टीबी अभियान के लिए बना कंट्रोल कमांड सेंटर
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देवरिया, जिले में चल रहे सौ दिवसीय सघन टीबी उन्मूलन अभियान के दौरान उच्च जोखिम श्रेणी के लाखों संभावित टीबी रोगियों की स्क्रीनिंग की जा रही है । जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में इस इंट्रीगेटेड कंट्रोल कमांड सेन्टर से टीबी की जांच, उपचार सहित मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। अभियान में स्क्रीनिंग के दौरान संभावित टीबी रोगियों की निक्षय पोर्टल पर स्क्रीनिंग की जा रही है।
इन रोगियों में से जांच के बाद जो टीबी के मरीज निकलेंगे उनका उपचार शुरू होगा और बाकी लोगों की आईडी क्लोज की जाएगी। टीबी मरीजों के निकट सम्पर्कियों की भी जांच होगी और टीबी की पुष्टि न होने पर भी उन्हें बचाव की दवा खिलाई जाएगी।
यह जानकारी देते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने बताया कि शासन से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार साठ साल से अधिक उम्र के लोग, कुपोषित या कमजोर लोग, मधुमेह रोगी, धुम्रपान व नशा करने वाले, इलाज प्राप्त कर रहे टीबी रोगियों को निकट सम्पर्कियों, इलाज पूरा कर चुके टीबी रोगी, एचआईवी रोगी और मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग उच्च जोखिम श्रेणी में आते हैं और उनमें टीबी की आशंका कहीं अधिक है । ऐसे लोगों की समय से जांच कर टीबी की पहचान होने पर सही से पूरा इलाज करवाया जाए तो यह पूरी तरह से ठीक हो सकती है, लेकिन अगर एक मरीज का समय से इलाज न हो तो वह साल भर में पंद्रह नये टीबी मरीज बना सकता है। इसके विपरीत उपचाराधीन टीबी रोगी से संक्रमण की आशंका कम होती है। सीएमओ डॉ राजेश झा ने बताया कि अलग अलग स्थानों पर भी कैम्प लगा कर जांच कराये जा रहे हैं। अभियान के दौरान समाज के प्रभावशाली लोगों और धर्मगुरूओं की तरफ से जनसमुदाय से अपील की जा रही है। जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ राजेश और उनकी टीम की देखरेख में प्रचार प्रसार का भी व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
इन लक्षणों के साथ कराएं जांच
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ राजेश कुमार ने बताया कि 07 दिसम्बर से शुरू हुए इस अभियान के दौरान अभी तक उच्च जोखिम श्रेणी वाले करीब 65 हजार से अधिक लोगों स्क्रीनिंग की जा चुकी है। 365 से अधिक टीबी के मरीज चिन्हित किए गए हैं। टीबी आमतौर पर फेफड़ों में होती है लेकिन यह शरीर के अन्य अंगों में भी हो सकती है। दो हफ्ते से अधिक की खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, मुहं से खून आना, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, वजन कम होना, भूख न लगना, थकान और गर्दन में गिलटी या गांठें टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। इस बीमारी की जांच और इलाज की सुविधा सरकारी खर्चे पर मौजूद है।
दी जा रही सुविधाएं
टीबी के उपचाराधीन मरीजों को अच्छा पोषण व खुराक मिल सके, इसके लिए नवम्बर 2024 से निक्षय पोषण योजना के तहत प्रति माह 1000 रुपये की दर से खाते में सहायता राशि दी जा रही है। इससे पहले यह रकम पांच सौ रुपये प्रति माह की दर से थी। इसे इलाज चलने तक दिया जाता है। जरूरतमंद टीबी मरीजों को निक्षय मित्र गोद लेकर इलाज व पोषण में सहयोग प्रदान कर रहे हैं। अभियान के दौरान अधिकाधिक निक्षय मित्रों से टीबी मरीजों की मदद करवाई जाएगी।
Jan 03 2025, 17:58