उत्तराखंड : महिला स्पोर्ट्स हॉस्टल निर्माण को लेकर खेल मंत्री रेखा आर्या सख्त, जानें क्या कहा ?

चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बाद चंपावत जिले की लोहाघाट तहसील क्षेत्र में उत्तराखंड के पहले महिला स्पोर्ट्स हॉस्टल एवं स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है। शुक्रवार को राज्य की खेल मंत्री रेखा आर्या ने जिलाधिकारी चंपावत और खेल विभाग के अधिकारियों के साथ निर्माणाधीन परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया और कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रदेश की महिला खिलाड़ियों के लिए एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश की बेटियों को खेल के क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और उत्तराखंड का पहला महिला स्पोर्ट्स कॉलेज इसी दिशा में एक बड़ा प्रयास है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्ष 2027 तक महिला स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण कार्य हर हाल में पूर्ण किया जाए।

लोहाघाट क्षेत्र के छमनिया में लगभग 237 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे उत्तराखंड के पहले महिला स्पोर्ट्स कॉलेज को निरीक्षण के दौरान मंत्री ने महिला खेल प्रतिभाओं के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कार्यदायी संस्था और विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। रेखा आर्या ने स्पष्ट किया कि गुणवत्ता या समयबद्धता में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान खेल मंत्री ने लगभग पूर्ण हो चुके सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक का भी जायजा लिया और वहां अभ्यास कर रही महिला खिलाड़ियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि लोहाघाट का यह महिला स्पोर्ट्स कॉलेज आने वाले समय में उत्तराखंड के खेल क्षेत्र का पावर हाउस साबित होगा और यहां से तैयार होने वाली खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करेंगी।

रेखा आर्या ने बताया कि इस संस्थान में सभी खेल सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित की जा रही हैं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने फुटबॉल ग्राउंड, एस्ट्रोटर्फ हॉकी ग्राउंड, वॉलीबॉल और बास्केटबॉल कोर्ट, अन्य खेल मैदानों के साथ-साथ खिलाड़ियों के छात्रावास, स्टाफ क्वार्टर, प्रशासनिक भवन और एडमिन ब्लॉक की प्रगति की भी समीक्षा की।

इस महिला स्पोर्ट्स कॉलेज में 300 बालिकाओं की क्षमता वाले तीन छात्रावास, मल्टीपर्पज हॉल, एकेडमिक ब्लॉक, ऑडिटोरियम और गेस्ट हाउस जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। खेल मंत्री ने कहा कि यह संस्थान महिला खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, शिक्षा और आवास की एक समग्र व्यवस्था प्रदान करेगा, जिससे विशेषकर ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों की प्रतिभाशाली बेटियों को आगे बढ़ने का सशक्त मंच मिलेगा।
उत्तराखंड : खानपुर रेंजर के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन, डीएफओ कार्यालय में हंगामा
हरिद्वार। खानपुर रेंज के रेंजर के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा शुक्रवार को फूट पड़ा। बिल्केश्वर रोड स्थित डीएफओ कार्यालय पर खानपुर रेंज के ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया और रेंजर पर हठधर्मिता, महिलाओं के साथ अभद्रता और ग्रामीणों को बेवजह परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए। गुस्साए ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए रेंजर को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की।

ग्रामीणों का आरोप है कि हाल ही में खानपुर रेंज क्षेत्र में जंगल में लकड़ियां बीनने गई कुछ महिलाओं को वन विभाग की टीम ने पकड़ लिया था और उन्हें बंद कर दिया गया। ग्रामीणों के विरोध के बाद महिलाओं को एक दिन पूर्व छोड़ दिया गया, लेकिन इसी मामले को लेकर शुक्रवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण हरिद्वार स्थित डीएफओ कार्यालय पहुंचे और अपनी शिकायत दर्ज कराई।

डीएफओ कार्यालय में ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की और वन विभाग के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया। सिकरौदा गांव से आए ग्रामीण बुरहान ने आरोप लगाया कि खानपुर रेंज के रेंजर लगातार ग्रामीणों को परेशान करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के साथ अभद्रता की गई और रेंजर पर रिश्वतखोरी के भी आरोप लगाए। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले में रेंजर को तत्काल हटाने की मांग की।

ग्रामीणों के हंगामे के बाद डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति शांत हुई। डीएफओ ने बताया कि ग्रामीण लकड़ी और रास्तों से जुड़ी शिकायतें लेकर कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए वन विभाग की एसडीओ पूनम सिलोरी के नेतृत्व में जांच टीम का गठन कर दिया गया है।
डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त किया।
उत्तराखंड : कुंभ मेला 2027 में नई पहल, मेला परिसर में भी चलेंगी परिवहन निगम की इलेक्ट्रिक बसें
देहरादून। वर्ष 2027 में होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर सभी संबंधित विभागों ने अभी से कमर कस ली है। करोड़ों श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना को देखते हुए उत्तराखंड परिवहन निगम ने परिवहन व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करने की रणनीति तैयार की है। इस बार कुंभ मेले में एक नई पहल करते हुए पहली बार कुंभ मेला परिसर के भीतर भी परिवहन निगम की इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा।

अब तक कुंभ मेले के दौरान उत्तराखंड परिवहन निगम की बसें मुख्य रूप से कुंभ क्षेत्र के बाहर तक ही संचालित की जाती थीं, ताकि बाहरी राज्यों और अन्य क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को हरिद्वार पहुंचने में सुविधा मिल सके। लेकिन आगामी कुंभ मेले के दृष्टिगत परिवहन निगम ने मेला परिसर के भीतर यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत करीब 150 इलेक्ट्रिक बसें कुंभ मेला क्षेत्र में तैनात की जाएंगी।

दरअसल, प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत देहरादून और हरिद्वार शहर में 150 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का प्रस्ताव है। इसके लिए दोनों शहरों में चार्जिंग स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है, जो अगले छह माह में पूरा होने की संभावना है। चार्जिंग स्टेशन तैयार होने के बाद अनुबंध के आधार पर इन इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शहरों के भीतर किया जाएगा। कुंभ मेले के दौरान इन्हीं बसों को मेला परिसर में चलाने की योजना बनाई गई है।

उत्तराखंड परिवहन निगम की प्रबंध निदेशक रीना जोशी ने बताया कि पिछले कुंभ मेले में भी परिवहन निगम ने बड़ी संख्या में बसों का संचालन कर श्रद्धालुओं को सुविधा उपलब्ध कराई थी। आगामी कुंभ मेले में भी बड़ी संख्या में बसें चलाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में परिवहन निगम की लगभग 400 बसों की स्थिति काफी खराब है। इसे देखते हुए परिवहन निगम ने उत्तराखंड शासन को कुंभ निधि से 700 नई बसें उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजा है।

रीना जोशी ने उम्मीद जताई कि जल्द ही कुंभ निधि से नई बसों की खरीद के लिए सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि आगामी कुंभ मेले में परिवहन निगम यात्रियों की सुविधा के लिए नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है। अब श्रद्धालुओं को कुंभ मेला परिसर के भीतर भी परिवहन निगम की बस सेवाएं मिलेंगी। फिलहाल 150 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का निर्णय लिया गया है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर बसों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है।
उत्तराखंड : चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियों को लेकर ऋषिकेश में बड़ी बैठक
ऋषिकेश, उत्तराखंड। वर्ष 2026 की चारधाम यात्रा को लेकर प्रशासन ने अभी से तैयारियों की रफ्तार तेज कर दी है। इसी क्रम में ऋषिकेश स्थित चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में एक बड़ी और महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें गढ़वाल मंडल के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

बैठक की अध्यक्षता गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने की, जबकि आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप भी बैठक में मौजूद रहे। इस दौरान चारधाम यात्रा 2026 के लिए यात्रा प्रबंधन एवं नियंत्रण व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

गढ़वाल कमिश्नर ने चारधाम यात्रा से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारियों से व्यवस्थाओं को लेकर सवाल-जवाब किए और आगामी यात्रा को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में गढ़वाल मंडल के सभी जिलाधिकारियों और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ यात्रा के दौरान यातायात, स्वास्थ्य, आवास, संचार और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर गहन मंथन किया गया।

कमिश्नर ने यात्रा काल के दौरान व्यवस्थाओं को दुरुस्त और प्रभावी बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। वहीं आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने चारधाम यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त और गंभीर रहने के निर्देश दिए, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिल सके।
प्रशासन का कहना है कि समय रहते की जा रही ये तैयारियां चारधाम यात्रा 2026 को बेहतर, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।
लाखों की अफीम के साथ यूपी का तस्कर रुद्रपुर में गिरफ्तार, 1.32 किलो अफीम बरामद

* ड्रग फ्री देवभूमि अभियान के तहत रुद्रपुर पुलिस और एएनटीएफ की संयुक्त कार्रवाई



रुद्रपुर। उत्तराखंड पुलिस के “ड्रग फ्री देवभूमि” अभियान को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। रुद्रपुर कोतवाली पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की संयुक्त टीम ने उत्तर प्रदेश के एक शातिर नशा तस्कर को 1 किलो 32 ग्राम अवैध अफीम के साथ गिरफ्तार किया है। बरामद अफीम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत पांच लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि रुद्रपुर क्षेत्र में अफीम की बड़ी खेप सप्लाई की जाने वाली है। सूचना के आधार पर कोतवाली रुद्रपुर क्षेत्र के प्रीत विहार नंबर-02, बारादरी रोड तिराहे के पास सघन नाकाबंदी और चेकिंग अभियान चलाया गया। इसी दौरान एक संदिग्ध युवक को रोका गया। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 1 किलो 32 ग्राम अफीम, एक मोटरसाइकिल और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान विनीत आर्य पुत्र रमेश आर्य, निवासी ग्राम अंजनी, थाना सिरौली, तहसील आंवला, जिला बरेली (उत्तर प्रदेश), उम्र 22 वर्ष के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ कोतवाली रुद्रपुर में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कई अहम खुलासे किए हैं। उसने बताया कि वह यूट्यूब पर अफीम से जुड़े वीडियो देखकर नशा तस्करों के संपर्क में आया और धीरे-धीरे अवैध अफीम के कारोबार में शामिल हो गया। पुलिस अब उसके नेटवर्क, सप्लाई चेन और इस धंधे से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है।

उधम सिंह नगर पुलिस लगातार नशे के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है। इसी क्रम में नैनीताल जिले के काठगोदाम थाना क्षेत्र में भी दो अलग-अलग कार्रवाइयों के दौरान स्मैक और कच्ची शराब के साथ दो नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि “ड्रग फ्री उत्तराखंड” का संकल्प पूरी तरह अटल है और नशा तस्करों के खिलाफ यह अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा।
काशीपुर किसान आत्महत्या कांड: एसओ-उपनिरीक्षक निलंबित, पैगा चौकी की पूरी टीम लाइन हाजिर
* मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मजिस्ट्रेट जांच के दिए आदेश, जिम्मेदारी कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को सौंपी

ब्यूरो उत्तराखंड

रुद्रपुर/हल्द्वानी। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में काशीपुर के पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह द्वारा हल्द्वानी के गौलापार स्थित एक होटल में गोली मारकर आत्महत्या करने के मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मृतक किसान ने आत्महत्या से पहले फेसबुक लाइव वीडियो जारी कर 4 करोड़ रुपये की जमीन ठगी और ऊधम सिंह नगर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसमें लापरवाही, उदासीनता और पक्षपात का जिक्र था।

वीडियो वायरल होने के बाद एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित और कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने लापरवाही के आरोप में कोतवाली आईटीआई के थानाध्यक्ष (एसओ) कुंदन सिंह रौतेला और उपनिरीक्षक प्रकाश बिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

इसके अलावा, पैगा चौकी पर तैनात पूरी पुलिस टीम को लाइन हाजिर किया गया है। लाइन हाजिर किए गए पुलिसकर्मियों में उपनिरीक्षक/चौकी प्रभारी जितेंद्र कुमार, अपर उपनिरीक्षक सोमवीर सिंह, आरक्षी भूपेंद्र सिंह, दिनेश तिवारी, मुख्य आरक्षी शेखर बनकोटी, आरक्षी सुरेश चन्द्र, योगेश चौधरी, राजेन्द्र गिरी, दीपक प्रसाद एवं संजय कुमार शामिल हैं। 

कुल 10 पुलिसकर्मी इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं। एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पुलिस में किसी भी प्रकार की लापरवाही, संवेदनहीनता या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता की शिकायतों पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इसमें कोई कोताही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं, जिसकी जिम्मेदारी कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को सौंपी गई है।

आत्महत्या के बाद सुखवंत सिंह का शव काशीपुर पहुंचा, जहां उनके घर पर बड़ी संख्या में किसान और स्थानीय लोग जमा हुए। परिजनों ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें से दो पर आश्वासन मिलने के बाद सहमति जताई गई है।

यह घटना राज्य में जमीन ठगी, पुलिस की भूमिका और किसानों की परेशानियों पर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ गई है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
आरटीआई में विकास कार्यों की जगह थमा दी गोलगप्पों की रेट लिस्ट, लक्सर नगर पालिका पर उठे सवाल

* सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला, लोगों ने मजाकिया अंदाज में कसे तंज


हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की लक्सर नगर पालिका उस समय सुर्खियों में आ गई, जब सूचना के अधिकार (आरटीआई) के जवाब में विकास कार्यों से जुड़े दस्तावेजों के साथ एक मिठाई-चाट की दुकान की गोलगप्पे और चाट-पकौड़ी की रेट लिस्ट भी आवेदक को थमा दी गई। यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोग नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे।

लक्सर निवासी शिवम कश्यप ने नगर पालिका क्षेत्र में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों, समाचार पत्रों में प्रकाशित टेंडरों और उन पर हुए खर्च की जानकारी आरटीआई के तहत मांगी थी। इसके जवाब में नगर पालिका द्वारा प्रमाणित दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराई गईं। लेकिन दस्तावेजों के अंतिम पृष्ठ पर एक प्रसिद्ध मिठाई और चाट की दुकान की रेट लिस्ट देखकर आवेदक हैरान रह गया। इस सूची में गोलगप्पे, पापड़ी चाट, भेलपुरी, आलू टिक्की, सेव पूरी समेत अन्य खाद्य पदार्थों के दाम दर्ज थे।

शिवम कश्यप ने इस रेट लिस्ट की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा कर दी, जिसके बाद मामला चर्चा का विषय बन गया। लोग मजाकिया टिप्पणियों के जरिए नगर पालिका पर तंज कसने लगे। किसी ने लिखा, “अब विकास कार्यों की जगह गोलगप्पे खरीदने का टेंडर होगा?”, तो किसी ने कहा, “आरटीआई से पता चला कि पालिका का असली बजट चाट पर खर्च होता है।”

इस पूरे मामले पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मोहम्मद कामिल ने सफाई देते हुए कहा कि आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में गलती से यह रेट लिस्ट शामिल हो गई होगी। उन्होंने बताया कि होली और दीपावली जैसे त्योहारों पर मिठाई और नमकीन की दुकानों से सामान मंगाया जाता है, संभवतः उसी समय की रेट लिस्ट फाइल में रह गई। मामले की जांच कर कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो।

यह घटना जहां लोगों के लिए हंसी का कारण बनी, वहीं नगर पालिका की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड संधारण पर गंभीर सवाल भी खड़े कर गई है। अब स्थानीय लोग यह पूछ रहे हैं कि जब आरटीआई में गोलगप्पों का हिसाब मिल सकता है, तो विकास कार्यों का पूरा और सही ब्यौरा कब मिलेगा?
पालतू श्वान की बहादुरी: बाघ से भिड़कर मालिक की बचाई जान, खुद हो गया शहीद

रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के तराई पश्चिमी वन प्रभाग से सटे ग्राम मदनपुर गैबुआ में एक दिल छू लेने वाली घटना सामने आई है, जहां एक पालतू श्वान ने स्वामी भक्ति की मिसाल पेश करते हुए अपने मालिक की जान बचाने के लिए खूंखार बाघ से सीधे टक्कर ली और अंतिम सांस तक संघर्ष किया। इस बहादुरी में श्वान की मौत हो गई, लेकिन मालिक सुरक्षित बच निकले।
घटना के अनुसार, ग्राम मदनपुर गैबुआ निवासी रक्षित पांडे अपने पालतू कुत्ते के साथ खेत की ओर गन्ना खाने गए थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक रक्षित पर हमला करने की कोशिश की। खतरे को भांपते ही वफादार श्वान बाघ पर झपट पड़ा और उसे उलझाए रखा। दोनों के बीच जोरदार भिड़ंत हुई, जिसमें बाघ ने श्वान पर घातक हमला कर दिया। श्वान की मौके पर ही मौत हो गई, लेकिन उसकी बहादुरी से रक्षित पांडे सुरक्षित बच निकले।
घटना के बाद रक्षित पांडे ने तुरंत परिजनों और ग्रामीणों को सूचना दी। सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे। मामले की जानकारी भाजपा नेता विपिन कांडपाल को दी गई, जिन्होंने तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य को अवगत कराया।
वन विभाग की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मृत श्वान का पोस्टमार्टम कराया। डीएफओ ने क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और बाघ की गतिविधियों पर सतर्क नजर रखने का आश्वासन दिया है।
भाजपा नेता विपिन कांडपाल ने बताया कि बाघ की लगातार गतिविधियों से गांव में भय का माहौल बना हुआ है। शाम होते ही ग्रामीण घरों से बाहर निकलने से डरते हैं। उन्होंने वन विभाग से मांग की है कि बाघ को जल्द पकड़कर आबादी से दूर सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए। वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और अकेले खेतों की ओर न जाने की अपील की है।
यह घटना एक बार फिर इंसान और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते संघर्ष को उजागर करती है, साथ ही पालतू कुत्ते की वफादारी और बहादुरी की मिसाल पेश करती है। रक्षित पांडे ने आंसुओं के साथ कहा कि उनका कुत्ता मरते दम तक उनके लिए लड़ा और उन्हें कोई आंच नहीं आने दी।
उत्तराखंड : पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर पर एक और मुकदमा
* धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी का आरोप


हरिद्वार, उत्तराखंड। भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े वायरल ऑडियो-वीडियो विवाद के बीच अब उनके खिलाफ एक नया मुकदमा दर्ज किया गया है। ज्वालापुर कोतवाली पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर पूर्व विधायक सुरेश राठौर के विरुद्ध धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में प्रकरण दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, यह मुकदमा हरिलोक कॉलोनी निवासी राजेश कुमार गौतम की शिकायत पर आधारित है। शिकायतकर्ता ने बताया कि उनके और सुरेश राठौर के पुराने संबंध थे। कुछ समय पहले राठौर ने उनसे उनकी गाड़ी मांगकर ली थी। काफी समय बीत जाने के बाद भी गाड़ी वापस नहीं की गई। जब राजेश ने बार-बार गाड़ी लौटाने की मांग की, तो पूर्व विधायक टालमटोल करने लगे।
आरोप है कि विरोध करने पर सुरेश राठौर ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। साथ ही गाड़ी वापस करने से भी साफ इनकार कर दिया। पीड़ित ने पहले पुलिस में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने अदालत का रुख किया। कोर्ट के निर्देश पर ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस नए मुकदमे के साथ ही सुरेश राठौर के खिलाफ अब हरिद्वार जिले में तीन और देहरादून में एक कुल चार मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े वायरल ऑडियो और अभिनेत्री उर्मिला सनावर के दावों के बाद से पूर्व विधायक सुर्खियों में बने हुए हैं। इनमें से पहले दर्ज मामलों में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा रखी है।
यह घटना अंकिता भंडारी प्रकरण के बाद से सुरेश राठौर की बढ़ती कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों को दर्शाती है, जहां कांग्रेस सहित विपक्षी दल इस मुद्दे को जमकर उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद भी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। मामले की जांच जारी है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड: सीबीआई जांच पर कांग्रेस-बीजेपी में रार जारी

देहरादून। उत्तराखंड में चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 जनवरी 2026 को मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति दे दी है। यह फैसला अंकिता के माता-पिता की मांग और लंबे समय से चल रहे जन-आंदोलनों के दबाव में लिया गया है। हालांकि, इस घोषणा के बावजूद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक रार थमने का नाम नहीं ले रही है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने सीएम धामी के फैसले का स्वागत करते हुए इसे जन-भावनाओं के अनुरूप बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने शुरू से ही निष्पक्ष जांच की और दोषियों को जेल भेजा। अब सीबीआई जांच से विपक्ष के झूठ और दुष्प्रचार का पर्दाफाश होगा। भट्ट ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे अंकिता के नाम पर समाज को बांटने और माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सभी पक्षों से राजनीति बंद करने की अपील की और नर्सिंग कॉलेज के नाम परिवर्तन पर कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक झूठ करार दिया।
भाजपा का कहना है कि यह फैसला पीड़ित परिवार की इच्छा का सम्मान है और सरकार ने पहले भी पूरी पारदर्शिता से कार्रवाई की थी।

उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सीबीआई जांच की संस्तुति को जनता के संघर्ष की जीत बताया, लेकिन इसे अधूरी करार दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों में भाजपा की सरकार होने से सीबीआई की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। गोदियाल ने मांग की कि जांच हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में होनी चाहिए, तभी सच्चाई सामने आएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यह फैसला देकर अपनी पिछली जांच में बड़ी चूक स्वीकार कर ली है। कांग्रेस का संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक कथित वीआईपी का नाम नहीं खुलता, बुलडोजर चलाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती और दोषियों को सजा नहीं मिलती। गोदियाल ने जांच को टाइम-बाउंड बनाने की भी मांग की ताकि न्याय में देरी न हो।

यह मामला 2022 का है, जब अंकिता भंडारी (19) एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं। विशेष जांच दल (SIT) ने तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा दिलाई थी। हाल ही में वायरल ऑडियो-वीडियो और कथित वीआईपी एंगल के खुलासे से विवाद फिर भड़क गया, जिसके बाद प्रदर्शन तेज हो गए।
अब केंद्र सरकार को इस संस्तुति पर अंतिम फैसला लेना है। दोनों दल एक-दूसरे पर राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय की उम्मीद बंधी है।