साध्वी प्राची ने की हरिद्वार को 'अमृत क्षेत्र' घोषित करने की मांग कहा, गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध


हरिद्वार, उत्तराखंड। हिंदूवादी नेता साध्वी प्राची ने धर्मनगरी हरिद्वार को 'अमृत क्षेत्र' घोषित करने और गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है। प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में साध्वी प्राची ने कहा कि हरकी पैड़ी हिंदुओं का प्रमुख पवित्र तीर्थ स्थल है। इसकी पवित्रता और मान-मर्यादा को बनाए रखने के लिए गैर-धर्मावलंबियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि तीर्थ क्षेत्र में गैर-हिंदुओं द्वारा संपत्ति खरीदने पर भी रोक लगाई जाए। साध्वी प्राची ने उदाहरण देते हुए बताया कि ईसाइयों की वेटिकन सिटी और मुस्लिमों के मक्का-मदीना में अन्य धर्मों के लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध है। इसी तर्ज पर हरिद्वार में भी ऐसा नियम लागू किया जाना चाहिए।

साध्वी प्राची ने नगर निगम द्वारा बनाए गए बायलॉज का सख्ती से पालन करने की अपील की। उन्होंने हरिद्वार और हरकी पैड़ी को 'अमृत क्षेत्र' घोषित करने के साथ-साथ गैर-धर्मावलंबियों पर रोक लगाने की मांग दोहराई।

उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सराहना करते हुए कहा कि वे हिंदू संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस संदर्भ में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की जांच कर उन्हें चिन्हित कर बाहर करने की भी मांग की।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार हरिद्वार के गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को नियंत्रित करने पर विचार कर रही है, खासकर आगामी अर्धकुंभ मेले को देखते हुए।
देहरादून नगर निगम के विकास कार्यों की टेंडर सूची में गड़बड़ी, सभी टेंडर पर रोक


देहरादून, उत्तराखंड। देहरादून नगर निगम में विकास कार्यों के टेंडर को लेकर सामने आए विवाद के बाद अब प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। टेंडर सूची में गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद नगर आयुक्त नमामि बंसल ने सभी विकास कार्यों के टेंडर पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही प्रस्तावित कार्यों का भौतिक सत्यापन भी शुरू कर दिया गया है।

नगर निगम की ओर से कराई गई जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि कुछ विकास कार्य गलत तरीके से टेंडर सूची में शामिल किए गए थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कार्य ऐसे थे जो अन्य विभागों द्वारा पहले ही पूरे किए जा चुके हैं, जबकि कुछ कार्य नगर निगम द्वारा पहले ही संपन्न किए जा चुके थे। इसके बावजूद उन्हें दोबारा टेंडर सूची में दर्शाया गया, जिससे गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह महापौर कोटे से नगर निगम के सभी 100 वार्डों में प्रस्तावित विकास कार्यों की टेंडर सूची जारी की गई थी। इसके बाद कई पार्षदों ने सूची पर आपत्ति जताई। पार्षदों का आरोप था कि कुछ वार्डों में जहां 20 से 22 लाख रुपये के कार्य स्वीकृत किए गए हैं, वहीं कुछ वार्डों में 70 से 80 लाख रुपये तक के कार्य शामिल कर दिए गए, जिससे असमानता साफ झलकती है।

विवाद बढ़ने पर महापौर सौरभ थपलियाल और नगर आयुक्त नमामि बंसल ने शिकायतों का संज्ञान लेते हुए टेंडर सूची की जांच के आदेश दिए थे। जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद गड़बड़ियों की पुष्टि हुई, जिसके चलते सभी विकास कार्यों के टेंडर पर रोक लगाने का फैसला किया गया।

नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन और पूरी जांच प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही नए सिरे से टेंडर जारी किए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी तरह की अनियमितता को रोकने के लिए यह कदम जरूरी था।
उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला-चेक बाउंस मामलों में डिजिटल समन की अनुमति


नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चेक बाउंस (धारा 138 एनआई एक्ट) मामलों में समन जारी करने की प्रक्रिया को सरल और तेज़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया है कि अब चेक बाउंस मामलों में ईमेल और व्हाट्सएप जैसे डिजिटल माध्यमों से भी समन भेजे जा सकेंगे।

नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, उत्तराखंड इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेस रूल्स, 2025 के तहत समन भेजने की पारंपरिक प्रक्रिया के साथ-साथ अब इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को भी मान्यता दी गई है। इसका उद्देश्य चेक बाउंस मामलों के निस्तारण में तेजी लाना और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।

सर्कुलर के अनुसार, चेक बाउंस की शिकायत दर्ज करते समय शिकायतकर्ता को आरोपी का ईमेल आईडी और व्हाट्सएप नंबर अनिवार्य रूप से देना होगा। साथ ही इन जानकारियों की सत्यता को प्रमाणित करने के लिए एक हलफनामा भी दाखिल करना होगा। गलत या भ्रामक जानकारी देने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

हर शिकायत के साथ निर्धारित फॉर्मेट में एक सिनॉप्सिस संलग्न करना होगा, जिसे कोर्ट स्टाफ कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज करेगा। समन जारी करने से पहले BNNS की धारा 223 के तहत किसी अतिरिक्त प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा सॉफ्टवेयर में एक नया ड्राफ्ट टेम्पलेट जोड़ा गया है, जो ‘कॉज ऑफ एक्शन’ से जुड़े लिमिटेशन पीरियड की स्वतः गणना करेगा।

आरोपी को राहत देने के उद्देश्य से कोर्ट ने ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा भी शुरू की है। समन में स्पष्ट रूप से पेमेंट लिंक का उल्लेख होगा। आरोपी CNR नंबर या केस डिटेल्स डालकर सीधे चेक की रकम ऑनलाइन जमा कर सकेगा। यदि आरोपी इस माध्यम से भुगतान करता है, तो कोर्ट कंपाउंडिंग के आधार पर मामले को बंद कर सकता है।

यह सर्कुलर सुप्रीम कोर्ट के संजाबीज तुरी बनाम किशोर एस. बरकर मामले में दिए गए हालिया फैसले के अनुपालन में जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में लाखों चेक बाउंस मामलों के लंबित होने पर चिंता जताते हुए न्यायपालिका पर बढ़ते बोझ को कम करने की जरूरत बताई थी। हाईकोर्ट का यह कदम न केवल डिजिटल न्याय व्यवस्था को बढ़ावा देगा, बल्कि चेक बाउंस मामलों के शीघ्र निस्तारण में भी अहम भूमिका निभाएगा।
अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े मामले में सुरेश राठौर को राहत, दो मुकदमों में गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की रोक

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज चार मुकदमों में से दो मामलों में गिरफ्तारी पर फौरी तौर पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने यह आदेश हरिद्वार के बहादराबाद और देहरादून के डालनवाला थाने में दर्ज मामलों पर सुनवाई के बाद दिया।

कोर्ट ने राज्य सरकार समेत मुकदमा दर्ज कराने वाले पक्षों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। हालांकि शेष दो मुकदमों पर फिलहाल कोई राहत नहीं दी गई है।

सुरेश राठौर और उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर के खिलाफ हरिद्वार के झबरेड़ा व बहादराबाद तथा देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाना और डालनवाला कोतवाली में मुकदमे दर्ज हैं। आरोप है कि सोशल मीडिया पर ऑडियो और वीडियो वायरल कर भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम की छवि खराब की गई।

इन ऑडियो-वीडियो में अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कुछ कथित खुलासे किए गए थे, जिनमें दुष्यंत गौतम समेत अन्य लोगों के नाम सामने आने का दावा किया गया। इसके बाद दुष्यंत गौतम, आरती गौड़, संचित कुमार और धर्मेंद्र कुमार सहित कई लोगों ने अलग-अलग थानों में सुरेश राठौर के खिलाफ छवि धूमिल करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी।

हाईकोर्ट में दायर याचिका में सुरेश राठौर की ओर से कहा गया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर किसी भी तरह का दुष्प्रचार नहीं किया है और वायरल किए गए ऑडियो-वीडियो से उनका कोई संबंध नहीं है। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि अभिनेत्री उर्मिला सनावर द्वारा जारी किए गए सभी ऑडियो और वीडियो पूरी तरह फर्जी हैं और यह पूरा मामला दुष्यंत गौतम की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से रचा गया है।

हाईकोर्ट ने प्राथमिक सुनवाई के बाद बहादराबाद (हरिद्वार) और डालनवाला (देहरादून) थाने में दर्ज दो मुकदमों में सुरेश राठौर की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही सभी पक्षों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई के लिए तिथि तय की जाएगी।
उत्तराखंड : अंकिता भंडारी हत्याकांड पर कांग्रेस की राजनीति पर सीएम धामी का हमला, बोले—कहीं कोई षड्यंत्र तो नहीं?


देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस द्वारा किए जा रहे विरोध-प्रदर्शन और दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मंगलवार को देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ऑडियो के आधार पर देहरादून की बजाय सीधे दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बवंडर खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या इसके पीछे कोई षड्यंत्र चल रहा है?”

सीएम धामी ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड एक अत्यंत हृदयविदारक घटना थी और राज्य सरकार ने शुरुआत से ही पूरी गंभीरता से कार्रवाई की। आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया गया और महिला आईपीएस अधिकारी की अध्यक्षता में विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई। एसआईटी की गहन जांच और मजबूत पैरवी के चलते तीनों दोषियों को न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं अंकिता के पिता से बात करूंगा। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। हम हर तरह की जांच के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”
उन्होंने बताया कि हाल ही में सामने आए ऑडियो में जिन लोगों के नाम लिए जा रहे हैं, उनकी जांच के लिए दोबारा एसआईटी गठित की गई है। सीएम ने कहा, “आज एक नाम लिया जा रहा है, कल किसी और का। एक ऑडियो में हत्या की बात है, दूसरे में आत्महत्या की। सच्चाई सामने आएगी और दोषी चाहे कोई भी हो, बचेगा नहीं।”

विरोध-प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर कल आपका नाम आ जाए तो आप क्या करेंगे? सामने आकर जवाब देना चाहिए। जल्द ही धुंध हटेगी और तस्वीर साफ होगी।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राज्य का माहौल खराब कर राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।

पार्टी नेताओं के अलग-अलग बयानों पर सीएम धामी ने कहा कि यह पार्टी का आंतरिक विषय है, लेकिन ऐसे बयानों से भ्रम की स्थिति बनती है। उन्होंने स्पष्ट किया, “अंकिता हमारी बेटी है। एक दिन के लिए भी कोई दोषी बाहर नहीं आया।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरेश राठौर अब पार्टी में नहीं हैं और एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में उन्हें सामने आकर जवाब देना चाहिए। उन्होंने दोहराया, “मैं गारंटी के साथ कह रहा हूं कि कोई भी दोषी नहीं बचेगा।”

आरोपियों को पकड़ने में हो रही देरी के सवाल पर सीएम ने कहा कि पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, नोटिस जारी किए जा रहे हैं और मोबाइल लोकेशन ट्रेस की जा रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना वीबी जी राम जी (विकसित भारत–जी राम जी) अधिनियम की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि यह केवल मनरेगा का नाम बदलना नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। योजना के तहत साप्ताहिक वेतन भुगतान, महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान, पारदर्शिता, नई तकनीक का उपयोग और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 के वित्तीय सहयोग का प्रावधान किया गया है। इसके लिए 1 लाख 51 हजार करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

गौरतलब है कि सीएम की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर अंकिता भंडारी मर्डर केस में सीबीआई जांच की मांग की थी। कांग्रेस ने इस मामले को भाजपा के “असली चेहरे” से जोड़ते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

उल्लेखनीय है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी एंगल को लेकर राज्यभर में धरना-प्रदर्शन जारी हैं। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है, जबकि सरकार इसे साजिश बताते हुए जांच में पूरी पारदर्शिता का दावा कर रही है।
तीर्थ पुरोहितों की मांग - कुंभ मेला क्षेत्र को हिंदू क्षेत्र घोषित करे सरकार, जल्द भेजा जाएगा प्रस्ताव
हरिद्वार, उत्तराखंड। 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेले से पहले धर्मनगरी हरिद्वार में कुंभ मेला क्षेत्र को हिंदू क्षेत्र घोषित किए जाने की मांग तेज हो गई है। हिंदूवादी नेता एवं श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम सहित कई तीर्थ पुरोहितों ने कुंभ क्षेत्र को गैर-हिंदू प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने की मांग उठाई है। इस संबंध में देवपुरा स्थित प्रेस क्लब हरिद्वार में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सरकार से मांग की गई।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए नितिन गौतम ने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में भी नगर पालिका हरिद्वार में गैर-हिंदुओं के ठहरने और व्यवसाय करने को लेकर नियम बने हुए थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले कुंभ मेले से पहले सभी गंगा घाटों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जानी चाहिए। उनका कहना था कि भव्य और दिव्य कुंभ के साथ-साथ सुरक्षित कुंभ के लिए यह कदम जरूरी है।

नितिन गौतम ने कहा कि कुंभ क्षेत्र को हिंदू क्षेत्र घोषित किया जाए और यदि कोई गैर-हिंदू इस क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक स्थलों और गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाए तथा पूरे कुंभ क्षेत्र में कड़े नियम लागू किए जाएं।

उन्होंने तर्क दिया कि जब पहले बायलॉज बनाए गए थे, तब आबादी और क्षेत्र का विस्तार सीमित था, लेकिन अब दोनों में काफी वृद्धि हो चुकी है। साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से गलत संदेश फैलने की बात कहते हुए उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया। नितिन गौतम ने बताया कि इस संबंध में एक प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा, ताकि इस पर आवश्यक कार्रवाई शुरू की जा सके।

इस मौके पर तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित ने कहा कि इस पहल को सफल बनाने के लिए सभी सनातनियों को एकजुट होकर आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि योजना लागू होने के बाद भी घाटों पर पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में किसी को कोई परेशानी नहीं होगी। उन्होंने अन्य देशों में हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अपने धर्म और समाज की रक्षा करना सभी का दायित्व है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मौजूद अन्य तीर्थ पुरोहितों और संत समाज के लोगों ने भी इस मांग का समर्थन किया और सरकार से इसे गंभीरता से लेने की अपील की।
हरिद्वार: ललतारौ पुल पर भीषण आग, सात दुकानें जलकर राख
हरिद्वार, उत्तराखंड। शहर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत ललतारौ पुल पर बीती देर रात भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग की चपेट में आकर पुल पर बनी सात दुकानें (खोके) पूरी तरह जलकर राख हो गईं। इस हादसे में दुकानों में रखा लाखों रुपये का सामान जलने का अनुमान है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात करीब डेढ़ बजे ललतारौ पुल पर स्थित एक दुकान में अचानक आग भड़क उठी। आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और आसपास की अन्य दुकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें उठती देख स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए और क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। हालांकि रेलवे रोड पर चल रहे सीवर कार्य के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को फायर स्टेशन से शंकराचार्य चौक और चंडी चौक होते हुए वैकल्पिक मार्ग से आना पड़ा। इससे दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में लगभग एक घंटे की देरी हो गई। जब तक फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, तब तक सभी दुकानें पूरी तरह जल चुकी थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दमकल वाहन मुख्य मार्ग से समय पर पहुंच जाते, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था।

दमकल कर्मियों ने दुकानों के शटर तोड़कर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक दुकानों में रखा सारा सामान जलकर खाक हो चुका था। आग से प्रभावित दुकानदारों ने बताया कि इस हादसे में उनकी वर्षों की मेहनत और पूरी रोजी-रोटी नष्ट हो गई है, जिससे उनके सामने जीवन यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की जा रही है, जिसके बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
उत्तराखंड: आतंक का पर्याय बना गुलदार पिंजरे में कैद, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
अल्मोड़ा। जनपद अल्मोड़ा के विकासखंड चौखुटिया अंतर्गत सिमलखेत ग्राम सभा के तोक पुराना लोहबा में लंबे समय से दहशत का कारण बना गुलदार आखिरकार वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में कैद हो गया। सोमवार तड़के गुलदार के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

बताया जा रहा है कि यह गुलदार काफी समय से सिमलखेत और आसपास के गांवों में सक्रिय था और कई बार गौशालाओं पर हमला कर गौवंश समेत अन्य पालतू जानवरों को अपना शिकार बना चुका था। गुलदार की बढ़ती गतिविधियों के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल था और लोग रात के समय घरों से बाहर निकलने से कतरा रहे थे।

लगातार हो रही घटनाओं से परेशान ग्रामीणों की मांग पर वन विभाग ने पुराना लोहबा तोक में गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया था। सोमवार सुबह तड़के गुलदार पिंजरे में फंस गया। उसकी दहाड़ सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तुरंत वन विभाग को सूचना दी।

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और गुलदार को सुरक्षित रूप से कब्जे में लिया। वन क्षेत्र अधिकारी गोपाल दत्त जोशी ने बताया कि गुलदार लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय था और कई बार गौशालाएं तोड़कर नुकसान पहुंचा चुका था। पिंजरा लगाए जाने के बाद यह कार्रवाई सफल रही।

पकड़े गए गुलदार को रेस्क्यू कर द्वाराहाट रेंज कार्यालय भेज दिया गया है, जहां से उसे आगे अल्मोड़ा स्थित रेस्क्यू सेंटर भेजा जाएगा। वन विभाग के अनुसार क्षेत्र में अन्य गुलदारों की मौजूदगी की सूचना भी मिली है, जिसको देखते हुए गश्त बढ़ा दी गई है। द्वाराहाट रेंज क्षेत्र में तीन स्थानों पर पिंजरे लगाए गए हैं और ट्रैप कैमरों के माध्यम से भी निगरानी की जा रही है, ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उत्तराखंड : ऋषिकेश में वन भूमि सर्वे का उग्र विरोध

* नेशनल हाईवे-जाम, रेलवे ट्रैक बाधित, पथराव, 16 नामजद और 200 से अधिक पर मुकदमा

ब्यूरो

देहरादून: ऋषिकेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चल रहे वन भूमि सर्वे के खिलाफ शनिवार और रविवार को विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे और मनसा देवी रेलवे लाइन को जाम किया, जिससे ट्रेनों की आवाजाही बाधित हुई। इस दौरान पुलिस पर पथराव भी किया गया।

पुलिस ने अब तक तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं, जिनमें 16 लोगों को नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। रायवाला थाने में तैनात एसएसआई मनवर सिंह नेगी के अनुसार, शनिवार को सेक्टर-2 प्रभारी के रूप में मालवीय नगर पहुंचे थे, जहां अमितग्राम और श्यामपुर बायपास मार्ग जाम रहा।

एक मामले में गुमानीवाला क्षेत्र में वन विभाग की महिला रेंजर के साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार का आरोप भी सामने आया। इस मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई है।

कोतवाली ऋषिकेश के निरीक्षक कैलाश चंद्र भट्ट की शिकायत पर मनसा देवी रेलवे फाटक क्षेत्र में सड़क और रेल मार्ग बाधित करने, पुलिस पर पथराव करने समेत अन्य गंभीर आरोपों में आठ से दस लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

एसपी देहात जया बलूनी ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार की जा रही थी। रेलवे लाइन बाधित होने से करीब छह ट्रेनें प्रभावित हुईं और हजारों यात्रियों को परेशानी हुई।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लाठीचार्ज नहीं किया गया और सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जनता से अपील की गई है कि यदि किसी ने सरकारी वन भूमि को निजी बताकर धोखाधड़ी की है, तो वह पुलिस में शिकायत दर्ज कराए।

त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा हत्याकांड पर CM धामी ने जताया गहरा शोक

* मुख्यमंत्री ने परिवार को दिलाया कड़ी कार्रवाई का भरोसा

देहरादून, उत्तराखंड। त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मामले ने न्याय की मांग को तेज कर दिया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मृतक के पिता तरुण प्रसाद चकमा से फोन पर बात कर गहरा शोक व्यक्त किया और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इस मामले में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक आरोपी के नेपाल भागने की आशंका है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं और उस पर इनाम भी घोषित किया गया है।

सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड एक शांतिप्रिय राज्य है, जहां देश-विदेश से छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं। इस तरह की घटना न केवल राज्य बल्कि पूरे समाज के लिए पीड़ादायक है। उन्होंने साफ कहा कि राज्य सरकार किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

धामी ने यह भी बताया कि उन्होंने त्रिपुरा के CM डॉ. माणिक साहा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से इस घटना पर चर्चा की है। उन्होंने आश्वस्त किया कि उत्तराखंड सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और त्रिपुरा सरकार के साथ मिलकर हर संभव मदद की जाएगी।

एंजेल चकमा का अंतिम संस्कार 27 दिसंबर को त्रिपुरा में किया गया। घटना के बाद छात्र संगठनों और आम लोगों में भारी आक्रोश है, और सभी आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग जोर पकड़ रही है।