सड़क सुरक्षा सप्ताह 2026 को लेकर उपायुक्त ने जागरुकता रथ को दिखाई हरी झंडी

सड़क सुरक्षा सप्ताह–2026 के तहत तीसरे दिन आज शनिवार को उपायुक्त श्री शशि प्रकाश सिंह ने समाहरणालय भवन परिसर से एक जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इसी क्रम आज जिले के विभिन्न स्थानों पर जागरूकता एवं प्रवर्तन से जुड़ी गतिविधियां संचालित की गईं। इस क्रम में नगवां टोल प्लाजा, रसोईया धमना एवं चरही में वाहन चालकों के लिए निशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया।

शिविरों में सैकड़ों वाहन चालकों की आंखों की जांच की गई तथा उन्हें सुरक्षित वाहन संचालन से संबंधित आवश्यक चिकित्सकीय एवं व्यवहारिक सलाह दी गई। अधिकारियों ने बताया कि बेहतर दृष्टि सुरक्षित ड्राइविंग के लिए अत्यंत आवश्यक है, इसी उद्देश्य से नेत्र जांच शिविर आयोजित किए गए।

इसी दौरान जिला परिवहन पदाधिकारी श्री बैजनाथ कामती के नेतृत्व में मोटर यान निरीक्षक श्री विजय गौतम एवं यातायात पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा सघन वाहन जांच अभियान चलाया गया। जांच के दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध मौके पर ही चालान की कार्रवाई की गई तथा उन्हें यातायात नियमों के पालन को लेकर काउंसलिंग भी की गई।

इस अवसर पर जिला परिवहन पदाधिकारी श्री बैजनाथ कामती, मोटर यान निरीक्षक श्री विजय गौतम, मोटर यान निरीक्षक श्री बिरसू सिंह, यातायात पुलिस प्रभारी श्री अनूप कुमार, जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक श्री संतोष कुमार, सड़क सुरक्षा इंजीनियर एनालिस्ट श्री शारीक इकबाल एवं आईटी सहायक श्री अरविन्द कुमार सहित अन्य कर्मी उपस्थित रहे।

अधिकारियों ने आम नागरिकों से यातायात नियमों का पालन करने, दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट एवं चारपहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने तथा निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने की अपील की।

झारखंड के उस समुदाय की दास्तान, जो साँपों में खोजता है जीवन, साँप संरक्षक बनाम कानून का दंश, झारखंड के पारंपरिक ज्ञान पर मंडराता संकट

स्तुति:- रंजन चौधरी, - सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र।

हिस्सा है जो दुर्भाग्य से अब उनके जीविकोपार्जन का एकमात्र जरिया भी बन चुका है।

इस समुदाय को सामान्यतः लोग सपेरा या मदारी कहकर पुकारते हैं, लेकिन वास्तव में उनका कार्य केवल मनोरंजन या भीख मांगना नहीं है। ये लोग सदियों से पारंपरिक वन्यजीव ज्ञान के भंडार रहे हैं। वे साँपों को पकड़ने, उनकी देखभाल करने और सही समय आने पर उन्हें सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ने का काम करते हैं। इनका पारंपरिक पेशा साँपों को पकड़ना और जड़ी-बूटियों का ज्ञान रहा है। ये मानते हैं कि साँप उनके कुल देवता या संरक्षक हैं और उनका अपमान करना या उन्हें मारना पाप है।

इन समुदायों का अर्थतंत्र पूरी तरह से साँपों और उनसे जुड़ी सेवाओं पर निर्भर करता है। शहरीकरण और जंगल की कटाई के कारण, साँप अक्सर रिहायशी इलाकों में घुस आते हैं। ऐसे में लोग दहशत में आकर साँपों को मार देते हैं, लेकिन यह समुदाय यहाँ एक जीवनरक्षक की भूमिका निभाता है। वे बिना नुकसान पहुँचाए साँपों को पकड़ते हैं और पकड़े गए साँपों को उचित दूरी पर सुरक्षित जंगल में छोड़ते हैं। इस सेवा के बदले उन्हें स्थानीय लोगों से पारिश्रमिक मिलता है। इसके अतिरिक्त साँपों से जुड़ी पारंपरिक औषधियों और जड़ी-बूटियों का ज्ञान भी इनके पास होता है। हालाँकि वन्यजीव कानूनों के कारण अब विष या उसके अंगों का व्यापार लगभग बंद हो गया है, लेकिन कुछ पारंपरिक नुस्खे और जड़ी-बूटियाँ, जो सर्पदंश के इलाज में सहायक मानी जाती हैं, अभी भी उनके जीविकोपार्जन का हिस्सा हैं। कई बार सांस्कृतिक मेलों और हाट-बाजारों में ये अपने पारंपरिक कौशल का प्रदर्शन करते हैं, जिसके बदले उन्हें दान या कुछ धनराशि प्राप्त होती है।

यह जीवनशैली जितनी अनूठी है, उतनी ही चुनौतियों से भरी भी है। भारत में अधिकांश साँप वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित हैं। उन्हें पकड़ना, रखना या उनका व्यापार करना गैरकानूनी है और यह उनके पारंपरिक जीविकोपार्जन पर एक बड़ा संकट है। 

विशेष रूप से झारखंड राज्य के बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड क्षेत्र में स्थानीय वन विभाग की अधिकारियों के सख्ती के कारण ये विषधर साँप लेकर चलना लगभग बंद कर चुके हैं। इनके सामने जीविकोपार्जन का यही एक पारंपरिक तरीका था जिससे लोगों के बीच पहुंचकर उनसे पैसा और चावल के सहारे जिंदगी चलाते थे, लेकिन अब यह रास्ता बंद हो चुका है। जहरीले साँपों के साथ काम करने में सर्पदंश का खतरा हमेशा बना रहता है और उचित चिकित्सा सुविधाओं तक पहुँच न होने के कारण कई बार दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ घट जाती हैं। इसके अतिरिक्त आधुनिक समाज में इन्हें अक्सर अंधविश्वास फैलाने वाले के रूप में देखा जाता है, जिससे इन्हें सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस समुदाय को 'अपराधी' या 'तस्कर' मानने के बजाय, हमें इनके पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि इनके पास वह अनमोल ज्ञान है जो हमें बताता है कि जंगल और वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व कैसे संभव है। इनकी इस पारंपरिक कला पर उत्पन्न विकट आर्थिक संकट पर स्थानीय क्षेत्र के माननीय सांसद, माननीय विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को उचित प्लेटफार्म में आवाज बुलंद करनी ही चाहिए। राज्य सरकार, जिला प्रशासन और गैर सरकारी संगठनों को चाहिए कि वे इनके कौशल का उपयोग करते हुए इन्हें प्रशिक्षित वन्यजीव बचावकर्मी के रूप में मान्यता दें और एक निश्चित वेतन की व्यवस्था करें। साथ ही इन्हें सर्पदंश के आधुनिक इलाज और फर्स्ट-एड के बारे में शिक्षित करना भी आवश्यक है। इनके अनोखे कौशल और संस्कृति को जिम्मेदार पर्यटन के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है, जिससे उनकी आय का एक स्थायी स्रोत बन सके। झारखंड का यह समाज हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ हमारा संबंध केवल लेना नहीं, बल्कि देखभाल और सम्मान पर आधारित होना चाहिए। ये लोग सिर्फ साँपों को नहीं पालते बल्कि वन्यजीव और मानव के बीच के नाजुक संतुलन को बचाए रखने का प्रयास करते हैं। चंदनकियारी क्षेत्र में इन्हें लोग वैध या वैधा कहकर पुकारते हैं।

झारखंड में जिस प्रकार से मानव और वन्यजीवों का संघर्ष बढ़ रहा है वैसे में ये समुदाय पर्यावरण और मानव एवं वन्यजीवों के संरक्षण में बेहद हितकर हैं। सर्पदंश से झारखंड राज्य में हर साल करीब 4 हजार से अधिक लोगों की मौत होती है। ऐसे में अगर सांपों के जानकार इस समुदाय के लोगों को सरकार और जिला प्रशासन प्रशिक्षित बचाव वन्यकर्मी के रूप में समायोजित करती है तो इनका जीविकोपार्जन भी होता रहेगा और इनकी पारंपरिक कला भी संरक्षित रहेगी और समाज एवं पर्यावरण को भी फायदा होगा। अब देखना होगा कि राज्य सरकार, जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस विलुप्तप्राय समुदाय के लिए क्या करते हैं ?

नवनियुक्त सदर अनुमंडल पदाधिकारी से हजारीबाग यूथ विंग के पदाधिकारी ने की शिष्टाचार भेंट

हजारीबाग - जिले में सामाजिक एवं धार्मिक सेवा के क्षेत्र में बीते साढ़े चार वर्षों से सक्रिय हजारीबाग यूथ विंग के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने शनिवार को नवनियुक्त सदर अनुमंडल पदाधिकारी आदित्य पांडे से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान संस्था की ओर से उन्हें फूलों का गुलदस्ता एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित करते हुए हजारीबाग में स्वागत किया गया शिष्टाचार मुलाकात के क्रम में हजारीबाग यूथ विंग द्वारा किए जा रहे विभिन्न सेवा कार्यों की जानकारी विस्तारपूर्वक साझा की गई। बताया गया कि वर्तमान में शीतकालीन राहत अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक सप्ताह जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण किया जा रहा है। इसके साथ ही संस्था धार्मिक आयोजनों, सामाजिक कार्यक्रमों तथा मानवीय सेवा कार्यों में निरंतर सहभागिता निभा रही है। मुलाकात के दौरान रक्तदान को लेकर संस्था की सक्रिय भूमिका पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि वर्ष 2025 में हजारीबाग यूथ विंग द्वारा विशाल रक्तदान शिविर का सफल आयोजन किया गया था। आने वाले समय में भी संस्था द्वारा और भी भव्य रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा गौशाला में सेवा कार्यों सहित अन्य सामाजिक गतिविधियों में भी संस्था लगातार योगदान दे रही है। सभी बातों को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद नवनियुक्त सदर अनुमंडल पदाधिकारी आदित्य पांडे ने हजारीबाग यूथ विंग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था द्वारा किया जा रहा सेवा कार्य अत्यंत प्रशंसनीय है। भविष्य में जब भी प्रशासन को समाजसेवी संगठनों के सहयोग की आवश्यकता होगी, हजारीबाग यूथ विंग से निश्चित रूप से संपर्क किया जाएगा।

हजारीबाग यूथ विंग के संरक्षक चंद्रप्रकाश जैन ने कहा कि संस्था की प्राथमिकता हमेशा जरूरतमंदों की सेवा रही है। पिछले साढ़े चार वर्षों से संस्था बिना किसी भेदभाव के समाज सेवा के कार्यों में लगी हुई है। आगे भी शीतकालीन राहत, रक्तदान, गौसेवा एवं अन्य सामाजिक गतिविधियों को और व्यापक स्तर पर किया जाएगा। संस्था के अध्यक्ष करण जायसवाल ने कहा कि हजारीबाग यूथ विंग समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य कर रही है। जल्द ही संस्था द्वारा एक भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें जिलेभर के युवाओं से बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की जाएगी। मौके पर संरक्षक चंद्र प्रकाश जैन, सचिव रितेश खण्डेलवाल, कोषाध्यक्ष गुंजन मद्धेशिया, संस्था मार्दर्शक विकास केशरी,संजय कुमार, कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद खण्डेलवाल, सेजल सिंह, खुशी कुमारी, प्रज्ञा कुमारी एवं प्रिंस कसेरा उपस्थित रहें।

हजारीबाग: एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर 'सेक्सटॉर्शन' करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, लग्जरी कार के साथ 6 साइबर अपराधी गिरफ्तार

हजारीबाग पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर देशभर में ठगी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है । विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र से पुलिस ने कुल 6 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो एक लग्जरी किया सोनेट (KIA Sonet) कार में घूमकर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे ।

प्रतिबिम्ब एप से मिली थी सूचना पुलिस अधीक्षक, हजारीबाग को 1 जनवरी 2026 को तकनीकी शाखा और 'प्रतिबिम्ब एप' के माध्यम से सूचना मिली थी कि विष्णुगढ़ के भेलवारा क्षेत्र में कुछ साइबर अपराधी सक्रिय हैं । यह गिरोह फर्जी वेबसाइटों पर एस्कॉर्ट सर्विस का विज्ञापन डालकर लोगों को झांसे में लेता था और फिर सेक्सटॉर्शन (Sextortion) व ब्लैकमेलिंग के जरिए UPI एवं अन्य डिजिटल माध्यमों से पैसे ठगता था । तकनीकी जाँच में संदिग्ध मोबाइल नंबर का लोकेशन भी विष्णुगढ़ थाना के ग्राम भेलवारा के पास पाया गया था ।देर रात 1 बजे हुई गिरफ्तारी सूचना मिलते ही अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) विष्णुगढ़, श्री बैद्यनाथ प्रसाद के नेतृत्व में एक छापामारी दल का गठन किया गया । टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विष्णुगढ़-हजारीबाग रोड स्थित इंटर कॉलेज के पास घेराबंदी की । रात करीब 01:00 बजे हजारीबाग की ओर से आ रही एक उजले रंग की किया सोनेट (KIA Sonet) कार को रोका गया । कार में 6 लोग सवार थे, जिनकी गतिविधियां तलाशी के दौरान संदिग्ध पाई गईं । जाँच में उनके पास से साइबर ठगी में प्रयुक्त होने वाले कई डिजिटल उपकरण बरामद हुए, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया ।

भारी मात्रा में सामान बरामद पुलिस ने अपराधियों के पास से 1 किया सोनेट (KIA Sonet) कार, अलग-अलग कंपनियों के 12 मोबाइल फोन (जिसमें एक प्रतिबिम्ब एप में पंजीकृत मोबाइल भी शामिल है), 23 सिम कार्ड और विभिन्न बैंकों के 10 डेबिट कार्ड बरामद किए हैं ।

गिरफ्तार अपराधियों की सूची गिरफ्तार किए गए सभी अपराधी युवा हैं और मुख्य रूप से विष्णुगढ़ के रहने वाले हैं। इनके नाम टिंकू रवानी (30 वर्ष), इन्द्रदेव रवानी (21 वर्ष), कुन्दन कुमार (21 वर्ष), मन्नु कुमार साव (22 वर्ष) और सुरज कुमार (20 वर्ष) हैं जो सभी नावाडीह, विष्णुगढ़ के निवासी हैं । छठा आरोपी सुमित कुमार वर्मा (19 वर्ष) मूल रूप से गोमिया (बोकारो) का है, जो वर्तमान में नावाडीह में रह रहा था ।सुसंगत धाराओं में केस दर्ज इस संबंध में विष्णुगढ़ थाना में कांड संख्या 01/26 दर्ज किया गया है । अपराधियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319(2), 318(4), 316(2), 61(2) और आईटी एक्ट की धारा 66(C), 66(D), 67 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है । छापामारी दल में एसडीपीओ बैद्यनाथ प्रसाद के अलावा थाना प्रभारी सपन कुमार महथा, पु०अ०नि० दीपक कुमार सिंह, पु०अ०नि० रतन मण्डल और तकनीकी शाखा के कर्मी शामिल थे ।

नया साल बना खूनी जश्न, DJ विवाद से भड़की तलवारबाजी एक की मौत, दूसरा ज़िंदगी और मौत से जूझ रहा

हजारीबाग: नए साल की खुशियाँ हजारीबाग में मातम में बदल गईं। जश्न, नशा और तेज़ डीजे की धुन के बीच उपजा एक मामूली विवाद देखते-देखते खूनखराबे में तब्दील हो गया। सड़कों पर उमंग नहीं, बल्कि तलवारों की चमक और चीख-पुकार गूंजती रही। यह घटना हजारीबाग के मंडई क्षेत्र से शुरू होकर नूरा होते हुए इंद्रपुरी चौक तक जा पहुँची।

जानकारी के अनुसार, नए साल के जश्न के दौरान पिकनिक से लौट रहे युवकों के बीच डीजे में गाना बजाने को लेकर कहासुनी हुई, जो दो गुटों के बीच हिंसक झड़प में बदल गई। नशे की हालत में हुई मारपीट में छोटू राणा गंभीर रूप से घायल हो गया। सिर फटने के बाद उसे सदर अस्पताल लाया गया।

बताया जाता है कि इलाज के बाद जब सूरज राणा और छोटू राणा वापस लौट रहे थे, तभी घात लगाए हमलावरों ने उनकी बलेनो कार पर हमला कर दिया। जैसे ही सूरज राणा गाड़ी से बाहर निकले, पीछे से तलवार से उन पर वार कर दिया गया। खून से लथपथ सूरज को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सूरज राणा अपने पीछे दो छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं।

वहीं, हमले में दोबारा बुरी तरह घायल हुए छोटू राणा की हालत नाजुक बनी हुई है। बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची स्थित रिम्स रेफर किया गया है।

मृतक के भाई धीरज राणा ने मंडई निवासी राहुल गोप और सोनू गुप्ता समेत अन्य युवकों पर हत्या का आरोप लगाया है। धीरज राणा का कहना है कि किसी से पहले कोई दुश्मनी नहीं थी, सिर्फ डीजे को लेकर हुआ विवाद नए साल को खून से रंग गया।

फिलहाल घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। सवाल यह है कि जश्न के नाम पर बढ़ता नशा और हिंसा आखिर कब थमेगी, और क्या नए साल की पहली रात का यह खौफनाक मंजर समाज को कोई सबक देगा?

नववर्ष पर जश्न से अलग हरियाली का संदेश, प्रीतम सिंह व योगा टीम ने किया पौधारोपण अभियान

हजारीबाग - जहाँ एक ओर नववर्ष के अवसर पर लोग मनोरंजन और उत्सव में जुटे नजर आए,वहीं प्रीतम सिंह और उनकी योगा टीम ने नए साल का स्वागत पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ किया। 1 जनवरी को आयोजित पौधारोपण अभियान के माध्यम से शहर को स्वच्छ, सुंदर और हराभरा बनाने की दिशा में सार्थक पहल की गई। इस अभियान के तहत 100 से अधिक पौधे लगाए गए, जिनमें 40 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के छायादार, फलदार एवं औषधीय पौधे शामिल थे। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों की सक्रिय और उत्साहपूर्ण भागीदारी रही, जिससे यह आयोजन जन-जागरूकता का प्रभावी माध्यम बना। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ज्ञानोदय सर उपस्थित रहे। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और ऐसे प्रयास समाज को सही दिशा देते हैं। अभियान को सफल बनाने में विनीत, रोशन, पियूष, ऋषि, शुभम, सौरभ, लक्की, सेजल, सुर्वी, आरियन, मुकेश सहित कई अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

आयोजक प्रीतम सिंह ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे कनहरी क्षेत्र में लगाए गए पौधों की रक्षा करें और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाएँ। नववर्ष पर किया गया यह प्रयास यह संदेश देता है कि सच्चा उत्सव वही है, जो समाज और प्रकृति दोनों के लिए हितकारी हो।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, हजारीबाग में हिंदी कार्यशाला का हुआ आयोजन

भारत सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (क्षे.सं.प्र.), हजारीबाग के द्वारा कार्यालय परिसर में 31 दिसंबर 2025 दिन बुधवार को प्रत्येक तिमाही की भांति वर्तमान वर्ष की अंतिम तिमाही में भी हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. शिव मंगल प्रसाद, प्रधान वैज्ञानिक, केन्द्रीय चावल अनुसंधान केंद्र, हजारीबाग मुख्य रूप से उपस्थित रहे। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, हजारीबाग के वरिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी सह कार्यालय प्रभारी ब्रजेश्वर कुमार ने सर्वप्रथम मुख्य अतिथि महोदय का अपने विभाग की ओर से स्वागत किया एवं तत्पश्चात आशीष कुमार कंधवे, कनिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी ने मुख्य अतिथि को पौधा देकर सम्मानित किया। इसके पश्चात् कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय सांख्यिकी के जनक डॉ. (प्रो.) पी.सी. महालोनोबिस जी के चित्र को पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। हजारीबाग कार्यालय के वरिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी सह प्रभारी ब्रजेश्वर कुमार ने हिंदी भाषा के उत्थान हेतु उप क्षेत्रीय कार्यालय, हजारीबाग के द्वारा किये जा रहे कार्यों से मुख्य अतिथि को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि हमारा कार्यालय शत प्रतिशत कार्य हिंदी में करने हेतु प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस कार्यालय को नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, हजारीबाग की हाल ही में आयोजित छमाही बैठक में हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार के लिए पूरे हजारीबाग में तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। उन्होंने देश में हिंदी की महत्ता पर भी प्रकाश डाला।   

इसके उपरान्त वरिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी नितिन मिलन ने बताया कि तकनीक के प्रयोग से जैसे कंठस्थ टूल, हिंदी इनपुट टूल्स, अनुवाद तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग से हिंदी में कार्यो को अधिक सुगम बनाया जा सकता है। इसके उपरान्त कार्यालय प्रभारी के निर्देश पर कार्यालय के समस्त कर्मियों ने बारी-बारी से कविता, नारे, भाषण, संस्मरण आदि का प्रस्तुतीकरण सभी के समक्ष किया। तत्पश्चात माननीय मुख्य अतिथि डॉ. शिव मंगल प्रसाद ने अपने संबोधन में उप क्षेत्रीय कार्यालय, हजारीबाग द्वारा हिंदी के प्रति किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने प्रधान वैज्ञानिक के अपने पद पर रहते हुए एवं हिंदी के प्रति अपने कर्तव्य को निभाते हुए सभी राजभाषा कार्यक्रमों में शामिल होते रहने के बारे में बताया। इसके साथ ही उन्होंने देश भर में अनेक महत्वपूर्ण पत्रिकाओं में उनके उधृत हुए लेखो को भी बताया। उन्होंने बताया कि तकनीकी शब्दावली को भी हिंदी में सरलता से लिखा जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने चावल अनुसंधान केंद्र के उन्नत बीजो की जानकारी दी एवं पार्थेनियम पौधे (गाजर घास) के बारे में भी लोगों को जागरूक किया। उन्होंने पार्थेनियम के हानिकारक प्रभाव एवं इससे बचने के तरीकों को भी बताया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण एवं हिंदी भाषा के प्रोत्साहन हेतु सभी को कार्यशील रहना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के कर्मियों को क्षेत्र कार्य के दौरान लोगों को हिंदी भाषा एवं पर्यावरण के प्रति जागरूक करने की अपील की। 

विदित हो कि राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय या राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय देश भर में महत्वपूर्ण सामजिक आर्थिक योजनाओ के निर्माण हेतु भारत सरकार की ओर से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के परिवारों अथवा प्रतिष्ठानों से मिलकर अनेक प्रकार के सर्वेक्षण करती है। यहाँ के सभी कर्मियों ने स्वीकार किया कि सरकारी सर्वेक्षणों के दौरान लोगों से मिलने जुलने एवं उनसे आंकड़ो का संग्रहण हेतु उन्हें हिंदी भाषा का ही प्रयोग करने की आवश्यकता होती है। यह कार्यालय अपने कार्यो के साथ-साथ हर संभव यह प्रयास करता रहा है कि पूरे समाज में तथा समाज के अंतर्गत सभी कार्यालयों में हिंदी का महत्वपूर्ण स्थान हो |विगत कई वर्षो से यहाँ के सभी कर्मचारी अपना निजी एवं कार्यालयी कार्य यथा इमेल, पत्राचार आदि यथासंभव हिंदी माध्यम में ही करने का प्रयास करते रहे हैं। 

कार्यालय के कनिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी आशीष कुमार कंधवे, जानकी नाथ मिश्र, सतीश गुप्ता, सूरज कुमार, सुधीर कुमार, मनीष किशोर के साथ सर्वेक्षण प्रगणक मिथलेश मोदी, बृज किशोर सिंह, उमेश नाथ चौबे, रणजीत कुमार गुप्ता, प्रशांत कुमार, राहुल रंजन, हरेन्द्र कुमार राय, आशीष रंजन, शुभम सोनी, दिवाकर राज, राहुल कुमार, अजय रविदास, नीलांजन दास ने कार्यक्रम में अपने महत्वपूर्ण विचार रखे। मंच संचालन जानकी नाथ मिश्र, कनिष्ठ सांख्यकी अधिकारी द्वारा किया गया एवं उपस्थित लोगों का धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ सांख्यकीय अधिकारी श्री नितिन मिलन के द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यालय के सभी सदस्यों सहित आदेशपाल रविशंकर की भी अहम भूमिका रही।

कड़ाके की ठंड में हजारीबाग यूथ विंग की मानवीय पहल, देर रात 50 से अधिक जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण

हजारीबाग - कड़ाके की ठंड के बीच मंगलवार की देर रात्रि करीब 11 बजे हजारीबाग यूथ विंग द्वारा शीतकालीन राहत अभियान के अंतर्गत मानवीय सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया गया। जब अधिकांश लोग रजाई और हीटर की गर्माहट में विश्राम कर रहे थे, उसी समय हजारीबाग यूथ विंग की पूरी टीम सड़कों पर उतरकर जरूरतमंदों, बेसहारा लोगों एवं रिक्शा चालकों की सेवा में समर्पित नजर आई। अभियान के दौरान शहर के विभिन्न चौक-चौराहों के साथ पुराना बस स्टैंड, नया बस स्टैंड एवं पुराना समाहरणालय परिसर में मौजूद करीब 50 से अधिक जरूरतमंदों के बीच कंबल का वितरण किया गया। रात्रि के सन्नाटे में जैसे ही सेवा वाहन की हॉर्न की आवाज नींद में सो रहे जरूरतमंदों तक पहुँची, मानो उन्हें यह एहसास हुआ कि कोई उनका सहारा बनकर आया है। कंबल पाकर उनके चेहरों पर दिखाई दी राहत और मुस्कान ने सेवा की सार्थकता को स्पष्ट कर दिया। संस्था के संरक्षक चंद्रप्रकाश जैन ने कहा कि हजारीबाग यूथ विंग सेवा को अपना दायित्व मानकर कार्य कर रही है। देर रात सड़कों पर उतरकर जरूरतमंदों तक पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन संस्था के सभी पदाधिकारी एवं सदस्यों ने इसे सामाजिक कर्तव्य समझते हुए निभाया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भी यह अभियान और अधिक प्रभावी रूप से चलाया जाएगा, ताकि कोई भी जरूरतमंद ठंड में असहाय न रहे।

वहीं अध्यक्ष करण जायसवाल ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल सहायता करना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक संवेदनशीलता और अपनापन पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि ठंड के इस मौसम में किसी जरूरतमंद को कंबल देना केवल सामग्री देना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित और सम्मानित महसूस कराना है। यह शीतकालीन राहत अभियान फरवरी 2026 तक पूरी निष्ठा और निरंतरता के साथ जारी रहेगा। हजारीबाग यूथ विंग द्वारा शीतकालीन राहत अभियान के तहत अब तक लगभग 600 कंबलों का वितरण किया जा चुका है। सेवा के इस क्रम में कई वृद्ध महिलाओं और पुरुषों ने भावुक होकर संस्था के सदस्यों को दोनों हाथ उठाकर आशीर्वाद दिया। यह सेवा कार्यक्रम संस्था के संरक्षक चंद्र प्रकाश जैन के मार्गदर्शन एवं अध्यक्ष करण जायसवाल के निर्देश पर आयोजित किया गया था। रात्रि सेवा में मुख्य रूप से संरक्षक चंद्रप्रकाश जैन, सचिव रितेश खण्डेलवाल, सह सचिव अभिषेक पांडे, संस्था के मार्गदर्शक जयप्रकाश खंडेलवाल,विकाश केशरी, कार्यकारिणी सदस्य मोहम्मद ताजुद्दीन, रोहित बजाज प्रमोद खण्डेलवाल एवं विनय पांडे उपस्थित रहें।

नव वर्ष पर जीवनदान: रितेश खंडेलवाल ने 17वीं बार किया रक्तदान, युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत

हजारीबाग - नव वर्ष का स्वागत अगर किसी जरूरतमंद को जीवनदान देकर किया जाए, तो इससे बड़ा उत्सव कोई नहीं हो सकता। जब अधिकांश लोग नए साल के जश्न में मशगूल थे, उसी समय शहर के युवा समाजसेवी एवं हजारीबाग यूथ विंग के सचिव रितेश खंडेलवाल ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए 17वीं बार रक्तदान कर मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की। रितेश खंडेलवाल ने नव वर्ष के अवसर पर हजारीबाग यूथ विंग के संरक्षक चंद्र प्रकाश जैन सहित संस्था के अन्य पदाधिकारियों व सदस्यों की उपस्थिति में रक्तदान किया। उनके इस कदम से न केवल एक जरूरतमंद को समय पर रक्त उपलब्ध हो सका, बल्कि युवाओं के बीच सेवा और संवेदनशीलता का मजबूत संदेश भी गया। इस अवसर पर हजारीबाग यूथ विंग के संरक्षक चंद्र प्रकाश जैन ने कहा कि रितेश जैसे युवा समाज की वास्तविक ताकत हैं। नव वर्ष पर रक्तदान कर उन्होंने यह सिद्ध किया है कि समाज सेवा ही सच्चा उत्सव है। वहीं रक्तदान के बाद रितेश खंडेलवाल ने कहा कि नव वर्ष का स्वागत यदि किसी जरूरतमंद की मदद से हो, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। रक्तदान समाज के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार रक्तदान अवश्य करना चाहिए, क्योंकि यह किसी के लिए जीवन का सबसे बड़ा उपहार बन सकता है।

जब लोग पिकनिक, पार्टियों और होटलों में नए साल का जश्न मना रहे थे, उसी समय रितेश खंडेलवाल ने अपने कार्य से यह संदेश दिया कि खुशी केवल खुद तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने में भी है। उनके इस 17वें रक्तदान ने समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है और युवाओं को सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। रितेश खंडेलवाल के इस मानवीय कार्य की समाज में सराहना हो रही है। नव वर्ष पर उनका यह अनोखा कदम यह साबित करता है कि सच्चा जश्न वही है, जिसमें मानवता और संवेदना शामिल हो। मौके पर हजारीबाग यूथ विंग के संरक्षक चंद्र प्रकाश जैन, संस्था के मार्गदर्शक जयप्रकाश खंडेलवाल,संजय कुमार, बजरंग अग्रवाल,चंदन सिंह, नीरज सिन्हा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री पशुधन योजना से बदली तस्वीर: बड़कागांव के अरुण कुमार बने आत्मनिर्भर डेयरी उद्यमी, 18 गायों से रोजाना 185 लीटर दूध उत्पादन

हजारीबाग : मुख्यमंत्री पशुधन योजना के सहयोग से एवं हजारीबाग जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में गव्य विकास एवं नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बड़कागांव प्रखंड के गुरचट्टी गांव निवासी श्री अरुण कुमार ने सरकारी सहयोग, आधुनिक तकनीक और नवाचार के माध्यम से अपने डेयरी व्यवसाय को सफल उद्यम में परिवर्तित कर ग्रामीण आत्मनिर्भरता की मिसाल प्रस्तुत की है।

अरुण कुमार ने राज्य सरकार की सहायता से मात्र 5 गायों के साथ डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की थी। गव्य विकास विभाग एवं जिला प्रशासन से प्राप्त तकनीकी मार्गदर्शन के फलस्वरूप आज उनका सीता डेयरी फार्म 18 गायों के साथ सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। वर्तमान में फार्म से प्रतिदिन लगभग 185 लीटर दूध का उत्पादन किया जा रहा है, जिसकी आपूर्ति स्थानीय मिल्क कलेक्शन सेंटर, होटल एवं विद्यालयों में की जाती है।

शुरुवात में अरुण कुमार ने क्रॉस बीड की होल्सटीन फ्रीजियन गाय से शुरुवात की उसके बाद समय के साथ साहीवाल, गिर और देशी गायों पर ज्यादा फोकस किया क्योंकि होल्सटीन फ्रीजियन गाय भारतीय वातावरण ज्यादा बीमार पड़ती थी।

डेयरी को उन्नत एवं लाभकारी बनाने के उद्देश्य से उन्होंने पूर्व में काऊ रबर मैट का उपयोग प्रारंभ किया, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार हुआ। साथ ही मिल्किंग मशीन की स्थापना से दूध दुहने की प्रक्रिया अधिक स्वच्छ एवं सुगम हुई तथा उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई।

राज्य सरकार की नवीकरणीय ऊर्जा नीति से प्रेरित होकर उन्होंने 3 किलोवाट का सोलर पावर प्लांट स्थापित किया, जिससे बिजली की समस्या से स्थायी समाधान मिला। साथ ही 100 लीटर क्षमता का सोलर वाटर हीटर भी लगाया गया, जिससे पूरे वर्ष गर्म पानी की सुविधा उपलब्ध हो सकी।

जिला प्रशासन के मार्गदर्शन से 2 घन मीटर का बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया। बायोगैस से स्वच्छ ईंधन के साथ-साथ जैविक खाद प्राप्त होने लगी, जिसका उपयोग अजोला, नेपियर घास, बरसीम, मक्का एवं सूडान घास जैसी चारा फसलों की खेती में किया गया। इससे पशुओं के पोषण स्तर में सुधार हुआ और उत्पादन लागत में कमी आई।

अरुण कुमार दूध से पनीर एवं मिठाई बनाकर होम डिलीवरी के माध्यम से आपूर्ति कर एवं वर्मी कंपोस्ट का बेड बनाकर किसानों को ऑर्गेनिक उर्वरक मुहैया कराते हैं, जिससे कुछ अतिरिक्त आय भी प्राप्त होता है।

हजारीबाग उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि “ अरुण कुमार की सफलता यह प्रमाणित करती है कि राज्य सरकार की योजनाओं और जिला प्रशासन के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा सकता है। उनकी डेयरी इकाई अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायी मॉडल है। जिला प्रशासन ऐसे प्रगतिशील किसानों को हर संभव सहयोग प्रदान करता रहेगा।”

बड़कागांव निवासी अरुण कुमार का कहना है कि डेयरी फॉर्म की मदद से परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी है, डेयरी फॉर्म की मदद से बड़ी बेटी की शादी अच्छे घराने में हुई है तथा बेटा को इंजीनियरिंग की पढ़ाई दिल्ली से कराई। आज अरुण कुमार का बेटा दिल्ली में सिग्मा पावर टेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम से अपनी खुद की कंपनी चला रहा है।

अरुण कुमार का डेयरी फार्म आज न केवल एक सफल उद्यम है, बल्कि जिले के अन्य किसानों को आधुनिक तकनीक