कैसे पता चलेगा, कुत्ता काटने के मूड में है या नहीं? कपिल सिब्बल की दलील पर सुप्रीम कोर्ट की खरी-खरी
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आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान आवारा कुत्तों और पशु-प्रेम को लेकर एक रोचक बहस देखने को मिली। सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता वंदना जैन की एक दलील पर टिप्पणी की, 'जब हम पशु प्रेमियों की बात करते हैं, तो इसमें सभी जानवर शामिल होते हैं। मैं अपने घर में कोई जानवर रखना चाहता हूं या नहीं, यह मेरा विवेक है।
कोर्ट ने पूछा-सोसाइटी में भैंस पालना चाहे तो क्या होगा?
आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणियां की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गेटेड कम्युनिटी में कुत्ते को घूमने देना चाहिए या नहीं, यह समुदाय को तय करना होगा। मान लीजिए, 90 प्रतिशत निवासियों को लगता है कि यह बच्चों के लिए खतरनाक होगा, लेकिन 10 फीसदी कुत्ते रखने पर जोर देते हैं। कोई कल भैंस ला सकता है। वे कह सकते हैं कि मुझे भैंस का दूध चाहिए।
शीर्ष अदालत ने सिब्बल को लगाई फटकार
आवारा कुत्तों पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आज वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को लताड़ भी लगाई। दरअसल, बहस के दौरान सिब्बल ने कहा कि कुत्ते सड़कों पर नहीं होते हैं बल्कि परिसरों में रहते हैं। इसी दलील पर शीर्ष अदालत ने सिब्बल पर नाराजगी जताई।
शेल्टर में मौजूद कुत्तों को खाना खिलाने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने दलीलों पर सवाल करते हुए कहा, क्या कुत्तों को यह सिखाया जा सकता है कि वे किसी को न काटें? किसी को कैसे पता चलेगा कि कौन सा कुत्ता काटने के मूड में है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पशुप्रेमियों को शेल्टर में मौजूद कुत्तों को खाना खिलाना चाहिए।




Jan 08 2026, 10:47
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