*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है आयुष विश्वविद्यालय*
गोरखपुर, 6 फरवरी। चिकित्सा क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक और प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय की ओपीडी का क्रेज बढ़ रहा है। लोग आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी जैसी हानिरहित चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञों के परामर्श और यहां मिल रही मुफ्त दवाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। विश्वविद्यालय का निर्माण फिनिशिंग लेवल पर है और इसके पूर्ण होते ही यहां आईपीडी की सुविधा मिलने लगेगी।
भटहट के पिपरी में 52 एकड़ क्षेत्रफल में निर्माणाधीन महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय का शिलान्यास 28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया था। शिलान्यास के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां आकर कई बार निर्माण कार्य का जायजा ले चुके हैं। अब इसका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। फिनिशिंग से संबंधित जो कुछ कार्य शेष हैं, वह भी जल्द पूर्ण हो जाएंगे। विश्वविद्यालय के औपचारिक उद्घाटन से पूर्व ही ओपीडी की सेवाएं मिल रही हैं।
आयुष विश्वविद्यालय में आयुष ओपीडी का शुभारंभ 15 फरवरी 2023 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। तब से प्रतिदिन यहां आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी की ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीज परामर्श लेते हैं। काय चिकित्सा, शल्य चिकित्सा के विशेषज्ञों के परामर्श के साथ ही मरीजों को पंचकर्म चिकित्सा की भी महत्वपूर्ण सुविधा प्राप्त हो रही है। ओपीडी शुभारंभ के बाद अब तक करीब एक लाख आयुष चिकित्सकों से परामर्श लाभ ले चुके हैं।
आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके सिंह बताते हैं कि आयुष विश्वविद्यालय में आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी विधाओं की पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण औषधियां उपलब्ध हैं जिनका भंडारण व्यवस्थित तरीके से किया जाता है। सभी रोगियों को चिकित्सकों के परामर्श के अनुरूप ये दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। यह ध्यान दिया जाता है कि एक भी रोगी मुफ्त दवा पाने से वंचित न रहे। कुलपति के अनुसार आयुष विश्वविद्यालय में अंतरंग रोगियों की सेवा के लिए भी युद्ध स्तरीय प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही अंतरंग रोगियों को भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिलने लगेगी।
आयुष कॉलेजों का नियमन भी करता है आयुष विश्वविद्यालय
प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय के अस्तित्व में आने से पहले आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, योग, सिद्धा की चिकित्सा पद्धति, जिन्हें समन्वित रूप में आयुष कहा जाता है, के लिए अलग-अलग संस्थाएं रही हैं। पर, सत्र 2021-22 से प्रदेश के सभी राजकीय और निजी आयुष कॉलेजों का नियमन अब आयुष विश्वविद्यालय से ही होता है। वर्तमान सत्र 2024-25 में प्रदेश के 97 आयुष शिक्षण (आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी) के कॉलेज/संस्थान इस विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं।
सृजित होंगे रोजगार के नए अवसर
आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने से आयुष हेल्थ टूरिज्म में रोजगार की संभावनाएं भी सृजित होंगी। इस पर गंभीरता से काम किया गया तो प्रदेश के इस पहले आयुष विश्वविद्यालय के आसपास के गांवों के लोगों को रोजगार के किसी न किसी स्वरूप से जोड़ा जा सकता है। आयुष विश्वविद्यालय के पूर्णतः क्रियाशील होने से किसानों की खुशहाली और नौजवानों के लिए नौकरी-रोजगार का मार्ग भी प्रशस्त होगा। लोग आसपास उगने वाली जड़ी बूटियों का संग्रह कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। किसानों को औषधीय खेती से ज्यादा फायदा मिलेगा। आयुष विश्वविद्यालय व्यापक पैमाने पर रोजगार और सकारात्मक परिवर्तन का कारक बन सकता है।
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Feb 07 2025, 18:28