अमित शाह का दावा, मोदी तीसरी बार बनेंगे प्रधानमंत्री, देशभर में 300 से ज्‍यादा लोकसभा सीटें जीतेगी भाजपा

#amit_shaha_says_bjp_will_win_more_than_300_lok_sabha_seats_in_2024

भारतीय जनता पार्टी 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में जीत को लेकर काफी आश्वस्त दिख रही है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी अगले साल होने वाले आम चुनावों में देश भर में 300 से अधिक लोकसभा सीट जीतेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार देश का नेतृत्व करेंगे। यही नहीं, असम के डिब्रूगढ़ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बीजेपी पूर्वोत्तर राज्य की 14 लोकसभा सीटों में से 12 पर जीत हासिल करेगी।

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भाजपा डिब्रूगढ़ कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा संगठन के आधार पर चलने वाली पार्टी है और कार्यालय भाजपा की सभी गतिविधियों का केंद्र होता है। अभी नॉर्थ ईस्ट में 3 राज्यों के चुनाव हुए और तीनों राज्यों में भाजपा सरकार का हिस्सा है। नॉर्थ ईस्ट के आठ राज्यों में पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है और इसी के कारण नॉर्थ ईस्ट का विकास हुआ है।

कांग्रेस पर प्रहार करते हुए शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर को कभी कांग्रेस का एक गढ़ माना जाता था, लेकिन राहुल गांधी की (भारत जोड़ो) यात्रा के बावजूद पार्टी क्षेत्र के तीन राज्यों में हुए हालिया विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रही।शाह ने कहा कि राहुल गांधी ने विदेश में भारत का अपमान किया, अगर वह ऐसा ही करते रहे, तो न केवल पूर्वोत्तर से, बल्कि पूरे देश से कांग्रेस का सफाया हो जाएगा।कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान की गई उनकी विवादास्पद टिप्पणियों का जिक्र करते हुए शाह ने कहा, वे प्रधानमंत्री की जितनी निंदा करेंगे, उतना ही अधिक भाजपा आगे बढ़ेगी।

इतना ही नहीं शाह ने मोदी को गाली देने को लेकर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर भी तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा, कांग्रेस वाले कहते हैं मोदी तेरी कब्र खुदेगी। भाई, आपके कहने से कुछ नहीं होता। देश की 130 करोड़ जनता दिन-रात मोदी जी की लंबी उम्र की प्रार्थना कर रही है। मोदी को गाली निकालो। आपकी माता जी ने भी यह करके देख लिया, राहुल बाबा। जितनी गाली निकालोगे, कमल उतना खिलेगा।

शाह ने कहा कि विवादास्पद सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम,1958 या अफ्सपा को असम के 70 प्रतिशत इलाकों से हटा लिया गया है, जबकि बोडोलैंड और कार्बी आंगलोंग इलाके शांतिपूर्ण हैं तथा पड़ोसी राज्यों के साथ राज्य के सीमा विवाद का समाधान किया जा रहा है।

सचिन पायलट का अनशन खत्म,कहा-भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी

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राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अपनी ही प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वसुंधरा राजे की सरकार के समय हुए कथित भ्रष्टाचार को लेकर मंगलवार को जयपुर में कांग्रेस नेता और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने अनशन किया। पायलट ने कांग्रेस पार्टी की ओर से दी गई चेतावनी को दरकिनार करते हुए मंगलवार को जयपुर में एक दिवसीय अनशन किया। एक दिवसीय अनशन पांंच घंटे बाद खत्म हो गया। अनशन खत्म करने के बाद सचिन पायलट ने मीडिया से बातचीत में कहा, पूर्व में वसुंधरा राजे की सरकार में जो भी घोटाले हुए उसके ऊपर कार्रवाई नहीं होने को लेकर अपनी ही सरकार पर निशाना साधा।

सचिन पायलट ने मीडिया से बातचीत में कहा, पूर्व में वसुंधरा राजे की सरकार में जो भी घोटाले हुए उसके ऊपर कार्रवाई हो इसके लिए मैंने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखे लेकिन कोई जवाब नहीं आया। सचिन पायलट ने कहा,वसुंधरा सरकार में तमाम जो भ्रस्टाचार उसको लेकर आज मैं अनशन पर बैठा। यह वही मुद्दा है जिसको लेकर संसद के बाहर संसद के अंदर हमने अपनी मांग रखी। वसुंधरा जी जब सरकार में थी तब हमने बहुत से भ्रष्टाचार उजागर किए।विपक्ष में रहते हुए हमने पिछली वसुंधरा सरकार के भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ आंदोलन किया था। 4 साल में कार्रवाई की उम्मीद थी, लेकिन नहीं हुई। लेकिन अब मैं उम्मीद करता हूं, कार्रवाई होगी।

पायलट ने कहा कि हमनें चुनाव में वादा किया था कि भू माफिया, शराब माफिया और खनन माफिया के खिलाफ कारवाई करेंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि इसको लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लेटर लिखा था, लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ। इसका जवाब भी नहीं आया।

पायलट ने कहा कि सुखजिंदर सिंह रंधावा कुछ दिन पहले ही कांग्रेस प्रदेश प्रभारी बने हैं। मैंने पूर्व के प्रभारियों से भी बात की थी लेकिन यह भ्रष्टाचार का मामला अभी तक बना हुआ है। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी। पायलट ने रंधावा के उस बयान का जवाब दिया है , जिसमें कांग्रेस के राजस्थान मामलों के प्रभारी महासचिव सुखजिंदर रंधावा ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया था कि उन्होंने पायलट से बात की है और उनसे अपनी ही सरकार के खिलाफ जनता के बीच जाने के बजाय पार्टी के मंच पर मुद्दों को उठाने के लिए कहा है।

महाराष्ट्र सरकार का बड़ा ऐलान, 'स्वतंत्र वीर गौरव दिन' के तौर पर मनाई जाएगी सावरकर की जयंती

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वीडी सावरकर को लेकर जारी विवाद के बीच महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने 28 मई को वीडी सावरकर की जयंती को 'स्वतंत्रवीर गौरव दिवस' के रूप में मनाने का एलान किया है। सीएम शिंदे की ओर से ये जानकारी ट्वीट के माध्यम से दी गई।

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सीएम ऑफिस से एक ट्वीट किया गया। इस ट्वीट में कहा गया है कि स्वतंत्र वीर सावरकर के जन्मदिन (28 मई) को ‘स्वातंत्र्यवीर गौरव दिन’ के तौर पर मनाया जाने वाला है। देश की स्वतंत्रता के लिए सावरकर का योगदान बेहद अहम है। उनके विचारों के प्रचार और प्रसार के लिए विभिन्न कार्यक्रम का भी आयोजित किया जाएगा।

ट्वीट में आगे लिखा गया कि देश की स्वतंत्रता के लिए, राष्ट्र की उन्नति के लिए स्वतंत्र वीर सावरकर का योगदान बहुत बड़ा है। उनकी देशभक्ति, धीरता, प्रगतिशील विचारों को आगे ले जाने के लिए और उनका आभार जताने के लिए उनके जन्मदिन को स्वतंत्र वीर गौरव दिन के तौर पर मनाए जाने की मांग उद्योग मंत्री उदय सामंत ने की थी।

बता दें कि सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को नासिक के बाघपुर में हुआ था। उनके देश की आजादी में दिए गए योगदानों पर उनका आभार जताने के लिए राज्य सरकार ने उनके जन्मदिन पर स्वतंत्रवीर गौरव दिवस मनाने का फैसला किया है।

आखिर क्यों टीएमसी, एनसीपी और सीपीआई से छिन गया राष्ट्रीय दल होने का दर्जा, केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का क्यों बढ़ा कद

#whytmcncpandcpiloststatusofnational_party

चुनाव आयोग ने पूरे देश में राजनीतिक दलों के स्टेटस में बड़ा बदलाव किया है। चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी (आप) को एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता दी है। इसके अलावा तीन राजनीतिक दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) से राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता वापस ले ली है।ऐसे में ये सवाल उठ रहे हैं कि, इन राजनीतिक पार्टियों का यह दर्जा क्यों छिना गया और इसके नियम क्या हैं?

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चुनाव आयोग ने जो आदेश जारी किया है, उसके मुताबिक, शरद पवार की एनसीपी और ममता बनर्जी की टीएमसी के अलावा सीपीआई से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा वापस ले लिया गया।चुनाव आयोग के अनुसार पिछले दो संसदीय चुनावों और 21 विधानसभा चुनावों में राजनीतिक प्रदर्शन के आधार पर यह फैसला किया गया।दरअसल चुनाव आयोग ने किसी राजनीतिक पार्टी को राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल का दर्जा देने के लिए कुछ नियम तय किए हैं। आयोग की शर्तों को पूरा करने के बाद मान्यता प्राप्त दल को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलता है।

राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त करने की शर्तें

बता दें कि चुनाव आयोग के अनुसार, किसी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए तीन शर्तों को पूरा करना आवश्यक है। ये हैं राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त करने की तीन शर्तें-

1.अगर किसी पार्टी को पिछले लोकसभा चुनाव में देश में चार से ज्यादा राज्यों में 6 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिलता है, तो उसे राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता चुनाव आयोग देता है।

2. वहीं इसके अलावा अगर कोई राजनीतिक पार्टी तीन राज्यों को मिलाकर लोकसभा की तीन प्रतिशत सीटें जीत लेती है तो इस लिहाज से भी राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता दी जाती है।

3. साथ ही अगर किसी पार्टी को चार राज्यों में क्षेत्रीय दल का भी दर्जा मिला हुआ है तो उसे राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता मिल जाती है।

देश में अब कितनी राष्ट्रीय पार्टी?

तृणमूल, एनसीपी और सीपीआई अब राष्ट्रीय पार्टी कहलाने की इन शर्तों को पूरा नहीं कर पाई। पहले आठ राष्ट्रीय दल थे जिसमें तृणमूल, बहुजन समाज पार्टी, बीजेपी, भाकपा, भाकपा (मार्क्सवादी), कांग्रेस, नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और राकांपा शामिल थे। अब एनसीपी, तृणमूल और सीपीआई को हटाकर और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के इस सूची में शामिल होने के साथ देश में छह राष्ट्रीय पार्टी हैं। आयोग ने कहा कि एमसीपी और तृणमूल कांग्रेस को हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में उनके प्रदर्शन के आधार पर क्रमशः नगालैंड और मेघालय में राज्य स्तर के दलों के रूप में मान्यता दी जाएगी।

इनसे क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा भी वापस

इसके अलावा चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी), आंध्र प्रदेश में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस), मणिपुर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक एलायंस, पुडुचेरी में पट्टाली मक्कल काची, पश्चिम बंगाल और मिजोरम में रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और पीपुल्स कांफ्रेंस को मिला क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा भी वापस ले लिया है।

आखिर क्यों टीएमसी, एनसीपी और सीपीआई से छिन गया राष्ट्रीय दल होने का दर्जा, केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का क्यों बढ़ा कद, जानें क्या कहते हैं नियम

#why_tmc_ncp_and_cpi_lost_status_of_national_party

चुनाव आयोग ने पूरे देश में राजनीतिक दलों के स्टेटस में बड़ा बदलाव किया है। चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी (आप) को एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता दी है। इसके अलावा तीन राजनीतिक दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) से राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता वापस ले ली है।ऐसे में ये सवाल उठ रहे हैं कि, इन राजनीतिक पार्टियों का यह दर्जा क्यों छिना गया और इसके नियम क्या हैं?

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चुनाव आयोग ने जो आदेश जारी किया है, उसके मुताबिक, शरद पवार की एनसीपी और ममता बनर्जी की टीएमसी के अलावा सीपीआई से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा वापस ले लिया गया।चुनाव आयोग के अनुसार पिछले दो संसदीय चुनावों और 21 विधानसभा चुनावों में राजनीतिक प्रदर्शन के आधार पर यह फैसला किया गया।दरअसल चुनाव आयोग ने किसी राजनीतिक पार्टी को राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल का दर्जा देने के लिए कुछ नियम तय किए हैं। आयोग की शर्तों को पूरा करने के बाद मान्यता प्राप्त दल को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलता है। 

राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त करने की शर्तें

बता दें कि चुनाव आयोग के अनुसार, किसी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए तीन शर्तों को पूरा करना आवश्यक है। ये हैं राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त करने की तीन शर्तें-

1.अगर किसी पार्टी को पिछले लोकसभा चुनाव में देश में चार से ज्यादा राज्यों में 6 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिलता है, तो उसे राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता चुनाव आयोग देता है।

2. वहीं इसके अलावा अगर कोई राजनीतिक पार्टी तीन राज्यों को मिलाकर लोकसभा की तीन प्रतिशत सीटें जीत लेती है तो इस लिहाज से भी राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता दी जाती है।

3. साथ ही अगर किसी पार्टी को चार राज्यों में क्षेत्रीय दल का भी दर्जा मिला हुआ है तो उसे राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता मिल जाती है।

देश में अब कितनी राष्ट्रीय पार्टी?

तृणमूल, एनसीपी और सीपीआई अब राष्ट्रीय पार्टी कहलाने की इन शर्तों को पूरा नहीं कर पाई। पहले आठ राष्ट्रीय दल थे जिसमें तृणमूल, बहुजन समाज पार्टी, बीजेपी, भाकपा, भाकपा (मार्क्सवादी), कांग्रेस, नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और राकांपा शामिल थे। अब एनसीपी, तृणमूल और सीपीआई को हटाकर और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के इस सूची में शामिल होने के साथ देश में छह राष्ट्रीय पार्टी हैं। आयोग ने कहा कि एमसीपी और तृणमूल कांग्रेस को हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में उनके प्रदर्शन के आधार पर क्रमशः नगालैंड और मेघालय में राज्य स्तर के दलों के रूप में मान्यता दी जाएगी। 

इनसे क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा भी वापस

इसके अलावा चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी), आंध्र प्रदेश में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस), मणिपुर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक एलायंस, पुडुचेरी में पट्टाली मक्कल काची, पश्चिम बंगाल और मिजोरम में रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और पीपुल्स कांफ्रेंस को मिला क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा भी वापस ले लिया है।

तमिलनाडु सरकार को सुप्रीम कोर्ट से लगा झटका, आरएसएस के मार्च को लेकर मद्रास हाई कोर्ट फैसले को दी थी चुनौती

#tamil_nadu_govt_gets_blow_from_supreme_court

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस को तमिलनाडु में मार्च की अनुमति मिल गई है। वहीं इस मसले पर तमिलनाडु सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है।दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मार्च के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है।

तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने आरएसएस के मार्च पर मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए आरएसएस की रैली को तय रूट से निकालने की मंजूरी दे दी है।जस्टिस वी रामसुब्रह्मण्यम और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने यह फैसला सुनाया है।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने तमिलनाडु में 51 जगहों पर रूट मार्च रैली निकालने का एलान किया था। इस पर राज्य की डीएमके सरकार ने रोक लगा दी थी। डीएमके सरकार ने सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ने की आशंका के चलते आरएसएस की रैली को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ आरएसएस ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। जिस पर हाईकोर्ट ने छह जगहों को छोड़कर बाकी जगहों पर आरएसएस को मार्च रैली करने की इजाजत दे दी। हालांकि, मार्च की मंजूरी के साथ ही कोर्ट ने कुछ शर्तें भी लगाई थी। जिसके तहत आरएसएस कार्यकर्ताओं को बिना लाठी डंडे या हथियारों के मार्च निकालने और किसी भी ऐसे मुद्दे पर बोलने से मना किया गया था, जिससे देश की अखंडता पर असर पड़े।

मामले पर फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस वी रामासुब्रमन्यम और पंकज मिथल की बेंच ने तमिलनाडु सरकार की दलील ठुकरा दी है। तमिलनाडु सरकार ने हाई कोर्ट में भी विरोध किया था। लेकिन जजों ने इसे खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा था आरएसएस हर जगह की स्थानीय पुलिस को अनुमति के लिए आवेदन दे। अब यही आदेश बरकरार रहेगा।सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक लोकतंत्र की भाषा है और एक सत्ता की भाषा है.आप कौन सी भाषा बोलते हैं यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कहां हैं।

अपनी ही सरकार के खिलाफ सचिन पायलट का अनशन, आलाकमान की चेतावनी का नहीं हुआ असर

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राजस्थान कांग्रेस का रार खुलकर सड़क पर आ गया है। सचिन पायलट ने मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ खुले तौर पर मोर्चा खोल दिया है। पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट भ्रष्टाचार को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ अनशन पर बैठ गए हैं। राजस्‍थान के पूर्व उपमुख्‍यमंत्री सचिन पायलट मंगलवार को मौन व्रत और अनशन पर बैठ गए हैं। सचिन पायलट ने ज्योतिबा फुले को श्रद्धांजलि देने के बाद में शहीद स्मारक पर अपना अनशन शुरू किया।

पायलट के मंच पर गहलोत के मंत्री का बेटा

पायलट आज 11 बजे से 5 बजे तक मौन व्रत रखने वाले हैं, इस दौरान वो कई जवाब देने से बच जाएंगे। सचिन पायलट के अनशन स्थल पर समर्थकों की भीड़ जुटती जा रही है। कई नेता भी अनशन स्थल पर नजर आ रहे हैं। गहलोत सरकार में मंत्री विश्वेंद्र सिंह के बेटे अनिरुद्ध सिंह भी सचिन पायलट के अनशन को समर्थन देने पहुंचे हैं। बता दें कि अनिरुद्ध सिंह पिछले कुछ समय से राहुल गांधी और गहलोत सरकार को निशाना बना रहे हैं।

अनशन का पोस्टर पूरी तरह से वसुंधरा राजे पर केंद्रित

धरना स्थल की तस्वीरें सामने आईं हैं। इनसे पायलट की तरफ से स्पष्ट करने का प्रयास किया गया कि अनशन वसुंधरा राजे सरकार में हुए भ्रष्टाचार के विरोध में है। पायलट गुट ने कांग्रेस आलाकमान की नाराजगी और मामले की गंभीरता को समझते हुए अपनी सरकार के खिलाफ एक भी बात नहीं लिखी है। अनशन को पूरी तरह से वसुंधरा राजे पर केंद्रित किया गया है।अनशन के पोस्‍टर पर महात्मा गांधी की तस्वीर है। पोस्‍टर पर लिखा है- वसुंधरा सरकार में भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन।

मालूम हो कि पायलट ने रविवार को अपने कार्यकर्ताओं के साथ मंगलवार को अपनी ही सरकार के खिलाफ अनशन पर बैठने का ऐलान किया था। जहां उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीएम अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे की भ्रष्टाचार को लेकर साठगांठ होने के संगीन आरोप लगाए थे। वहीं पायलट ने कहा था कि सीएम रहते हुए गहलोत ने राजे सरकार के घोटालों पर कोई भी एक्शन नहीं लिया।

सलमान खान को एक बार फिर मिली जान से मारने की धमकी, फोन पर कहा- 30 अप्रैल को करेगा मर्डर

#salman_khan_death_threat

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बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को लगातार जान से मारने की धमकी म‍िल रही है। कुख्‍यात गैंगस्‍टर लॉरेंस ब‍िश्‍नोई और गोल्‍डी बराड़ गैंग की ओर से मिलीं धमकियों के बीच सलमान खान को एक बार फ‍िर से सोमवार की रात जान से मारने की धमकी म‍िली है।सलमान को इस बार मारने की तारीख तक का एलान कर दिया गया है। इस बात की जानकारी मुंबई पुलिस ने दी है।

धमकी देने वाले ने खुद को बता जोधपुर का गौरक्षक

कॉलर ने पुलिस कंट्रोल को कॉल कर कहा की वो सलमान ख़ान को 30 तारीख़ को मारेगा। कॉलर ने अपने आप को रॉकी भाई बताया और कहा की वो जोधपुर का गौरक्षक है। यह कॉल मुंबई पुलिस कंट्रोल को कल सोमवार रात 9 बजे आया। धमकी भरे कॉल के बाद मुंबई पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

30 अप्रैल को मारने की धमकी

एएनाई ने ट्वीट कर सलमान खान को लेकर ये जानकारी दी है। इस ट्वीट में मुंबई पुलिस के हवाले से कहा गया है, 'कल पुलिस कंट्रोल रूम में एक कॉल आया और उस शख्स ने खुद को राजस्थान के जोधपुर का रॉकी भाई बताया। इसने बताया कि वह 30 अप्रैल को सलमान खान को जान से मार देगा। इस मामले में आगे की छानबीन में पुलिस जुटी हुई है।

हथियार रखने के लिए लाइसेंस भी मिला

इससे पहले गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने भी सलमान खान को जान से मारने की धमकी दी थी। वो कई बार कैमरे के सामने भी ऐसी धमकी दे चुका है। बिश्नोई ने कहा था कि वो सलमान से बचपन से ही नफरत करता है, क्योंकि उन्होंने काले हिरण का शिकार किया था। जिसके बाद एक्टर की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। सलमान खान ने हाल ही में वाइड कलर की बुलेट प्रूफ निसान एसयूवी कार खरीदी है और उन्की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें हथियार रखने के लिए लाइसेंस भी मुहैया कराया गया है।

महज 10 साल में आप पार्टी की मौजूदगी 4 राज्यों के विधानसभा में, दो राज्यों में सत्ता, 161 विधायक और 10 राज्यसभा सांसदों वाली आप पार्टी की ये है अ


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26 नवंबर 2012 को अस्तित्व में आई आम आदमी पार्टी (आप) ने महज एक दशक में जो सफलताएं अर्जित की हैं, वह दशकों पुरानी पार्टियों के लिए सपना ही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ दिल्ली में हुए अन्ना आंदोलन की कोख से जन्मी पार्टी ने राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल कर लिया है। महज 10 सालों में पार्टी की मौजूदगी 4 राज्यों के विधानसभा में है। दो राज्यों में सत्ता, 161 विधायक और 10 राज्यसभा सांसदों वाली पार्टी कांग्रेस और भाजपा के अलावा एकमात्र पार्टी है जिसकी एक से अधिक राज्यों में सरकार है। हालांकि, लोकसभा में पार्टी का अभी प्रतिनिधित्व नहीं है।

'आप' का गठन 26 नवंबर 2012 को अरविंद केजरीवाल की अगुआई में हुआ। पार्टी पहली बार वर्ष 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में उतरी और 28 सीटों पर जीत हासिल की। दूसरे नंबर पर रहने के बावजूद यहां पार्टी सरकार बनाने में कामयाब रही। राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी बनी कि पार्टी ने कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़कर ही उसी के समर्थन से सरकार बना ली। हालांकि, यह सरकार 49 दिन ही चली, लेकिन इसने पार्टी के सत्ता का रास्ता खोल दिया। पार्टी को पहली बार फरवरी 2013 में राज्य स्तरीय दल का दर्जा मिला। 

पार्टी ने दूसरा चुनाव 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव का लड़ा। इस बार इसने 70 में से 67 सीट जीतीं और 5 साल तक सफलतापूर्वक सरकार चलाई। मुफ्त बिजली और मुफ्त पानी जैसे लुभावनी योजनाओं और शिक्षा-स्वास्थ्य पर फोकस करते हुए सरकार चलाने के बाद 2020 में पार्टी ने तीसरी बार दिल्ली में सरकार बनाई। तब 70 में से 62 सीटों पर जीत मिली। इस बीच 2017 में पंजाब में चुनाव लड़ी, लेकिन पार्टी सत्ता से दूर रही लेकिन मुख्य विपक्षी दल बनी। 2022 में पंजाब में 92 विधायकों के साथ बहुमत के साथ सरकार बनाई। फिर गोवा में चुनाव लड़कर दो विधायक जीते। गुजरात चुनाव में आप के पांच विधायक जीते।

लोकसभा में एक भी सांसद नहीं, दिल्ली से नहीं खुल पाया है खाता

'आप' भले ही इस समय मुख्य विपक्षी दल बनने की कोशिश में जुटी है, लेकिन लोकसभा में अभी उसका एक भी सांसद नहीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को महज पंजाब की एक सीट पर जीत मिली थी। भगवंत मान के मुख्यमंत्री बन जाने के बाद यह सीट खाली हो गई और उपचुनाव में संगरूर सीट को पार्टी बरकरार नहीं रख सकी। राज्यसभा में पार्टी के 10 सांसद हैं, लेकिन लोकसभा में अभी प्रतिनिधित्व नहीं है। वहीं, दूसरी ओर पार्टी को इस बात का भी मलाल होगा कि अपने सबसे बड़े गढ़ दिल्ली में भी अभी तक लोकसभा का एक भी सीट नहीं जीत पाई है। विधानसभा में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली पार्टी को दिल्ली में 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव में एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। हालांकि, 2014 में पार्टी के 4 सांसद पंजाब से जीत हासिल करने में कामयाब रहे थे।

कहां-कितने विधायक और सांसद

विधायक

दिल्ली- 62

पंजाब-92

गोवा-02

गुजरात-05

सांसद

लोकसभा-00

राज्यसभा-10

वाशिंगटन में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं- मुस्लिम अगर भारत में खुश नहीं तो पाकिस्तान से ज्यादा आबादी क्यों होती, पश्चिमी धारणा प

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भारत के खिलाफ 'नकारात्मक पश्चिमी धारणा' पर आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जमकर वार किया। वाशिंगटन में एक कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री ने भारत के मुसलमानों की स्थिति के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों का रोना रोने वाले पाक से भी बेहतर भारत में मुस्लिम खुश और सुरक्षित हैं।

पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स (PIIE) के कार्यक्रम में बोलते हुए सीतारमण ने कहा कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी भारत में हैं और यह आबादी तेजी से संख्या में बढ़ रही है।

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी भारत मेंः सीतारमण

सीतारमण ने कहा कि पश्चिमी मीडिया में कहा जाता है कि भारत में शासन के समर्थन से मुस्लिमों का जीवन कठिन बनाया जाता है, लेकिन ये सब निराधार है। वित्त मंत्री ने कहा कि अगर ऐसा होता तो भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी कैसे होती।

भारत का मुसलमान कर रहा तरक्की

पीआईआईई के अध्यक्ष एडम एस पोसेन ने जब पश्चिमी मीडिया में भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यकों से हिंसा के बारे में रिपोर्टिंग होने के बारे में पूछा, तो सीतारमण ने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया।

वित्त मंत्री ने कहा कि 1947 में आजादी के बाद से पाक के विपरीत भारत में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है। ऐसा केवल इसलिए है, क्योंकि भारत में हर तरह का मुसलमान अपना व्यवसाय कर रहा है, उनके बच्चों को शिक्षा दी जा रही है, फेलोशिप दी जा रही है। 

PAK में मुस्लिम भी सुरक्षित नहीं

वित्त मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान में हर अल्पसंख्यक अपनी संख्या में घट रहा है या कम हो रहा है। यहां तक कि कुछ खुद को एक इस्लामिक देश घोषित करने के बावजूद वहां के कुछ मुस्लिम संप्रदायों पर भी हमला कर सफाया किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी मुल्क में हर किसी के मन में असुरक्षा का भाव है।

बता दें कि सीतारमण अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की बैठकों में भाग लेने वाशिंगटन पहुंचीं हैं। वे दूसरी G20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक की अध्यक्षता भी करेंगी।