भदोही का सेमराध-नाथ धाम कल्पवास मेला ड्रोन कैमरे में कैद:गंगा की रेती पर सजी तंबुओं की नगरी, गंगा में डुबकी लगाएंगे श्रद्धालु
रिपोर्ट - नितेश श्रीवास्तव
भदोही। भदोही के समराध नाथ धाम में मकर माघ कल्पवास मेला शुरू हो चुका है। काशी - विंध्य और प्रयाग के मध्य स्थित इस कल्पवास मेले का यह 31 वां वर्ष है। 3 जनवरी 2025 को मां गंगा पूजन,धर्म ध्वजारोहण एवं भूमि-पूजन के साथ गंगा की रेती पर मेले की तैयारियां शुरू की गई थी। उसके बाद से ही कल्पवासियों का आगमन शुरू हो चुका है। मेला सीमित के अध्यक्ष महंत करुणाशंकर दास ने बताया कि 14 जनवरी से मेले की रौनक और बढ़ेगी। कल्पवासियों की संख्या में तेजी से इजाफा होगा और गंगा की रेती पर बसी तंबुओं की नगरी पूरी तरह आबाद हो जाएगी। यह आध्यात्मिक आयोजन 1 फरवरी तक चलेगा। दूर - दराज के जिलों के साथ ही अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु सेमराध नाथ पहुंच रहें हैं।
कल्पवास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सेमराध में कल्पवास करने से भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की कृपा प्राप्त होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण और काशी से जुड़ी घटनाओं के बाद जिस स्थान पर सुदर्शन चक्र और त्रिशूल का मिलन हुआ, वहीं स्थान समर - अधि कहलाया ,जो अपभ्रंश होकर सेमराध नाम से प्रसिद्ध हुआ। महंत करुणाशंकर दास ने बताया कि उनके गुरु ब्रह्मालीन स्वामी रामशंकर दास महाराज ने 14 जनवरी 1996 को सेमराध नाथ गंगा घाट पर 15-20 लोगों के साथ कल्पवास की शुरुआत की थी। तभी से यह परंपरा निरंतर चल रही है और आज सेमराध हरिद्वार, नासिक , उज्जैन और प्रयागराज के बाद प्रमुख कल्पवास स्थलों में अपनी पहचान बना चुका है।
प्रशासन और मेला सीमित की ओर से कल्पवास क्षेत्र में व्यापक व्यवस्थाएं की गई है। बिजली, पेजयल, शौचालय, स्नान घाट, आवागमन के लिए अस्थायी मार्ग और रेत पर चकर्ड प्लेट बिछाई गई है। ठंड को देखते हुए अलाव जलाने के लिए लकड़ियों की गई है। पूरे मेले की अवधि में भंडारे का संचालन भी किया जाएगा। खास बात यह है कल्पवासियों के लिए रहने हेतु लगाए जाने वाले तंबुओं का कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। मेले के दौरान अखंड हरिकीर्तन, विद्वानों के प्रवचन और रामकथा का आयोजन चल रहा है।
4 hours ago
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