ट्रंप के टैरिफ के बीच जिनपिंग को आई भारत की याद, चीनी राष्ट्रपति ने क्यों किया ड्रैगन और हाथी का जिक्र?


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हाल के दिनों में भारत और चीन के बीच फिर से रिश्तों में गरमाहट बढ़ती दिख रही है। भारत-चीन राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ पर भी दोनों देशों के बीच दूरियां मिटती दिखीं। भारत-चीन राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर भारत में चीनी राजदूत जू फेइहोंग ने दोनों देशों के भविष्य के बारे में सकारात्मक आशा व्यक्त की। इस दौरान चीनी राजदूत जू ने कहा कि चीन और भारत के नेताओं ने इस खास मौके पर बधाई संदेशों का आदान-प्रदान किया।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के 75 साल के राजनयिक रिश्तों पर एक लेटर लिखा। अपने संदेश में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि चीन और भारत के संबंधों को "ड्रैगन-हाथी टैंगो" का रूप लेना चाहिए। टैंगो इन दोनों प्रतीकात्मक जानवरों के बीच का एक चीनी नृत्य है।

भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बात कही। भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति मुर्मु को बधाई दी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। साथ ही दोनों देशों को शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, आपसी विश्वास और आपसी लाभ की दिशा में आम विकास के लिए साथ आने के तरीके तलाशने चाहिए। 

भारत और चीन को प्राचीन सभ्यताएं बताते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देश प्रमुख विकासशील देश हैं और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने-अपने आधुनिकीकरण प्रयासों के महत्वपूर्ण चरण में हैं।

शी जिनपिंग और द्रौपदी मुर्मू के अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी एक दूसरे को बधाई और शुभकामना संदेश भेजे हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला कि दोनों देश प्राचीन सभ्यताएं हैं और वैश्विक दक्षिण के भीतर महत्वपूर्ण विकासशील देश हैं, जो वर्तमान में महत्वपूर्ण आधुनिकीकरण चरणों से गुजर रहे हैं।

बता दें कि चीन को अक्सर ड्रैगन से जोड़ा जाता है, क्योंकि चीनी संस्कृति में ड्रैगन को एक शक्तिशाली, भाग्यशाली और शुभ जीव माना जाता है, जो शक्ति, भाग्य और सफलता का प्रतीक है।

दूसरी ओर, हाथी को भारत से धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक वजहों से जोड़ा जाता है। वहीं, टैंगो एक अंग्रेजी शब्द है। जिसका मतलब दोस्ताना रिश्ता या नृत्य होता है। शी जिनपिंग का कहना था कि वो भारत के साथ रिश्तों को बेहतर करना चाहते हैं।

अखिलेश यादव ने ऐसा क्या कहा कि अमित शाह ने ले ली चुटकी, बोले-आप तो 25 साल अध्यक्ष रहेंगे

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कई महीनों के विवाद के बाद वक्फ संशोधन विधेयक 2024 एक बार फिर लोकसभा के पटल पर पेश किया गया है। कांग्रेस समेत सभी विपक्षी देशों ने इस बिल पर विरोध जताया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अखिलेश यादव ने भी इस बिल को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। लोकसभा में भाषण के दौरान अखिलेश सत्तापक्ष पर जमकर बरसे हैं। हालांकि, बिल पर चर्चा के दौरान उन्होंने बीजेपी को लेकर कुछ ऐसा बोल कि अमित शाह ने उल्टे उनकी ही चुटकी ले ली।

दरअसल, वक्फ बिल पर बोलते हुए अखिलेश ने भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष के चुनाव में देरी को लेकर तंज कसा।उन्होंने कहा कि ये जो बिल लाया जा रहा है बीजेपी में तो मुकाबला चल रहा है कि बीजेपी के अंदर खराब हिंदू कौन बड़ा है। ये बात मैं ऐसे नहीं कह रहा हूं। जो पार्टी ये कहती हो कि दुनिया की सबसे बड़ी हो अध्यक्ष महोदय वो राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं चुन पाए अबतक। बीजेपी क्या है?

अखिलेश ने बीजेपी पर तंज कसा तो बीजेपी की तरफ से मोर्चा खुद गृह मंत्री अमित शाह ने संभाल लिया। वो अखिलेश के भाषण के बीच में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अखिलेश जी ने हंसते-हंसते कहा है इसलिए मैं भी हंसते-हंसते ही जवाब दूंगा। उन्होंने कहा कि सामने जितनी पार्टियां हैं उनका राष्ट्रीय अध्यक्ष उनको 5 में से ही चुनना है। एक ही परिवार से चुनना है। माननीय अध्यक्ष जी करोड़ों सदस्यों में से 12-13 करोड़ सदस्यों में से प्रक्रिया करके चुनना है तो देर लगती है। आपके यहां जरा भी देर नहीं लगेगी। मैं कह देता हूं कि आप 25 साल तक अध्यक्ष हो जाओ। नहीं बदल सकता।

जब अमित शाह ने उन्हें 25 साल वाला आशीर्वाद दिया तो अखिलेश ठहाके लगाकर हंसने लगे। उनके पास बैठे अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद मेज थपथपाकर शाह की बात का स्वागत करते दिखे।

वक्फ बिल पर गौरव गोगोई ने उठाए सरकार की मंशा पर सवाल, बोले- कल किसी और धर्म की जमीन पर होगी नजर

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केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। विधेयक को सदन में पेश करते ही विपक्षी दलों ने विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने संसद में बिल के विरोध में विपक्ष का पक्ष रखा है। इसके साथ ही उन्होंने इस बिल को लेकर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा।गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि वह वक्फ संशोधन विधेयक के जरिए संविधान को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने किरेन रिजिजू के बयान पर आपत्ति जताते हुए अपनी बात शुरू की। उन्होंने मंत्री के बयान को गुमराह करने वाला बताया। गोगोई ने कहा, मंत्री ने 2013 में यूपीए सरकार के विषय में जो कहा, वह पूरा का पूरा मिसलीड करने वाला बयान है, झूठ है। इन्होंने जो आरोप लगाए हैं और भ्रम फैलाया है, वो बेबुनियाद है। 

भविष्य में अन्य अल्पसंख्यक भी बनेगा निशाना- गोगोई

विधेयक के खिलाफ बहस करते हुए गौरव गोगोई ने चेतावनी दी कि सरकार भविष्य में अन्य अल्पसंख्यकों को भी निशाना बनाएगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, आज वे एक समुदाय की जमीन को निशाना बना रहे हैं, कल वे दूसरे समुदाय को निशाना बनाएंगे। उन्होंने दावा किया, वक्फ संशोधन विधेयक का उद्देश्य संविधान को कमजोर करना, अल्पसंख्यक समुदायों को बदनाम करना, भारतीय समाज को विभाजित करना और अल्पसंख्यकों को मताधिकार से वंचित करना है।

संशोधनों से समस्याएं और विवाद बढ़ेंगे-गोगोई

सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए गोगोई ने कहा, मैं यह नहीं कहता कि संशोधन नहीं होना चाहिए। संशोधन ऐसा होना चाहिए कि बिल ताकतवर बने। इनके संशोधनों से समस्याएं और विवाद बढ़ेंगे। ये चाहते हैं कि देश के कोने-कोने में केस चले। ये देश में भाईचारे का वातावरण तोड़ना चाहते हैं।

बीसीसीआई के किस फैसले से “आहत” हैं शर्मिला टैगोर, बोलीं-वे टाइगर की विरासत को याद नहीं रखना चाहते


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इग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने भारतीय क्रिकेट टीम और इंग्लैंड के बीच खेली जाने वाली पटौदी ट्रॉफी को रिटायर करने की तैयारी कर ली है। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के इस फैसले से क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी की पत्नी एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर काफी आहत हैं। साथ ही उन्होंने बीसीसीआई पर नाराजगी बी दिखाई है। उन्होंने कहा है कि बीसीसीआई पटौदी ट्रॉफी की विरासत को संजोना नहीं चाहता, तो ये उनका फैसला है।

बताया जा रहा है कि इस साल जून-जुलाई में भारत के आगामी इंग्लैंड दौरे के दौरान इस ट्रॉफी को रिटायर कर सकता है। हालांकि, अभी ट्रॉफी को रिटायर करने के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। शर्मिला टैगोर इस खबर से खासा दुखी हैं। उन्होंने बताया कि उनके बेटे सैफ अली खान को ईसीबी से एक पत्र मिला है, जिसमें ट्रॉफी को रिटायर किए जाने की बात कही गई है।

हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में शर्मिला टैगोर ने कहा कि उनके बेटे सैफ अली खान को इन बारे में सूचना दी गई है। एक्ट्रेस ने कहा, मुझे उनसे कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन ईसीबी ने सैफ को एक लेटर भेजा है कि वे ट्रॉफी को रिटायर कर रहे हैं। नाराजगी जाहिर हुए उन्होंने कहा ‘बीसीसीआई ‘टाइगर’ की विरासत को याद रखना चाहता है या नहीं, यह उनका फैसला है। वह इस कदम से ‘आहत’ हैं।

पटौदी ट्रॉफी की शुरुआत 2007 में हुई थी, जो भारत और इंग्लैंड के बीच 1932 में खेले गए पहले टेस्ट मैच की याद में खेली जाती है। ये ट्रॉफी भारत के महान क्रिकेटर और पूर्व कप्तान मंसूर अली खान पटौदी की विरासत को सम्मानित करने के लिए बनाई गई थी। क्रिकेट जगत में ‘टाइगर पटौदी’ के नाम से जाने जाने वाले मंसूर अली खान ने भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई थी।

लोकसभा में वक्फ बिल पेश होने पर भड़की मुस्लिम लॉ बोर्ड, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी


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वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 बिल पर लोकसभा में चर्चा जारी है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आज लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। इस विधेयक को लेकर विपक्ष द्वारा सरकार की मंशा पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इस बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने घोषणा की कि वह वक्फ (संशोधन) विधेयक को अदालत में चुनौती देगा। साथ ही, मुस्लिम लॉ बोर्ड इस विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी करेगा। उनका कहना है कि यह एक "ब्लैक लॉ" है, जो समुदाय के अधिकारों को खतरे में डालता है।

वक्फ संशोधन विधेयक पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा, "अगर यह विधेयक संसद में पारित हो जाता है, तो हम इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। हम चुप नहीं बैठेंगे। हम अपने पास उपलब्ध सभी कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों का उपयोग करेंगे। जब तक प्रस्तावित संशोधन वापस नहीं लिए जाते, हम शांतिपूर्ण आंदोलन चलाएंगे।"

बोर्ड के महासचिव अब्दुल रहीम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि ये बिल पहले से ज्यादा आपत्तिजनक हो गया है। इसे एक प्लानिंग के साथ लाया गया है। 5 करोड़ विरोध में ईमेल आए। जेपीसी ने भी विरोध दर्ज किया। किसी पर भी विचार नहीं किया गया। अब सीईओ के पद पर मुसलमान नहीं होगा। वक्फ का इंतजाम अब मुस्लिमों के हाथों से लेकर सरकार के हाथों सौंप दिया गया है। लॉ बोर्ड ने ये भी कहा कि अगर बिल पार्लियामेंट में पास हुआ तो हम चुप नहीं बैठेंगे। देशव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन चलाएंगे।

इससे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मंगलवार को बीजेपी के सहयोगी दलों समेत सभी धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों और सांसदों से अपील की कि वे वक्फ विधेयक का कड़ा विरोध करें और किसी भी हालत में इसके पक्ष में मतदान न करें। उन्होंने एक बयान में कहा कि यह विधेयक न केवल भेदभाव और अन्याय पर आधारित है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 के तहत मौलिक अधिकारों के प्रावधानों के भी खिलाफ है। 

रहमानी ने आरोप लगाया कि विधेयक के जरिए बीजेपी का लक्ष्य वक्फ कानूनों को कमजोर करना और वक्फ संपत्तियों को जब्त करने और नष्ट करने का रास्ता तैयार करना है। उन्होंने कहा, उपासना स्थल अधिनियम के अस्तित्व में होने के बावजूद, हर मस्जिद में मंदिर खोजने का मुद्दा लगातार बढ़ रहा है। यदि यह संशोधन पारित हो जाता है, तो वक्फ संपत्तियों पर सरकारी और गैर-सरकारी नाजायज दावों में वृद्धि होगी, जिससे कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट के लिए उन्हें जब्त करना आसान हो जाएगा।

बिल नहीं लाते तो संसद भवन भी...’वक्फ संशोधन विधेयक पर किरेन रिजिजू का जोरदार तर्क


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वक्फ संशोधन विधेयक आज लोकसभा में पेश किया गया।केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू प्रश्नकाल के बाद दोपहर इसे सदन में चर्चा के लिए पेश किया। किरेन रिजिजू ने संसद में बिल पेश करने के दौरान मुसलमानों को भरोसा दिलाया कि किसी भी मस्जिद पर कोई कार्रवाई का प्रावधान इस बिल में नहीं है। ये सिर्फ संपत्ति का मामला है धार्मिक संस्थानों से इस बिल का कोई लेना देना नहीं है। इसके अलावा रिजिजू ने बिल के पक्ष में जोरदार तर्क पेश करते हुए कहा कि अगर यह बिल नहीं लाया जाता, तो वक्फ बोर्ड की मनमानी के चलते संसद भवन जैसी अहम संपत्ति भी वक्फ की संपत्ति घोषित हो सकती थीं।

रिजिजू ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक का मकसद वक्फ बोर्ड के धार्मिक कार्यों में हस्तक्षेप करना नहीं है, बल्कि उसकी संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड ने दिल्ली के एयरपोर्ट और वसंत विहार जैसे इलाकों पर भी दावा ठोका था, जो इसकी अनियंत्रित शक्तियों को दर्शाता है।

किरेन रिजिजू ने कहा कि 2013 में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने पार्लियामेंट की जो बिल्डिंग है, उसे भी वक्फ प्रॉपर्टी घोषित कर दिया गया था। साल 2013 में मुझे इस बात पर बहुत आश्चर्य हुआ कि इसे कैसे जबरन पारित किया गया। 2013 में वक्फ अधिनियम में प्रावधान जोड़े जाने के बाद दिल्ली में 1977 से एक मामला चल रहा था, जिसमें सीजीओ कॉम्प्लेक्स और संसद भवन सहित कई संपत्तियां शामिल थीं। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इन पर वक्फ संपत्ति होने का दावा किया था। मामला अदालत में था, लेकिन उस समय यूपीए सरकार ने सारी जमीन को डीनोटिफाई करके वक्फ बोर्ड को सौंप दिया।

केन्द्रीय मंत्री ने आगे कहा कि अगर नरेंद्र मोदी जी की सरकार नहीं होती, हम संशोधन नहीं लाते तो जिस जगह हम बैठे हैं, वह भी वक्फ की संपत्ति होती। यूपीए की सरकार होती तो पता नहीं कितनी संपत्तियां डिनोटिफाई होतीं। उन्होंने कहा, मैं कुछ भी अपने मन से नहीं बोल रहा हूं। ये सब रिकॉर्ड की बात है।

रिजिजू ने बिल की तैयारी में व्यापक परामर्श का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आज तक किसी भी बिल पर इतनी बड़ी संख्या में याचिकाएं नहीं आईं जितनी इस बिल के लिए आई हैं। 284 डेलिगेशन ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सामने अपनी बात रखी। 25 राज्यों के वक्फ बोर्डों ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। नीति निर्माताओं, विद्वानों और विशेषज्ञों ने भी कमेटी के समक्ष अपने विचार रखे। उनका कहना था कि इस बिल को सकारात्मक सोच के साथ देखने वाले लोग इसका समर्थन करेंगे, भले ही वे पहले विरोध में रहे हों। रिजिजू ने इसे गरीब मुस्लिमों के हित में एक कदम बताया, जिससे उनकी संपत्तियों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।

लोकसभा में रिजिजू ने पेश किया वक्फ संशोधन बिल, बोले- धार्मिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी सरकार

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देशभर के वक्फ बोर्डों में जवाबदेही व पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वक्फ संशोधन विधेयक आज लोकसभा में पेश किया गया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। इसके जरिये मौजूदा वक्फ कानून में बदलाव किया गया है। लोकसभा में वक्फ बिल पर चर्चा करते हुए किरेन रिजिजू ने साफ किया कि वक्फ बिल में धार्मिक कार्यकलापों में हस्तक्षेप का प्रावधान नहीं है। मुझे न केवल उम्मीद है, बल्कि मुझे पूरा यकीन है कि इस विधेयक का विरोध करने वालों के दिलों में भी बदलाव आएगा। हर कोई सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ इस विधेयक का समर्थन करेगा।

... हम बैठे हैं, वह भी वक्फ की संपत्ति होती- रिजिजू

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि साल 2013 में यूपीए सरकार ने वक्फ बोर्ड को ऐसा अधिकार दिया कि वक्फ बोर्ड के आदेश को किसी सिविल अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। वक्फ के किसी आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती थी। रिजिजू ने कहा कि अगर यूपीए सरकार सत्ता में होती तो संसद इमारत, एयरपोर्ट समेत पता नहीं कितनी इमारतों को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया जाता क्योंकि इन पर भी दावा किया जा रहा था। 

विधेयक सिर्फ संपत्ति के प्रबंधन का मामला- रिजिजू

केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि वक्फ संशोधन विधेयक से सरकार धार्मिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी, ये विधेयक सिर्फ संपत्ति के प्रबंधन का मामला है। कोई मुसलमान जकात देता है तो उसे पूछने वाले हम कौन होते हैं। हम तो बस उसके मैनेजमेंट से जुड़ी बात कर रहे हैं। इसका धार्मिक व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। 

दुनिया में सबसे ज्यादा वक्फ संपत्ति भारत में- रिजिजू

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ी वक्फ संपत्ति भारत में है। ऐसा कहा जाता है कि भारत में रेलवे और रक्षा क्षेत्र के बाद तीसरी सबसे ज्यादा जमीन वक्फ बोर्ड के पास है, लेकिन रेलवे और रक्षा क्षेत्र की संपत्ति देश की संपत्ति है, जबकि वक्फ बोर्ड की संपत्ति निजी संपत्ति है। वक्फ बोर्ड के पास लाखों एकड़ जमीन और लाखों करोड़ की संपत्ति है तो देश के गरीब मुसलमानों के लिए इसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है?

क्यों लाया जा रहा, रिजिजू ने दिया इसका जवाब

वक्फ बिल क्यों लाया जा रहा? इसका जवाब संसद में किरेन रिजिजू ने दिया है। उन्होंने कहा कि हम मुस्लिम महिलाओं और बच्चों को उनका हक देकर बड़े सुधार ला रहे हैं। हमने यह स्वीकार कर लिया है कि यदि सरकारी भूमि पर विवाद उत्पन्न होता है तो कलेक्टर से ऊपर का अधिकारी निर्णय लेगा। किरेन रिजिजू ने कहा कि नए वक्फ बिल का नाम ‘उम्मीद’ हो गया है। इस संशोधित बिल से न केवल नया सवेरा आने वाला है। जबकि करोड़ों मुसलमानों को इसका फायदा भी होगा। मुसलमानों ने बिल का स्वागत किया है। बोर्ड के ऑडिट करने का भी प्रावधान रखा गया है। इस बिल के बाद असल पता चलेगा कि कितनी प्रॉपर्टी वक्फ बोर्ड के पास हैं।

चिली के राष्ट्रपति ने जमकर की पीएम मोदी की तारीफ, बोले-जियोपॉलिटिक्स में सबसे अहम खिलाड़ी


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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इस बीच भारत दौरे पर आए चिली के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की है। चिली के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक फोंट ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें जियोपॉलिटिक्स में एक ‘महत्वपूर्ण खिलाड़ी’ बताया।राष्ट्रपति बोरिक ने कहा कि पीएम मोदी दुनिया के हर नेता से बात कर सकते हैं।

भारत के भू-राजनीतिक रुख पर बोलते हुए चिली के राष्ट्रपति ने कहा, भारत विश्व में शांति के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी की आजकल एक अजीब स्थिति है कि वे दुनिया के हर नेता व्लादिमीर पुतिन, डोनाल्ड ट्रंप, वोलोदिमीर जेलेंस्की से बात कर सकते हैं। वे यूरोपीय संघ, ब्रिक्स या ईरान और ब्रिक्स में लैटिन अमेरिकी नेताओं समेत सभी से संपर्क कर सकते हैं, उन्हें अहम सुझाव दे सकते हैं। यह कुछ ऐसा है, जो अब कोई अन्य नेता नहीं कर सकता। आप आजकल भू-राजनीतिक माहौल में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं।

चिली के राष्ट्रपति बोरिक 1 से 5 अप्रैल तक भारत के पहले दौरे पर हैं। बोरिक ने भारत में मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार भी व्यक्त किया और कहा, मैं पहली बार राजकीय यात्रा पर आया हूं, मैं यहां मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं, पिछले 16 वर्षों से चिली से कोई भी यहां नहीं आया है, और इन 16 वर्षों में भारत बहुत बदल गया है। उन्होंने कहा चिली भारत के साथ अपने संबंधों पर काम करना चाहता है। हमने कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।

पीएम मोदी के न्योते पर वह भारत आए बोरिक की यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करना है। मंगलवार को दोनों नेताओं में मीटिंग हुई। इसमें व्यापार, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और स्वास्थ्य पर बातचीत हुई। 

पीएम मोदी ने लैटिन अमेरिका को भारत का एक महत्वपूर्ण मित्र और साझेदार बताया। पीएम मोदी ने एक बयान में कहा था, भारत और चिली भले ही विश्व मानचित्र के अलग-अलग छोर पर हों, हमारे बीच विशाल महासागर हों, लेकिन प्रकृति ने हमें अनोखी समानताओं से जोड़ा है।

वक्फ बिल पर महाभारत जारीःक्या संसद में पास करा पाएगी सरकार? जानिए नंबर गेम

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लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल आज पेश होगा। 8 घंटे की चर्चा के बाद अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू चर्चा का जवाब देंगे और पास कराने के लिए वोटिंग होगी। बुधवार को ही बिल को लोकसभा में पास कराने की तैयारी है। इसके बाद सरकार इस सत्र के बाकी बचे दो दिन यानी गुरुवार और शुक्रवार को ही इसे राज्यसभा में पेश कर वहां से भी पास कराने की तैयारी में जुटी है।

कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन के दल इस बिल का विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार के साथ उनके सहयोगियों पर भी निशाना साधा। मसूद ने कहा कि नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू, चिराग पासवान, जयंत चौधरी समझ लें कि बिल पास हुआ तो मुसलमान उन्हें कभी माफ नहीं करेगा। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी इस विधेयक के पहले भी विरोध में थी और आगे भी रहेगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी संशोधन के जरिए वक्फ संपत्तियों पर पूरा नियंत्रण चाहती है।

बीजेडी सांसद ससमित पात्रा ने कहा कि हमारी पार्टी बिल का विरोध करेगी। हमारा स्टैंड स्पष्ट है, हमने पहले भी कहा है कि यह विधेयक ठीक नहीं है। आईयूएमएल सांसद ई. टी. मोहम्मद बशीर ने असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने कहा है कि इस बिल को सदन में पेश किया जाएगा तो हम इसका विरोध करेंगे। क्योंकि इस बिल के माध्यम से वक्फ की जमीनों को छीनने की कोशिश की जाएगी।

क्या वक्फ बिल संसद में पास हो पाएगा?

लगभग पूरे विपक्ष के विरोध के बीच सवाल ये है कि क्या वक्फ बिल संसद में पास हो पाएगा? बीजेपी को इस बिल को पास कराने में दिक्कतों का सामना होने की उम्मीद कम ही है। उसके सहयोगी दल इस मुद्दे पर साथ हैं। चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और नीतीश कुमार की जेडीयू भी बिल के समर्थन में हैं। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी को जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) जैसे प्रमुख सहयोगियों के समर्थन का भरोसा है, जिनका समर्थन विधेयक को संसद से पारित कराने के लिए महत्वपूर्ण है।

क्या संसद में बीजेपी के पास नंबर गेम है?

लोकसभा: लोकसभा की कुल 543 सांसद है और बहुमत के लिए 272 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। सरकार के पास बिल पास करवाने के लिए जरूरी 272 की संख्या से 21 सांसद ज्यादा है। एनडीए के पास फिलहाल 293 सांसद हैं। 542 सांसदों में से 240 बीजेपी के हैं, 12 जेडी(यू) के हैं, 16 टीडीपी के हैं, पांच एलजेपी (आरवी) के हैं, दो राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के हैं और सात शिवसेना के हैं। अगर एनडीए की सभी पार्टियां बीजेपी का साथ देती हैं तो बिल आसानी से पास हो जाएगा।

राज्यसभा: राज्यसभा में एनडीए के 125 सांसद हैं। इसमें से बीजेपी के 98, जेडी(यू) के चार, टीडीपी के दो, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तीन, शिवसेना का एक और आरएलडी का एक सांसद है। 245 सदस्यों वाले सदन में इस विधेयक को पारित कराने के लिए 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत है। एनडीए को भरोसा है कि उसे असम गण परिषद और तमिल मनिला कांग्रेस जैसी पार्टियों के साथ-साथ छह मनोनीत सदस्यों का समर्थन भी मिल जाएगा।

ट्रंप आज से लागू करेंगे जवाबी हैरिफ, भारत समेत कई देशों पर होगा असर


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अमेरिकी आज यानी बुधवार से दुनियाभर में रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने जा रहा है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो अप्रैल से कई देशों के खिलाफ रेसिप्रोकल टैरिफ यानी जवाबी आयात शुल्क लगाने का एलान करेंगे। व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कहा ट्रंप बुधवार को शाम 4 बजे (स्थानीय समय) रोज गार्डन में ‘मेक अमेरिका वेल्दी अगेन इवेंट में भाषण देंगे। इसी इवेंट में रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर घोषणा होगी।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल को 'लिबरेशन डे' के रूप में मनाना चाहते हैं। इसके लिए वह अपने व्यापार सलाहकारों के साथ मिलकर टैरिफ योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं। ट्रंप बुधवार को वाइट हाउस के रोज गार्डन में शाम 4 बजे (स्थानीय समय) औपचारिक घोषणा करेंगे। इस घोषणा में टैरिफ की पूरी जानकारी दी जाएगी। कैरोलीन लीविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं। अगर कोई विदेशी नेता या उद्योगपति छूट चाहते हैं तो वह उनसे बात करने को तैयार हैं। लीविट ने कहा कि ट्रंप अमेरिकी श्रमिकों को उचित मौका दिलाने पर ध्यान दे रहे हैं।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने टैरिफ को लेकर यूरोपीय संघ, भारत, जापान और कनाडा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 100% तक टैरिफ लगाता है, जबकि अन्य देशों की नीतियां भी इसी तरह की हैं। यूरोपीय संघ द्वारा अमेरिकी डेयरी पर 50% तक, जापान की ओर से अमेरिकी चावल पर 700% तक और कनाडा की ओर से अमेरिकी मक्खन व पनीर पर लगभग 300% तक टैरिफ लगाया जाता है। लेविट ने कहा कि अमेरिकी उत्पादों के लिए ये शुल्क अनुचित व्यापार प्रथाएं हैं और हमें इसे बदलना होगा।

ट्रंप का दावा- भारत टैरिफ घटाने को राजी

ट्रंप ने जिन देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है उनमें भारत भी शामिल है। हालांकि, एक दिन पहले तक भारत को 'टैरिफ किंग' और 'व्यापार के मामले में बड़ा दुर्व्यवहारकर्ता' कहने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उम्मीद जताई है कि भारत उनके अन्य सहयोगियों की तरह अपने टैरिफ में कटौती करेगा। ओवल ऑफिस से बोलते हुए सोमवार को ट्रम्प ने कहा था, "मैंने सुना है कि भारत अपने टैरिफ में भारी कमी करने जा रहा है। बहुत से देश अपने टैरिफ में कमी करने जा रहे हैं।

ट्रंप ने कहा था कि भारत हमसे बहुत ज्यादा टैरिफ वसूलता है

अमेरिकी संसद के जॉइंट सेशन में ट्रंप ने कहा था, भारत हमसे 100% से ज्यादा टैरिफ वसूलता है, हम भी अगले महीने से ऐसा ही करने जा रहे हैं। उन्होनें ऐलान किया कि उनके प्रशासन के तहत, अगर कोई कंपनी अमेरिका में अपना प्रोडक्ट नहीं बनाएगी, तो उसे टैरिफ देना होगा। कुछ मामलों में, यह टैरिफ बहुत बड़ा होगा।

1 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार घाटा का हवाला

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि दूसरे देश अमेरिका पर भारी टैक्स और टैरिफ लगाते हैं, जबकि अमेरिका उन पर बहुत कम लगाता है। यह बहुत अन्यायपूर्ण है। दूसरे देश दशकों से हम पर टैरिफ लगाते आ रहे हैं, अब हमारी बारी है। ट्रंप का कहना है कि कई देश अमेरिकी उत्पादों पर जबरदस्त टैरिफ लगाते हैं, वहीं अमेरिका उन देशों के उत्पादों पर कम आयात शुल्क वसूलता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि इसकी वजह से अमेरिका को 1 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार घाटा उठाना पड़ता है, जो कि अमेरिकी उद्योगों और कामगारों के लिए नुकसान देह है।

टैरिफ एक तरह का बॉर्डर फीस या टैक्स होता है, जो कोई भी देश विदेशों से अपने यहां आने वाले सामान पर लगाता है। यह टैक्स आयात करने वाली कंपनी पर लगाया जाता है। इसे घटा-बढ़ाकर ही देश आपस में व्यापार को कंट्रोल करते हैं।