उत्तराखंड में बदलेगा मौसम, ऑरेंज अलर्ट जारी, 24 जनवरी तक भारी बारिश और बर्फबारी का अनुमान
![]()
टिहरी गढ़वाल में शिक्षक संघ अध्यक्ष पर शिक्षिका के गंभीर आरोप
![]()
टिहरी गढ़वाल। टिहरी गढ़वाल जिले में एक शिक्षिका ने शिक्षक संघ के अध्यक्ष पर मानसिक शोषण और गंभीर उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए थाना नई टिहरी में शिकायत दर्ज कराई है। शिक्षिका ने आरोप लगाया है कि उसे लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है और उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया गया। मामले में एसएसपी ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि की है। शिक्षिका द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि शिक्षक संघ के अध्यक्ष ने फोन कॉल और व्हाट्सएप के जरिए अश्लील और आपत्तिजनक बातें कीं। आरोप है कि आरोपी ने शारीरिक संबंध बनाने की मांग की, कई बार पैसों की डिमांड की और अश्लील फोटो व वीडियो भी भेजे। इन हरकतों से वह और उसका परिवार लंबे समय से भय और मानसिक तनाव में जी रहा है।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पिछले चार महीनों से उसका वेतन रोक दिया गया है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। शिक्षिका का कहना है कि उसने इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।पीड़िता ने यह भी बताया कि उसका समायोजन जानबूझकर दूरस्थ विद्यालय में कर दिया गया है, जबकि वह पिछले 29 वर्षों से दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देती आ रही है। लगातार हो रही प्रताड़ना और वेतन न मिलने के कारण वह पिछले एक साल से डिप्रेशन में है।मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन में हलचल मच गई है। पुलिस का कहना है कि दर्ज शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित शिक्षिका ने प्रशासन से न्याय और सुरक्षा की मांग की है।![]()
![]()
![]()
उत्तराखंड : चकराता में सेब के बगीचे में लगी आग, 300 पेड़ जलकर खाक
* बागवान को भारी आर्थिक नुकसान, सरकार से लगाई मदद की गुहार
विकासनगर। देहरादून जिले के चकराता क्षेत्र में आग की एक बड़ी घटना सामने आई है। विकासनगर–जौनसार क्षेत्र के अस्टाड़ गांव में एक सेब के बगीचे में अचानक आग लग गई, जिससे करीब 300 से अधिक सेब के पेड़ जलकर नष्ट हो गए। इस घटना से बागवान को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और वह गहरे सदमे में है।
जानकारी के अनुसार अस्टाड़–मंगरौली मोटर मार्ग के किनारे सूखी घास की पट्टी में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। तेज लपटों और हवा के झोंकों के चलते आग पास में स्थित अस्टाड़ निवासी ब्रह्म दत्त जोशी के सेब के बगीचे तक पहुंच गई और कुछ ही समय में पूरे बगीचे को अपनी चपेट में ले लिया।
पीड़ित बागवान ब्रह्म दत्त जोशी ने बताया कि उनके बगीचे में लगे करीब 300 सेब के पेड़ों में कई पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए, जबकि कुछ पेड़ आंशिक रूप से झुलस गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से यह सेब का बगीचा तैयार किया था और इस साल अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन आग की इस घटना ने उनकी सालों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
ब्रह्म दत्त जोशी के अनुसार आग लगने के कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है। संभव है कि किसी छोटी सी चिंगारी से सूखी घास में आग लगी हो, जो तेजी से फैलती चली गई। उन्होंने इस घटना की सूचना तहसील प्रशासन को दे दी है और नुकसान का आंकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।
बताया जा रहा है कि लंबे समय से क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण घास पूरी तरह सूख चुकी है। दिन में तेज धूप निकलने से सूखी घास आग को तुरंत पकड़ लेती है, जिससे छोटी चिंगारी भी बड़ी आग में तब्दील हो जाती है। इसी वजह से क्षेत्र में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिसका असर बागवानी और अन्य फसलों पर भी पड़ रहा है।
गौरतलब है कि जौनसार-बावर क्षेत्र में किसान लगातार बागवानी को बढ़ावा दे रहे हैं। युवा भी सेब की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं, लेकिन आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बागवान किसानों के हौसले टूट रहे हैं।
चकराता क्षेत्र की ठंडी जलवायु और पहाड़ी ढलान सेब उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। चकराता–मसूरी मार्ग पर रामताल उद्यान सहित आसपास के क्षेत्रों में सेब के बगीचे हैं, जिनके सेब काफी प्रसिद्ध हैं। इन्हीं से प्रेरित होकर बुल्हाड़ सहित कई गांवों में सेब की बागवानी की जा रही है। ऐसे में इस तरह की आग की घटनाएं सेब उत्पादकों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही हैं।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण: हरिद्वार में भजन-कीर्तन से विरोध, प्रयागराज प्रशासन से माफी की मांग
![]()
हरिद्वार। प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोके जाने और उनके शिष्यों के साथ कथित मारपीट के विरोध में देशभर में आक्रोश फैलता जा रहा है। इसी क्रम में हरिद्वार के कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में राम नाम भजन-कीर्तन कर विरोध दर्ज कराया गया।
शंकराचार्य मठ में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्य शामिल हुए। इस दौरान राम नाम का जप किया गया और प्रयागराज प्रशासन पर बर्बरता का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई। संतों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र माफी नहीं मांगी तो खून से पत्र लिखकर विरोध दर्ज कराया जाएगा और प्रयागराज कूच किया जाएगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भगवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शांतिपूर्वक गंगा स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन प्रयागराज प्रशासन ने उन्हें जबरन रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिष्यों के साथ लात-घूंसों से बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई। यहां तक कि 85 वर्षीय संत के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
उन्होंने मांग की कि प्रयागराज में धरने पर बैठे शंकराचार्य से प्रशासन तत्काल सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। संतों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो देशभर से संत और श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचकर आंदोलन करेंगे।
वहीं, पंडित विष्णुदास ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में एक संत के साथ इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है। गंगा स्नान से रोकने का तरीका पूरी तरह गलत है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने राम नाम जप कर ईश्वर से प्रशासन को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की।
श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने भी प्रयागराज माघ मेले की घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य के शिष्यों को घसीटा गया, जो अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने सभी धार्मिक और सामाजिक संगठनों से एकजुट होकर शंकराचार्य के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की।
पंडित अधीर कौशिक ने ऐलान किया कि मंगलवार को प्रयागराज प्रशासन के विरोध में खून से पत्र लिखा जाएगा और राष्ट्रपति को संबोधित कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
गौरतलब है कि मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के काफिले को पुलिस ने संगम तट जाने से रोक दिया था। इसके बाद समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई थी। इस घटना के बाद शंकराचार्य मौन उपवास पर बैठ गए हैं, जबकि देशभर में उनके समर्थक लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
देहरादून में जर्जर स्कूल बने ‘यमराज’: 100 स्कूलों की रिपोर्ट में 79 भवन निष्प्रोज्य, ध्वस्तीकरण के आदेश
![]()
* मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर डीएम सविन बंसल की सख्ती, बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला
देहरादून। देहरादून जिले में स्कूली बच्चों की जान के लिए खतरा बन चुकी जर्जर स्कूल इमारतों पर जिला प्रशासन ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के बाद जिलाधिकारी सविन बंसल ने एक साथ 79 जर्जर स्कूल भवनों को ध्वस्त करने के आदेश जारी किए हैं। इन इमारतों में लंबे समय से शिक्षण कार्य संचालित हो रहा था, जिससे नौनिहालों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था।
डीएम की सख्ती के चलते महज 10 दिनों के भीतर जिले के 100 स्कूलों से संबंधित जर्जर भवनों की विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी गई। रिपोर्ट में देरी को लेकर जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग को कड़ा संदेश दिया था, जिसके बाद तकनीकी आकलन और विद्यालयवार सूची के साथ रिपोर्ट तैयार की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून जनपद में कुल 79 विद्यालय भवन पूरी तरह निष्प्रोज्य पाए गए हैं। इनमें 13 माध्यमिक और 66 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। इनमें से 63 विद्यालयों में बच्चों के पठन-पाठन की वैकल्पिक व्यवस्था पहले ही सुनिश्चित कर दी गई है, जबकि 16 विद्यालयों में अभी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी है। इन विद्यालयों के लिए तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा 17 विद्यालयों को आंशिक रूप से निष्प्रोज्य घोषित किया गया है, जहां भवन का कुछ हिस्सा असुरक्षित है। वहीं 8 विद्यालय ऐसे पाए गए हैं, जिन भवनों को फिलहाल सुरक्षित मानते हुए ध्वस्तीकरण की आवश्यकता नहीं बताई गई है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग को निष्प्रोज्य और आंशिक निष्प्रोज्य विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण और मरम्मत के लिए विस्तृत एस्टिमेट तैयार करने को कहा गया है। इस कार्य के लिए एक करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है, ताकि सुरक्षा से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरी तरह निष्प्रोज्य विद्यालय भवनों में तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। जहां वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था अभी नहीं है, वहां पहले बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा, उसके बाद भवन गिराए जाएंगे। आंशिक रूप से निष्प्रोज्य भवनों में मरम्मत, प्रतिबंध और आवश्यक एहतियाती उपाय लागू किए जाएंगे।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने दो टूक कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी परिस्थिति में जोखिमपूर्ण भवनों में शिक्षण कार्य संचालित नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन इस अभियान को समयबद्ध, पारदर्शी और पूरी जवाबदेही के साथ पूरा करेगा।
उत्तराखंड : मौनी अमावस्या पर हरिद्वार में उमड़ी आस्था की लहर, गंगा में श्रद्धालुओं ने लगाई पावन डुबकी
![]()
* हर की पैड़ी से नारायणी शिला मंदिर तक भक्तों का सैलाब, गूंजे हर-हर गंगे के जयकारे
हरिद्वार। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का सागर उमड़ पड़ा। सुबह तड़के चार बजे से ही हर की पैड़ी और आसपास के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं ने गंगा की पवित्र धारा में स्नान शुरू कर दिया। घाटों पर “हर-हर गंगे” और “जय मां गंगे” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन धारण कर गंगा स्नान करने, अन्न, वस्त्र, तिल और गुड़ का दान करने का विशेष महत्व है। नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि माघ माह की यह अमावस्या अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। इस दिन गंगा स्नान करने से कुंभ स्नान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता और ऋषि-मुनि भी पृथ्वी पर स्नान करने आते हैं तथा दान-पुण्य करने से सहस्त्र वर्षों तक पुण्य फल मिलता है।
कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालु देश के विभिन्न हिस्सों से हरिद्वार पहुंचे। सुबह ठंड अधिक होने के कारण शुरुआती घंटों में भीड़ अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन जैसे-जैसे धूप तेज हुई, घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई।
अमावस्या के कारण नारायणी शिला मंदिर में भी विशेष चहल-पहल देखने को मिली। यहां श्रद्धालु अपने पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और पूजन करते नजर आए। धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर में पितरों के निमित्त किए गए कर्म से उन्हें शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
स्नान पर्व को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। घाटों पर पर्याप्त पुलिस बल और गोताखोरों की तैनाती की गई है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें। मौनी अमावस्या पर हरिद्वार की यह दिव्य और अलौकिक छटा एक बार फिर भक्तों की अटूट आस्था और श्रद्धा का प्रतीक बनकर सामने आई।
उत्तराखंड: मसूरी में जॉर्ज एवरेस्ट मार्ग विवाद तूल पकड़ा, पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने किया निरीक्षण
![]()
* सार्वजनिक रास्ता बंद करने और अवैध शुल्क वसूली पर सख्त रुख, कंपनी को 10 दिन का अल्टीमेटम
मसूरी। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जॉर्ज एवरेस्ट पीक जाने वाले मार्ग को लेकर चल रहा विवाद अब गंभीर होता जा रहा है। आम रास्ते पर प्रवेश रोकने और कथित अवैध शुल्क वसूली को लेकर स्थानीय लोगों, पर्यटकों और जॉर्ज एवरेस्ट प्रबंधन के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने पालिका अधिकारियों और जॉर्ज एवरेस्ट संघर्ष समिति के सदस्यों के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया।
पालिका अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद माहौल कुछ शांत हुआ और निरीक्षण टीम को अंदर जाने की अनुमति दी गई। मौके पर जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि जॉर्ज एवरेस्ट पीक तक जाने वाला मार्ग ऐतिहासिक रूप से सार्वजनिक रहा है, जिस पर आम नागरिकों और पर्यटकों का निर्बाध आवागमन का अधिकार है।
पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह रास्ता सार्वजनिक है और इसे निजी बताकर रोकना या किसी भी प्रकार का शुल्क वसूलना पूरी तरह अवैध है। उन्होंने कंपनी प्रबंधन को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में आम रास्ता नहीं खोला गया या अवैध वसूली बंद नहीं हुई, तो नगर पालिका सख्त कार्रवाई करेगी। जरूरत पड़ी तो प्रशासनिक स्तर पर मार्ग को पूर्णतः बंद करने का निर्णय भी लिया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय के पूर्व निर्देशों का अध्ययन किया जा रहा है। साथ ही पर्यटन विभाग की ओर से भी यह स्पष्ट किया गया है कि भूमि हस्तांतरण के दौरान कोई भी सार्वजनिक मार्ग कंपनी को नहीं सौंपा गया था। सार्वजनिक मार्गों की संरक्षक नगर पालिका है और उनके संरक्षण से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पालिका अध्यक्ष ने दो टूक कहा कि मसूरी में न तो स्थानीय लोगों का शोषण बर्दाश्त किया जाएगा और न ही पर्यटकों से जबरन उगाही होने दी जाएगी।
जॉर्ज एवरेस्ट संघर्ष समिति के सदस्य भगत सिंह कठैत ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद कंपनी तानाशाही रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा और अवमानना याचिका भी दायर की जाएगी। पालिका सभासद जसवीर कौर ने अध्यक्ष के फैसले का समर्थन करते हुए इसे जनहित में उठाया गया साहसिक कदम बताया।
वहीं कांग्रेस नेता डॉ. सोनिया आनंद ने प्रदेश सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने नियमों की अनदेखी कर कंपनी को करोड़ों रुपये की जमीन औने-पौने दामों पर लीज पर दी। उन्होंने भी आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
फिलहाल जॉर्ज एवरेस्ट मार्ग को लेकर विवाद प्रशासन, कंपनी प्रबंधन और स्थानीय संगठनों के बीच टकराव का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में यदि समाधान नहीं निकला तो स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
उत्तराखंड : धामी सरकार की बड़ी सौगात: वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को मिलेगा 18 हजार रुपए न्यूनतम वेतन
![]()
* मंत्रिमंडलीय उप-समिति ने प्रस्ताव को दी मंजूरी, कैबिनेट से स्वीकृति के बाद लगभग 700 श्रमिकों को होगा लाभ
देहरादून। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को बड़ी राहत देने की दिशा में अहम कदम उठाया है। राज्य सरकार ने वन विभाग में कार्यरत दैनिक श्रमिकों को सातवें वेतन आयोग के अनुरूप न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देने के प्रस्ताव पर सहमति जता दी है। वन मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडलीय उप-समिति ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है।
उप-समिति की सिफारिश के बाद यह प्रस्ताव अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष रखा जाएगा। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलने के पश्चात इसे कैबिनेट में लाया जाएगा। कैबिनेट से स्वीकृति मिलते ही राज्य के वन विभाग में कार्यरत लगभग 700 दैनिक श्रमिकों को इसका सीधा लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
वन विभाग के दैनिक श्रमिक जंगलों में गश्त, वन्यजीव संरक्षण, जंगल की आग बुझाने और अवैध कटान रोकने जैसे अत्यंत जोखिम भरे और चुनौतीपूर्ण कार्य करते हैं। लंबे समय से कम वेतन और सीमित सुविधाओं में कार्य कर रहे इन श्रमिकों की मेहनत और समर्पण को देखते हुए सरकार ने उनके वेतनमान में सुधार का निर्णय लिया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में करीब 300 दैनिक श्रमिकों को महंगाई भत्ता देने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन कई श्रमिक इससे वंचित रह गए थे। अब सरकार का यह कदम शेष श्रमिकों को भी समान लाभ दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पृथ्वी सिंह राणा ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने मांग की है कि न्यूनतम वेतन के साथ महंगाई भत्ता और एरियर का भी प्रावधान किया जाए तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार सभी वैधानिक लाभ दैनिक श्रमिकों को मिलें।
धामी सरकार के इस निर्णय से न केवल वन विभाग के दैनिक श्रमिकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उनके मनोबल में भी वृद्धि होगी। उपनल कर्मचारियों के बाद वन श्रमिकों के लिए उठाया गया यह कदम राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस फैसले के शीघ्र लागू होने की उम्मीद है।
उत्तराखंड : महिला स्पोर्ट्स हॉस्टल निर्माण को लेकर खेल मंत्री रेखा आर्या सख्त, जानें क्या कहा ?
![]()
चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बाद चंपावत जिले की लोहाघाट तहसील क्षेत्र में उत्तराखंड के पहले महिला स्पोर्ट्स हॉस्टल एवं स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है। शुक्रवार को राज्य की खेल मंत्री रेखा आर्या ने जिलाधिकारी चंपावत और खेल विभाग के अधिकारियों के साथ निर्माणाधीन परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया और कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रदेश की महिला खिलाड़ियों के लिए एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश की बेटियों को खेल के क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और उत्तराखंड का पहला महिला स्पोर्ट्स कॉलेज इसी दिशा में एक बड़ा प्रयास है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्ष 2027 तक महिला स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण कार्य हर हाल में पूर्ण किया जाए।
लोहाघाट क्षेत्र के छमनिया में लगभग 237 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे उत्तराखंड के पहले महिला स्पोर्ट्स कॉलेज को निरीक्षण के दौरान मंत्री ने महिला खेल प्रतिभाओं के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कार्यदायी संस्था और विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। रेखा आर्या ने स्पष्ट किया कि गुणवत्ता या समयबद्धता में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान खेल मंत्री ने लगभग पूर्ण हो चुके सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक का भी जायजा लिया और वहां अभ्यास कर रही महिला खिलाड़ियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि लोहाघाट का यह महिला स्पोर्ट्स कॉलेज आने वाले समय में उत्तराखंड के खेल क्षेत्र का पावर हाउस साबित होगा और यहां से तैयार होने वाली खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करेंगी।
रेखा आर्या ने बताया कि इस संस्थान में सभी खेल सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित की जा रही हैं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने फुटबॉल ग्राउंड, एस्ट्रोटर्फ हॉकी ग्राउंड, वॉलीबॉल और बास्केटबॉल कोर्ट, अन्य खेल मैदानों के साथ-साथ खिलाड़ियों के छात्रावास, स्टाफ क्वार्टर, प्रशासनिक भवन और एडमिन ब्लॉक की प्रगति की भी समीक्षा की।
इस महिला स्पोर्ट्स कॉलेज में 300 बालिकाओं की क्षमता वाले तीन छात्रावास, मल्टीपर्पज हॉल, एकेडमिक ब्लॉक, ऑडिटोरियम और गेस्ट हाउस जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। खेल मंत्री ने कहा कि यह संस्थान महिला खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, शिक्षा और आवास की एक समग्र व्यवस्था प्रदान करेगा, जिससे विशेषकर ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों की प्रतिभाशाली बेटियों को आगे बढ़ने का सशक्त मंच मिलेगा।
1 hour and 26 min ago