भारत ने 31 प्रीडेटर ड्रोन खरीदने के लिए अमेरिका के साथ किया समझौता

अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि भारत सरकार-से-सरकार ढांचे के तहत अमेरिकी रक्षा प्रमुख जनरल एटॉमिक्स से 31 प्रीडेटर ड्रोन खरीदेगा। दोनों देशों ने आज बहुप्रतीक्षित सौदे पर हस्ताक्षर किए।

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भारतीय नौसेना को 15 सी गार्जियन ड्रोन मिलेंगे, जबकि भारतीय वायु सेना और सेना को आठ-आठ स्काई गार्जियन ड्रोन मिलेंगे। 32000 करोड़ रुपये के इस सौदे के तहत भारत में रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल सुविधा भी शुरू की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने इस सौदे पर हस्ताक्षर किए। सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने पिछले सप्ताह 31 प्रीडेटर ड्रोन के अधिग्रहण को मंजूरी दी।

इन अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने के लिए सैन्य और कॉर्पोरेट अधिकारियों की अमेरिकी टीम भारत में है। नौसेना प्रणालियों के लिए संयुक्त सचिव और अधिग्रहण प्रबंधक सहित शीर्ष भारतीय रक्षा अधिकारी हस्ताक्षर समारोह के दौरान मौजूद रहने वाले थे। भारत कई वर्षों से अमेरिका के साथ इस सौदे पर चर्चा कर रहा था, लेकिन कुछ सप्ताह पहले रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में अंतिम बाधाएं दूर हो गईं।

प्रिडेटर ड्रोन क्या हैं?

MQ-9B 'हंटर-किलर' ड्रोन सशस्त्र बलों के निगरानी तंत्र को मजबूत करेंगे, खासकर चीन के साथ विवादित सीमा पर। पिछले साल जून में, रक्षा मंत्रालय ने सरकार-से-सरकार ढांचे के तहत अमेरिका से MQ-9B प्रीडेटर सशस्त्र ड्रोन की खरीद को मंजूरी दी थी। MQ-9B ड्रोन MQ-9 "रीपर" का एक प्रकार है, जिसका उपयोग हेलफायर मिसाइल के संशोधित संस्करण को लॉन्च करने के लिए किया गया था, जिसने जुलाई 2022 में काबुल के मध्य में अल-कायदा नेता अयमान अल-जवाहिरी को मार गिराया था। उच्च ऊंचाई वाले लंबे समय तक चलने वाले ड्रोन 35 घंटे से अधिक समय तक हवा में रहने में सक्षम हैं और चार हेलफायर मिसाइल और लगभग 450 किलोग्राम बम ले जा सकते हैं।

इस डील से ये साबित होता है कि भारत लगातार अपनी सेना को और मजबूत कर रहा है साथ ही अपनी सीमाएँ सुरक्षित करने में अग्रसर रूप से काम कर रहा है। अमेरिका के साथ इस खरीद से भारत को बहुत लाभ होगा साथ ही रिश्ते मज़बूत होंगे।

क्या सलमान खान से बदला ही है लॉरेंस बिश्नोई गैंग का इरादा, कहीं नया दाऊद बनने का तो नहीं है इरादा?

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बाबा सिद्दीकी हत्याकांड की पूरे देश में चर्चा है। इस हत्याकांड की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली है। 8 साल से जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का खौफ चरम पर है। लॉरेंस बिश्नोई जिस तरह की चालें चल रहा है, उससे ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या वो अंडरवर्ल्‍ड डॉन दाऊद इब्राह‍िम बनन चाहता है? दरअसल, जो काम डी गैंग नहीं कर सका, वह काम लॉरेंस बिश्नोई गैंग कर रहा है। उत्तर भारत खासतौर पर हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान में खौफ का राज कायम करने के बाद मायानगरी परप कब्जे की फिराक में है।

बाबा सिद्दकी का अंडरवर्ल्ड कनेक्शन था, इंटेलिजेंस एजेंसियों को इसकी जानकारी थी। कुछ सूत्रों का कहना है कि कभी देश में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का दबदबा हुआ करता था। दाऊद के करीबी बाबा सिद्दीकी को मारकर लॉरेंस बिश्नोई देश में वही दबदबा खुद का बनाना चाहता है।

दरअसल, लॉरेंस बिश्नोई जब महज पांच साल का था उस समय बॉलीवुड एक्टर सलमान खान से जुड़ा काला हिरण शिकार का मामला 1998 में राजस्थान में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान सामने आया था। इस घटना के कारण बिश्नोई समाज काफी नाराज हो गया। आलम यह रहा कि छब्बीस साल बाद जेल में रहते हुए भी कुख्यात गैंगस्टर का सलमान के प्रति गहरा आक्रोश सुर्खियों में बना हुआ है।

सलमान खान के साथ 26 साल पुरानी दुश्मनी को अब लॉरेंस हर हाल में मुकाम तक पहुंचाना चाह रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे पहले उसे बॉलीवुड से डी कंपनी को बेदखल करना होगा। बाबा सिद्दीकी की हत्या इसी दिशा में बढ़ाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। अंडरवर्ल्ड डॉन और आतंकवादी दाऊद इब्राहिम की 'डी कंपनी' से बाबा सिद्दीकी की संबंध थे। यह जग जाहिर है।

रॉ के पूर्व अधिकारी एनके सूद की मानें तो बाबा सिद्दीकी बॉलिवुड और अंडरवर्ल्ड के बीच ब्रिज का काम करता था। कुछ सूत्रों का कहना है कि अंडरवर्ल्ड डॉन के करीबी सिद्दीकी को मारने के बाद लॉरेंस का नाम और ज्यादा चर्चा में आ गया है। वह धीरे-धीरे देश में सबसे बड़ा गैंगस्टर बनकर उभर रहा है। बाबा सिद्दीकी को मारकर उसने सीधे दाऊद इब्राहिम को टारगेट किया है और अब इस घटना के बाद लॉरेंस बिश्नोई और चर्चित हो गया है। ऐसे में बाबा सिद्दीकी की हत्या दो अलग-अलग समूहों डी कंपनी और लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के बीच बढ़ते सत्ता संघर्ष को भी उजागर करती है, जिनके दोनों प्रमुख मुंबई शहर से बहुत दूर बैठे हैं।

लॉरेंस बिश्नोई पहले से ही हफ्ता वसूली के लिए दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के रियल एस्टेट कारोबारियों को टारगेट करता रहा है। यहां तो किसी कारोबारी ने कभी लॉरेंस से टकराने की हिम्मत नहीं दिखाई, लेकिन मुंबई में टकराव होने की संभावना है. ऐसे में चुनौतियों का सामना करने के आदी हो चुके लॉरेंस ने मुंबई में पांव पसारने की योजना तैयार की है। इसके लिए हरियाणा और पंजाब से कई विश्वासपात्रों को मुंबई में स्थापित भी कर दिया है।

माना जा रहा है कि लॉरेंस के लक्ष्य में उसका खास गुर्गा संपत नेहरा भी साथ दे रहा है। यह बदमाश भी पंजाब की जेल में है, लेकिन अपने नेटवर्क के जरिए इसने मुंबई में बदमाशों की फौज खड़ी कर ली है। एनआईए ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के खिलाफ गैंगस्टर टेरर केस में एक चार्जशीट दाख‍िल की है। इसमें साफ-साफ बताया है क‍ि ज‍िस तरह दाऊद इब्राह‍िम ने 90 के दशक में गैंग खड़ा क‍िया था, ठीक उसी तरह लॉरेंस बिश्नोई भी टारगेट किलिंग, वसूली रैकेट के जर‍िये साम्राज्‍य खड़ा कर रहा है। उसके पास 700 से ज्‍यादा शूटर हैं। इनमें तमाम नाबाल‍िग हैं। लॉरेंस का गैंस 11 राज्‍यों और 6 देशों में फैला हुआ है। पंजाब में इसके सबसे ज्‍यादा शूटर होने की बात कही जा रही है।

भारत के सख्त एक्शन से बौखलाए जस्टिन ट्रूडो, बोले-हम लड़ाई नहीं चाहते, लेकिन…

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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की वजह से भारत और कनाडा के रिश्ते बेहद खराब दौर में पहुंच चुके हैं। भारत ने कनाडा के छह राजनियकों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। वहीं कनाडा में मौजूद अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया है। इनमें कार्यवाहक उच्चायुक्त स्टीवर्ट व्हीलर, उप उच्चायुक्त पैट्रिक हेबर्ट, सचिव मैरी कैथरीन जोली, सचिव लैन रॉस डेविड ट्राइट्स, सचिव एडम जेम्स चुइपका और सचिव पाउला ओर जुएला को 19 अक्टूबर की रात या उससे पहले भारत छोड़ने के लिए कहा गया है। इस बीच जस्टिन ट्रूडो का बयान सामने आया है।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि कनाडा ने पिछले साल एक कनाडाई नागरिक की हत्या में भारतीय अधिकारियों की संलिप्तता के आरोपों से संबंधित सभी जानकारी अपने 'फाइव आईज' भागीदारों, विशेष रूप से अमेरिका के साथ साझा की है। ट्रूडो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा,"भारत ने सोमवार को छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया और हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की जांच से जुड़े आरोपों खारिज कर दिया है। इसके बाद कनाडा ने अपने उच्चायुक्त और अन्य अधिकारियों को वापस देश बुला लिया है। जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि मैंने पीएम मोदी से बात की और कहा था कि भारत इस मामले को गंभीरता से ले।"

हमने जानबूझकर संबंधों में तनाव पैदा करना नहीं चुना-ट्रूडो

ट्रूडो ने कहा है कि हमने जानबूझकर कनाडा-भारत संबंधों में तनाव पैदा करने के लिए नहीं चुना है। भारत एक महत्वपूर्ण लोकतंत्र है, एक ऐसा देश है जिसके साथ हमारे लोगों के बीच गहरे ऐतिहासिक व्यापारिक संबंध हैं। हम यह लड़ाई नहीं चाहते हैं, लेकिन जाहिर तौर पर कनाडा की धरती पर एक कनाडाई की हत्या कुछ ऐसी बात नहीं है एक देश के रूप में हम इसे नजरअंदाज कर सकते हैं।

भारत सरकार पर सहयोग नहीं करने का आरोप

कैनेडियन पीएम ने आगे कहा, ‘एक ऐसा रास्ता था जहां हम जवाबदेही और बदलाव सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर सकते थे और ऐसे कदम उठा सकते थे जिससे कनाडाई सुरक्षित रहें, क्योंकि यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत, भारतीय सरकार ने उन प्रयासों को अस्वीकार कर दिया। इस समस्या से निपटने के हमारे प्रयासों को अस्वीकार कर दिया और इसने हमें इस बिंदु पर ला खड़ा किया कि हमें कनाडा में भारतीय राजनयिकों से लेकर आपराधिक संगठनों तक की गतिविधियों की चैन को बाधित करना पड़ा, जो पूरे देश में कनाडाई लोगों पर सीधे हिंसक प्रभाव डालती हैं।

ट्रूडो का गंभीर आरोप

ट्रूडो ने कहा, ‘जैसा कि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) कमिश्नर ने पहले कहा था, उनके पास साफ और ठोस सबूत है। भारत सरकार के एजेंट सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों में लगे हुए हैं। इसमें खुफिया जानकारी इकट्ठा करना, दक्षिण एशियाई कनाडाई लोगों को टारगेट कर हत्या सहित धमकी देने जैसे मामले शामिल हैं। ये अस्वीकार्य है। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस ने सबूत साझा करने के लिए भारतीय अधिकारियों से मुलाकात की, जिसमें ये निष्कर्ष निकाला गया कि भारत सरकार के 6 एजेंट आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं। भारत सरकार से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उन्होंने सहयोग नहीं किया।

आज एससीओ सम्मेलन में हिस्सा लेने इस्लामाबाद जा रहे हैं एस जयशंकर, जानें क्या-क्या है कार्यक्रम

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विदेश मंत्री एस जयशंकर आज (15 अक्टूबर) शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन में भाग लेने के लिए पाकिस्तान पहुंचेंगे। यह भारत का कई सालों के बाद पाकिस्तान में पहला उच्च-स्तरीय दौरा होगा। जबकि, दोनों देशों के बीच संबंध कई सालों से तनावपूर्ण हैं और यह अब भी बरकरार है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 15 अक्टूबर से दो दिवसीय एससीओ शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।

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एस जयशंकर आज शाम इस्लामाबाद पहुंचने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा एससीओ सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के लिए आयोजित स्वागत भोज में शामिल हो सकते हैं।इस्लामाबाद में होने वाली दो दिवसीय एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक के लिए 76 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और एससीओ के सात प्रतिनिधि पहुंचने शुरू हो गए हैं।

एससीओ शिखर सम्मेलन में अर्थव्यवस्था, व्यापार और पर्यावरण के क्षेत्र में चल रहे सहयोग पर चर्चा की जाएगी। शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ करेंगे। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि एससीओ सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व चीन, रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्रियों के साथ-साथ ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति और भारत के विदेश मंत्री करेंगे। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर आज इस्लामाबाद पहुंचेंगे।

भारत-पाकिस्तान के बीच नहीं होगी द्विपक्षीय वार्ता

भारत और पाकिस्तान दोनों पक्षों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि एससीओ के सरकार प्रमुखों की बैठक के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके पाकिस्तानी समकक्ष इशाक डार के बीच कोई द्विपक्षीय वार्ता नहीं होगी।

9 सालों बाद भारतीय विदेश मंत्री की पाक यात्रा

तकरीबन 9 साल बाद यह पहली बार होगा कि भारत के विदेश मंत्री पाकिस्तान की यात्रा करेंगे। भले ही कश्मीर मुद्दे और पाकिस्तान से उत्पन्न होने वाले सीमा पार आतंकवाद को लेकर दोनों पड़ोसियों के बीच संबंध ठंडे पड़े हैं। आखिरी बार दिसंबर 2015 में सुषमा स्वराज पाकिस्तान गई थीं, जब उन्होंने अफगानिस्तान पर एक सम्मेलन में भाग लिया था।

भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण माहौल

पुलवामा आतंकी हमले और 2019 में बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत-पाकिस्तान संबंध गंभीर तनाव में आ गए थे। इसके बाद, अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाने के भारत के फैसले ने रिश्तों को और खराब कर दिया। पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी मई 2023 में गोवा में SCO देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने भारत आए थे, जो 12 वर्षों में किसी पाकिस्तानी विदेश मंत्री की पहली भारत यात्रा थी।

कनाडा के खिलाफ भारत का सख्त एक्शन, 6 राजनयिकों को निकाला

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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भारत के साथ रिश्ते तल्ख करने पर उतारू हैं। खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर मामले में कनाडा ने एक बार फिर भारत विरोधी बयान दिया है। जिसके बाद भारत ने सख्त एक्शन लेते हुए कनाडा के 6 राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। वहीं, कनाडा से अपने उच्चायुक्त और अन्य राजनायिकों को वापस बुला लिया है।

ट्रूडो सरकार की ओर से कनाडा में तैनात भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा और अन्य अफसरों को निगरानी सूची में शामिल करने के बाद भारत ने अपने इन सभी डिप्लोमेट्स को वापस बुलाने का फैसला किया है। साथ ही कनाडा के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। जिन 6 कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित करने का निर्णय लिया है, उनके नाम स्टीवर्ट रॉस व्हीलर (कार्यवाहक उच्चायुक्त), पैट्रिक हेबर्ट (उप उच्चायुक्त), मैरी कैथरीन जोली (प्रथम सचिव), लैन रॉस डेविड ट्राइट्स (प्रथम सचिव), एडम जेम्स चुइप्का (प्रथम सचिव) और पाउला ओरजुएला (प्रथम सचिव)। इन्हें शनिवार 19 अक्टूबर को रात 12 बजे से पहले भारत छोड़ने के लिए कहा गया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि कनाडा में जारी उग्रवाद और हिंसा के माहौल में, ट्रूडो सरकार के कार्यों ने हमारे राजनयिकों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। हमें उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की वर्तमान कनाडाई सरकार की प्रतिबद्धता पर कोई भरोसा नहीं है। लिहाजा भारत सरकार ने अपने उच्चायुक्त और अन्य संबंधित राजनयिकों व अधिकारियों को कनाडा से वापस बुलाने का फैसला किया है।

बता दें कि कनाडा में करीब 7 प्रतिशत भारतीय रहते हैं। इनमें सिखों की आबादी करीब 2 प्रतिशत है। सिख वहां का एक प्रभावशाली समुदाय बन चुका है। वहां पर सिखों की बड़ी पार्टी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी है, जिसकी अगुवाई जगमीत सिंह करता है। इस पार्टी से जुड़े अधिकतर नेता खालिस्तान समर्थक हैं और खुलकर भारत विरोधी एजेंडा चलाते हैं। भारत में खालिस्तानी आतंकवाद भड़काने में भी इसी पार्टी का बड़ा हाथ रहा है। भारत में अपराध कर भाग जाने वाले सिख आरोपियों को इस पार्टी की ओर से शरण दी जाती है। भारत की ओर से कई बार इन तत्वों पर अंकुश लगाने की मांग की गई। लेकिन सिख वोटों के लालच में ट्रूडो हमेशा इस मांग की अनदेखी करते रहे हैं।

पिछले साल कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद ट्रूडो को अपनी राजनीति चमकाने का और मौका मिल गया।ट्रूडो ने बिना जांच पूरी हुए भारत पर इस हत्या में शामिल होने का आरोप लगा दिया। साथ ही भारत के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा की ओर भी उंगली उठाई। भारत ने सख्ती के साथ न केवल ट्रूडो के इन आरोपों को खारिज किया बल्कि उनसे घटना के संबंध में ठोस सबूत भी मांगे लेकिन डेढ़ साल बाद भी ट्रूडो सरकार ये सबूत मुहैया नहीं करवा पाई है।

अब कनाडा में एक बार फिर चुनाव आने वाले हैं। ऐसे में एक बार फिर ट्रूडो सरकार ने खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या मामले को उठाया है। कनाडा की सरकार ने खालीस्तानी आतंकी निज्जर हत्याकांड की जांच में भारतीय हाई कमिश्नर और डिप्लोमेट्स को पर्सन ऑफ इंटरेस्ट बताया गया है।ट्रूडो को लगता है कि ये सब कर के उनको खालिस्तानियों के वोट हासिल कर सकेंगे।

महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव का बजेगा बिगुल, आज दोपहर में चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस*
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निर्वाचन आयोग आज महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनावों की घोषणा करेगा। चुनाव आयोग ने मंगलवार दोपहर साढ़े तीन बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर को समाप्त हो रहा है जबकि झारखंड विधानसभा का कार्यकाल अगले साल पांच जनवरी को समाप्त होने वाला है।चुनाव आयोग ने बकायदा पत्र जारी कर बताया है कि राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में दोपहर 3.30 बजे प्रेस कांफ्रेंस होगी, जिसमें चुनाव और मतगणना की तारीख का ऐलान किया जाएगा। इसके साथ ही आज यूपी उपचुनाव की तारीख का भी ऐलान हो सकता है। महाराष्ट्र में विधानसभा की 288 सीटें हैं जबकि झारखंड में विधानसभा की 81 सीटों पर चुनाव होने हैं। जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र में 26 नवंबर को और झारखंड में 29 दिसंबर को सरकार का कार्यकाल खत्म हो रहा है।चुनाव आयोग ने अगस्त में हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के चुनावों का ऐलान किया था। उम्मीद लगाई जा रही थी आयोग इसी के साथ महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों का भी ऐलान करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। *दिवाली, छठ को ध्यान में रखकर होगा तारीखों का ऐलान* बता दें कि चुनाव आयोग कई त्योहारों को ध्यान में रखते हुए तारीखों का ऐलान करेगा। दिवाली 29 अक्टूबर से 3 नवंबर तक है और 8 नवंबर को छठ पूजा है। झारखंड में छठ पूजा मनाई जाती है। पिछले दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में आयोग की टीम ने झारखंड का दौरा किया था। सभी पार्टियों से चुनाव को लेकर फीडबैक लिया गया था। नेताओं ने दीपावली, छठ के अलावा राज्य गठन का हवाला देते हुए 15 नवंबर के बाद चुनाव कराने का अनुरोध किया था। इस दौरान महाराष्ट्र में काम करने वाले बिहारी वोटर्स अपने घर चले जाते हैं। देव दीपावली भी नवंबर में है। इसलिए चुनाव आयोग नवंबर के दूसरे हफ्ते के अंत में चुनाव शुरू कर सकता है। इससे प्रवासी मतदाताओं को त्योहारों के बाद वापस आने का समय मिल जाएगा। *पिछली बार महाराष्ट्र और झारखंड में कितने फेज में हुए चुनाव* साल 2019 में यानी पिछला महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव एक चरण में ही करवाया गया था। 21 अक्टूबर को वोटिंग हुई थी और 24 अक्टूबर को रिजल्ट घोषित किया गया था। वहीं, झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 पांच फेज में करवाया गया था। पहले फेज की 30 नवंबर, दूसरे फेज की 7 दिसंबर, तीसरे फेज की 12 दिसंबर, चौथे फेज की 16 दिसंबर और पांचवें फेज की 20 दिसंबर को वोटिंग हुई थी। आयोग ने 23 दिसंबर को रिजल्ट जारी किया था।
बाबा सिद्दीकी को मिली थी Y कैटेगरी की सिक्योरिटी, फिर कैसे हो गई हत्या?

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महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की मुंबई में दशहरा उत्सव पर हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी।पूर्व मंत्री और एनसीपी अजित पवार गुट के नेता बाबा सिद्दीकी को Y श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी।जानकारी के मुताबिक 15 दिन पहले बाबा सिद्दीकी को जान से मारने की धमकी मिली थी और इसके बाद उनकी सुरक्षा को बढ़ा दिया गया था। उन्हें Y कैटेगरी की सुरक्षा दी गई थी, लेकिन इसके बाद भी शनिवार रात को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई।

बाबा की हत्या को लेकर उनकी सुरक्षा के मद्देनजर कई सवाल उठ रहे हैं। सवाल ये उठ रहे हैं कि बाबा सिद्दीकी को जब Y कैटेगरी की सिक्योरिटी मिली हुई थी फिर भी उनकी हत्या कैसे कर दी गई। हर किसी की जुबान पर लगभग यही बात है कि Y कैटेगरी की सिक्योरिटी होने के बावजूद राकांपा नेता को आरिपियों ने इतने नजदीक जाकर कैसे गोली मार दी? 

पटाखों के शोर के बीच फिल्मी अंदाज में मारी गोली

दरअसल, शनिवार रात मुंबई के बांद्रा ईस्ट इलाके में तीन लोगों ने बाबा सिद्दीकी के बेटे एवं विधायक जीशान सिद्दीकी के ऑफिस के बाहर फिल्मी अंदाज में 3 राउंड लगातार फायरिंग की। इसके बाद आरोपियों ने पटाखों के शोर के बीच गोली मारकर कथित तौर पर 66 साल के बाबा सिद्दीकी की हत्या कर दी। इसके बाद बाबा सिद्दीकी को लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

कानून और व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

‘वाई’ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त एवं सत्तारूढ़ पार्टी के नेता की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जो कानून व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटना के बाद कहा, यह भयावह घटना महाराष्ट्र में कानून और व्यवस्था की पूर्ण विफलता को उजागर करती है। सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और न्याय होना चाहिए।

वहीं,वरिष्ठ नेता शरद पवार ने भी राज्य सरकार को घेरा है. शरद पवार ने यह कहकर लोगों को खतरे से अवगत करा दिया है कि अगर गृह मंत्री और शासक इतनी सज्जनता से राज्य की गाड़ी को आगे बढ़ाएंगे तो यह आम लोगों के लिए खतरे की घंटी हो सकती है।

क्या होती है Y कैटेगरी की सुरक्षा? 

भारत सरकार उन लोगों को वाई लेवल की सुरक्षा देती है, जिनकी जान को खतरा होता है। यह सुरक्षा कवर का चौथा स्तर है। सुरक्षा दल में 11 लोग होते हैं, जिनमें 1 से 2 पुलिस अधिकारी शामिल होते हैं। इसमें दो पीएसओ भी होते हैं, जो निजी सुरक्षा गार्ड होते हैं। ज़्यादातर मामलों में, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) या राज्य पुलिस के लोगों को वाई ग्रुप में सुरक्षा का जिम्मा सौंपा जाता है। सुरक्षा कवर के साथ एक कार आती है जिसमें बुनियादी सुरक्षा सुविधाएं होती हैं।

वरिष्ठ सरकारी नेता, न्यायाधीश और अन्य लोग जिन्हें जान का खतरा हो सकता है, उन्हें अक्सर वाई स्तर की सुरक्षा दी जाती है। वाई स्तर की सुरक्षा कवर मशहूर हस्तियों, व्यापारियों और पत्रकारों को भी दी जा सकती है, जिन्हें जान जाने का खतरा होता है।

ईरान पर बड़ा साइबर अटैक, निशाने पर रहे न्यूक्लियर ठिकानें, क्या इजराइल के बदले की शुरूआत?

#israel_iran_conflict_big_cyber_attack_on_iran_s_nuclear_bases 

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ईरान और इजरायल के बीच चल रहे मौजूदा तनाव के बीच शनिवार को ईरान के न्यूक्लियर साइट्स सहित कई प्रतिष्ठानों पर एक साथ साइबर अटैक हुए। साइबर हमले से सरकार की लगभग तीनों शाखाएं तबाह हुई। साथ ही न्यूक्लियर ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। वहां की न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका शाखा - भारी साइबर हमलों की चपेट में आ गई हैं और उनकी इंफॉर्मेशन को हैक कर लिया गया है।ये हमला ऐसे समय में हुआ है, जब इजरायल ने 1 अक्टूबर को ईरान के बैलिस्टिक मिसाइलों के हमले का करारा जवाब देने की कसम खाई है। ऐसे में कहा जा रहा है कि ईरान पर यह इजरायल का जवाबी हमले की दिशा में पहला कदम है।

साइबर अटैक के बाद ईरानी सेना की नींद उड़ी हुई है।ईरान के सुप्रीम काउंसिल ऑफ साइबर स्पेस के पूर्व सचिव फिरोजाबादी ने कहा है कि साइबर अटैक की जद में ईरानी की तीनों सेनाएं हैं। दावा किया जा रहा है कि साइबर अटैक की चपेट में ईरान का न्यूक्लियर पावर प्लांट, ईंधन वितरण सिस्टम और बंदरगाह परिवहन नेटवर्क भी आया है। 

इसके बाद अब सवाल उठ रहे है कि इजराइल बिना कोई जंग लड़े ईरान के न्यूक्लियर प्लांट को तबाह करने की ठान चुका है? दरअसल, माना जा रहा है कि इजरायल ईरान को आर्थिक चोट पहुंचाने के मूड में हैं। इसलिए न्यूक्लियर प्लांट के साथ साथ इजरायल ईरान के तेल ठिकानों पर भी विस्फोट करने की तैयारी में है ताकि ईरानी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह चौपट किया जा सके

इजराइल के टारगेट पर ईरान के ये न्यूक्लियर प्लांट

• इजराइल के टारगेट पर ईरान के परमाणु संयंत्रों में सबसे पहले फार्दो है। जो कि एक न्यूक्लियर एनरिचमेंट प्लांट है। 2009 से ऑपरेशनल है। ये चट्टानों के नीचे बना है। इसकी तेल अवीव से दूरी 1842 किमी है।

• इसी तरह अराक न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर भी टारगेट पर है, जो 2006 में बनकर तैयार हुआ था। यहां रेडियो आइसोटोप प्रोडक्शन होता है।

• इसके अलावा नतांज न्यूक्लियर एनरिचमेंट प्लांट है जो 2004 से ऑपरेशनल है। ये एक अंडरग्राउंड प्लांट है। इसकी तेल अवीव से दूरी 2027 किमी है।

• इस्फहान न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर चीन के सहयोग से बना है। इसमें 3000 से ज्यादा साइंटिस्ट काम करते हैं। इजराइल यहां भी हमला कर सकता है।

• आगे बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट है जो रूस के सहयोग से बना है। 2010 से ऑपरेशनल है। इसकी तेल अवीव से दूरी 2072 किमी है।

ईरान की 7 बड़ी रिफाइनरी भी टारगेट पर

• पहले नंबर पर है अबादान रिफाइनरी.

• दूसरे नंबर पर है इस्फहान रिफाइनरी.

• तीसरे नंबर पर है अराक रिफाइनरी.

• चौथे नंबर पर है बंदर अब्बास रिफाइनरी.

• पांचवें नंबर पर है तेहरान रिफाइनरी.

• छठे नंबर पर है अरवांद रिफाइनरी.

• सातवें नंबर पर है लावन आइलैंड रिफाइनरी।

इजराइल के इस प्लान से पूरे अरब में खलबली मच गई है क्योंकि ईरानी परमाणु संयंत्रों और तेल ठिकानों पर हमले का मतलब पूरे अरब में जंग फैलना होगा और इसके साथ ही पूरी दुनिया में तेल के दामों भी आग लगना तय है। अरब के कई देशों ने अमेरिका से अपील की है कि इजराइल को इस तरह के हमले करने से रोका जाए, लेकिन इजरायल के इस प्लान में अमेरिका भी शामिल है और प्लान सिर्फ इतना ही नहीं है।

बता दें कि हाल ही में हिजबुल्‍लाह के सदस्‍यों पर पैजर अटैक हुआ, जिससे ये आतंकी संगठन ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया सहम गई थी। पैजर में फिट किये गए बम फट रहे थे और लोग सड़कों पर मर रहे थे। ऐसा आरोप है कि हिजबुल्‍लाह पर ये पैजर अटैक इजरायल की सीक्रेट यूनिट 8200 ने अंजाम दिया था। इसके बाद कई वॉकी-टॉकी भी ब्‍लास्‍ट हुए थे।

राम गोपाल ने मुस्लिम घर में भगवा झंडा फहराया! सपा ने शेयर किया VIDEO, बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप

#bahraich_violence_samajwadi_partyshares_video 

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बहराइच हिंसा पर सियासत तेज है। उत्‍तर प्रदेश के बहराइच में रविवार को दिन से लेकर रात तक बवाल होता रहा। महसी तहसील के महाराजगंज बाजार में देवी दुर्गा की मूर्ति के विसर्जन जुलूस के दौरान गोलीबारी और पथराव हो गया। इसमें 22 वर्षीय एक युवक राम गोपाल मिश्रा की मौत हो गई। कई लोग घायल भी हो गए। अब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक युवक मुस्लिम के घर की छत पर लगा झंडा नोचकर गिरा देता है। फिर उसकी जगह भगवा झंडा लहराता नजर आ रहा है।

समाजवादी पार्टी ने ये वीडियो शेयर किया है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए समाजवादी पार्टी की ओर से लिखा गया, बहराइच में जिस गोपाल को गोली लगी है, उसका वीडियो देखिए। गोपाल एक मुस्लिम घर में जबरन घुसा। वहां से हरा झंडा उतारा फेंका और जबरन भगवा झंडा लहराया। अब इस मासूम गोपाल के मन में ये करने का जहर किसने भरा? कौन इस साजिश में शामिल है ये समझना कठिन नहीं है।

सबमें भाजपा और भाजपा के सत्तालोभी नेता शामिल-सपा

इसी पोस्ट में सपा ने आगे लिखा, इस सबमें भाजपा और भाजपा के सत्तालोभी नेता शामिल हैं, जो अगले चुनाव तक यूपी के माहौल को दंगा-फसाद में झोंककर चुनाव जीतना चाहते हैं। अंततः एक मासूम से दंगाई बने गोपाल ने भाजपाई सियासत के चक्कर में अपनी जान गंवा दी। बहराइच का मामला पूरी तरह से इंटेलिजेंस फेल्योर, पुलिस फेल्योर, भाजपाई साजिश और भाजपाई सत्तालोभी कुकृत्य का परिणाम है।

बीजेपी का पलटवार

बीजेपी विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने इस वीडियो को शेयर करने वालों पर पलटवार किया है। उन्‍होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा है- 'ये तब हुआ जब विसर्जन के दौरान इसी घर से अकारण मां दुर्गा प्रतिमा पर पथराव किया गया, जब चरमपंथियों ने मां दुर्गा की प्रतिमा को अपवित्र करने का प्रयास किया, जब मां भक्तों पर कातिलाना हमला हुआ, बाद में इसी घर में रखे हथियारों से हुई फायरिंग में राम गोपाल मिश्रा को कई गोलियां मारीं गईं। एकतरफा वीडियो बनवाकर हत्यारों को बचा नहीं पाएगा कोई। ऐसी कार्रवाई होगी कि पीढ़ियां याद करेंगी।'

अर्थशास्त्र के नोबेल का हुआ ऐलान, जानें किसे और क्यों मिला ये पुरस्कार

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रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने अर्थिक क्षेत्र में योगदान के लिए 2024 के नोबेल पुरस्कार का एलान कर दिया है। आर्थिक विज्ञान के क्षेत्र में अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में दिया जाने वाला स्वेरिग्स रिक्सबैंक पुरस्कार डारोन ऐसमोग्लू, साइमन जॉनसन और जेम्स ए. रॉबिन्सन को दिया गया है। उन्हें यह पुरस्कार इस बात पर रिसर्च के लिए मिला है कि संस्थान कैसे बनते हैं और लोगों की खुशहाली को कैसे प्रभावित करते हैं। उनकी रिसर्च बताती है कि मजबूत और निष्पक्ष संस्थान जैसे-अच्छी सरकारें और कानून व्यवस्था लोगों की जिंदगी पर सकारात्मक असर डालते हैं।

रॉयल स्वीडिश अकेडमी ऑफ साइंसेज की नोबेल समिति ने कहा कि तीनों अर्थशास्त्रियों ने ‘किसी देश की समृद्धि के लिए सामाजिक संस्थाओं के महत्व को प्रदर्शित किया है।’ समिति ने कहा, ‘‘कानून के खराब शासन वाले समाज और आबादी का शोषण करने वाली संस्थाएं वृद्धि या बेहतर बदलाव नहीं लाती हैं। पुरस्कार विजेताओं के शोध से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि ऐसा क्यों होता है।'’

नोबेल पुरस्कार समिति ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर एक पोस्ट में बताया कि संस्थाओं के गठन और परिवर्तन की परिस्थितियों को समझाने के लिए पुरस्कार विजेताओं का मॉडल तीन फैक्‍टरों पर आधारित है। पहला है संसाधनों के बंटवारे और समाज में निर्णय लेने की शक्ति (अभिजात वर्ग या जनता) को लेकर संघर्ष।सम‍ित‍ि ने आगे बताया, 'दूसरा यह है कि जनता को कभी-कभी सत्ता का इस्तेमाल करने का अवसर मिलता है। वे संगठित होकर और शासक वर्ग को धमकी देकर ऐसा कर सकते हैं। इसलिए समाज में सत्ता केवल निर्णय लेने की शक्ति से कहीं अधिक है। तीसरा है प्रतिबद्धता की समस्या, जिसका मतलब है कि अभिजात वर्ग के पास जनता को निर्णय लेने की शक्ति सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।'

कौन हैं ये तीनों इकोनॉमिस्ट?

डारोन ऐसमोग्लू, अर्मेनियाई मूल के तुर्की-अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं, जो मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में पढ़ाते हैं। वे वहां अर्थशास्त्र के एलिजाबेथ और जेम्स किलियन प्रोफेसर हैं। 1993 से MIT से जुड़े ऐसमोग्लू ने अपने शोध कार्य में राजनीतिक और आर्थिक संस्थाओं के प्रभाव को समझने का प्रयास किया है। उनका काम यह दर्शाता है कि कैसे संस्थाएं विकास और समृद्धि को प्रभावित करती हैं। उनके अलावा, साइमन जॉनसन और जेम्स ए. रॉबिन्सन भी अर्थशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले विद्वान हैं, जिन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था की जटिलताओं को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

2023 में इन्हें मिला था ये पुरस्कार

पिछले वर्ष 2023 में यह पुरस्कार क्लाउडिया गोल्डिन को प्रदान किया गया था, जिन्होंने महिलाओं के श्रम बाजार में स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण शोध किया। गोल्डिन के शोध ने दिखाया कि कैसे महिलाओं की कमाई और श्रम में भागीदारी में लिंग अंतर समय के साथ बदला है। उनके काम ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति के प्रति जागरूकता बढ़ाई और समाज में परिवर्तन के लिए प्रेरित किया।

नोबेल पुरस्‍कार का इतिहास

यह पुरस्कार आधिकारिक तौर पर 'एल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में आर्थिक विज्ञान में बैंक ऑफ स्वीडन पुरस्कार' के रूप में जाना जाता है। केंद्रीय बैंक ने इसे 19वीं सदी के स्वीडिश व्यवसायी और रसायनज्ञ नोबेल की याद में स्थापित किया था। नोबेल ने डायनामाइट का आविष्कार किया था और पांच नोबेल पुरस्कारों की स्थापना की थी। रैग्नर फ्रिश और जान टिनबर्गेन को 1969 में इसका पहला विजेता घोषित किया गया था।

हालांकि, नोबेल के शुद्धतावादी इस बात पर जोर देते हैं कि अर्थशास्त्र पुरस्कार तकनीकी रूप से नोबेल पुरस्कार नहीं है। लेकिन, इसे हमेशा अन्य पुरस्कारों के साथ 10 दिसंबर को नोबेल की पुण्यतिथि पर दिया जाता है।