एमपी के हरदा में दिव्यांग दलित लड़के ने किया पेशाब तो भड़का रिटायर्ड अधिकारी, कपड़े उतारे और फिर..
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. मध्य प्रदेश के हरदा से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एक सेवानिवृत अफसर ने कथित तौर पर एक दलित दिव्यांग की पिटाई कर दी। घटना में अपराधी ने पीड़ित से उसकी शर्ट उतरवाकर नाली साफ करवाई। इस मामले का CCTV फुटेज सामने आने के पश्चात् पुलिस ने आरोपी सेवानिवृत अफसर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पीड़ित दिव्यांग नाबालिग है तथा उसकी उम्र 17 वर्ष है। यह घटना बृहस्पतिवार की प्रातः लगभग 10 बजे हुई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सेवानिवृत अफसर पीड़ित को पीटते हुए नाली की सफाई कराते नजर आ रहे हैं। पीड़ित का कहना है कि उसने कार के पास नाली में पेशाब किया था, जबकि आरोपी ने उस पर कार पर पेशाब करने का आरोप लगाते हुए उसकी पिटाई की। आरोपी आयकर विभाग से रिटायर्ड है। मामला हरदा नगर में विवेकानंद परिसर का है। 17 वर्षीय दलित युवक वहां से गुजर रहा था तथा उसने वहीं रुककर पेशाब किया। इसी पर परिसर में रहने वाले सेवानिवृत अफसर डीपी ओझा ने उसे पकड़ लिया और कार पर पेशाब करने के आरोप में पिटाई कर दी। आरोपी ने न सिर्फ उसकी पिटाई की, बल्कि युवक को नाली साफ करने के लिए मजबूर भी किया और जातिसूचक गालियाँ दीं। पिटाई से युवक घायल हो गया एवं वह वहां से चला गया। उसने हरदा कोतवाली में आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। घटना CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसका फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। एक पुलिस अफसर ने बताया कि घटना गुरुवार को हुई। रिटायर्ड अधिकारी ने नाबालिग पर आरोप लगाया कि उसने उसकी कार पर पेशाब किया, जिस पर लड़के ने इनकार किया तो आरोपी ने उसकी पिटाई कर दी। पुलिस अफसर ने बताया कि आरोपी ने युवक को अपनी शर्ट से नाली साफ करने के लिए भी मजबूर किया।
पीएम मोदी और भारत को अब्दुल्ला खानदान का शुक्रगुजार होना चाहिए', महबूबा मुफ्ती ने क्यों कही ये बात?*
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#kashmir_would_have_been_part_of_pakistan_why_pdp_chief_mufti_said_this *
जम्मू-कश्मीर में करीब 10 साल बाद विधानसभा चुनाव का आयोजन किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर से 370 हटने और लद्दाख के अलग होने के बाद ये पहला विधानसभा चुनाव है। सभी राजनीतिक दल चुनाव प्रचार में एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। इस बीच पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बड़ा बयान दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरोपों पर पलटवार करते हुए मुफ्ती ने कहा कि बीजेपी सरकार बनाने के लिए पीडीपी के दरवाजे पर आई थी। ये बात प्रधानमंत्री जी को याद होगा। यही नहीं, पीडीपी चीफ ने ये भी कहा कि अब्दुल्ला परिवार की वजह से भारत में कश्मीर है। अगर अब्दुल्ला खानदान ने तब पाकिस्तान का एजेंडा लागू किया होता तो जम्मू कश्मीर भारत के बदले पाकिस्तान में होता और आजाद होता। श्रीनगर में मीडिया को संबोधित करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि मुझे लगता है कि बीजेपी को शेख अब्दुल्ला खानदान का शुक्रगुजार होना चाहिए कि उमर अब्दुल्ला ने यहां उनके एजेंडे को लागू किया। जहां तक महबूबा मुफ्ती, मुफ्ती परिवार और पीडीपी का सवाल है तो प्रधानमंत्री मोदी को याद होगा कि सरकार बनाने के लिए वे 2-3 महीने तक हमारे दरवाजे पर थे। उन्होंने कहा कि हम जो भी शर्तें रखेंगे, वे हमारे साथ सरकार बनाने के लिए तैयार हैं और हमने शर्तें रखीं जैसे कि 370 से छेड़छाड़ नहीं किया जाएगा। सड़कें खोली जाएंगी, AFSPA हटाया जाएगा। पाकिस्तान और अलगाववादियों से बातचीत की जाएगी, जिसके लिए उन्होंने एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी बुलाया। वे खुद हमारे दरवाजे पर आए, जैसे वे उमर को मंत्री बनाने के लिए आए थे, देखिए अब वे क्या बोल रहे हैं? महबूबा मुफ्ती ने आगे कहा ये भी कि जब कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था तब उमर अब्दुल्ला ने कश्मीर के बारे में भारत का पक्ष पूरी दुनिया भर में फैलाया। महबूबा ने कहा कि मुफ़्ती परिवार ने कश्मीर में हुर्रियत के साथ बातचीत शुरू करवाई और युवाओं को हिंसा से दूर रखा। महबूबा ने कहा कि मोदी जी को शेख परिवार का आभारी होना चाहिए, जिनके प्रयासों से देश में जम्मू कश्मीर का विलय हुआ। उमर अब्दुल्ला जब बीजेपी में मंत्री थे, तब उन्होंने पोटा लाया, तब भाजपा, उमर को हर जगह घुमाती रही, ताकि यह दिखाया जा सके कि कश्मीर मुद्दा कोई मुद्दा नहीं है और यह केवल आतंकवाद से जुड़ा मुद्दा है। पाकिस्तान पर हमला किया जाना चाहिए और इस मामले को सुलझाया जाना चाहिए। मुझे लगता है कि बीजेपी को शेख परिवार का शुक्रगुजार होना चाहिए और उमर ने भी उन्हें यहां अपना एजेंडा लागू करने में मदद की। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों के तहत चुनाव होने हैं। तीन चरणों में पहले चरण का मतदान 18 सितंबर को संपन्न हो गया है। राज्य में दूसरे चरण का मतदान 25 सितंबर और तीसरे चरण का मतदान 1 अक्टूबर को होना है। वहीं चुनाव के नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। आपको बता दें कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में करीब 10 साल बाद चुनाव हो रहे हैं।
पीएम मोदी और भारत को अब्दुल्ला खानदान का शुक्रगुजार होना चाहिए', महबूबा मुफ्ती ने क्यों कही ये बात?

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जम्मू-कश्मीर में करीब 10 साल बाद विधानसभा चुनाव का आयोजन किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर से 370 हटने और लद्दाख के अलग होने के बाद ये पहला विधानसभा चुनाव है। सभी राजनीतिक दल चुनाव प्रचार में एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। इस बीच पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बड़ा बयान दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरोपों पर पलटवार करते हुए मुफ्ती ने कहा कि बीजेपी सरकार बनाने के लिए पीडीपी के दरवाजे पर आई थी। ये बात प्रधानमंत्री जी को याद होगा। यही नहीं, पीडीपी चीफ ने ये भी कहा कि अब्दुल्ला परिवार की वजह से भारत में कश्मीर है। अगर अब्दुल्ला खानदान ने तब पाकिस्तान का एजेंडा लागू किया होता तो जम्मू कश्मीर भारत के बदले पाकिस्तान में होता और आजाद होता।

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श्रीनगर में मीडिया को संबोधित करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि मुझे लगता है कि बीजेपी को शेख अब्दुल्ला खानदान का शुक्रगुजार होना चाहिए कि उमर अब्दुल्ला ने यहां उनके एजेंडे को लागू किया। जहां तक महबूबा मुफ्ती, मुफ्ती परिवार और पीडीपी का सवाल है तो प्रधानमंत्री मोदी को याद होगा कि सरकार बनाने के लिए वे 2-3 महीने तक हमारे दरवाजे पर थे।

उन्होंने कहा कि हम जो भी शर्तें रखेंगे, वे हमारे साथ सरकार बनाने के लिए तैयार हैं और हमने शर्तें रखीं जैसे कि 370 से छेड़छाड़ नहीं किया जाएगा। सड़कें खोली जाएंगी, AFSPA हटाया जाएगा। पाकिस्तान और अलगाववादियों से बातचीत की जाएगी, जिसके लिए उन्होंने एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी बुलाया। वे खुद हमारे दरवाजे पर आए, जैसे वे उमर को मंत्री बनाने के लिए आए थे, देखिए अब वे क्या बोल रहे हैं?

महबूबा मुफ्ती ने आगे कहा ये भी कि जब कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था तब उमर अब्दुल्ला ने कश्मीर के बारे में भारत का पक्ष पूरी दुनिया भर में फैलाया। महबूबा ने कहा कि मुफ़्ती परिवार ने कश्मीर में हुर्रियत के साथ बातचीत शुरू करवाई और युवाओं को हिंसा से दूर रखा। महबूबा ने कहा कि मोदी जी को शेख परिवार का आभारी होना चाहिए, जिनके प्रयासों से देश में जम्मू कश्मीर का विलय हुआ। उमर अब्दुल्ला जब बीजेपी में मंत्री थे, तब उन्होंने पोटा लाया, तब भाजपा, उमर को हर जगह घुमाती रही, ताकि यह दिखाया जा सके कि कश्मीर मुद्दा कोई मुद्दा नहीं है और यह केवल आतंकवाद से जुड़ा मुद्दा है। पाकिस्तान पर हमला किया जाना चाहिए और इस मामले को सुलझाया जाना चाहिए। मुझे लगता है कि बीजेपी को शेख परिवार का शुक्रगुजार होना चाहिए और उमर ने भी उन्हें यहां अपना एजेंडा लागू करने में मदद की।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों के तहत चुनाव होने हैं। तीन चरणों में पहले चरण का मतदान 18 सितंबर को संपन्न हो गया है। राज्य में दूसरे चरण का मतदान 25 सितंबर और तीसरे चरण का मतदान 1 अक्टूबर को होना है। वहीं चुनाव के नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। आपको बता दें कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में करीब 10 साल बाद चुनाव हो रहे हैं।

कांग्रेस सरकार ने गणपति-बप्पा को भी सलाखों में डाल दिया', PM-मोदी का विपक्ष पर हमला
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पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के वर्धा में पीएम विश्वकर्मा योजना की पहली वर्षगांठ पर कांग्रेस पर तीखा हमला किया, उन्हें सबसे भ्रष्ट पार्टी करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सदस्यों को गणपति पूजा से भी नफरत है तथा जब मैं गणेश पूजा में गया, तो उन्हें परेशानी होने लगी। पीएम मोदी ने बिना नाम लिए राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आज कांग्रेस के लोग विदेशी धरती पर जाकर देश को तोड़ने की बात करते हैं, जो भारतीय संस्कृति और आस्था का अपमान है। उन्होंने बताया कि पिछली सरकारों की दलित एवं पिछड़े विरोधी मानसिकता के कारण विश्वकर्मा समाज को आगे बढ़ने का अवसर नहीं प्राप्त हुआ। मोदी ने कहा कि पिछले 70 वर्षों में किसी भी सरकार ने ग्रामीण उद्योग और स्वदेशी पारंपरिक हुनर को बढ़ावा देने के लिए काम नहीं किया। बीते एक वर्ष में 8 लाख से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से महाराष्ट्र में 60 हजार से अधिक लोगों को ट्रेनिंग दी जा रही है। मोदी ने कहा कि कांग्रेस गणपति पूजा का भी विरोध करती है तथा तुष्टीकरण के लिए कुछ भी कर सकती है। उन्होंने कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने गणपति बप्पा की मूर्ति को पुलिस वैन में बंद करवा दिया, जिससे पूरा देश आक्रोशित है। उन्होंने कहा कि हमें परंपरा एवं प्रगति के साथ खड़ा रहना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है, क्योंकि 1932 में महात्मा गांधी ने अस्पृश्यता के खिलाफ अभियान आरम्भ किया था। उन्होंने बताया कि 6.5 लाख से अधिक विश्वकर्मा बंधुओं को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनकी कार्यकुशलता एवं आय में बढ़ोतरी हुई है। लाभार्थियों को 15 हजार रुपये का ई-वाउचर भी दिया जा रहा है, और एक वर्ष के अंदर 1,400 करोड़ रुपये का लोन दिया गया है। उन्होंने अमरावती में 'पीएम मित्र पार्क' की आधारशिला रखने की भी बात की, जिससे टेक्सटाइल इंडस्ट्री को वैश्विक बाजार में शीर्ष पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश का लक्ष्य है भारत की टेक्सटाइल सेक्टर के गौरव को पुनर्स्थापित करना, तथा इस दिशा में 7 पीएम मित्र पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। पीएम विश्वकर्मा योजना के एक साल पूरे होने पर 76 हजार लाभार्थियों को ऋण स्वीकृत किया गया, तथा मोदी ने कई लाभार्थियों को ऋण चेक प्रदान किए। यह योजना देश के 140 से अधिक जातियों के कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए आरम्भ की गई थी, जिसमें 17 से अधिक शिल्पकार एवं पारंपरिक कारीगर शामिल हैं। इन कारोबारियों को कम से कम ब्याज पर 3 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है।
एलजी के माध्यम से कोई न कोई षड़यंत्र ज़रूर रचेगी BJP', आतिशी ने लगाया बड़ा-आरोप
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीएम बनने जा रहीं AAP की नेता आतिशी ने भाजपा पर बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने उत्तर प्रदेश में बिजली की कीमत 250 गुना बढ़ा दी हैं। आतिशी ने कहा, "उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार ने 5 किलोवाट बिजली कनेक्शन की कीमत 118 प्रतिशत बढ़ा दी है। बीजेपी सरकार में नोएडा एवं गाजियाबाद में पावर कट लगे हैं। पावर कट और महंगी बिजली भाजपा का मॉडल है। इसलिए दिल्ली वालों के लिए आवश्यक है कि वे फिर से अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री बनाएं।" उन्होंने कहा, "4 महीने तक मैं मुख्यमंत्री रहूंगी तथा दिल्ली के लोगों के हितों की रक्षा करूंगी। मैं वादा करती हूं कि हम दिल्ली वालों का बिजली बिल नहीं बढ़ने देंगे। अरविंद केजरीवाल का बिजली मॉडल 24 घंटे सबसे सस्ती बिजली है। दिल्ली में 19 जून को 8400 मेगावॉट बिजली मांग के बावजूद पावर कट नहीं लगे। दिल्ली में 47 लाख परिवार का बिल जीरो आता है।" भाजपा शासित राज्यों का जिक्र करते हुए आतिशी ने कहा, "400 यूनिट के बिल की तुलना करें तो दिल्ली में यह 980 रुपए आता है, जबकि गुजरात में 9000 रुपए से अधिक, मध्य प्रदेश में 3800 और महाराष्ट्र में 4000 रुपए से अधिक का बिल आता है।" आतिशी ने कहा कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार बनेगी तभी सस्ती बिजली आएगी, वरना जो हम आज उत्तर प्रदेश में देख रहे हैं—महंगी बिजली और लंबी बिजली कटौती—वही दिल्ली में भी होगा। उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि एलजी के जरिए बीजेपी कोई न कोई साजिश जरूर रचेगी।
कांग्रेस में अनदेखी से कुमारी शैलजा खफा! प्रचार में नहीं दिख रहीं, कहीं बिगड़ न जाए खेल?*
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हरियाणा विधानसभा चुनाव की वोटिंग के लिए मुश्किल से 15 दिन का वक्त बचा है। इस बार कांग्रेस हरियाणा में अपने सत्ता के वनवास को खत्म करने की हरसंभव कोशिश कर रही है। हालांकी, विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में खेमेबाजी खुलकर सामने आ गई है। सांसद और कांग्रेस वर्किग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य कुमारी शैलजा फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व से खफा बताई जा रहीं हैं। पहले तो कांग्रेस ने दलित नेता कुमारी शैलजा को पूरी तरह से विधानसभा चुनाव में दरकिनार कर दिया है। आलम यह है कि अब शैलजा ने भी खुद चुनाव से दूरी बना ली है और एक सप्ताह से वह चुनाव प्रचार से दूर हैं और दिल्ली में आराम फरमा रही हैं। टिकटों के आवंटन में अपेक्षित सम्मान नहीं मिलने से नाराज शैलजा ने जहां फील्ड से दूरी बना रखी है। वहीं, बुधवार को नई दिल्ली में शैलजा कांग्रेस के चुनाव घोषणापत्र जारी करने के दौरान मंच पर कहीं नजर नहीं आई। शैलजा के विधानसभा चुनाव से दूरी बनाए जाने के चलते मामला गड़बड़ता नजर आ रहा है। *पोस्टरों से भी गायब हुईं शैलजा* बता दें कि शैलजा विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। अहम बात कि शैलजा सीएम पद पर भी दावा ठोक रही थी। अब हरियाणा में कांग्रेस पार्टी के पोस्टरों से भी शैलजा गायब हो गईं हैं। पार्टी के नेताओं और प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार के दौरान पोस्टरों में सैलजा को जगह नहीं दी है। जानकारी के अनुसार, हिसार जिले के 6 विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशियों के पोस्टरों से कुमारी शैलजा की फोटो नदारद है। हालांकि, हिसार विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी रामनिवास राडा के पोस्टर में सैलजा जरूर दिख रही हैं। लेकिन हांसी, नारनौंद, बरवाला, उकलाना, आदमपुर, नलवा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशियों ने अपने पोस्टरों में सैलजा को जगह नहीं दी है। इन पोस्टरों में हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा को भी जगह दी गई। *टिकटों के आवंटन में भी अनदेखी* हरियाणा में टिकटों के आवंटन से लेकर चुनाव घोषणापत्र जारी होने के दौरान कांग्रेस महासचिव शैलजा की अनदेखी से पार्टी में मतभेद ज्यादा गहरा गए हैं। विधानसभा चुनाव के टिकट बंटवारे में हुड्डा खेमे को ही तवज्जे मिली है और कुमारी सैलजा अपने 8 से 10 करीबी नेताओं को ही टिकट दिला सकी हैं। कांग्रेस में 72 टिकट पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थकों को मिले हैं, जबकि चार मौजूदा विधायकों समेत करीब 10 टिकटों पर कुमारी शैलजा को संतोष करना पड़ा है। *प्रदेश की 21 सीटों पर सैलजा का प्रभाव* कांग्रेस में अनदेखी के चलते शैलजा ने चुप्पी साधी हुई है। विधानसभा चुनाव में सैलजा की चुप्पी का कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा हरियाणा में कांग्रेस की सबसे बड़ी दलित चेहरा हैं। हरियाणा में करीब 20 फीसदी दलित मतदाता हैं। कुल 90 में से दलित समुदाय के लिए 17 विधानसभा सीटें सुरक्षित हैं, लेकिन सियासी प्रभाव उससे कहीं ज्यादा है। हरियाणा में करीब 21 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां वह प्रभाव रखती हैं। न नहीं है। *दलित समुदाय में बढ़ सकती है नाराजगी* कुमारी शैलजा के चुनावी कैंपेन से दूरी बनाए रखने के चलते दलित समुदाय में भी नाराजगी बढ़ सकती है। दलित वोटर किसी भी दल का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत राज्य में रखते हैं। 17 विधानसभा सीटें दलित समाज के लिए आरक्षित हैं, जहां पर दलित बहुल हैं। जबकि दलित समुदाय 35 विधानसभा सीटों पर महत्वपूर्ण रोल अदा करते हैं। शैलजा कांग्रेस की सबसे बड़ी दलित चेहरा हैं और उनके खामोशी से दलित वोटों में मैसेज सही नहीं जाएगा।
तिरुपति प्रसादम विवाद के बीच पवन कल्याण ने की 'सनातन धर्म रक्षण बोर्ड' बनाने की मांग, हिंदुओं से एकजुट होने की अपील

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विश्व प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर में मिलने वाले लड्डू में पशुओं की चर्बी के इस्तेमाल के दावे के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है। तिरुपति बालाजी मंदिर में लड्डू प्रसादम को लेकर जारी विवाद के बीच आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम और जनसेना पार्टी के मुखिया पवन कल्याण ने बयान जारी किया है। पवन कल्याण ने राष्ट्रीय स्तर पर सनातन धर्म रक्षण बोर्ड बनाने की मांग उठा दी है।

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आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने पूरे विवाद पर सोशल मीडिया पर कहा कि तिरुपति बालाजी के प्रसाद में एनिमल फैट (मछली का तेल, सूअर मांस का फैट और बीफ फैट) मिलाए जाने के मामले से हम सभी परेशान हैं। पवन कल्याण ने कहा कि तत्कालीन सरकार की ओर से गठित तिरुमाला तिरूपति देवस्थानम बोर्ड को कई सवालों के जवाब देने होंगे।

पवन कल्याण ने कहा है कि हमारी सरकार सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन यह मामला मंदिरों के अपमान, इसकी भूमि के मुद्दों और अन्य धार्मिक प्रथाओं पर प्रकाश डालता है। पवन कल्याण ने आगे कहा कि अब पूरे भारत में मंदिरों से संबंधित सभी मुद्दों को देखने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर 'सनातन धर्म रक्षण बोर्ड' का गठन करने का समय आ गया है।

आरोप लगे हैं कि आंध्र प्रदेश की पिछली वाईएसआरसीपी की सरकार में प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद को बनाने में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया गया। खुद राज्य के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने ये आरोप लगाए हैं। सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने दावा किया गया है कि गुजरात स्थित पशुधन प्रयोगशाला की तरफ से मिलावट की पुष्टि की गई है। टीडीपी ने कहा है कि प्रसाद के रूप में वितरित किए जाने वाले लड्डू बनाने के लिए गोमांस की चर्बी, मछली के तेल और ताड़ के तेल का प्रयोग किया जा रहा था। जिसके बाद पूरे देश में यह मुद्दा गरमा गया है और इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग उठ रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा मामलों को स्थानांतरित करने की मांग पर सीबीआई को फटकार लगाई

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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव बाद हिंसा के मामलों को पश्चिम बंगाल से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने की मांग पर शुक्रवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की खिंचाई की।

जांच एजेंसी ने एक स्थानांतरण याचिका दायर की थी जिसके बाद शीर्ष अदालत ने कहा, "बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी ने पश्चिम बंगाल में पूरी न्यायपालिका के खिलाफ कलंक लगाया है।"

अदालत ने याचिका में उन बयानों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए एजेंसी को अपनी याचिका वापस लेने का निर्देश दिया, जिसमें कहा गया था कि सभी अदालतों में मामलों की सुनवाई में शत्रुता है।

आप पश्चिम बंगाल की सभी अदालतों को शत्रुतापूर्ण बता रहे हैं। जिला न्यायपालिका के न्यायाधीश अपनी सुरक्षा नहीं कर सकते। आप कह रहे हैं कि सुनवाई ठीक से नहीं हुई,'' कोर्ट ने कहा।

अदालत ने याचिका का मसौदा तैयार करने वाले वकील को अवमानना नोटिस जारी करने की धमकी दी, साथ ही न्यायमूर्ति ओका ने चेतावनी दी, "यह मसौदा तैयार करने वाले के खिलाफ अवमानना नोटिस के लिए उपयुक्त मामला है।"

इस बीच, सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आक्षेप लगाने का कोई इरादा नहीं है।

हालाँकि, अदालत ने एक साधारण वापसी को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि याचिका में आरोपों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया था। यह सब काले और सफेद रंग में है l आप यह कैसे कर सकते हैं? बार और बेंच ने अदालत के हवाले से कहा, आपके अधिकारी को पहले पश्चिम बंगाल की अदालतों पर इस तरह के आरोप लगाने के लिए माफी मांगनी होगी।

एएसजी राजू ने अदालत से कठोर भाषा का उपयोग करने से परहेज करने का अनुरोध किया, इस बात पर जोर दिया कि न्यायपालिका के खिलाफ कोई भी टिप्पणी अनजाने में थी। अदालत ने याचिका खारिज कर दी और सीबीआई को नई याचिका दाखिल करने की इजाजत दे दी।

चीन से ही पूरा दुनिया में फैला कोरोना, COVID-19 की उत्पत्ति इस शहर से हुई, मिले सबूत

#strong_evidence_hints_covid_19_originated_from_wuhan_market

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कोविड-19 महामारी की शुरुआत कैसे हुई, यह रहस्य बना हुआ है। कोरोना वायरस का कहर साल 2019 से चीन में शुरू हुआ था, जिसके बाद धीरे-धीरे यह पूरी दुनिया में फैल गया। इस महामारी के फैलने के बाद तरह-तरह की बातें कहीं गई। कई तरह की परिकल्पनाएं सामने आई, लेकिन इसे स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। कई वैज्ञानिकों का मानना है कि SARS-CoV-2, कोरोनावायरस जो COVID-19 का कारण बनता है, जानवरों से मनुष्यों में फैला, जिसे जूनोटिक ट्रांसमिशन के रूप में जाना जाता है। कुछ शोधकर्ताओं ने कहा है कि वायरस चमगादड़ों में उत्पन्न हुआ। किसी ने कहा एक स्वाभाविक रूप से उभरने वाला वायरस जिसका प्रयोगशाला के अंदर अध्ययन किया गया और लीक हो गया। इनमें से किसी भी परिकल्पना के लिए अभी तक कोई निश्चित सबूत नहीं है।

वहीं, तमाम एक्सपर्ट्स ने दावा किया था कि कोरोना वायरस चीन की वुहान लैब से फैला था, लेकिन इसे लेकर विवाद चलता रहा। अमेरिका समेत कई देशों ने चीन पर वायरस फैलाने के आरोप लगाए थे, जबकि चीन इससे इनकार करता रहा। इस बीच, एक नए अध्ययन से पता चला है कि कोविड-19 संभवतः चीनी बाजार में संक्रमित जानवरों से उत्पन्न हुआ है। सेल जर्नल (पीयर-रिव्यू) में प्रकाशित, अध्ययन में मजबूत साक्ष्य का हवाला दिया गया है, जो कि वुहान के हुआनान सीफूड मार्केट से एकत्र किए गए 800 नमूनों पर आधारित है। नमूने चीनी अधिकारियों द्वारा जनवरी 2020 में एकत्र किए गए थे जब बाजार बंद था।

ये सैंपल जनवरी 2020 में बाजार बंद होने के बाद सीधे जानवरों या लोगों से नहीं, बल्कि जंगली जानवरों को बेचने वाले स्टॉल और नालियों की सतहों से लिए गए थे। इसके आधार पर शोधकर्ताओं ने कहा है कि कोरोना वायरस यहीं से फैला था।

जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी की को-ऑथर फ्लोरेंस डेबेर ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि वे निश्चित रूप से यह नहीं कह सकती हैं कि बाजार में मौजूद जानवर संक्रमित थे या नहीं। हालांकि फ्रांस के CNRS रिसर्च एजेंसी की बायोलॉजिस्ट ने कहा कि हमारा अध्ययन पुष्टि करता है कि 2019 के अंत में इस बाजार में जंगली जानवर थे। इनमें रैकून कुत्ते और सिवेट्स जैसी प्रजातियों वाले जानवर थे। ये जानवर बाजार के दक्षिण-पश्चिम कोने में थे, जो उसी क्षेत्र में है जहां SARS-CoV-2 वायरस का पता लगाया गया था। यही कोविड-19 का कारण है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये जानवर इंसानों की तरह वायरस पकड़ सकते हैं। इसकी वजह से ये इंसानों और चमगादड़ों के बीच एक इंटरमीडिएट होस्ट के रूप में संदेह के घेरे में हैं, जिनसे SARS-CoV-2 की उत्पत्ति होने की आशंका है। हुआनान मार्केट में इन जानवरों की उपस्थिति पहले विवादित रही थी, हालांकि कुछ फोटोग्राफिक सबूत और 2021 का एक अध्ययन मौजूद था। अध्ययन के अनुसार कोविड वायरस के लिए एक स्टॉल के कई हिस्से टेस्ट में वायरस से पॉजिटिव मिले, जिसमें जानवरों की गाड़ियां, एक पिंजरा, एक कचरा गाड़ी और एक बाल/पंख हटाने की मशीन शामिल थी।

अब, हाल के साक्ष्यों के आधार पर, वैज्ञानिक दो संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं जिनके कारण अतिव्यापी आनुवंशिक साक्ष्य सामने आए। पहली ये कि 19 से संक्रमित जानवरों को पहले वुहान बाजार में लाया गया था, और फिर वायरस मनुष्यों में फैल गया। दूसरी संभावना यह है कि एक संक्रमित मानव, जिसे किसी अन्य स्रोत से वायरस मिला हो, उसने वुहान बाजार का दौरा किया और उसमें से कुछ को पीछे छोड़ दिया। फिर, यह स्तनधारियों के साथ-साथ मनुष्यों तक भी पहुंच गया होगा।

FATF ने भारत को चेताया, कहा- ISIS और अलकायदा से खतरा, सावधान रहने की जरूरत*
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कुछ समय की शांति के बाद एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस बीच टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर पैनी नजर रखने वाली अंतर्राष्‍ट्रीय संस्‍था फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (FATF) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत के लिए चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत पर बड़े आतंकवादी हमले का खतरा मंडरा रहा है। खासकर ISIS और अलकायदा के आतंकवादी देश पर हमले की फिराक में हैं। ये दोनों इंटरनेशनल टेरर ऑर्गेनाइजेशन जम्‍मू-कश्‍मीर के आसपास एक्टिव हैं। मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनैंसिंग से निपटने में भारत की व्यवस्था कई मायनों में अच्छी है, लेकिन ऐसे मामलों में मुकदमों को अंजाम तक पहुंचाने के मामले में और सुधार की जरूरत है। दुनियाभर में मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनैंसिंग के मामलों पर नजर रखने और उनसे निपटने के उपायों की समीक्षा करने वाली वैश्विक संस्था फाइनैंशल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने गुरुवार को यह बात कही। साथ ही FATF ने भारत की म्यूचुअल इवैल्यूएशन रिपोर्ट में भारत के लिए आतंकवाद से जुडे कई तरह के खतरे भी गिनाए। रिपोर्ट में कहा गया, ‘भारत ने आजादी के बाद से आतंकवाद के प्रभावों को लगातार सहा है। भारत को विभिन्न प्रकार के आतंकवाद के खतरों का सामना करना पड़ रहा है। जिन्हे, भारत ने छह विभिन्न क्षेत्रों में वर्गीकृत किया है। इन्हें संक्षेप में इस प्रकार बताया जा सकता है कि ये आईएसआईएल या अल-कायदा से जुड़े चरमपंथी समूहों से जुड़े वर्ग हैं, जो जम्मू-कश्मीर में और उसके आसपास सक्रिय हैं। चाहे वे प्रत्यक्ष रूप से हों या छद्म या सहयोगियों के माध्यम से, साथ ही क्षेत्र में अन्य अलगाववादी। चरमपंथी लोगों और रैडिकलाइजेशन से खतरा है। उत्तर पूर्व में क्षेत्रीय उग्रवाद और लेफ्ट विंग चरमपंथ से खतरा है। रिपोर्ट में पूर्वोत्‍तर और उत्‍तर भारत में सक्रिय उग्रवादी संगठनों के साथ ही नक्‍सलियों की ओर से सरकार को उखाड़ फेंकने की कोशिश करने की बात भी कही गई है। FATF की 368 पेज की रिपोर्ट में मणिपुर की हालिया स्थिति का भी उल्लेख किया गया है, जहां पिछले एक साल से अधिक समय से जातीय हिंसा जारी है, जिसके कारण 220 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2023 में आतंकवादी-वित्तपोषण (TF) जांच में अचानक वृद्धि देखी गई और इसका कारण मणिपुर में हुई घटनाएं हैं। इसके चलते 50 से अधिक मामलों में ऐसी जांच की गई है।इस लिहाज से यह देश के लिए बड़ा खतरा हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सबसे महत्वपूर्ण आतंकवाद का खतरा आईएसआईएल (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवेंट) या एक्यू (अल-कायदा) से जुड़े समूहों से है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि आईएसआईएल या आईएसआईएस को सीमित समर्थन मिलने के कारण विदेशी आतंकवादी लड़ाकों (एफटीएफ) की वापसी को भारत के संदर्भ में ‘महत्वपूर्ण जोखिम क्षेत्र’ नहीं माना गया। एफएटीएफ ने इस संदर्भ में ‘केस स्टडीज’ का भी हवाला दिया और कहा, कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने एक मामले ‘मैंगलोर विस्फोट मामले’ की जांच की थी। इन सबका संबंध आईएसआईएस नेटवर्क से था।