बिल नहीं लाते तो संसद भवन भी...’वक्फ संशोधन विधेयक पर किरेन रिजिजू का जोरदार तर्क
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वक्फ संशोधन विधेयक आज लोकसभा में पेश किया गया।केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू प्रश्नकाल के बाद दोपहर इसे सदन में चर्चा के लिए पेश किया। किरेन रिजिजू ने संसद में बिल पेश करने के दौरान मुसलमानों को भरोसा दिलाया कि किसी भी मस्जिद पर कोई कार्रवाई का प्रावधान इस बिल में नहीं है। ये सिर्फ संपत्ति का मामला है धार्मिक संस्थानों से इस बिल का कोई लेना देना नहीं है। इसके अलावा रिजिजू ने बिल के पक्ष में जोरदार तर्क पेश करते हुए कहा कि अगर यह बिल नहीं लाया जाता, तो वक्फ बोर्ड की मनमानी के चलते संसद भवन जैसी अहम संपत्ति भी वक्फ की संपत्ति घोषित हो सकती थीं।
रिजिजू ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक का मकसद वक्फ बोर्ड के धार्मिक कार्यों में हस्तक्षेप करना नहीं है, बल्कि उसकी संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड ने दिल्ली के एयरपोर्ट और वसंत विहार जैसे इलाकों पर भी दावा ठोका था, जो इसकी अनियंत्रित शक्तियों को दर्शाता है।
किरेन रिजिजू ने कहा कि 2013 में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने पार्लियामेंट की जो बिल्डिंग है, उसे भी वक्फ प्रॉपर्टी घोषित कर दिया गया था। साल 2013 में मुझे इस बात पर बहुत आश्चर्य हुआ कि इसे कैसे जबरन पारित किया गया। 2013 में वक्फ अधिनियम में प्रावधान जोड़े जाने के बाद दिल्ली में 1977 से एक मामला चल रहा था, जिसमें सीजीओ कॉम्प्लेक्स और संसद भवन सहित कई संपत्तियां शामिल थीं। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इन पर वक्फ संपत्ति होने का दावा किया था। मामला अदालत में था, लेकिन उस समय यूपीए सरकार ने सारी जमीन को डीनोटिफाई करके वक्फ बोर्ड को सौंप दिया।
केन्द्रीय मंत्री ने आगे कहा कि अगर नरेंद्र मोदी जी की सरकार नहीं होती, हम संशोधन नहीं लाते तो जिस जगह हम बैठे हैं, वह भी वक्फ की संपत्ति होती। यूपीए की सरकार होती तो पता नहीं कितनी संपत्तियां डिनोटिफाई होतीं। उन्होंने कहा, मैं कुछ भी अपने मन से नहीं बोल रहा हूं। ये सब रिकॉर्ड की बात है।
रिजिजू ने बिल की तैयारी में व्यापक परामर्श का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आज तक किसी भी बिल पर इतनी बड़ी संख्या में याचिकाएं नहीं आईं जितनी इस बिल के लिए आई हैं। 284 डेलिगेशन ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सामने अपनी बात रखी। 25 राज्यों के वक्फ बोर्डों ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। नीति निर्माताओं, विद्वानों और विशेषज्ञों ने भी कमेटी के समक्ष अपने विचार रखे। उनका कहना था कि इस बिल को सकारात्मक सोच के साथ देखने वाले लोग इसका समर्थन करेंगे, भले ही वे पहले विरोध में रहे हों। रिजिजू ने इसे गरीब मुस्लिमों के हित में एक कदम बताया, जिससे उनकी संपत्तियों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।
Apr 02 2025, 15:54