*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है आयुष विश्वविद्यालय*

गोरखपुर, 6 फरवरी। चिकित्सा क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक और प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय की ओपीडी का क्रेज बढ़ रहा है। लोग आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी जैसी हानिरहित चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञों के परामर्श और यहां मिल रही मुफ्त दवाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। विश्वविद्यालय का निर्माण फिनिशिंग लेवल पर है और इसके पूर्ण होते ही यहां आईपीडी की सुविधा मिलने लगेगी।

भटहट के पिपरी में 52 एकड़ क्षेत्रफल में निर्माणाधीन महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय का शिलान्यास 28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया था। शिलान्यास के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां आकर कई बार निर्माण कार्य का जायजा ले चुके हैं। अब इसका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। फिनिशिंग से संबंधित जो कुछ कार्य शेष हैं, वह भी जल्द पूर्ण हो जाएंगे। विश्वविद्यालय के औपचारिक उद्घाटन से पूर्व ही ओपीडी की सेवाएं मिल रही हैं।

आयुष विश्वविद्यालय में आयुष ओपीडी का शुभारंभ 15 फरवरी 2023 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। तब से प्रतिदिन यहां आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी की ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीज परामर्श लेते हैं। काय चिकित्सा, शल्य चिकित्सा के विशेषज्ञों के परामर्श के साथ ही मरीजों को पंचकर्म चिकित्सा की भी महत्वपूर्ण सुविधा प्राप्त हो रही है। ओपीडी शुभारंभ के बाद अब तक करीब एक लाख आयुष चिकित्सकों से परामर्श लाभ ले चुके हैं।

आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके सिंह बताते हैं कि आयुष विश्वविद्यालय में आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी विधाओं की पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण औषधियां उपलब्ध हैं जिनका भंडारण व्यवस्थित तरीके से किया जाता है। सभी रोगियों को चिकित्सकों के परामर्श के अनुरूप ये दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। यह ध्यान दिया जाता है कि एक भी रोगी मुफ्त दवा पाने से वंचित न रहे। कुलपति के अनुसार आयुष विश्वविद्यालय में अंतरंग रोगियों की सेवा के लिए भी युद्ध स्तरीय प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही अंतरंग रोगियों को भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिलने लगेगी।

आयुष कॉलेजों का नियमन भी करता है आयुष विश्वविद्यालय

प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय के अस्तित्व में आने से पहले आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, योग, सिद्धा की चिकित्सा पद्धति, जिन्हें समन्वित रूप में आयुष कहा जाता है, के लिए अलग-अलग संस्थाएं रही हैं। पर, सत्र 2021-22 से प्रदेश के सभी राजकीय और निजी आयुष कॉलेजों का नियमन अब आयुष विश्वविद्यालय से ही होता है। वर्तमान सत्र 2024-25 में प्रदेश के 97 आयुष शिक्षण (आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी) के कॉलेज/संस्थान इस विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं।

सृजित होंगे रोजगार के नए अवसर

आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने से आयुष हेल्थ टूरिज्म में रोजगार की संभावनाएं भी सृजित होंगी। इस पर गंभीरता से काम किया गया तो प्रदेश के इस पहले आयुष विश्वविद्यालय के आसपास के गांवों के लोगों को रोजगार के किसी न किसी स्वरूप से जोड़ा जा सकता है। आयुष विश्वविद्यालय के पूर्णतः क्रियाशील होने से किसानों की खुशहाली और नौजवानों के लिए नौकरी-रोजगार का मार्ग भी प्रशस्त होगा। लोग आसपास उगने वाली जड़ी बूटियों का संग्रह कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। किसानों को औषधीय खेती से ज्यादा फायदा मिलेगा। आयुष विश्वविद्यालय व्यापक पैमाने पर रोजगार और सकारात्मक परिवर्तन का कारक बन सकता है।

*’मिशन मंझरिया’ से 28 हजार मरीजों को मिली चिकित्सा सुविधा*

गोरखपुर, 6 फरवरी। एक शिक्षण संस्था नियमित पाठ्यक्रमों से शिक्षा के प्रसार के साथ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे लोगों की चिकित्सा सेवा भी कर सकती है, इसका उदाहरण प्रस्तुत किया है महाराणा प्रताप महाविद्यालय (एमपीपीजी कॉलेज) जंगल धूसड़ ने। इस कॉलेज के बीएड विभाग ने मंझरिया गांव को गोद लेकर इस गांव को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुदृढ़ करने के लिए वर्ष 2016 से ‘मिशन मंझरिया’ नामक एक सामाजिक प्रकल्प शुरू किया है। इस मिशन के तहत लगने वाले निशुल्क चिकित्सा शिविर के जरिये अब तक 28 हजार मरीज चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर चुके हैं।

महाराणा प्रताप महाविद्यालय में बीएड विभाग की अध्यक्ष शिप्रा सिंह बताती हैं कि महाविद्यालय के संरक्षक एवं मार्गदर्शक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से मंझरिया गांव में शिक्षा और चिकित्सा से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए ‘मिशन मंझरिया’ की शुरुआत की गई। इस मिशन के तहत गांव के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने की व्यवस्था है तो लोगों को चिकित्सा सुविधा देने के लिए गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय के सहयोग निशुल्क शिविर आयोजित किए जाते हैं। ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की स्मृति में चिकित्सा शिविर सप्ताह में दो दिन बुधवार और गुरुवार को लगाए जाते हैं।

इस गुरुवार को महाराणा प्रताप महाविद्यालय, के बीएड विभाग के अभिगृहित ग्राम मंझरिया में ‘मिशन मंझरिया’ के अंतर्गत फ्री मेडिकल कैम्प लगाया गया। इसमें गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय के चिकित्सक जितेन्द्र कुमार मिश्र ने कैम्प में आये हुए ग्रामीणों की जांच और इलाज किया एवं रोग के अनुसार निशुल्क दवा का वितरण किया। कुल 54 मरीजों को मुफ्त इलाज और दवा की सुविधा प्राप्त हुई। कैम्प में बीएड विभाग के शिक्षक शैलेंद्र सिंह और जितेंद्र प्रजापति के मार्गदर्शन में बीएड चतुर्थ सेमेस्टर के कुल 38 छात्राध्यापक एवं छात्राध्यापिकाओं ने सहयोग किया।

सीआरसी गोरखपुर ने प्रोविडेंस होम जंगल एकला दो में आयोजित किया दिव्यांगजन असेसमेंट और वितरण कैंप

गोरखपुर। सीआरसी गोरखपुर ने प्रोविडेंस होम जंगल एकला नंबर दो में दिव्यांगजन असेसमेंट और वितरण कैंप का आयोजन किया। जिसमें 25 से ज्यादा बौद्धिक दिव्यांग बच्चों को टीएलएम किट प्रदान करने के लिए चिन्हित किया गया तथा 6 सीपी बच्चों को सीपी चेयर प्रदान की गई। इसके अलावा 24 बच्चों का मनोवैज्ञानिक परीक्षण भी किया गया। असेसमेंट कैंप हेतु सीआरसी गोरखपुर से पुनर्वास अधिकारी राजेश कुमार यादव, मंजेश कुमार और अरविंद कुमार पांडे नामित हुए थे।

 जिन्होंने जाकर के बच्चों का असेसमेंट किया तथा उनको उचित उपकरण प्रदान किए जाने हेतु नामित किया। सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेंद्र यादव ने इस कैंप की सफलता पर अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की तथा यह भरोसा दिलाया कि इस होम के दिव्यांगजन बच्चों को यदि अन्य प्रकार के सहायक उपकरण की आवश्यकता होगी तो उनके लिए सीआरसी सुनिश्चित करेगी कि उनको उपकरण मिल सके। इस अवसर पर सीआरसी गोरखपुर के नैदानिक मनोविज्ञान विभाग की दो प्रशिक्षु रूवीनिशा और चंचल त्रिपाठी सहित फादर साजी जोसेफ, निदेशक, पीजीएसएस और आनंद पान्डेय आदि उपस्थित रहे।

धूल प्रदूषण से जानलेवा बने ईंट भट्ठे की एसडीएम से शिकायत

खजनी गोरखपुर।इलाके के नैपुरा गांव के निवासी जयनाथ चौबे ने उप जिलाधिकारी कुंवर सचिन सिंह को प्रार्थनापत्र देकर बताया कि वह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, उनके गांव नैपुरा की ओर जाने वाले संपर्क मार्ग पर बने ईंट भट्ठों के कारण वाहनों के आवागमन से अथवा तेज हवा चलने पर धूल के घने गुबार के कारण लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। प्रार्थनापत्र में बताया गया है कि डीएस मार्का, रमेश मार्का और काका मार्का ईंट भट्ठों पर आने जाने वाले वाहनों तथा नीजी वाहनों के आवागमन से उड़ने वाली धूल के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य प्रभावित हो रहे हैं।

कई लोग प्रदूषण के कारण दमा, एलर्जी और त्वचा रोग के शिकार हो चुके हैं और अपना इलाज करा रहे हैं। मामले में स्थानीय लोगों ने बताया कि हमारे घरों के बाहर,दरवाजें और खिड़कियों पर धूल की मोटी परत जम जाती है। रोज सफाई करने पर भी कोई राहत नहीं मिलती, सुबह धूल साफ करें तो शाम तक फिर वही स्थिति हो जाती है।

मामले में एसडीएम के निर्देश पर जांच के लिए पहुंचे नायब तहसीलदार रामसूरज प्रसाद ने मौके पर पहुंचकर जांच की उन्होंने बताया कि समस्या गंभीर है उनके द्वारा जांच के बाद रिपोर्ट एसडीएम को सौंप दी गई है।

इस संदर्भ में एसडीएम कुंवर सचिन सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ईंट भट्ठे के मालिकों को नोटिस भेज कर उन्हें समस्या के समाधान हेतु बुलाया जाएगा।

सिपाही पिटाई प्रकरण,डॉक्टर पर मेहरबानी,हल्की धारा लगाकर बचा रही पुलिस

गोरखपुर : डॉ. अनुज सरकारी और उनके कर्मचारियों पर पुलिस मेहरबानी दिखा रही है। सिविल कोर्ट ने आदेश दिया तो कोरम पूरा करने के लिए आखिरी दिन हल्की धारा में केस दर्ज कर लिया गया। इसमें डॉक्टर और कर्मचारियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकती है। ये आरोप सिपाही के पिता सेवानिवृत्त दरोगा चंद्रदेव ने लगाए हैं। उन्होंने बताया कि 14 गंभीर धाराओं में केस दर्ज करने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया था।

कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के मंझरिया गंगा निवासी सिपाही पंकज के पिता चंद्रदेव मंगलवार को घर पर उदास बैठे थे। चंद्रदेव पुलिस विभाग में दरोगा पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। पुलिस विभाग में 40 साल की सेवा देने वाले चंद्रदेव बताते हैं कि डॉक्टर का पुलिस पर इतना प्रभाव है कि बेटे और बहू पर अत्याचार किया गया। इसके बाद भी बेटे पर ही केस दर्ज कराकर उसे जेल भिजवा दिया गया। बेटे-बहू के साथ हुई घटना को पुलिस ने दबा दिया।

चंद्रदेव ने बताया कि केस दर्ज कराने के लिए न्यायालय में 17 जनवरी को बहस हुई। इसके बाद 18 जनवरी को कोर्ट की तरफ से न्यायाधीश ने केस दर्ज करने का आदेश दे दिया। फिर भी पुलिस मामले में केस दर्ज करने से कतराती रही। जब न्यायालय की ओर से दिए गए दो सप्ताह का समय बीत गया और लगा कि अवमानना झेलनी पड़ेगी, तब केस दर्ज किया गया। जो पुलिस हमारा केस ही नहीं दर्ज कर रही थी, वह पुलिस निष्पक्षता से मामले की विवेचना कैसे करेगी। अगर ठीक से विवेचना हो जाए तो अभी और भी धाराएं इस केस में बढ़ेंगी।

उन्होंने बताया कि बेटा पंकज जेल से रिहा होने के बाद परिवार के लोगों को सांत्वना देने के साथ खुद भी शांत होने का प्रयास कर रहा है। वह अभी तक ड्यूटी पर नहीं जा सका है। बहाली के लिए वह आवश्यक प्रयास कर रहा है।

सिपाही की पत्नी नहीं भूल पा रही दुर्व्यवहार

सिपाही की पत्नी अदिति तीन नवंबर को हुई घटना को याद करके सिहर जाती हैं। उनकी जेहन में घटना को लेकर भय व्याप्त है। उनके ससुर बताते हैं कि वह सारी प्रताड़नाओं को भूल जाए, इसके लिए कुछ दिनों के लिए मायके वाराणसी भेज दिया है। उसके साथ जो दुर्व्यवहार किया गया था, उसको लेकर वह काफी दुखी रहने लगी है।

पिता बोले- हमारे साथ हैं अधिवक्ता और आम जनता

चंद्रदेव ने कहा कि उनके साथ गोरखपुर के अधिवक्ताओं के साथ ही वहां की आम जनता भी है। कई दूसरे लोग भी इस डॉक्टर से पीड़ित हैं। न्यायालय ने हमारा साथ नहीं दिया होता तो पुलिस केस भी नहीं दर्ज करती। न्यायालय ने सच का साथ दिया। हम लोगों को ऐसे व्यक्ति के ऊपर केस दर्ज कराने में सफलता मिली, जो प्रभावशाली और पुलिस विभाग में अच्छी पकड़ रखता है।

नहीं लगाई जानलेवा हमले की धारा

चंद्रदेव ने कहा कि बेटे के सिर में गंभीर चोट आई थी, पुलिस ने ही मेडिकल कराया था। इसके बाद भी मारपीट की धारा लगा दी गई, जानलेवा हमले की धारा नहीं लगाई गई। जबकि कोर्ट ने हत्या के प्रयास के साथ ही 13 और धाराओं में केस दर्ज करने का आदेश दिया है। सोच समझकर इस तरह एफआईआर लिखी गई है कि डॉक्टर की गिरफ्तारी न हो। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। कोर्ट में इसके खिलाफ फिर प्रार्थना पत्र दाखिल किया जाएगा। बेटे के साथ मारपीट का वीडियो और मेडिकल रिपोर्ट मौजूद है।

आख़री नबी की पाक मां, बीवियां और बेटियां’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण

गोरखपुर। मजलिस असहाबे क़लम द्वारा हिंदी भाषा में प्रकाशित 'आख़री नबी की पाक मां, बीवियां और बेटियां’ पुस्तक का लोकार्पण मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन, नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी, नेहाल अहमद, मुफ्ती गुलाम नबी, कारी सरफुद्दीन मिस्बाही, हाफिज आफताब अहमद, हाफिज नजरे आलम कादरी, एडवोकेट मो. आज़म, नवेद आलम, सद्दाम हुसैन, आतिफ अहमद द्वारा किया गया। कारी मुहम्मद अनस क़ादरी, आलिमा शहाना खातून, मुफ्तिया कहकशां फ़िरदौस व मदरसा रज़ा-ए-मुस्तफा की छात्राओं शिफा खातून, गुल अफ्शा खातून, सना फातिमा, अदीबा फातिमा, सादिया द्वारा लिखित 128 पेज की पुस्तक में पैग़ंबरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, आपकी मां, बीवियों और बेटियों की पाक ज़िंदगी, कुर्बानियों व उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया है। पुस्तक लिखने वाली छात्राओं को पुरस्कृत भी किया गया। इसी के साथ हर खास ओ आम में पुस्तक की 1100 प्रतियां निशुल्क बांटने का सिलसिला शुरू हो गया है।

मुख्य अतिथि मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी ने कहा कि 'आख़री नबी की पाक मां, बीवियां और बेटियां’ पुस्तक आसान हिंदी भाषा में और प्रमाणिक पुस्तकों के जरिए लिखी गई है। जिसमें पैग़ंबरे इस्लाम और आपकी मां, बीवियों व बेटियों की ज़िंदगी, ख़िदमात व कुर्बानियों को बहुत शानदार अंदाज़ व संक्षेप में पेश किया गया है। इस पुस्तक से नई नस्ल को काफी फायदा होगा। पुस्तक को अगर स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए तो छात्रों को काफी लाभ होगा। मिलाद की महफ़िल में भी इस किताब के जरिए बयान किया जा सकता है।

अध्यक्षता करते हुए मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने कहा कि ‘आख़री नबी की पाक मां, बीवियां और बेटियां’ आसान हिंदी ज़बान में लिखी गई प्रमाणिक पुस्तक है। जिसे तैयार करने में कारी मुहम्मद अनस क़ादरी व मदरसा रज़ा-ए-मुस्तफा की छात्राओं ने बहुत मेहनत की है। छह माह के अथक प्रयास से यह पुस्तक लोगों के हाथों में है। निश्चित रूप से यह पुस्तक आने वाली पीढ़ी और अवाम के लिए लाभदायक साबित होगी।

कारी मोहम्मद अनस रज़वी ने कहा कि इस पुस्तक से नई नस्ल को इस्लाम धर्म के बारे में जानने में मदद मिलेगी। सभी को यह पुस्तक पढ़नी चाहिए।

छात्राओं को हाफिज व कारी अयाज अहमद, अलाउद्दीन निजामी, ज्या वारसी, कनीज़ फातिमा, फिज़ा खातून, नूर फातिमा, हाफिज रहमत अली निजामी, मो. अदहम, आसिम अहमद, नज़ीर अहमद सिद्दीकी, अजरा जमाल, मौलाना महमूद रज़ा, सैयद नदीम अहमद, हाफिज अशरफ रज़ा, मौलाना दानिश रज़ा, सैयद फरहान अहमद, हाजी सेराज अहमद, इरफ़ान सिद्दीक़ी, तनवीर आजाद, एडवोकेट दिलशाद परवेज, सैयद कासिफ अली, सैयद हुसैन अहमद, शादाब अहमद सिद्दीकी, इंजमाम खान, समीर अली, हाजी सुहैल, अमीन अंसारी, शीराज सिद्दीकी, आसिफ मकसूद, हाफिज हदीस, अब्दुर्रहमान, अली अकबर, रेयाज अहमद राईनी, हाफिज रजी अहमद, अहद हुसैन, तौसीफ अहमद, मौलाना जहांगीर अहमद, मुफ्ती शोएब रज़ा, गुलाम जीलानी अशरफी, शमीम खान, ताबिश सिद्दीकी, शहनवाज अहमद, एमएस खान, मो. नदीम आदि ने मुबारकबाद पेश की।

*चौरी चौरा दुर्लभ दस्तावेज प्रदर्शनी का समापन, इतिहास के अनदेखे पन्नों से हुआ साक्षात्कार*

गोरखपुर: चौरी चौरा विद्रोह की दुर्लभ ऐतिहासिक सामग्री को प्रदर्शित करने वाली महुआ डाबर संग्रहालय की दो दिवसीय विशेष प्रदर्शनी का समापन सेंट एंड्रयूज पीजी कॉलेज, गोरखपुर में हुआ। समापन समारोह में इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की उपस्थिति में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े अज्ञात पहलुओं पर चर्चा की गई।

समापन समारोह में कल्चरल क्लब के समन्वयक प्रो. जे. के. पांडेय के संबोधन से हुई। उन्होंने कहा, "इस प्रदर्शनी ने हमें चौरी चौरा विद्रोह और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दुर्लभ दस्तावेजों से रूबरू कराया। हम उन सभी प्रतिभागियों, शोधकर्ताओं और इतिहास प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने अपनी उपस्थिति से इसे सार्थक बनाया।"

आरटीआई एक्टिविस्ट अविनाश गुप्ता ने कहा कि "इतिहास सिर्फ घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि हमारी चेतना का दर्पण है। चौरी चौरा विद्रोह और असहयोग आंदोलन के इन दुर्लभ दस्तावेजों को देखकर यह समझ आता है कि स्वतंत्रता संग्राम का हर मोर्चा कितना महत्वपूर्ण था।"

इस अवसर पर महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि "हमने इस प्रदर्शनी के माध्यम से उन अनदेखे दस्तावेजों को प्रस्तुत किया, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के संघर्षों को और अधिक प्रामाणिकता से दर्शाते हैं। यह दुर्लभ दस्तावेज हमारे राष्ट्र की धरोहर हैं और इन्हें संरक्षित कर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है।"

समारोह में अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। मारुति नंदन चतुर्वेदी ने समापन वक्तव्य देते हुए कहा कि "इतिहास की यह झलक हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है और हमें प्रेरित करती है कि हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को न भूलें। हमारी आशा है कि इस प्रदर्शनी से मिली जानकारियां आपकी सोच को नई दिशा देंगी।"

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। उपस्थित दर्शकों ने प्रदर्शनी को ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए आयोजकों की सराहना की।

बापू का यह फैसला आपको चौंका देगा, बापू ने क्‍यों लिए स‍िंंध‍ि‍या से 25 लाख रुपये?

गोरखपुर: चौरी चौरा विद्रोह की बरसी पर महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा सेंट एंड्रयूज पीजी कॉलेज, गोरखपुर में एक दुर्लभ दस्तावेजों की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े अनेक प्रमाणिक दस्तावेज, ऐतिहासिक तस्वीरें और अदालती रिपोर्टें प्रस्तुत की गईं। महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राना जो भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के गहरे शोधकर्ता हैं और इस क्षेत्र में दो दशक से अधिक समय से उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।

डॉ. शाह आलम राना ने इस अवसर पर एक ऐसा ऐतिहासिक दस्तावेज प्रस्तुत किया, जिसने असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी से जुड़े एक महत्वपूर्ण और अज्ञात पहलू को उजागर किया। उन्होंने बताया कि महुआ डाबर संग्रहालय में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज संरक्षित हैं। इसी दौरान मध्य प्रदेश के भिंड जनपद के सरकारी गजेटियर (1996) के पृष्ठ संख्या 29 के दूसरे और तीसरे अनुच्छेद में एक ऐसा उल्लेख मिला, जिसने उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया।

डॉ. राना ने बताया कि 8 फरवरी 1921 को गोरखपुर में महात्मा गांधी ने एक विशाल सभा को संबोधित किया था। यह असहयोग आंदोलन की चरम अवस्था थी और नेशनल वॉलंटियर्स का मजबूत नेटवर्क पूरे देश में बन चुका था। यह संगठन न केवल जनता को स्वतंत्रता संग्राम में जोड़ रहा था, बल्कि कांग्रेस फंड के लिए अनाज और धनराशि भी एकत्र कर रहा था। इस दौरान महात्मा गांधी की लोकप्रियता चरम पर थी और देशभर में उनके समर्थन में नारे गूंज रहे थे।

1922 में महात्मा गांधी ने ग्वालियर जाने का निर्णय लिया, लेकिन इस यात्रा के पीछे राजनीतिक उथल-पुथल बढ़ गई। ग्वालियर के महाराजा माधवराव सिंधिया, जो ब्रिटिश सरकार के प्रति निष्ठावान थे, ने इस संभावित विद्रोह से बचने के लिए अपने गृहमंत्री देवास महाराजा सदाशिवराव पवार के माध्यम से महात्मा गांधी को पच्चीस लाख रुपये की एक पेटी कांग्रेस फंड के लिए भेजी। साथ ही, उन्होंने महात्मा गांधी को यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर उन्होंने ग्वालियर का दौरा किया, तो ब्रिटिश सरकार के कोप का सामना करना पड़ेगा। इस पर विचार करते हुए महात्मा गांधी ने अपना ग्वालियर दौरा स्थगित कर दिया।

इस ऐतिहासिक घटना का उल्लेख डी. आर. मानकेकर की पुस्तक "एक्सेशन टू एक्सटिंक्शन – द स्टोरी ऑफ इंडियन प्रिंसेज़" के पृष्ठ संख्या 37 पर भी मिलता है। जब महुआ डाबर संग्रहालय में इस दस्तावेज की खोज की गई, तो यह पूरी कहानी उसमें दर्ज मिली। डॉ. शाह आलम राना के अनुसार, यह दस्तावेज स्वतंत्रता संग्राम के राजनीतिक परिदृश्य में गहरे निहित प्रभावों को दर्शाता है और यह स्पष्ट करता है कि कैसे भारतीय शासकों को ब्रिटिश शासन के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखने के लिए कठोर फैसले लेने पड़ते थे।

डॉ. राना ने इस तथ्य की तुलना 1925 के काकोरी ट्रेन एक्शन से की, जब पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश खजाने से मात्र चार हजार छह सौ उन्यासी रुपये दो आने दो पैसे लूटे थे, जिसके कारण चार क्रांतिकारियों को फांसी दे दी गई। वहीं, इसके तीन साल पहले ग्वालियर के महाराजा द्वारा महात्मा गांधी को कांग्रेस फंड के लिए पच्चीस लाख रुपये की भारी-भरकम राशि दी गई थी, जो आज भी इतिहास के पन्नों में कम चर्चित है।

प्रदर्शनी में चौरी चौरा विद्रोह से जुड़े अनेक अन्य दुर्लभ दस्तावेज भी प्रदर्शित किए गए, जिनमें चौरी चौरा विद्रोह से जुड़े सरकारी टेलीग्राम, ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा खींची गई दुर्लभ तस्वीरें, गोरखपुर सत्र न्यायालय के फैसले, फांसी पाए स्वतंत्रता सेनानियों की दया याचिकाएं, और अखबारों में प्रकाशित रिपोर्टें शामिल थीं। इन दस्तावेजों ने न केवल चौरी चौरा घटना की ऐतिहासिकता को प्रमाणित किया, बल्कि इस घटना के सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों को भी स्पष्ट किया।

डॉ. शाह आलम राना के अनुसार, महुआ डाबर संग्रहालय का उद्देश्य इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को संरक्षित करना और नई पीढ़ी को उनके क्रांतिकारी इतिहास से परिचित कराना है। उन्होंने बताया कि उनका परिवार 1857 के महुआ डाबर क्रांतिकारी आंदोलन के महानायक जफर अली के वंशजों में से है, जिन्होंने कंपनी राज के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष किया था। महुआ डाबर की पांच हजार की आबादी को अंग्रेजों ने जमींदोज कर दिया था, लेकिन जफर अली और उनके क्रांतिकारी साथियों ने बारह वर्षों तक देश-विदेश में सूफी फकीर के रूप में रहकर आजादी के आंदोलन को संगठित कर अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

डॉ. शाह आलम राना ने चंबल के बीहड़ों को अपना कार्यक्षेत्र बनाया और वहां क्रांतिकारी धरोहरों की खोज और संरक्षण का कार्य कर रहे हैं। उनकी यह प्रदर्शनी केवल चौरी चौरा विद्रोह ही नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के गहरे और अनछुए पहलुओं को उजागर करने का माध्यम बनी। इस प्रदर्शनी में शोधकर्ताओं, इतिहास प्रेमियों और विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में भागीदारी देखी गई, जिन्होंने इन ऐतिहासिक दस्तावेजों से महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

*फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराने पर किसानों का भारी नुक़सान-एसडीएम*

खजनी गोरखपुर।फार्मर रजिस्ट्री अर्थात किसानों की खेती की जमीन को उनके आधार कार्ड और बैंक खाते से लिंक कराने की आॅनलाइन प्रक्रिया है। शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य है कि किसानों की जमीनें उनके आधार कार्ड से जुड़े जिससे उनकी भू-संपत्ति का सही आंकलन किया जा सके और उसी के आधार पर उन्हें कृषि ऋण तथा खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा संचालित योजनाओं, सब्सिडी और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ दिया जा सके। यदि किसी किसान की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हुई तो उन्हें मिलने वाली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभ से वंचित होना पड़ेगा, साथ ही सरकार द्वारा कृषि कार्यों के लिए दी जाने सब्सिडी, किसान क्रेडिट कार्ड से मिलने वाले आसान कर्ज समेत जमीन को खरीदने अथवा बेचने में भी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। तहसील मुख्यालय में आयोजित बैठक में उप जिलाधिकारी कुंवर सचिन सिंह ने बताया कि अभी तक तहसील क्षेत्र में सिर्फ 27 फीसदी किसानों की फार्मर रजिस्ट्री का काम पूरा हुआ है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि राजस्व विभाग ब्लॉक के कर्मचारी कृषि विभाग ग्रामसभा सचिव और ग्रामप्रधानों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्र के किसानों को फार्मर रजिस्ट्री कराने के लिए जागरूक करें। बैठक के दौरान उन्होंने नायब तहसीलदार, कानूनगो और लेखपालों को निर्देशित करते हुए तथा सख़्त हिदायत देते हुए कहा कि सभी लोग शासन की इस योजना को किसानों तक पहुंचाएं, अन्यथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों कर्मचारियों को निलंबित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री के लिए किसानों के पास सीएससी मोड, सहायक मोड, सेल्फ मोड, कैंप मोड के जरिए फॉर्मर रजिस्ट्री कराने के 4 विकल्प मौजूद हैं।

बैठक में तहसीलदार कृष्ण गोपाल तिवारी नायब तहसीलदार रामसूरज प्रसाद, राकेश शुक्ला कानूनगो कैलाशनाथ,महेंद्र प्रताप सिंह, अशोक कुमार, डीएन मिश्रा, लेखपाल गगन जायसवाल, राजीव रंजन शर्मा, अभिषेक कुमार दीक्षित,अभिषेक सिंह, अंबेश पांडेय, अजय पांडेय, रितेश तिवारी, रामअशीष, पूजा गुप्ता,नीरज यादव, अनिल गुप्ता, रामबिलास, बृजभान पाल, चंद्रकांत पांडेय,धनंजय त्रिपाठी, रितेश श्रीवास्तव, हर्षित, सतीश आदि मौजूद रहे।

यूथ फॉर जॉब्स आर्गेनाइजेशन के संयुक्त तत्वाधान में दिव्यांगजनों हेतु एक रोजगार मेला का हुआ आयोजन

गोरखपुर। रोजगार मेले: अवसरों का द्वार, परिचय, रोजगार मेला (Job Fair) एक ऐसा मंच है जहाँ विभिन्न कंपनियाँ और नौकरी की तलाश करने वाले अभ्यर्थी एक ही स्थान पर मिलते हैं। यह आयोजन बेरोजगार युवाओं को उनके कौशल और योग्यताओं के अनुसार उपयुक्त नौकरियों की जानकारी प्रदान करता है। आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में रोजगार मेलों का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।

इन बिन्दुवों को ध्यान मे रखते हुवे सीआरसी गोरखपुर और यूथ फॉर जॉब्स आर्गेनाइजेशन के संयुक्त तत्वाधान में दिव्यांगजनों हेतु एक रोजगार मेला का आयोजन सीआरसी परिसर में किया गया। इस कार्यक्रम में अमेजॉन इंडिया, फ्लिपकार्ट टाटा मोटर्स, टीम लीज, टीम सॉल्यूशन जैसी कंपनियों ने अपने कंपनी के लिए साक्षात्कार किया। नोएडा और लखनऊ की बीपीओ कंपनी ने आनलाइन माध्यम से दिव्यांगजनों का साक्षात्कार किया। इस अवसर पर 106 लोगों का पंजीकरण किया गया। जिसमें 79 दिव्यांगों ने प्रतिभाग किया। आज टाटा मोटर्स ने 10, पीएसएचआर 06 तथा ऑनलाइन बीपीओ कंपनियों,फ्लिपकार्ट,ऐमज़ान ने 25 लोगों को चयनित किया। सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेंद्र यादव ने कहा कि इस रोजगार मेले की सफलता को देखते हुए भविष्य में इस तरह के और भी रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा जिससे इस क्षेत्र के ज्यादा से ज्यादा दिव्यांगजन अपनी योग्यता के अनुसार आजीविका प्राप्त कर सकें,उन्होंने कहा की रोजगार मेले युवाओं के लिए नौकरी पाने का एक प्रभावी साधन हैं। ये न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं, बल्कि करियर संबंधी दिशा-निर्देश भी देते हैं। सरकार और निजी संगठनों को चाहिए कि वे अधिक से अधिक रोजगार मेलों का आयोजन करें ताकि बेरोजगार युवाओं को उचित नौकरी मिल सके और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।। कार्यक्रम का संचालन श्री राजेश कुमार ने किया तथा समन्वय राजेश कुमार यादव ने किया। इस अवसर पर सीआरसी गोरखपुर के सभी अधिकारी और कर्मचारी गण मौजूद रहे।