UN में तालिबान के समर्थन में खुलकर आया भारत, पाकिस्तान को जमकर धोया

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भारत ने अफगानिस्तान में किए गए हवाई हमलों की पाकिस्तान द्वारा कड़ी निंदा की है और इन हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान की स्थिति पर चर्चा के दौरान बिना नाम लिए पाकिस्तान पर सीधा हमला बोला। साथ ही इस बार खुलकर तालिबान सरकार के समर्थन में बोला।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने सुरक्षा परिषद में पाकिस्तानी हमलों में अफगान नागरिकों की मौत का मुद्दा उठाया और इसे अफगान संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन कहा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत अफगानिस्तान के लोगों और क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास के लिए गहराई से प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि भारत ने लगातार लाखों जरूरतमंत अफगानों को मानवीय सहायता प्रदान की है और अभी भी कर रहा है।

भारत-अफगानिस्तान साझेदारी का जिक्र

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय दूत ने कहा कि अफगानिस्तान के साथ भारत की विकास साझेदारी 3 अरब डॉलर से अधिक है, जो अफगान लोगों के लिए नई दिल्ली के अटूट समर्थन को दिखाती है। उन्होंने आगे 17 अक्टूबर 2025 को पक्तिका प्रांत में पाकिस्तान के हवाई हमले का जिक्र किया और कहा कि 'दुखद रूप से निर्दोष महिलाओं, बच्चों और तीन होनहार युवा क्रिकेटरों- कबीर आगा, सिबगतुल्लाह और हारून- की जान चली गई, जो अफगान संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का गंभीर उल्लंघन है।

व्यापार और पारगमन आतंकवाद पर चिंता

भारत ने पाकिस्तान द्वारा 'व्यापार और पारगमन आतंकवाद' की प्रथा पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की, जिसमें अफगानिस्तान के लिए महत्वपूर्ण पहुंच मार्गों को बंद करना शामिल है। एक भू-आबद्ध देश होने के नाते, अफगानिस्तान आवश्यक आपूर्ति के लिए सीमा पार आवागमन पर बहुत अधिक निर्भर है। भारत ने कहा कि इस तरह के प्रतिबंध विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मानदंडों का उल्लंघन करते हैं और पुनर्निर्माण के लिए संघर्ष कर रहे एक कमजोर राष्ट्र के खिलाफ "खुली धमकियां और युद्ध के कृत्य" के समान हैं।

आतंकी संगठनों के खिलाफ एकजुटता की अपील

भारत ने कहा कि हम अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और स्वतंत्रता का भी मजबूती से समर्थन करते हैं। भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर काम करना चाहिए ताकि ISIL, अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके प्रॉक्सी जैसे आतंकी संगठनों को सीमा पार आतंक फैलाने से रोका जा सके।

चुनाव आयोग की बड़ी बैठक आज, कुछ राज्यों में बढ़ सकती है एसआईआर की समयसीमा

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देशभर के 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का आज आखिरी दिन है। ड्राफ्ट मतदाता सूची 16 दिसंबर को प्रकाशित होगी। अंतिम वोटर लिस्ट 14 फरवरी को जारी किया जाएगा। वहीं, इस बीच आज चुनाव आयोग ने एक अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में एसआईआर की तारीख बढ़ाने को लेकर फैसला किया जा सकता है।

केरल को छोड़कर देश के 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे वोटर लिस्ट के एसआईआर के फॉर्म जमा करने की आज आखिरी तारीख है। चुनाव आयोग के अधिकारी गुरुवार को फॉर्म डिजिटाइजेशन और जमा करने की प्रोग्रेस का रिव्यू करेंगे। इस मीटिंग के दौरान उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के लिए एसआईआर की डेडलाइन बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक पश्चिम बंगाल भी उन राज्यों में शामिल है जहां डेडलाइन बढ़ाई जा सकती है।

यूपी में एसआईआर के लिए विस्तार की मांग

दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बुधवार को कहा कि राज्य ने भारतीय निर्वाचन आयोग से एसआईआर को पूरा करने के लिए दो और सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया है। एक प्रेस बयान में, नवदीप रिणवा ने कहा कि यह विस्तार इसलिए मांगा गया था ताकि जिला चुनाव अधिकारी मृत मतदाताओं, अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं और लापता मतदाताओं की प्रविष्टियों का पुनः सत्यापन कर सकें। उनके अनुसार, अब तक 99.24 प्रतिशत जनगणना प्रपत्रों का डिजिटलीकरण हो चुका है। राज्य भर में 4 नवंबर से एसआईआर अभ्यास चल रहा है।

बंगाल में संशोधित वोटर लिस्ट प्रकाशन की अंतिम तिथि बढ़ी

इधर, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर की समयसीमा में संशोधन किया है और अंतिम प्रकाशन की तिथि को पहले की निर्धारित तिथि से बदलकर 14 फरवरी, 2026 कर दिया है। बुधवार को जारी एक आधिकारिक आदेश में, चुनाव आयोग ने कहा कि बड़े पैमाने पर जनगणना कार्य और राज्य भर में मतदान केंद्रों के उचित सत्यापन और युक्तिकरण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विस्तार प्रदान किया गया है।

क्या है एसआईआर?

यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। इसमें 18 साल से ज्यादा के नए वोटर्स को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है। जो शिफ्ट हो चुके हैं उनके नाम हटाए जाते हैं। वोटर लिस्ट में नाम, पते में हुई गलतियों को भी ठीक किया जाता है। बीएलओ घर-घर जाकर खुद फॉर्म भरवाते हैं। पहले फेज का एसआईआर बिहार में हुआ।

#rahul_visit_german_ministers_and_meet_nri_why_bjp_frowning_over_it *राहुल गांधी के जर्मनी दौरे पर सियासत, बीजेपी ने उठाया सवाल, तो प्रियंका बोल

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी 15 से 20 दिसंबर के बीच जर्मनी का दौरा करेंगे, जहाँ वे जर्मनी सरकार के मंत्रियों से मुलाकात करेंगे और भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संवाद करेंगे। यह यात्रा इंडियन ओवरसीज़ कांग्रेस की एक बड़े स्तर की वैश्विक आउटरीच पहल का हिस्सा है। राहुल गांधी के प्रस्तावित जर्मनी दौरे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सवाल खड़े के हैं।

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प्रियंका गांधी का पलटवार

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को राहुल गांधी की जर्मनी यात्रा को लेकर भाजपा की आलोचना का जवाब दिया। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना लगभग आधा समय देश के बाहर बिताते हैं।

राहुल की यात्रा पर सवाल क्यों?

लोकसभा का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर तक है, और भाजपा ने राहुल गांधी की इस दौरान विदेश यात्रा की आलोचना की है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राहुल गांधी की जर्मनी यात्रा को लेकर उन पर हमला बोला और कहा, राहुल गांधी दावा करते हैं कि उन्हें बोलने का मौका नहीं मिलता, लेकिन वह अक्सर भारत से बाहर रहते हैं। बिहार चुनाव के दौरान भी वह विदेश यात्रा पर थे। वह एक अंशकालिक, गैर-गंभीर नेता हैं।

बीजेपी बोली- ‘एलओपी’ यानी ‘लीडर ऑफ पर्यटन’

वहीं, बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक पोस्ट किया कि एक बार फिर विदेश नायक वही कर रहे हैं जो वह सबसे अच्छा करते हैं। विदेश दौरे पर जा रहे हैं। संसद 19 दिसंबर तक चलेगी, लेकिन खबरों के मुताबिक राहुल गांधी 15-20 दिसंबर तक जर्मनी का दौरा करेंगे। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने ‘एलओपी’ यानी ‘लीडर ऑफ पर्यटन’ हैं।

राहुल गांधी की जर्मनी यात्रा का उद्देश्य

बता दें कि राहुल गांधी की प्रस्तावित यात्रा इंडियन ओवरसीज़ कांग्रेस एक बड़े स्तर की वैश्विक आउटरीच पहल का हिस्सा है। इंडियन ओवरसीज़ कांग्रेस जर्मनी के अध्यक्ष बलविंदर सिंह ने कहा, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और सांसद राहुल गांधी 15 से 20 दिसंबर तक जर्मनी का दौरा करेंगे। उनके साथ इंडियन ओवरसीज़ कांग्रेस के चेयरपर्सन सैम पित्रोदा भी होंगे। आईओसी ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य कांग्रेस पार्टी की वैश्विक पहुंच को मजबूत करना है।

दीपावली यूनेस्को की सूची में शामिल, पीएम मोदी बोले- दिवाली हमारी सभ्यता की आत्मा

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रोशनी का पर्व दीपावली अब आधिकारिक रूप से यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची में शामिल हो गया है। यह घोषणा 2025 की सूची के साथ की गई, जिसमें दुनिया भर की 20 सांस्कृतिक धरोहरों को स्थान मिला है। यूनेस्को ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन की इंटैन्जिबल कल्चरल हेरिटेज यानी अमूर्त विश्व धरोहर की सूची जारी की। इसमें घाना, जॉर्जिया, कांगो, इथियोपिया और मिस्र सहित कई देशों के सांस्कृतिक प्रतीक भी शामिल हैं।

पीएम मोदी ने यूनेस्को के फैसले पर दी प्रतिक्रिया

यूनेस्को के निर्णय पर पीएम मोदी ने कहा, भारत और दुनियाभर के लोग उत्साहित हैं। हमारे लिए दीपावली हमारी संस्कृति और लोकाचार से बहुत गहराई से जुड़ी हुई है। यह हमारी सभ्यता की आत्मा है। यह प्रकाश और धार्मिकता का प्रतीक है। यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में दीपावली के शामिल होने से इस त्यौहार की वैश्विक लोकप्रियता और भी बढ़ जाएगी। प्रभु श्री राम के आदर्श हमें अनंत काल तक मार्गदर्शन करते रहें।

भारत कर रहा यूनेस्को की बैठक की मेजबानी

ये फैसला उस समय आया है, जब दिल्ली में यूनेस्को की इंटर-गवर्नमेंटल कमेटी फॉर इंटैन्जिबल हेरिटेज की 20वीं बैठक की मेजबानी कर रही है। यह 8 से 13 दिसंबर तक चलेगी। यह पहली बार है जब भारत इसकी अंतरसरकारी समिति के सत्र की मेजबानी कर रहा है। यह समिति अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा के लिए कार्य करती है।

घोषणा के बाद लगे 'वंदे मातरम' और 'भारत माता की जय' के नारे

जब यूनेस्को ने घोषणा की कि दीपावली को यूनेस्को के त्योहारों की सूची में शामिल कर दिया गया है, तब वहां मौजूद लोग 'वंदे मातरम' और 'भारत माता की जय' के नारे लगाने लगे।

भारत के ये तत्वों भी सूची में हैं दर्ज

वर्तमान में भारत के 15 तत्व यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची में दर्ज हैं। इनमें कुम्भ मेला, कोलकाता की दुर्गा पूजा, गुजरात का गरबा नृत्य, योग, वैदिक मंत्रपाठ की परंपरा और रामलीला (महाकाव्य 'रामायण' का पारंपरिक प्रदर्शन) शामिल हैं।

सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखना है लक्ष्य

यूनेस्को की यह लिस्ट दुनिया की ऐसी सांस्कृतिक और पारंपरिक चीजों को शामिल करती है, जिन्हें छू नहीं सकते लेकिन अनुभव किया जा सकता है। इसे अमूर्त विश्व धरोहर भी कहते हैं। इसका मकसद है कि ये सांस्कृतिक धरोहरें सुरक्षित रहें और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचें।

मानवाधिकार दिवस कार्यक्रम : राष्ट्रपति ने की मानवाधिकारों को अंतिम पंक्ति तक पहुंचाने की अपील

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दिल्ली ब्यूरो

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि प्रत्येक नागरिक की गरिमा और अधिकारों पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। भारत की सांस्कृतिक परंपरा वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत पर आधारित है जो सार्वभौमिक मानवाधिकारों की भावना को मजबूत करती है। उन्होंने मानवाधिकारों को देश के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों तक पहुंचाने की अपील के।

राजधानी दिल्ली में हुए इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन, आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति बिद्युत रंजन सारंगी, विजया भारती सयानी, प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पीके मिश्रा तथा संयुक्त राष्ट्र महासचिव की समन्वयक अरेती सिएनी सहित तमाम लोग मौजूद रहे। इस मौके पर राष्ट्रपति ने आयोग के हिंदी जर्नल नई दिशाएं और अंग्रेजी जर्नल जर्नल आफ द एनएचआरसी का वर्ष 2024- 25 का संस्करण जारी किया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत ने सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा पत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उसकी मूल भावना मानव गरिमा, समानता और स्वतंत्रता भारत की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने मानवाधिकार, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय को एक दूसरे से अविभाज्य बताया था।

राष्ट्रपति ने कहा कि एनएचआरसी ने हाल के वर्षों में अनुसूचित जातियों, जनजातियों, महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान दिया है। आयोग 3000 से अधिक मामलों में स्वप्रेरणा से कार्यवाही कर चुका है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि मानवाधिकार और विकास परस्पर जुड़े हैं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छ पानी, स्वच्छता और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं सभी नागरिकों तक पहुंचाना मानवाधिकारों की पूर्ति का आधार है। एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल और पीएम श्री स्कूल जैसे संस्थानों ने वंचित वर्गों के छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई है। आवास और खाद्य सुरक्षा योजनाओं से करोड़ों लोगों को लाभ मिला है जिससे उन्हें सम्मानपूर्ण जीवन जीने का आधार मिला है।

उन्होंने कहा कि हाल के श्रम सुधारों और सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों से श्रमिकों के अधिकार और सुदृढ़ हुए हैं। सुदूर और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले सभी नागरिकों तक आवश्यक सुविधाएं पहुंचाना सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी है। समावेशी विकास का अर्थ है कि विकास की यात्रा में कोई भी व्यक्ति पीछे न रह जाए।

जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाएगा इंडिया गठबंधन, जानें क्या है मामला?

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मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ विपक्षी इंडी गठबंधन ने मोर्चा खोल दिया है। संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग लाने की पूरी तैयारी हो गई है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) समेत इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को दिया है।

जस्टिस स्वामीनाथन पर ये आरोप

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को विपक्ष ने जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का जो नोटिस दिया है,उसमें उनपर 'मिसकंडक्ट' का आरोप लगाया गया है। लाइवलॉ की रिपोर्ट के अनुसार विपक्षी सांसदों के नोटिस में जज की निष्पक्षता, पारदर्शिता और धर्मनिरपेक्ष व्यवहार को लेकर सवाल उठाए गए हैं। विपक्ष की यह भी शिकायत है कि जज का बर्ताव एक विशेष समुदाय के सीनियर एडवोकेट और एडवोकेट के प्रति 'पक्षपातपूर्ण' रहा है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

जस्टिस स्वामीनाथन से तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके इस बात से नाराज है कि उन्होंने न सिर्फ एक मंदिर से जुड़े कथित विवादित स्थल पर परंपरागत दीपक प्रज्वलन का आदेश दिया, बल्कि आदेश तामील नहीं होने पर श्रद्धालुओं को खुद ही दीपक जलाने की अनुमति दे दी और उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित कर दी।

क्या है मामला?

यह कदम थिरुपरनकुंद्रम में पहाड़ी के ऊपर पारंपरिक कार्तिगाई दीपम दीपक जलाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया गया है. थिरुपरनकुंद्रम एक मंदिर और पास में ही एक दरगाह वाला स्थल है। इस विवाद के पीछे की वजह एक आदेश है जिसमें जस्टिस स्वामीनाथन ने मदुरै जिले के थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ियों पर एक मंदिर में पारंपरिक कार्यक्रम कार्तिगई दीपम जलाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इस पारंपरिक अनुष्ठान से दरगाह या मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का किसी तरह से कोई उल्लंघन नहीं होगा लेकिन तमिलनाडु सरकार ने कानून और व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए हाई कोर्ट के इस आदेश को लागू करने से इनकार कर दिया था। डीएमके का कहना है कि जज के ऐसे आदेश से सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इस साल 85 हजार वीजा किए कैंसिल, छात्रों पर सबसे ज्यादा असर

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अमेरिका ने इमिग्रेशन नियम कड़े करने के बाद जनवरी से अब तक 85 हजार वीजा रद्द किए हैं। जिनमें 8 हजार से ज्यादा छात्र शामिल हैं, जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ने बताया है कि यह कार्रवाई इमिग्रेशन और बॉर्डर सिक्योरिटी पर ट्रम्प प्रशासन के बढ़ते फोकस का हिस्सा है।

डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल जनवरी में राष्ट्रपति बनने के बाद से इमिग्रेशन मुद्दे पर लगातार सख्त रुख अपनाया हुआ है। इसी क्रम में अमेरिकी विदेश विभाग ने मंगलवार क एक्स पर लिखा, 'जनवरी से अब तक 85,000 वीजा कैंसिल किए गए हैं। प्रेसिडेंट ट्रंप और सेक्रेटरी रुबियो एक आसान से आदेश का पालन करते हैं और वे जल्द ही रुकने वाले नहीं हैं।' पोस्ट में ट्रंप की तस्वीर के साथ 'मेक अमेरिका सेफ अगेन' का स्लोगन दिया गया है। यानी अमेरिका को सुरक्षित बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

रद्द किए गए वीजा में 8 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स के

विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा, हमने सभी कैटेगरी के 85,000 वीजा रद्द कर दिए हैं। जिनमें 8,000 से ज्यादा छात्र शामिल हैं, जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। रद्द किए गए वीजा में से 8 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स के थे। इसकी प्रमुख वजह नशे में गाड़ी चलाना, चोरी और हमला जैसे अपराध थे, जो पिछले साल के लगभग आधे कैंसिलेशन का हिस्सा थे।

वीजा रद्द की क्या हैं वजहें?

वीजा रद्द करने के कारणों में पहले अवधि से अधिक समय रुकना, आपराधिक चिंताएं और आतंकवाद का समर्थन शामिल रहा है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने गाजा को लेकर हो रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों में शामिल अंतरराष्ट्रीय छात्रों को निशाना बनाया गया है। इन छात्रों को यहूदी-विरोधी करते हुए वीजा पर सख्ती की गई है।

सोशल मीडिया अकाउंट की जांच के बाद मिलेगा H-1B वीजा

इधर, अमेरिका लगातार वीजा नियमों को भी सख्त कर रहा है। 5 दिसंबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीजा नियमों में सख्ती के आदेश दिए थे। इसके तहत H-1B आवेदकों को अपना सोशल मीडिया अकाउंट सार्वजनिक करना होगा, ताकि अमेरिकी अधिकारी आवेदक की प्रोफाइल, सोशल मीडिया पोस्ट और लाइक्स को देख सकें। यदि आवेदक की कोई भी सोशल मीडिया एक्टिविटी अमेरिकी हितों के खिलाफ दिखी तो H-1B वीजा जारी नहीं किया जाएगा। H-1B के आश्रितों (पत्नी, बच्चों और पेरेंट्स) के लिए H-4 वीजा के लिए भी सोशल मीडिया प्रोफाइल को पब्लिक करना जरूरी होगा। ऐसा पहली बार है, जब H-1B वीजा के लिए सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच जरूरी की गई है। नए नियम 15 दिसंबर से लागू होंगे। ट्रम्प प्रशासन ने सभी दूतावासों को निर्देश जारी किए हैं।

नेहरू ने वंदे मातरम् के टुकड़े किए..., अमित शाह ने राज्यसभा में दिया बड़ा बयान

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संसद में वंदे मातरम् पर बहस का आज दूसरा दिन है। बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में इस चर्चा की शुरुआत की थी, जिसके बाद से देश में सियासी घमासान छिड़ गया है। वहीं, आज गृह मंत्री अमित शाह ने भी राज्यसभा में वंदे मातरम् को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा।

राज्यसभा में मंगलवार सुबह 11 बजे से कार्यवाही शुरू हुई। सदन में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर खास चर्चा शुरू हुई। इसकी शुरूआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, ‘वंदे मातरम् के यशोगान के लिए चर्चा के लिए हम यहां आए हैं। चर्चा के जरिए हमारे देश के किशोर, युवा, आने वाली पीढ़ियों तक वंदे मातरम् का योगदान पता चले। हम सब सौभाग्यशाली है कि हमें एतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं।

अमित शाह ने कहा इस महान सदन में वंदे मातरम् पर चर्चा हो रही है तब कल कुछ सदस्यों ने लोकसभा में सवाल किया था इस चर्चा की जरूरत क्या है। चर्चा की जरूरत वंदे मातरम् के प्रति समर्पण के प्रति जरूरत जब यह बना तब भी थी और अब भी है।

कांग्रेस वंदे मातरम् ध्यान भटकाने का हथियार मान रही-शाह

गृहमंत्री ने कहा, मैं कल देख रहा था कि कांग्रेस के कई सदस्य, वंदे मातरम् की चर्चा को, राजनीतिक हथकंडा या मुद्दों से ध्यान भटकाने का हथियार मान रहे थे। मुद्दों पर चर्चा करने से हम नहीं डरते. संसद का बहिष्कार हम नहीं करते। अगर संसद का बहिष्कार न किया जाए और ससंद चलने दी जाए तो सभी मुद्दों पर चर्चा होगी, हम डरते नहीं हैं और न ही हमारे पास कुछ छिपाने को है। कोई भी मुद्दा हो, हम चर्चा करने को तैयार हैं।

वंदे मातरम की चर्चा को बंगाल चुनाव से जोड़ने पर क्या बोले शाह?

अमित शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कुछ दल वंदे मातरम की चर्चा को बंगाल चुनाव से जोड़कर उसका महत्व कम करने की कोशिश कर रहे हैं. शाह ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इस गीत की रचना बंगाल में की, लेकिन इसका संदेश पूरे भारत में बिजली की तरह फैल गया और आज भी राष्ट्र को एकजुट करता है. अमित शाह ने कहा कि अंग्रेजों ने जब वंदे मातरम पर पाबंदियां लगाईं, तब बंकिम चंद्र ने साफ कहा था कि चाहे उनकी बाकी रचनाएं गंगा में बहा दी जाएं, लेकिन वंदे मातरम की शक्ति अनंत काल तक जीवित रहेगी. शाह के अनुसार, बंकिम चंद्र के ये शब्द आज पूरी तरह सच साबित हुए हैं।

नए सिरे से अपनी समझ को समझने की जरूरत- शाह

गृहमंत्री ने कहा ने कहा कि ये अमर कृति, मां भारती के प्रति समर्पण, भक्ति और कर्तव्य का भाव जागृत करने वाली है। इसलिए जिनको ये नहीं समझ आ रहा है कि आज वंदे मातरम् पर चर्चा क्यों हों रही है, मुझे लगता है कि उन्हें नए सिरे से अपनी समझ को समझने की जरूरत है।

पूर्व पीएम पर साधा निशाना

गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि 1937 में वंदे मातरम के 50वें के दौरान जवाहर लाल नेहरू ने गीत को दो अंतरों तक सीमित कर दिया। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री ने कहा, वन्दे मातरम् की स्वर्ण जयंती जब हुई, तब जवाहरलाल नेहरू जी ने इसके दो टुकड़े कर इसे दो अंतरों तक सीमित कर दिया। वहीं से तुष्टीकरण की शुरुआत हुई। अगर वन्दे मातरम् के दो टुकड़े कर तुष्टीकरण की शुरुआत नहीं हुई होती तो देश का विभाजन भी नहीं होता।

आपातकाल को लेकर इंदिरा गांधी पर बोला हमला

अमित शाह ने आगे कहा, वन्दे मातरम् के जब 100 साल हुए, तब वन्दे मातरम् बोलने वालों को इंदिरा जी ने जेल में डाल दिया। आपातकाल लगाया गया। विपक्ष के लोगों को, सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में भर दिया गया। अखबारों पर ताले लगा दिए गए। पूरे देश को बंदी बनाकर रख दिया गया।

गांधी परिवार के दोनों सदस्य सदन से नदारद- शाह

जब वंदे मातरम के 150 साल पर लोकसभा में चर्चा हुई, तो यहां पर कांग्रेस की स्थिति देखिए, जिस कांग्रेस पार्टी के अधिवेशनों की शुरुआत गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर वंदे मातरम गाकर करवाते थे, जो गीत कांग्रेस पार्टी की आजादी की लड़ाई का एक मंत्र बना था, उसका महिमामंडन करने के लिए जब लोकसभा में चर्चा हुई तो गांधी परिवार के दोनों सदस्य सदन से नदारद रहे।

सोनिया गांधी को कोर्ट ने जारी किया नोटिस, दिल्ली पुलिस से भी मांगा जवाब, जानें क्या है मामला

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दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ कथित रूप से बिना भारतीय नागरिकता लिए वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के मामले में नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सोनिया गांधी के अलावा दिल्ली पुलिस से भी जवाब मांगा है।

राउज़ एवेन्यू सेशंस कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी के खिलाफ केस दर्ज कराने की मांग वाली एक याचिका पर नोटिस जारी किया है। दिल्ली के राउज़ एवेन्यू सेशंस कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया गया था। आरोप है कि सोनिया गांधी ने वर्ष 1980 में कथित रूप से अपने नाम को मतदाता सूची में शामिल कराया था। यह याचिका अधिवक्ता विकस त्रिपाठी ने दायर की है।

नागरिकता मिलने से पहले मतदाता सूची में नाम!

वकील विकास त्रिपाठी ने कोर्ट में रिवीजन पिटीशन दायर कर आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी को 30 अप्रैल 1983 को भारत की नागरिकता मिली, लेकिन इसके तीन साल पहले यानी 1980 की मतदाता सूची में उनका नाम पहले से मौजूद था। याचिकाकर्ता का कहना है कि मतदाता सूची में नाम केवल उन्हीं का शामिल हो सकता है, जिनके पास भारतीय नागरिकता हो, इसलिए 1980 की लिस्ट में एंट्री अपने आप में संदेह पैदा करती है।

फर्जी कागज के इस्तेमाल का अंदेशा

सवाल उठाया गया है कि जब वह भारतीय नागरिक नहीं थीं, तब 1980 की मतदाता सूची में उनका नाम कैसे जोड़ा गया। याचिकाकर्ता ने पूछा है कि 1980 में उनका नाम जोड़ने के लिए कौन से दस्तावेज दिए गए थे और क्या कोई गलत या फर्जी कागज इस्तेमाल किए गए थे।

सोनिया गांधी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग

दरअसल पिछले दिनों SIR को लेकर जारी विवाद के बीच ऐसे दावा किया गया कि सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिक बनने से पहले कथित रूप से मतदाता सूची यानी इलेक्टोरल रोल में दर्ज था। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो सोनिया गांधी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

कानून नियम जरूरी, लेकिन किसी को परेशानी न हो...इंडिगो संकट के बीच पीएम मोदी का बड़ा बयान

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देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को यात्रियों को पिछले कुछ समय से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। करीब एक हफ्ते में इसकी 4,500 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल हो चुकी है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडिगो संकट पर बड़ा बयान दिया है। पीएम मोदी ने कहा है कि नियम-कानून बनाने का मकसद सिस्टम को बेहतर करना होना चाहिए, न कि आम नागरिकों को परेशान करना।

पीएम मोदी ने एनडीए सांसदों की बैठक के दौरान इंडिगो संकट पर ये बात कही।संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान आज संसद परिसर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल दलों के सांसदों की बैठक हुई।

सांसदों से सभी क्षेत्रों में सुधार का आह्वान

एनडीए संसदीय दल की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी। उन्होंने कहा, आज की बैठक में बिहार चुनावों में एनडीए की जीत के लिए सभी एनडीए नेताओं ने पीएम मोदी को बधाई दी। पीएम मोदी ने सभी एनडीए सांसदों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए काम करने का मार्गदर्शन दिया। उन्होंने जनता के जीवन को आसान बनाने और यह सुनिश्चित करने के लिए सभी क्षेत्रों में सुधार करने पर जोर दिया कि उन्हें कोई समस्या न हो।

कानून लोगों पर बोझ नहीं बने

प्रधानमंत्री मोदी ने बहुत साफ शब्दों में कहा है कि कोई भी ऐसा कानून, नियम नहीं होना चाहिए, जो बिना मतलब नागरिकों को परेशान करें। कानून लोगों पर बोझ नहीं बल्कि उनकी सुविधा के लिए होना चाहिए। पीएम ने कहा कि कानूनों से लोगों की मदद होनी चाहिए। उन्होंने सांसदों से युवाओं से जुड़ने का आह्वान किया।

बड़े एयरपोर्ट्स का जायजा लेंगे बड़े अधिकारी

इधर, इंडिगो एयरलाइन की वजह से हवाई अड्डों पर यात्रियों को हो रही भारी दिक्कतों को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर और ज्वाइंट सेक्रेटरी जैसे बड़े अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे जल्द ही देश के बड़े हवाई अड्डों पर जाकर जमीनी हकीकत का जायजा लें। ये अधिकारी मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, पुणे, गुवाहाटी, गोवा और तिरुवनंतपुरम जैसे हवाई अड्डों का दौरा करेंगे। इसका मकसद यह समझना है कि यात्रियों को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।