इटली की लुक्रेशिया माघ मेले में श्रद्धालुओं का आकर्षण, गंगा और प्रयाग को मानती हैं दिव्य

प्रयागराज। माघ मेला क्षेत्र में इस बार श्रद्धालुओं का ध्यान इटली से आई लुक्रेशिया की ओर रहा। सनातन धर्म और भारतीय तीर्थ स्थलों से प्रभावित लुक्रेशिया ने गंगा को मां और प्रयाग को तीर्थराज मानकर श्रद्धा प्रकट की। श्रद्धालुओं के बीच वह चर्चा का केंद्र बनीं।
लुक्रेशिया अपने पिता आंजलो के साथ माघ मेला में आई हैं। हिंदी में बात करने में थोड़ी असहज होने के बावजूद, टूटी-फूटी हिंदी में उन्होंने कहा कि यहाँ धरती पर स्वर्ग जैसा अनुभव होता है। वह गुरु ज्ञान मिलने के बाद से लगातार जय श्री राम और गंगा मैया की जय का जयकारा लगाती हैं। उनका पहनावा विदेशी है, लेकिन उनका व्यवहार और भाव भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत दिखाई देता है। हाथ जोड़कर प्रणाम करना और संगम की रेत को स्वर्ग (हैवेन) कहना उनके गहन श्रद्धाभाव को दर्शाता है।
नैमिषारण्य के मढि़या घाट मैगलगंज में स्थित नागा बाबा मनमौजी राम पुरी ने बताया कि वर्ष 2024 में लुक्रेशिया उनसे मिली थीं। लुक्रेशिया रोज बाबा को प्रणाम करतीं और उनके साथ अपने सवाल साझा करतीं। उस समय उनके साथ एक दूभाषिया और कुछ भारतीय मित्र भी थे। बाबा मनमौजी के अनुसार, लुक्रेशिया ने नैमिषारण्य तीर्थ की महिमा सुनकर उनसे जुड़कर शिष्या बनना चुना, और उनके पिता आंजलो सहित कई विदेशी भी उनके शिष्य बने।
बाबा मनमौजी ने बताया कि प्रयागराज तीर्थों का राजा है, जहां कल्पवास और साधना करने वालों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। वे बताते हैं कि यहां कुंभ और माघ मास में आते हैं और धूनी का आनंद लेते हैं। वहीं, नैमिषारण्य तपोभूमि में 85 कोसा की परिक्रमा, हनुमानगढ़ी, व्यास गद्दी, काली पीठ, चक्रतीर्थ, दधीचि कुंड, पांडव किला और दशश्वमेध घाट स्थित हैं। यह वही स्थान है जहां भगवान राम ने यज्ञ किया था।लुक्रेशिया और उनके पिता आंजलो सहित अन्य विदेशी श्रद्धालु इन तीर्थों की कथा और महिमा सुनकर शिष्य बने, और अब वे भारतीय आध्यात्मिक साधना और संस्कृति में गहरे जुड़े हुए हैं।
Jan 08 2026, 19:13
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
0- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
0.1k