झारखंड के उस समुदाय की दास्तान, जो साँपों में खोजता है जीवन, साँप संरक्षक बनाम कानून का दंश, झारखंड के पारंपरिक ज्ञान पर मंडराता संकट
स्तुति:- रंजन चौधरी, - सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र।
हिस्सा है जो दुर्भाग्य से अब उनके जीविकोपार्जन का एकमात्र जरिया भी बन चुका है।
इस समुदाय को सामान्यतः लोग सपेरा या मदारी कहकर पुकारते हैं, लेकिन वास्तव में उनका कार्य केवल मनोरंजन या भीख मांगना नहीं है। ये लोग सदियों से पारंपरिक वन्यजीव ज्ञान के भंडार रहे हैं। वे साँपों को पकड़ने, उनकी देखभाल करने और सही समय आने पर उन्हें सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ने का काम करते हैं। इनका पारंपरिक पेशा साँपों को पकड़ना और जड़ी-बूटियों का ज्ञान रहा है। ये मानते हैं कि साँप उनके कुल देवता या संरक्षक हैं और उनका अपमान करना या उन्हें मारना पाप है।
इन समुदायों का अर्थतंत्र पूरी तरह से साँपों और उनसे जुड़ी सेवाओं पर निर्भर करता है। शहरीकरण और जंगल की कटाई के कारण, साँप अक्सर रिहायशी इलाकों में घुस आते हैं। ऐसे में लोग दहशत में आकर साँपों को मार देते हैं, लेकिन यह समुदाय यहाँ एक जीवनरक्षक की भूमिका निभाता है। वे बिना नुकसान पहुँचाए साँपों को पकड़ते हैं और पकड़े गए साँपों को उचित दूरी पर सुरक्षित जंगल में छोड़ते हैं। इस सेवा के बदले उन्हें स्थानीय लोगों से पारिश्रमिक मिलता है। इसके अतिरिक्त साँपों से जुड़ी पारंपरिक औषधियों और जड़ी-बूटियों का ज्ञान भी इनके पास होता है। हालाँकि वन्यजीव कानूनों के कारण अब विष या उसके अंगों का व्यापार लगभग बंद हो गया है, लेकिन कुछ पारंपरिक नुस्खे और जड़ी-बूटियाँ, जो सर्पदंश के इलाज में सहायक मानी जाती हैं, अभी भी उनके जीविकोपार्जन का हिस्सा हैं। कई बार सांस्कृतिक मेलों और हाट-बाजारों में ये अपने पारंपरिक कौशल का प्रदर्शन करते हैं, जिसके बदले उन्हें दान या कुछ धनराशि प्राप्त होती है।
यह जीवनशैली जितनी अनूठी है, उतनी ही चुनौतियों से भरी भी है। भारत में अधिकांश साँप वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित हैं। उन्हें पकड़ना, रखना या उनका व्यापार करना गैरकानूनी है और यह उनके पारंपरिक जीविकोपार्जन पर एक बड़ा संकट है।
विशेष रूप से झारखंड राज्य के बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड क्षेत्र में स्थानीय वन विभाग की अधिकारियों के सख्ती के कारण ये विषधर साँप लेकर चलना लगभग बंद कर चुके हैं। इनके सामने जीविकोपार्जन का यही एक पारंपरिक तरीका था जिससे लोगों के बीच पहुंचकर उनसे पैसा और चावल के सहारे जिंदगी चलाते थे, लेकिन अब यह रास्ता बंद हो चुका है। जहरीले साँपों के साथ काम करने में सर्पदंश का खतरा हमेशा बना रहता है और उचित चिकित्सा सुविधाओं तक पहुँच न होने के कारण कई बार दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ घट जाती हैं। इसके अतिरिक्त आधुनिक समाज में इन्हें अक्सर अंधविश्वास फैलाने वाले के रूप में देखा जाता है, जिससे इन्हें सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस समुदाय को 'अपराधी' या 'तस्कर' मानने के बजाय, हमें इनके पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि इनके पास वह अनमोल ज्ञान है जो हमें बताता है कि जंगल और वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व कैसे संभव है। इनकी इस पारंपरिक कला पर उत्पन्न विकट आर्थिक संकट पर स्थानीय क्षेत्र के माननीय सांसद, माननीय विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को उचित प्लेटफार्म में आवाज बुलंद करनी ही चाहिए। राज्य सरकार, जिला प्रशासन और गैर सरकारी संगठनों को चाहिए कि वे इनके कौशल का उपयोग करते हुए इन्हें प्रशिक्षित वन्यजीव बचावकर्मी के रूप में मान्यता दें और एक निश्चित वेतन की व्यवस्था करें। साथ ही इन्हें सर्पदंश के आधुनिक इलाज और फर्स्ट-एड के बारे में शिक्षित करना भी आवश्यक है। इनके अनोखे कौशल और संस्कृति को जिम्मेदार पर्यटन के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है, जिससे उनकी आय का एक स्थायी स्रोत बन सके। झारखंड का यह समाज हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ हमारा संबंध केवल लेना नहीं, बल्कि देखभाल और सम्मान पर आधारित होना चाहिए। ये लोग सिर्फ साँपों को नहीं पालते बल्कि वन्यजीव और मानव के बीच के नाजुक संतुलन को बचाए रखने का प्रयास करते हैं। चंदनकियारी क्षेत्र में इन्हें लोग वैध या वैधा कहकर पुकारते हैं।
झारखंड में जिस प्रकार से मानव और वन्यजीवों का संघर्ष बढ़ रहा है वैसे में ये समुदाय पर्यावरण और मानव एवं वन्यजीवों के संरक्षण में बेहद हितकर हैं। सर्पदंश से झारखंड राज्य में हर साल करीब 4 हजार से अधिक लोगों की मौत होती है। ऐसे में अगर सांपों के जानकार इस समुदाय के लोगों को सरकार और जिला प्रशासन प्रशिक्षित बचाव वन्यकर्मी के रूप में समायोजित करती है तो इनका जीविकोपार्जन भी होता रहेगा और इनकी पारंपरिक कला भी संरक्षित रहेगी और समाज एवं पर्यावरण को भी फायदा होगा। अब देखना होगा कि राज्य सरकार, जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस विलुप्तप्राय समुदाय के लिए क्या करते हैं ?

हिस्सा है जो दुर्भाग्य से अब उनके जीविकोपार्जन का एकमात्र जरिया भी बन चुका है।
हजारीबाग - जिले में सामाजिक एवं धार्मिक सेवा के क्षेत्र में बीते साढ़े चार वर्षों से सक्रिय हजारीबाग यूथ विंग के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने शनिवार को नवनियुक्त सदर अनुमंडल पदाधिकारी आदित्य पांडे से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान संस्था की ओर से उन्हें फूलों का गुलदस्ता एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित करते हुए हजारीबाग में स्वागत किया गया शिष्टाचार मुलाकात के क्रम में हजारीबाग यूथ विंग द्वारा किए जा रहे विभिन्न सेवा कार्यों की जानकारी विस्तारपूर्वक साझा की गई। बताया गया कि वर्तमान में शीतकालीन राहत अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक सप्ताह जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण किया जा रहा है। इसके साथ ही संस्था धार्मिक आयोजनों, सामाजिक कार्यक्रमों तथा मानवीय सेवा कार्यों में निरंतर सहभागिता निभा रही है। मुलाकात के दौरान रक्तदान को लेकर संस्था की सक्रिय भूमिका पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि वर्ष 2025 में हजारीबाग यूथ विंग द्वारा विशाल रक्तदान शिविर का सफल आयोजन किया गया था। आने वाले समय में भी संस्था द्वारा और भी भव्य रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा गौशाला में सेवा कार्यों सहित अन्य सामाजिक गतिविधियों में भी संस्था लगातार योगदान दे रही है। सभी बातों को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद नवनियुक्त सदर अनुमंडल पदाधिकारी आदित्य पांडे ने हजारीबाग यूथ विंग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था द्वारा किया जा रहा सेवा कार्य अत्यंत प्रशंसनीय है। भविष्य में जब भी प्रशासन को समाजसेवी संगठनों के सहयोग की आवश्यकता होगी, हजारीबाग यूथ विंग से निश्चित रूप से संपर्क किया जाएगा।
हजारीबाग पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर देशभर में ठगी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है । विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र से पुलिस ने कुल 6 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो एक लग्जरी किया सोनेट (KIA Sonet) कार में घूमकर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे ।
हजारीबाग: नए साल की खुशियाँ हजारीबाग में मातम में बदल गईं। जश्न, नशा और तेज़ डीजे की धुन के बीच उपजा एक मामूली विवाद देखते-देखते खूनखराबे में तब्दील हो गया। सड़कों पर उमंग नहीं, बल्कि तलवारों की चमक और चीख-पुकार गूंजती रही। यह घटना हजारीबाग के मंडई क्षेत्र से शुरू होकर नूरा होते हुए इंद्रपुरी चौक तक जा पहुँची।
हजारीबाग - जहाँ एक ओर नववर्ष के अवसर पर लोग मनोरंजन और उत्सव में जुटे नजर आए,वहीं प्रीतम सिंह और उनकी योगा टीम ने नए साल का स्वागत पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ किया। 1 जनवरी को आयोजित पौधारोपण अभियान के माध्यम से शहर को स्वच्छ, सुंदर और हराभरा बनाने की दिशा में सार्थक पहल की गई। इस अभियान के तहत 100 से अधिक पौधे लगाए गए, जिनमें 40 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के छायादार, फलदार एवं औषधीय पौधे शामिल थे। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों की सक्रिय और उत्साहपूर्ण भागीदारी रही, जिससे यह आयोजन जन-जागरूकता का प्रभावी माध्यम बना। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ज्ञानोदय सर उपस्थित रहे। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और ऐसे प्रयास समाज को सही दिशा देते हैं। अभियान को सफल बनाने में विनीत, रोशन, पियूष, ऋषि, शुभम, सौरभ, लक्की, सेजल, सुर्वी, आरियन, मुकेश सहित कई अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
भारत सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (क्षे.सं.प्र.), हजारीबाग के द्वारा कार्यालय परिसर में 31 दिसंबर 2025 दिन बुधवार को प्रत्येक तिमाही की भांति वर्तमान वर्ष की अंतिम तिमाही में भी हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. शिव मंगल प्रसाद, प्रधान वैज्ञानिक, केन्द्रीय चावल अनुसंधान केंद्र, हजारीबाग मुख्य रूप से उपस्थित रहे। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, हजारीबाग के वरिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी सह कार्यालय प्रभारी ब्रजेश्वर कुमार ने सर्वप्रथम मुख्य अतिथि महोदय का अपने विभाग की ओर से स्वागत किया एवं तत्पश्चात आशीष कुमार कंधवे, कनिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी ने मुख्य अतिथि को पौधा देकर सम्मानित किया। इसके पश्चात् कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय सांख्यिकी के जनक डॉ. (प्रो.) पी.सी. महालोनोबिस जी के चित्र को पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। हजारीबाग कार्यालय के वरिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी सह प्रभारी ब्रजेश्वर कुमार ने हिंदी भाषा के उत्थान हेतु उप क्षेत्रीय कार्यालय, हजारीबाग के द्वारा किये जा रहे कार्यों से मुख्य अतिथि को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि हमारा कार्यालय शत प्रतिशत कार्य हिंदी में करने हेतु प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस कार्यालय को नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, हजारीबाग की हाल ही में आयोजित छमाही बैठक में हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार के लिए पूरे हजारीबाग में तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। उन्होंने देश में हिंदी की महत्ता पर भी प्रकाश डाला।
हजारीबाग - कड़ाके की ठंड के बीच मंगलवार की देर रात्रि करीब 11 बजे हजारीबाग यूथ विंग द्वारा शीतकालीन राहत अभियान के अंतर्गत मानवीय सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया गया। जब अधिकांश लोग रजाई और हीटर की गर्माहट में विश्राम कर रहे थे, उसी समय हजारीबाग यूथ विंग की पूरी टीम सड़कों पर उतरकर जरूरतमंदों, बेसहारा लोगों एवं रिक्शा चालकों की सेवा में समर्पित नजर आई। अभियान के दौरान शहर के विभिन्न चौक-चौराहों के साथ पुराना बस स्टैंड, नया बस स्टैंड एवं पुराना समाहरणालय परिसर में मौजूद करीब 50 से अधिक जरूरतमंदों के बीच कंबल का वितरण किया गया। रात्रि के सन्नाटे में जैसे ही सेवा वाहन की हॉर्न की आवाज नींद में सो रहे जरूरतमंदों तक पहुँची, मानो उन्हें यह एहसास हुआ कि कोई उनका सहारा बनकर आया है। कंबल पाकर उनके चेहरों पर दिखाई दी राहत और मुस्कान ने सेवा की सार्थकता को स्पष्ट कर दिया। संस्था के संरक्षक चंद्रप्रकाश जैन ने कहा कि हजारीबाग यूथ विंग सेवा को अपना दायित्व मानकर कार्य कर रही है। देर रात सड़कों पर उतरकर जरूरतमंदों तक पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन संस्था के सभी पदाधिकारी एवं सदस्यों ने इसे सामाजिक कर्तव्य समझते हुए निभाया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भी यह अभियान और अधिक प्रभावी रूप से चलाया जाएगा, ताकि कोई भी जरूरतमंद ठंड में असहाय न रहे।
हजारीबाग - नव वर्ष का स्वागत अगर किसी जरूरतमंद को जीवनदान देकर किया जाए, तो इससे बड़ा उत्सव कोई नहीं हो सकता। जब अधिकांश लोग नए साल के जश्न में मशगूल थे, उसी समय शहर के युवा समाजसेवी एवं हजारीबाग यूथ विंग के सचिव रितेश खंडेलवाल ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए 17वीं बार रक्तदान कर मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की। रितेश खंडेलवाल ने नव वर्ष के अवसर पर हजारीबाग यूथ विंग के संरक्षक चंद्र प्रकाश जैन सहित संस्था के अन्य पदाधिकारियों व सदस्यों की उपस्थिति में रक्तदान किया। उनके इस कदम से न केवल एक जरूरतमंद को समय पर रक्त उपलब्ध हो सका, बल्कि युवाओं के बीच सेवा और संवेदनशीलता का मजबूत संदेश भी गया। इस अवसर पर हजारीबाग यूथ विंग के संरक्षक चंद्र प्रकाश जैन ने कहा कि रितेश जैसे युवा समाज की वास्तविक ताकत हैं। नव वर्ष पर रक्तदान कर उन्होंने यह सिद्ध किया है कि समाज सेवा ही सच्चा उत्सव है। वहीं रक्तदान के बाद रितेश खंडेलवाल ने कहा कि नव वर्ष का स्वागत यदि किसी जरूरतमंद की मदद से हो, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। रक्तदान समाज के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार रक्तदान अवश्य करना चाहिए, क्योंकि यह किसी के लिए जीवन का सबसे बड़ा उपहार बन सकता है।
हजारीबाग : मुख्यमंत्री पशुधन योजना के सहयोग से एवं हजारीबाग जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में गव्य विकास एवं नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बड़कागांव प्रखंड के गुरचट्टी गांव निवासी श्री अरुण कुमार ने सरकारी सहयोग, आधुनिक तकनीक और नवाचार के माध्यम से अपने डेयरी व्यवसाय को सफल उद्यम में परिवर्तित कर ग्रामीण आत्मनिर्भरता की मिसाल प्रस्तुत की है।
Jan 03 2026, 17:48
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