन को रेखांकित किया। उन्होंने कहा:

"यह कार्यक्रम 25 वर्षों की उपलब्धियों से आगे बढ़कर अनंत संभावनाओं की कहानी है। हमारी विकास यात्रा मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और दिशोम गुरुजी के आत्मसम्मान और न्याय के आदर्शों से प्रेरित है। झारखंड प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर समावेशी विकास के पथ पर निरंतर बढ़ता रहेगा।"

लंदन में सादरी गीतों की गूँज और सांस्कृतिक गौरव

कार्यक्रम स्थल पूरी तरह झारखंडी रंग में रंगा नजर आया। मरांग गोमके स्कॉलर्स और प्रवासी झारखंडियों ने पारंपरिक नृत्य और सादरी गीतों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा हॉल झारखंड की संस्कृति से गुंजायमान हो उठा। छात्रों ने मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे राज्य सरकार की छात्रवृत्ति ने उनके वैश्विक सपनों को हकीकत में बदला है।

प्रमुख आकर्षण:

ऐतिहासिक पहल: किसी राज्य द्वारा विदेश में अपनी अस्मिता और विकास पर केंद्रित पहला बड़ा आयोजन।

युवा शक्ति: उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं ने मुख्यमंत्री को राज्य के विकास में भागीदार बनने का भरोसा दिया।

संस्कृति का संरक्षण: आधुनिकता के बीच अपनी परंपरा और जड़ों के प्रति गर्व का भाव।

लंदन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की 'डिप्लोमेसी': वैश्विक नीति-निर्माताओं के सामने रखी झारखंड की विकास गाथा

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लंदन / रांची, 23 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने यूनाइटेड किंगडम में भारत के उच्चायुक्त श्री विक्रम दोराईस्वामी द्वारा आयोजित आधिकारिक स्वागत समारोह में शिरकत की। इस गरिमामयी कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजदूतों, नीति-निर्माताओं और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया, जहाँ मुख्यमंत्री ने झारखंड की संभावनाओं पर वैश्विक संवाद का नेतृत्व किया।

भारत के विकास में झारखंड का 'अहम स्थान'

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की समग्र आर्थिक प्रगति में झारखंड की भूमिका कितनी निर्णायक है। उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया:

औद्योगिक एवं खनिज क्षमता: प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों के साथ राज्य की बढ़ती औद्योगिक ताकत।

युवा शक्ति: मानव संसाधन की क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का संकल्प।

रणनीतिक सहयोग: यूके और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ क्रिटिकल मिनरल्स, उच्च शिक्षा और कौशल विकास में निवेश की अपील।

विरासत से लेकर खेल तक: बहुआयामी साझेदारी पर चर्चा

मुख्यमंत्री ने केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी सहयोग के द्वार खोले:

विरासत संरक्षण: झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और प्राचीन स्मारकों के संरक्षण के लिए ब्रिटिश विशेषज्ञों के साथ तकनीकी साझेदारी।

शिक्षा और खेल: झारखंड के युवाओं और खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर के अवसर प्रदान करने के लिए द्विपक्षीय समझौतों पर चर्चा।

तकनीकी सहयोग: नई और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संभावित निवेश।

यूके-भारत रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा

यह संवाद यूके-भारत रणनीतिक साझेदारी के व्यापक ढांचे के अनुरूप रहा। राजनीतिक गलियारों में इस यात्रा को झारखंड के लिए अंतरराष्ट्रीय निवेश, उच्च शिक्षा और तकनीकी सहयोग के नए द्वार खोलने वाली एक ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन चर्चाओं के सकारात्मक परिणाम जल्द ही धरातल पर दिखाई देंगे।

झारखंड की प्राचीन विरासत अब वैश्विक मंच पर: लंदन में 'Historic England' के साथ मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय बैठक

लंदन / रांची, 23 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखंड का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल 'झारखंड वैश्विक आउटरीच के तहत यूनाइटेड किंगडम में राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए नई संभावनाएँ तलाश रहा है। इसी कड़ी में, प्रतिनिधिमंडल ने यूके की विरासत संरक्षण संस्था 'Historic England' के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की।

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स्टोनहेंज और एवेबरी भ्रमण का विशेष आमंत्रण

झारखंड के मेगालिथिक (पाषाणकालीन) स्मारकों में गहरी रुचि दिखाते हुए 'Historic England' ने मुख्यमंत्री को विश्व प्रसिद्ध एवेबरी (Avebury) और स्टोनहेंज (Stonehenge) जैसे प्रागैतिहासिक स्थलों के भ्रमण के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया है। मुख्यमंत्री शनिवार को इन स्थलों का दौरा कर वहां की संरक्षण तकनीकों का अवलोकन करेंगे।

POCC 2025: भारत-यूके सांस्कृतिक सहयोग का लाभ

यह बैठक 'यूके भारत व्यापक सांस्कृतिक सहयोग कार्यक्रम (POCC) 2025' के तहत आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा:

"झारखंड देश के उन अग्रणी राज्यों में है, जो इस अंतरराष्ट्रीय ढांचे का उपयोग कर अपनी आदिवासी विरासत और प्राचीन मेगालिथिक परंपराओं को वैश्विक पहचान दिला रहा है। झारखंड की विशेषता यह है कि यहाँ हजारों साल पुरानी परंपराएँ आज भी समुदायों के जीवन में जीवित हैं।"

झारखंड के 'जीवाश्म' और 'मेगालिथ' की वैश्विक प्रस्तुति

बैठक में झारखंड के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों को शोध-आधारित तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया गया:

पकरी बरवाडीह (हजारीबाग): सूर्य की गति के अनुसार निर्मित विशिष्ट मेगालिथिक परिसर।

मंदर जीवाश्म उद्यान (साहिबगंज): करोड़ों साल पुराने जीवाश्मों का अनूठा संग्रह।

शैलचित्र एवं मोनोलिथ: राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैले पाषाण स्मारक।

"Sentinels of Time" कॉफी टेबल बुक का विमोचन

प्रतिनिधिमंडल ने “Sentinels of Time” शीर्षक वाली एक विशेष कॉफी टेबल बुक प्रस्तुत की। यह पुस्तक झारखंड के मेगालिथिक और जीवाश्म परिदृश्यों को वैश्विक विशेषज्ञों और पर्यटकों के सामने वैज्ञानिक और दृश्य दस्तावेज़ के रूप में प्रस्तुत करती है।

सांस्कृतिक पर्यटन और स्थानीय आजीविका पर जोर

झारखंड सरकार का लक्ष्य विरासत संरक्षण को केवल स्मारकों तक सीमित न रखकर, उसे अनुसंधान, शैक्षणिक साझेदारी और स्थानीय आदिवासियों की आजीविका व पर्यटन से जोड़ना है।

उपस्थिति: बैठक में मंत्री सुदिव्य कुमार, विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह सचिव वंदना डाडेल सहित 'English Heritage Trust' और 'National Trust' के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित थे।

गढ़वा में शिक्षा की नई क्रांति: 'Garhwa Learns & Garhwa Leads' कार्यक्रम का कल होगा भव्य आगाज

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गढ़वा: जिले की शैक्षणिक गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए गढ़वा जिला प्रशासन एक नई और महत्वाकांक्षी पहल शुरू करने जा रहा है। “Garhwa Learns & Garhwa Leads” नामक इस कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ कल, यानी 24 जनवरी 2026 को किया जाएगा।

टाउन हॉल में जुटेगा शिक्षा जगत

जिला शिक्षा पदाधिकारी कैशर राजा ने जानकारी दी कि इस कार्यक्रम का जिला स्तरीय शुभारंभ समारोह शनिवार पूर्वाह्न 11:30 बजे से नीलांबर पीतांबर बहुउद्देशीय सांस्कृतिक भवन (टाउन हॉल), गढ़वा में आयोजित होगा। कार्यक्रम की रूपरेखा गढ़वा उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री दिनेश यादव के दिशा-निर्देशों और 'डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन इनोवेशन चैलेंज' (DEIC) के मानकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

क्या है इस कार्यक्रम का उद्देश्य?

“Garhwa Learns & Garhwa Leads” केवल एक अभियान नहीं, बल्कि गढ़वा की शिक्षा व्यवस्था को बदलने का एक रोडमैप है। इसके मुख्य लक्ष्य इस प्रकार हैं:

गुणवत्ता में सुधार: जिले के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक स्तर और लर्निंग आउटकम को बेहतर बनाना।

नवाचार (Innovation): शिक्षण पद्धतियों में नए प्रयोगों और तकनीक को बढ़ावा देना।

परफॉरमेंस रिव्यू: निर्धारित इंडिकेटर्स के आधार पर स्कूलों और शिक्षकों के प्रदर्शन की निरंतर समीक्षा।

नेतृत्व क्षमता: विद्यार्थियों में न केवल सीखने की ललक (Learns) पैदा करना, बल्कि उन्हें भविष्य के नेतृत्व (Leads) के लिए तैयार करना।

अधिकारियों और शिक्षकों को मिला दायित्व

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने इस ऐतिहासिक पहल की सफलता के लिए शिक्षा विभाग के सभी पदाधिकारियों, शिक्षकों और कर्मियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम गढ़वा जिले के लिए मील का पत्थर साबित होगा और जिले को शैक्षणिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा।

रांची: नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर जिला प्रशासन ने दी श्रद्धांजलि, उपायुक्त और एसएसपी ने प्रतिमा पर अर्पित किए पुष्प

रांची, 23 जनवरी 2026: महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती के अवसर पर आज राजधानी रांची में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मुख्य कार्यक्रम कचहरी चौक स्थित नेताजी पार्क में आयोजित हुआ, जहाँ जिला प्रशासन के वरीय अधिकारियों ने नेताजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।

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साहस और देशभक्ति की मिसाल हैं नेताजी: उपायुक्त

श्रद्धांजलि अर्पित करने के पश्चात रांची के उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जीवन साहस, त्याग और अटूट देशभक्ति की एक अनुपम मिसाल है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में नेताजी के अतुलनीय योगदान को याद करते हुए कहा:

"नेताजी के विचार और उनका 'दिल्ली चलो' का उद्घोष आज भी युवाओं को राष्ट्रसेवा और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।"

वरीय अधिकारियों ने लिया संकल्प

इस अवसर पर वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री राकेश रंजन ने भी नेताजी को पुष्पांजलि अर्पित की। उनके साथ अनुमंडल पदाधिकारी (सदर) श्री रजत कुमार, उपसमाहर्ता नजारत श्री सुदेश कुमार सहित जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने भी नेताजी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। सभी अधिकारियों ने नेताजी के बताए मार्ग पर चलने और देश की एकता व अखंडता के लिए समर्पित रहने का संकल्प लिया।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने यूके की मंत्री सीमा मल्होत्रा से मुलाक़ात कर झारखण्ड–यूके सहयोग को नई दिशा दी

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने यूनाइटेड किंगडम सरकार की संसदीय अवर सचिव (समानता एवं इंडो-पैसिफ़िक मामलों की मंत्री) सीमा मल्होत्रा से भेंट कर शिक्षा, कौशल विकास, उत्तरदायी खनन, क्लाइमेट ट्रांजीशन, संस्कृति एवं विरासत संरक्षण जैसे क्षेत्रों में झारखण्ड यूके के बीच व्यावहारिक सहयोग को सुदृढ़ करने पर चर्चा की।

यूके ने झारखण्ड सरकार की मरांग गोमके जयपाल मुंडा ओवरसीज़ स्कॉलरशिप तथा चेवनिंग मरांग गोमके जयपाल मुंडा ओवरसीज़ स्कॉलरशिप की सराहना करते हुए इन्हें भारत यूके साझेदारी का सशक्त और जीवंत उदाहरण बताया। पिछले चार वर्षों में इन योजनाओं के माध्यम से 100 से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिला है। दोनों पक्षों ने सस्टेनेबिलिटी-लिंक्ड स्कॉलरशिप मार्गों पर कार्य करने तथा विदेश अध्ययन को मेंटोरशिप, इंटर्नशिप, नेतृत्व विकास और सार्वजनिक सेवा अनुभव से जोड़ने के लिए एक एक निश्चित योजना विकसित करने पर रुचि व्यक्त की।

बैठक में यूके के प्रमुख विश्वविद्यालयों, स्किल्स एवं क्वालिफ़िकेशन संस्थानों के साथ संस्थागत साझेदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इसमें खनन प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं सततता, डेटा एवं एआई, गवर्नेंस और सार्वजनिक नीति जैसे क्षेत्रों में संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रम, फैकल्टी एक्सचेंज, एप्लाइड रिसर्च तथा टीवीईटी और अप्रेंटिसशिप मार्गों की स्थापना शामिल है।

आर्थिक और जलवायु सहयोग के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने उत्तरदायी खनन के क्षेत्र में यूके की क्षमताओं के साथ घनिष्ठ सहयोग का प्रस्ताव रखा, जिसमें ईएसजी सिस्टम, मिनरल ट्रेसबिलिटी, खदान सुरक्षा, स्वच्छ प्रसंस्करण तथा प्रौद्योगिकी प्रदर्शन शामिल हैं। इस अवसर पर उत्तरदायी क्रिटिकल मिनरल्स पर एक झारखण्ड–यूके वर्किंग ट्रैक स्थापित करने पर भी चर्चा हुई, जो मानकों, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार और आपूर्ति-श्रृंखला साझेदारी को सुदृढ़ करेगा।

बैठक में यूके की जलवायु एवं वित्तीय संस्थाओं के साथ मिलकर कोयला क्षेत्रों के विविधीकरण, जलवायु अनुकूलन, श्रमिकों एवं समुदायों के समर्थन हेतु ट्रांज़िशन फाइनेंस संरचना विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। झारखण्ड को “जस्ट ट्रांज़िशन” कार्यक्रमों के लिए एक पायलट राज्य के रूप में स्थापित करने तथा शहरी गतिशीलता और जलवायु वित्त को सहयोग के पूरक क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया।

संस्कृति, खेल और विरासत संरक्षण को जन-जन के बीच संपर्क बढ़ाने के सरल एवं प्रभावी माध्यम के रूप में देखा गया। मुख्यमंत्री ने भारत–यूके विरासत संरक्षण समझौते के अंतर्गत झारखण्ड के मेगालिथ और मोनोलिथ स्थलों के संरक्षण हेतु यूके सहयोग का आग्रह किया। इस संदर्भ में स्टोनहेंज जैसे वैश्विक सर्वोत्तम उदाहरणों का उल्लेख करते हुए दीर्घकाल में यूनेस्को मान्यता की दिशा में कार्य करने की बात कही गई।

मुख्यमंत्री ने मंत्री सीमा मल्होत्रा को झारखण्ड भ्रमण का आमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को फ़ॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (FCDO) मुख्यालय का भी अवलोकन कराया गया। साथ ही मंत्री मल्होत्रा ने मुख्यमंत्री को शनिवार को यूके के प्रतिष्ठित मेगालिथिक एवं मोनोलिथिक विरासत स्थल स्टोनहेंज के भ्रमण का आमंत्रण भी दिया।

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