अंकिता भंडारी केस में पीएम-सीएम की डीपफेक वीडियो वायरल, देहरादून साइबर थाने में दो मुकदमे दर्ज
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक संवेदनशील मामले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। एआई के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की फर्जी (डीपफेक) वीडियो बनाए जाने के आरोप में देहरादून साइबर क्राइम थाने में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

पहले मामले में सहस्त्रधारा रोड निवासी रोहित ने शिकायत दर्ज कराई है। रोहित ने बताया कि वह पेशे से व्यापारी हैं और उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने एक सजग नागरिक के रूप में शिकायत दर्ज कराई है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे संवेदनशील विषय पर तकनीक का दुरुपयोग कर भ्रामक और आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करना घृणित कृत्य है।

शिकायत के अनुसार, ‘सुमित्रा भुल्लर’ नाम की फेसबुक प्रोफाइल के माध्यम से सुनियोजित साजिश के तहत एआई और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के चेहरे व आवाज की हूबहू नकल तैयार की गई। इस फर्जी वीडियो में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर तथ्यहीन और आपत्तिजनक बयान दिखाए गए, जो वास्तविकता से परे हैं।

वहीं दूसरे मामले में ऋषिकेश के गुमानीवाला निवासी संजय राणा ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक्स (पूर्व में ट्विटर) प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ग्रोक एआई के जरिए गंभीर, आपत्तिजनक और कानून-विरोधी गतिविधियां की जा रही हैं। संजय राणा ने बताया कि उन्होंने इसकी सत्यता जांचने के लिए अपनी सामान्य फोटो ग्रोक एआई पर अपलोड की, जिसके बाद एआई द्वारा उनकी अश्लील तस्वीर बना दी गई। इस संबंध में उन्होंने स्क्रीनशॉट को साक्ष्य के रूप में साइबर क्राइम पुलिस को सौंपा है।

पीड़ित ने इस कृत्य को डिजिटल यौन उत्पीड़न, निजता का उल्लंघन, महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला और अपराध को बढ़ावा देने वाला बताया है।
एसटीएफ के एसएसपी नवनीत भुल्लर ने बताया कि दोनों मामलों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर लिए गए हैं और जांच के लिए विशेषज्ञ टीम गठित की गई है। जांच के बाद एआई तकनीक के दुरुपयोग में शामिल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उत्तराखंड कांग्रेस का ऐलान: मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में 10 जनवरी से प्रदेशव्यापी आंदोलन

देहरादून, उत्तराखंड। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर VB–G RAM-G किए जाने के फैसले के खिलाफ उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस ने 10 जनवरी से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र की भाजपा सरकार मनरेगा की आत्मा और ग्रामीणों के रोजगार के अधिकार को खत्म करना चाहती है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने कहा कि यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है। उन्होंने बताया कि एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इस मुद्दे पर आंदोलन का निर्णय लिया गया। कुमारी शैलजा ने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई मनरेगा योजना दुनिया की एक ऐतिहासिक और पाथ ब्रेकिंग योजना रही है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी दी। इस योजना ने करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला और कोविड-19 जैसी महामारी के दौरान लाखों लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार इस जनकल्याणकारी योजना को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। * आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम 10 जनवरी: प्रत्येक जिले में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर मनरेगा का नाम बदले जाने की सच्चाई जनता के सामने रखी जाएगी। 11 जनवरी: महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर जिला स्तर पर एक दिवसीय अनशन। इसमें पार्टी नेता और मनरेगा से जुड़े ग्रामीण शामिल होंगे। 12 से 29 जनवरी: पंचायत स्तर पर गांवों में चौपाल लगाकर लोगों को योजना की स्थिति और बदलावों की जानकारी दी जाएगी। 30 जनवरी (शहीदी दिवस): शांतिपूर्ण धरना देकर अमन, चैन, शांति और काम करने के अधिकार का संदेश। 31 जनवरी से 6 फरवरी: सभी जिला मुख्यालयों पर “मनरेगा बचाओ” धरना। 7 से 15 फरवरी: तिथि तय कर विधानसभा घेराव। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के पत्र ग्राम प्रधानों, पूर्व प्रधानों, रोजगार सेवकों और आम जनता तक पहुंचाएंगे। कांग्रेस का कहना है कि वह बड़े पैमाने पर जन-जन तक पहुंचकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाएगी और ग्रामीणों के रोजगार के अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
देहरादून में अवैध मजार पर चला बुलडोजर, सरकारी जमीन कराई गई मुक्त
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद प्रदेश में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। इसी क्रम में देहरादून शहर के घंटाघर स्थित एचएनबी कॉम्प्लेक्स में सरकारी भूमि पर बनी एक अवैध मजार को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।

बीती रात नगर प्रशासन, एमडीडीए और नगर निगम की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। मजार के साथ वहां मौजूद टीन शेड और मलबे को भी हटाया गया। अभियान के दौरान नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, एसडीएम हरिगिरि, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर पहले संरचना का सर्वे कराया गया था। इसके बाद एमडीडीए की ओर से भूमि और निर्माण से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया गया, लेकिन वैध कागजात नहीं दिखाए जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि हटाने की कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के अवशेष नहीं मिले।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में देहरादून जिला प्रशासन के साथ बैठक में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। प्रशासन के अनुसार, देहरादून शहर और आसपास दो दर्जन से अधिक अवैध मजारें सरकारी जमीन पर बनी हुई हैं, जिन पर चरणबद्ध कार्रवाई की जा रही है।

गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत अब तक करीब 11 हजार एकड़ सरकारी भूमि को मुक्त कराया जा चुका है। साथ ही, पूरे प्रदेश में 573 अवैध मजारों को हटाया जा चुका है। सरकार का कहना है कि बीते वर्षों में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे कर मस्जिद और मजारें बनाई गईं, जिनमें से कुछ को वक्फ बोर्ड में भी दर्ज करा दिया गया था। अब ऐसे सभी अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
उत्तराखंड में बदला मौसम का मिजाज

* पहाड़ों में बारिश-बर्फबारी के आसार, मैदानी इलाकों में घने कोहरे का येलो अलर्ट


देहरादून। उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम करवट लेने जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों में आज बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार बने हुए हैं। वहीं मैदानी क्षेत्रों में घने कोहरे के चलते जनजीवन प्रभावित हो सकता है। मौसम विभाग ने इसे देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया है।

देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। इसके साथ ही 2800 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने की संभावना है। प्रदेश के अन्य जिलों में मौसम शुष्क बना रह सकता है।

मौसम विभाग ने हरिद्वार, नैनीताल, पौड़ी, चंपावत, देहरादून और उधम सिंह नगर जिलों में घने कोहरे की चेतावनी जारी की है। साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में पाला पड़ने की आशंका भी जताई गई है, जिसको लेकर येलो अलर्ट लागू किया गया है।

राजधानी देहरादून में हल्के से मध्यम कोहरे के साथ अधिकतम तापमान लगभग 20 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 8 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

नैनीताल के मैदानी इलाकों में सुबह के समय घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई। कोहरे के कारण ठंड में इजाफा दर्ज किया गया है। दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, स्कूली बच्चे और मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

मैदानी क्षेत्रों में दृश्यता घटकर करीब 50 मीटर रह गई है। मौसम विभाग ने वाहन चालकों को सतर्कता बरतने और सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की सलाह दी है।
साध्वी प्राची ने की हरिद्वार को 'अमृत क्षेत्र' घोषित करने की मांग कहा, गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध


हरिद्वार, उत्तराखंड। हिंदूवादी नेता साध्वी प्राची ने धर्मनगरी हरिद्वार को 'अमृत क्षेत्र' घोषित करने और गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है। प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में साध्वी प्राची ने कहा कि हरकी पैड़ी हिंदुओं का प्रमुख पवित्र तीर्थ स्थल है। इसकी पवित्रता और मान-मर्यादा को बनाए रखने के लिए गैर-धर्मावलंबियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि तीर्थ क्षेत्र में गैर-हिंदुओं द्वारा संपत्ति खरीदने पर भी रोक लगाई जाए। साध्वी प्राची ने उदाहरण देते हुए बताया कि ईसाइयों की वेटिकन सिटी और मुस्लिमों के मक्का-मदीना में अन्य धर्मों के लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध है। इसी तर्ज पर हरिद्वार में भी ऐसा नियम लागू किया जाना चाहिए।

साध्वी प्राची ने नगर निगम द्वारा बनाए गए बायलॉज का सख्ती से पालन करने की अपील की। उन्होंने हरिद्वार और हरकी पैड़ी को 'अमृत क्षेत्र' घोषित करने के साथ-साथ गैर-धर्मावलंबियों पर रोक लगाने की मांग दोहराई।

उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सराहना करते हुए कहा कि वे हिंदू संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस संदर्भ में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की जांच कर उन्हें चिन्हित कर बाहर करने की भी मांग की।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार हरिद्वार के गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को नियंत्रित करने पर विचार कर रही है, खासकर आगामी अर्धकुंभ मेले को देखते हुए।
देहरादून नगर निगम के विकास कार्यों की टेंडर सूची में गड़बड़ी, सभी टेंडर पर रोक


देहरादून, उत्तराखंड। देहरादून नगर निगम में विकास कार्यों के टेंडर को लेकर सामने आए विवाद के बाद अब प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। टेंडर सूची में गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद नगर आयुक्त नमामि बंसल ने सभी विकास कार्यों के टेंडर पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही प्रस्तावित कार्यों का भौतिक सत्यापन भी शुरू कर दिया गया है।

नगर निगम की ओर से कराई गई जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि कुछ विकास कार्य गलत तरीके से टेंडर सूची में शामिल किए गए थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कार्य ऐसे थे जो अन्य विभागों द्वारा पहले ही पूरे किए जा चुके हैं, जबकि कुछ कार्य नगर निगम द्वारा पहले ही संपन्न किए जा चुके थे। इसके बावजूद उन्हें दोबारा टेंडर सूची में दर्शाया गया, जिससे गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह महापौर कोटे से नगर निगम के सभी 100 वार्डों में प्रस्तावित विकास कार्यों की टेंडर सूची जारी की गई थी। इसके बाद कई पार्षदों ने सूची पर आपत्ति जताई। पार्षदों का आरोप था कि कुछ वार्डों में जहां 20 से 22 लाख रुपये के कार्य स्वीकृत किए गए हैं, वहीं कुछ वार्डों में 70 से 80 लाख रुपये तक के कार्य शामिल कर दिए गए, जिससे असमानता साफ झलकती है।

विवाद बढ़ने पर महापौर सौरभ थपलियाल और नगर आयुक्त नमामि बंसल ने शिकायतों का संज्ञान लेते हुए टेंडर सूची की जांच के आदेश दिए थे। जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद गड़बड़ियों की पुष्टि हुई, जिसके चलते सभी विकास कार्यों के टेंडर पर रोक लगाने का फैसला किया गया।

नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन और पूरी जांच प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही नए सिरे से टेंडर जारी किए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी तरह की अनियमितता को रोकने के लिए यह कदम जरूरी था।
उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला-चेक बाउंस मामलों में डिजिटल समन की अनुमति


नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चेक बाउंस (धारा 138 एनआई एक्ट) मामलों में समन जारी करने की प्रक्रिया को सरल और तेज़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया है कि अब चेक बाउंस मामलों में ईमेल और व्हाट्सएप जैसे डिजिटल माध्यमों से भी समन भेजे जा सकेंगे।

नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, उत्तराखंड इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेस रूल्स, 2025 के तहत समन भेजने की पारंपरिक प्रक्रिया के साथ-साथ अब इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को भी मान्यता दी गई है। इसका उद्देश्य चेक बाउंस मामलों के निस्तारण में तेजी लाना और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।

सर्कुलर के अनुसार, चेक बाउंस की शिकायत दर्ज करते समय शिकायतकर्ता को आरोपी का ईमेल आईडी और व्हाट्सएप नंबर अनिवार्य रूप से देना होगा। साथ ही इन जानकारियों की सत्यता को प्रमाणित करने के लिए एक हलफनामा भी दाखिल करना होगा। गलत या भ्रामक जानकारी देने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

हर शिकायत के साथ निर्धारित फॉर्मेट में एक सिनॉप्सिस संलग्न करना होगा, जिसे कोर्ट स्टाफ कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज करेगा। समन जारी करने से पहले BNNS की धारा 223 के तहत किसी अतिरिक्त प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा सॉफ्टवेयर में एक नया ड्राफ्ट टेम्पलेट जोड़ा गया है, जो ‘कॉज ऑफ एक्शन’ से जुड़े लिमिटेशन पीरियड की स्वतः गणना करेगा।

आरोपी को राहत देने के उद्देश्य से कोर्ट ने ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा भी शुरू की है। समन में स्पष्ट रूप से पेमेंट लिंक का उल्लेख होगा। आरोपी CNR नंबर या केस डिटेल्स डालकर सीधे चेक की रकम ऑनलाइन जमा कर सकेगा। यदि आरोपी इस माध्यम से भुगतान करता है, तो कोर्ट कंपाउंडिंग के आधार पर मामले को बंद कर सकता है।

यह सर्कुलर सुप्रीम कोर्ट के संजाबीज तुरी बनाम किशोर एस. बरकर मामले में दिए गए हालिया फैसले के अनुपालन में जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में लाखों चेक बाउंस मामलों के लंबित होने पर चिंता जताते हुए न्यायपालिका पर बढ़ते बोझ को कम करने की जरूरत बताई थी। हाईकोर्ट का यह कदम न केवल डिजिटल न्याय व्यवस्था को बढ़ावा देगा, बल्कि चेक बाउंस मामलों के शीघ्र निस्तारण में भी अहम भूमिका निभाएगा।
अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े मामले में सुरेश राठौर को राहत, दो मुकदमों में गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की रोक

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज चार मुकदमों में से दो मामलों में गिरफ्तारी पर फौरी तौर पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने यह आदेश हरिद्वार के बहादराबाद और देहरादून के डालनवाला थाने में दर्ज मामलों पर सुनवाई के बाद दिया।

कोर्ट ने राज्य सरकार समेत मुकदमा दर्ज कराने वाले पक्षों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। हालांकि शेष दो मुकदमों पर फिलहाल कोई राहत नहीं दी गई है।

सुरेश राठौर और उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर के खिलाफ हरिद्वार के झबरेड़ा व बहादराबाद तथा देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाना और डालनवाला कोतवाली में मुकदमे दर्ज हैं। आरोप है कि सोशल मीडिया पर ऑडियो और वीडियो वायरल कर भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम की छवि खराब की गई।

इन ऑडियो-वीडियो में अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कुछ कथित खुलासे किए गए थे, जिनमें दुष्यंत गौतम समेत अन्य लोगों के नाम सामने आने का दावा किया गया। इसके बाद दुष्यंत गौतम, आरती गौड़, संचित कुमार और धर्मेंद्र कुमार सहित कई लोगों ने अलग-अलग थानों में सुरेश राठौर के खिलाफ छवि धूमिल करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी।

हाईकोर्ट में दायर याचिका में सुरेश राठौर की ओर से कहा गया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर किसी भी तरह का दुष्प्रचार नहीं किया है और वायरल किए गए ऑडियो-वीडियो से उनका कोई संबंध नहीं है। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि अभिनेत्री उर्मिला सनावर द्वारा जारी किए गए सभी ऑडियो और वीडियो पूरी तरह फर्जी हैं और यह पूरा मामला दुष्यंत गौतम की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से रचा गया है।

हाईकोर्ट ने प्राथमिक सुनवाई के बाद बहादराबाद (हरिद्वार) और डालनवाला (देहरादून) थाने में दर्ज दो मुकदमों में सुरेश राठौर की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही सभी पक्षों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई के लिए तिथि तय की जाएगी।
उत्तराखंड : अंकिता भंडारी हत्याकांड पर कांग्रेस की राजनीति पर सीएम धामी का हमला, बोले—कहीं कोई षड्यंत्र तो नहीं?


देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस द्वारा किए जा रहे विरोध-प्रदर्शन और दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मंगलवार को देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ऑडियो के आधार पर देहरादून की बजाय सीधे दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बवंडर खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या इसके पीछे कोई षड्यंत्र चल रहा है?”

सीएम धामी ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड एक अत्यंत हृदयविदारक घटना थी और राज्य सरकार ने शुरुआत से ही पूरी गंभीरता से कार्रवाई की। आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया गया और महिला आईपीएस अधिकारी की अध्यक्षता में विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई। एसआईटी की गहन जांच और मजबूत पैरवी के चलते तीनों दोषियों को न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं अंकिता के पिता से बात करूंगा। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। हम हर तरह की जांच के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”
उन्होंने बताया कि हाल ही में सामने आए ऑडियो में जिन लोगों के नाम लिए जा रहे हैं, उनकी जांच के लिए दोबारा एसआईटी गठित की गई है। सीएम ने कहा, “आज एक नाम लिया जा रहा है, कल किसी और का। एक ऑडियो में हत्या की बात है, दूसरे में आत्महत्या की। सच्चाई सामने आएगी और दोषी चाहे कोई भी हो, बचेगा नहीं।”

विरोध-प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर कल आपका नाम आ जाए तो आप क्या करेंगे? सामने आकर जवाब देना चाहिए। जल्द ही धुंध हटेगी और तस्वीर साफ होगी।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राज्य का माहौल खराब कर राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।

पार्टी नेताओं के अलग-अलग बयानों पर सीएम धामी ने कहा कि यह पार्टी का आंतरिक विषय है, लेकिन ऐसे बयानों से भ्रम की स्थिति बनती है। उन्होंने स्पष्ट किया, “अंकिता हमारी बेटी है। एक दिन के लिए भी कोई दोषी बाहर नहीं आया।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरेश राठौर अब पार्टी में नहीं हैं और एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में उन्हें सामने आकर जवाब देना चाहिए। उन्होंने दोहराया, “मैं गारंटी के साथ कह रहा हूं कि कोई भी दोषी नहीं बचेगा।”

आरोपियों को पकड़ने में हो रही देरी के सवाल पर सीएम ने कहा कि पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, नोटिस जारी किए जा रहे हैं और मोबाइल लोकेशन ट्रेस की जा रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना वीबी जी राम जी (विकसित भारत–जी राम जी) अधिनियम की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि यह केवल मनरेगा का नाम बदलना नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। योजना के तहत साप्ताहिक वेतन भुगतान, महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान, पारदर्शिता, नई तकनीक का उपयोग और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 के वित्तीय सहयोग का प्रावधान किया गया है। इसके लिए 1 लाख 51 हजार करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

गौरतलब है कि सीएम की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर अंकिता भंडारी मर्डर केस में सीबीआई जांच की मांग की थी। कांग्रेस ने इस मामले को भाजपा के “असली चेहरे” से जोड़ते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

उल्लेखनीय है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी एंगल को लेकर राज्यभर में धरना-प्रदर्शन जारी हैं। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है, जबकि सरकार इसे साजिश बताते हुए जांच में पूरी पारदर्शिता का दावा कर रही है।
तीर्थ पुरोहितों की मांग - कुंभ मेला क्षेत्र को हिंदू क्षेत्र घोषित करे सरकार, जल्द भेजा जाएगा प्रस्ताव
हरिद्वार, उत्तराखंड। 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेले से पहले धर्मनगरी हरिद्वार में कुंभ मेला क्षेत्र को हिंदू क्षेत्र घोषित किए जाने की मांग तेज हो गई है। हिंदूवादी नेता एवं श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम सहित कई तीर्थ पुरोहितों ने कुंभ क्षेत्र को गैर-हिंदू प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने की मांग उठाई है। इस संबंध में देवपुरा स्थित प्रेस क्लब हरिद्वार में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सरकार से मांग की गई।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए नितिन गौतम ने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में भी नगर पालिका हरिद्वार में गैर-हिंदुओं के ठहरने और व्यवसाय करने को लेकर नियम बने हुए थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले कुंभ मेले से पहले सभी गंगा घाटों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जानी चाहिए। उनका कहना था कि भव्य और दिव्य कुंभ के साथ-साथ सुरक्षित कुंभ के लिए यह कदम जरूरी है।

नितिन गौतम ने कहा कि कुंभ क्षेत्र को हिंदू क्षेत्र घोषित किया जाए और यदि कोई गैर-हिंदू इस क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक स्थलों और गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाए तथा पूरे कुंभ क्षेत्र में कड़े नियम लागू किए जाएं।

उन्होंने तर्क दिया कि जब पहले बायलॉज बनाए गए थे, तब आबादी और क्षेत्र का विस्तार सीमित था, लेकिन अब दोनों में काफी वृद्धि हो चुकी है। साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से गलत संदेश फैलने की बात कहते हुए उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया। नितिन गौतम ने बताया कि इस संबंध में एक प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा, ताकि इस पर आवश्यक कार्रवाई शुरू की जा सके।

इस मौके पर तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित ने कहा कि इस पहल को सफल बनाने के लिए सभी सनातनियों को एकजुट होकर आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि योजना लागू होने के बाद भी घाटों पर पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में किसी को कोई परेशानी नहीं होगी। उन्होंने अन्य देशों में हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अपने धर्म और समाज की रक्षा करना सभी का दायित्व है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मौजूद अन्य तीर्थ पुरोहितों और संत समाज के लोगों ने भी इस मांग का समर्थन किया और सरकार से इसे गंभीरता से लेने की अपील की।