बीजेपी के स्थापना दिवस पर पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं को किया संबोधित, जाने भगवान हनुमान का जिक्र कर क्या संदेश देने की कोशिश

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भारतीय जनता पार्टी आज स्थापना दिवस मना रही है। वहीं, आज पूरे देश में हनुमान जन्मोत्सव की धूम है। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस मौके पर पीएम का भाषण हनुमान जी पर केंद्रित रहा। पीएम नरेंद्र मोदी ने कार्यकर्ताओं ने कहा कि काम उसी तरह करना है जैसे बजरंग बली करते थे।पीएम मोदी ने कहा कि जब लक्ष्मण जी पर संकट आया तब हनुमान जी पूरा पर्वत ही उठाकर ले आए। भाजपा भी इसी प्रेरणा से परिणाम लाने में लोगों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करती रही है, करते रहना है, करते रहेंगे।

भाजपा को भगवान हनुमान से मिलती है लड़ने की प्रेरणा

स्थापना दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले 44 साल के सफर को देखें तो हम शून्य से उस मुकाम पर हैं जहां से और आगे बढ़ना है। इस सफर से जुड़ी तरह तरह की स्मृतियां हैं जो बरबस याद आ जाती हैं।आज हम देश के कोने-कोने में भगवान हनुमान जी की जन्म जयंती मना रहे हैं। हनुमान जी का जीवन और उनके जीवन के प्रमुख प्रसंग आज भी हमें पुरषार्थ के लिए प्रेरित करते हैं भारत की विकास यात्रा के लिए प्रेरणा देते हैं।हनुमान जी के पास असीम शक्ति है लेकिन इस शक्ति का इस्तेमाल वो तभी कर पाते हैं जब स्वयं पर से उनका संदेह समाप्त हो जाता है।2014 से पहले भारत की भी यही स्थिति थी। लेकिन आज भारत बजरंगबली जी की तरह अपने भीतर सूक्त शक्तियों का आभास कर चुका है।

भाजपा भारत के लिए दिन-रात काम कर रही है-पीएम

पीएम मोदी ने कहा कि हम भगवान हनुमान के पूरे जीवन को देखें, तो उनके पास ‘कर सकते हैं’ वाला रवैया था जिसने उन्हें सभी प्रकार की सफलता लाने में मदद की। उन्होंने कहा कि भाजपा भारत के लिए दिन-रात काम कर रही है और हमारी पार्टी ‘माँ भारती’, संविधान और राष्ट्र को समर्पित है।

भाजपा जो काम कर रही,विपक्ष उसे पचा नहीं पा रहा-पीएम

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब हमारा मजाक उड़ाकर सफल नहीं हुए तो बादशाही मानसिकता वाले लोगों की नफरत और बढ़ गई। दशकों से हिंसा झेल रहे कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट में शांति का सूरज उगेगा, ये उन्होंने सोचा नहीं था। आर्टिकल 370 इतिहास हो जाएगा, ये उन्होंने कल्पना नहीं की थी। जो काम दशकों तक नहीं हुए, वो भाजपा कैसे कर रही है, वो इन्हें पच नहीं रहा है। आज ये इतने हताश हो गए हैं कि खुले आम कहने लगे हैं ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’।

मां भारती को बुराइयों से मुक्ति दिलाने के लिए कठोर होना पड़ रहा-पीएम

पीएम ने कहा कि हनुमानजी सब कुछ कर सकते हैं, सबके लिए करते हैं, लेकिन अपने लिए कुछ नहीं करते। यही भाजपा की प्रेरणा है। एक और प्रेरणा है। जब हनुमान जी को राक्षसों का सामना करना पड़ा था तो वो उतने ही कठोर भी हो गए थे। इसी प्रकार से जब भ्रष्टाचार की बात आती है, जब परिवारवाद की बात आती है, कानून व्यवस्था की बात आती है तो भाजपा उतनी ही संकल्पबद्ध हो जाती है। मां भारती को इन बुराइयों से मुक्ति दिलाने के लिए कठोर होना पड़े तो कठोर हों।

आरबीआई ने दी बड़ी राहत, रेपो रेट में इस बार कोई बढ़ोतरी नहीं, लगातार 6 झटकों के बाद थमी ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी की रफ्तार

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर ने आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए पॉलिसी रेट में इजाफा नहीं किया है। आरबीआई एमपीसी ने रेपो रेट को 6.50 फीसदी पर ही रखा है। इस फैसले के बाद आम लोगों की ईएमआई में इजाफा नहीं होगा। वैसे बीते एक साल में आरबीआई रेपो रेट में 2.50 फीसदी का इजाफा कर चुका है।

तीन दिन से चल रही आरबीआई की माॅनिटरी पाॅलिसी कमिटी के बैठक के बाद बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट को स्थिर रखने का ऐलान किया है। लगातार छह बार रेपो रेट बढ़ाने के बाद आरबीआई ने नए वित्तीय की पहली एमपीसी बैठक में इसे स्थिर रखा है। 

शक्तिकांत दास ने बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था में जारी पुनरुद्धार को बरकरार रखने के लिए हमने नीतिगत दर को यथावत रखने का फैसला किया है। लेकिन जरूरत पड़ने पर हम स्थिति के हिसाब से अगला कदम उठाएंगे। एमपीसी ने आम सहमति से इसे फिलहाल 6.50 फीसदी पर बनाए रखा है।

आरबीआई मई 2022 से अब तक यानी एक साल में ब्याज दरों में 2.50 फीसदी का इजाफा कर चुका है। आंकड़ों के अनुसार मई 2022 में पॉलिसी रेट में 40 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया गया था। उसके बाद लगातार तीन बार आरबीआई ने 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी। उसके बाद दिसंबर 2022 में 0.35 फीसदी की बढ़ोतरी कर आरबीआई अपने स्टांस को थोड़ा कम किया। नवंबर और दिसंबर में महंगाई भी 6 फीसदी से कम थी। जनवरी में महंगाई ने बाउंस बैक किया और फरवरी में 0.25 फीसदी का इजाफा ब्याज दरों में करना पड़ा। वैसे फरवरी में भी महंगाई 6 फीसदी से ज्यादा बनी हुई है। मार्च में महंगाई 5.50 फीसदी पर आने की उम्मीद जताई जा रही है।

केंद्रीय बैंक के इस फैसले के बाद लोन लेने वाले ग्राहकों की ईएमआई नहीं बढ़ेगी। आरबीआई के रेपो रेट को बरकरार रखने से मिडिल क्लास और छोटे कारोबारियों की जेब पर ईएमआई का बोझ इस बार नहीं बढ़ने वाला है। इसका असर यह होगा कि होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन महंगे नहीं होंगे।

फिर डरा रही कोरोना की रफ्तार, बीते 24 घंटे में 5 हजार से ज्यादा संक्रमण के नए मामले

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देश में कोरोना ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। पिछले कुछ दिनों से लगातार संक्रमण के मामलों में बड़ा उछाल देखा जा रहा है। पिछले 24 घंटों में देश में कोरोना के पांच हजार से ज्यादा यानी 5,335 मामले सामने आए हैं।इससे एक दिन पहले 163 दिन बाद चार हजार से ज्यादा लोग एक दिन में कोरोना संक्रमित मिले थे। 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में 5 हजार 335 नए मामले दर्ज हुए हैं। वहीं, ये आंकड़ा कल से 20 फीसदी ज्यादा है जिसका सीधा अर्थ ये है कि केस तेजी से अपनी रफ्तार पकड़ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 24 घंटे में दर्ज होने वाला ये आंकड़ा पिछले 6 महीनों में सबसे ज्यादा है।वहीं, इस दौरान 6 लोगों ने दम तोड़ा है। वहीं, इन नए मामलों के दर्ज होने के बाद देश में अह एक्टिव केस की संख्या बढ़कर 25 हजार 587 हो गई है। कोरोना के अधिकतर मामले दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक में दिख रहे हैं।

वहीं, कर्नाटक में दो, महाराष्ट्र में 2, पंजाब में एक, केरल में एक शख्स की मौत हुई है. देश में इस वक्त डेली पॉजिटिविटी रेट 3.32 प्रतिशत पर है। पिछले 24 घंटे में 2826 मरीज कोरोना से ठीक हुए हैं. इस अवधि के दौरान 1993 लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई।

कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों को लेकर केंद्र सरकार के इम्पॉवर्ड ग्रुप एक की बैठक में इन्साकॉग ने कहा कि देश में 38 फीसदी संक्रमण प्रसार के पीछे वायरस का नया स्वरूप जिम्मेदार है। इन्साकॉग ने बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय और नीति आयोग के शीर्ष अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपी गई। इसमें बताया गया कि ओमिक्रॉन और इसके उप स्वरूप देश में प्रमुख रूप से बने हुए हैं। इसके चलते संक्रमण दर में इजाफा हुआ है विशेष रूप से देश के पश्चिमी, दक्षिणी और उत्तरी भागों में देखा गया है। 

इन्साकॉग के मुताबिक, वायरस का एक नया स्वरूप एक्सबीबी.1.16 को भारत के विभिन्न हिस्सों में देखा गया है, जो आज तक संक्रमण के 38.2% के लिए जिम्मेदार है। बीते मार्च माह के तीसरे सप्ताह तक एकत्र नमूनों में एक्सबीबी स्वरूप सबसे अधिक मिला है। हालांकि, देश के कुछ हिस्सों में बीए.2.10 और बीए.2.75 उप स्वरूप का भी पता चला जो एक्सबीबी की तरह ओमिक्रॉन स्वरूप से निकले हैं।

बीजेपी का स्थापना दिवस आज, नड्डा ने ध्वजारोहण कर की कार्यक्रम की शुरूआत, थोड़ी देर में पीएम करेगें संबोधित

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आज अपना स्थापना दिवस मना रही है। बीजेपी की आधिकारिक रूप से स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई। बीजेपी के 44वां स्थापना दिवस है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए कई मायनों में खास माना जा रहा है। अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री पार्टी कार्यकर्ताओं को कुछ चुनावी मंत्र भी दे सकते हैं।

बीजेपी के स्थापना दिवस के मौके पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भाजपा मुख्यालय में पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर ध्वजारोहण किया। थोड़ी देर में प्रधानमंत्री मोदी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे।पीएम मोदी के संबोधन के लिए बीजेपी नेताओं ने खास तैयारियां की है. पीएम के संबोधन का देशभर में 10 लाख से ज्यादा स्थानों पर लाइव टेलिकास्ट किया जाएगा।

स्थापना दिवस के मौके पर एक सप्ताह के लिए विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें सेवा को प्रमुखता दी जाएगी। पार्टी इस दौरान केंद्र सरकार के द्वारा जारी की गई कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाएगी। लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए पार्टी अभी तक डिजिटल फॉर्मेट पर ज्यादा जोर देती थी, लेकिन इस बार वह पुराने तरीकों को भी खूब इस्तेमाल करेगी। इसमें वॉल राइटिंग करना और पोस्टर अभियान प्रमुख होंगे।

14 विपक्षी दलों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से इनकार

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सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के नेतृत्व में 14 विपक्षी दलों द्वारा दायर एक याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया है।कांग्रेस सहित 14 राजनीतिक दलों की ओर से केंद्रीय जांच एजेंसियों के मनमाने इस्तेमाल का आरोप लगाने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई योग्य नहीं माना।याचिका में विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के मनमाने उपयोग का आरोप लगाया गया था। याचिका में गिरफ्तारी, रिमांड और जमानत जैसे मामलों को नियंत्रित करने वाले दिशा-निर्देशों का नया सेट जारी करने की मांग की गई थी।

विपक्षी दलों की याचिका पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूर्ण ने कहा कि ये मामला सुनवाई योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि ये सामान्य सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।सीजेआई ने कहा कि राजनेता आम इंसान से बढ़कर नहीं है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि हम इस मामले में कोई आदेश नहीं दे सकते। इसके बाद 14 राजनीतिक दलों से सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस ले ली।प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की. न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला भी पीठ का हिस्सा थे।

विपक्ष की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि विपक्ष के नेताओं को 2014 के बाद से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 885 अभियोजन शिकायतें दर्ज की गई हैं। सजा सिर्फ 23 को मिली। 2004 से 2014 तक, लगभग आधी-आधी जांच हुई है।अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि 2013-14 से 2021-22 तक सीबीआई और ईडी के मामलों में 600 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ईडी की ओर से 121 राजनीतिक नेताओं की जांच की गई है, जिनमें से 95 प्रतिशत नेता विपक्षी दलों से हैं। सीबीआई की 124 जांचों में से 95 प्रतिशत से अधिक विपक्षी दलों से हैं। सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राजनीतिक विरोध की वैधता पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा है।

इसपर सीजेआई ने सिंघवी से पूछा कि क्या हम इन आंकड़ों की वजह से कह सकते हैं कि कोई जांच या कोई मुकदमा नहीं होना चाहिए? क्या नेताओं को इससे अलग रखा जा सकता है? सीजेआई ने कहा कि भारत में सजा की दर बहुत कम है। सीजेआई ने कहा कि आप कहते हैं कि ईडी अपराध या संदेह की गंभीरता के बावजूद गिरफ्तार नहीं कर सकता। हम ऐसा कैसे कर सकते हैं। अपराध की गंभीरता को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है? 

शीर्ष कोर्ट ने कहा कि किसी खास मामले के तथ्यों के बिना आम दिशा-निर्देश तय करना संभव नहीं है। शीर्ष कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाले राजनीतिक दलों से कहा कि जब आपके पास कोई व्यक्तिगत आपराधिक मामला हो या कई मामले हों तो हमारे पास वापस आएं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और याचिका को वापस लेने की अनुमति दी।

कम नहीं हो रही सिसोदिया की मुश्किलें, कोर्ट ने फिर बढ़ाई न्यायिक हिरासत, सीबीआई के बाद ईडी केस में भी 17 अप्रैल तक जेल

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दिल्ली शराब घोटाले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत एक बार फिर बढ़ा दी है।कोर्ट ने उनकी हिरासत 17 अप्रैल तक बढ़ाई है।ईडी द्वारा दर्ज मामले में आज सिसोदिया की न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद उन्हें राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया।

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सिसोदिया की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता विवेक जैन ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है। जहां तक रिश्वत लेने का मामला है तो सिसोदिया व उनके परिवार के किसी सदस्य के खाते में कोई पैसा नहीं आया है। यह नीति कई विभागों के साथ उपराज्यपाल के पास और हर स्तर पर मंजूर हुई। विवेक जैन ने कहा कि न तो कोई आरोप है और न ही ऐसा साक्ष्य है कि सिसोदिया ने रुपये लिए हैं। इतना ही नहीं नीति के लागू होने के बाद सरकार को बीते दस सालों में सबसे ज्यादा राजस्व मिला।विवेक जैन ने कहा कि ऐसी कोई सामग्री नहीं पेश गई कि मनी लांड्रिंग अपराध करने में विजय नायर सिसोदिया के प्रतिनिधि थे। ऐसा भी नहीं है कि सिसोदिया ने किसी को बोला है कि ये नियम छोड़ दें या इसे लाइसेंस दे दें। विवेक जैन ने कहा कि अभियोजन पक्ष का आरोप है कि मैंने कैबिनेट फाइल से छेड़छाड़ की, लेकिन ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि इस तरह का नोट कैबिनेट के पास गया था।

वहीं, ईडी के वकील ने कहा कि हम ताजा सबूतों को जुटाने में लगे हुए हैं। अब भी इस मामले में कुछ महत्वपूर्ण सुबूत हैं जो सामने नहीं आए हैं।दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने सिसोदिया की जमानत पर बहस के लिए 12 अप्रैल की तारीख तय की है।

इससे पहले भी राउज एवेन्यू कोर्ट ने ही सीबीआई मामले में भी दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 17 अप्रैल 2023 तक के लिए बढ़ा दी थी। मनीष सिसोदिया रद्द हो चुकी आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं से संबंधित मामले में जेल में हैं। बता दें कि इससे पहले दिल्ली की अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच की जा रही आबकारी नीति मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी। राउज एवेन्यू कोर्ट ने अब सिसोदिया को 17 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

अमेरिका ने फिर दिखाई दोस्ती, अरुणाचल प्रदेश को बताया भारत का अभिन्न अंग, चीन को लगाई लताड़

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अमेरिका ने कहा है कि वह अरुणाचल प्रदेश को भारत के अभिन्न अंग के रूप में मान्यता देता है और क्षेत्रीय दावों के तहत स्थानीय इलाकों का नाम बदलने के किसी भी एक तरफा प्रयास का कड़ा विरोध करता है। अमेरिका की ये प्रतिक्रिया उस वक्त आई है, जब चीन ने रविवार को अरुणाचल प्रदेश के 11 स्थानों के मानकीकृत नाम जारी किए थे।

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व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका भारतीय क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश पर दावा करने के चीन के प्रयासों का "दृढ़ता से विरोध" करता है। यह हम पर और भारतीय क्षेत्र पर चीनी दावे का एक और प्रयास है। इसलिए, जैसा कि आप जानते हैं अमेरिका ने लंबे समय से उस क्षेत्र को मान्यता दी है और हम इन इलाकों का नाम बदलकर क्षेत्र के दावे को आगे बढ़ाने के किसी भी एकतरफा प्रयास का कड़ा विरोध करते हैं।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव काराइन जीन-पियरे सख्त लहजे में कहा कि अमेरिका बहुत पहले ही अरुणाचल को भारत का हिस्सा होने की मान्यता दे चुका है। अब इसमें दखल देना चीन बंद करे। चीन ने अरुणाचल के तवांग में जब घुसपैठ की कोशिश की उस वक्त भी अमेरिका ने लताड़ लगाई थी। 

बता दें किबीजिंग ने बड़ी चालाकी से अरुणाचल प्रदेश के 11 स्थानों के नाम बदल दिए। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की कैबिनेट के स्टेट काउंसिल द्वारा जारी भौगोलिक नामों के नियमों के अनुसार अरुणाचल प्रदेश में 11 स्थानों के नाम चीनी अक्षरों, तिब्बती और पिनयिन भाषाओं में जारी किए हैं। मंत्रालय ने रविवार को 11 स्थानों के नामों की घोषणा की और दो आवासीय क्षेत्रों, पांच पर्वत चोटियों, दो नदियों और दो अन्य क्षेत्रों सहित सटीक निर्देशांक भी दिए।

हनुमान जयंती पर गृह मंत्रालय ने राज्यों को किया अलर्ट, कानून व्यवस्था को लेकर दिए सख्त निर्देश

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रामनवमी के मौके पर देश में कई हिस्सों में हिंसा भड़क गई थी। रामनवमी पर हुई हिंसा को देखते हुए केंद्र सरकार अलर्ट हो गई है। अब केंद्र ने हनुमान जयंती के मद्दनेजर सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था एवं शांति सुनिश्चित करने और समाज में साम्प्रदायिक सद्भाव को बाधित करने की आशंका वाले कारकों पर नजर रखने का बुधवार को निर्देश दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले सप्ताह रामनवमी के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मद्देनजर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह एडवाइजरी जारी की है।

हनुमान जयंती 6 अप्रैल को मनाई जाएगी। इससे पहले गृह मंत्रालय ने बुधवार को हनुमान जयंती की तैयारी के मद्देनजर सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर अलर्ट रहने को कहा है। गृह मंत्रालय ने सरकारों को कानून और व्यवस्था बनाए रखने, त्योहार का शांतिपूर्ण पालन करने और समाज में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने वाले किसी भी कारक की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। गृह मंत्रालय ने राज्यों से कहा कि वह ऐसे हर तत्व पर नजर रखे जिसके सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की आशंका हो सकती है।

दरअसल, रामनवमी पर बिहार और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में हिंसा के बाद से केंद्र सरकार पहले से ही अलर्ट मोड पर है। इसलिए पहले ही सभी राज्यों को त्योहार के दौरान कड़ी निगरानी के निर्देश दे दिए गए हैं।

वहीं कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को हनुमान जयंती समारोहों के दौरान शांति बनाए रखने में राज्य पुलिस की मदद के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की अपील करने का बुधवार को निर्देश दिया।हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार से कहा कि आप केंद्र सरकार से फोर्स मांगिए। अगर राज्य में पुलिस बल पर्याप्त नहीं है तो आप पैरामिलिट्री फोर्स की मदद ले सकते हैं। आखिरकार हम अपने नागरिकों की सुरक्षा चाहते हैं।

किताबों से मुगलों का चैप्टर हटाए जाने पर एनसीईआरटी निदेशक की सफाई, बताई वजह

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12वीं कक्षा के इतिहास समेत कई विषयों की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव कर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कुछ चैप्टर हटाए हैं, जिन पर विवाद हो गया है। बढ़ते विवाद के बीच, एनसीईआरटी ने सफाई दी है। 

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एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, ‘यह झूठ है। मुगलों के इतिहास से जुड़े अध्यायों को हटाया नहीं गया है। पिछले साल कोविड के कारण हर जगह छात्रों पर दबाव था। कोविड महामारी के बाद पिछले साल हर विषय में एक्सपर्ट कमिटी बनाई गई थी ताकि बच्चों पर पाठ्यक्रम का बोझ कम किया जा सके। एक्सपर्ट कमिटी ने हर विषय के कंटेंट को देखा और उसके बाद तय किया गया कि कौन-कौन से चैप्टर हटाए जाने हैं। 

बोझ कम करने के लिए हटाए चैप्टर- दिनेश सकलानी

दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा कि विशेषज्ञ समितियों ने कक्षा 6-12 की पुस्तकों की जांच की और सुझाव दिया कि यदि इस अध्याय को हटा दिया जाए तो इससे बच्चों के ज्ञान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और एक अनावश्यक बोझ हट जाएगा। इस मुद्दे पर बहस अनावश्यक है। जो नहीं जानते वे पाठ्यपुस्तकों की जांच कर सकते हैं।

एनसीईआरटी की तरफ से किसी तरह का भेदभाव नहीं- दिनेश सकलानी

एनसीईआरटी के निदेशक ने कहा कि यह सब शैक्षणिक प्रक्रिया के तहत हुआ है। एनसीईआरटी की तरफ से किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि केवल मुगल इतिहास की ही बात क्यों की जा रही है, गणित, विज्ञान, भूगोल समेत सभी विषयों में कंटेंट कम किया गया है। जहां तक मुगल इतिहास के बारे में बात की जा रही है तो छात्र अगर एक कक्षा में पढ़ते हैं तो उसी बारे में दूसरी कक्षा में पढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है।

अभी भी छात्र मुगलों के बारे में पढ़ रहे-दिनेश सकलानी

एनसीईआरटी निदेशक प्रोफेसर सकलानी ने कहा कि अभी भी छात्र मुगलों के बारे में पढ़ रहे हैं। कक्षा 7 में भी चैप्टर है और कक्षा 12 में भी है। ऐसे में यह कहना कि पूरे मुगल इतिहास को सिलेबस से हटा दिया गया है, यह ठीक नहीं है। एनसीईआरटी एक स्वतंत्र बॉडी है और बिना किसी दबाव के काम करती है।

इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि 12वीं कक्षा की इतिहास की पाठ्यपुस्तकों के अपने संशोधित पाठ्यक्रम में, एनसीईआरटी ने मुगल साम्राज्य पर कुछ अध्यायों को हटा दिया है. ‘भारतीय इतिहास के विषय-भाग II’, ‘राजाओं और इतिहास’ से संबंधित अध्याय; मुगल दरबार (16वीं और 17वीं शताब्दी)’ को हटा दिया गया है। इसके अलावा 11वीं की किताब से इस्लाम का उदय, संस्कृतियों में टकराव, औद्योगिक क्रांति, समय की शुरुआत पाठ हटाए गए हैं।

बंगाल हिंसा को लेकर हाईकोर्ट सख्त, ममता सरकार का दिया निर्देश, कहा-पुलिस से न संभले तो पैरा मिलिट्री तैनात करें

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रामनवमी के जुलूस के दौरान पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों में दो गुटों के बीच हुई सांप्रदायिक हिंसा को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त है। रामनवमी पर हिंसा के बाद हनुमान जयंती की शोभायात्रा को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया है। ममता बनर्जी की सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कानून और व्यवस्था को बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात करने को कहा है।

धारा 144 वाले इलाकों में जुलूस नहीं निकलने का निर्देश

हाईकोर्ट ने इस मामले में दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए कहा, ममता सरकार ये सुनिश्चित करें कि हनुमान जयंती के दौरान निकाले जाने वाले जुलूस में कानून और व्यवस्था की ऐसी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। जिन इलाकों में सरकार धारा 144 लगाती है उन इलाकों से किसी भी कीमत में जुलूस नहीं निकलना चाहिए। अगर व्यवस्था को संभालने में राज्य सरकार सक्षम नहीं है तो उन इलाकों में केंद्रीय बलों की तैनाती की जानी चाहिए।

पश्चिम बंगाल में पिछले छह दिन से चल रही हिंसक घटनाओं पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ तौर पर कहा है कि राज्य सरकार केंद्र सरकार को तत्काल कानून और सुरक्षा व्यवस्था कायम रखने के लिए सेंट्रल फोर्सेज की मांग करे और फोर्स मिलते ही पूरे बंगाल के उन सभी इलाकों में तैनात करें, जहां हिंसा की आशंका है। हालांकि कोर्ट ने सेंट्रल फोर्सेज की तैनाती राज्य पुलिस के सहयोगी तौर पर करने को कहा है।

बीते दिनों रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल के हुगली और हावड़ा जिलों में हिंसा हुई थी। रामनवमी पर हावड़ा के बाद हुगली में भी हिंसा हुई थी। इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता सरकार से रिपोर्ट तलब की थी।