मदरसा हमीदिया के 15 बच्चों को मिली हाफ़िज़ ए कुरान की उपाधि

गोरखपुर 17 फरवरी 2025 । गोरखपुर के मोहल्ला घासी कटरा स्थित (यतीम ख़ाना) आग़ोशे हमीदिया में दिनांक 16 फरवरी को लगभग डेढ़ दर्जन बच्चों की दस्तारबंदी की गई। यह दस्तारबंदी उस समय की जाती है जब क़ुराने पाक की शिक्षा ग्रहण करने वाला छात्र उसे पूरी तरह हिफ़्ज़ (कंठस्थ) कर लेता है। जब वह पूरी तरह कुरान को कंठस्थ कर लेता है तब उसकी दस्तारबंदी (हाफ़िज़ की उपाधि) किसी बड़े आलिमे दीन के हाथों से कराई जाती है।

16 फ़रवरी 2025 दिन रविवार की रात मदरसा हामिदिया में आयोजित जलसे में, मदरसा अरबिया जौनपुर से आए मौलाना मुफ्ती अहमद शमीम के हाथों 15 हाफ़िज़ ए कुरान की दस्तरबंदी की गई। हाफ़िज़ की उपाधि पाने वालों में हाफ़िज़ मुहम्मद अशहद हाफ़िज़ मुहम्मद ज़ैद, हाफ़िज़ मुहम्मद अब्दुल्लाह, हाफ़िज़ अर्श,हाफ़िज़ शरीक, मुहम्मद हसन,हाफ़िज़ मुहम्मद याहया,हाफ़िज़ मुहम्मद सईद,हाफ़िज़ तनवीर, हाफ़िज़ मुहम्मद रवाहा, हाफ़िज़ मुहम्मद अशहद हाफ़िज़ मुहम्मद नोमान,हाफ़िज़ अज़ीज़, हाफ़िज़ मुहम्मद मोहसिन,हाफ़िज़ मुहम्मद हसन,हाफ़िज़ अब्दुल्लाह के नाम शामिल हैं।

प्रबंध समिति की तरफ से सभी 15 हाफ़िज़ ए कुरान छात्रों को उपहार स्वरूप साइकिल दी गई। इस अवसर पर पत्रकार और साहित्यकार सैयद असिम रऊफ़ और सैयद अल्ताफ़ हुसैन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन मुफ्ती मुहम्मद मुनीर ने किया।

इस अवसर पर मुतवल्ली महबूब सईद हारिस ने बताया कि आग़ोशे हमीदिया जिसका पुराना नाम यतीम खाना घासी कटरा अर्थात अनाथालय था। आज इस आग़ोशे हमीदिया में ज़िला गोरखपुर के अतिरिक्त प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले छात्र दीनी तालीम के साथ-साथ स्कूली शिक्षा भी ग्रहण कर रहे हैं। वर्तमान समय में लगभग 60 बच्चे आग़ोशे हमीदिया में रहते हैं। जिनका एडमिशन महानगर के एम एस आई इंटर कॉलेज बख़्शीपुर में कराया गया है। यह सभी बच्चे कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थी हैं। साथ ही मदरसा हमीदिया में दीनी तालीम प्राप्त कर रहे हैं। महबूब सईद हारिस ने बताया कि इसके पीछे संस्थान का उद्देश्य है कि जो बच्चे मदरसे से दीनी तालीम प्राप्त कर रहे हैं। उनके पास दीन की शिक्षा के साथ स्कूली शिक्षा की भी डिग्री हो, ताकि वह अपने आगे के जीवन में सफलतापूर्वक आगे बढ़ सकें। यही कारण है कि बच्चों की शिक्षा की उत्तम व्यवस्था की गई है।मदरसा हमीदिया कंप्यूटर लैब एवं आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस है। मदरसा की देखभाल करने वाले उस्ताद(अध्यापक) काफ़ी कुशल हैं, और प्रबंध समिति ने जिस प्रकार इस मदरसे को सुंदर एवं आधुनिक बनाया है वह अपने आप में एक मिसाल है।

यतीम खाना से नाम बदलकर आग़ोशे हमीदिया क्यों पड़ा इस संबंध में मुफ्ती मुहम्मद दाऊद फ़ारूक़ी ने बताया कि इसका नाम यतीम खाना था अर्थात अनाथालय था, तो कोई यहां अपने बच्चों को पढ़ाना पसंद नहीं करता था। यहां मदरसा भी था लेकिन कोई अभिभावक अपने बच्चों को यहां इसलिए नहीं भेजते थे कि लोग समझेंगे कि उनका बच्चा अनाथालय में शिक्षा ग्रहण कर रहा है। कुछ अनाथ बच्चे भी मदरसे में रहते थे। लेकिन जब से इस यतीमखाने का आधुनिकीकरण किया गया है इसका नाम यतीम खाना घासीकटरा से बदलकर आग़ोशे हमीदिया रखा गया है। तब से बड़ी संख्या में छात्र यहां शिक्षा ग्रहण करने आ रहे हैं। अब अभिभावकों के दिलों में जो असमंजस की स्थिति थी कि यतीम खाने में बच्चों को किस तरह शिक्षा के लिए भेजे वह असमंजस की स्थिति अब समाप्त हो चुकी है।

लगभग 60 बच्चे तो वह है जो आग़ोशे हमीदिया ( पुराना नाम यतीम खाना) में रहते हैं। जिनकी शिक्षा एवं खानपान का इंतजाम प्रबंध समिति के द्वारा किया जाता है। इसके अतिरिक्त आसपास के मोहल्ले के वह छात्र जो दिन में कॉन्वेंट स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करते हैं। शाम को आग़ोशे हमीदिया के मदरसे में अरबी और दैनिक शिक्षा भी ग्रहण करने के लिए आते हैं।

स्कूल के वार्षिकोत्सव में बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा बिखेरी

खजनी गोरखपुर।कस्बे में स्थित केपी मेमोरियल इंटरकॉलेज में 26 वें वार्षिकोत्सव का आयोजन धूमधाम से किया गया जिसमें बच्चों ने गीत, नृत्य, नाटक आदि दर्जनों की संख्या में रंगारंग मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि शैलेश मणि त्रिपाठी मोबाइल बाबा ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि अपने माता-पिता और गुरुजनों की बात मानें तथा अपनी रूचि के अनुसार क्षेत्र का चयन करते हुए मनोयोग से परिश्रम करें तो निश्चित ही सफलता मिलेगी।

विशिष्ट अतिथि डाॅक्टर प्रियंका तिवारी ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। आयोजन को नवीन श्रीवास्तव, आप पार्टी के जिलाध्यक्ष विजय कुमार श्रीवास्तव, सच्चिदानंद पांडेय आदि ने भी संबोधित किया, इससे पूर्व इंटरकॉलेज के डायरेक्टर प्रदीप तिवारी प्रबंधक कंचन तिवारी ने मां सरस्वती की पूजा और धूप, दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की संचालन गुलाब तिवारी और देवप्रताप पांडेय ने किया। इस दौरान सभी अतिथियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। विद्यालय में आयोजित सामान्य ज्ञान परीक्षा में उत्तीर्ण 50 विद्यार्थियों को पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इस दौरान निवर्तमान भाजपा मंडल अध्यक्ष धरणीधर राम त्रिपाठी, नरेन्द्र पांडेय, गिरीश उपाध्याय, लवकुश पांडेय

के.पी. गौंड़, अभिषेक, रीता श्रीवास्तव, निशा श्रीवास्तव,

आरके पांडेय, सेजल, बबिता, डीके शर्मा, दिलीप कुमार स्कूल के सभी शिक्षक शिक्षिकाओं समेत बड़ी संख्या में अभिभावक और विद्यार्थी मौजूद रहे।

राष्ट्रीय व्याख्यान श्रृंखला का पंचम दिवस सफलतापूर्वक सम्पन्न

गोरखपुर।भारतीय संस्कृति अभिरूचि पाठ्यक्रम के अन्तर्गत 16 फरवरी, 2025 को आयोजित राष्ट्रीय व्याख्यान श्रृंखला का पंचम दिवस सफलतापूर्वक सम्पन्न ।

राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर (संस्कृति विभाग, उ0प्र0) द्वारा रविवार को भारतीय संस्कृति अभिरूचि पाठ्यक्रम के अन्तर्गत सात दिवसीय राष्ट्रीय व्याख्यान श्रृंखला का पंचम दिवस सम्पन्न हुआ।

जिसका शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। व्याख्यान श्रृंखला में आज विषय ‘‘दुनिया को रोशन करता बौद्ध धम्म‘‘ एवं ‘‘बुद्ध के आर्थिक सिद्धान्त‘‘ रहा। जिसके मुख्य वक्ता एवं विषय विशेषज्ञ आचार्य (डाॅ0) राजेश चन्द्रा रहे। आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर डाॅ0 सुजाता गौतम, प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी द्वारा की गई। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर रामनरेश चौधरी, पूर्व संकाय अध्यक्ष, विधि संकाय, गोरखपुर विश्वविद्यालय एवं डाॅ0 योगश प्रताप सिंह, उप निदेशक, अशफाक उल्ला खाॅं प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) गोरखपुर की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती रीता श्रीवास्तव, दूरदर्शन एवं आकाशवाणी कलाकार, गोरखपुर द्वारा किया गया।

प्रथम सत्र के विषय विशेषज्ञ डाॅ0 राजेश चन्द्रा ने ‘‘दुनिया को रौशन करता बुद्ध धम्म‘‘ पर विस्तारपूर्वक अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पालि ग्रन्थों में बुद्ध को आदित्यबन्धु, आदित्यवंशी कहा गया है। आदित्य अर्थात सूर्य।

बुद्ध और उनका धम्म सूर्य की तरह है, सारी दुनिया के लिए, न केवल मुनष्यमात्र के लिए बल्कि प्राणिमात्र के लिए, बुद्ध धम्म सूर्य है। सूर्य नष्ट नहीं होता, एक जगह वह अस्त होता दिखता है, ठीक उसी समय वह कहीं उदय हो रहा होता है। लोग कहते हैं कि बुद्ध धम्म भारत से नष्ट हो गया। यह कथन त्रुटिपूर्ण है। बुद्ध धम्म भारत से नष्ट नहीं हुआ, बल्कि सूरज की तरह अस्त हुआ, लेकिन उसी समय उसका श्रीलंका, थाईलैण्ड, म्यानमार आदि दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में उदय भी हुआ। आज दुनिया की दो तिहाई आबादी बौद्ध है। मैक्स मूलर तो यहाँ तक कहते हैं कि ईसाई लोग अपनी संख्या ज्यादा दर्शाने को लिए बौद्धों की संख्या कम करके बताते हैं, जबकि दुनिया में सर्वाधिक संख्या बौद्धों की है।

पश्चिमी देशों में आज बुद्ध धम्म को फास्टेस्ट ग्रोइंग रिलीजन, सबसे तेज बढ़ता हुआ धर्म कहा जा रहा है। समाजशास्त्रियों का अनुमान है कि जिस तेजी से बुद्ध धम्म फैल रहा है, वर्ष 2050 तक आधा युरोप बौद्ध हो जाएगा। अमेरिका के बर्कले शहर को बुद्धिस्ट कैपिटल ऑफ अमेरिका कहा जाता है। अद्यतन आंकड़े बता रहे हैं कि अमेरिका में बौद्धों के सभी निकायों को मिला कर लगभग 500 बुद्ध विहार हैं, फ्रांस में 200, जर्मनी में 600, कनाडा में 500, इंग्लैण्ड में 190, आस्ट्रेलिया में 200, रूस में 40, चीन में 34,000, जापान में 77,000, थाईलैण्ड में 42,626, दक्षिण कोरिया में 20,000 बुद्ध विहार हैं। आप इसी से अनुमान लगा सकते हैं कि बु्द्ध धम्म दुनिया की कितनी समृद्ध विरासत है।

भारत में तो अधिकांश लोग बुद्ध धम्म को जातीय नजरिये से देखते हैं लेकिन वैश्विक स्तर पर विख्यात व्यक्तित्व बुद्ध धम्म में दीक्षा ले रहे हैं। हाॅलीवुड के फिल्म स्टार रिचर्ड गेरे, हैरीसन फोर्ड, ओरलैण्डो ब्लूम, कोनू रीव्स, उमा थुरमैन जैसे विख्यात व्यक्तियों ने बुद्ध धम्म की दीक्षा ले ली है। फिल्म निर्माता ओलीवर स्टोन, पाॅप गायिका टीना टर्नर, पाॅप गायक एडम आउच, जाॅज संगीतज्ञ हरबी हैनकाॅक, गोल्फ चैम्पियन टाइगर वुड्स, सासर खिलाड़ी रोबर्टो बैग्गियो, एनबीए कोच फिल जैक्सन, कार्ड निर्माता कम्पनी फोर्ड के वर्तमान चेयरमैन विलियम फोर्ड जूनियर इन सब लोगों ने घोषित रूप से बौद्ध धर्म की दीक्षा ले ली है। बुद्ध धम्म की लोकप्रियता का अंदाजा लगा सकते हैं कि स्वीडेन के एक स्कूल में प्रश्नतालिका दे कर छात्रों से एक प्रश्न यह भी पूछा गया कि यदि आप को अपना धर्म चुनने की स्वत्रंतता हो तो आप कौन-सा धर्म चुनना चाहेंगे? 70 प्रतिशत छात्रों ने अपना विकल्प बुद्ध धम्म दिया। भारत को गर्व होना चाहिये कि हम बुद्ध के देश हैं।

दूसरे सत्र में भी डाॅ0 राजेश चन्द्रा ने ही ‘‘बुद्ध के आर्थिक सिद्धान्त‘‘ विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि गौतम बुद्ध की देशनाओं के प्रति आम धारणा यह है कि वे सिर्फ शील, समाधि, प्रज्ञा, मैत्री, करुणा, दया, अहिंसा, दान, ध्यान का उपदेश देते हैं, जबकि वे आर्थिक सिद्धांतों के प्रति कितने सुस्पष्ट हैं, यह जानना भी रोचक एवं हितकर होगा, विशेषकर तब जब दुनिया बार-बार आर्थिक मंदी की चपेट में आ रही है।

मृगदायवन, सारनाथ में अपने प्रथम धम्मोपदेश में भगवान बुद्ध चार आर्य सत्यों का उपदेश करते हैं- दुःख, दुःख का कारण, दुःख का निवारण, और निवारण का मार्ग। दुःख निवारक के मार्ग के रूप में वे आठ अंग बताते हैं, जिन्हें आर्य अष्टांग मार्ग कहा जाता है। उन आठ अंगों में एक अंग है- सम्यक आजीविका। दुःख निवारण के आठ उपायों में ‘सम्यक आजीविका‘ को समाहित करके रखना सबसे बड़ा प्रमाण है कि बुद्ध आजीविका को लेकर कितने गम्भीर हैं।

आजीविकाविहीन व्यक्ति, परिवार, समाज या देश सुखी नहीं हो सकता। आजीविका सम्पन्न व्यक्ति, परिवार, समाज या देश भी सुखी नहीं हो सकता, यदि आजीविका सम्यक नहीं है। बुद्ध सुस्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं कि चोरी, छीना-झपटी, व्यभिचार, हथियार व मादक पदार्थों के क्रय-विक्रय तथा जुए से अर्जित आजीविका असम्यक है। ईमानदारी व श्रम से तथा कुशल साधनों से अर्जित सम्पत्ति ही ‘सम्यक आजीविका‘ है। सम्यक आजीविका ही सुख के आठ उपायों में से एक है।

अपने नवदीक्षित शिष्यों- कौण्डिन्य, वप्प, भद्दीय, अस्सजि, महानाम को चारों दिशाओं में चारिका के लिए भेजते समय बुद्ध के प्रसिद्ध वचन हैं- चरथ भिक्खवे चारिकं बहुजनहिताय बहुजन सुखाय लोकानुकम्पाय अथ्थाय, यानि हे भिक्खुओं, तुम बहुजनों के हित के लिए, बहुजनों के सुख के लिए, लोक पर अनुकम्पा करने के लिए और उनके अर्थ के लिए चारिका करो। ‘अथ्थाय‘ शब्द ध्यान देने लायक है। वे अपने भिक्खुओं को ऐसा धर्मोपदेश देने के लिए निर्देशित कर रहे हैं, जो बहुजनो के लिए न केवल सुखकर, हितकर है, उन पर अनुकम्पनीय हो, बल्कि उनकी अर्थ वृद्धि में भी सहायक हो, इसलिए कहा है ‘अथ्थाय‘ अर्थात अर्थ के लिए, क्योंकि अर्थविहीन व्यक्ति, परिवार, समाज, देश सुखी नहीं हो सकता...

पुनः श्रावस्ती में महामंगल सुत्त के संगायन में भगवान बुद्ध मनुष्य के मंगल के अड़तीस उपाय बताते हैं। उन अड़तीस उपायों में आठवां और दसवां उपाय है- शिल्प सीखना, सुशिक्षित होना। जिनके हाथ में शिल्प नहीं, कौशल नहीं, हुनर नहीं, और जो सुशिक्षित नहीं, वह आजीविका सम्पन्न भी नहीं हो सकता। दुनिया के जितने भी समृद्ध देश हैं, वे अपनी शिक्षा व्यवस्था में शिल्प अर्थात कौशल, विशेषकर तकनीकी कौशल (टेक्निकल स्किल) पर सर्वाधिक जोर देते हैं। देश के संविधान शिल्पी डॉ. बी. आर. अम्बेडकर का सर्वाधिक बल शिक्षा पर था। उनका प्रधान कथन था- शिक्षित बनो।

श्रावस्ती में ही पराभव सुत्त के संगायन में भगवान बुद्ध ने अर्जित सम्पत्ति के नाश के कारणों में एक कारण यह भी बताया है कि लोभी, लालची, फिजूल खर्चीले व्यक्ति को सम्पत्ति का स्वामी बनाने से पतन होता है। पर्याप्त सम्पत्ति होने पर भी दान का स्वभाव न होने से भी सम्पत्ति का नाश होता है। वैशाली के रतन सुत्त के संगायन के समय भगवान बुद्ध कहते हैं कि कलछी भर भात के दान से मैंने किसी को दरिद्र होते नहीं देखा लेकिन कलछी भर भात के दान के पुण्यफल के रूप में मैंने दरिद्रों को सम्राट होते देखा है। सांसारिक और पारमार्थिक जगत के गणित बड़े विपरीत हैं। सांसारिक गणित कहता है कि देने से घटता है, जबकि बुद्ध का पारमार्थिक गणित कहता है कि न देने से घटता है, देने से बढ़ता है। वैशाली में ही वज्जिगणराज्य को उन्नति के सात नियमों में भगवान बुद्ध एक नियम सुपात्रों को दान-मान-आश्रम देने को भी उपदेशित करते हैं कि इसके अनुपालन से उन्नति होती है।

राजगृह में सीगाल नामक युवक को सम्पत्ति अर्जित करने का महत्वपूर्ण उपाय का उपदेश करते हुए बुद्ध कहते हैं कि सम्पत्ति मधुमक्खी की तरह क्रमशः अर्जित करनी चाहिए, ऐसी सम्पत्ति चिरस्थायी होती है।

ये नियम उन लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अनुस्मारक है, रिमाइण्डर हैं, जो शेयर, लॉटरी, सट्टा, जुआ इत्यादि के द्वारा रातों-रात अमीर बनने का प्रयास करते हैं। ऐसे साधनों से अर्जित सम्पत्ति का आकस्मिक क्षय भी होता है। शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव के साथ बढ़ती हुई हत्याओं-आत्महत्याओं की घटनाओं की भी इसी आलोक में देखे जाने की जरूरत है। दुनिया की आर्थिक मंदी का सर्वाधिक प्रभाव शेयर बाजार, सेंसेक्स, सट्टे पर ही पड़ता है, जबकि क्रमशः सम्पत्ति अर्जित करने वाले व्यक्ति, समाज, संस्थान, देश मंदी से अधिक प्रभावित नहीं होते।

कौशल नरेश प्रसेनजित भगवान बुद्ध से अपने राज्य में अपराध रोकने के उपाय पूछते हैं। कौशल जनपद में ही अंगुलिमाल नामक दुर्दान्त हत्यारा भी था। भगवान राजा प्रसेनजित को उपदेशित करते हैं कि युवकों को शिल्प आदि कलाएं सिखा कर उन्हें रोजगार दें। आज भी अपराधों का मुख्य कारण शिक्षित बेरोजगार युवक हैं। कर्करपत्र नामक कोलियों के निगम में दीघजाणु नामक युवक को व्यग्घपज्ज सुत्त का संगायन करते हुए भगवान बुद्ध सम्पत्ति संवर्धन के चार उपाय बताते हैं- उत्थानपाद सम्पदा, आरक्षसम्पदा, समजीविता, कल्याणमित्रता।

भगवान बुद्ध युवक दीघजाणु को एक ऐसे तालाब की उपमा बताते हैं, जिसमें पानी आने के चार मार्ग हैं और पानी बहने के चार मार्ग हैं। पानी आने के मार्ग आय के साधन के रूप में हैं। पानी बहने के मार्ग व्यय के रूप में हैं। सम्पत्ति अपव्यय के कारणों में भगवान मुख्य कारण मदिरापान, परस्त्रीगमन, अकुशल मित्रों की संगति, अत्यधिक मनोरंजन में लिप्तता इत्यादि बताते हैं।

अपव्यय के मार्गों को रोकना तालाब से पानी बाहर जाने के मार्गों को रोकने के समान है और आय के सम्यक उपायों पर प्रयास करना उत्थानपाद सम्पदा का संरक्षण है। इन उपायों से सम्पत्ति क्रमशः बढ़ती है, जो पीढ़ियों तक भरण-पोषण का कारण बनती है। समजीविता के अंग में भगवान बुद्ध दो कीमती बातें बताते हैं- एक, व्यय आय से अधिक नहीं होनी चाहिए। दूसरा, अर्जित सम्पत्ति के चार हिस्से करने चाहिए। दो हिस्से, अपने व परिवार के भरण-पोषण के लिए उपयोग करना चाहिए, जिसमें से अल्पांश दान के लिए अनिवार्यतः उपयोग करना चाहिए। शेष दो हिस्सों में से एक हिस्सा अपने व्यवसाय में पुनर्निवेश करना चाहिए और चैथा हिस्सा आकस्मिक आवश्यकताओं, दुर्दिनों के लिए बचा कर रखना चाहिए।

अर्थ प्रबंधन के बुद्ध के इन सिद्धांतों के आलोक में अमेरिका एवं यूरोपीय देशों की मंदी को देखे जाने की जरूरत है। स्टैण्डर्ड एन्ड यूजर्स संस्था द्वारा अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग डाउन करने के उपरान्त उजागर हो पाया है कि अमेरिका आय से अधिक खर्च करता है, इसीलिए ऋणग्रषित है। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा सार्वजनिक रूप से भारत व चीन को उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति स्वीकार रहे हैं और अमेरिका का प्रबल प्रतिद्वंदी मान रहे हैं। कहने की आवश्यकता नहीं भारत बुद्ध की भूमि है और चीन की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि बुद्ध का धम्म है। इतिहास गवाह है कि जिस कालखंड में भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था, वह काल बुद्ध का है।

भारत के प्रज्ञावान संविधान निर्माता ने स्वतंत्र भारत को पुनः बौद्ध प्रतीक दिये हैं- तिरंगे झण्डे के मध्य में बुद्ध का धम्म चक्र है, भारत की राजमुद्रा पर अशोक स्तम्भ चिन्हित है, जो कि बौद्ध प्रतीक है और महामहिम राष्ट्रपति के सिंहासन के ऊपर बुद्ध का सिद्धांत अंकित है, धम्मचक्र पवत्तनाय। आर्थिक मंदी का शेयर बाजार, स्टॉक एक्सचेंज, सेंसेक्स पर जो भी प्रभाव पड़े, लेकिन भारत की आधारभूत अर्थव्यवस्था अप्रभावित रहनी है और ग्रामीणजन इस बयार से अछूते रहते हैं, क्योंकि भारत के मूल्यों में बुद्ध के सिद्धांत व्याप्त है। वैश्विक आर्थिक मंदी की पृष्ठभूमि में ही भारत के फिर से सोने की चिड़िया बनने की भूमिका भी निहित है।

आज के व्याख्यान के मुख्य वक्ताओं को संग्रहालय की ओर से सिंदूर पौधा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया गया। साथ ही कार्यक्रम की सफलता के लिए डाॅ0 यशवन्त सिंह राठौर संग्रहालय उप निदेशक ने सभी प्रतिभागियों, अभिभावकों, मीडिया बन्धुओं को धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

दिनांक 17 फरवरी, 2025 दिन सोमवार को प्रथम सत्र में ‘‘मथुरा की बौद्ध कला‘‘ विषय पर प्रोफेसर (डाॅ0) सुजाता गौतम, प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, बी0एच0यू0, वाराणसी का व्याख्यान तथा दूसरे सत्र में ‘‘पुरातात्विक साक्ष्यों के परिपेक्ष्य में संस्कृति और सभ्यता‘‘ विषय पर डाॅ0 अनिल कुमार वाजपेयी, प्राचार्य, अमरनाथ गल्र्स डिग्री कालेज, मथुरा, उ0प्र0 का होगा।

पीएम मोदी का हर क्षण गाँव व गरीबों के कल्याण को समर्पित: स्वतन्त्र देव सिंह


गोरखपुर, प्रदेश के जल शक्ति मन्त्री व भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वतन्त्र देव सिंह 2025-26 के लिये प्रस्तुत केन्द्रीय बजट की खूबियों को लेकर सर्किट हाउस के सभागार में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हर क्षण गाँव और गरीबों के कल्याण के लिये समर्पित रहा है। इसी नाते इस बार का केन्द्रीय बजट मध्यम वर्ग, महिला, युवा व किसानों के लिए कारगर साबित होने वाला है। यह कहना अतिश्योक्ति नही होगा की इस बार का केन्द्रीय बजट समाज के सभी वर्गों के लिये वरदान है।

सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता और एनेक्सी भवन में संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए जल शक्ति मन्त्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली केन्द्र की सरकार द्वारा हर क्षेत्र में किये गये उपलब्धि भरे कार्य की चर्चा करते हुए कहा कि बजट में करदाताओं को राहत प्रदान किया गया है 12 लाख रुपये तक की आय कर-मुक्त करके सरकार ने मध्यम वर्ग के हित मे ऐतिहासिक काम किया है।

इसी तरह केन्द्र सरकार ने किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सीमा 03 लाख से 5 लाख रुपये कर दिया जो किसानों के लिए कारागर साबित होगा।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का विस्तार किया गया है वही ग्राम सड़क योजना के लिए बजट बढ़ाया गया है।

MSME सेक्टर में सस्ते लोन की व्यवस्था करके सरकार ने युवावों के लिए रोजगार के द्वार खोले हैं

वहीं महिला उद्यमियों को सस्ते ऋण की सुविधा उपलब्ध कराकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार ने विशेष कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि पहले की गैर भाजपा सरकारें हर योजना तुष्टिकरण को आधार बनाकर बनाती थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्राथमिकता किसी का तुष्टिकरण नही सभी का संतुष्टिकरण रही है। कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारा देश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है और विकसित भारत के संकल्प को साकार कर रहा है।

एनेक्सी भवन में आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानन्द राय ने कहा कि केन्द्रीय बजट विकास को बढ़ावा देने वाला है यह बजट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के विराट संकल्प को पूरा करने के लिये एक मजबूत नींव का निर्माण करेगा।

अतिथियों व आगंतुकों का स्वागत जिलाध्यक्ष युधिष्ठिर सिंह ने किया, संचालन महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने किया। इस अवसर पर विधायक फतेहबहादुर सिंह, विधायक बिपिन सिंह, विधायक प्रदीप शुक्ला, क्षेत्रीय कोषाध्यक्ष पुष्पदंत जैन, उपाध्यक्ष विश्वजितांशु सिंह आसू, क्षेत्रीय मन्त्री जनार्दन तिवारी, क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी डॉ बच्चा पाण्डेय नवीन, क्षेत्रीय सह मीडिया प्रभारी राहुल तिवारी, जिला उपाध्यक्ष मनोज कुमार शुक्ला, महानगर महामंत्री अच्युतानन्द शाही, जिला मीडिया प्रभारी के एम मझवार, महानगर मीडिया प्रभारी चंदन आर्या प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई घटना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण एवं दुःखद

-- पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में जल शक्ति मन्त्री ने कहा कि नयी दिल्ली स्टेशन पर हुई हृदय विदारक घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं दुःखद है मेरी संवेदना उन सभी परिवारों के साथ है जिन्होंने इस हादसे में अपने परिजनों को खोया है। इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए शासन प्रसाशन हर स्तर पर प्रयास कर रहा है इसकी पुनरावृत्ति न हो इसके लिए भी कोशिश जारी है।

*लिंक एक्सप्रेस-वे पर हुए हादसे में 2 बाइक सवारों की मौत*

अल सुबह हुए हादसे की हर तरफ चर्चा

खजनी गोरखपुर।।

आज 16 फरवरी 2025 रविवार को समय करीब प्रातः 5:30 बजे निर्माणाधीन एक्सप्रेस-वे पर भगवानपुर गोरखपुर टोल प्लाजा से लगभग 200 मीटर पहले प्रयागराज महाकुंभ से लौट रहे अर्टिगा यूपी 56 एएल 6034 तथा प्रयाग महाकुंभ जा रही मारुति नेक्साॅन यूपी 53 ईडी 8415 तेज गति से आमने-सामने टकरा गई तभी मारूति नेक्सान के पीछे तेजी से आ रही बाइक यूपी 53 ईसी 7704 तेजी से आर्टिका से टकरा गई। बाइक सवार दो व्यक्ति अवधेश पुत्र कमला सिंह निवासी राजबारी थाना पीपीगंज गोरखपुर 48 वर्ष और धनेश जायसवाल पुत्र विशेसर जायसवाल निवासी जसवल थाना पीपीगंज गोरखपुर 45 वर्ष गंभीर रूप से घायल हो गए वहीं आर्टिगा में सवार 7 लोगों में 3 महिलाएं घायल हो गईं। मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी को इलाज हेतु एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा। जिला अस्पताल में बाइक सवार दो व्यक्तियों की मौत हो गई। आर्टिका में सवार दोनों महिलाओं का दवा उपचार चल रहा है। जबकि मारूति नेक्साॅन गाड़ी में सवार कोई भी घायल नहीं हुआ। थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर अर्चना सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने बाइक सवार मृतक के बारे में पीपीगंज थाने सूचित कर दिया तथा मौके पर शांति व्यवस्था बनाते हुए आवश्यक विधिक कार्रवाई में जुट गई है। वहीं रविवार को अवकाश का दिन होने से अल सुबह हुए इस दर्दनाक हादसे की हर तरफ चर्चा हो रही है।

*खेलकूद सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रम हुआ आयोजित*

खजनी गोरखपुर।।दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के हीरक जयंती कार्यक्रम के तत्वाधान में ब्लॉक खजनी के नोडल केंद्र वीर बहादुर सिंह पीजी कॉलेज हरनहीं महुराव गोरखपुर में खेलकूद एवं साहित्यिक सांस्कृतिक कार्यक्रम का समापन हुआ। तथा विजेता टीम को जिले के प्रतियोगिता में समागम करने हेतु अंतिम चयन कर लिया गया। जिसमें एथलीट में बालिका वर्ग दौड़ 100 मीटर में प्रथम ज्योति, द्वितीय मैना ,तृतीय स्थान शिवांगी ,200 मीटर में ज्योति, माधुरी और मैना, 400 मीटर में ज्योति अंजलि खुशी सिंह रही।

बालक वर्ग में 100 मीटर में यशपाल यादव प्रथम ,अमित कुमार द्वितीय, धीरेंद्र कुमार तृतीय, 200 मीटर में यशपाल यादव प्रथम ,शैलेश यादव द्वितीय, विकास यादव तृतीय,

400 मी धीरेंद्र यादव सतीश चौरसिया तृतीय , द्वितीय विकास यादव तृतीय स्थान प्राप्त किया ।

बालिका यूजी कबड्डी टीम बालक कबड्डी टीम तथा जूनियर सेंट एनेस पब्लिक स्कूल हरनही बालक कबड्डी टीम तथा रंगोली प्रतियोगिता प्रथम द्वितीय एवं तृतीय गायन प्रतियोगिता में वंदना प्रथम गौरी त्रिपाठी द्वितीय लम्बी कूद ऊंची कूद रस्सा कस्सी में बालक एवम् बालिका वर्ग का चयन किया गया पूरे कार्यक्रम में यशपाल तथा ज्योति सर्वश्रेष्ठ रहे। मौके पर विविध प्रतियोगिताओं का परिणाम घोषित किया गया तथा जिला प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु प्रतिभागियों को चयनित किया गया।

संचालन डॉक्टर इंद्रजीत सिंह लीडर युसूफ आजाद ने किया।

आयोजन में प्राचार्य डा. के.पी. चौरसिया अंशुमाली द्विवेदी , डॉ.निलाम्बुज सिंह डॉ. पुष्पा पांडे श्रीनारायण त्रिपाठी राजन अरुण कुमार नायक अभिमन्यु पुष्पा मिश्रा ऱोली सिंह अरुण सिंह सौम्या नसीमा बानो पीजी कॉलेज के विद्यार्थी एवं सहभाग कर रहे छात्र/छात्रा मौजूद रहे।

*पिता से बड़ी नहीं हो सकती संतान-ब्रह्मांश दास ब्रह्मचारी*

भागवत कथा में पहुंचे हनुमान गढ़ी के महंत ज्ञानदास

खजनी गोरखपुर।।यजुर्वेद के बृहदारण्यक उपनिषद में 'अहं ब्रह्मास्मि' महावाक्य का उल्लेख मिलता है। जिसका अर्थ होता है 'मैं ब्रह्म हूं' किंतु सृष्टि का हर जीव या मनुष्य ब्रह्म नहीं हो सकता, जैसे कोई संतान कितनी भी योग्य हो जाए किन्तु वह अपने पिता से बड़ी नहीं हो सकती। ठीक उसी तरह से जगत्पिता पूरी सृष्टि के रचयिता हैं, कोई भी साधारण जीव ईश्वर का रूप नहीं हो सकता है।

उक्त विचार खजनी कस्बे के पास स्थित रूद्रपुर गांव में चल रही कथा के दूसरे दिन व्यास पीठ से हनुमान गढ़ी अयोध्या से पधारे कथाव्यास पंडित ब्रह्मांश दास ब्रह्मचारी ने श्रद्धालु श्रोताओं के समक्ष व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार संसार में माता पिता के संकल्प लेने पर उनके पारस्परिक संपर्क से संतान की उत्पत्ति होती है। उस संतान में अपने माता-पिता के गुण होते हैं लेकिन संतानें अपने माता-पिता से बड़ी नहीं होती हैं। उसी प्रकार भगवान विष्णु की कमलनाभि से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति और ब्रह्मा जी के संकल्प से सृष्टि की रचना का वर्णन वेदों में मिलता है। उन्होंने कहा कि 'ईश्वर अंश जीव अविनाशी' सत्य है किन्तु जीव ही ईश्वर है ऐसा नहीं है। इस दौरान उन्होंने श्रीमद्भागवत भागवत महापुराण के गौकर्ण और धुंधकारी की कथा का विस्तार सहित वर्णन किया।

कथा में अयोध्या हनुमान गढ़ी के महंत ज्ञानदास और उनके उत्तराधिकारी संजय दास भी उपस्थित हुए। इससे पूर्व महंत ज्ञानदास के आगमन पर उनकी भव्य आगवानी की गई। महंत ज्ञानदास के साथ प्रशासनिक स्काॅर्ट सुरक्षा व्यवस्था में लगा रहा। उन्होंने खजनी कस्बे में स्थित भारत केसरी पहलवान स्वर्गीय चंद्र प्रकाश उर्फ गामा मिश्र की प्रतिमा पर माल्यार्पण पुष्पार्चन करते हुए श्रद्धांजलि दी तथा सायंकाल मंच पर उपस्थित हो कर अपने शिष्य एवं सभी श्रद्धालु श्रोताओं को आशीर्वाद दिया। कथा में मुख्य यजमान प्रेम शंकर मिश्र एवं पूर्व ग्रामप्रधान असमावती मिश्रा, श्रीप्रकाश मिश्र, संजय मिश्र सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे।

माउंट हेरा इंटरनेशनल एकेडमी द्वारा तीन से दस वर्ष के आयु के बीच छात्रों का फैंसी ड्रेस कंपटीशन का हुआ आयोजित

गोरखपुर। माउंट हेरा इंटरनेशनल एकेडमी के सौजन्य से इस्लामिया कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स बक्शीपुर गोरखपुर के ऑडिटोरियम में आज तीन से दस वर्ष के आयु के बीच छात्रों का एक फैंसी ड्रेस कंपटीशन आयोजित किया गया। जिसमें महानगर के विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने रंग बिरंगी पोजीसन और मनमोहक वेशभूषा में ड्रेस पहन कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

3 से 5 वर्ष की आयु में होने वाले फैंसी ड्रेस कंपटीशन में अफीफा ने प्रथम स्थान दक्ष ने द्वितीय और एलिशबा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। 6 से 8 आयु वर्ग में हुजैफा ने प्रथम स्थान अनंत ने दृष्टि स्थान और अमर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया जबकि 9 वर्ष से 10 वर्ष की आयु में होने वाले फैंसी ड्रेस कंपटीशन में अलीशा ने प्रथम स्थान अन्य ने द्वितीय स्थान और अनुश्री और रोशन तृतीय स्थान पर रहे।

इसी क्रम में बच्चों का फेयरवेल भी रखा गया जिसमें प्रश्नोत्तरी, रैंप वॉक , रैपिड फायर और विभिन्न मनोरंजक कार्यक्रमों के द्वारा बच्चों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।

उर्दू के मशहूर शायरों का कलाम पढ़कर बच्चों तमसीली मुशायरे में बांधा समा....

गोरखपुर के इस तमसीली मुशायरे ने एक नया इतिहास रचा है ... महबूब सईद "हारिस"

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के साहित्यिक इतिहास में पहली बार तमसीली मुशायरे का सफल आयोजन, साजिद अली मेमोरियल कमेटी और हामिद अली एजुकेशनल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

एम.एस.आई इण्टर कॉलेज के ऑडिटोरियम में आयोजित तमसीली मुशायरे में महानगर के विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने उर्दू के मशहूर शायरों का कलाम अपने अंदाज बेहतरीन अंदाज़ में पेश किया ।

कार्यक्रम का शुभारंभ मदरसा आग़ोशे हमीदिया के छात्र मोहम्मद हाशिम ने तिलावत कुरान से किया। इसके बाद मोहम्मद नसीम ने नाते पाक पढ़ा।

इस अवसर पर साजिद अली मेमोरियल कमेटी के सेक्रेटरी महबूब सईद हारिस ने कहा कि हमारी यही कोशिश होती है कि एक नई सोच के साथ उर्दू जबान को नई नस्लों तक पहुंचने का काम किया जाए और आज का यह तमसीली मुशायरा उसी सोच का एक नतीजा है। उन्होंने कहा कि उर्दू मोहब्बत और अम्न की ज़ुबान है। उर्दू ज़ुबान ने हमेशा दिलों को जोड़ ने का काम किया है। हमारी यह कोशिश रहती है कि नई नस्ल को उर्दू ज़ुबान से रुबरु कराया जाए। मुझे उम्मीद है आज का यह अज़ीमुश्शान तमसीली मुशायरा एक नया इतिहास रचा है

अंतर्राष्ट्रीय नाज़िमे मुशायरा और शायर डॉ.कलीम क़ैसर ने मुशायरे में आए हुए बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि स्टेज पर जितने भी शायर मौजूद हैं उन्होंने उन सब के साथ कहीं ना कहीं उन्होंने कलाम पढ़ा है। उन्होंने कहा कि इन शायरों के बीच आकर मेरी बहुत सारी यादें ताज़ा हो गई।

तमसीली मुशायरे के आयोजक मुहम्मद फ़र्रुख़ जमाल कहा कि लगभग तीन महीनों की कड़ी मेहनत के बाद बच्चों को आज के इस ऐतिहासिक तमसीली मुशायरे के लिए बच्चों को तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि तमसीली मुशायरा का यह मंच पूर्वांचल के बच्चों के लिए एक सुनहरा मौका था। जहां उन्होंने अपनी बेहतरीन कला का प्रदर्शन किया है।

मोहम्मद अनवर ज़िया ने कहा कि ने कहा कि इस तरह के मुशायरा का आयोजन महाराष्ट्र और मुल्क के दूसरे एक दो शहरों हुआ है। लेकिन जिस प्रकार से गोरखपुर में तमसीली मुशायरा आयोजित किया गया। उसकी मिसाल कहीं और नहीं मिलती।

पूर्वांचल के मशहूर रंगकर्मी ऐहतेशाम सिद्दीकी ने कहा कि बच्चों के प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। बड़े ही सुंदर ढंग से बच्चों ने उर्दू के मशहूर शायरों का कलाम ख़ूबसूरत अंदाज़ में पेश देश किया है।

मुशायरे का आग़ाज़ हुदा सुहेल ने दानिश ग़ज़ल का कलाम पढ़ कर किया। इसी तरह मारिया निसार ने परवीन शाकिर का कलाम, मुहम्मद उस्मान ने साग़र आज़मी का कलाम, रियाज़ अली ने आदिल लखनवी का कलाम, उम्मे हबीबा ने अंजुम रहबर का कलाम, ज़िकरा परवीन ने शबीना अदीब का कलाम, फ़िरदौसिया सलमान ने शाइस्ता सना का कलाम, मुहम्मद कामरान ने इमरान प्रतापगढ़ी का कलाम, ज़िकरा फातिमा ने लता हया का कलाम, मुहम्मद अशअर ने इक़बाल अशअर का कलाम, सय्यद उनैज़ा ने सबा बलरामपुरी का कलाम, मोहम्मद शाहिद ने अल्ताफ ज़िया का कलाम और मोहम्मद आज़म ने ख़ुमार बाराबंकी का कलाम अपनी अपनी आवाज़ में पेश किया।

कार्यक्रम के अंत में मुशायरे में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों में प्रथम पुरस्कार उम्मे हबीबा को जिन्होंने अंजुम रहबर का कलाम पढ़ा था। द्वितीय पुरस्कार मोहम्मद आज़म को जिन्होंने ख़ुमार बाराबंकी का कलाम पढ़ा और तृतीय पुरस्कार मारिया निसार को दिया गया जिन्होंने परवीन शाकिर का कलाम पढ़ा था।

कार्यक्रम में विशेष रूप से, कामिल खान, प्रवीण श्रीवास्तव,आसिफ सईद, मुहम्मद नदीमुल्लाह अब्बासी, ज़फर अहमद खान, डॉ दरख़्शां ताजवर, ज़फर अमीन डक्कू,क़ाज़ी, कलीम उल हक,ख़्वाजा नासिर अली, ग़ुलाम हसन,रहमा सरवत, डॉ सलमा शाहीन,डॉ रूशदा कुदसिया समेत शहर के गणमन और साहित्यिक लोग उपस्थित थे।

*एसएसपी के नेतृत्व में रेलवे स्टेशन का सुरक्षा व्यवस्था का लिया गया जायजा*

गोरखपुर। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर गौरव ग्रोवर के नेतृत्व में गोरखपुर रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था का लिया गया जायजा संबंधित अधिकारियों को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने दिया आवश्यक दिशा निर्देश यात्रियों से एसएसपी ने लिया जानकारी इस दौरान पुलिस अधीक्षक जीआरपी संदीप कुमार पुलिस अधीक्षक नगर अभिनव त्यागी पुलिस अधीक्षक ट्रैफिक संजय कुमार क्षेत्राधिकारी कैंट योगेंद्र कुमार सिंह सहित जीआरपी, आरपीएफ पुलिस सिविल पुलिस रही मौजूद।