बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद भी नहीं थम रहा बवाल, अब शेख हसीना को गिरफ्तार कर वापस लाने की मांग*
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बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर शुरु हुए बवाल ने प्रधानमंत्री शेख हसीना से उनकी कुर्सी छीन ली। भारी प्रदर्शन के बाद तख्तापलट हो गया। प्रधानमंत्री शेख हसीना को भाग कर भारत में शरण लेना पड़ा है। उनके बांग्लादेश छोड़न के बाद भी बवाल थमता नहीं दिख रहा है। देश में हिंसक सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के 20 से ज्यादा नेताओं के शव मिले हैं।इसी बीच बांग्‍लादेश में शेख हसीना को गिरफ्तार कर वापस लाने की मांग उठी है। *शेख हसीना को अरेस्‍ट करने की मांग* बांग्‍लादेश के सुप्रीम कोर्ट बार एसोशियेशन के अध्‍यक्ष एम महबूब उद्दीन ने भारत से मांग की है कि वह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी बहन शेख रेहाना को अरेस्‍ट करे और ढाका वापस भेजे। इस दौरान विपक्षी खालिदा जिया के कई समर्थक भी मौजूद थे। उन्‍होंने कहा कि हम भारत के लोगों के साथ अच्‍छे रिश्‍ते बनाना चाहते हैं। *शेख हसीना को बताया हत्‍यारी* सुप्रीम कोर्ट बार एसोस‍िएशन के अध्‍यक्ष ए.एम. महबूब उद्दीन खोकन ने कहा कि शेख हसीना ने बांग्लादेश में कई लोगों की हत्या की है। वो हत्‍यारी हैं।उन्‍होंने अध‍िकार‍ियों से देश में इमरजेंसी न लगाने का आग्रह क‍िया है।उन्‍होंने कहा, आपातकाल लागू करने की बात चल रही है। हम मोईन यू अहमद और फखरुद्दीन अहमद जैसी सरकार नहीं चाहते। छात्रों समेत कोई भी देश में इमरजेंसी नहीं चाहता। वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे। अगर इमरजेंसी लागू की गई तो वे इसका विरोध करेंगे। बता दें कि खोकन खाल‍िदा जिया की पार्टी बीएनपी के ज्‍वाइंट सेक्रेटरी भी हैं।
बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस बनाए गए अंतरिम सरकार के मुखिया, सेना के शीर्ष पदों में भी फेरबदल

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बांग्लादेश में नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुखिया नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति के प्रेस सचिवालय ने मंगलवार देर शाम को इसकी पुष्टि की है। प्रेस सचिव ने एक बयान में बताया कि राष्ट्रपति और भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के समन्वयकों के बीच हुई बैठक के दौरान अंतरिम सरकार की नियुक्ति का फैसला लिया गया। बैठक में तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद थे। यह फैसला शेख हसीना के इस्तीफे के एक दिन बाद लिया गया है। हसीना ने नौकरियों में विवादित कोटा सिस्टम के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद देश छोड़ दिया है। फिलहाल वह भारत में हैं और जल्द ही किसी दूसरे देश में शरण ले सकती हैं।

राष्ट्रपति के प्रेस सचिव मो. जॉयनल आबेदीन ने बताया कि राष्ट्रपति भवन में मंगलवार रात राष्ट्रपति शहाबुद्दीन की तीनों सेनाओं के प्रमुखों और भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में यह फैसला लिया गया। प्रेस सचिव ने कहा कि अंतरिम सरकार के अन्य सदस्यों के नाम विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श के बाद तय किए जाएंगे। चार घंटे तक चली बैठक के बाद ऐलान किया किया गया। बैठक में सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान, नौसेना प्रमुख एडमिरल एम नजमुल हसन, वायु सेना प्रमुख एयर मार्शल हसन महमूद खान, ढाका विश्वविद्यालय के कानून विभाग के प्रोफेसर आसिफ नजरुल और अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के प्रोफेसर तंजीम उद्दीन खान मौजूद थे

बांग्लादेश की सेना में शीर्ष पदों पर फेरबदल

इधर, बांग्लादेश की सेना में शीर्ष पदों पर फेरबदल किया गया है। शेख हसीना के करीबी माने जाने वाले मेजर जनरल जियाउल अहसन को पद से हटा दिया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद सैफुल आलम को सेना के कामकाज से दूर करते हुए विदेश मंत्रालय भेजा गया है।

देश में भयानक हिंसा जारी

इस बीच देश में भयानक हिंसा जारी है, जिसमें बड़ी संख्या में अवामी लीग के नेताओं और अल्पसंख्कों पर हमले हो रहे हैं। बांग्लादेश में हिन्दू परिवारों पर लगातार हमले हो रहे हैं। हिन्दुओं के घरों को जलाया जा रहा है। कट्टरपंथी हिन्दुओं पर टारगेडेट हमले कर रहे हैं। जेसोर जिले के साहपुर में कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं के घरों में लूटपाट की और फिर घरों को तोड़फोड़ दिया। हुड़दंगियों ने साहपुर में हिन्दुओं के दर्जनों घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। हिन्दुओं के साथ मारपीट की।

सरकारी नौकरियों में कुछ खास लोगों के एक वर्ग के लिए आरक्षण प्रणाली के खिलाफ जुलाई के मध्य से छात्रों के विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। जिसके बाद इन प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया। जिसमें कई लोगों की जान चली गई। ताजा आंकड़ों के मुताबिक मृतकों की संख्या बढ़कर 440 तक हो चुकी है। वहीं, अवामी लीग की नेता शेख हसीना ने सोमवार को पद से इस्तीफा दे दिया और देश छोड़कर चली गईं। जिसके बाद देश में अंतरिम सरकार का गठन किया गया।

ईरान और इजरायल में अगर जंग हुई तो भारत पर क्या होगा असर?

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ईरान में हमास के राजनीतिक विंग के प्रमुख इस्माइल हानिया की मौत के बाद ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़े हैं। ईरान और इजराइल में बड़ी जंग की आशंका बढ़ गई है। इतना ही नहीं, पश्चिम की खुफिया एजेंसियों ने तो जंग की तारीख भी बता दी है। एजेंसियों के मुताबिक यह हमला 12 और 13 अगस्त के बीच हो सकता है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान समर्थित हिजबुल्ला ग्रुप इजराइल के अंदर तक हमला करने की तैयारी में है। उसका कहना है कि अब वह मिलिट्री टारगेट तक ही सीमित नहीं रहेगा, यानी हिजबुल्ला इजराइल के रिहायशी इलाकों में भी हमला कर सकता है, जिससे आम नागरिकों की मौत होगी। इजराइल द्वारा हिजबुल्ला कमांडर को मार गिराने से वह गुस्से में है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि अगर यह जंग होती है तो भारत पर इसका क्या असर होगा?

जानकार मानते हैं कि ईरान और इजराइल के संघर्ष के बीच भारत की सबसे बड़ी चुनौती इन देशों और पश्चिमी एशिया के अन्य देशों में रह रहे अपने लाखों नागरिकों की सुरक्षा है। वर्ष 2021 के आंकड़ों के मुताबिक खाड़ी के क्षेत्र में 89 लाख भारतीय थे, जिनकी संख्या अब 1.1 करोड़ से ज्यादा होने की संभावना है। यही वजह है कि लेबनान में रहने वाले अपने नागरिकों को भारत सरकार की तरफ से चेतावनी दी गई है कि वह लेबनान से बाहर निकलें। एडवाइजरी में ये भी कहा गया है कि जो भारतीय किसी न किसी वजह से वहां रह गये हैं, वह कहीं बाहर नहीं निकलें, सतर्क रहें और बेरूत स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।इस बीच एयर इंडिया ने इजरायल की राजधानी तेल अवीव के लिए अपनी सारी उड़ानों को 08 अगस्त, 2024 तक के लिए रद्द कर दिया है।

कच्चे तेल की कीमतों पर असर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले कुछ दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में कमी देखने को मिली है, लेकिन अगर ईरान व इजरायल के बीच जंग होती है तो इसका सीधा असर कच्चे तेल पर पड़ेगा। आज की तारीख में भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है और कुल खपत का 60 फीसद खाड़ी के देश सऊदी अरब, कुवैत, ईराक आदि से लेता है। ऐसे में भारत की आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

बढ़ते कारोबार पर असर

खाड़ी क्षेत्र की स्थिति का सीधा असर इन देशों के साथ होने वाले द्विपक्षीय कारोबार पर भी होता है। पिछले वर्ष यूएई भारत का द्विपक्षीय कारोबार ही 86 अरब डॉलर का रहा था। जबकि सऊदी अरब के साथ 53 अरब डॉलर का कारोबार होता है। खाड़ी देशों के साथ भारत का द्विपक्षीय कारोबार वर्ष 2022-23 में 185 अरब डॉलर का रहा था।

भारत की डिफेंस सप्लाई पर हो सकता है असर

इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू हो गया तो भारत के डिफेंस सप्लाई पर असर पड़ सकता है। रूस और यूक्रेन संघर्ष के बाद रूस से आने वाली सप्लाई पर असर हुआ तो भारत ने विकल्प के तौर पर यूएस, इजरायल और नाटो देशों को देखा। लेकिन अगर इजरायल-ईरान संघर्ष होता है तो उसमें यूएस की एंट्री तो होगी ही। ऐसे में यूएस, इजरायल और नाटो देश इन संघर्षों में उलझ जाएंगे। इजरायल-हमास संघर्ष में इजरायल पहले ही उलझा है। ऐसे में अगर एलएसी पर चीन कुछ हरकत करता है और चीन से विवाद बढ़ता है तो हमारे सपोर्ट और सप्लायर अपनी ही लड़ाई में व्यस्त होंगे, जिसका असर भारत पर पड़ सकता है। 

वैसे भी इजरायल और ईरान दोनों भारत के लिए अहम हैं। जानकार बताते हैं कि खाड़ी क्षेत्र की स्थिति कई तरह से भारत के रणनीतिक हितों से जुड़े हुए हैं, इसलिए सरकार ज्यादा सतर्कता से आगे बढ़ रही है। ईरान और इजरायल दोनों ही भारत के रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। इजरायल भारत का स्ट्रैटजिक सप्लायर है तो सेंट्रल एशिया रिपब्लिक और ईस्ट यूरोपियन देशों तक कनेक्टिविटी के लिए ईरान अहम है। इसलिए भारत चाबहार पोर्ट में ईरान के साथ मिलकर काम कर रहा है।

“तब मुझे निकाला था और आज...” हसीना के तख्तापलट पर तसलीमा का तंज

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निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के बीच बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर बड़ी बात कही है। तसलीमा नसरीन ने कहा कि शेख हसीना को इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा। अपनी स्थिति के लिए वे खुद जिम्मेदार हैं। उन्होंने कट्टरपंथियों को पनपने दिया। तसलीमा नसरीन ने शेख हसीना पर अपनी भड़ास निकाली है और कहा है कि जिन इस्लामियों को खुश करने के लिए शेख हसीना ने मुझे देश से निकाल दिया और अब उन्हीं लोगों ने उन्हें देश से निकाल फेंका है।

तस्लीमा नसरीन ने पहले ही एक पोस्ट में कहा था, शेख हसीना पर "इस्लामवादियों को बढ़ाने" और भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को पनपने देने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने देश में सेना शासन के खिलाफ भी बात की और लोकतंत्र की वकालत की। तस्लीमा ने कहा कि आज "हसीना को इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा। वह अपनी स्थिति के लिए खुद जिम्मेदार थीं। उन्होंने इस्लामवादियों को बढ़ने दिया। उन्होंने अपने लोगों को भ्रष्टाचार में शामिल होने की इजाजत दी। अब बांग्लादेश को पाकिस्तान जैसा नहीं बनना चाहिए। सेना को शासन नहीं करना चाहिए। राजनीतिक दलों को लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को वापस लाना चाहिए।'' 

तसलीमा नसरीन ने अपने दूसरे पोस्ट में लिखा, 'शेख हसीना ने इस्लामियों को खुश करने के लिए 1999 में मुझे मेरे देश से बाहर निकाल दिया। जब मैं अपनी मां को उनकी मृत्युशय्या पर देखने के लिए बांग्लादेश में दाखिल हुई थी और मुझे फिर कभी देश में प्रवेश नहीं करने दिया। वही, इस्लामवादी छात्र आंदोलन में शामिल रहे हैं, जिन्होंने आज शेख हसीना को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया।'

बता दें कि तसलीमा नसरीन को 1994 में अपनी पुस्तक "लज्जा" को लेकर कट्टरपंथी संगठनों द्वारा मौत की धमकियों के चलते बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। 1993 में लिखी गई इस पुस्तक पर बांग्लादेश में प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन यह अन्य जगहों पर बेस्टसेलर बन गई। हसीना की कट्टर प्रतिद्वंद्वी खालिदा जिया उस समय प्रधानमंत्री थीं, लेखिका तब से निर्वासन की जिंदगी बिता रही हैं।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में रविवार को सबसे घातक हिंसक प्रदर्शन हुआ जिसमें पुलिस के साथ झड़प में लगभग 100 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। इसके परिणामस्वरूप, प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को प्रधान मंत्री आवास में तोड़फोड़ की थी। इसके बाद बदलते घटनाक्रम में शेख हसीना ने सीधे टकराव से खुद को दूर रखा और अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और एक सैन्य विमान में बैठकर देश छोड़कर चली गईं। देश के सेना प्रमुख ने कुछ घंटों बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और घोषणा की कि देश को चलाने के लिए एक अंतरिम सरकार बनाई जाएगी।

अभी भारत में ही रहेंगीं शेख हसीना, लंदन जाने को लेकर फंसा, अब क्या होगा अगला कदम?*
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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले उन्हें अपना देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा तो अब शेख हसीना किसी सुरक्षित “ठिकाने” की तलाश में हैं।हसीना को बांग्लादेश में हालात बिगड़ने के कारण सोमवार को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उन्होंने सुरक्षा की चिंता में बांग्लादेश छोड़ दिया और तुरंत भारत आ गईं।शेख हसीना अभी भारत में हैं, लेकिन वो निर्वासन के दिन लंदन में बिताना चाहती हैं। इसके लिए उनकी ब्रिटिश सरकार से बातचीत हुई है, लेकिन लहां को लेकर पेंच फंसता दिख रहा है। दरअसल, ब्रिटिश सरकार ने शेख हसीना को किसी भी तरह का कानूनी संरक्षण देने से इनकार कर दिया। ब्रिटिश सरकार ने शेख हसीना से कहा है कि अगर उनके खिलाफ कोई कानूनी-कार्यवाही शुरू होती है तो ब्रिटेन उनका बचाव नहीं करेगा। अंग्रजों के इस रुख के बाद शेख हसीना ने दूसरे विकल्पों पर भी विचार करना शुरू कर दिया है। भारत में राजनीतिक शरण के बाद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लंदन जाना था। हालांकि अब उनकी लंदन जाने की योजना में रुकावट की खबर है. इससे जाहिर तौर पर उनके लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। ब्रिटेन के गृह विभाग के अनुसार शरण लेने के लिए शेख हसीना को सबसे पहले उस देश में शरण का दावा करना चाहिए जहां वो सबसे पहले पहुंच हैं। ब्रिटेन का मानना है कि यही सुरक्षा का सबसे तेज मार्ग है। इसी कारण हसानी का यूके में शरण अनुरोध अभी भी अटका हुआ है।लेकिन शेख हसीना की बहन शेख रेहाना और भतीजी ट्यूलिप सिद्दीक जो ब्रिटेन की नागरिक हैं, उनके शरण अनुरोध के लिए सबसे मजबूत बिंदु हैं। वहीं, अमेरिका ने शेख हसानी का वीजा रद्द कर दिया, यानी की वो अब यूएस की यात्रा नहीं कर पाएंगी। माना जा रहा है कि अपने कार्यकाल के दौरान बांग्लादेश और अमेरिका के बीच संबंध अच्छे नहीं थे, जिसके कारण उनको अब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि हसीना ने अमेरिका को बेस बनाने के लिए आइलैंड देने से भी इनकार कर दिया था। इधर, भारत ने शेख हसीना को हर संभव सहायता का भरोसा दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आज सर्वदलीय बैठक में बताया कि हसीना बांग्लादेश के घटनाक्रम से सदमे में हैं। हिंडन एयर बेस पर उनका प्लेन उतरने के बाद उन्हें सुरक्षित स्थान पर ठहराया गया है। सब कुछ प्लानिंग के अनुसार होता तो शेख हसीना लंदन के लिए उड़ान भर चुकी होतीं, लेकिन अब कम से कम दो दिन तक उनके भारत में ही रहना होगा।
शेख हसीना को हटाना ही प्रदर्शन का एक मात्र एजेंडा, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले से भारत चिंतित, बांग्लादेश हिंसा पर बोले जयशंकर*
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#s_jaishankar_address_rajya_sabha_lok_sabha_on_situation_in_bangladesh बांग्लादेश में बिगड़े हालातों पर आज संसद भवन में सर्वदलीय बैठक हुई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वहां के हालातों और भारत की स्थिति पर जानकारी दी है। इस मसले पर आज संसद में भी विदेश मंत्री ने स्थिति के बारे में जानकारी दी। मंगलवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लोकसभा और राज्यसभा में बांग्लादेश हिंसा पर भारत सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा। *शेख हसीना ने मांगा था सहयोग* बांग्लादेश के ताजा हालात पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि वहां की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आनन-फानन में हमसे भारत आने का अनुरोध किया और भारत सरकार ने उनके सुरक्षित भारत आने की व्यवस्था की। एस जयंशकर ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते बहुत मजबूत हैं। बांग्लादेश की सत्ता से शेख हसीना को हटाना ही प्रदर्शन का एक मात्र एजेंडा था। *बांग्लादेश 90 हजार भारतीय मौजूद* एस जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार बांग्लादेश में अपने नागरिकों के संपर्क में है। इस वक्त वहां करीब 90 हजार भारतीय मौजूद हैं। जिनमें से लगभग 9000 छात्र हैं। जुलाई में अधिकांश छात्र वापस लौट आए हैं। हम अल्पसंख्यकों की स्थिति के संबंध में भी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। ढाका के भारतीय उच्चायुक्त और चिटगांव के सहउच्चायुक्त हमें लगातार रिपोर्ट भेज रहे हैं। *अल्पसंख्यकों की स्थिति पर जताई चिंता* हम बांग्लादेश में अल्पंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। बीते 24 घंटे के दौरान वहां काफी कुछ बदल गया है। यह बहुत ही संवेदनशील मसला है। हम सदन से इस मसले पर सहयोग चाहते हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि छात्रों और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न समूहों और संगठनों से बात की जा रही है।
पेरिस ओलंपिक में नीरज चोपड़ा का शानदार प्रदर्शन, पहले ही प्रयास में फाइनल के लिए क्वालिफाई किया

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भारत के 'गोल्डन बॉय' नीरज चोपड़ा ने पेरिस ओलंपिक में धमाकेदार आगाज किया है। नीरज ने पहले ही थ्रो से फाइनल में अपनी जगह बना ली।नीरज ग्रुप बी के क्वालिफिकेशन में सबसे पहले शुरुआत करने आए और उन्होंने अपना इस सत्र का शानदार प्रदर्शन करते हुए पहले ही प्रयास में 89.34 मीटर का थ्रो किया जो 84 मीटर के स्वत: क्वालिफिकेशन से काफी अधिक था। 

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नीरज के अलावा पाकिस्तान के उनके प्रतिद्वंद्वी अरशद नदीम ने भी पहले ही प्रयास में कमाल का प्रदर्शन किया और 86.59 मीटर का थ्रो कर स्वतः फाइनल के लिए क्वलिफाई कर लिया। नीरज की तरह अरशद का भी यह सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो था।

पहले प्रयास में फाइनल के लिए सीधे क्वालिफाई करने के बाद नीरज और अरशद ने क्वालिफिकेशन में आगे हिस्सा नहीं लेने का निर्णय लिया और वे अन्य प्रयास में भाला फेंकने नहीं आए। फाइनल मुकाबला आठ अगस्त को भारतीय समयानुसार देर रात 11.50 बजे से होगा। वह लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल जीतना चाहेंगे। नीरज ने टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचते हुए पहला स्थान हासिल किया था।

नीरज चोपड़ा ने 89.34 मीटर का थ्रो फेंक इस सीजन में अपना बेस्ट प्रदर्शन किया है। दिलचस्प बात ये है कि वो इस थ्रो के साथ अपने करियर बेस्ट थ्रो के काफी करीब पहुंच गए। नीरज का बेस्ट थ्रो 89.94 मीटर है और जिस अंदाज में उन्होंने पेरिस ओलंपिक में अपना खेल दिखाया है उसे देखकर लग रहा है कि वो फाइनल में 90 मीटर का बैरियर भी पार कर लेंगे।

'बांग्लादेश से बंगाल आ रहे हैं 1 करोड़ हिन्दू शरणार्थी, तैयार रहें..', हिंसा के बीच शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान

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बांग्लादेश में जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा देकर देश छोड़ दिया है, जिससे भारत भी चिंतित है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि बांग्लादेश से एक करोड़ हिंदू शरणार्थी पश्चिम बंगाल आने वाले हैं, इसलिए राज्य को तैयार रहना चाहिए।

अगले तीन दिन में स्थिति नहीं सुधरी तो एक करोड़ हिंदू बांग्लादेश से विस्थापित होकर भारत आना शुरू होंगे। CAA के तहत बंगाल सरकार को गवर्नर और भारत सरकार से बात करना शुरू करनी चाहिए। भारत बांग्लादेश के हिंदुओ का नरसंहार नहीं होने देगा, फिर चाहे चिकन नेक को बड़ा क्यों ना करना पड़े। 

शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार हो रहा है, जिसमें रंगपुर में नगर परिषद के पार्षद हरधन नायक की हत्या और सिराजगंज के थाने में 13 पुलिसकर्मियों की हत्या शामिल है, जिनमें से 9 हिंदू हैं। नोआखली में हिंदुओं के घर जला दिए गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर भारत सरकार से बात करें। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का उल्लेख करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कानून में स्पष्ट है कि धार्मिक उत्पीड़न के शिकार लोगों की मदद की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तीन दिनों के भीतर स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो बांग्लादेश कट्टरपंथियों के हाथों में चला जाएगा। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदूओं का उत्पीड़न जारी है।

बांग्लादेश में हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 101 हो गई है। आरक्षण सुधार की मांग से शुरू हुआ आंदोलन अब सरकार बदलने के आंदोलन में बदल गया है। सरकार के इस्तीफे की मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों और सरकार समर्थकों के बीच झड़पों में सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस थानों, चौकियों, सत्तारूढ़ पार्टी के दफ्तरों और नेताओं के आवासों पर हमले किए और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

केदारनाथ रेस्क्यू ऑपरेशन का 6वां दिन, अब तक 11,775 श्रद्धालु निकाले गए, सीएम धामी ग्राउंड जीरो के लिए रवाना

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 उत्तराखंड में पिछले दिनों हुई भारी बारिश के चलते बड़ा नुकसान हुआ है. सबसे अधिक प्रभावित रुद्रप्रयाग जिला रहा. यहां भारी बारिश के चलते आपदा जैसे हालात बने, साथ ही हजारों की संख्या में लोग जगह-जगह पर फंस गए. केदारनाथ यात्रा मार्ग पर कई जगह पर सड़क क्षतिग्रस्त होने की वजह से हजारों लोग अलग-अलग जगह पर फंस गए थे, जिनके राहत बचाव का कार्य जारी है. क्षतिग्रस्त हुए केदारनाथ मार्ग और अन्य सुविधाओं को ठीक करने के लिए विभागीय सचिव मौके पर ही मौजूद हैं. ये अधिकारी तब तक प्रभावित क्षेत्र में कैंप लगाकर प्रवास करेंगे जब तक व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हो जातीं.

दरअसल, वर्तमान समय में पीडब्ल्यूडी सचिव पंकज कुमार पांडेय, आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे और राष्ट्रीय राज्य मार्ग के मुख्य अभियंता दयानंद आपदा प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद हैं. यह सभी अधिकारी धाम की व्यवस्थाएं मुकम्मल होने तक प्रभावित क्षेत्रों में कैंप लगाकर प्रवास करेंगे. इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी आज मंगलवार को आपदा प्रभावित क्षेत्र का हवाई निरीक्षण और स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं. इस दौरे के दौरान सीएम धामी स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे.

अभी तक इतने श्रद्धालु हुए रेस्क्यू

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर करीब एक हफ्ते पहले हुई भारी बारिश के चलते जान माल को काफी नुकसान पहुंचा है. साथ ही अलग-अलग जगह पर फंसे हजारों श्रद्धालुओं के राहत बचाव का कार्य का आज छठवां दिन है. अभी तक 11,775 श्रद्धालुओं को निकाला जा चुका है. केदारनाथ से 274 श्रद्धालुओं को एयरलिफ्ट किया गया है.

लिंचौली और भीमबली से 2,918 लोगों को एयरलिफ्ट किया जा चुका है. लिंचौली और भीमबली से पैदल 739 लोगों का रेस्क्यू हुआ है. गौरीकुंड से सोनप्रयाग पैदल मार्ग से 7,769 लोगों का रेस्क्यू हो चुका है. चीड़बासा से 75 लोगों को एयरलिफ्ट किया गया है. 50 श्रद्धालु ऐसे हैं जो अपने मन से रुके हुए हैं.

आज सीएम का हवाई और स्थलीय निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि केदारनाथ यात्रा मार्ग का रेस्क्यू अभियान लगभग संपन्न हो गया है. देश भर के बड़ी संख्या में फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला जा चुका है. हेलीकॉप्टर के जरिए भी रेस्क्यू किया गया है. राज्य हेलीकॉप्टर के साथ ही चिनूक और एमआई 17 हेलीकॉप्टरों के जरिए रेस्क्यू किया गया.

अब राज्य सरकार का फोकस है कि जो सड़क, पेयजल लाइन, विद्युत लाइन समेत अन्य चीजें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, उनको जल्द से जल्द ठीक किया जाए और केदारनाथ धाम की यात्रा को सुचारू किया जाए.

बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद निशाने पर हिंदू, “छात्रों” के बहाने कट्टरपंथी निकाल रहे अपनी नफरत!

#bangladesh_protest_hindu_houses_and_businesses_attacked 

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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे और देश छोड़ने के बाद पूरे बांग्लादेश में अलग-अलग शहरों में हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा है। हिन्दुओं के घरों, दुकानों और मंदिरों को नष्ट कर रहे हैं। कई जगह से हिन्दू घरों में लूटपाट और हिंसा की खबरें हैं। भीड़ चुन-चुनकर हिंदुओं को निशाना बना रही है। घरों में आग लगाई जा रही है। दुकानों को लूटा जा रहा है। 27 जिलों में हिंदुओं के घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया है। लोगों का कहना है कि ऐसा कोई इलाका या जिला नहीं बचा है, जहां सांप्रदायिक हमले न हुए हों। घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर हमलों के बारे में देश के विभिन्न हिस्सों से लगातार खबरें मिल रही हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि प्रदर्शनकारी “छात्रों” के आंदोलन की दिशा बदल गई है या फिर इस आंदोलन के नाम पर इस्लामी कट्टरपंथी अपनी नफरत निकाल रहे हैं?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ढाका के धानमंडी इलाके में स्थित इंदिरा गांधी सांस्कृतिक केंद्र को उपद्रवी भीड़ ने नुकसान पहुंचाया। ढाका ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने ढाका में कई प्रमुख स्थानों को भी आग के हवाले कर दिया, जिसमें धानमंडी 32 में बंगबंधु भवन, जिसे बंगबंधु स्मारक संग्रहालय के रूप में भी जाना जाता है, भी शामिल है। यह संग्रहालय हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान को समर्पित है, जिनकी 1975 में राष्ट्रपति के रूप में सेवा करते समय हत्या कर दी गई थी।

बांग्लादेश की द डेली स्टार की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने कल शाम तेलीपारा गांव में लालमोनिरहाट पूजा उद्यापन परिषद के सचिव प्रदीप चंद्र रॉय के घर में तोड़फोड़ की और लूटपाट की। इतना ही नहीं, पूजा उद्यापन परिषद के नगर पालिका सदस्य मुहिन रॉय के स्वामित्व वाली एक कंप्यूटर की दुकान में भी तोड़फोड़ की और लूटपाट की। इसके अलावा, जिले के कालीगंज उपजिले के चंद्रपुर गांव में चार हिंदू परिवारों के घरों में लूटपाट की गई। 

प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए हिंदू समुदाय के कुछ नेता डरे हुए हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं को पारंपरिक रूप से शेख हसीना की अवामी लीग का समर्थक माना जाता है।

बता दें कि बांग्लादेश एक मुस्लिम बहुल देश है। अमेरिका की 2022 की अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता की रिपोर्ट के मुताबिक देश की कुल आबादी 165.7 मीलियन थी। देश में 91 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, जिसके बाद हिन्दू धर्म के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है, देश में 8 प्रतिशत हिन्दू रहते हैं।