सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मीडिया पर नहीं लगा सकते रोक, अडानी मामले में रिपोर्टिंग पर पाबंदी की मांग वाली याचिका खारिज

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सुप्रीम कोर्ट ने अडानी ग्रुप को लेकर आई हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से जुड़ी मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें अदालत का फैसला आने तक अडानी-हिंडनबर्ग मामले पर मीडिया की रिपोर्टिंग पर रोक लगाने की मांग की गयी थी।

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा, 'हम मीडिया को कोई निषेधाज्ञा जारी नहीं करने जा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को हिंडनबर्ग रिसर्च के धोखाधड़ी के आरोपों से अडानी समूह के शेयरों में जारी गिरावट पर जनहित याचिकाओं के एक बैच पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को याचिकाकर्ताओं में से एक के सुझाव और जनहित याचिकाओं के एक बैच में फोर्ब्स द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेने से इनकार कर दिया था। 

यही नहीं, कोर्ट ने 17 फरवरी को शेयर बाजार के लिए रेगुलेटरी उपायों को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों के एक प्रस्तावित पैनल पर केंद्र के सुझाव को सीलबंद लिफाफे में स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। 17 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान कहा था कि अदालत अपने दम पर एक समिति नियुक्त करेगी, क्योंकि सरकार के सीलबंद कवर सुझाव को स्वीकार करने से यह आभास हो सकता है कि यह सरकार की तरफ से नियुक्त की गई समिति है। इसलिए कोर्ट ने सीलबंद कवर में दिए गए सुझाव को भी खारिज कर दिया था।

कांग्रेस में नहीं होगा सीडब्ल्यूसी का चुनाव, पार्टी अध्यक्ष को मिलेगा सदस्यों को नॉमिनेट करने का अधिकार, अधिवेशन के पहले दिन बड़ा फैसला

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कांग्रेस का 85वां महाअधिवेशन आयोजित किया गया है। अधिवेशन में हिस्सा लेने के लिए देशभर से कांग्रेस के नेता रायपुर पहुंचे हैं।कार्यक्रम की शुरुआत से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से एक पत्र जारी किया गया है। इसमें 85वें राष्ट्रीय अधिवेशन को लेकर खास बातें कहीं गई हैं। 

अधिवेशन के पहले दिन पार्टी ने अहम फैसला ले लिया। पार्टी संचालन समिति की बैठक में यह तय किया गया कि कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के लिए चुनाव नहीं कराया जाएगा। कांग्रेस की ओर से जानकारी दी गई है कि स्टीयरिंग कमेटी में खुलकर बातचीत हुई। सभी सदस्यों ने अपनी बात रखी। सर्वसम्मति से स्टीयरिंग कमेटी ने यह तय किया है कि कांग्रेस अध्यक्ष को सीडब्ल्यूसी के सदस्यों को नॉमिनेट करने का अधिकार दिया जाए।

खड़गे ने की खुलकर अपनी बात रखने की अपील

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महाधिवेशन शुरू होने के बाद शुक्रवार को पार्टी की संचालन समिति के सदस्यों से कहा कि वे कांग्रेस कार्य समिति के चुनाव के संदर्भ में खुलकर अपनी बात रखें और सामूहिक रूप से फैसला करें। उन्होंने कहा, कार्य समिति के चुनाव के संदर्भ में सब खुलकर अपनी बात रखिए और सामूहिक तौर पर फैसला लीजिए, आप सबकी जो राय बनेगी, वो मेरी और सबकी राय होगी।

तीन नेताओं ने की सीडब्ल्यूसी चुनाव करवाने की मांग

जानकारी के मुताबिक संचालन समिति की बैठक में तीन नेताओं ने सीडब्ल्यूसी चुनाव करवाने की मांग की। इसमें दिग्विजय सिंह, अजय माकन और अभिषेक मनु सिंघवी शामिल रहे। सिंघवी ने कहा कि अभी कोई दिक्कत है तो 2024 लोक सभा चुनाव के बाद सीडब्ल्यूसी चुनाव कराए जाएं।

खरगे ने क्या कहा?

संचालन समिति की बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि ये अधिवेशन इस लिहाज से खास है कि आज से करीब 100 साल पहले 1924 में महात्मा गांधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए थे। तब यह महाधिवेशन मेरे गृह राज्य कनार्टक में बेलगांव में हुआ था। उन्होंने कम समय में कांग्रेस को गरीब कमजोर तबकों, गांव देहात और नौजवानों को एक साथ जोड़कर एक आंदोलन बना दिया था। 100 साल बाद उसी संकल्प की जरूरत है। ये उनके प्रति हमारी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।

खड़गे ने कहा, कांग्रेस के हर महाधिवेशन में कुछ अहम फैसले हुए हैं। जिससे हमारा संगठन आगे बढ़ा। कुछ अधिवेशन मील के पत्थर बने। राहुल गांधी ने कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा से देश भर में जो ऊर्जा भरी और महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक मुद्दों पर जिस तरह जागरूकता फैलाई है, उस जोश को हमें बनाए रखना है।

बैठक में मोदी सरकार पर निशाना साधा। खरगे ने कहा, महाधिवेशन विधानसभा चुनावों और उसके बाद 2024 के आम चुनाव की पृष्ठभूमि में हो रहा है, जो एक बड़ी चुनौती भी है और एक बड़ा अवसर भी है। खरगे ने कहा कि आज देश के सामने कई गंभीर चुनौतियां खड़ी हैं, लोकतंत्र और संविधान पर खतरा मंडरा रहा है, संसदीय संस्थाएं भी गंभीर संकट से जूझ रही हैं।

तिरुवनंतपुरम में एअर इंडिया फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग, 182 यात्री थे सवार

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केरल के कालीकट से सऊदी अरब के दम्मन जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट को तकनीकी खराबी की वजह से डायवर्ट कर दिया गया। फ्लाइट को डायवर्ट किए जाने के बाद तिरुवनंतपुरम हवाईअड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग कराई गई।बताया जा रहा है कि कलीकट से दम्माम जा रही एक फ्लाइट को हाइड्रॉलिक फेल होने की वजह से तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट डायवर्ट किया गया, जिसके बाद यहां आपातकाल का एलान कर दिया गया।

विमान में कुल 182 यात्री सवार थे और सभी के सभी सुरक्षित बताए जा रहे हैं।तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट के अधिकारियों ने कहा कि एटीसी के जरिए सूचना मिलने के बाद विमान के आपात लैंडिंग की पूरी तैयारी कर ली गई थी। विमान सुरक्षित तरीके से लैंड किया। उन्होंने कहा कि सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर उड़ान भरने के बाद विमान के पिछले हिस्से में कुछ दिक्कतें आईं थी जिसकी वजह से विमान का हाइड्रोलिक गियर क्षतिग्रस्त हो गया।

एयरपोर्ट के अधिकारियों ने कहा कि कोझिकोड से उड़ान भरने के करीब डेढ़ घंटे बाद विमान की तिरुवनंतपुरम में इमरजेंसी लैंडिंग हुई है। यात्रियों को दम्माम ले जाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। यात्रियों को एयरपोर्ट पर ही रोका गया है। हादसे को लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया गया है।

*दिल्ली एमसीडी स्टैंडिंग कमेटी के लिए चुनाव जारी, मतदान से पहले बड़ा “खेला”, आप पार्षद बीजेपी में शामिल*

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दिल्ली एमसीडी में स्थाई समिति के सदस्यों के लिए चुनाव हो रहा है। इससे ठीक पहले हो गया बड़ा खेला हो गया है।दिल्ली नगर निगम में बवाना से पार्षद पवन सेहरासत आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका देते हुए बीजेपी में शामिल हो गए हैं।उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आप को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन करने का एलान किया।

आप पर पवन सहरावत ने लगाए बड़े आरोप

आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में आए पार्षद पवन सहरावत ने बड़ा आरोप लगाया है। सहरावत ने कहा कि आम आदमी पार्टी में हो रहे भ्रष्टाचार की वजह से मैंने पार्टी छोड़ी है।उन्होंने, कहा कि आम आदमी पार्टी में सदन में हंगामा करने को दबाव बनाया जाता रहा है। मेयर डिप्टी और मेयर चुनाव के बाद उनके इशारे पर पार्षदों को हंगामा करने को कहा गया था, जिसकी वजह से मैंने पार्टी छोड़ी है और भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है।उन्होंने कहा कि कल सदन में हुआ वो दुर्भाग्यपूर्ण है।

केजरीवाल सरकार में भ्रष्टाचार देखकर दम घुटने लगा है- सहरावत

पवन सहरावत ने कहा, अरविंद केजरीवाल की सरकार में जो भ्रष्टाचार होते रहे हैं उन्हें देखकर हमारा इस पार्टी में दम घुटने लगा है। चुनाव होने के बाद हमारे ऊपर पूरा दबाव बना रहा कि आप पूरे हाउस में हंगामा मचा कर रखो ताकि अभी चुनाव नहीं हों। मेयर तो हमारा ही बनना है आप पूरा हल्ला मचा कर रखो।

बीजेपी ने किया सहरावत का स्वागत

इधर बीजेपी दिल्ली ने भी अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “केजरीवाल को लगा बड़ा झटका, आप की गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार से परेशान, बवाना वार्ड-30 से आम आदमी पार्टी के पार्षद श्री पवन सहरावत ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। भाजपा में शामिल होने के तुरंत बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, बवाना के पूर्व आप पार्षद पवन सहरावत ने कहा कि वह आप की गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं।

रूस-यूक्रेन के बीच एक साल से जारी है जंग, क्यों युद्ध खत्म नहीं कर रहे पुतिन?

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रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े युद्ध को आज एक साल पूरा हो गया। 24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर हमला बोल कर जंग की शुरूआत की थी। उस वक्त दुनियाभर के एक्सपर्ट्स ने दावा किया कि रूस चंद दिनों में यूक्रेन पर कब्जा कर लेगा। कईयों ने तो यहां तक कहा कि इसमें मुश्किल से 24 से 48 घंटे का समय लगेगा। लेकिन किसे पता था यूक्रेन, महाशक्तिशाली रूस का एक साल तक सामना कर लेगा।

न तो रूस जीता न ही यूक्रेन ने हार मानी

अब जंग दूसरे साल में प्रवेश कर चुकी है। इसके बावजूद न तो रूस युद्ध जीत पाया और न ही यूक्रेन ने हार मानी। ना ही अभी तक दोनों देशों के बीच किसी भी मुद्दे को लेकर सहमति नहीं बनी है। ऐसे में कह सकते हैं कि जंग अभी लंबा खिंच सकता है। अब सवाल ये है कि रूस के मुकाबले में कहीं भी नहीं आने वाले यूक्रेन के लिए युद्ध को जारी रखना कैसे संभव हो रहा है? 

यूक्रेन के लिए रूस का सामना करना कैसे हुआ आसान?

तो जान लें कि इस युद्ध में अमेरिका समेत दुनिया के कई बड़े देश यूक्रेन की मदद कर रहे हैं। रूस के खिलाफ यूक्रेन की मदद के लिए पश्चिमी देश आगे आए। युद्ध के पहले महीने से ही तुर्की को छोड़ नाटो के हर एक देश ने यूक्रेन को हथियार सप्लाई किए हैं। तुर्की ने युद्ध की शुरुआत के पहले ही यूक्रेन को अपना बायरकटार टीबी-2 ड्रोन बेचा था। इस ड्र्रोन ने रूस को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, लिथुआनिया, लातविया और नॉर्वे ने यूक्रेन को भारी मात्रा में हथियार दिए हैं। अमेरिका ने तो यूक्रेनी सैनिकों को अपने कई वेपन सिस्टम चलाने की ट्रेनिंग भी मुहैया करवाई है। इन्हीं हथियारों के दम पर यूक्रेनी सेना ने रूस को करारी चोट पहुंचाई है।

यूक्रेन पर कब्जा क्यों नहीं कर रहा रूस?

रूस ने भले ही इस युद्ध में काफी नुकसान झेला है, लेकिन वो इतना भी कमजोर नहीं हुआ है कि यूक्रेन पर जीत ना हासिल कर सके। ऐसे में अब सवाल ये बन रहा है कि बीते एक साल से चले रहे युद्ध के बाद भी रूस अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सका। दरअसल, रूस का लक्ष्य यूक्रेन पर पूर्ण रूप से कब्जे की है ही नहीं। यूक्रेन पर हमले की शुरूआत करते वक्त ही पुतिन ने साफ शब्दों में कहा था कि उनका लक्ष्य यूक्रेन पर कब्जा करना नहीं है। उन्होंने कहा कि रूस, यूक्रेन से नाजीवादी ताकतों को उखाड़ फेकेंगा और खुद की रक्षा करेगा। रूस का लक्ष्य डोनबास क्षेत्र से यूक्रेनी सेना को खदेड़ना और यूक्रेन में सत्ता परिवर्तन करना है। 

हाथियारों के साथ दिमाग से भी जंग लड़ रहे पुतिन

रूस चाहे तो यूक्रेन के खिलाफ अपनी वायु सेना, थल सेना या नौसेना की पूरी ताकत का इस्तेमाल कर जंग को नतीजों तक पहुंचा सकता है। रूस के पास ऐसी-ऐसी परमाणु मिसाइलें हैं, जो सेंकेंड में युद्ध को खत्म कर सकती हैं। इतना ही नहीं, रूस गैर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर यूक्रेन के शीर्ष नेतृत्व को मार सकता है। इसके बावजूद रूस ऐसा कोई कदम नहीं उठा रहा। जानकारों का मानना है कि पुतिन की चाल यूक्रेन युद्ध की आड़ में नाटो देशों को बर्बाद करने की है। पुतिन नहीं चाहते कि रूस-यूक्रेन युद्ध जल्द से जल्द खत्म हो जाए। ऐसे में वह युद्ध को लंबा खींचने के लिए सैन्य कार्रवाईयों को काफी धीमी रफ्तार से अंजाम दिलवा रहे हैं। पुतिन की चाहत है कि पश्चिमी देश लंबे समय तक यूक्रेन युद्ध में उलझे रहें और अपने संसाधनों का इस्तेमाल करें। इससे इन देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। रूस-यूक्रेन युद्ध से तेल और गैस के दाम में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसका सबसे बड़ा नुकसान यूरोपीय देशों और गरीब विकसित देशों को हुआ है। ऐसे में रूस ओपेक प्लस देशों के साथ मिलकर तेल के उत्पादन को न बढ़ाने का फैसला किया है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर पाकिस्तान की भारी बेइज्जती, आतंकियों को ठिकाना देने के मामले में भारत ने लताड़ा

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाई है। भारत ने आतंकियों को पनाह देने के मामले में पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई है। भारत ने कहा है कि पाकिस्‍तान आज भी आतंकियो के लिए सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है। भारत ने गुरुवार, 23 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में पाकिस्तान के खिलाफ अपने राइट टू रिप्‍लाई का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान को उसके हकीकत से वाकिफ से कराया।

भारत ने दुनिया को दी पाकिस्तान का ट्रैक रिकॉर्ड देखने की सलाह

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने अपने राइट टू रिप्‍लाई का इस्तेमाल करते हुए दुनिया को पाकिस्तान का ट्रैक रिकॉर्ड देखने की सलाह दी है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के ग्यारहवें आपातकालीन विशेष सत्र में भारतीय काउंसलर प्रतीक माथुर ने कहा, पाकिस्तान को केवल खुद को और अपने पिछले कामों के रिकॉर्ड को एक देश के रूप में देखना है, जो आतंकवादियों को शरण देने के साथ उन्हें सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराता है और ऐसा वो बेखौफ और दुनिया की फिक्र से बेपरवाह होकर करता है। इसके लिए उसे दंडित भी नहीं किया जाता है।

भारत ने इस बार पाक के उकसावे का जवाब नहीं देने का फैसला किया

प्रतीक माथुर ने कहा कि दो दिनों तक विचार विमर्श करने के बाद हर यूएन सदस्‍य जो यहां मौजूद है, उसने तय किया है कि शांति का रास्‍ता सिर्फ तभी संभव है जब अंसतोष और असहमति का हल तलाश जाए। उन्‍होंने पाकिस्तान के अनावश्यक उकसावे को 'अफसोसजनक' बताया। प्रतीक माथुर ने कहा कि मैं इस मंच से यही कहूंगा कि भारत ने इस बार पाकिस्‍तान के उकसावे का जवाब नहीं देने का फैसला किया है। हमारी सलाह पाकिस्‍तानी प्रतिनिधिदल को बस इतनी ही है कि जिस तरह से हमने राइट टू रिप्‍लाई का प्रयोग पहले किया है, वह भी इसका प्रयोग कर सकता है।

प्रतीक माथुर ने कल गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के दूत मुनीर अकरम की ओर से संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन पर बुलाए गए आपात विशेष सत्र के दौरान वोट की व्याख्या करते हुए जम्मू-कश्मीर का उल्लेख किए जाने के बाद भारत के राइट टू का रिप्‍लाई प्रयोग किया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन में स्थायी शांति के लिए प्रस्ताव पारित, एक बार फिर भारत ने वोटिंग से बनाई दूरी

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यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर एक साल पूरे हो चुके हैं। इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र महासभा(यूएनजीए) गुरुवार 23 फरवरी को यूक्रेन को लेकर एक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यूएनजीए में यूक्रेन में व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी शांति तक पहुंचने की आवश्यकता पर एक प्रस्ताव पारित किया गया।हालांकि, भारत ने एक बार फिर प्रस्ताव में वोटिंग से दूरी बनाई। वोटिंग से दूरी बनाने वाले देशों में चीन समेत अन्य भी शामिल थे।

भारत-चीन समेत 32 देशों ने बनाई दूरी

यूएनजीए में प्रस्ताव रखा गया कि रूस को तुरंत यूक्रेन में युद्ध को रोककर अपनी सेना को बुला लेना चाहिए। इस प्रस्ताव के समर्थन में और खिलाफ में कई देशों ने वोट किए। यूएनजीए में कुल 193 देश सदस्य हैं। प्रस्ताव के पक्ष में 141 देशों ने, जबकि 7 देशों ने इसके खिलाफ वोट किया। वहीं, भारत और चीन समेत 32 देशों ने वोटिंग से दूरी बनाई।

इन सात देशों में विरोध में किया मतदान

अपने सहयोगियों की मदद से बनाया गया यूक्रेन का यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में 141-7 से पारित हुआ। जिन सात देशों ने वोटिंग के खिलाफ मतदान किया, वे बेलारूस, माली, निकारागुआ, रूस, सीरिया, उत्तर कोरिया और इरिट्रिया थे। रूस के सहयोगी बेलारूस ने इसमें संसोधन का प्रस्ताव दिया था जो बुरी तरह से गिर गया। हालांकि, यह रूस के खिलाफ पिछले पांच प्रस्तावों में उच्चतम वोटिंग नहीं है जो बीते साल 24 फरवरी, 2022 को यूक्रेन हमले के बाद से उसके खिलाफ लाए गए हैं।इसके पहले अक्टूबर में लाए गए प्रस्ताव में रूस के अवैध कब्जे के खिलाफ 143 वोट के समर्थन से प्रस्ताव पास हुआ था। 

यूक्रेन ने क्या कहा?

महासभा ने यूक्रेन और उसके समर्थकों द्वारा प्रस्तावित मसौदा प्रस्ताव को अपनाया, जिसका शीर्षक था ‘संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांत के अंतर्गत यूक्रेन में व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी शांति का आधार। यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने कहा कि यह प्रस्ताव इस बात का सबूत है कि केवल पश्चिम ही नहीं है जो उनके देश का समर्थन करता है। कुलेबा ने कहा, समर्थन बहुत व्यापक है और यह मजबूत होना जारी रहेगा। यह वोट इस तर्क को खारिज करता है कि ग्लोबल साउथ यूक्रेन के पक्ष में नहीं खड़ा है क्योंकि लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, एशिया का प्रतिनिधित्व करने वाले कई देशों ने आज पक्ष में मतदान किया।

भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन करता है

वहीं, संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन करता है। उन्होंने कहा कि हम हमेशा संवाद और कूटनीति को ही एकमात्र रास्ता बताते हैं। स्थायी शांति हासिल करने के अपने लक्ष्य तक पहुंचने में इसकी सीमाओं को देखते हुए हम आज के संकल्प के घोषित उद्देश्यों पर ध्यान देते हैं। हम इससे दूर रहने के लिए विवश हैं। उन्होंने कहा कि क्या 1945 के विश्व निर्माण पर आधारित संयुक्त राष्ट्र प्रणाली और यूएनएससी वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए समकालीन चुनौतियों का समाधान करने के लिए अप्रभावी नहीं हो गए हैं?

पहले भी रूस के खिलाफ भारत ने वोटिंग में भाग नहीं लिया

बता दें कि इससे पहले भी रूस के खिलाफ कई अन्य प्रस्ताव पर भारत ने वोटिंग में भाग नहीं लिया है। भारत का हमेशा से कहना है कि इस मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से सुझाया जा सकता है और इसी रास्ते पर दोनों देशों को आगे बढ़ना चाहिए।

कल से शुरू हो रहा कांग्रेस का 85वां महाधिवेशन, विपक्षी एकजुटता पर लिया जा सकता है फैसला

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कांग्रेस का 85वां महाधिवेशन 24 फरवरी से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शुरू हो रहा है। महाधिवेशन में राजनीति, अर्थव्यवस्था समेत कई विषयों पर प्रस्ताव पारित करने और कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के गठन के साथ ही 2024 के लोकसभा चुनाव में व्यापक विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में पार्टी अपना रुख स्पष्ट करेगी।  

चुनाव की बनेगी रणनीति

2023 के अंत तक 9 राज्यों में विधानसभा चुनाव और अगले साल लोकसभा का चुनाव है। ऐसे में कांग्रेस का यह अधिवेशन पार्टी के लिए बेहद खास है। पार्टी का जोर कांग्रेस शासित प्रदेश छत्तीसगढ़, राजस्थान में फिर से जीत की रणनीति पर है। तीन दिनों तक ताबड़तोड़ बैठकें होंगी और मोदी सरकार के खिलाफ किस तरह चुनावी मैदान में उतरा जाए, इसकी व्यापक रणनीति बनाई जाएगी।

अधिवेशन 2024 का मार्गदर्शक होगा- हरीश रावत

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी रायपुर पहुंच गए हैं। रावत ने कहा, कांग्रेस अधिवेशन में तय करेगी कि हम किस रास्ते पर देश को आगे ले जाना चाहते हैं। यह 2024 का मार्गदर्शक होगा। हम सभी लोकतांत्रिक ताकतों को जोड़ेंगे। 2024 में देश में बदलाव होगा और इसका नेतृत्व कांग्रेस और राहुल गांधी करेंगे।

विपक्षी एकजुटता को लेकर चल रही चर्चा के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 21 फरवरी को नगालैंड में कहा कि अगले साल केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई में गठबंधन सरकार बनेगी। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने गत रविवार को कहा था कि इस महाधिवेशन में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में चर्चा की जाएगी एवं आगे का रुख तय किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि कांग्रेस की मौजूदगी के बिना देश में विपक्षी एकता की कोई भी कवायद सफल नहीं हो सकती।

देशभर के 15 हजार से ज्यादा कांग्रसी होंगे शामिल

कांग्रेस के 85वें महाधिवेशन को लेकर कांग्रेस नेताओं का रायपुर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, महासचिव केसी वेणु गोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला रायपुर पहुंच चुके हैं।जबकि 24 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहुंचेंगे। 25 फरवरी को प्रियंका गांधी रायपुर पहुंचेगी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर के 15 हजार से ज्यादा कांग्रसी शामिल होंगे।छत्तीसगढ़ सरकार और प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सभी नेताओं के ठहरने, आने-जाने और सुरक्षा के तमाम इंतजाम कर लिए गए हैं।

खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल के करीबी की गिरफ्तारी के बाद पंजाब में बवाल, थाने पर कब्जा, पुलिस के साथ मारपीट

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पंजाब में खालिस्तान समर्थक नेता अमृतपाल सिंह के समर्थकों ने जमकर बवाल काटा है। 'वारिस पंजाब दे' के प्रमुख अमृतपाल सिंह के करीबी तूफान सिंह की गिरफ्तारी के विरोध में उसके समर्थक सड़कों पर उतर आए। अमृतपाल के समर्थक भारी तादाद में अमृतसर में इकट्ठा हुए और अजनाला पुलिस थाने पर कब्जा कर लिया। हाथों में हथियार और तलवार लेकर भीड़ यहां जुट गई। इस दौरान पुलिस पर पथराव किया गया।अमृतपाल के समर्थकों ने पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ दिया। इस दौरान अमृतपाल के समर्थकों ने कुछ पुलिस कर्मचारियों के साथ बुरी तरह मारपीट भी की। कुछ गाड़ियां भी भीड़ में शामिल लोगों की ओर से तोड़ी गई है।हमले के बाद दबाव में आई पंजाब पुलिस ने आरोपी को रिहा करने का ऐलान कर दिया।

अमृतपाल की पुलिस को धमकी के बाद समर्थकों का बवाल

अमृतपाल सिंह की ओर से अजनाला पुलिस को दी गई धमकी के बाद उसके समर्थकों ने बवाल किया।अमृतपाल ने ही अपने समर्थकों से गुरुवार सुबह 11 बजे अजनाला पहुंचने के लिए कहा था। इसके बाद यहां भीड़ इकट्‌ठा हो गई। माहौल की गंभीरता को भांपते हुए पुलिस भी एक्टिव हो गई और अमृतपाल के पहुंचने से पहले ही उसके समर्थकों को उठाना शुरू कर दिया। पुलिस ने अमृतपाल सिंह के साथी लवप्रीत तूफान को भी गिरफ्तार कर लिया है। इससे माहौल गर्मा गया।

तूफान सिंह को छोड़ने के लिए पुलिस को एक घंटे का अल्टीमेटम

इसके बाद अमृतपाल भी अजनाला थाने में पहुंचा। यहां उसकी एसएसपी सतिंदर सिंह के साथ मीटिंग हुई। जिसके बाद पुलिस को तूफान सिंह को छोड़ने के लिए एक घंटे का अल्टीमेटम दिया। इस दौरान समर्थक थाने के बाहर ही डटे रहे।अमृतपाल सिंह ने कहा- राजनीतिक कारणों से एफआईआर दर्ज की गई है। यदि वे एक घंटे में मामले को रद्द नहीं करते हैं, तो आगे जो कुछ भी होगा उसके लिए हम जिम्मेदार नहीं होंगे।

हंगामे के बाद तूफान को छोड़ रही पुलिस

अमृतपाल की चेतावनी के बाद अमृतसर के पुलिस कमिश्नर जसकरण सिंह का बयान आया। उन्होंने कहा- तूफान को छोड़ा जा रहा है। उसके समर्थकों ने उसकी बेगुनाही के पर्याप्त सबूत दिए हैं। मामले की जांच के लिए SIT गठित की जा रही है। अब यहां जमा लोग शांतिपूर्वक हट जाएंगे।

कौन है अमृतपाल सिंह

दीप सिद्धू के निधन के बाद सितंबर 2022 में अमृतपाल सिंह ने वारिस पंजाब दे की कमान संभाली है। 12वीं की पढ़ाई के बाद 2012 में वो दुबई चला गया था। 29 साल की उम्र में वह वापस लौटा। फरवरी 2022 में दीप सिद्धू की हादसे में मौत हो गई और इसके बाद वारिस पंजाब दे को वही संभाल रहा है। खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह हाल ही में अपने विवादित बयान के बाद सुर्खियों में है।

उत्तराखंड : 15 मार्च को पेश होगा पुष्कर सिंह धामी सरकार का बजट, राज्यपाल के अभिभाषण से होगी सत्र की शुरुआत



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उत्तराखंड के भराड़ीसैंण (गैरसैंण) विधानसभा में शुरू होने जा रहे बजट सत्र के दौरान धामी सरकार 15 मार्च को वित्तीय वर्ष 2023-24 का बजट पेश करेगी। 13 मार्च से सत्र का आगाज राज्यपाल के अभिभाषण से होगा। पिछले दिनों प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में भराड़ीसैंण विधानसभा में बजट सत्र करने का निर्णय लिया था।

अपर सचिव विधायी एवं संसदीय कार्य शमशेर अली ने विधानसभा सत्र का अनंतिम प्रस्ताव जारी कर दिया है। इसके तहत 13 मार्च को राज्यपाल का अभिभाषण के बाद अगले दिन धन्यवाद प्रस्ताव व उस पर चर्चा शुरू होगी। 15 मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित होगा।

उसी दिन वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल बजट प्रस्ताव पेश करेंगे। 16 मार्च को बजट पर चर्चा होगी और विभागवार अनुदान मांगों का प्रस्तुतिकरण, उन पर विचार और मतदान होगा। 17 मार्च को असरकारी कार्य भी होगा। 18 मार्च को विनियोग विधेयक पास होगा।

सत्र के दौरान विधायी एवं संसदीय कार्यों के लिए सभी विभागों में नोडल अधिकारी बनाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में विधायी एवं संसदीय विभाग के ओर से पत्र जारी किया गया है।