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Aug 23 2024, 11:41

क्या पीएम मोदी के यूक्रेन दौरे से रूस होगा नाराज?

#pm_modi_visiting_ukraine_after_putin_be_angry

रूस की यात्रा के ठीक 6 हफ्ते बाद प्रधानमंत्री मोदी यूक्रेन पहुंच रहे हैं। यह वही देश है जब पीएम मोदी ने पुतिन को गले लगाया था, तब खूब जहर उगला था। वह पीएम मोदी और पुतिन की दोस्ती और गले मिलने से खफा था। लोकतंत्र की दुहाई देने लगा था। मगर आज वही देश पीएम मोदी को गले लगाने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि पीएम मोदी के यूक्रेन दौरे पर रूस की क्या प्रतिक्रिया होगी? क्या रूस भी यूक्रेन की तरह अपना आक्रोश जताएगा?

बता दें कि फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बावजूद भारत ने रूस के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखा हैं। पीएम मोदी ने कई मौकों पर रूस और यूक्रेन में शांति का आह्वान किया है। हालांकि, उन्होंने युद्ध के लिए सीधे तौर पर रूस को जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया है। जुलाई में पीएम मोदी की मॉस्को यात्रा और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी बैठक के दौरान ही रूसी सेना ने यूक्रेन में बच्चों के अस्पताल पर घातक हमला किया था। हालांकि, पीएम मोदी ने पुतिन के सामने ही उस हमले को लेकर सार्वजनिक तौर पर दुख जाहिर किया था। उस समय मोदी ने कहा, "जब मासूम बच्चों की हत्या की जाती है, तो दिल दुखता है और वह दर्द बहुत भयानक होता है।"

जहां तक रूस के नाराज होने की बात है, तो बता दें कि रूस और भारत के बीच सैन्य, व्यापार और कूटनीतिक संबंध पहले से ही गहरे हैं। भारत अपने तेल का 40% से अधिक और अपने हथियारों का 60% रूस से खरीदता है। भारत हर साल बड़ी मात्रा में कोयला, उर्वरक, वनस्पति तेल और कीमती धातुओं का भी आयात करता है। यूक्रेन पर आक्रमण के कारण पश्चिमी देशों ने भारत को रूस से दूर करने की भरसक कोशिश की, लेकिन यह उनके लिए उल्टा साबित हुआ। इस दबाव ने भारत और रूस के संबंधों को और ज्यादा मजबूत किया। 

यही नहीं, भारत इसलिए भी रूस को नहीं छोड़ना चाहता कि उसे डर है कि कहीं मॉस्को अलग-थलग होने पर चीन के बहुत ज्यादा करीब न चला जाए। चीन और रूस के बीच एक लंबा और जटिल रिश्ता है और जो धीरे धीरे मजबूत हो रहा है। दशकों की प्रतिद्वंद्विता के बाद, रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के सामने आखिरकार दोनों देश एक साथ आ गए हैं। रूस अगर भारत के सबसे बड़े दुश्मन के साथ दोस्ती बढ़ा रहा है तो भारत को रूस को भी यह जताना जरूरी है कि वह पिछलग्गू बनकर नहीं रह सकता। 

चीन और रूस की बढ़ती दोस्ती के चलते ही भारत अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का भी बड़ा समर्थक रहा है, जिसने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापार और निवेश के लिए समर्थन का वादा किया गया है। भारत को डर है कि चीन बंगाल की खाड़ी में अपनी नौसैनिक प्रक्षेपण क्षमताओं को बदलने के लिए रूस पर दबाव डाल सकता है। 21यही नहीं रूस के संबंध उत्तर कोरिया और ईरान के साथ भी नजदीकियां बढ़ रही हैं। जाहिर है कि ये देश एक लोकतंत्र विरोधी धुरी बना रहे हैं जो कानून के शासन, मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की पवित्रता को नजरअंदाज करने के लिए तैयार हैं। 

ऐसे में भारत खुद को शांतिदूत के रूप में पेश करने और मानवीय सहायता में शामिल होने की कोशिश करेगा। यूक्रेन भी जानता है कि भारत ही एक ऐसा देश है, जिस पर वह मध्यस्थ के रूप में भरोसा कर सकता है। इसके अलावा दुनिया में कोई भी ऐसा देश नहीं है, जो रूस और यूक्रेन पर एक समान प्रभाव डाल सके।

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Aug 23 2024, 11:02

ट्रेन से कीव पहुंच रहे पीएम मोदी, तय करेंगे 10 घंटे का सफर, जानें इसमें खास क्या है?*
#pm_narendra_modi_ukraine_train_journey *
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पोलैंड दौरे को खत्म करके आज यूक्रेन पहुंच रहे हैं। पीएम मोदी गुरुवार रात यूक्रेन के लिए रवाना हो चुके हैं। वे यह सफर प्लेन से नहीं बल्कि ट्रेन के जरिए तय करेंगे। पौलैंड से यूक्रेन तक ये सफर 10 घंटे का होगा। यह एक विशेष ट्रेन होगी, जिसका नाम 'रेल फोर्स वन' है। इसे लग्जरी सुविधाओं और वर्ल्ड क्लास सर्विस के लिए जाना जाता है। *ट्रेन से क्यों सफर कर रहे मोदी?* पीएम मोदी का ट्रेन से यूक्रन पहुंचना चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल उठ रहे हैं कि पीएम प्लेन की जगह ट्रेन से क्यों कर रहे हैं? दरअसल, यूक्रेन में चल रही जंग की वजह से एयरपोर्ट्स बंद हैं, सड़क से सफर जोखिम भरा हो सकता है। यही वजह है कि दुनिया के बड़े नेता जब भी यूक्रेन जाते हैं तो वे ट्रेन यात्रा को ही तरजीह देते हैं। *ये नेता भी कर चुके हैं इस ट्रेन का सफर* यूक्रेन पहुंचने के लिए ट्रेन का सफर करने वाले मोदी पहले नेता नहीं है। पीएम मोदी से पहले दुनिया के कई बड़े नेता इस ट्रेन में सफर कर चुके हैं। इससे पहले रेल फोर्स वन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से लेकर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी समेत कई नेता यात्रा कर चुके हैं। *टूरिज्म के लिए बनी ट्रेन, अब वर्ल्ड लीडर्स करते हैं इस्तेमाल* यूक्रेन जाने वाले ज्यादातर नेता, पत्रकार, राजनयिक रेल फोर्स वन से ही सफर करते हैं। ये धीमी चलने वाली लग्जरी ट्रेन है, जो सिर्फ रात में चलती है। ये पोलैंड से 600 किमी का सफर तय कर कीव पहुंचती है। यूक्रेन का रेल नेटवर्क 24 हजार किमी से भी ज्यादा लंबा है। ये दुनिया में 12वां सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। यूक्रेन में अलग-अलग ट्रेनें चलती हैं मगर रेल फोर्स वन सबसे खास है। इसे क्रीमिया में टूरिज्म के लिए डिजाइन किया गया था। *कैसे हुई ट्रेन की शुरुआत?* रेल फोर्स वन ट्रेन को साल 2014 में शुरू किया गया था। इस ट्रेन के जरिए लोग क्रीमिया जाया करते थे। यह लग्जरी पैसिंजर ट्रेन थी जो हर तरह की सुविधाओं से लैस थी। लेकिन फिर रूस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए क्रीमिया पर कब्जा कर लिया और तब से ही इस ट्रेन का उद्देश्य पूरी तरह बदल गया। अब वर्ल्ड लीडर्स को यूक्रेन ले जाने के लिए इस ट्रेन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। *ट्रेन में कंपार्टमेंट लकड़ी से बने* रेल फोर्स वन का इंटीरियर बेहद खूबसूरत है। इसके कमरे किसी आलीशान होटल जैसे हैं। रेल फोर्स वन के कंपार्टमेंट लकड़ी से बने हैं। ट्रेन के कैबिन एक विशेष प्रकार की लकड़ी से बनाए गए हैं। बैठकों के लिए बड़ी टेबलों और सोफों का इंतजाम किया गया है। मनोरंजन के लिए टीवी और आराम करने के लिए ट्रेन में कंफर्टेबल बिस्तर है। *ट्रेन को ट्रैक नहीं किया जा सकता* ट्रेन में इलेक्ट्रिक नहीं डीजल इंजन लगा है। इसकी वजह है कि हमलों में पावर ग्रिड के प्रभावित होने के बावजूद ट्रेन सामान्य रूप से ऑपरेट होती रहे। 60 किलोमीटर प्रति घंटे ट्रेन की रफ्तार है। इस ट्रेन को ट्रैक नहीं किया जा सकता है। ट्रेन में बख्तरबंद खिड़कियां लगी हैं जिनसे उच्च स्तर की सुरक्षा मिलती है।

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Aug 23 2024, 10:34

थोड़ी देर में यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचेंगे पीएम मोदी, जानें ये दौरा क्यों है खास?

#pmnarendramodiukrainevisit

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी शुक्रवार को युद्धग्रस्त यूक्रेन पहुचेंगे। पीएम मोदी का यह दौरा रूस-यूक्रेन जंग के बीच हो रहा है। यहां राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से उनकी मुलाकात होगी।इस दौरान पीएम मोदी यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ युद्ध में शांति लाने के प्रयासों समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा करेंगे। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन आने का न्योता दिया था। रूस की यात्रा के ठीक 6 हफ्ते बाद प्रधानमंत्री मोदी की यूक्रेन यात्रा काफी अहम मानी जा रही है।

पीएम मोदी के कीव दौरे पर दुनिया की नजर

पीएम मोदी के कीव दौरे पर दुनिया की नजर है। प्रधानमंत्री यूक्रेन की राजधानी कीव में 7 घंटे के लिए मौजूद रहेंगे, लेकिन यह 7 घंटे दुनिया के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम हो सकता है। पीएम मोदी की यूक्रेन यात्रा से पहले दुनियाभर के कई नेता यूक्रेन की यात्रा कर चुके हैं। लेकिन, दुनिया में महज गिनती के नेता हैं, जो फरवरी, 2022 में युद्ध की शुरुआत के बाद रूस और यूक्रेन दोनों देश का दौरा किया हो। 

दौरे से पहले जताई शांति और स्थिरता की वापसी की उम्मीद

यूक्रेन दौरे से पहले पीएम मोदी ने कहा था कि मैं राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान पर विचारों को साझा करने के लिए बातचीत को आगे बढ़ाने के मौके की प्रतीक्षा कर रहा हूं। एक मित्र और साझेदार के रूप में हम इस क्षेत्र में शीघ्र शांति और स्थिरता की वापसी की उम्मीद करते हैं।

यूक्रेन दौरे से पहले पीएम मोदी ने दिया मानवता का संदेश

यूक्रेन दौरे से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत कूटनीति और संवाद में विश्वास करता है। हमारा रुख बहुत साफ है कि यह युद्ध का युग नहीं है। भारत स्थायी शांति का समर्थक है। उन्होंने कहा कि भारत भगवान बुद्ध की धरती है। यूक्रेन यात्रा से पहले ही पीएम मोदी ने पोलैंड में अपना रुख साफ कर दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत अशांत क्षेत्र में शांति का समर्थन करता है। उन्होंने अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि यह युद्ध का युग नहीं है और किसी भी संघर्ष को कूटनीति और बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।

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Aug 22 2024, 20:00

दिल्ली एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने वापस ली हड़ताल, कोर्ट की अपील पर 11 दिन बाद लौटे ड्यूटी पर

#delhi_city_ncr_strike_of_resident_doctors_of_delhi_aiims_ends 

दिल्ली एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल खत्म करने का एलान किया है। कोलकाता में प्रशिक्षु महिला डॉक्टर के साथ बर्बरता की घटना के बाद सभी डॉक्टर लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली स्थित एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर बीते 11 दिनों से हड़ताल पर थे। अब इन्होंने हड़ताल खत्म करने की घोषणा की है। सुप्रीम कोर्ट की अपील के बाद सभी डॉक्टर्स अपनी-अपनी ड्यूटी पर लौट गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले दिन में प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से काम शुरू करने को कहा था और उन्हें आश्वासन दिया था कि काम पर लौटने के बाद उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जायेगी। एम्स रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया, ''हम सुप्रीम कोर्ट की अपील और आश्वासन, आरजी कर अस्पताल की घटना और डॉक्टरों की सुरक्षा के सिलसिले में उसके हस्तक्षेप के बाद काम पर लौट रहे हैं।''

एम्स रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने आगे कहा, ''हम अदालत की कार्रवाई की सराहना करते हैं और उसके निर्देशों का पालन करने का आह्वान करते हैं। मरीजों की देखभाल करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।'' 

बता दें कि 12 अगस्त को डॉक्टर्स एसोसिएशन ने राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन शुरू किया था जिससे ओपीडी सेवाएं ठप हो गयी थीं।तब से अब तक लगातार ओपीडी और नियमित सर्जरी सेवाएं प्रभावित हैं। बताया जा रहा है कि अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों के इतने दिनों तक की लंबी हड़ताल के कारण दिल्ली में अब तक दस हजार से अधिक मरीजों की नियमित सर्जरी टल चुकी थी। 11 दिनों की हड़ताल में दो दिन अवकाश रहा है।

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Aug 22 2024, 19:26

मोदी ने सेक्युलर सिविल कोड का दांव क्यों खेला, क्या विपक्ष को चित्त कर सकेगी बीजेपी?

#narendra_modi_secular_civil_code

स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को नया नाम दिया।उन्होंने देश में मौजूद संहिता को कम्युनल सिविल कोड कहकर पुकारा और इसकी जगह सेक्युलर सिविल कोड की वकालत की। यूं तो यूसीसी बीजेपी का तो यह पुराना एजेंडा रहा ही है, साथ ही साथ पीएम मोदी ने भी कई मौकों पर इस मुद्दे को उठा रखा है। लेकिन विपक्ष को चित करने के लिए इस बार पीएम मोदी ने अपने सियासी पिटारे से एक नया तीर छोड़ा है। उन्होंने बड़ी ही चालाकी से इस बार यूनिफॉर्म सिविल कोड को सेकुलर सिविल कोड बता दिया है।

प्रधानमंत्री के इस बयान के मायने से लेकर टाइमिंग तक पर सवाल उठ रहे हैं।पॉलिटिकल एक्सपर्ट पीएम मोदी के इस कदम को बीजेपी के लिए आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बड़ा मास्टर स्ट्रोक मान रहे हैं। अगर ध्यान से समझने की कोशिश हो तो इसे बड़ी रणनीति माना जाएगा। अगर थोड़ा पीछे चला जाए तो पता चलता है कि बीजेपी को सबसे ज्यादा हमले यह बोलकर होते हैं कि पार्टी सांप्रदायिक है, उसकी तरफ से हिंदू-मुस्लिम किया जाता है। 

पॉलिटिकल एक्सपर्ट का ये भी मानना है कि पीएम मोदी का सेक्युलर सिविल कोड दरअसल धर्मनिरपेक्षता की बात करने वाली विपक्षी पार्टियों के खिलाफ दांव हैं, जिन्होंने हमेशा भाजपा के यूसीसी एजेंडे को निशाना बनाया है।दरअसल 1985 में सुप्रीम कोर्ट के शाहबानो फैसले के बाद जिस तरह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवहेलना की थी तभी से भाजपा यूसीसी की मांग बड़े पैमाने पर उठाती आई है।

1985 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पांच बच्चों वाली तलाकशुदा मुस्लिम महिला शाहबानो के पूर्व पति को गुजारा भत्ता के रूप में प्रति माह 179 रुपये का भुगतान करना होगा। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मुस्लिम महिला (तलाक पर संरक्षण का अधिकार) अधिनियम, 1986 को लागू करके सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलट दिया। इस कानून में कहा गया था कि महिलाओं के भरण-पोषण से संबंधित सीआरपीसी की धारा 125 मुस्लिम महिलाओं पर लागू नहीं है। यहीं से कम्युनल सिविल कोड पैदा हुआ, जो अब तक चला आ रहा है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी राजीव सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए परोक्ष रूप से यह कहा कि कांग्रेस ने एक वर्ग को खुश करने के लिए मुस्लिम महिलाओं के बीच धार्मिक भेदभाव किया। इसके बाद से ही राममंदिर निर्माण और जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 की समाप्ति के साथ-साथ यूसीसी भी भाजपा के मुख्य एजेंडे में शामिल हो गया।

देश में बहुत सी पार्टियां मुस्लिम समुदाय को यूसीसी का डर बनाकर उनका वोट लेती रही हैं, पर इससे होने वाले फायदे के बारे में सोचकर आंखें मूंद लेती रही है। अब गेंद विपक्ष के पाले में हैं। भारतीय जनता पार्टी को आगामी विधानसभा चुनावों में विपक्ष पर हमलावर होने का मौका मिल गया है।

जानकार मानते हैं कि सेकुलर शब्द का तोड़ निकालना विपक्ष के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है। जिस बात को आधार बनाकर हमला हो रहा था, उसी को पीएम मोदी ने खत्म कर दिया। ऐसे में यूसीसी का विरोध करना ही विपक्ष को भारी पड़ सकता है।

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Aug 22 2024, 18:41

किसी समस्‍या का समाधान जंग के मैदान में नहीं”, पीएम मोदी ने पोलैंड में दिया बड़ा संदेश

#pm_narendra_modi_joint_press_conference_in_poland_talk_about_peace

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर पोलैंड में हैं। अपने दौरे के दूसरे दिन पीएम मोदी ने पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के साथ साझा प्रेस वार्ता को संबोधित किया।पीएम मोदी ने इस दौरान पोलैंड का 2022 में यूक्रेन संघर्ष के दौरान मदद के लिए आभार भी जताया है। साथ रूस-यूक्रेन जंग और मिडिल ईस्‍ट में इजरायल और ईरान के बीच तनाव को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान रणभूमि में नहीं हो सकता।

गुरुवार को पीएम मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने साझा बयान भी जारी किया है। पीएम मोदी ने इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में योगदान के लिए अपने पोलिश समकक्ष डोनाल्ड टस्क की प्रशंसा की है।पीएम मोदी ने पोलैंड में कहा कि इस वर्ष हम अपने राजनयिक संबंधों की सत्तरवीं वर्षगांठ मना रहे हैं। इस अवसर पर हमने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदलने करने का निर्णय लिया है। हम पोलैंड की कंपनियों को 'मेक इन इंडिया एंड मेक फोर द वर्ल्ड' से जुड़ने के लिए आमंत्रित करते हैं। भारत और पोलैंड अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी करीबी तालमेल के साथ आगे बढ़ते रहे हैं। हम दोनों सहमत हैं कि वैश्विक चुनौतियोंका सामना करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ तथा अन्य अंतराष्ट्रीय संस्थानों में रिफॉर्म वर्तमान समय की मांग है।

पीएम मोदी ने यूक्रेन संकट के दौर में पोलैंड के सहयोग का जिक्र करते हुए कहा, पोलैंड ने साल 2022 में यूक्रेन संकट के समय वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने की मुहिम में जो उदारता दिखाई, उसे भारत कभी भूल नहीं सकता है।

दुनिया के कई इलाकों में चल रहे संघर्ष को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि किसी भी संकट में मासूम लोगों की जान की हानि पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है.। हम शांति और स्थिरता की जल्द से जल्द बहाली के लिए डायलॉग और डिप्लोमेसी का समर्थन करते हैं। इसके लिए भारत अपने मित्र देशों के साथ मिलकर हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष हम सभी के लिए गहरी चिंता का विषय है। भारत का ये दृढ़ विश्वास है कि किसी भी समस्या का समाधान रणभूमि में नहीं हो सकता। किसी भी संकट में मासूम लोगों की जान की हानि संपूर्ण मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। हम शांति और स्थिरता की जल्द से जल्द बहाली के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन करते हैं।

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Aug 22 2024, 18:40

किसी समस्‍या का समाधान जंग के मैदान में नहीं”, पीएम मोदी ने पोलैंड में दिया बड़ा संदेश*
#pm_narendra_modi_joint_press_conference_in_poland_talk_about_peace

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर पोलैंड में हैं। अपने दौरे के दूसरे दिन पीएम मोदी ने पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के साथ साझा प्रेस वार्ता को संबोधित किया।पीएम मोदी ने इस दौरान पोलैंड का 2022 में यूक्रेन संघर्ष के दौरान मदद के लिए आभार भी जताया है। साथ रूस-यूक्रेन जंग और मिडिल ईस्‍ट में इजरायल और ईरान के बीच तनाव को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान रणभूमि में नहीं हो सकता। गुरुवार को पीएम मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने साझा बयान भी जारी किया है। पीएम मोदी ने इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में योगदान के लिए अपने पोलिश समकक्ष डोनाल्ड टस्क की प्रशंसा की है।पीएम मोदी ने पोलैंड में कहा कि इस वर्ष हम अपने राजनयिक संबंधों की सत्तरवीं वर्षगांठ मना रहे हैं। इस अवसर पर हमने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदलने करने का निर्णय लिया है। हम पोलैंड की कंपनियों को 'मेक इन इंडिया एंड मेक फोर द वर्ल्ड' से जुड़ने के लिए आमंत्रित करते हैं। भारत और पोलैंड अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी करीबी तालमेल के साथ आगे बढ़ते रहे हैं। हम दोनों सहमत हैं कि वैश्विक चुनौतियोंका सामना करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ तथा अन्य अंतराष्ट्रीय संस्थानों में रिफॉर्म वर्तमान समय की मांग है। पीएम मोदी ने यूक्रेन संकट के दौर में पोलैंड के सहयोग का जिक्र करते हुए कहा, पोलैंड ने साल 2022 में यूक्रेन संकट के समय वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने की मुहिम में जो उदारता दिखाई, उसे भारत कभी भूल नहीं सकता है। दुनिया के कई इलाकों में चल रहे संघर्ष को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि किसी भी संकट में मासूम लोगों की जान की हानि पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है.। हम शांति और स्थिरता की जल्द से जल्द बहाली के लिए डायलॉग और डिप्लोमेसी का समर्थन करते हैं। इसके लिए भारत अपने मित्र देशों के साथ मिलकर हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष हम सभी के लिए गहरी चिंता का विषय है। भारत का ये दृढ़ विश्वास है कि किसी भी समस्या का समाधान रणभूमि में नहीं हो सकता। किसी भी संकट में मासूम लोगों की जान की हानि संपूर्ण मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। हम शांति और स्थिरता की जल्द से जल्द बहाली के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन करते हैं।

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Aug 22 2024, 17:16

हरियाणा: JJP को एक और झटका, रामकरण काला कांग्रेस में शामिल, अब तक 5 MLA छोड़ चुके हैं पार्टी

#another_blow_to_jjp_mla_ramniwas_surjakheda_resigns_from_party 

हरियाणा में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। चुनावी बिगुल बजने के साथ ही इसके साइट इफेक्ट्स भी दिखने लगे हैं। हरियाणा के पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला को लगातार झटके मिल रहे हैं। अब उनकी पार्टी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के विधायक रामकरण काला उन्हें झटका दिया है। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ले ली है। 

हरियाणा के शाहबाद से विधायक विधायक रामकरण काला ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष उदय भान सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के मौजूदगी में कांग्रेस ज्वाइन की।

बीते दिनों में पार्टी के 4 विधायकों ने जेजेपी को अलविदा कर दिया। वहीं गुरुवार को जेजेपी को एक और झटका मिला। विधायक रामनिवास सुरजाखेड़ा ने इस्तीफा देकर जेजेपी को बैकफुट पर ला दिया है।जेजेपी के पांचवे विधायक रामनिवास सुरजाखेड़ा से पहले अनूप धानक, ईश्वर सिंह, देवेंद्र बबली और रामकरण काला पार्टी छोड़ चुके हैं।

बता दें कि अब तक बीजेपी-जेजेपी के 40 बड़े नेता कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। इन नेताओं में में ज्यादातर पूर्व विधायक। हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले जेजेपी के दस में से पांच विधायक पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं।

2019 के विधानसभा में जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) किंगमेकर बनकर उभरी थी। यही वजह थी कि बहुमत से दूर रही बीजेपी ने जेजेपी को नेता दुष्यंत चौटाला को डिप्टी सीएम का पद देकर सरकार बनाई थी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में जेजेपी को कुछ और झटके लग सकते हैं। लोकसभा चुनावों में अकेले लड़ी जेजेपी को 1 फीसदी से कम वोट मिले थे। पार्टी के सभी कैंडिडेट की जमानत जब्त हो गई थी। जिन अन्य विधायकों के पार्टी छोड़ने की अटकलें हैं। उनमें राजकुमार गौतम, जोगीराम सिहाग, रामनिवास सुरजाखेड़ा के नाम चर्चा में हैं। ये विधायक पिछले काफी समय से बीजेपी के मंचों पर भी थे। ऐसे में अटकलें हैं कि ये भी दुष्यंत चौटाला का साथ छोड़ सकते हैं।

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Aug 22 2024, 16:18

जम्मू-कश्मीर चुनाव: कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस में गठबंधन, फारूक अब्दुल्ला ने किया एलान

#congress_national_conference_alliance_jammu_kashmir

जम्मू-कश्मीर में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के बीच गठबंधन हो गया है। एनसी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने गुरुवार को इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा कि नेकां और कांग्रेस गठबंधन को अंतिम रूप दिया गया, शाम तक चरणवार सूची प्रकाशित की जाएगी। दोनों पार्टियों के बीच सहमति कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के दौरे के दौरान बनी है।

कांग्रेस ने भी अपने एक्स अकाउंट से गठबंधन की घोषणा की है। जिसमें कहा कि आज पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने श्रीनगर में नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। 

किसी के लिए कोई दरवाजा बंद नहीं- फारूक अब्दुल्ला

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि हमारी मुलाकात बहुत अच्छी रही। हम सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। हम एकजुट हैं, सीपीआईएम समेत इंडिया गठबंधन की पार्टियां एकजुट हैं। उन्होंने पीडीपी पर कहा कि किसी के लिए कोई दरवाजा बंद नहीं हैं। एनसी प्रमुख ने कहा कि मुझे बहुत ख़ुशी है कि बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई। कांग्रेस, सीपीआईएम और एनसी एक साथ हैं।

तीन चरणों में होगा चुनाव

बता दें कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में अगले महीने विधानसभा के चुनाव होने हैं। तीन चरणों में वोटिंग होगी। 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को जनता वोट डालेगी। 4 अक्टूबर को नतीजे घोषित होंगे।

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Aug 22 2024, 16:05

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई का बड़ा दवा, बोले-लोगों का सेबी पर भरोसा अब नहीं रहा

#congress_protest_nationwide_against_sebi

हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) द्वारा जांच कराए जाने की मांग पर कांग्रेस बृहस्पतिवार को देश भर में प्रदर्शन कर रही है। हिंडनबर्ग रिपोर्ट को लेकर आज पार्टी के देशव्यापी आंदोलन पर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई का कहना है, ''लोगों को सेबी पर जो भरोसा था, वह अब नहीं रहा। बार-बार हम देख रहे हैं कि सेबी इस मुद्दे पर उतनी गंभीर नहीं है, जितना होना चाहिए था।'' अडानी का मामला, हिंडनबर्ग रिपोर्ट से हमें इसके पीछे की वजह का संकेत मिल गया है।

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि मैंने सोचा था कि केंद्रीय वित्त मंत्री सेबी चेयरमैन से स्पष्टीकरण मांगेंगे। लेकिन, वित्त मंत्री सेबी के जरिए अडानी को बचाने में लगे हैं, कांग्रेस इसका विरोध कर रही है। सेबी अध्यक्ष को इस्तीफा देना चाहिए और वित्त मंत्री को स्पष्टीकरण देना चाहिए और इस मुद्दे पर जेपीसी का गठन करना चाहिए।

बता दें कि हिंडनबर्ग रिसर्च ने इस महीने की शुरुआत में अपनी ताजा रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि माधबी पुरी बुच और उनके पति के पास अडानी ग्रुप के पैसे के हेराफेरी घोटाले में इस्तेमाल किए गए अस्पष्ट विदेशी फंड में हिस्सेदारी थी। अमेरिकी इंवेस्टमेंट रिसर्च फर्म ने कहा था कि अडानी ग्रुप पर उसके जरिए 18 महीने पहले जारी किए गए रिपोर्ट के बाद भी सेबी ने ग्रुप के मॉरीशस और विदेशों में मौजूद उसकी संस्थाओं के कथित घोटाले पर कोई एक्शन नहीं लिया।

हालांकि, माधवी बुच और उनके पति धवल बुच ने हिंडनबर्ग के आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि उनके वित्तीय लेनदेन एक खुली किताब की तरह हैं। अडानी ग्रुप ने भी चुनिंदा सार्वजनिक जानकारी के आधार पर हिंडनबर्ग के आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और बदनाम करने वाला बताया।