तमिल और हिंदी भाषा को लेकर हुए विवाद के बाद गरमाया मराठी भाषा का मुद्दा, जानिए पूरा मामला

डेस्क : देश में भाषा विवाद को लेकर मामले अब बढ़ते जा रहे हैं, पहले दक्षिण राज्यों से खबर आती रहती थीं कि लोगों ने कन्नड़, तमिल आदि नहीं आने पर हंगामा किया। अब पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र से भी ऐसी ही खबरें आ रही है। महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर विवाद गरमा गया है। महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ता मराठी भाषा को इम्पोर्टेंस दिलाने के लिए अभियान चला रहे हैं।

पिछले दिनों मुंबई के वर्सोवा में डी-मार्ट स्टोर के कर्मचारी के साथ मराठी नहीं आने पर मनसे कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट का मामला सामने आया था। फिर एक बार मनसे कार्यकार्ताओं पर सिक्योरिटी गार्ड के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है।

मिली जानकारी के अनुसार, पवई के L&T परिसर में एक व्यक्ति ने मराठी भाषा को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी, गार्ड ने मराठी भाषा को लेकर कहा था कि मराठी गया तेल लगाने, जिसके बाद MNS के कार्यकर्ताओं को इसकी जानकारी मिली। MNS कार्यकर्ता तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और सुरक्षा गार्ड को ‘मराठी का सम्मान’ करने की चेतावनी देते हुए उसे एक थप्पड़ मार दिया।

वहीं मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने एक बार फिर मराठी के मुद्दे को आगे करते हुए कहा कि मुंबई में कुछ लोग कहते है कि हम मराठी नहीं बोलेंगे लेकिन जो लोग मराठी नहीं बोलेंगे तो उनके कान के नीचे तमाचा मारने का काम भी किया जाएगा( महाराष्ट्र और मुंबई में मराठी का सम्मान किया जाना चाहिए। राज ठाकरे ने मनसे के सैनिकों से अपील की है कि वे पता लगाएं कि महाराष्ट्र के हर बैंक में मराठी भाषा का उपयोग होता है या नही।

अंतरिक्ष से कैसा दिखता है भारत, स्पेस स्टेशन से धरती पर लौटी सुनीता विलियम्स ने किया इसका वर्णन

डेस्क : इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 9 माह तक फंसे रहने के बाद सुनीता विलियम्स धरती पर लौट आई हैं। धरती पर वापस लौटीं नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने बता दिया कि अंतरिक्ष से हमारा भारत कैसा दिखता है। भारत की बेटी सुनीता विलियम्स ने कुछ वैसा ही जवाब दिया है जब टी-सोयुज 11 मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रा पर गए राकेश शर्मा दिया भारत को लेकर दिया था।

सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने आज मंगलवार को पहली बार मीडिया से बातचीत की और कई सवालों के जवाब दिए। उन्होंने भारत का बहुत ही शानदार वर्णन किया है। सुनीता विलियम्स ने बताया कि अंतरिक्ष से भारत कितना सुंदर दिखता है। उन्होंने यह भी कहा कि वह भारत जरूर आएंगी।

नासा की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष से दिखने वाले हिमालय के अद्भुत नजारे का वर्णन किया। उन्होंने कहा, ‘भारत बहुत अमेजिंग यानी अद्भुत है।’ जब भी हम हिमालय के ऊपर से गुजरते थे, हमें बहुत शानदार और अविश्वसनीय तस्वीरें मिलती थीं। ऐसा लगता था जैसे कोई लहर उठी हो और भारत में आकर बह रही हो।’

बता दें जब टी-सोयुज 11 मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा अंतरिक्ष यात्रा पर गए थे, तभी इसका जवाब मिल गया था। जी हां, उस वक्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने फोन पर राकेश शर्मा से बात की थी। और पूछा था- अंतरिक्ष से हमारा हिंदुस्तान कैसा दिखता है? इस पर राकेश शर्मा ने कहा था – ‘सारे जहां से अच्छा।’ ठीक उसी तरह का जवाब अब भारत की बेटी सुनीता विलियम्स ने दिया है।

एनएच पर सफर करना हुआ महंगा, इतने प्रतिशत टोल टैक्स में हुई बढोत्तरी

डेस्क ; राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर सफर करना महंगा हो गया है। 31 मार्च की रात 12 बजे से बिहार सहित पूरे देश में टोल प्लाजा पर नई दर लागू हो गई है। नई दर के अनुसार लोगों को अब चार से पांच फीसदी अधिक राशि देनी होगी।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार बिहार में 39 टोल प्लाजा हैं। इन टोल प्लाजा से कार-जीप या अन्य बड़े वाहनों को टोल टैक्स देना पड़ता है। केंद्र सरकार हर साल एक अप्रैल से टोल टैक्स में वृद्धि करती है। नई दर 31 मार्च-एक अप्रैल की रात 12 बजे से ही लागू होती है। बिहार से एनएचएआई को टोल टैक्स के रूप में हर महीने 100 करोड़ से अधिक की आमदनी होती है। इस रकम का इस्तेमाल हाइवे की मरम्मत और उसके रखरखाव में किया जाना है।

बिहार में सबसे अधिक पटना के दीदारगंज टोल प्लाजा से 25 हजार से अधिक गाड़ियां पार करती हैं। दूसरा स्थान मोहनियां का है जहां से लगभग हर रोज 20 हजार से अधिक गाड़ियां गुजरती है। हालांकि टोल चार्ज बढ़ने पर भी रक्षा वाहन, अग्निशमन, एंबुलेंस, शव वाहन, वीआईपी साइन लगे वाहनों को टोल टैक्स नहीं देना पड़ेगा।

इस साल दोगुने सहने होंगे लू के थपेड़े अप्रैल - जून में सामान्य से अधिक गर्मी

रिपोर्ट -नितेश श्रीवास्तव

मौसम विभाग ने अप्रैल से जून के बीच सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार देश के मध्य, पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी राज्यों में लू (गर्म हवाएं) वाले दिनों की संख्या पिछली बार से अधिक रहेगी। कुछ राज्यों में लू वाले दिन दोगुना होने की आशंका है। मौसम विभाग के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने कहा अधिकांश भागों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहेगा। पश्चिमी और पूर्वी भारत के कुछ क्षेत्रों में तापमान सामान्य रहने की उम्मीद है, मगर अधिकांश क्षेत्रों में न्यूनतम पारा भी सामान्य से अधिक रहेगा। अप्रैल से जून तक उत्तर और पूर्वी भारत, मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में सामान्य से दो से चार दिन अधिक लू चलने की आशंका है। आमतौर पर भारत में अप्रैल से जून तक चार से सात दिन लू चलती है।

महापात्र ने कहा, जिन राज्यों में सामान्य से अधिक गर्म हवाएं चलने की संभावना है, उनमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, प. बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक और तमिलनाडु के उत्तरी भाग शामिल हैं। पूर्वी यूपी, झारखंड, छत्तीसगढ़ व ओडिशा समेत कुछ राज्यों में इस दौरान 10 से 11 दिन लू चलने की संभावना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में 2025 में गर्मी की लहर बहुत पहले आ जाएगी। 2024 में, 5 अप्रैल को ओडिशा में गर्म हवाएं चलनी शुरू हुई थीं, पर इस साल कोंकण और तटीय कर्नाटक के कुछ हिस्सों में 27-28 फरवरी को ही गर्म हवाएं चलने लगीं।मौसम विभाग के अनुसार, पिछले साल अलग-अलग राज्यों में लू के कुल 536 दिन दर्ज किए गए। यह 14 साल में सबसे ज्यादा थे। इस दौरान देश में सबसे गर्म और सबसे लंबी अवधि वाले लू के दौरान हीट स्ट्रोक के 41,789 संदिग्ध मामले और गर्मी से संबंधित 143 मौतें दर्ज की गईं।

अप्रैल से ही झेलनी होगी भीषण तपिश

मौसम विभाग के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि अप्रैल में अधिकांश भागों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। हालांकि, सुदूर दक्षिणी और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों के कुछ इलाकों में तापमान सामान्य रह सकता है। महापात्र ने कहा, उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व में कुछ स्थानों पर तापमान सामान्य से कुछ कम भी रहेगा, लेकिन इसे छोड़कर न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहेगा।

10 फीसदी तक बढ़ जाएगी बिजली की मांग

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत को इस बार गर्मी के दौरान बिजली की मांग में 9 से 10 प्रतिशत वृद्धि के लिए तैयार रहना चाहिए। पिछले साल, देशभर में बिजली की अधिकतम मांग 30 मई को 2,50,000 मेगावाट को पार कर गई थी। यह पूर्वानुमान से 6.3 प्रतिशत अधिक था।

अप्रैल में औसत से 88 से 112% वर्षा

आईएमडी ने कहा कि अप्रैल में 39.2 मिमी के दीर्घकालिक औसत से 88 से 112% वर्षा होने की उम्मीद है। उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पश्चिम-मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है। पश्चिमी घाट में केरल और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भूस्खलन हो सकता है और पूर्वोत्तर राज्यों को अप्रैल में बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है।

संसद में वक्फ बिल पेश करने की प्रक्रिया शुरू, रिजिजू बोले-कल तारीख बता देंगे

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वक्फ संशोधन विधेयक कब आएगा इसे लेकर चर्चा का दौर जारी है। इस बीच केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि संसद में वक्फ बिल पेश करने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। बिल पर संसद के बाहर खूब विचार-विमर्श हुए हैं। हमें सदन में बहस और चर्चा में भी जरूर भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार विधेयक के प्रावधानों से जुड़े हर सवाल का जवाब देने को तैयार है।

अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मेरी सभी से अपील है कि जब हम संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी कर रहे हैं, तो हमें सदन में बहस और चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए। संसद के बाहर, रिकॉर्ड संख्या में परामर्श और विचार-विमर्श हुए हैं।

किरेन रिजिजू ने आगे कहा कि जेपीसी ने लोकतांत्रिक भारत के इतिहास में अब तक की सबसे व्यापक परामर्श प्रक्रिया और सर्वोच्च प्रतिनिधित्व का रिकॉर्ड बनाया है। अब जबकि विधेयक तैयार है, मैं सभी राजनीतिक दलों से अनुरोध करना चाहूंगा कि वे इसमें भाग लें और संसद के पटल पर अपने विचार रखें।

किरेन रिजिजू ने कहा कृपया इस मामले को लेकर लोगों को गुमराह न करें। उन्होंने कहा कि भोले-भाले मुसलमानों को यह कहकर गुमराह किया जा रहा है कि सरकार मुसलमानों की संपत्ति और अधिकार छीनने जा रही है। उन्होंने कहा कि हम कल तारीख बता देंगे की वक्फ बिल कब ला रहे। सरकार की तैयारी पूरी है।

गृह मंत्री अमित शाह ने 29 मार्च को एक निजी चैनल से बातचीत में इसी सत्र (बजट सत्र) में वक्फ बिल संसद में पेश करने की बात कही थी। शाह ने कहा था कि इस बिल से किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है।

माना जा रहा है कि वक्फ संशोधन बिल को 2 अप्रैल को संसद में पेश किया जा सकता है। सरकार पहले लोकसभा में बिल पेश करेगी। सत्र 4 अप्रैल तक चलेगा।

इससे पहले आज ही केरल के कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी) ने राज्य के सांसदों से केंद्र सरकार के इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की। इस पत्र को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा करते हुए रिजिजू ने कहा, खुद अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य होने के नाते वे इस अपील का स्वागत करते हैं। बता दें कि केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्यमंत्री रिजिजू बौद्ध धर्म के मानने वाले हैं। खुद राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने भी उनकी इस पहचान को रेखांकित कर इसे भारत के लिए गौरवशाली तथ्य बताया था।

तीसरी बार भी राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे ट्रंप, बोले-संविधान बदलने की सोच रहा हूं

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह तीसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए प्रयास कर सकते हैं। इसके लिए देश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत भी दिया। ट्रंप ने कहा है कि वे तीसरे कार्यकाल के लिए विचार कर रहे हैं और इसके लिए संविधान को बदलने के बारे में सोच रहे हैं। अमेरिका का संविधान किसी भी व्यक्ति को केवल दो बार चुने जाने की अनुमति देता है। हालांकि, रविवार को एनबीसी को एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह तीसरी बार भी इस पद पर सेवाएं देना चाहते हैं।

एनबीसी न्यूज चैनल को रविवार को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि वे तीसरे कार्यकाल के लिए विचार कर रहे हैं और इसके लिए संविधान को बदलने के बारे में सोच रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि मजाक नहीं कर रहे हैं। ऐसे तरीके हैं जिनसे आप ऐसा कर सकते हैं। हालांकि इसके बारे में विचार करना अभी काफी जल्दबाजी होगी। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की जनता उनकी लोकप्रियता के कारण उन्हें तीसरा कार्यकाल देने के लिए तैयार हो जाएगी।

ट्रंप नवंबर में दूसरी बार राष्ट्रपति चुने गए हैं। इससे पहले वह 2017 से 2021 तक राष्ट्रपति रह चुके हैं। अगर ट्रम्प तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की कोशिश करते हैं तो इसके लिए उन्हें संविधान में संशोधन करना होगा। इसके लिए अमेरिकी संसद और राज्यों से समर्थन की जरूरत होगी।

किस रणनीति पर काम कर रहे ट्रंप?

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उनके पास कोई रणनीति है जिससे वे तीसरी बार चुनाव लड़ सकें, तो ट्रम्प ने जवाब दिया, हां, कुछ तरीके हैं। जब उनसे एक संभावित योजना के बारे में पूछा गया कि क्या उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस 2028 में चुनाव लड़ सकते हैं और फिर ट्रम्प को सत्ता सौंप सकते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, हां, यह एक तरीका हो सकता है, लेकिन और भी तरीके हैं। हालांकि, ट्रंप ने इन तरीकों का खुलासा करने से इनकार कर दिया।

क्या कहता है अमेरिकी संविधान?

संविधान का 22वां संशोधन 1951 में राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट के लगातार चार बार निर्वाचित होने के बाद जोड़ा गया था। इसमें कहा गया है कि 'कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति के पद पर दो बार से अधिक नहीं चुना जाएगा।

क्या ट्रंप संविधान बदल सकते हैं?

ट्रंप को तीसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव के लिए उतरना है तो उन्हें अमेरिकी संविधान में बदलाव करना होगा, जो इतना आसान नहीं है। ट्रंप को इसके लिए अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव दोनों में दो-तिहाई बहुमत से एक बिल पास कराना होगा। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास दोनों सदनों में इतने सदस्य नहीं हैं।

सीनेट में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास 100 में से 52 सीनेटर है। वहीं, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में 435 में से 220 सदस्य हैं। ये संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो तिहाई यानी 67% बहुमत से काफी कम है।

अगर ट्रंप ये बहुमत हासिल कर लेते हैं तब भी उनके लिए संविधान में संशोधन करना इतना आसान नहीं होगा। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से बिल पास होने के बाद इस संशोधन के लिए राज्यों से मंजूरी लेनी होती है।

इसके लिए तीन चौथाई राज्यों का बहुमत मिलन के बाद ही संविधान में संशोधन हो सकता है। यानी 50 अमेरिकी राज्यों में से अगर 38 संविधान में बदलाव के लिए राजी हो जाए तो ही नियम बदल सकते हैं।

क्या अमेरिका भी रूस-चीन की राह पर?

रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन में शी जिनपिंग पहले ही संवैधानिक बदलाव कराकर अपनी सत्ता को लंबा खींच चुके हैं। पुतिन ने रूसी संविधान में संशोधन कर 2036 तक सत्ता में बने रहने का मार्ग प्रशस्त कर लिया, जबकि जिनपिंग ने चीन में राष्ट्रपति पद की समय सीमा को ही खत्म कर दिया। सवाल यह है कि क्या ट्रंप भी इसी राह पर चल रहे हैं?

ट्रंप के करीबी सहयोगी और पूर्व व्हाइट हाउस रणनीतिकार स्टीव बैनन ने हाल ही में दावा किया कि ट्रंप 2028 में फिर से चुनाव लड़ सकते हैं। बैनन के अनुसार, हम इस पर काम कर रहे हैं, और कुछ विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हम लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं, लेकिन संविधान की भाषा और व्याख्या को लेकर कानूनी विकल्प खोजे जा रहे हैं।

ट्रंप ने रेयर अर्थ डील पर जेलेंस्की को चेताया, बोले-अगर पीछे हटे तो करना होगा बड़ी परेशानी का सामना

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कुछ समय से यूक्रेन पर खनिजों की डील के लिए दबाव बना रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की जब अमेरिका दौरे पर आए थे, तब दोनों देशों के बीच यूक्रेनी खनिजों की डील होने वाली थी, लेकिन ट्रंप और जेलेंस्की की बहस के बाद यह डील नहीं हो पाई। हालांकि बाद में जेलेंस्की इस डील के लिए तैयार हो गए। फिलहाल यह डील हुई नहीं है और इसके जल्द होने के आसार जताए जा रहे हैं। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने जेलेंस्की को मिनरल डील को लेकर चेतावनी दी है।

ट्रंप ने कहा है कि, जेलेंस्की को देखकर मुझे लग रहा हैं कि वह दुर्लभ खनिज के समझौते से पीछे हटने की कोशिश कर रहे हैं और अगर वो ऐसा कुछ करते हैं तो इसका परिणाम ठीक नहीं होगा, उनके लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी। ट्रंप ने कहा, इन्हीं हरकतों की वजह से यूक्रेन नाटो समूह का हिस्सा नहीं बनने वाला है। अगर जेलेंस्की को लग रहा है कि वह खनिज समझौते पर दोबारा बातचीत शुरू करके इससे बच जाएंगे तो ऐसा बिल्कुल नहीं होने वाला है।

रेयर अर्थ डील वॉशिंगटन और कीव के बीच एक खास समझौता है, जिसके तहत अमेरिका रूस के खिलाफ युद्ध में कीव को 35 अरब डॉलर, सैन्य उपकरण की मदद के बदले में यूक्रेन के दुर्लभ खनिज संसाधनों का दोहन करेगा।

जेलेंस्की से पहले ट्रंप ने पुतिन की खड़ी की खाट

वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेलेंस्की को धमकाने से पहले रूस की राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी चेतावनी दी थी। ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति पर यूक्रेन के साथ युद्धशांति समझौते में दिक्कत उत्पन्न करने के आरोप लगाए और कहा कि वह राष्ट्रपति पुतिन से काफी नाराज हैं।

रूस पर टैरिफ की धमकी

डोनाल्ड ट्रंप ने शांति समझौते में बाधा डालने के कोशिश को लेकर कहा कि अगर रूस सीजफायर की कोशिश में बाधा डालेगा तो अमेरिका रूसी तेल पर 25 से 50 प्रतिशत तक सेकेंडरी टैरिफ लगा देंगे।

आरएसएस नेता जोशी ने औरंगजेब विवाद को बताया अनावश्यक, बोले- जिसकी जहां आस्था, वहीं जाएगा

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मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र को हटाने की कुछ दक्षिणपंथी संगठनों की मांग के बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता सुरेश 'भैयाजी' जोशी ने सोमवार को कहा कि इस विषय को अनावश्यक रूप से उठाया गया है। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति आस्था रखता है, वह महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में स्थित इस ढांचे के दर्शन करेगा। बता दें कि पिछले कुछ दिनों में औरंगजेब को लेकर काफी विवाद देखने को मिला है। नागपुर में मुगल शासक औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग को लेकर हिंसा भी देखने को मिली।

महाराष्ट्र के औरंगजेब की कब्र को लेकर छिड़े विवाद को आरएसएस के वरिष्ठ नेता ने अनावश्यक बताया है।भैयाजी जोशी ने कहा कि औरंगजेब की कब्र का विषय अनावश्यक रूप से उठाया गया है। उनकी मृत्यु भारत में हुई थी, इसलिए उनकी कब्र यहीं बनाई गई है। हमारे पास छत्रपति शिवाजी महाराज का आदर्श (रोल मॉडल) है, उन्होंने अफजल खान की कब्र बनवाई थी। यह भारत की उदारता और समावेशिता का प्रतीक है। कब्र बनी रहेगी, जो भी जाना चाहेगा, जाएगा।

इससे पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को औरंगजेब की कब्र को लेकर सांप्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयासों की निंदा की और कहा कि इतिहास को जाति और धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।उन्होंने लोगों से ऐतिहासिक जानकारी के लिए व्हाट्सएप फॉरवर्ड पर निर्भर न रहने को भी कहा। ठाकरे ने यह भी कहा कि मुगल शासक शिवाजी नामक विचार को मारना चाहते थे लेकिन असफल रहे और महाराष्ट्र में उनकी मृत्यु हो गई। मनसे प्रमुख ने कहा कि बीजापुर के सेनापति अफजल खान को प्रतापगढ़ किले के पास दफनाया गया था और छत्रपति शिवाजी महाराज की अनुमति के बिना ऐसा नहीं किया जा सकता था।

ईद पर कराची में हाफिज सईद का करीबी ढेर, अब्दुल रहमान की गोली मारकर हत्या

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पाकिस्तान में एक के बाद एक आतंकियों को निशाना बनाया जा रहा है। अब कराची में लश्कर-ए-तैयबा नेता हाफिज सईद का करीबी टारगेट किलिंग का शिकार हुआ है। हाफिज सईद के एक करीबी सहयोगी को सोमवार को ईद के दिन पाकिस्तान के कराची में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मरने वाले की पहचान अब्दुल रहमान के रूप में हुई है।

बताया जाता है कि अब्दुल रहमान आतंकवादी संगठन लश्कर के लिए फंड कलेक्शन का काम करता था। जितने भी फंड कलेक्टर कराची में फंड उगाने का काम करते थे वह सभी अब्दुल रहमान के पास आकर फंड जमा करते थे जहां से यह आगे जाता था।

अब्दुल रहमान अहल-ए-सुन्नत वल जमात का प्रमुख था। इस संगठन को पहले सिपाह-ए-शहाब के नाम से जाना जाता था। इसका जैश-ए-मोहम्मद से भी संबंध रहा है। इस संगठन का तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के साथ गहरे संबंध हैं। टीटीपी को पाकिस्तान में अफगानिस्तान तालिबान का प्रमुख सहयोगी माना जाता है।

हाफिज सईद के करीबी पर ये हमला उस समय हुआ, जब वो अपने पिता और अन्य लोगों के साथ था। इस हमले में उसके पिता समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिसमें अब्दुल रहमान की मौके पर ही मौत हो गई।गोली मारने की यह घटना कैमरे में कैद हो गई। इस वीडियो में हमलावरों को रहमान को गोली मारते और भागते हुए दिखाया गया है। इस घटना के दृश्य सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गए हैं।

पाकिस्तान में हाल के दिनों में आतंकी घटनाओं में शामिल दहशतगर्दों को अज्ञात लोग एक-एक कर ठिकाने लगा रहे हैं। हाल ही में क्वेटा में अज्ञात हमलावरों ने जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम के मुफ्ती अब्दुल बाकी नूरजई की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। नूरजई को क्वेटा एयरपोर्ट के पास गोली मारी गई थी, जिसमें वो बुरी तरह घायल हो गए और अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

अब्दुल रहमान से पहले लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष कमांडर जिया-उर-रहमान उर्फ नदीम उर्फ कतल सिंधी की पंजाब प्रांत के झेलम इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। नदीम को लश्कर संस्थापक हाफिज सईद का भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। वह जम्मू-कश्मीर के पूंछ-राजौरी क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था। उसने 2000 की शुरुआत में जम्मू क्षेत्र में घुसपैठ की थी और 2005 में वो वापस पाकिस्तान चला गया था।

महाराष्ट्र से होगा पीएम मोदी का उत्तराधिकारी? शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत का दावा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को नागपुर में आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे। पीएम नरेंद्र मोदी के आरएसएस हेडक्‍वार्टर जाने के एक दिन बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नेता संजय राउत ने मोदी की रिटायरमेंट को लेकर बड़ा दावा किया है। संजय राउत ने कहा कि पीएम मोदी इस साल 75 साल के होने जा रहे हैं लिहाजा अपने रिटायरमेंट प्‍लान के बारे में चर्चा करने के लिए संघ के मुख्‍यालय गए थे। राउत ने दावा करते हुए कहा कि संघ तय करेगा कि पीएम नरेंद्र मोदी का उत्‍तराधिकारी कौन होगा। उन्‍होंने ये भी कहा कि मोदी का उत्‍तराधिकारी महाराष्‍ट्र से होगा।

संजय राउत ने मुंबई में मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समय अब पूरा हो गया है। अब आरएसएस भी बदलाव चाहते है और बीजेपी के अगले अध्यक्ष को भी चुनना चाहता है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी पिछले 10-11 सालों में आरएसएस मुख्यालय नहीं गए थे, अब वहां मोहन भागवत को टाटा, बाय-बाय कहने गए थे। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस भी देश के नेतृत्व में बदलाव चाहता है, इसलिए पीएम मोदी को बुलाया गया था।

संजय राउत ने कहा कि 10 साल बाद मोदी का नागपुर जाकर सरसंघचालक से मिलना कोई साधारण बात नहीं है। सितंबर में रिटायरमेंट का आवेदन लिखने के लिए शायद वे आरएसएस मुख्यालय गए थे। मेरी जो जानकारी है कि पिछले 10-11 सालों में मोदी जी कभी वहां नहीं गए। इस बार मोदी जी बताने के लिए गए थे कि वे मोहन भागवत जी से कहने जा रहे हैं कि वे टाटा-बाय-बाय कर रहे हैं।

नए नेता संभवतया महाराष्‍ट्र से होगा

संजय राउत ने कहा कि बंद दरवाजे के भीतर क्‍या चर्चाएं हुईं ये तो संभवतया बाहर नहीं आएंगी लेकिन कई संकेतों से इस बात का इशारा मिलता है। उन्‍होंने कहा कि नए नेता का चुनाव संघ करेगा और संभवतया वो महाराष्‍ट्र से होगा।

राउत के दावे पर सीएम फडणवीस का बयान

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संजय राउत के दावों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी कई सालों तक देश का नेतृत्व करते रहेंगे। फडणवीस ने कहा कि 2029 में हम मोदी को फिर से प्रधानमंत्री के रूप में देखेंगे। उनके उत्तराधिकारी को खोजने की कोई जरूरत नहीं है। वह (मोदी) हमारे नेता हैं और बने रहेंगे। हमारी संस्कृति में, जब पिता जीवित है, तो उत्तराधिकार के बारे में बात करना अनुचित है। वह मुगल संस्कृति है। इस पर चर्चा करने का समय नहीं आया है।

पीएम मोदी ने आरएसएस की जमकर की तारीफ

बता दें कि इतिहास में यह दूसरी बार है जब किसी प्रधानमंत्री ने आधिकारिक तौर पर आरएसएस मुख्यालय का दौरा किया है। इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने 2000 में अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान नागपुर पहुंचे थे। अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि जो विचारधारा का बीज 100 साल पहले बोया गया था, वह एक विशाल पेड़ बन गया है। आरएसएस के सिद्धांतों और मूल्यों ने इसे महान ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, जिसमें लाखों कार्यकर्ता इसकी शाखाएं हैं।