लाखों की अफीम के साथ यूपी का तस्कर रुद्रपुर में गिरफ्तार, 1.32 किलो अफीम बरामद

* ड्रग फ्री देवभूमि अभियान के तहत रुद्रपुर पुलिस और एएनटीएफ की संयुक्त कार्रवाई



रुद्रपुर। उत्तराखंड पुलिस के “ड्रग फ्री देवभूमि” अभियान को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। रुद्रपुर कोतवाली पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की संयुक्त टीम ने उत्तर प्रदेश के एक शातिर नशा तस्कर को 1 किलो 32 ग्राम अवैध अफीम के साथ गिरफ्तार किया है। बरामद अफीम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत पांच लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि रुद्रपुर क्षेत्र में अफीम की बड़ी खेप सप्लाई की जाने वाली है। सूचना के आधार पर कोतवाली रुद्रपुर क्षेत्र के प्रीत विहार नंबर-02, बारादरी रोड तिराहे के पास सघन नाकाबंदी और चेकिंग अभियान चलाया गया। इसी दौरान एक संदिग्ध युवक को रोका गया। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 1 किलो 32 ग्राम अफीम, एक मोटरसाइकिल और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान विनीत आर्य पुत्र रमेश आर्य, निवासी ग्राम अंजनी, थाना सिरौली, तहसील आंवला, जिला बरेली (उत्तर प्रदेश), उम्र 22 वर्ष के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ कोतवाली रुद्रपुर में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कई अहम खुलासे किए हैं। उसने बताया कि वह यूट्यूब पर अफीम से जुड़े वीडियो देखकर नशा तस्करों के संपर्क में आया और धीरे-धीरे अवैध अफीम के कारोबार में शामिल हो गया। पुलिस अब उसके नेटवर्क, सप्लाई चेन और इस धंधे से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है।

उधम सिंह नगर पुलिस लगातार नशे के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है। इसी क्रम में नैनीताल जिले के काठगोदाम थाना क्षेत्र में भी दो अलग-अलग कार्रवाइयों के दौरान स्मैक और कच्ची शराब के साथ दो नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि “ड्रग फ्री उत्तराखंड” का संकल्प पूरी तरह अटल है और नशा तस्करों के खिलाफ यह अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा।
काशीपुर किसान आत्महत्या कांड: एसओ-उपनिरीक्षक निलंबित, पैगा चौकी की पूरी टीम लाइन हाजिर
* मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मजिस्ट्रेट जांच के दिए आदेश, जिम्मेदारी कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को सौंपी

ब्यूरो उत्तराखंड

रुद्रपुर/हल्द्वानी। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में काशीपुर के पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह द्वारा हल्द्वानी के गौलापार स्थित एक होटल में गोली मारकर आत्महत्या करने के मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मृतक किसान ने आत्महत्या से पहले फेसबुक लाइव वीडियो जारी कर 4 करोड़ रुपये की जमीन ठगी और ऊधम सिंह नगर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसमें लापरवाही, उदासीनता और पक्षपात का जिक्र था।

वीडियो वायरल होने के बाद एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित और कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने लापरवाही के आरोप में कोतवाली आईटीआई के थानाध्यक्ष (एसओ) कुंदन सिंह रौतेला और उपनिरीक्षक प्रकाश बिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

इसके अलावा, पैगा चौकी पर तैनात पूरी पुलिस टीम को लाइन हाजिर किया गया है। लाइन हाजिर किए गए पुलिसकर्मियों में उपनिरीक्षक/चौकी प्रभारी जितेंद्र कुमार, अपर उपनिरीक्षक सोमवीर सिंह, आरक्षी भूपेंद्र सिंह, दिनेश तिवारी, मुख्य आरक्षी शेखर बनकोटी, आरक्षी सुरेश चन्द्र, योगेश चौधरी, राजेन्द्र गिरी, दीपक प्रसाद एवं संजय कुमार शामिल हैं। 

कुल 10 पुलिसकर्मी इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं। एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पुलिस में किसी भी प्रकार की लापरवाही, संवेदनहीनता या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता की शिकायतों पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इसमें कोई कोताही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं, जिसकी जिम्मेदारी कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को सौंपी गई है।

आत्महत्या के बाद सुखवंत सिंह का शव काशीपुर पहुंचा, जहां उनके घर पर बड़ी संख्या में किसान और स्थानीय लोग जमा हुए। परिजनों ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें से दो पर आश्वासन मिलने के बाद सहमति जताई गई है।

यह घटना राज्य में जमीन ठगी, पुलिस की भूमिका और किसानों की परेशानियों पर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ गई है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
आरटीआई में विकास कार्यों की जगह थमा दी गोलगप्पों की रेट लिस्ट, लक्सर नगर पालिका पर उठे सवाल

* सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला, लोगों ने मजाकिया अंदाज में कसे तंज


हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की लक्सर नगर पालिका उस समय सुर्खियों में आ गई, जब सूचना के अधिकार (आरटीआई) के जवाब में विकास कार्यों से जुड़े दस्तावेजों के साथ एक मिठाई-चाट की दुकान की गोलगप्पे और चाट-पकौड़ी की रेट लिस्ट भी आवेदक को थमा दी गई। यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोग नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे।

लक्सर निवासी शिवम कश्यप ने नगर पालिका क्षेत्र में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों, समाचार पत्रों में प्रकाशित टेंडरों और उन पर हुए खर्च की जानकारी आरटीआई के तहत मांगी थी। इसके जवाब में नगर पालिका द्वारा प्रमाणित दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराई गईं। लेकिन दस्तावेजों के अंतिम पृष्ठ पर एक प्रसिद्ध मिठाई और चाट की दुकान की रेट लिस्ट देखकर आवेदक हैरान रह गया। इस सूची में गोलगप्पे, पापड़ी चाट, भेलपुरी, आलू टिक्की, सेव पूरी समेत अन्य खाद्य पदार्थों के दाम दर्ज थे।

शिवम कश्यप ने इस रेट लिस्ट की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा कर दी, जिसके बाद मामला चर्चा का विषय बन गया। लोग मजाकिया टिप्पणियों के जरिए नगर पालिका पर तंज कसने लगे। किसी ने लिखा, “अब विकास कार्यों की जगह गोलगप्पे खरीदने का टेंडर होगा?”, तो किसी ने कहा, “आरटीआई से पता चला कि पालिका का असली बजट चाट पर खर्च होता है।”

इस पूरे मामले पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मोहम्मद कामिल ने सफाई देते हुए कहा कि आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में गलती से यह रेट लिस्ट शामिल हो गई होगी। उन्होंने बताया कि होली और दीपावली जैसे त्योहारों पर मिठाई और नमकीन की दुकानों से सामान मंगाया जाता है, संभवतः उसी समय की रेट लिस्ट फाइल में रह गई। मामले की जांच कर कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो।

यह घटना जहां लोगों के लिए हंसी का कारण बनी, वहीं नगर पालिका की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड संधारण पर गंभीर सवाल भी खड़े कर गई है। अब स्थानीय लोग यह पूछ रहे हैं कि जब आरटीआई में गोलगप्पों का हिसाब मिल सकता है, तो विकास कार्यों का पूरा और सही ब्यौरा कब मिलेगा?
पालतू श्वान की बहादुरी: बाघ से भिड़कर मालिक की बचाई जान, खुद हो गया शहीद

रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के तराई पश्चिमी वन प्रभाग से सटे ग्राम मदनपुर गैबुआ में एक दिल छू लेने वाली घटना सामने आई है, जहां एक पालतू श्वान ने स्वामी भक्ति की मिसाल पेश करते हुए अपने मालिक की जान बचाने के लिए खूंखार बाघ से सीधे टक्कर ली और अंतिम सांस तक संघर्ष किया। इस बहादुरी में श्वान की मौत हो गई, लेकिन मालिक सुरक्षित बच निकले।
घटना के अनुसार, ग्राम मदनपुर गैबुआ निवासी रक्षित पांडे अपने पालतू कुत्ते के साथ खेत की ओर गन्ना खाने गए थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक रक्षित पर हमला करने की कोशिश की। खतरे को भांपते ही वफादार श्वान बाघ पर झपट पड़ा और उसे उलझाए रखा। दोनों के बीच जोरदार भिड़ंत हुई, जिसमें बाघ ने श्वान पर घातक हमला कर दिया। श्वान की मौके पर ही मौत हो गई, लेकिन उसकी बहादुरी से रक्षित पांडे सुरक्षित बच निकले।
घटना के बाद रक्षित पांडे ने तुरंत परिजनों और ग्रामीणों को सूचना दी। सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे। मामले की जानकारी भाजपा नेता विपिन कांडपाल को दी गई, जिन्होंने तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य को अवगत कराया।
वन विभाग की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मृत श्वान का पोस्टमार्टम कराया। डीएफओ ने क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और बाघ की गतिविधियों पर सतर्क नजर रखने का आश्वासन दिया है।
भाजपा नेता विपिन कांडपाल ने बताया कि बाघ की लगातार गतिविधियों से गांव में भय का माहौल बना हुआ है। शाम होते ही ग्रामीण घरों से बाहर निकलने से डरते हैं। उन्होंने वन विभाग से मांग की है कि बाघ को जल्द पकड़कर आबादी से दूर सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए। वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और अकेले खेतों की ओर न जाने की अपील की है।
यह घटना एक बार फिर इंसान और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते संघर्ष को उजागर करती है, साथ ही पालतू कुत्ते की वफादारी और बहादुरी की मिसाल पेश करती है। रक्षित पांडे ने आंसुओं के साथ कहा कि उनका कुत्ता मरते दम तक उनके लिए लड़ा और उन्हें कोई आंच नहीं आने दी।
उत्तराखंड : पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर पर एक और मुकदमा
* धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी का आरोप


हरिद्वार, उत्तराखंड। भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े वायरल ऑडियो-वीडियो विवाद के बीच अब उनके खिलाफ एक नया मुकदमा दर्ज किया गया है। ज्वालापुर कोतवाली पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर पूर्व विधायक सुरेश राठौर के विरुद्ध धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में प्रकरण दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, यह मुकदमा हरिलोक कॉलोनी निवासी राजेश कुमार गौतम की शिकायत पर आधारित है। शिकायतकर्ता ने बताया कि उनके और सुरेश राठौर के पुराने संबंध थे। कुछ समय पहले राठौर ने उनसे उनकी गाड़ी मांगकर ली थी। काफी समय बीत जाने के बाद भी गाड़ी वापस नहीं की गई। जब राजेश ने बार-बार गाड़ी लौटाने की मांग की, तो पूर्व विधायक टालमटोल करने लगे।
आरोप है कि विरोध करने पर सुरेश राठौर ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। साथ ही गाड़ी वापस करने से भी साफ इनकार कर दिया। पीड़ित ने पहले पुलिस में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने अदालत का रुख किया। कोर्ट के निर्देश पर ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस नए मुकदमे के साथ ही सुरेश राठौर के खिलाफ अब हरिद्वार जिले में तीन और देहरादून में एक कुल चार मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े वायरल ऑडियो और अभिनेत्री उर्मिला सनावर के दावों के बाद से पूर्व विधायक सुर्खियों में बने हुए हैं। इनमें से पहले दर्ज मामलों में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा रखी है।
यह घटना अंकिता भंडारी प्रकरण के बाद से सुरेश राठौर की बढ़ती कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों को दर्शाती है, जहां कांग्रेस सहित विपक्षी दल इस मुद्दे को जमकर उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद भी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। मामले की जांच जारी है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड: सीबीआई जांच पर कांग्रेस-बीजेपी में रार जारी

देहरादून। उत्तराखंड में चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 जनवरी 2026 को मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति दे दी है। यह फैसला अंकिता के माता-पिता की मांग और लंबे समय से चल रहे जन-आंदोलनों के दबाव में लिया गया है। हालांकि, इस घोषणा के बावजूद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक रार थमने का नाम नहीं ले रही है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने सीएम धामी के फैसले का स्वागत करते हुए इसे जन-भावनाओं के अनुरूप बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने शुरू से ही निष्पक्ष जांच की और दोषियों को जेल भेजा। अब सीबीआई जांच से विपक्ष के झूठ और दुष्प्रचार का पर्दाफाश होगा। भट्ट ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे अंकिता के नाम पर समाज को बांटने और माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सभी पक्षों से राजनीति बंद करने की अपील की और नर्सिंग कॉलेज के नाम परिवर्तन पर कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक झूठ करार दिया।
भाजपा का कहना है कि यह फैसला पीड़ित परिवार की इच्छा का सम्मान है और सरकार ने पहले भी पूरी पारदर्शिता से कार्रवाई की थी।

उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सीबीआई जांच की संस्तुति को जनता के संघर्ष की जीत बताया, लेकिन इसे अधूरी करार दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों में भाजपा की सरकार होने से सीबीआई की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। गोदियाल ने मांग की कि जांच हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में होनी चाहिए, तभी सच्चाई सामने आएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यह फैसला देकर अपनी पिछली जांच में बड़ी चूक स्वीकार कर ली है। कांग्रेस का संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक कथित वीआईपी का नाम नहीं खुलता, बुलडोजर चलाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती और दोषियों को सजा नहीं मिलती। गोदियाल ने जांच को टाइम-बाउंड बनाने की भी मांग की ताकि न्याय में देरी न हो।

यह मामला 2022 का है, जब अंकिता भंडारी (19) एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं। विशेष जांच दल (SIT) ने तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा दिलाई थी। हाल ही में वायरल ऑडियो-वीडियो और कथित वीआईपी एंगल के खुलासे से विवाद फिर भड़क गया, जिसके बाद प्रदर्शन तेज हो गए।
अब केंद्र सरकार को इस संस्तुति पर अंतिम फैसला लेना है। दोनों दल एक-दूसरे पर राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय की उम्मीद बंधी है।
कॉर्बेट में बुजुर्ग महिला की मौत के बाद संदिग्ध बाघ ट्रेंकुलाइज


रामनगर, उत्तराखंड। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 2 जनवरी को 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला की जान लेने वाले संदिग्ध बाघ को पार्क प्रशासन ने तड़के करीब 2:30 बजे सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज कर लिया। बेहोश किए जाने के बाद बाघ को कॉर्बेट की ढेला रेंज स्थित रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है, जहां वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा और उनकी टीम द्वारा उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक राहुल मिश्रा ने बताया कि 2 जनवरी को रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत सांवल्दे गांव के जंगल में लकड़ी काटने गई एक बुजुर्ग महिला पर बाघ ने हमला कर दिया था। बाघ महिला को घसीटते हुए जंगल के भीतर ले गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। मृतका की पहचान 60 वर्षीय सखियां देवी पत्नी चंदू सिंह, निवासी सांवल्दे गांव के रूप में हुई थी। घटना के बाद से क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ था।

घटना के बाद पार्क प्रशासन ने इलाके में लगातार निगरानी शुरू की। घटनास्थल के आसपास कैमरा ट्रैप लगाए गए और बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा भी लगाया गया। कैमरा ट्रैप में जिस बाघ की गतिविधियां बार-बार रिकॉर्ड हो रही थीं, उसी के आधार पर उसे ट्रेंकुलाइज किया गया। उपनिदेशक ने बताया कि पकड़ा गया बाघ नर (मेल टाइगर) है, जिसकी उम्र करीब 5 से 7 वर्ष के बीच आंकी गई है और फिलहाल वह पूरी तरह स्वस्थ है।

उन्होंने बताया कि ट्रेंकुलाइज किए गए बाघ और मृतक महिला के सैंपल डीएनए जांच के लिए सीसीएमबी हैदराबाद भेजे जाएंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि महिला पर हमला करने वाला बाघ यही था या नहीं।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि घटना वाले क्षेत्र में कई अन्य बाघों की भी मौजूदगी थी, लेकिन कैमरा ट्रैप में बार-बार उसी इलाके में दिखाई देने के कारण इसी बाघ को पकड़ने का निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि बीते एक सप्ताह से ग्रामीण लगातार बाघ को पकड़ने की मांग कर रहे थे। बाघ के ट्रेंकुलाइज होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल की ओर जाते समय सतर्क रहें और वन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
अंकिता भंडारी केस में पीएम-सीएम की डीपफेक वीडियो वायरल, देहरादून साइबर थाने में दो मुकदमे दर्ज
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक संवेदनशील मामले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। एआई के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की फर्जी (डीपफेक) वीडियो बनाए जाने के आरोप में देहरादून साइबर क्राइम थाने में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

पहले मामले में सहस्त्रधारा रोड निवासी रोहित ने शिकायत दर्ज कराई है। रोहित ने बताया कि वह पेशे से व्यापारी हैं और उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने एक सजग नागरिक के रूप में शिकायत दर्ज कराई है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे संवेदनशील विषय पर तकनीक का दुरुपयोग कर भ्रामक और आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करना घृणित कृत्य है।

शिकायत के अनुसार, ‘सुमित्रा भुल्लर’ नाम की फेसबुक प्रोफाइल के माध्यम से सुनियोजित साजिश के तहत एआई और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के चेहरे व आवाज की हूबहू नकल तैयार की गई। इस फर्जी वीडियो में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर तथ्यहीन और आपत्तिजनक बयान दिखाए गए, जो वास्तविकता से परे हैं।

वहीं दूसरे मामले में ऋषिकेश के गुमानीवाला निवासी संजय राणा ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक्स (पूर्व में ट्विटर) प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ग्रोक एआई के जरिए गंभीर, आपत्तिजनक और कानून-विरोधी गतिविधियां की जा रही हैं। संजय राणा ने बताया कि उन्होंने इसकी सत्यता जांचने के लिए अपनी सामान्य फोटो ग्रोक एआई पर अपलोड की, जिसके बाद एआई द्वारा उनकी अश्लील तस्वीर बना दी गई। इस संबंध में उन्होंने स्क्रीनशॉट को साक्ष्य के रूप में साइबर क्राइम पुलिस को सौंपा है।

पीड़ित ने इस कृत्य को डिजिटल यौन उत्पीड़न, निजता का उल्लंघन, महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला और अपराध को बढ़ावा देने वाला बताया है।
एसटीएफ के एसएसपी नवनीत भुल्लर ने बताया कि दोनों मामलों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर लिए गए हैं और जांच के लिए विशेषज्ञ टीम गठित की गई है। जांच के बाद एआई तकनीक के दुरुपयोग में शामिल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उत्तराखंड कांग्रेस का ऐलान: मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में 10 जनवरी से प्रदेशव्यापी आंदोलन

देहरादून, उत्तराखंड। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर VB–G RAM-G किए जाने के फैसले के खिलाफ उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस ने 10 जनवरी से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र की भाजपा सरकार मनरेगा की आत्मा और ग्रामीणों के रोजगार के अधिकार को खत्म करना चाहती है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने कहा कि यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है। उन्होंने बताया कि एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इस मुद्दे पर आंदोलन का निर्णय लिया गया। कुमारी शैलजा ने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई मनरेगा योजना दुनिया की एक ऐतिहासिक और पाथ ब्रेकिंग योजना रही है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी दी। इस योजना ने करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला और कोविड-19 जैसी महामारी के दौरान लाखों लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार इस जनकल्याणकारी योजना को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। * आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम 10 जनवरी: प्रत्येक जिले में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर मनरेगा का नाम बदले जाने की सच्चाई जनता के सामने रखी जाएगी। 11 जनवरी: महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर जिला स्तर पर एक दिवसीय अनशन। इसमें पार्टी नेता और मनरेगा से जुड़े ग्रामीण शामिल होंगे। 12 से 29 जनवरी: पंचायत स्तर पर गांवों में चौपाल लगाकर लोगों को योजना की स्थिति और बदलावों की जानकारी दी जाएगी। 30 जनवरी (शहीदी दिवस): शांतिपूर्ण धरना देकर अमन, चैन, शांति और काम करने के अधिकार का संदेश। 31 जनवरी से 6 फरवरी: सभी जिला मुख्यालयों पर “मनरेगा बचाओ” धरना। 7 से 15 फरवरी: तिथि तय कर विधानसभा घेराव। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के पत्र ग्राम प्रधानों, पूर्व प्रधानों, रोजगार सेवकों और आम जनता तक पहुंचाएंगे। कांग्रेस का कहना है कि वह बड़े पैमाने पर जन-जन तक पहुंचकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाएगी और ग्रामीणों के रोजगार के अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
देहरादून में अवैध मजार पर चला बुलडोजर, सरकारी जमीन कराई गई मुक्त
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद प्रदेश में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। इसी क्रम में देहरादून शहर के घंटाघर स्थित एचएनबी कॉम्प्लेक्स में सरकारी भूमि पर बनी एक अवैध मजार को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।

बीती रात नगर प्रशासन, एमडीडीए और नगर निगम की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। मजार के साथ वहां मौजूद टीन शेड और मलबे को भी हटाया गया। अभियान के दौरान नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, एसडीएम हरिगिरि, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर पहले संरचना का सर्वे कराया गया था। इसके बाद एमडीडीए की ओर से भूमि और निर्माण से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया गया, लेकिन वैध कागजात नहीं दिखाए जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि हटाने की कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के अवशेष नहीं मिले।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में देहरादून जिला प्रशासन के साथ बैठक में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। प्रशासन के अनुसार, देहरादून शहर और आसपास दो दर्जन से अधिक अवैध मजारें सरकारी जमीन पर बनी हुई हैं, जिन पर चरणबद्ध कार्रवाई की जा रही है।

गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत अब तक करीब 11 हजार एकड़ सरकारी भूमि को मुक्त कराया जा चुका है। साथ ही, पूरे प्रदेश में 573 अवैध मजारों को हटाया जा चुका है। सरकार का कहना है कि बीते वर्षों में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे कर मस्जिद और मजारें बनाई गईं, जिनमें से कुछ को वक्फ बोर्ड में भी दर्ज करा दिया गया था। अब ऐसे सभी अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।