झारखंड के 'विजन 2050' के मुरीद हुए अज़ीम प्रेमजी: वैश्विक निवेशकों से कहा— 'झारखंड निवेश के लिए बेहतरीन जगह'

विश्व आर्थिक मंच (WEF), दावोस में झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में राज्य के विकास मॉडल की गूँज वैश्विक स्तर पर सुनाई दे रही है। विप्रो लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन और अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के संस्थापक श्री अज़ीम प्रेमजी ने झारखंड सरकार के "विजन 2050" और "प्रकृति के साथ सामंजस्य में विकास" की सोच की मुक्त कंठ से सराहना की है।

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निवेशकों के लिए अज़ीम प्रेमजी का संदेश

झारखंड सरकार के सक्रिय और सकारात्मक दृष्टिकोण से प्रभावित होकर श्री प्रेमजी ने वैश्विक मंच से कहा:

"झारखंड राज्य अपने विकास के लिए बहुत ही गंभीर और संगठित प्रयास कर रहा है। सरकार के साथ हमारा अनुभव अत्यंत अनुकूल और सुखद रहा है। मैं भारत और दुनिया भर के निवेशकों का आह्वान करता हूँ कि वे झारखंड में निवेश की संभावनाओं पर विचार करें।"

रांची के इटकी में बनेगा 'हेल्थ और एजुकेशन हब'

अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन झारखंड में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक विशाल निवेश कर रहा है। रांची के इटकी में निम्नलिखित परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है:

विश्वविद्यालय: उच्च शिक्षा के लिए एक आधुनिक परिसर।

1300 बेड का अस्पताल: राज्यवासियों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं।

मेडिकल कॉलेज और स्कूल: चिकित्सा शिक्षा और बुनियादी शिक्षा को सुदृढ़ करने की पहल।

प्रकृति और प्रगति का संतुलन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दावोस में जिस "ग्रीन और सस्टेनेबल" विकास की रूपरेखा पेश की है, उसे अज़ीम प्रेमजी ने भविष्य की जरूरत बताया। उन्होंने राज्य के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएँ भी प्रेषित कीं। यह सराहना झारखंड के लिए अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा जीतने में मील का पत्थर साबित होगी।

पीवीयूएन की बड़ी पहल: पतरातु की बेटियों के लिए स्कूलों में लगी सेनेटरी वेंडिंग मशीनें, 10 हजार नैपकिन वितरित

पतरातु (रामगढ़): सामुदायिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पीवीयूएन लिमिटेड (PVUNL) ने पतरातु क्षेत्र की किशोरियों के स्वास्थ्य और मासिक स्वच्छता (Menstrual Hygiene) को सशक्त बनाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया। इस पहल के तहत क्षेत्र के प्रमुख सरकारी विद्यालयों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

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वेंडिंग मशीनों का उद्घाटन और नैपकिन वितरण

पीवीयूएनएल की सीएसआर (CSR) टीम ने एस.एस. हाई स्कूल, पतरातु और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पतरातु में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनों का उद्घाटन किया। इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं के बीच 10,000 सेनेटरी नैपकिन का वितरण भी किया गया। यह पहल बालिकाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और उन्हें स्वच्छता के आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।

इन दिग्गजों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम का आयोजन एसएमएस (SMS) की अध्यक्ष, पीवीयूएनएल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), मेडिकल टीम तथा सीएसआर/सीडी टीम की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। अधिकारियों ने छात्राओं से संवाद कर स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डाला।

पहल के मुख्य उद्देश्य:

सहज उपलब्धता: छात्राओं को विद्यालय परिसर में ही स्वच्छ और सुरक्षित मासिक उत्पादों की पहुंच सुनिश्चित करना।

सामाजिक संकोच में कमी: मासिक धर्म से जुड़ी रूढ़ियों और झिझक को दूर कर जागरूकता फैलाना।

शिक्षा को बढ़ावा: स्वास्थ्य समस्याओं के कारण छात्राओं की विद्यालय से होने वाली अनुपस्थिति (Drop-out) को कम करना।

महिला सशक्तिकरण: बालिकाओं की गरिमा और आत्मविश्वास को सुदृढ़ करना।

सामाजिक प्रतिबद्धता

पीवीयूएन लिमिटेड ने दोहराया कि वह अपने आसपास के शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग और समावेशी सामाजिक विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। स्थानीय लोगों और विद्यालय परिवार ने पीवीयूएन की इस संवेनदनशील पहल की सराहना की है।

वेलस्पन वर्ल्ड द्वारा झारखंड में प्लास्टिक उद्योग क्षेत्र में ₹300 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव

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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस के दौरान झारखंड के औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ी है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और वेलस्पन वर्ल्ड के संस्थापक एवं चेयरमैन श्री बी.के. गोयनका के बीच उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें वेलस्पन वर्ल्ड द्वारा झारखंड में प्लास्टिक उद्योग के क्षेत्र में लगभग ₹300 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया गया।

पीवीसी आधारित प्लास्टिक उद्योग में निवेश की संभावना

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य प्रतिनिधिमंडल ने वेलस्पन के प्रतिनिधियों को देवघर स्थित प्रस्तावित प्लास्टिक पार्क की जानकारी दी तथा वहां निवेश की संभावनाओं से अवगत कराया। इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से वेलस्पन की टीम शीघ्र ही झारखंड का दौरा कर स्थल निरीक्षण और विस्तृत अध्ययन करेगी।

क्रिटिकल मिनरल्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी रुचि

वेलस्पन वर्ल्ड ने झारखंड में क्रिटिकल मिनरल्स तथा लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी निवेश की संभावनाओं में रुचि व्यक्त की। राज्य प्रतिनिधिमंडल द्वारा धनबाद स्थित लॉजिस्टिक पार्क, राज्यभर में उपलब्ध वेयरहाउसिंग एवं स्टोरेज सुविधाओं की जानकारी साझा की गई। दोनों पक्षों के बीच निरंतर संवाद बनाए रखते हुए इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने को लेकर सहमति बनी।

यह बैठक झारखंड को औद्योगिक निवेश का एक उभरता हुआ केंद्र बनाने तथा राज्य में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

दावोस में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से ग्लोबल रिटेल आउटलेट कंपनी लूलू ग्रुप के फाउंडर ने की मुलाकात

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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से दुनिया भर में रिटेल आउटलेट के कार्य से जुड़ी कंपनी लूलू ग्रुप के फाउंडर एंड मैनेजिंग डायरेक्टर यूसुफ अली ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री से मुलाकात और संवाद के क्रम में उन्होंने झारखण्ड के कृषि आधारित उत्पाद, वनोत्पाद आदि से जुड़े उत्पादों को आउट सोर्स करने का प्रस्ताव दिया। जिससे झारखण्ड का उत्पाद देश एवं दुनिया भर के बाजार तक पहुंचाया जा सके और यहाँ के किसानों, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और वनोत्पाद के कार्य से जुड़े राज्य के लोगों को लाभ मिले। लूलू ग्रुप झारखण्ड में उत्पादित उन उत्पादों और वस्तुओं के प्रति रुचि दिखाई है जो उनके वैल्यू चेन में आते हैं। ग्रुप द्वारा झारखण्ड में इसके लिए कैपेसिटी बिल्डिंग के क्षेत्र में भी कार्य करने के प्रति इच्छा जताई है।

झारखण्ड की प्राइमरी सप्लायर बनाने की इच्छा

इस मुलाकात और संवाद को आगे बढ़ाने तथा यहाँ के उत्पादों का अध्ययन के लिए लूलू ग्रुप का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल जल्द झारखण्ड का दौरा करेगा। झारखण्ड का प्रयास है कि वह लूलू ग्रुप का प्राइमरी सप्लायर बने। मालूम हो कि देश भर के 21 राज्यों और दुनिया के कई देशों में लूलू ग्रुप के रिटेल आउटलेट हैं।

दावोस में रचा गया इतिहास: सीएम हेमन्त सोरेन को 'व्हाइट बैज' और कल्पना सोरेन को मिला 'WEF बैज'"

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स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 झारखंड के लिए उपलब्धियों का नया अध्याय लेकर आया है। भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में यह पहला अवसर है, जब किसी राज्य के दो निर्वाचित आदिवासी जनप्रतिनिधि—मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और गांडेय विधायक कल्पना मुर्मु सोरेन—एक साथ इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

सर्वोच्च सम्मान से नवाजे गए नेता

इस बार दावोस का मंच झारखंड की शक्ति का साक्षी बना। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा सर्वोच्च सम्मान 'व्हाइट बैज' (White Badge) प्रदान किया गया है। वहीं, झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष कल्पना मुर्मु सोरेन को भी 'WEF बैज' से सम्मानित किया गया।

आदिवासी अस्मिता और वैश्विक पहचान

यह उपलब्धि केवल झारखंड के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण आदिवासी समाज के लिए गर्व का विषय है। यह सम्मान दर्शाता है कि आदिवासी नेतृत्व अब केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक नीति-निर्धारण और आर्थिक संवादों में भी सशक्त भूमिका निभा रहा है।

'जोहार' की गूँज हुई बुलंद

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह सम्मान इस बात का प्रतीक है कि झारखंड अब केवल अपने प्राकृतिक संसाधनों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने सशक्त नेतृत्व और विजन के लिए दुनिया के सामने खड़ा है। इन सम्मानों ने विश्व पटल पर ’जोहार’ की गूँज को और अधिक प्रभावशाली बना दिया है।

सीएम हेमन्त सोरेन के कार्य और विजन की इंफोसिस ग्लोबल के ईवीपी ने की सराहना

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से ग्लोबल इन्फोसिस, कैलिफ़ोर्निया से एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट आशीष कुमार दास ने मुलाकात की। मुलाकात के दौरान झारखंड के दीर्घकालिक विकास विज़न और तकनीक आधारित विकास की दिशा में सहयोग की संभावनाओं पर व्यापक और उत्साहवर्धक चर्चा हुई।

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मुख्यमंत्री के दूरदर्शी विज़न की सराहना, डिजिटल कौशल विकास और एआई आधारित समाधान

इंफोसिस प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के कार्यों और विज़न की सराहना की। विशेष रूप से प्रतिभाओं के पुनः कौशल विकास (री-स्किलिंग), टेक्नोलॉजी टॉवर की परिकल्पना तथा उन्नत तकनीकी हस्तक्षेपों के माध्यम से खनन क्षेत्र के डिजिटल परिवर्तन को लेकर राज्य सरकार की सोच को अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक बताया। साथ ही, बैठक में झारखण्ड के युवाओं को डिजिटल एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कौशलों से सशक्त बनाने पर सहमति बनी। इस दिशा में इंफोसिस के विंग्सपैन प्लेटफॉर्म की संभावित भूमिका पर आगे चर्चा किए जाने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही, खनन क्षेत्र में उत्पादकता, सुरक्षा और दक्षता बढ़ाने के लिए इंफोसिस द्वारा विकसित एआई आधारित डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन समाधानों को प्रस्तुत करने पर भी सहमति बनी।इसे लेकर फरवरी में एक वर्चुअल सत्र आयोजित किए जाने पर भी सहमति बनी।

तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने की पहल

इंफोसिस ग्लोबल की ओर से मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन, मुख्य सचिव एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को इंफोसिस हाउस भ्रमण का आमंत्रण दिया गया, जहाँ कंपनी द्वारा विकसित अत्याधुनिक एआई आधारित नवाचारों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह बैठक झारखण्ड में डिजिटल परिवर्तन, कौशल विकास और तकनीक आधारित औद्योगिक प्रगति को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।आईटी, एआई और अन्य तकनीकों पर सीएम हेमंत सोरेन की दावोस में हो रही बैठेकें युवा झारखण्ड को एक मजबूत दिशा देने का काम करेंगी।

महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने दावोस में लोढ़ा डेवलपर्स के साथ समझौता किया, इस पर क्या बोलेंगे भाजपाई : विनोद पांडेय

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भाजपा नेता का बयान न सिर्फ़ तथ्यों से परे है, बल्कि भाजपा की दोहरे मापदंड वाली राजनीति को भी बेनकाब करता है। जब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वैश्विक मंच पर राज्य के लिए निवेश लाने जाते हैं, तो भाजपा को वह “पर्यटन यात्रा” दिखती है। लेकिन जब भाजपा शासित राज्यों के मंत्री और उनके परिवार दावोस में समझौते करते हैं, तब वही काम “विकास का मॉडल” बन जाता है।

भाजपा को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने दावोस में लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड के साथ निवेश का जो प्रारंभिक समझौता किया है, उस पर उनकी क्या राय है? यही नहीं, चार महीने पहले इसी कंपनी के साथ एक एमओयू भी साइन किया गया था।

अब ज़रा सच्चाई पर भी नज़र डालिए—

लोढ़ा डेवलपर्स के मालिक मंगल प्रभात लोढ़ा, महाराष्ट्र सरकार में भाजपा के मंत्री हैं (कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय)। और दावोस में महाराष्ट्र सरकार के साथ एमओयू पर दस्तखत कर रहे हैं उनके बेटे अभिषेक लोढ़ा।

तो सवाल यह है—

क्या यह पर्यटन नहीं है?

क्या यह हितों का टकराव नहीं है?

या फिर भाजपा के लिए दावोस केवल तब गलत होता है जब वहां गैर-भाजपा मुख्यमंत्री मौजूद हो?

भाजपा नेता टाटा और इंफोसिस के पते गिनाने से पहले यह भी बताएं कि क्या वैश्विक कंपनियों के फैसले आज सिर्फ़ गली-मोहल्ले की बैठकों में होते हैं? दावोस जैसे मंच पर निवेश का मतलब होता है ग्लोबल स्ट्रैटेजी, सप्लाई चेन, इंटरनेशनल कमिटमेंट और लॉन्ग टर्म पार्टनरशिप—जिसे भाजपा या तो समझना नहीं चाहती, या जानबूझकर नजरअंदाज कर रही है।

उन्होंने कहा कि - जब झारखंड के मुख्यमंत्री दुनिया के सामने राज्य की संभावनाएं रखते हैं, तो भाजपा को जलन होती है। लेकिन जब उनके अपने मंत्री का परिवार दावोस में समझौता करते हैं, तब भाजपा को न नैतिकता याद आती है, न सिद्धांत।

महासचिव पांडेय ने कहा जहां तक एमएसएमई और स्थानीय उद्योगों की बात है—झामुमो सरकार ने ही पहली बार नीतिगत सुधार, निवेश नीति और औद्योगिक प्रोत्साहन को जमीनी स्तर तक पहुंचाया है। और यही कारण है कि आज झारखंड वैश्विक निवेश मानचित्र पर दिखाई दे रहा है।

अंत में भाजपा से बस इतना सवाल है—

अगर दावोस में झारखंड का जाना अपराध है,

तो दावोस में महाराष्ट्र का जाना पुण्य कैसे हो गया?

भाजपा पहले अपनी दोहरी नीति, परिवारवाद और सत्ता के दुरुपयोग पर जवाब दे, फिर झारखंड के मुख्यमंत्री पर उंगली उठाए। झारखंड को अब ट्रोल नहीं, वैश्विक पहचान चाहिए—और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वही कर रहे हैं।

झारखंड की मेगालिथ विरासत को मिलेगी वैश्विक पहचान: यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की तैयारी

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मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के विजन के अनुरूप झारखंड की प्राचीन और अमूल्य मेगालिथ (Megalith) और मोनोलिथ (Monolith) विरासत को विश्व पटल पर लाने की कवायद शुरू हो गई है। झारखंड सरकार के मंत्री श्री सुदिव्य कुमार के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने यूनाइटेड किंगडम के दौरे पर अंतरराष्ट्रीय पुरातत्व और संरक्षण विशेषज्ञों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं।

विश्व धरोहर (UNESCO World Heritage) की ओर बढ़ते कदम

बैठक का मुख्य उद्देश्य झारखंड के प्राचीन पत्थरों और ऐतिहासिक संरचनाओं का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण (Documentation) और पुनर्स्थापन करना है। चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि कैसे इन संरचनाओं को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए एक ठोस प्रस्ताव तैयार किया जाए।

प्रमुख संस्थानों के साथ तकनीकी सहयोग

प्रतिनिधिमंडल ने लंदन के विख्यात संस्थानों और विशेषज्ञ समूहों के साथ संवाद किया, जिनमें प्रमुख हैं:

Museum of London Archaeology (MOLA)

University College London (UCL)

AECOM, Arup और Wessex Archaeology

इन विशेषज्ञों ने मेगालिथिक स्थलों के वैज्ञानिक प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संरक्षण रणनीतियों पर अपने सुझाव साझा किए।

आदिवासी पहचान और जीवंत संस्कृति का संरक्षण

इस अवसर पर मंत्री श्री सुदिव्य कुमार ने कहा:

"मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार इन विरासतों को केवल पुरातात्विक अवशेष नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय की जीवंत सांस्कृतिक पहचान मानती है। हमारा प्रयास है कि वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से इन स्थलों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जाए।"

भविष्य का रोडमैप

राज्य सरकार इन बैठकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार करेगी। इसमें अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग और परामर्श के अनुभवों का लाभ उठाकर झारखंड की मेगालिथिक विरासत का सांस्कृतिक और शैक्षणिक स्तर पर विकास किया जाएगा।

दावोस के मंच पर गूँजा झारखंड का 'महिला-केंद्रित विकास विजन': श्रीमती कल्पना मुर्मू सोरेन ने पेश किया आदिवासी मॉडल

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक के दौरान, झारखंड पवेलियन में एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। झारखंड विधानसभा की सदस्य और महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष श्रीमती कल्पना मुर्मू सोरेन ने ब्रिक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स (BRICS CCI) के सहयोग से आयोजित इस सत्र में झारखंड के 'महिला-केंद्रित विकास मॉडल' को वैश्विक लीडर्स के सामने रखा।

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आदिवासी मूल्यों और जल-जंगल-जमीन का संरक्षण

सत्र को संबोधित करते हुए श्रीमती सोरेन ने कहा कि झारखंड का विकास मॉडल राज्य के आदिवासी और स्वदेशी मूल्यों पर टिका है। उन्होंने जोर दिया कि प्रकृति के साथ हमारा रिश्ता दोहन का नहीं, बल्कि संरक्षण का है, और इस संरक्षण की सबसे बड़ी वाहक हमारी महिलाएं हैं।

'अदृश्य श्रम' को पहचान देने की वकालत

श्रीमती कल्पना मुर्मू सोरेन ने एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दे को वैश्विक मंच पर उठाते हुए कहा कि आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं के 'अदृश्य श्रम' (देखभाल और सामुदायिक कार्य) को अर्थव्यवस्था की नींव के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड की नीतियां गृहिणियों और अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं के आत्मविश्वास और गरिमा को बढ़ाने के लिए समर्पित हैं।

JSLPS और स्वयं सहायता समूहों (SHG) की सफलता

उन्होंने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) की सफलता का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे लाखों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय उत्पादन में नेतृत्व कर रही हैं। यह मॉडल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि उन्हें सामाजिक रूप से भी सशक्त कर रहा है।

मुख्यमंत्री का विजन: 'पीपल फर्स्ट'

श्रीमती सोरेन ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार का शासन ढांचा संसाधनों से ऊपर 'लोगों' को प्राथमिकता देता है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब महिलाएं आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होंगी, तभी देश का सतत विकास संभव होगा।

झारखण्ड केवल खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों का निर्यातक राज्य बनकर नहीं रहना चाहता: हेमन्त सोरेन

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मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय राउंडटेबल मीटिंग “Delivering Sustainability at Scale: Pathways for Global Transformation” में भाग लिया।

झारखण्ड के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ देने का लक्ष्य

इस अवसर पर वैश्विक नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं एवं संस्थागत निवेशकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड केवल खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों का निर्यातक राज्य बनकर नहीं रहना चाहता। राज्य सरकार का लक्ष्य संसाधनों के मूल्य संवर्धन, सतत औद्योगिकीकरण और जन-केंद्रित विकास की दिशा में आगे बढ़ना है, जिससे झारखण्ड के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिले। “हमारा उद्देश्य केवल प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि उनका जिम्मेदार और सतत उपयोग सुनिश्चित करना है, ताकि रोजगार के अवसर सृजित हों और लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सततता का अर्थ केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक समावेशन से भी है, विशेषकर स्थानीय एवं आदिवासी समुदायों के लिए।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उन पहलों का उल्लेख किया जिनके माध्यम से खनिज आधारित डाउनस्ट्रीम उद्योगों, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन विकास के जरिए रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय एवं सामाजिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

पर्यटन के विकास पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने झारखण्ड की विशाल और अब तक काफी हद तक अप्रयुक्त पर्यटन संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य इको-टूरिज्म, प्रकृति आधारित पर्यटन और सांस्कृतिक पर्यटन को सतत विकास के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित करना चाहता है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हो और प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। दीर्घकालिक विकास दृष्टि को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने वैश्विक निवेशकों और साझेदारों को जिम्मेदार खनन, सतत विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा तथा पर्यटन अवसंरचना के क्षेत्र में झारखंड के साथ सहयोग के लिए आमंत्रित किया।

CII द्वारा आयोजित इस वैश्विक सततता संवाद में झारखण्ड की भागीदारी राज्य की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत आर्थिक विकास को पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामाजिक समावेशन के साथ जोड़ा जा रहा है।