నిజంనిప్పులాంటిది

Apr 18 2024, 07:16

భారతీయుడు అడుగుపెట్టే వరకు జాబిల్లి యాత్రలు: ఇస్రో చీఫ్

అహ్మదాబాద్‌: అందని ద్రాక్షగా ఉన్న చందమామ దక్షిణ ధ్రువంపైకి విజయవంతంగా ల్యాండర్‌ను దింపి అంతరిక్ష రంగంలో సరికొత్త చరిత్రను లిఖించింది భారత్‌. ఈ ప్రయోగం గురించి తాజాగా దేశ అంతరిక్ష పరిశోధనా సంస్థ (ISRO) ఛైర్మన్‌ ఎస్‌.సోమనాథ్ (Somanath) మరోసారి స్పందించారు..

భవిష్యత్తుల్లోనూ మరిన్ని జాబిల్లి యాత్రలు (Lunar Missions) చేపడతామని చెప్పారు.

గుజరాత్‌లోని అహ్మదాబాద్‌లో ఆస్ట్రోనాటికల్‌ సొసైటీ ఆఫ్‌ ఇండియా నిర్వహించిన కార్యక్రమంలో ఇస్రో ఛైర్మన్‌ పాల్గొన్నారు. ఈసందర్భంగా మీడియాతో మాట్లాడుతూ.. ''చంద్రయాన్‌-3 (Chandrayaan 3) విజయవంతమైంది. దాన్నుంచి డేటాను సేకరించి శాస్త్రీయ అధ్యయనం చేస్తున్నాం.

ఇక, జాబిల్లిపై భారతీయుడు అడుగుపెట్టేంతవరకు చంద్రయాన్‌ సిరీస్‌లను కొనసాగించాలని అనుకుంటున్నాం. అంతకంటే ముందు ఇంకా చాలా సాంకేతికతలపై పట్టు సాధించాలి. అక్కడికి వెళ్లి తిరిగి రావడంపై పరిశోధనలు చేయాలి. తదుపరి మిషన్‌లో దీన్ని ప్రయత్నిస్తాం'' అని వెల్లడించారు..

భారత్‌ త్వరలో చేపట్టబోయే గగన్‌యాన్‌ గురించి సోమనాథ్‌ మాట్లాడారు. ''దీనికంటే ముందు ఈ ఏడాది ఓ మానవరహిత మిషన్‌ను చేపట్టనున్నాం. ఏప్రిల్‌ 24న ఎయిర్‌డ్రాప్‌ వ్యవస్థను పరీక్షించనున్నాం. ఆ తర్వాత వచ్చే ఏడాది మరో రెండు మానవరహిత యాత్రలను చేపట్టబోతున్నాం. అన్నీ అనుకూలిస్తే 2025 చివరికి గగన్‌యాన్‌ ప్రయోగం చేపడతాం'' అని పేర్కొన్నారు..

గగన్‌యాన్‌ మిషన్‌ కోసం ఇప్పటికే నలుగురు వ్యోమగాములను ఎంపిక చేసిన సంగతి తెలిసిందే. ఇటీవల ఈ ప్రాజెక్టులో ఇస్రో కీలక ముందడుగు వేసింది. మనుషులను సురక్షితంగా తీసుకెళ్లడానికి అనువైన CE20 క్రయోజనిక్‌ ఇంజిన్‌ను సిద్ధం చేసింది. ఈ ప్రయోగంతో వ్యోమగాములను 400 కిలోమీటర్ల ఎత్తులో భూకక్ష్యలోకి పంపుతారు. ఇందుకోసం ఎల్‌వీఎం-మార్క్‌3 రాకెట్‌ను ఉపయోగించనున్నారు. దాదాపు 3 రోజుల తర్వాత భూమికి తిరిగొస్తారు. తిరుగు ప్రయాణంలో వ్యోమనౌక సముద్ర జలాల్లో ల్యాండ్‌ అవుతుంది..

Azamgarh

Apr 16 2024, 18:48

आजमगढ़:-युवक का ISRO में हुआ चयन, गांव में खुशी की लहर

विनोद राजभर,अतरौलिया(आजमगढ़)। जिले के अतरौलिया थानाक्षेत्र के चत्तुरपुर खास गांव निवासी रवि यादव का ISRO में टेक्निकल असिस्टेंट के पद पर चयन हुआ है। इससे पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है।

गांव के लोगों ने रवि यादव के घर पहुंचकर उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया। ग्रामीणों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर गांव में खुशियां मनाई।

बता दें कि रवि के पिता इंद्रजीत यादव किसान हैं। इंद्रजीत यादव के तीन लड़के हैं। जिनमें रवि दूसरे नंबर पर हैं। रवि के बड़े भाई प्राइवेट जॉब करते हैं और छोटे भाई अभी तैयारी कर रहे हैं। रवि की प्राथमिक शिक्षा लोदी किसान इंटर कॉलेज और माध्यमिक शिक्षा पूर्व माध्यमिक विद्यालय थिरईपट्टी से हुई।

रवि ने लोदी किसान इंटर कॉलेज महादेवपुर से हाईस्कूल की पढ़ाई की। इसके बाद ओम कृष्ण कोचिंग सेंटर से इन्होंने पॉलिटेक्निक के एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी की और एंट्रेंस एग्जाम दिया जिसमें इन्हें सफलता मिली। तत्पश्चात इन्होंने गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज अकबरपुर अंबेडकरनगर से पॉलिटेक्निक किया। इसके बाद ISRO की वैकेंसी 2020 में आई।

2023 जून में इन्होंने इसमें परीक्षा दिया। सारी प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद 15 अप्रैल 2024 को रवि का चयन इसरो में हो गया। रवि के परिजन एडवोकेट रणजीत यादव, जगदीश यादव प्रवक्ता नवोदय विद्यालय, चंद्रपाल यादव, अरुण यादव ने रवि को मिठाई खिलाकर बधाई दी और जमकर खुशियां मनाई। रवि के पिता इंद्रजीत यादव ने बताया कि वह कड़ी मेहनत करके अपने पुत्र रवि को इलाहाबाद भेज कर तैयारी करवाये जिसका परिणाम आज उन्हें मिला। रवि के पिता के चेहरे पर गजब की खुशी देखने को मिली। जानकारी के लिए बता दें कि पूरे भारत में ISRO द्वारा सिर्फ एक सीट के लिए यह वैकेंसी जारी की गई थी जिसमें रवि का चयन हुआ है। रवि का इसरो में चयन होने से आजमगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन हुआ है। इस दौरान मुख्य रूप से ओम प्रकाश यादव प्रबंधक ओम कृष्णा कॉन्वेंट स्कूल, रामजी यादव, लालजी यादव, हरेंद्र यादव, विजय यादव, अरविंद यादव, अजीत यादव, विनय, संदीप, आशुतोष, दीपक समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

Janardhanreddy32

Apr 08 2024, 14:49

ఆధారాలు ఉన్నా అవినాష్‌ను జగన్‌ కాపాడుతున్నారు: వైఎస్‌ షర్మిల

India

Mar 24 2024, 18:33

पीएम मोदी के नेतृत्व में अंतरिक्ष का अगुवा बना हिंदुस्तान, दुनिया भर में ISRO का गुणगान

डेस्क: इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) ने अपनी स्थापना के बाद से ही अंतरिक्ष में बड़े-बड़े मुकाम हासिल किए हैं। मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गत 10 वर्षों में इसरो ने अपनी गति तेज कर दी है। लिहाजा भारत ने चंद्रमा के दक्षिणी पोल से लेकर शुक्र और सूर्य के एल1 तक पहुंच चुका है। इसरो की सफलता ने सिर्फ भारतवासियों को ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता को गौरवान्वित किया है। तभी तो पूरी दुनिया इसरो की कुशलता की कायल हो गई है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत में अंतरिक्ष को लेकर उत्साह दुनिया भर से प्रतिभाओं को आकर्षित कर रहा है और उन्हें व्यवसाय शुरू करने एवं क्षेत्र के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित कर रहा है।

डब्ल्यूईएफ के मंच ‘सेंटर फॉर फोर्थ इंडस्ट्रियल

 रिवोल्यूशन’ (सी4आईआर) ने विभिन्न हितधारकों के बीच वैश्विक सहयोग बनाने के लिए पिछले सप्ताह भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कार्यक्रम शुरू किया है क्योंकि देश में निजी अंतरिक्ष क्षेत्र आगे बढ़ रहा है। सी4आईआर की कार्यकारी समिति के सदस्य सेबस्टियन बकुप ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “ भारत को छोटे, महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष देशों के लिए एक आदर्श, प्रकाशस्तंभ के रूप में देखा जाता है, जो समर्थन के लिए भारत की ओर भी देखते हैं।” उन्होंने कहा कि डब्ल्यूईएफ एक समावेशी और जिम्मेदार तरीके से समग्र रूप से अंतरिक्ष क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इस क्षेत्र के बड़े और उभरते देशों के बीच आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करना चाहता है।

उपग्रहों के प्रक्षेपण पर भारत कर रहा भारी निवेश

बकुप ने कहा कि भारत साझा बुनियादी ढांचे में निवेश कर रहा है, मिसाल के तौर पर वह छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के बुनियादी ढांचे में निवेश कर रहा है जो अंततः डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के बराबर बन सकता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत "अंतरिक्ष सार्वजनिक बुनियादी ढांचा" बनाने में कामयाब रहा, तो इससे अंतरिक्ष उद्यमिता के मामले में तेजी आएगी। बकुप ने अपनी भारत यात्रा के दौरान अंतरिक्ष क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों के साथ बैठकें कीं, जिनमें भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अधिकारी और अंतरिक्ष स्टार्ट-अप के प्रतिनिधि शामिल थे।

भारत दुनिया के लिए अंतरिक्ष के शीर्ष में शामिल

बकुप ने कहा, “ मुझे लगता है कि भारत के बाहर कई लोग अब भी भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में उभरता हुआ राष्ट्र बता रहे हैं। हकीकत तो यह है कि भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में शीर्ष वर्ग में आ चुका है।” उन्होंने कहा कि यह विमर्श को बदलने का मौका देता है और यह दुनिया को यह समझने में मदद करेगा कि भारत ने वास्तव में क्या हासिल किया है। भारत एक तरह से अंतरिक्ष में दुनिया के तमाम देशों के लिए उम्मीद की किरण बन गया है।

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Mar 22 2024, 15:16

स्वदेशी स्पेस शटल “पुष्पक” विमान की सफलतापूर्वक लैंडिंग, कर्नाटक के एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज से भरी उड़ान

#isrolaunchedrlvpushpakrocketfromkarnataka

आपने रावण के पुष्पक विमान के बारे में तो सुना ही होगा। इन दिनों देश में पुष्पक विमान की चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है। त्रेता युग के बाद अब 21वीं सदी में फिर से पुष्पक विमान आसमान में उड़ान भरने के लिए तैयार है। दरअसल, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी इसरो ने स्वदेशी स्पेस शटल की सफलतापूर्व लैंडिंग कराई। इस स्वदेशी स्पेस शटल का नाम पुष्पक विमान रखा गया है। इसे कर्नाटक के चित्रदुर्ग के एरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में सुबह करीब 7.10 बजे हेलीकॉप्टर से 4.5 किमी की ऊंचाई तक ले जाया गया और रनवे पर ऑटोनॉमस लैंडिंग के लिए छोड़ा गया। 

लॉन्चिंग के बाद विमान ने सफल लैंडिंग भी की। इसरो ने आज सुबह 7 बजे कर्नाटक के चित्रदुर्ग स्थित एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज (एटीआर) में आयोजित इस परीक्षण को सफलतापूर्वक पूरा किया। आरएलवी लेक्स-02 लैंडिंग प्रयोग के माध्यम से लॉन्च कर, री-यूजेबल लॉन्च व्हीकल (आरएलवी) प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। री-यूजेबल लॉन्च व्हीकल यानी आरएलवी के क्षेत्र में इसरो की ये एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। 

इस परीक्षण के जरिए इसरो ने री-यूजेबल लॉन्च व्हीकल की ऑटोनोमस लैंडिक की क्षमता का प्रदर्शन किया। पंखों वाले इस व्हीकल को अधिक कठिन युद्धाभ्यास करने, क्रॉस रें और डाउनरेंज दोनों को सही करने और पूरी तरह से ऑटोनोमस मोड में रनवे पर उतरने के लिए तैयार किया गया है।

स्पेस तक पहुंच को सबसे किफायती बनाने की भारत की कोशिश- इसरो चीफ

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के चीफ एस सोमनाथ ने कहा, पुष्पक लॉन्च व्हीकल स्पेस तक पहुंच को सबसे किफायती बनाने का भारत की एक साहसिक कोशिश है. ये भारत का फ्यूचरिस्टिक री-यूजेबल लॉन्च व्हीकल है। इसका सबसे ऊपरी हिस्सा सबसे महंगा है, इसी में महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स लगे हैं। इस वजह से ये स्पेस शटल उड़ान भरने के बाद सुरक्षित रूप से धरती पर वापस आ सकता है। बाद में ये इन-ऑर्बिट सैटेलाइट और रिट्राइबिंग सैटेलाइट में री-फ्यूलिंग का काम भी कर सकता है।" ISRO चीफ ने कहा कि भारत स्पेस में मलबे को कम करना चाहता है। पुष्पक विमान उसी दिशा में उठाया गया एक कदम है।"

पुष्पक विमान की खास बातें

-पुष्पक RLV एक स्वदेशी स्पेस शटल है, कुछ साल में हमारे एस्ट्रोनॉट्स इसके बड़े वर्जन में कार्गो डालकर अंतरिक्ष तक पहुंचा सकते हैं।

-इसके जरिए सैटेलाइट भी लॉन्च किए जा सकते हैं। यह सैटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़कर वापस आएगा, ताकि फिर से उड़ान भर सके।

-इसके जरिए किसी भी देश के ऊपर जासूसी करवा सकते हैं। यहां तक की हमले भी किए जा सकते हैं।

-ये अंतरिक्ष में ही दुश्मन की सैटेलाइट को बर्बाद कर सकता हैं।

-यह एक ऑटोमेटेड रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल है।ऐसे विमानों से डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) चला सकते हैं।

-पुष्पक विमान की लंबाई 6.5 मीटर है और इसका वजन 1.75 टन हैइसे इंडियन एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से उड़ाया जाएगा।

-इसके छोटे थ्रस्टर्स व्हीकल को ठीक उसी लोकेशन पर जाने में मदद करेंगे, जहां उसे लैंड करना है।

-सरकार ने इस प्रोजेक्ट में 100 करोड़ रुपये से अधिक का इंवेस्टमेंट किया है, जो एक मील का पत्थर है।क्योंकि देश 2035 तक अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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Mar 04 2024, 19:09

इसरो चीफ एस सोमनाथ को कैंसर, आदित्य एल-1 लॉन्च वाले दिन चला पता

#isro_chief_somnath_diagnosed_cancer

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एस सोमनाथ कैंसर से पीड़ित हैं।सोमनाथ को कैंसर होने का उस दिन पता चला, जिस दिन भारत का आदित्य-एल1 मिशन अंतरिक्ष में लॉन्च हुआ था।हालांकि, वो घबराए नहीं और अपना इलाज करवा शुरू किया। एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में सोमनाथ ने खुद इसका खुलासा किया है।

‘टारमक मीडिया हाउस’ के साथ एक इंटरव्यू में सोमनाथ ने पुष्टि की है कि स्कैन में से एक कैंसर में बढ़ोतरी देखी गई थी। सोमनाथ ने कहा कि ‘चंद्रयान-3 मिशन लॉन्च के दौरान कुछ स्वास्थ्य समस्याएं थीं। हालांकि, उस समय यह मेरे लिए साफ नहीं था, मुझे इसके बारे में साफ समझ नहीं थी। उन्होंने कहा कि उनको कैंसर का पता उसी दिन चला था, जिस दिन आदित्य-एल1 मिशन लॉन्च किया गया था। यह डाइग्नोसिस न केवल उनके लिए बल्कि उनके परिवार और सहकर्मियों के लिए भी एक झटका था, जो इस चुनौतीपूर्ण अवधि में उनके साथ थे। 

2 सितंबर 2023 को भारत का पहला सूर्य मिशन आदित्य एल-1 ने अपनी यात्रा शुरू की थी। इसी दिन एस सोमनाथ रूटीन चेकअप के लिए गए थे। इसी दौरान उनके पेट में कैंसर का पता चला।इस बीमारी की जानकारी मिलने के बाद वो चेन्नई गए ताकि और भी जांच की जा सके। वहां भी उनके कैंसर होने की पुष्टि हुई। उनके सामने प्रोफेशनल के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी चुनौती भी सामने आ गई थी। कीमोथेरेपी के बाद एस सोमनाथ का एक ऑपरेशन भी हुआ था।

अस्पताल में केवल चार दिन बिताने के बाद उन्होंने पांचवें दिन से बिना किसी दर्द के काम करते हुए इसरो में अपनी ड्यूटी फिर से शुरू कर दी। सोमनाथ ने बताया कि मैं लगातार मेडिकल चेकअप्स और स्कैन करवा रहा हूं। लेकिन अब मैं पूरी तरह से ठीक हो चुका हूं। अपना काम और इसरो के मिशन और लॉन्च को पर पूरा ध्यान है। इसरो के आगे के सारे मिशन पूरा करके ही दम लूंगा।

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Feb 27 2024, 11:56

गगनयान मिशन के लिए स्पेस में जाने वाले कौन हैं वे 4 भारतीय अंतरिक्ष यात्री, पीएम मोदी आज करेंगे नाम का ऐलान

#pm_narendra_modi_reveal_isro_gaganyaan_mission_astronauts_name 

हाल के कुछ सालों में भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। भारत स्पेस की दुनिया में एक और कामयाबी हासिल करने को बस तैयार खड़ा है। हम बात कर रहे हैं भारत अपने पहले ह्यूमन स्पेसफ्लाइट मिशन 'गगनयान' की।चंद्रयान और आदित्य एल-1 की सफलता के बाद ये मिशन इसरो को और बुलंदियों पर पहुंचाएगा। गगनयान भारत का पहला मानव मिशन होगा। गगनयान मिशन के लिए चार एस्ट्रोनॉट्स को ट्रेनिंग दी गई है, जिनके नाम का ऐलान खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करने वाले हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की घोषणा की थी। इसके बाद से संभावित अंतरिक्ष यात्रियों के नाम गोपनीयता बरती गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 फरवरी यानी आज से केरल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के दौरे पर जा रहे हैं। वे 27 फरवरी को केरल के तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र का दौरा करेंगे। इसरो की बहुप्रतीक्षित स्पेस मिशन गगनयान की तैयारियों को लेकर भी समीक्षा करेंगे। पीएम मोदी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की तीन नई सुविधाओं को भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इसके साथ कहा जा रहा है कि पीएम मोदी गगनयान कार्यक्रम के अंतरिक्ष यात्रियों के नामों की घोषणा भी करेंगे।हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

इस बीच टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से इस मिशन पर जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स के नामों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक गगनयान मिशन के लिए चुने गए अंतरिक्ष यात्रियों में प्रशांत नायर, अंगद प्रताप, अजीत कृष्णन और चौहान (पूरा नाम तत्काल उपलब्ध नहीं) हैं। ये सभी या तो विंग कमांडर हैं या फिर ग्रुप कैप्टन।ये चारों, बेंगलुरु में अंतरिक्ष यात्री ट्रेनिंग फैसिलिटी में ट्रेनिंग ले रहे हैं। ये सभी मंगलवार को तिरुवनंतपुरम में इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में होंगे जहां पीएम मोदी उनका परिचय दुनिया से कराएंगे।

कई चरणों के सिलेक्शन के बाद इन चार लोगों के नामए तय

अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए कई लोगों ने अप्लाई किया था। जिसमें 12 लोगों ने सितंबर 2019 में पहले लेवल को पार कर लिया था। इंडियन एयर फोर्स के अंदर आने वाले एयरोस्पेस मेडिसिन संस्थान में इन सभी का चयन हुआ। कई चरणों के सिलेक्शन के बाद इन चार लोगों के नाम इसरो और आईएएम ने तय किए गए। जिन्हें 2020 की शुरुआत में ट्रेनिंग के लिए रूस भेजा गया था। कोरोना महामारी की वजह से इन चारों को ट्रेनिंग लेने में देरी हुई।

चारों पायलटों ने रूस में ली ट्रेनिंग

चारों पायलटों ने कोविड महामारी के दौरान रूस के ज्वयोज्दनी गोरोडोक शहर में अपनी एक साल की ट्रेनिंग कोर्स को पूरा किया। अब इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) की एक यूनिट में उन्हें गगनयान मिशन के बारे में डिटेल से बताया जा रहा है। इन सभी को बेंगलुरू में एस्ट्रोनोट ट्रेनिंग फैसिलिटी में भी ट्रेनिंग दी गई है। मंगलवार को ये सभी लोग इसरो की वीएसएससी फैसिलिटी में मौजूद रहेंगे, जहां इनके नाम का आधिकारीक ऐलान होगा।

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Jan 23 2024, 13:21

इस बार 'नारी शक्ति' पर केंद्रित होंगी गणतंत्र दिवस की झाकियां, जानिए कर्तव्य पथ पर क्या दिखाएगा आपका राज्य ?

 'विकसित भारत' और 'भारत-लोकतंत्र की मातृका' थीम के साथ, 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर 75वीं गणतंत्र दिवस परेड महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित होगी। विषयों का चयन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों के अनुरूप किया गया है कि 'भारत वास्तव में लोकतंत्र की जननी है'। इस गणतंत्र दिवस पर, झांकियां कर्तव्य पथ पर 'महिला सशक्तिकरण' को प्रदर्शित करने के लिए तैयार हैं, क्योंकि केंद्र का लक्ष्य 'विकसित भारत' के आदर्श वाक्य के साथ कार्यक्रम को महिला केंद्रित बनाना है।

विशेष रूप से, पहली बार, परेड की शुरुआत भारतीय संगीत वाद्ययंत्र बजाने वाली 100 महिला कलाकारों द्वारा की जाएगी। परेड की शुरुआत महिला कलाकारों द्वारा बजाए जाने वाले शंख, नादस्वरम, नगाड़ा आदि संगीत के साथ होगी। कुल 25 झांकियां, जिनमें 16 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश और नौ मंत्रालय और विभाग शामिल हैं, परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर चलेंगे। गणतंत्र दिवस का हिस्सा बनने वाली झांकियाँ अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, मणिपुर, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, लद्दाख, तमिलनाडु, गुजरात, मेघालय, झारखंड, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना से होंगी। 

वहीं, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), वैज्ञानिक और औद्योगिक केंद्र अनुसंधान (CSIR), भारत चुनाव आयोग, और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) की झांकियां भी कर्तव्य पथ पर प्रदर्शन करेंगी।

मणिपुर की झांकी

गणतंत्र दिवस के लिए मणिपुर की झांकी सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रदर्शित करेगी। इसमें महिलाओं को कमल के तने के नाजुक रेशों से पारंपरिक 'चरखे' का उपयोग करके सूत बनाने का काम करते हुए दिखाया जाएगा। झांकी के सामने वाले हिस्से में एक महिला को मणिपुर की लोकतक झील से कमल के डंठल इकट्ठा करते हुए दिखाया जाएगा, जबकि किनारों पर महिलाओं को नावों पर सवार होते हुए और कमल के डंठल इकट्ठा करते हुए दिखाया जाएगा। झांकी में मणिपुर में सदियों पुराने सभी महिलाओं के बाजार 'इमा कीथेल' की प्रतिकृति के साथ-साथ मणिपुरी महिलाओं द्वारा आविष्कार किए गए लोकप्रिय कपड़े और भारत की पहली कमल रेशम निर्माता बिजयशांति टोंगब्रम द्वारा कमल रेशम बनाने की प्रक्रिया भी शामिल होगी।

आंध्र प्रदेश की झांकी

आंध्र प्रदेश की गणतंत्र दिवस की झांकी स्कूली शिक्षा में क्रांति लाने और छात्रों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी होने के लिए तैयार करने के विषय पर केंद्रित होगी। 

लद्दाख की झांकी

दूसरी ओर, लद्दाख की झांकी में भारतीय महिला आइस हॉकी टीम को उजागर किया जाएगा, जिसमें निपुण लद्दाखी महिलाएं शामिल होंगी, जो खेलों में अपनी उपलब्धियों और योगदान को प्रदर्शित करेंगी।

मध्य प्रदेश की झांकी

गणतंत्र दिवस के लिए मध्य प्रदेश की झांकी कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को विकास प्रक्रिया में एकीकृत करने में राज्य की उपलब्धियों को प्रदर्शित करेगी। झांकी आधुनिक सेवा क्षेत्र, लघु उद्योग और पारंपरिक डोमेन सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को उजागर करेगी। इसमें भारतीय वायु सेना में मध्य प्रदेश की पहली महिला फाइटर पायलट अवनी चतुर्वेदी के साथ एक फाइटर प्लेन का मॉडल भी होगा। झांकी में बर्तनों पर पेंटिंग करती महिला कलाकारों, चंदेरी के बादल महल द्वार और विश्व स्तर पर प्रसिद्ध चंदेरी, महेश्वर और बाग प्रिंट साड़ियों के बुनकरों को भी दर्शाया जाएगा।

राजस्थान की झांकी

गणतंत्र दिवस के लिए राजस्थान की झांकी महिला हस्तशिल्प उद्योगों के विकास और राज्य की उत्सव संस्कृति को प्रदर्शित करेगी। झांकी में राजस्थान का प्रसिद्ध घूमर नृत्य, नर्तक का पुतला और भक्ति और शक्ति की प्रतीक मीरा बाई की मूर्ति होगी। इसके अतिरिक्त, यह राज्य की समृद्ध हस्तशिल्प परंपराओं को उजागर करेगा, जिसमें बंधेज, बगरू प्रिंट और एप्लिक वर्क शामिल हैं।

हरियाणा की झांकी

हरियाणा की गणतंत्र दिवस की झांकी सरकारी कार्यक्रम 'मेरा परिवार - मेरी पहचान' के माध्यम से राज्य में महिला सशक्तिकरण को प्रदर्शित करेगी। झांकी में हरियाणवी महिलाओं को डिजिटल उपकरण पकड़े हुए दिखाया जाएगा, जो डिजिटल इंडिया पहल के प्रभाव का प्रतीक है, जो उन्हें एक क्लिक से सरकारी योजनाओं तक पहुंचने में सक्षम बनाता है।

ओडिशा की झांकी

ओडिशा की गणतंत्र दिवस की झांकी हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को उजागर करेगी, पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और प्रचार में उनकी भूमिका पर जोर देगी।

छत्तीसगढ़ की झांकी

इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर, छत्तीसगढ़ की झांकी में राष्ट्रीय राजधानी के कर्तव्य पथ पर सामुदायिक निर्णय लेने की 600 वर्ष पुरानी आदिवासी परंपरा, बस्तर के 'मुरिया दरबार' को प्रदर्शित किया जाएगा। 'मुरिया दरबार', 600 वर्षों के इतिहास के साथ लोगों की संसद का एक अनूठा रूप है, जो अभी भी हर साल बस्तर दशहरा के समापन पर आदिवासियों को एक साथ लाता है जो कुल 75 दिनों तक चलता है। छत्तीसगढ़ की झांकी का विषय, 'बस्तर की आदिम जन संसद: मुरिया दरबार', इस वर्ष के राष्ट्रीय विषय, 'भारत लोकतंत्र की जननी है' के अनुरूप है। यह झांकी निर्णय लेने में पुरुषों और महिलाओं दोनों की समान भागीदारी को रेखांकित करती है, जो बस्तर आदिवासी समुदाय के महिला-प्रधान पहलू को दर्शाती है। छत्तीसगढ़ की झांकी बस्तर में आदिवासी समुदायों में महिलाओं के प्रभुत्व को प्रदर्शित करेगी, जिसमें उनकी सांस्कृतिक विरासत के प्रतिनिधित्व के रूप में पारंपरिक बेल-धातु और टेराकोटा कलाकृतियाँ शामिल होंगी।

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Jan 21 2024, 14:05

अंतरिक्ष से भगवान राम का मंदिर देखा आपने? ISRO की सैटेलाइट ने खींची शानदार तस्वीर

डेस्क: अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो रहा है। 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देशभर के साधु-संत इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। सभी लोग अब अयोध्या पहुंचने लगे हैं। कई फिल्मी सितारे भी अयोध्या पहुंचने के लिए विमान में सवार हो चुके हैं। रामभक्तों को इस खास दिन का बेसब्री से इंतजार है। अलग-अलग राज्यों, मंदिरों तथा धार्मिक स्थलों से भगवान राम के लिए उपहार भेजे जा रहे हैं। कभी कोई ताला तो कभी कोई लड्डू प्रसाद अयोध्या भेज रहा है। वहीं कोई ऐसा भी है जो अयोध्या शहर भर में रंगोली बनाने में जुटा हुआ है।

स्पेस से कैसा दिख रहा राम मंदिर

लेकिन क्या आपने सोचा कि अयोध्या स्पेस से कैसा दिख रहा होगा। अगर नहीं सोचा और आप यदि कल्पना भी नहीं कर पा रहे हैं कि अयोध्या में तैयार हो रहा राम मंदिर स्पेस से कैसा दिखता है तो इसकी तस्वीर हम आपको दिखाने वाले हैं। दरअसल ISRO के नेशनल रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट ने अयोध्या की एक तस्वीर खींची है। इस तस्वीर को स्पेस से ली गई है, जिसमें भगवान राम का भव्य मंदिर दिख रहा है। अंतरिक्ष से भगवान राम का मंदिर कैसा दिखता है, इस तस्वीर के जरिए स्पष्ट हो रहा है। बता दें कि इस तस्वीर में सरयू नदी और अयोध्या शहर पूरी तरह दिख रहा है।

इसरो ने खीची शानदार तस्वीर

इसरो द्वारा खींची गई तस्वीर में अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को पीले रंग से मार्क किया गया है। इस तस्वीर को देखकर राम मंदिर की भव्यता का एहसास हो रहा है। बता दें कि 22 जनवरी को होने वाली प्राण प्रतिष्ठा समारोह का सभी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। 21 जनवरी को अनुष्ठान का छठवां दिन है जो आज शाम तक खत्म हो जाएगा। वहीं रामलला की मूर्ति को 21 जनवरी की शाम को ही नए मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इसके बाद 22 जनवरी को करोड़ों श्रद्धालुओं के सामने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा अपने आप में एक ऐतिहासिक पल है जिसका हर भारतीय को इंतजार है।

India

Jan 08 2024, 15:54

आइए, देश के अंतरिक्ष कार्यक्रमों में साथ मिलकर काम करें..', IIT बॉम्बे में स्टूडेंट्स से बोले ISRO चीफ एस सोमनाथ

हाल ही में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष, एस सोमनाथ ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे (IIT Bombay) द्वारा आयोजित वार्षिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी उत्सव, टेकफेस्ट के दौरान छात्रों की एक सभा को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने छात्रों से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से योगदान देने और इसरो में शामिल होने की अपील की।

रिपोर्ट के अनुसार, ISRO चीफ सोमनाथ ने कहा कि, "मुझे यह देखकर खुशी होगी कि अधिक से अधिक IITan अंतरिक्ष कार्यक्रम में शामिल होंगे और देश की अंतरिक्ष परियोजनाओं के निर्माण में भाग लेंगे।" जानकारी के मुताबिक, अपने भाषण के दौरान उन्होंने ISRO की भविष्य की परियोजनाओं पर चर्चा की, जिसमें मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान, चंद्रमा पर मनुष्यों को भेजने के मिशन और चंद्रमा आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण शामिल है, जिसे इसरो ने 2047 तक निष्पादित करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने 2035 तक 'भारत अंतरिक्ष स्टेशन' (भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन) के प्रक्षेपण का भी उल्लेख किया, जिसका प्रारंभिक चरण 2028 निर्धारित किया गया था।

छात्रों को उन्होंने बताया कि ISRO भारत में विभिन्न संस्थानों के साथ विशेष रूप से सामग्री विज्ञान और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में संभावित अनुसंधान अवसरों की तलाश करेगा। उन्होंने विशेष रूप से IIT बॉम्बे से कक्षा में सेवाओं के लिए रोबोटिक गतिविधियों में अपनी विशेषज्ञता का योगदान देने का आह्वान किया। अपने भाषण के बाद उन्होंने छात्रों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब दिये। उन्होंने इस चिंता का समाधान किया कि कितने छात्र आकर्षक अंतरराष्ट्रीय नौकरियों का विकल्प चुनते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने एक उदाहरण का जिक्र किया जब उनकी टीम इंजीनियरों की भर्ती के लिए एक IIT में गई थी, लेकिन प्रेजेंटेशन में वेतन संरचना प्रदर्शित करने पर 60 फीसदी उम्मीदवार बाहर चले गए। उन्होंने देश के अंतरिक्ष प्रयासों में योगदान के महत्व पर जोर देते हुए छात्रों को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के लिए काम करने पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया।