बनेंगे दो मूल्यांकन केंद्र ,जीआईसी में जांची जाएगी इंटर तो हाईस्कूल की नेशनल में जंचेगी कांपियां
नितेश श्रीवास्तव

भदोही। जिले में बोर्ड परीक्षा शुरू होने से पहले ही मूल्यांकन केंद्र बनाने की कवायद शुरू हो गई है। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से शिक्षा विभाग से सूची मांगी है। विभाग की ओर से जीआईसी और नेशनल इंटर कॉलेज भदोही का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट और इंद्र बहादुर सिंह नेशनल इंटर कॉलेज में हाईस्कूल की कॉपियां जांची जाएंगी। जिले में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू होंगी। 94 केंद्रों पर होने वाली परीक्षा में करीब 54 हजार छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। बोर्ड परीक्षा खत्म होने के बाद कॉपियों का मूल्यांकन शुरू होगा। सूबे के अलग-अलग जिलों की कॉपियां मंडलवार क्षेत्रों में भेजी जाती हैं।

जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज और इंद्र बहादुर सिंह नेशनल इंटर कॉलेज को मूल्यांकन केंद्र बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। जल्द ही परिषद के पास प्रस्ताव भेजा जाएगा। परीक्षा के दौरान ही स्वीकृति मिल जाएगी। उसके बाद परीक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने बताया कि विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज और इंद्र बहादुर सिंह नेशनल इंटर कॉलेज में मूल्यांकन कार्य सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होगा। इससे पारदर्शिता कायम रहे। डीआईओएस ने बताया कि परीक्षा खत्म होने पर मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अभी फिलहाल प्रायोगिक और बोर्ड परीक्षा की तैयारी चल रही है।
52 हॉटस्पाॅट चिह्नित... यहां पर नौनिहालों को कुत्तों ने काटा था



रिपोर्ट -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। कालीन नगरी में कुत्ते से नौनिहालों को खतरा है। सर्वे में विद्यालयों के आसपास 52 हॉटस्पॉट तय किए गए हैं। जहां पर कुत्ते बच्चों पर हमला कर सकते हैं। इस पर नजर रखने के लिए निकाय एवं पशुपालन विभाग से शिक्षा विभाग समन्वय स्थापित कर काम करेगा। यही नहीं कुत्ते पर नजर रखने के लिए 885 परिषदीय विद्यालय में एक-एक शिक्षक को नोडल बनाया गया है। सुप्रीमकोर्ट के सात नवंबर 2025 को पारित आदेश को प्रभावी बनाने में सरकार गंभीर है। स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों को आवारा कुत्तों से सुरक्षित करने के लिए कार्ययोजना को प्रभावी बनाया जा रहा है। शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य केंद्रों और सार्वजनिक स्थलों पर कुत्ते के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। शासन के निर्देश के बाद एक महीने में नगर निकायों, बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से सर्वे किया गया। इसमें ज्ञानपुर, भदोही, सुरियावां, डीघ, माधोसिंह, खमरिया, नई बाजार आदि क्षेत्रों में 52 हॉट स्पॉट चिह्नित किया गया। इन स्थानों पर अक्सर कुत्ते घूमते रहते हैं। बच्चों को कुत्ते से बचाव के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। स्कूलों में एक-एक नोडल शिक्षक को निगरानी के लिए रखा है। वहीं, निकाय की ओर से गश्त टीम प्रतिदिन चिह्नित स्थानों पर भेजी जाएगी।


52 हाॅटस्पाॅट चिह्नित किए गए हैं, जहां कुत्ते बैठे रहते हैं। सुरक्षा के मद्देनजर सभी 885 परिषदीय विद्यालय में एक - एक नोडल शिक्षक की ड्यूटी लगाई गई है। नगर निकाय से समन्वय स्थापित कर काम किया जाएगा।


शिवम् पांडेय बीए‌स‌ए भदोही

अभी तक कुत्ते के रखने के लिए व्यवस्था नहीं है। शेल्टर होम बनाने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है।

धर्मराज सिंह,ईओ भदोही
भदोही में 31वां बाबा सेमराधनाथ कल्पवास मेला शुरू:डीएम-एसपी ने वैदिक मंत्रोच्चार से किया शुभारंभ, एक माह तक चलेगा


नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भदोही के बाबा सेमराधनाथ धाम कल्पवास क्षेत्र में 31 वें माघ मेला कल्पवास का शुभारंभ हो गया है। जिलाधिकारी शैलेश कुमार और पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां गंगा का पूजन और धर्म ध्वजारोहण कर मेले का उद्धघाटन किया। उन्होंने भदोही वासियों के सर्व कल्याण की कामना की। जिलाधिकारी ने कल्पवास मेले को भारतीय परंपरा और पर्यावरण का प्रतीक बताया। उन्होंने नूतन वर्ष 2026 के संदर्भ में लोगों को मां गंगा की निर्मल एवं अवरिल धारा के महंत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया। यह मेला लगभग 30 वर्ष पूर्व हुआ था,जब इसमें 5 से 7 लोग ही कल्पवास मेले करते थे। धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ी और जब सैकड़ों लोग एक माह तक कल्पवास कर पुण्य के भागी बनते हैं ‌ मान्यता है कि यह स्थान काशी और प्रयाग के मध्य एक महत्वपूर्ण पूर्ण तीर्थ स्थल है। मेले के बढ़ते स्वरूप को देखते हुए, जिला प्रशासन द्वारा यहां समस्त आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती है।
12 से 21 जनवरी तक स्कूलों में आयोजित होंगी प्री-बोर्ड परीक्षाएं

*हाईस्कूल और इंटर 54,371 विद्यार्थी होंगे शामिल*



रिपोर्ट -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। यूपी बोर्ड परीक्षा से पहले जिले में प्री-बोर्ड परीक्षा कराई जाएगी। शिक्षा विभाग ने इसकी तिथि तय कर दी है। 12 से 21 जनवरी के बीच 193 विद्यालयों में परीक्षा कराई जाएगी। विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज से आज यानि दो जनवरी से रिजर्व प्रश्नपत्र का वितरण शुरू हो गया है। छह जनवरी तक सभी कॉलेजों को प्रश्नपत्र लेने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में 18 फरवरी से यूपी बोर्ड परीक्षा शुरू होगी। उसके पहले प्रायोगिक और प्री बोर्ड परीक्षाएं होनी है। परीक्षाएं बोर्ड के मूल प्रश्नपत्रों के अनुरूप कराई जाएंगी। साल 2025 में उपयोग न किए गए अतिरिक्त (रिजर्व) प्रश्नपत्रों का प्रयोग होगा, इससे छात्र-छात्राएं वास्तविक बोर्ड परीक्षा के स्तर का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। जिले में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 54,371 परीक्षार्थी इस प्री-बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि सभी विद्यालयों को समय से परीक्षा के आयोजन की तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। परीक्षा का प्रश्नपत्र पैटर्न, अंक विभाजन और समय-सीमा पूरी तरह यूपी बोर्ड की मुख्य परीक्षा के अनुरूप होगी।
इससे विद्यार्थियाें को परीक्षा के दबाव, समय प्रबंधन व प्रश्नों की प्रकृति को समझने में मदद मिलेगी। इस परीक्षा को भी सीसीटीवी की निगरानी में कराया जाएगा। लापरवाही बरतने पर विद्यालय के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा 12 से 21 जनवरी के बीच आयोजित की जाएगी।
भदोही एसपी ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को किया सम्मानित: दिसंबर माह के सर्वश्रेष्ठ कर्मियों को मिला प्रशस्ति पत्र


नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भदोही पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने शुक्रवार को साप्ताहिक परेड की सलामी ली और उसका निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने दिसंबर 2025 में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। परेड में पुलिस लाइन के कर्मी, विभिन्न कार्यालयों में नियुक्त कर्मी और रिक्रूट पुलिसकर्मी शामिल हुए। शारीरिक व मानसिक फिटनेस के लिए दौड़ लगवाई गई। परेड के दौरान अनुशासन और एकरूपता बनाए रखने के लिए टोलीवार ड्रिल को और प्रभावी बनाने हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। प्रशिक्षण के लिए आए नवचयनित आरक्षियों की पीटी/परेड का निरीक्षण कर उन्हें अनुशासन और नियमों के बारे में जानकारी दी गई। परेड के बाद ट्रेनिंग उस्तादों को निर्देश दिए गए कि वे प्रशिक्षणार्थियों को सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं और निर्देशों से भलीभांति अवगत कराएं। साप्ताहिक अर्दली रूम के दौरान विभिन्न रजिस्टरों की जांच कर संबंधितों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने परेड के उपरांत पुलिस लाइन सभागार में दिसंबर 2025 में सराहनीय कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया। इनमें थाने पर नियुक्त पुलिसकर्मी, साइबर सेल/थाना साइबर क्राइम पर नियुक्त पुलिसकर्मी, कंप्यूटर ऑपरेटर तथा स्वाट एवं सर्विलांस टीम के सदस्य शामिल थे। उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं।
जिले में बनाई जाएंगी सात नई पुलिस चौकियां, सीमाओं पर नजर रखेगी पुलिस,मूंसीलाटपुर , सेमराध और रामपुर घाट पर भी खुलेंगी चौकियां



रिपोर्ट - नितेश श्रीवास्तव


भदोही। जिले में जल्द ही सात नई पुलिस चौकियां बनाई जाएंगी। यह चौकियां सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ उन महत्वपूर्ण स्थानों पर बनाई जाएंगी जहां महत्वपूर्ण आयोजन होने के साथ-साथ समय-समय पर लोगों की भीड़ जुटती है। सात चौकियों में सेमराधनाथ और रामपुर घाट पर भी चौकी खोलने की तैयारी है। इससे आगामी माघ मेले में पुलिस को मदद मिलेगी। वहीं, महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल होने के कारण कानून व्यवस्था के अनुपालन व भीड़ को कंट्रोल करने में सहयोग मिलेगा। जिले में इस समय 10 थाने और 24 पुलिस चौकियां हैं। जिले की पुलिस करीब 20 लाख की आबादी पर कानून व्यवस्था के अनुपालन का जिम्मा संभाल रही है। जनपद से वाराणसी, जौनपुर, मिर्जापुर और प्रयागराज जैसे जनपदों की सीमा लगती है। कई बार सीमावर्ती इलाकों से ही अपराधियों के इंट्री होने के साथ-साथ अपराध करने के बाद फरार होने की जुगत में रहते हैं। इसके अलावा सीमावर्ती इलाकों में पुलिस तक पहुंचने में लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने सीमावर्ती इलाकों पर नजर रखने और सीमावर्ती लोगों तक पहुंच आसान बनाने के लिए सात नई चौकियां खोलने का निर्णय लिया है।




*सेमराध और रामपुर घाट पर खोली जाएंगी चौकियां*

जिले में सेमराध और रामपुर गंगा घाट पर भी पुलिस चौकी बनाई जाएगी। यह दोनों धार्मिक स्थल है। रामपुर घाट पर जहां प्रमुख स्नान पर्वों पर भीड़ जुटती है। वहीं, इसी घाट के पास ही अंतिम संस्कार भी होते हैं। सेमराध में हर सोमवार को यहां हजारों की संख्या में लोग जमीन के 15 फीट नीचे स्थित स्वयंभू शिवलिंग का दर्शन करने के लिए आते हैं। इसके अलावा हर साल माघ मेले में यहां कल्पवास मेला भी लगता है।
यहां-यहां खुलेगी चौकी
गोपीगंज कोतवाली - मंडी समिति चौकी
गोपीगंज कोतवाली - रामपुर घाट चौकी
कोईरौना थाना - सेमराध चौकी
दुर्गागंज थाना - कुढ़वा चौकी
भदोही कोतवाली - मूंसीलाटपुर चौकी
सुरियावां कोतवाली - खेतलपुर चौकी
सुरियावां कोतवाली - अभिया चौकी

सीमावर्ती इलाकों में निगरानी के अलावा प्रमुख स्थलों पर कानून व्यवस्था के अनुपालन के लिए सात नई चौकियां खोली जाएंगी। इसकी तैयारी हो गई है। रामपुर और सेमराध में माघ मेले के पहले ही चौकी खोलने की तैयारी है। - अभिमन्यु मांगलिक, पुलिस अधीक्षक।
एक देश टैरिफ लगाएगा तो हम 10 नए देशों में रास्ते खोलेंगे : यूएस टैरिफ पर बोले योगी*

भदोही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया 49वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेला और चौथे कार्पेट एक्सपो का शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने कालीन उद्योग से जुड़े उद्यमियों से कहा- यूएस टैरिफ से घबराने की जरूरत नहीं, चुनौतियां अवसर लेकर आती हैं

भदोही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को भदोही में 49वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेला और चौथे कार्पेट एक्सपो का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने देश-विदेश से आए कालीन उद्यमियों और निर्यातकों के साथ संवाद करते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार हर स्थिति में उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि यह हमारे लिए नए अवसरों के द्वार खोलने का समय है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि “जब भी चुनौतियां आती हैं, वे अपने साथ अवसर भी लाती हैं। अमेरिका ने टैरिफ लगाया है, लेकिन यह केवल एक देश का निर्णय है। हम यूएई, यूके और अन्य देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में ये समझौते हमारे उद्योगों के लिए नए बाजार खोलेंगे।” उन्होंने बताया कि सरकार ने इस विषय पर हाई लेवल कमेटी का गठन किया है जो टैरिफ से उत्पन्न स्थिति पर लगातार काम कर रही है।

ग्लोबल मार्केट में बढ़ी है भदोही के कालीन की मांग

मुख्यमंत्री ने कहा कि 11 वर्ष पहले कार्पेट उद्योग बंदी के कगार पर था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भदोही, मीरजापुर और वाराणसी के कार्पेट क्लस्टर को नई ऊर्जा मिली। भदोही को केंद्र बनाकर कार्पेट एक्सपो मार्ट की स्थापना की गई। जब पहला एक्सपो हुआ था, तब विदेशी खरीदारों की संख्या बहुत कम थी, लेकिन आज 88 देशों से तीन से चार सौ फॉरेन बायर्स यहां आ रहे हैं। यह बताता है कि ग्लोबल मार्केट में आपके कालीनों की मांग कितनी बढ़ी है। योगी आदित्यनाथ ने अपने उद्बोधन में कहा कि यूपी सरकार ने कार्पेट सेक्टर सहित एमएसएमई और ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रॉडक्ट) योजना के तहत प्रत्येक जिले में विशिष्ट उद्योगों को प्रोत्साहित किया है। भदोही के कालीन, मुरादाबाद के पीतल, फिरोजाबाद के ग्लास और वाराणसी के सिल्क को नई पहचान मिली है। 2017 में जब हमने ओडीओपी योजना शुरू की थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यूपी दो लाख करोड़ से अधिक का निर्यात करेगा, यह अब वास्तविकता बन चुकी है।

कार्पेट उद्योग महिला स्वावलंबन का यह सबसे बड़ा माध्यम

मुख्यमंत्री ने बताया कि कार्पेट उद्योग केवल व्यापार नहीं है, यह हमारे कारीगरों और हस्तशिल्पियों की जीवंत परंपरा है। आज यह उद्योग 25 से 30 लाख लोगों को रोजगार देता है और हर साल करीब 17 हजार करोड़ रुपए का निर्यात करता है। महिला स्वावलंबन का यह सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। सरकार का प्रयास है कि इस उद्योग को और अधिक महिलाओं से जोड़ा जाए ताकि वे घर पर रहकर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि भदोही को छोटा मत समझिए, यह प्रदेश और देश की आर्थिक ताकत का प्रतीक है। 2014 से पहले यह उद्योग लगभग मृतप्राय हो चुका था, लेकिन आज यह यूपी की पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि दीपावली के अवसर पर प्रदेश के सभी 75 जिलों में स्वदेशी मेले का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें भदोही की कालीनों के विशेष स्टॉल लगाए गए हैं।

कार्पेट उद्यमियों से मुख्यमंत्री ने किया संवाद

रवि पाटेरिया ने कहा कि “कालीन उद्योग हाथों का जादू है। हमने विश्व का सबसे बड़ा कालीन बनाकर कजाकिस्तान भेजा है। इस कला को विशेष दर्जा मिलना चाहिए।” इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विचार समिति के गठन पर सरकार विचार कर रही है, ताकि उद्यमियों के सुझावों को नीतिगत निर्णयों में शामिल किया जा सके।

हाजी हमीद ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “आपकी प्रतिबद्धता ने कालीन उद्योग को नया जीवन दिया है। भदोही और प्रदेश दोनों को इस उद्योग के माध्यम से वन ट्रिलियन इकॉनमी में सहभागी बनाया जा सकता है।”

अनिल सिंह ने मीरजापुर-विंध्य कॉरिडोर के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि आसपास के क्षेत्रों को भी एनसीआर की तरह विकसित किया जाए, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि “भदोही, वाराणसी और मीरजापुर को जोड़कर विकास क्षेत्र के रूप में तैयार करने की दिशा में कार्य चल रहा है।”

आदर्श पूर्णिमा, जो चार दशकों से इस उद्योग से जुड़ी हैं, ने कहा कि “आध्यात्म और राजनीति का संगम हो तो सफलता निश्चित है।” वहीं निर्यातक आलोक बरनवाल ने बुनकरों की कमी और श्रमिकों के पलायन की समस्या उठाई, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि “हम उद्योग को महिलाओं और स्थानीय श्रमिकों से जोड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रहे हैं।“

मुख्यमंंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल उद्योग को बचाना नहीं, बल्कि इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाना है। जब एक देश टैरिफ लगाएगा तो हम 10 नए देशों के लिए अपने रास्ते खोलेंगे। यही आत्मनिर्भर भारत की भावना है। चुनौतियों से घबराना नहीं है, बल्कि उन्हें अवसर में बदलना है। सरकार आपके साथ है, आपका भविष्य उज्ज्वल है।

इस अवसर पर सांसद डॉ विनोद बिंद, विधायकगण दीनानाथ भास्कर, विपुल दुबे, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, विकास आयुक्त हस्तशिल्प भारत सरकार अमृत राज, सीपीसी के चेयरमैन कुलदीप, पद्मश्री डॉ रजनीकांत, भदोही कार्पेट उद्योग से जुड़े पदाधिकारीगण, स्टेक होल्डर्स सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।

*भदोही में बनी हैंड टफ्टेड कालीन को दुनिया की सबसे बड़ी कालीन का खिताब, जानें- क्या है इसकी खासियत*

रिपोर्ट - नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भदोही जिले की हैंड टफ्टेड कालीन को विश्व की सबसे बड़ी कालीन का खिताब मिला है। पाटोदिया कॉन्ट्रैक्ट द्वारा बनाई गई टफ्टेड कालीन को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया गया है। यह कालीन मध्य एशिया की सबसे बड़ी कजाखस्तान के अस्ताना ग्रैंड मस्जिद में बिछी है। 12464.28 वर्ग मीटर की कालीन को एक हजार कारीगरों ने छह महीने में तैयार किया। कोविड काल के दौरान भारतीय व कजाखास्तान में भारतीय मूल के कारीगरों ने 50 दिनों की मेहनत के बाद इसे मस्जिद में बिछाया। 125 टुकड़ों में कालीन को कजाखस्तान की मस्जिद में पहुंचाया गया। मंगलवार को आनलाइन सेरेमनी में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड की ओर से कंपनी को रिकार्ड होल्डर प्रमाण पत्र मिला। कालीन का कुल मूल्य 15 लाख अमेरिकी डॉलर यानि भारतीय रुपयों में कुल 13 करोड़ 20 लाख रुपये है। साल 2021 जब कोविड की महामारी से पूरा विश्व संकट में था। उस समय कंपनी के पास मध्य एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद के लिए कालीन निर्माण कराए जाने प्रस्ताव मिला। करीब 12464.28 वर्ग मीटर की मस्जिद के लिए वहीं से ही डिजाइन भी दिखाए गए। आठ पिलर वाली इस मस्जिद को देखने के बाद कंपनी ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और काफी राय मशविरे के बाद कंपनी ने कालीन निर्माण के लिए हामी भरी। विश्व के सबसे बड़े हैंड टफ्टेड कालीन निर्माण की शुरूआत 2021 में की गई। इस दौरान कुल एक हजार कारीगर करीब छह महीने तक कालीन निर्माण में लगे रहे। कालीन को 125 टुकड़ों में तैयार किया गया। इसके बाद उसे मस्जिद में बिछाना एक बड़ी चुनौती रही। जिसके लिए यहां से कुशल कारीगर कजाखस्तान भेजे गए। भारतीय व कजाखस्तान में भारतीय मूल के कारीगरों ने 50 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद से मस्जिद में बिछाया। कालीन बिछाए जाने के बाद इसी साल मार्च में कंपनी ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में आवेदन किया। जिसके बाद उनकी टीम ने सर्वे इत्यादि के बाद इसको चुना।

यह है कालीन की खासियत

यह कालीन सिर्फ साइज के हिसाब से ही खास नहीं है, बल्कि अन्य कई मायनों में भी यह खास है। कंपनी के रवि पाटोदिया ने बताया कि 12464.28 वर्ग मीटर वाले इस कालीन में पूरी तरह ऊन का इस्तेमाल हुआ है। इसमें 70 मीटर व्यास वाला आकर्षक मध्य चक्र (मेडलियन) है। ईरान के परसियन डिजाइन वाली इस कालीन का प्रेरणा स्रोत मस्जिद के बगीचे और जन्नत-उल-फिरदौस के तत्वों से लिया गया है। मस्जिद के मुख्य भाग जिसमें यह बिछाया गया है। उसमें आठ पिलर भी हैं। जिनकी बारीकियों को मस्जिद के मध्य केन्द्र से मिलाना भी एक बड़ी चुनौती थी

चाइना और अमेरिका को पछाड़ कर मिला आर्डर

रवि पाटोदिया ने बताया कि विश्व रिकार्ड होल्डर इस कालीन को बनाए जाने के लिए मस्जिद की ओर से चाइना और अमेरिका जैसे देशों के कालीन निर्माताओं से भी संपर्क किया था, लेकिन अपनी विशिष्ट और आकर्षक कलाकारी के लिए जाने वाली भदोही की कारीगरों की बदौलत कंपनी की ओर से खुद एक अंर्तराष्ट्रीय संस्था से सर्वे कराने के बाद कंपनी को यह आर्डर मिला। इस निर्माण के लिए चाइना और अमेरिका जैसे देशों ने हाथ खड़ा कर दिया था।

इसके पहले ईरान की हैंड नॉटेड कालीन ने बनाया था कीर्तिमान

विश्व की सबसे बड़ी हैंड नॉटेड (हाथ से बुनी) कालीन, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, 5,630 वर्ग मीटर की है। जिसे संयुक्त अरब अमीरात की शेख जायद ग्रैंड मस्जिद के लिए ईरान कालीन कंपनी द्वारा बनाया गया था। इस कालीन को जटिल इस्लामी पदक के साथ बनाया गया था और इसे 2007 में मापा गया था। हैंड टफ्टेड के क्षेत्र में अब तक कोई भी इतनी बड़ी कालीन नहीं बनी है।

दुर्गा प्रतिमाओं को अंतिम स्वरूप दे रहे कारीगर

नितेश श्रीवास्तव,भदोही। शारदीय नवरात्र की तैयारी हर तरफ तेज हो गई है। मां दुर्गा पूजनोत्सव समितियों द्वारा आकर्षक पंडाल बनाने के साथ ही अन्य तैयारियां तेज होने लगी है। आदि शक्ति मां दुर्गा की प्रतिमाओं को कारीगर अंतिम स्वरूप देने में लगे हैं। ज्ञानपुर के पास स्थित पटेल नगर पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं आकर्षक ढंग से बनाए जा रहे हैं।

समितियों द्वारा प्रतिमाओं का आर्डर भी दिया जा चुका है। जिस स्तर से बुकिंग हो रही है। उसी के अनुसार कारीगर प्रतिमाओं को बना रहें हैं। प्रतिमा बना रहे कारीगर दीपक पाल ने बताया कि चार माह पूर्व से ही मूर्तियां बनाने की तैयारी शुरू हो जाती है। बाहर से आए कारीगर मिट्टी,पुआल , लकड़ी समेत अन्य सामग्री को एकत्रित कर लेते हैं। ऐसे में चार माह से प्रतिमाओं को बनाने का काम चल रहा है।

गणेश पूजनोत्सव को लेकर पूर्व में ही बना दी गई थी। उन प्रतिमाओं को क्रय कर समितियों द्वारा पंडालों में स्थापित करने के साथ ही तिथि के अनुसार नहरों में विसर्जन भी कर दिया जा रहा है। अब हर तरफ नवरात्र की तैयारी चल रही है।

दिन-रात प्रतिमाओं को बनाने के बाद पेंटिंग का काम चल रहा है। दस से पंद्रह हजार रुपए में आकर्षक मूर्तियों को तैयार कर बिक्री किया जाएगा। नवरात्र के प्रथम दिन से ही पूजा पंडालों में प्रतिमाओं को बनाने में कुल सात लोग लगे हैं। जो प्रत्येक दिन 12 से 16 घंटा मूर्तियां बनाने और पेंटिंग करने काम कर रहे हैं।

अमेरिका में भारतीय कालीन 50% महंगे, भदोही - मिर्जापुर के 30 लाख श्रमिकों का भविष्य दांव पर,17 हजार करोड़ का व्यापार प्रभावित

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर 50% तक टैरिफ लगातार कालीन उद्योग को बड़ा झटका दिया है। इस फैसले से भारत का 17 हजार करोड़ का कालीन व्यापार प्रभावित होगा। पहले अमेरिका ने भारतीय कालीनों पर 250% आयात शुल्क लगाया था। अब रुस से तेल आयात के मुद्दे पर 25% अतिरिक्त टैक्स और लगा दिया है। इससे अमेरिका में भारतीय कालीन 50% तक महंगे हो गए हैं। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भदोही - मिर्जापुर क्षेत्र के कालीन निर्यातकों और मजदूरों पर पड़ेगा।

भदोही में करीब 80% परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से से कालीन उद्योग से जुड़े हैं। कालीन उद्योग से जुड़े 30 लाख श्रमिकों के रोजगार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। निर्यातकों को चिंता है कि इस टैरिफ से उद्योग में मंदी आ सकती है। अमेरिका भारतीय कालीनों का सबसे बड़ा बाजार है।