*पिता से बड़ी नहीं हो सकती संतान-ब्रह्मांश दास ब्रह्मचारी*
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भागवत कथा में पहुंचे हनुमान गढ़ी के महंत ज्ञानदास
खजनी गोरखपुर।।यजुर्वेद के बृहदारण्यक उपनिषद में 'अहं ब्रह्मास्मि' महावाक्य का उल्लेख मिलता है। जिसका अर्थ होता है 'मैं ब्रह्म हूं' किंतु सृष्टि का हर जीव या मनुष्य ब्रह्म नहीं हो सकता, जैसे कोई संतान कितनी भी योग्य हो जाए किन्तु वह अपने पिता से बड़ी नहीं हो सकती। ठीक उसी तरह से जगत्पिता पूरी सृष्टि के रचयिता हैं, कोई भी साधारण जीव ईश्वर का रूप नहीं हो सकता है।
उक्त विचार खजनी कस्बे के पास स्थित रूद्रपुर गांव में चल रही कथा के दूसरे दिन व्यास पीठ से हनुमान गढ़ी अयोध्या से पधारे कथाव्यास पंडित ब्रह्मांश दास ब्रह्मचारी ने श्रद्धालु श्रोताओं के समक्ष व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार संसार में माता पिता के संकल्प लेने पर उनके पारस्परिक संपर्क से संतान की उत्पत्ति होती है। उस संतान में अपने माता-पिता के गुण होते हैं लेकिन संतानें अपने माता-पिता से बड़ी नहीं होती हैं। उसी प्रकार भगवान विष्णु की कमलनाभि से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति और ब्रह्मा जी के संकल्प से सृष्टि की रचना का वर्णन वेदों में मिलता है। उन्होंने कहा कि 'ईश्वर अंश जीव अविनाशी' सत्य है किन्तु जीव ही ईश्वर है ऐसा नहीं है। इस दौरान उन्होंने श्रीमद्भागवत भागवत महापुराण के गौकर्ण और धुंधकारी की कथा का विस्तार सहित वर्णन किया।
कथा में अयोध्या हनुमान गढ़ी के महंत ज्ञानदास और उनके उत्तराधिकारी संजय दास भी उपस्थित हुए। इससे पूर्व महंत ज्ञानदास के आगमन पर उनकी भव्य आगवानी की गई। महंत ज्ञानदास के साथ प्रशासनिक स्काॅर्ट सुरक्षा व्यवस्था में लगा रहा। उन्होंने खजनी कस्बे में स्थित भारत केसरी पहलवान स्वर्गीय चंद्र प्रकाश उर्फ गामा मिश्र की प्रतिमा पर माल्यार्पण पुष्पार्चन करते हुए श्रद्धांजलि दी तथा सायंकाल मंच पर उपस्थित हो कर अपने शिष्य एवं सभी श्रद्धालु श्रोताओं को आशीर्वाद दिया। कथा में मुख्य यजमान प्रेम शंकर मिश्र एवं पूर्व ग्रामप्रधान असमावती मिश्रा, श्रीप्रकाश मिश्र, संजय मिश्र सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे।
Feb 16 2025, 17:57