विवेक उपाध्याय ने लिया लल्लन तिवारी और कृपाशंकर सिंह का आशीर्वाद

भायंदर। मीरा भायंदर महानगरपालिका चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जिन 14 उत्तर भारतीयों को टिकट दिया है, उसमें से प्रभाग क्रमांक 18 के प्रत्याशी विवेक उपाध्याय सबसे युवा और विनम्र चेहरा माने जा रहे हैं। आज उन्होंने देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान राहुल एजुकेशन के चेयरमैन प्रख्यात समाजसेवी लल्लन तिवारी और उत्तर भारतीयों के सबसे लोकप्रिय नेता तथा महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर विवेक उपाध्याय के चाचा बिल्डर सुरेंद्र उपाध्याय, जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह, उत्तर भारतीय मोर्चा के अध्यक्ष संतोष दिक्षित, जिला महामंत्री कमलेश दुबे, भाजपा नेता एडवोकेट राजकुमार मिश्रा, जिला महामंत्री बृजेश तिवारी समेत अनेक लोग उपस्थि त रहे। विवेक के दादा स्वर्गीय देवी प्रसाद उपाध्याय दो बार उत्तर भारतीय मोर्चा के जिला अध्यक्ष रहे। वर्ष 2013 में बीजेपी विद्यार्थी सेल के वार्ड अध्यक्ष के रूप में राजनीति में पदार्पण करने वाले विवेक उपाध्याय, मंडल युवा उपाध्यक्ष, सोशल मीडिया के जिला संयोजक की जिम्मेदारी का सराहनीय निर्वहन करने के बाद जिला महामंत्री की भूमिका में पार्टी के लिए लगातार समर्पित भावना और संपूर्ण निष्ठा के साथ काम कर रहे हैं। युवाओं में विशेष लोकप्रिय विवेक उपाध्याय का मानना है कि राजनीति सेवा का सबसे प्रभावशाली माध्यम है। राजनीति में पारदर्शिता और ईमानदारी के पक्षधर रहे विवेक उपाध्याय ने विधायक नरेंद्र मेहता का विशेष आभार मानते हुए कहा कि पार्टी के सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ सभी समाज का प्यार और आशीर्वाद मेरी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि अपने वार्ड को आदर्श वार्ड बनाना मेरी प्राथमिकता होगी।
स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा
–डॉ मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार

आओ तुम ऐसे आना
जैसे घर में
नवजात शिशु आता है—
जिसका सुंदर, सलोना मुखड़ा देख
माँ अपनी सारी पीड़ा भूल जाती है।

वैसे ही 2026,
तुम भी ऐसे ही आना,
और
पिछले वर्ष की
सारी कड़वी यादें
भुला देना।

आओ आओ नए वर्ष,
हम पलकें बिछाए
तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं।

इस बार कुछ ऐसा आना
कि चारों ओर
खुशियों की हरियाली छा जाए।
न कहीं अराजकता हो,
न कहीं आतंक का साया
हर घर में
खुशियाँ हों
अपरंपार।

रोटी, कपड़ा, मकान के लिए
कोई न तरसे।
सबको मुफ्त दवा मिले,
इलाज सबका सुलभ हो।
शिक्षा अधूरी न रहे,
हर बच्चा पढ़े, बढ़े, सपने गढ़े।

पेड़ लगें,
वातावरण शुद्ध हो,
नदियाँ स्वच्छ बहें,
पहाड़ अडिग रहें।
न भूकंप हो,
न बाढ़,
न कोई बड़ा हादसा—
जीवन स्वर्ग-सा
शांत और सुरक्षित हो।

आओ नए वर्ष,
हमारे मन से भी
ईर्ष्या, द्वेष और अहंकार
धो देना।
शब्दों में संयम हो,
व्यवहार में करुणा हो,
विचारों में उजास हो
ऐसा कुछ दे जाना।

बच्चे सुरक्षित हों,
स्त्रियाँ निडर हों,
वृद्धों को सम्मान मिले,
यह वरदान दे जाना।

धर्म हो मानवता का,
कर्म हो सेवा का,
और प्रेम हो
सबसे बड़ा उत्सव।

तकनीक प्रगति लाए,
पर मनुष्य
मनुष्य बना रहे
संवेदना कहीं
पीछे न छूट जाए।

और जाते-जाते,
हमें इतना साहस देना
कि हम भी
इस सुंदर वर्ष के
योग्य बन सकें।

हमारी सोच को
और अधिक व्यापक,
और अधिक विशाल बना देना।
हमारे मन को
एक नई ऊँचाई देना।

आओ 2026,
नवजात शिशु की तरह आओ,
मेहमान बनकर नहीं,
घर के सदस्य बनकर आओ।

केवल कैलेंडर नहीं बदलना,
हमारे दृष्टिकोण को भी
एक नई दृष्टि देना ।
उमंग चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा जरूरतमंदों को कंबल वितरण

मुंबई। रे रोड के दारूखाना में उमंग चैरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी जावेद खान के नेतृत्व में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी हजारों जरूरतमंदों को ठंड से राहत के लिए कंबल वितरण किया गया। इस मौके पर उमंग चैरिटेबल ट्रस्ट के नए वर्ष 2026 के कैलेंडर का विमोचन भी दक्षिण मुंबई के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डाॅ अभिनव देशमुख व पोर्ट जोन के पुलिस उपायुक्त विजयकांत सागर द्वारा किया गया।

बता दें कि युवा समाजसेवी जावेद खान पिछले एक दशक से इस तरह के कार्यक्रम करते आ रहे हैं। वे दीवाली और ईद के मौके पर भी जरूरतमंदों को राशन किट देते हैं। उनका कहना है कि समाज के हर सक्षम व्यक्ति को इस तरह के सेवा कार्य करना चाहिए और उनको जरूरतमंदों की मदद कर के बेहद खुशी होती है।


इस कार्यक्रम में दीवान बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के सीईओ मुर्तजा दीवान, कांतिलाल जैन, उमंग चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी जोएब बूटवाला, अध्यक्ष जावेद खान, राजू वाघमारे, मेहबूब खान खैरवा, मखमूर खान, खालिद खान, ओमप्रकाश पांडे, विजय लोखंडे, अहमद खान समेत तमाम गणमान्य उपस्थित रहे।
बाबू आरएन सिंह की जयंती पर, 20 दिव्यांगों को मिला तिपहिया इलेक्ट्रिक साइकिल का  उपहार

मुंबई। उत्तर भारतीय संघ के पूर्व अध्यक्ष बाबू आरएन सिंह की 78वीं जयंती सेवा, संवेदना और समाज के प्रति समर्पण के संदेश के साथ मनाई गई। नववर्ष के शुभ अवसर पर बांद्रा पूर्व स्थित उत्तर भारतीय संघ भवन में आयोजित कार्यक्रम में 20 दिव्यांगजनों को तिपहिया इलेक्ट्रिक साइकिल भेंट कर उन्हें आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई गई। कार्यक्रम में संघ के ट्रस्टी, पदाधिकारी, सदस्यगण और बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय समाज के लोग उपस्थित रहे। भावनात्मक माहौल के बीच समाजसेवा की प्रेरक मिसालें सामने आईं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राधेश्याम तिवारी ने कहा कि उत्तर भारतीय संघ के संस्थापक स्वर्गीय बांकेराम तिवारी का संघ भवन का सपना उनके जीवनकाल में पूरा नहीं हो सका, लेकिन बाबू आरएन सिंह ने पूरे समाज को साथ लेकर उस सपने को साकार किया। आज उत्तर भारतीय संघ न केवल मुंबई बल्कि पूरे महाराष्ट्र में एक सशक्त और प्रतिनिधि संस्था के रूप में पहचाना जाता है।
उन्होंने कहा कि बाबू आरएन सिंह के निधन के बाद उनके पुत्र संतोष आरएन सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाज के लोग संघ से जुड़ रहे हैं, जिससे संस्था और अधिक मजबूत हो रही है।
तिवारी ने यह भी बताया कि बाबू आरएन सिंह की जयंती केवल उनकी कर्मभूमि मुंबई में ही नहीं, बल्कि उनकी जन्मभूमि गोरखपुर के भरौली गांव में भी मनाई गई, जहां गरीब परिवारों को एक हजार कंबल वितरित किए गए। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि बाबू आरएन सिंह जैसे लोग कभी मरते नहीं, वे समाज के दिलों में हमेशा जीवित रहते हैं। जब भी उत्तर भारतीय संघ का इतिहास लिखा जाएगा, उनका नाम पहले पन्ने पर होगा। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ उपाध्यक्ष राधेश्याम तिवारी, विशेष ट्रस्टी अमरजीत सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों द्वारा बाबू आरएन सिंह की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर उनके सामाजिक जीवन और योगदान पर आधारित वृत्तचित्र फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
समारोह को आध्यात्मिक रंग देते हुए लोकगायक सुरेश शुक्ला और उनकी टीम ने एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत किए, जिससे पूरा वातावरण श्रद्धा और भक्ति से सराबोर हो गया। यह आयोजन न सिर्फ एक महान समाजसेवी को श्रद्धांजलि था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का प्रेरक संदेश भी।
भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के माध्यम से श्रीमद् भागवत कथा का दिव्य ज्ञान प्रदान
मुंबई। कांदिवली (पूर्व) स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मैदान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का अंतिम दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और भावविभोर वातावरण में सम्पन्न हुआ। समापन दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने यह सिद्ध किया कि श्रीमद् भागवत कथा आज भी समाज को आध्यात्मिक दिशा देने वाली अमृतधारा है।

स्वामी जी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल, किशोर एवं दिव्य लीलाओं के माध्यम से श्रद्धालु भक्तों को श्रीमद् भागवत कथा के आध्यात्मिक, नैतिक और जीवनोपयोगी संदेशों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की लीलाएँ केवल कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन को कर्म, भक्ति और ज्ञान के संतुलित मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

प्रवचन में ध्रुव, प्रह्लाद, गजेंद्र मोक्ष, गोवर्धन लीला और रास लीला जैसे प्रसंगों के माध्यम से यह प्रतिपादित किया गया कि सच्ची भक्ति अहंकार, माया और लोभ से मुक्ति का मार्ग है।
स्वामी जी ने कहा कि कलियुग में श्रीमद् भागवत का श्रवण, कीर्तन और स्मरण ही आत्मशुद्धि का सर्वोत्तम साधन है।

स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि संसार के दुखों का मूल कारण आसक्ति है और परमात्मा की शरण में जाने से ही जीवन में शांति, संतोष और सार्थकता आती है। श्रीमद् भागवत मानव को सेवा, करुणा, प्रेम और समर्पण का संदेश देती है, जो आज के सामाजिक जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

समापन अवसर पर भजन, कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन से संपूर्ण परिसर भक्तिरस में डूब गया। श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण जयघोषों के साथ कथा को विदाई दी। आयोजकों ने ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में संस्कार, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का संकल्प दोहराया।

अंत में महाप्रसाद वितरण के साथ श्रीमद् भागवत ज्ञानयज्ञ का विधिवत समापन हुआ। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आत्मचिंतन, वैराग्य और भक्ति का अनुपम आध्यात्मिक अनुभव बन गया।
आदर्श शिक्षक विनय कुमार सिंह का सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह संपन्न


मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका शिक्षण विभाग द्वारा संचालित एमपीएस एक्सर हिंदी शाला के आदर्श शिक्षक विनय कुमार सिंह का आज सैकड़ो शिक्षकों की उपस्थिति में सेवानिवृत्ति सम्मान किया गया। महानगर की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था समरस फाउंडेशन की तरफ से संगठन मंत्री सुरेंद्र पांडे तथा विशेष सलाहकार एड. भारत पांडे ने उनका सम्मान किया। इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख लोगों में डॉ शिवधनी पांडे, प्रशासकीय अधिकारी कासले, विनोद सिंह, राम सकल मिश्रा, ब्रह्मदेव मिश्रा, योगेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, रमाकांत तिवारी, प्रेमचंद दुबे, कौशलेंद्र सिंह, प्रदीप सिंह, अरविंद कुमार सिंह, प्रकाश गैरोला, विद्या नौटियाल, शैलेंद्र दुबे, इंद्रभान सिंह, राजेश तिवारी, बिहारी सिंह, अरुण सिंह, राजेंद्र पाल, रामकृपाल यादव आदि का समावेश रहा।
भांडुप,वार्ड क्रमांक 112 से श्रेया राकेश शेट्टी ने भरा नामांकन फॉर्म
मुंबई । बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों के लिए वार्ड क्रमांक 112 से कांग्रेस की ओर से श्रेया राकेश शेट्टी ने सफलतापूर्वक अपना नामांकन फॉर्म दाखिल किया। नामांकन की इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। नामांकन के समय श्रेया राकेश शेट्टी के साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता बिपिन विचारे, ब्लॉक अध्यक्ष प्रमोद पांडेय , भांडुप सेवा दल अध्यक्ष कागड़ा सहित अन्य कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद थे। सभी नेताओं ने एकजुट होकर श्रेया शेट्टी को शुभकामनाएं दीं और आगामी चुनाव में उनकी जीत का विश्वास जताया। इस अवसर पर उपस्थित नेताओं ने कहा कि वार्ड 112 में विकास, पारदर्शिता और जनसेवा के मुद्दों को लेकर कांग्रेस पूरी मजबूती से चुनाव मैदान में उतरेगी। श्रेया राकेश शेट्टी ने भी सभी वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और वार्ड के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध रहेंगी।

नामांकन के साथ ही वार्ड 112 में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
भाजपा प्रत्याशी मदन सिंह ने लिया लल्लन तिवारी का आशीर्वाद
भायंदर। मीरा  भायंदर महानगरपालिका की स्थापना काल से लगातार चार बार नगरसेवक रह चुके प्रभाग क्रमांक 2 के भाजपा प्रत्याशी मदन उदित नारायण सिंह ने आज नामांकन के बाद सबसे पहले देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान राहुल एजुकेशन के चेयरमैन लल्लन तिवारी से आर्शीवाद लिया। इस अवसर पर राहुल एजुकेशन के सचिव राहुल तिवारी तथा वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे उपस्थित रहे। मदन सिंह जनता के प्रति समर्पित कार्यों और पार्टी के प्रति हमेशा निष्ठावान रहे। वार्ड में उनके द्वारा किए गए  विकास कार्यों को देखते हुए एक बार फिर उनकी जीत पक्की मानी जा रही है। मदन सिंह ने भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता का विशेष आभार मानते हुए कहा कि वे खुद को जनता का सेवक और पार्टी का कार्यकर्ता मानते हैं।
बाबागंज चौराहे के पास दिखा दुर्लभ उल्लू, कौवों के हमले से युवक ने बचाया
वन विभाग ने किया सुरक्षित रेस्क्यू, विशेषज्ञ करेंगे प्रजाति की पुष्टि

गोंडा(करनैलगंज)। तहसील क्षेत्र के अन्तर्गत बाबागंज चौराहे के पास सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब कौवों से घिरा एक बड़ा और रंग-बिरंगा उल्लू लोगों को दिखाई दिया। कौवों के लगातार हमले से उल्लू घायल होने की स्थिति में था, जिससे आसपास मौजूद लोग हैरान रह गए। इसी दौरान स्थानीय युवक आलोक शुक्ला ने साहस और मानवता का परिचय देते हुए उल्लू को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया और तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची और उल्लू को अपने संरक्षण में ले लिया। प्रारंभिक जांच में यह उल्लू दुर्लभ प्रजाति का बताया जा रहा है। वन विभाग के अनुसार, इसकी सही पहचान और उत्पत्ति को लेकर विशेषज्ञों से राय ली जा रही है। फिलहाल उल्लू को सुरक्षित रखा गया है और उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर निगरानी की जा रही है। वन विभाग का कहना है कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, ताकि उल्लू का भविष्य सुरक्षित रह सके और उसे प्राकृतिक वातावरण में उचित संरक्षण मिल सके। स्थानीय लोगों में इस दुर्लभ उल्लू को लेकर काफी उत्सुकता देखी गई।
अधिक सजग और अधिक करुणामय इंसान बनने का संकल्प, 2026
–डॉ मंजू लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार

हर साल की तरह 2025 भी आया और चला गया, पर यह साल केवल कैलेंडर का बदलना नहीं था।
यह अनुभवों का ऐसा अध्याय रहा,
जिसे पलटते समय
मन अपने-आप ठहर जाता है।
यह वर्ष हमें यह सिखा गया कि
जीवन केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं,
बल्कि विपरीत परिस्थितियों में
इंसान बने रहने की परीक्षा भी है।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में
पर्यटकों को निशाना बनाकर किया गया
आतंकी हमला
केवल निर्दोष जानें ही नहीं ले गया,
बल्कि पूरे देश को
गहरे शोक और आक्रोश में डुबो गया। लंदन जाने वाली
अंतरराष्ट्रीय उड़ान का
तकनीकी खराबी के कारण
दुर्घटनाग्रस्त होना
वैश्विक स्तर पर
विमान सुरक्षा पर
गंभीर प्रश्न छोड़ गया। दिल्ली और उत्तर भारत में
आतंकी घटनाओं ने सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षा की भावना को
और गहरा किया।
प्रकृति भी इस वर्ष
कुछ कम कठोर नहीं रही।
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड , महाराष्ट्र और असम में
भारी वर्षा, बाढ़ और भूस्खलन ने
कई परिवारों से
उनके घर, आजीविका
और सहारे छीन लिए। मुंबई और नवी मुंबई में
भीषण आग की घटनाएँ
और भांडुप की
BEST बस दुर्घटना ने महानगर की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी को
अचानक थाम लिया।
दूर मध्य-पूर्व और यूक्रेन में
जारी युद्धों की तपिश
महँगाई, अस्थिरता
और मानव संकट बनकर
पूरी दुनिया ने महसूस की।
सच यही है—
2025 ने हमें
कड़वे घूँट पिलाए।
पर इसी कठिन समय में
हमने अपनी सामूहिक शक्ति भी देखी।
आतंकी घटनाओं के बाद
देश की निर्णायक प्रतिक्रिया
और ऑपरेशन सिंदूर जैसे
सख़्त कदमों ने
यह स्पष्ट कर दिया कि
भारत अब केवल सहने वाला देश नहीं—
वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर
पूरी तरह सजग और सक्षम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्व
इस वर्ष
एक दृढ़, जुझारू और आत्मविश्वासी
वैश्विक व्यक्तित्व के रूप में
और उभरकर सामने आया।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर
भारत की आवाज़
सिर्फ़ सुनी ही नहीं गई,
उसका सम्मान भी किया गया।
देशवासियों के मन में यह भरोसा गहरा हुआ कि
सशक्त नेतृत्व के कारण
हम अपेक्षाकृत
निश्चिंत होकर
अपना जीवन जी पा रहे हैं।
दुख और संकट के बीच
देश–विदेश से
संवेदना, सहायता
और प्रार्थनाओं की
एकजुटता भी हमने देखी।
NDRF, SDRF,
फायर ब्रिगेड,
मेडिकल टीमें और स्वयंसेवक—
थके हुए शरीर,
पर अडिग संकल्प के साथ
कई जानें बचाने में सफल रहे।
आपदा प्रबंधन की क्षमता
पहले से अधिक
मजबूत दिखाई दी।
खेलों के क्षेत्र में
भारत ने
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर
उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कीं।
विशेषकर महिला खिलाड़ियों की
सफलताओं ने
देश को
नया गर्व दिया।
इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर
मेट्रो परियोजनाएँ,
एक्सप्रेसवे,
रेलवे आधुनिकीकरण
और वंदे भारत ट्रेनों ने
यात्रा को
अधिक सुरक्षित
और सुविधाजनक बनाया। ISRO के सफल अंतरिक्ष मिशनों ने
यह भरोसा दिया कि भारत की उड़ान
अब केवल धरती तक सीमित नहीं—
वह अंतरिक्ष तक पहुँच चुकी है।
डिजिटल इंडिया के अंतर्गत
UPI, AI, फिनटेक
और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम ने
भारत को
तकनीक का उपभोक्ता नहीं,
बल्कि नवाचार का केंद्र बनाया।
महिला सशक्तिकरण,
शिक्षा,
डिजिटल कृषि,
स्वास्थ्य शिविर,
योग और मानसिक स्वास्थ्य पर
बढ़ता ज़ोर—
ये सभी संकेत थे कि विकास की समझ
अब अधिक मानवीय हो रही है।
युवाओं की सामाजिक भागीदारी
और स्वयंसेवी कार्यों में
उनकी सक्रियता ने
भविष्य के प्रति
आशा को
और मजबूत किया।
2025 ने हमें
रुलाया भी,
और संभलना भी सिखाया।
इस साल ने यह भी समझाया कि
जीवन को
सिर्फ़ जीया नहीं जाता—
कभी-कभी
उसे सीपीआर भी देनी पड़ती है।
जब साँसें थमती हैं,
तो यादों को बटोरना पड़ता है।
जब हौसला टूटता है,
तो अनुभव
धड़कन बनते हैं।
हर साल
कितनी सीपियाँ छोड़ जाता है—
कुछ से हम मोती निकाल लेते हैं,
कुछ बस
रेत में चमकती रह जाती हैं।
पर वे व्यर्थ नहीं जातीं—
वे हमें याद दिलाती हैं कि हमने
पूरी शिद्दत से
जिया था।
जीवन अनमोल है।
कठिनाइयों के बीच
मिला हुआ यह अवसर
हर पल खर्च करने के लिए नहीं—
हर पल महसूस करने के लिए है।
जो बीत गया,
वह अनुभव बन गया। जो मिला,
वह कृतज्ञता बन गया। हमने यह खोया,
और हमने यह पाया। शायद
यही 2025 की
सबसे बड़ी सीख है। अलविदा 2025।
स्वागत 2026—
और अधिक सजग,
और अधिक करुणामय
इंसान बनने के संकल्प के साथ।                          ईश्वर से यही प्रार्थना है। प्रधानमंत्री मोदी जी दीर्घायु हो और उनके नेतृत्व में देश सुरक्षित सशक्त और शांतिपूर्ण मार्ग पर आगे बढ़ता रहे, ताकि नागरिक निश्चिंत होकर सुख की नींद सो सके।