दावोस में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से ग्लोबल रिटेल आउटलेट कंपनी लूलू ग्रुप के फाउंडर ने की मुलाकात

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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से दुनिया भर में रिटेल आउटलेट के कार्य से जुड़ी कंपनी लूलू ग्रुप के फाउंडर एंड मैनेजिंग डायरेक्टर यूसुफ अली ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री से मुलाकात और संवाद के क्रम में उन्होंने झारखण्ड के कृषि आधारित उत्पाद, वनोत्पाद आदि से जुड़े उत्पादों को आउट सोर्स करने का प्रस्ताव दिया। जिससे झारखण्ड का उत्पाद देश एवं दुनिया भर के बाजार तक पहुंचाया जा सके और यहाँ के किसानों, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और वनोत्पाद के कार्य से जुड़े राज्य के लोगों को लाभ मिले। लूलू ग्रुप झारखण्ड में उत्पादित उन उत्पादों और वस्तुओं के प्रति रुचि दिखाई है जो उनके वैल्यू चेन में आते हैं। ग्रुप द्वारा झारखण्ड में इसके लिए कैपेसिटी बिल्डिंग के क्षेत्र में भी कार्य करने के प्रति इच्छा जताई है।

झारखण्ड की प्राइमरी सप्लायर बनाने की इच्छा

इस मुलाकात और संवाद को आगे बढ़ाने तथा यहाँ के उत्पादों का अध्ययन के लिए लूलू ग्रुप का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल जल्द झारखण्ड का दौरा करेगा। झारखण्ड का प्रयास है कि वह लूलू ग्रुप का प्राइमरी सप्लायर बने। मालूम हो कि देश भर के 21 राज्यों और दुनिया के कई देशों में लूलू ग्रुप के रिटेल आउटलेट हैं।

दावोस में रचा गया इतिहास: सीएम हेमन्त सोरेन को 'व्हाइट बैज' और कल्पना सोरेन को मिला 'WEF बैज'"

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स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 झारखंड के लिए उपलब्धियों का नया अध्याय लेकर आया है। भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में यह पहला अवसर है, जब किसी राज्य के दो निर्वाचित आदिवासी जनप्रतिनिधि—मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और गांडेय विधायक कल्पना मुर्मु सोरेन—एक साथ इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

सर्वोच्च सम्मान से नवाजे गए नेता

इस बार दावोस का मंच झारखंड की शक्ति का साक्षी बना। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा सर्वोच्च सम्मान 'व्हाइट बैज' (White Badge) प्रदान किया गया है। वहीं, झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष कल्पना मुर्मु सोरेन को भी 'WEF बैज' से सम्मानित किया गया।

आदिवासी अस्मिता और वैश्विक पहचान

यह उपलब्धि केवल झारखंड के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण आदिवासी समाज के लिए गर्व का विषय है। यह सम्मान दर्शाता है कि आदिवासी नेतृत्व अब केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक नीति-निर्धारण और आर्थिक संवादों में भी सशक्त भूमिका निभा रहा है।

'जोहार' की गूँज हुई बुलंद

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह सम्मान इस बात का प्रतीक है कि झारखंड अब केवल अपने प्राकृतिक संसाधनों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने सशक्त नेतृत्व और विजन के लिए दुनिया के सामने खड़ा है। इन सम्मानों ने विश्व पटल पर ’जोहार’ की गूँज को और अधिक प्रभावशाली बना दिया है।

सीएम हेमन्त सोरेन के कार्य और विजन की इंफोसिस ग्लोबल के ईवीपी ने की सराहना

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से ग्लोबल इन्फोसिस, कैलिफ़ोर्निया से एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट आशीष कुमार दास ने मुलाकात की। मुलाकात के दौरान झारखंड के दीर्घकालिक विकास विज़न और तकनीक आधारित विकास की दिशा में सहयोग की संभावनाओं पर व्यापक और उत्साहवर्धक चर्चा हुई।

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मुख्यमंत्री के दूरदर्शी विज़न की सराहना, डिजिटल कौशल विकास और एआई आधारित समाधान

इंफोसिस प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के कार्यों और विज़न की सराहना की। विशेष रूप से प्रतिभाओं के पुनः कौशल विकास (री-स्किलिंग), टेक्नोलॉजी टॉवर की परिकल्पना तथा उन्नत तकनीकी हस्तक्षेपों के माध्यम से खनन क्षेत्र के डिजिटल परिवर्तन को लेकर राज्य सरकार की सोच को अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक बताया। साथ ही, बैठक में झारखण्ड के युवाओं को डिजिटल एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कौशलों से सशक्त बनाने पर सहमति बनी। इस दिशा में इंफोसिस के विंग्सपैन प्लेटफॉर्म की संभावित भूमिका पर आगे चर्चा किए जाने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही, खनन क्षेत्र में उत्पादकता, सुरक्षा और दक्षता बढ़ाने के लिए इंफोसिस द्वारा विकसित एआई आधारित डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन समाधानों को प्रस्तुत करने पर भी सहमति बनी।इसे लेकर फरवरी में एक वर्चुअल सत्र आयोजित किए जाने पर भी सहमति बनी।

तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने की पहल

इंफोसिस ग्लोबल की ओर से मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन, मुख्य सचिव एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को इंफोसिस हाउस भ्रमण का आमंत्रण दिया गया, जहाँ कंपनी द्वारा विकसित अत्याधुनिक एआई आधारित नवाचारों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह बैठक झारखण्ड में डिजिटल परिवर्तन, कौशल विकास और तकनीक आधारित औद्योगिक प्रगति को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।आईटी, एआई और अन्य तकनीकों पर सीएम हेमंत सोरेन की दावोस में हो रही बैठेकें युवा झारखण्ड को एक मजबूत दिशा देने का काम करेंगी।

महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने दावोस में लोढ़ा डेवलपर्स के साथ समझौता किया, इस पर क्या बोलेंगे भाजपाई : विनोद पांडेय

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भाजपा नेता का बयान न सिर्फ़ तथ्यों से परे है, बल्कि भाजपा की दोहरे मापदंड वाली राजनीति को भी बेनकाब करता है। जब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वैश्विक मंच पर राज्य के लिए निवेश लाने जाते हैं, तो भाजपा को वह “पर्यटन यात्रा” दिखती है। लेकिन जब भाजपा शासित राज्यों के मंत्री और उनके परिवार दावोस में समझौते करते हैं, तब वही काम “विकास का मॉडल” बन जाता है।

भाजपा को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने दावोस में लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड के साथ निवेश का जो प्रारंभिक समझौता किया है, उस पर उनकी क्या राय है? यही नहीं, चार महीने पहले इसी कंपनी के साथ एक एमओयू भी साइन किया गया था।

अब ज़रा सच्चाई पर भी नज़र डालिए—

लोढ़ा डेवलपर्स के मालिक मंगल प्रभात लोढ़ा, महाराष्ट्र सरकार में भाजपा के मंत्री हैं (कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय)। और दावोस में महाराष्ट्र सरकार के साथ एमओयू पर दस्तखत कर रहे हैं उनके बेटे अभिषेक लोढ़ा।

तो सवाल यह है—

क्या यह पर्यटन नहीं है?

क्या यह हितों का टकराव नहीं है?

या फिर भाजपा के लिए दावोस केवल तब गलत होता है जब वहां गैर-भाजपा मुख्यमंत्री मौजूद हो?

भाजपा नेता टाटा और इंफोसिस के पते गिनाने से पहले यह भी बताएं कि क्या वैश्विक कंपनियों के फैसले आज सिर्फ़ गली-मोहल्ले की बैठकों में होते हैं? दावोस जैसे मंच पर निवेश का मतलब होता है ग्लोबल स्ट्रैटेजी, सप्लाई चेन, इंटरनेशनल कमिटमेंट और लॉन्ग टर्म पार्टनरशिप—जिसे भाजपा या तो समझना नहीं चाहती, या जानबूझकर नजरअंदाज कर रही है।

उन्होंने कहा कि - जब झारखंड के मुख्यमंत्री दुनिया के सामने राज्य की संभावनाएं रखते हैं, तो भाजपा को जलन होती है। लेकिन जब उनके अपने मंत्री का परिवार दावोस में समझौता करते हैं, तब भाजपा को न नैतिकता याद आती है, न सिद्धांत।

महासचिव पांडेय ने कहा जहां तक एमएसएमई और स्थानीय उद्योगों की बात है—झामुमो सरकार ने ही पहली बार नीतिगत सुधार, निवेश नीति और औद्योगिक प्रोत्साहन को जमीनी स्तर तक पहुंचाया है। और यही कारण है कि आज झारखंड वैश्विक निवेश मानचित्र पर दिखाई दे रहा है।

अंत में भाजपा से बस इतना सवाल है—

अगर दावोस में झारखंड का जाना अपराध है,

तो दावोस में महाराष्ट्र का जाना पुण्य कैसे हो गया?

भाजपा पहले अपनी दोहरी नीति, परिवारवाद और सत्ता के दुरुपयोग पर जवाब दे, फिर झारखंड के मुख्यमंत्री पर उंगली उठाए। झारखंड को अब ट्रोल नहीं, वैश्विक पहचान चाहिए—और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वही कर रहे हैं।

झारखंड की मेगालिथ विरासत को मिलेगी वैश्विक पहचान: यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की तैयारी

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मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के विजन के अनुरूप झारखंड की प्राचीन और अमूल्य मेगालिथ (Megalith) और मोनोलिथ (Monolith) विरासत को विश्व पटल पर लाने की कवायद शुरू हो गई है। झारखंड सरकार के मंत्री श्री सुदिव्य कुमार के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने यूनाइटेड किंगडम के दौरे पर अंतरराष्ट्रीय पुरातत्व और संरक्षण विशेषज्ञों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं।

विश्व धरोहर (UNESCO World Heritage) की ओर बढ़ते कदम

बैठक का मुख्य उद्देश्य झारखंड के प्राचीन पत्थरों और ऐतिहासिक संरचनाओं का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण (Documentation) और पुनर्स्थापन करना है। चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि कैसे इन संरचनाओं को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए एक ठोस प्रस्ताव तैयार किया जाए।

प्रमुख संस्थानों के साथ तकनीकी सहयोग

प्रतिनिधिमंडल ने लंदन के विख्यात संस्थानों और विशेषज्ञ समूहों के साथ संवाद किया, जिनमें प्रमुख हैं:

Museum of London Archaeology (MOLA)

University College London (UCL)

AECOM, Arup और Wessex Archaeology

इन विशेषज्ञों ने मेगालिथिक स्थलों के वैज्ञानिक प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संरक्षण रणनीतियों पर अपने सुझाव साझा किए।

आदिवासी पहचान और जीवंत संस्कृति का संरक्षण

इस अवसर पर मंत्री श्री सुदिव्य कुमार ने कहा:

"मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार इन विरासतों को केवल पुरातात्विक अवशेष नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय की जीवंत सांस्कृतिक पहचान मानती है। हमारा प्रयास है कि वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से इन स्थलों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जाए।"

भविष्य का रोडमैप

राज्य सरकार इन बैठकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार करेगी। इसमें अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग और परामर्श के अनुभवों का लाभ उठाकर झारखंड की मेगालिथिक विरासत का सांस्कृतिक और शैक्षणिक स्तर पर विकास किया जाएगा।

दावोस के मंच पर गूँजा झारखंड का 'महिला-केंद्रित विकास विजन': श्रीमती कल्पना मुर्मू सोरेन ने पेश किया आदिवासी मॉडल

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक के दौरान, झारखंड पवेलियन में एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। झारखंड विधानसभा की सदस्य और महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष श्रीमती कल्पना मुर्मू सोरेन ने ब्रिक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स (BRICS CCI) के सहयोग से आयोजित इस सत्र में झारखंड के 'महिला-केंद्रित विकास मॉडल' को वैश्विक लीडर्स के सामने रखा।

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आदिवासी मूल्यों और जल-जंगल-जमीन का संरक्षण

सत्र को संबोधित करते हुए श्रीमती सोरेन ने कहा कि झारखंड का विकास मॉडल राज्य के आदिवासी और स्वदेशी मूल्यों पर टिका है। उन्होंने जोर दिया कि प्रकृति के साथ हमारा रिश्ता दोहन का नहीं, बल्कि संरक्षण का है, और इस संरक्षण की सबसे बड़ी वाहक हमारी महिलाएं हैं।

'अदृश्य श्रम' को पहचान देने की वकालत

श्रीमती कल्पना मुर्मू सोरेन ने एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दे को वैश्विक मंच पर उठाते हुए कहा कि आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं के 'अदृश्य श्रम' (देखभाल और सामुदायिक कार्य) को अर्थव्यवस्था की नींव के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड की नीतियां गृहिणियों और अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं के आत्मविश्वास और गरिमा को बढ़ाने के लिए समर्पित हैं।

JSLPS और स्वयं सहायता समूहों (SHG) की सफलता

उन्होंने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) की सफलता का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे लाखों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय उत्पादन में नेतृत्व कर रही हैं। यह मॉडल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि उन्हें सामाजिक रूप से भी सशक्त कर रहा है।

मुख्यमंत्री का विजन: 'पीपल फर्स्ट'

श्रीमती सोरेन ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार का शासन ढांचा संसाधनों से ऊपर 'लोगों' को प्राथमिकता देता है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब महिलाएं आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होंगी, तभी देश का सतत विकास संभव होगा।

झारखण्ड केवल खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों का निर्यातक राज्य बनकर नहीं रहना चाहता: हेमन्त सोरेन

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मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय राउंडटेबल मीटिंग “Delivering Sustainability at Scale: Pathways for Global Transformation” में भाग लिया।

झारखण्ड के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ देने का लक्ष्य

इस अवसर पर वैश्विक नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं एवं संस्थागत निवेशकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड केवल खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों का निर्यातक राज्य बनकर नहीं रहना चाहता। राज्य सरकार का लक्ष्य संसाधनों के मूल्य संवर्धन, सतत औद्योगिकीकरण और जन-केंद्रित विकास की दिशा में आगे बढ़ना है, जिससे झारखण्ड के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिले। “हमारा उद्देश्य केवल प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि उनका जिम्मेदार और सतत उपयोग सुनिश्चित करना है, ताकि रोजगार के अवसर सृजित हों और लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सततता का अर्थ केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक समावेशन से भी है, विशेषकर स्थानीय एवं आदिवासी समुदायों के लिए।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उन पहलों का उल्लेख किया जिनके माध्यम से खनिज आधारित डाउनस्ट्रीम उद्योगों, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन विकास के जरिए रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय एवं सामाजिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

पर्यटन के विकास पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने झारखण्ड की विशाल और अब तक काफी हद तक अप्रयुक्त पर्यटन संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य इको-टूरिज्म, प्रकृति आधारित पर्यटन और सांस्कृतिक पर्यटन को सतत विकास के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित करना चाहता है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हो और प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। दीर्घकालिक विकास दृष्टि को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने वैश्विक निवेशकों और साझेदारों को जिम्मेदार खनन, सतत विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा तथा पर्यटन अवसंरचना के क्षेत्र में झारखंड के साथ सहयोग के लिए आमंत्रित किया।

CII द्वारा आयोजित इस वैश्विक सततता संवाद में झारखण्ड की भागीदारी राज्य की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत आर्थिक विकास को पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामाजिक समावेशन के साथ जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के दावोस - यूके के मोर्चे पर किए प्रयासों से कुछ सीखें बाबूलाल : विनोद कुमार पाण्डेय

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झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय  महासचिव विनोद कुमार पाण्डेय ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के पास व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के फॉरवर्ड मैसेज से कहीं अधिक ज्ञान है। इसलिए उनसे यह अपेक्षा भी है कि वे यह समझें कि माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विदेश यात्रा और वहां होने वाली सभी बैठकें उच्चतम स्तर पर स्वीकृत हैं। मुख्यमंत्री ऑक्सफोर्ड केवल किसी एक औपचारिक मुलाकात के लिए नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित कार्यक्रमों व संवादों के लिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री पूरी तैयारी और स्पष्ट उद्देश्य के साथ इस यात्रा पर हैं। वे सभी दृष्टिकोणों को सम्मान देने, सभी की बात सुनने और समझने की लोकतांत्रिक भावना के साथ भारत और झारखंड का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह वही भारत की भावना है जो समावेशी, सहयोगी और मिलनसार है—और जिस पर पूरे देश को गर्व है।

उन्होंने कहा कि झामुमो बाबूलाल जी और भाजपा को यह भी सलाह देती है कि वे गंभीरता से यह समझने का प्रयास करें कि कोई राज्य सिर्फ छह हफ्तों की तैयारी में दावोस कैसे पहुंचता है, और फिर भारत–यूके मुक्त व्यापार समझौते के तुरंत बाद यूके पहुंचने वाला पहला राज्य कैसे बनता है। यह उपलब्धि बयानबाजी से नहीं, बल्कि दूरदर्शी नेतृत्व और सक्षम शासन से हासिल होती है। इसलिए ट्रोल की तरह व्यवहार करने के बजाय नेता प्रतिपक्ष को चाहिए कि वे माननीय मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के दावोस और यूके—दोनों मोर्चों पर किए गए प्रयासों से कुछ सीखें।

महासचिव विनोद पाण्डेय ने कहा कि यह झारखंड के लिए गर्व की बात है कि माननीय मुख्यमंत्री को ऑल सोल्स कॉलेज और सेंट जॉन कॉलेज में आधिकारिक मान्यता मिली—वही सेंट जॉन कॉलेज जहां मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा ने शिक्षा प्राप्त की थी—और उन्होंने ब्लावटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में व्याख्यान दिया, जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गवर्नेंस संस्थानों में से एक है।

झामुमो नेता ने कहा कि हम बाबूलाल जी को मित्रवत सलाह देते हैं कि वे थोड़ा ब्रेक लें, और आरोप लगाने से पहले माननीय मुख्यमंत्री की दावोस और यूके यात्रा के उद्देश्य, उपलब्धियों और महत्व को समझने की कोशिश करें। जलन और नकारात्मक राजनीति छोड़िए, और ग्लोबल मंच पर झारखंड के गर्वपूर्ण प्रतिनिधित्व के बारे में सोचिए—यही एक जिम्मेदार विपक्ष की पहचान होती है।

प्रदेश भाजपा नेताओं ने नई दिल्ली में नव निर्वाचित राष्ट्रीय नितिन नबीन को दी बधाई

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श्री साहू ने कहा कि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के नेतृत्व में भाजपा को नई ऊर्जा मिलेगी।देश की युवा शक्ति करोड़ों की संख्या में सक्रिय रूप से पार्टी से जुड़कर माननीय प्रधानमंत्री जी के संकल्प आत्मनिर्भर भारत के सपनों को साकार करने में योगदान करेगी।

उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती से राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का विशेष लगाव है।झारखंड इनकी जन्मभूमि है। इसलिए झारखंड के कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह है।

श्री साहू ने उनके यशस्वी कार्यकाल की मंगलकामना की।

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बधाई शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नितिन नबीन जी के कुशल नेतृत्व में सर्व स्पर्शी सर्व व्यापी भाजपा और मजबूत होगी।

कहा कि आनेवाले विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा मजबूती के साथ जनता का विश्वास हासिल करेगी।

राष्ट्रीय अध्यक्ष जी को बधाई शुभकामनाएं देने वालों में क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र जी,प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह,केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी,संजय सेठ,पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा,रघुवर दास,मधु कोड़ा, चंपई सोरेन, एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव,पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद दीपक प्रकाश,पी एन सिंह,अभयकांत प्रसाद, डॉ दिनेशानंद गोस्वामी, यदुनाथ पांडेय, डॉ रविंद्र कुमार राय,प्रदेश महामंत्री एवम सांसद डॉ प्रदीप वर्मा , मनोज कुमार सिंह , प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद,विकास प्रीतम, बालमुकुंद सहाय,गणेश मिश्र, सहित झारखंड के सभी राष्ट्रीय परिषद के सदस्य गण शामिल हैं।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम: ऊर्जा और समावेशी विकास के वैश्विक संवाद में झारखंड की सशक्त भागीदारी"

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की बैठक के दूसरे दिन झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अंतरराष्ट्रीय नीति निर्माताओं और निवेशकों के बीच राज्य की स्वच्छ ऊर्जा और भविष्य-उन्मुख नीतियों को मजबूती से रखा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में राज्यों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

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वैश्विक मंच पर इंटर-मिनिस्टीरियल डायलॉग

मुख्यमंत्री ने एक विशेष सत्र में हिस्सा लिया, जिसमें स्लोवाकिया के पूर्व मंत्री वाजिल हुडाक सहित कई वैश्विक नेता उपस्थित थे। चर्चा का मुख्य केंद्र 'सतत और समावेशी आर्थिक विकास' रहा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने झारखंड में निम्नलिखित क्षेत्रों में निवेश और सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया:

नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का विस्तार।

भारी वाहन निर्माण (Heavy Vehicle Manufacturing) में निवेश।

बागवानी (Horticulture) में टिकाऊ और आधुनिक पद्धतियाँ।

ऊर्जा प्रणालियों का विस्तार और क्षेत्रीय नेतृत्व

मुख्यमंत्री ने “कैपिटल इन एक्शन: स्केलिंग एनर्जी सिस्टम्स” विषयक चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के लिए प्रभावी नीतिगत समन्वय और नवाचार आधारित वित्तपोषण (Innovation-based Financing) समय की मांग है।

झारखंड का संकल्प: संतुलन और रोजगार

मुख्यमंत्री ने वैश्विक नेताओं के सामने झारखंड का पक्ष रखते हुए कहा:

"झारखंड औद्योगिक विकास को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ संतुलित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हमारा लक्ष्य केवल उद्योग लगाना नहीं, बल्कि रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक मजबूती को सुनिश्चित करना है।"